115 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, क्रूड-संवेदनशील कंपनियों पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। सोमवार को 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे तेल के दाम के कारण उन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई जो सीधे तौर पर क्रूड ऑयल या उससे जुड़े कच्चे माल पर निर्भर हैं।
सबसे ज्यादा असर एयरलाइन, टायर और पेंट कंपनियों पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में InterGlobe Aviation (इंडिगो), SpiceJet और Asian Paints के शेयरों में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से विमानन कंपनियों के लिए ईंधन लागत काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से एयरलाइन सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली।
एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का हिस्सा काफी बड़ा होता है, इसलिए तेल महंगा होते ही निवेशक इन कंपनियों से दूरी बनाने लगते हैं।
कच्चे तेल से बनने वाले रसायनों पर निर्भर कंपनियों में भी दबाव देखा गया।
पेंट सेक्टर में भी बिकवाली रही।
सुबह करीब 9:25 बजे तक बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली।
NSE पर बाजार की स्थिति भी बेहद कमजोर रही। करीब 2,600 से अधिक शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ लगभग 537 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे।
तेल की कीमतों में यह तेज उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद आया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यही कारण है कि वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई।
Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार कच्चे तेल में आई यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।
इस बीच बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी 20% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो ईंधन और पेट्रोकेमिकल पर निर्भर सेक्टरों के शेयरों में दबाव जारी रह सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, कमजोर अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को नई दिल्ली के बुलियन मार्केट में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। खास तौर पर चांदी ने ₹5,000 की बड़ी छलांग लगाते हुए ₹2.42 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया, जबकि सोना ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया। इस तेजी ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है। चांदी और सोने के दाम में जोरदार बढ़त ‘ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन’ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमत ₹2,37,000 से बढ़कर ₹2,42,000 प्रति किलो हो गई, यानी एक ही दिन में 2.11% की तेजी दर्ज की गई। वहीं, 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत ₹2,300 बढ़कर ₹1,53,800 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। यह उछाल हालिया गिरावट के बाद बाजार में लौटे खरीदारी रुझान और सुरक्षित निवेश की मांग को दर्शाता है। क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर डॉलर, कच्चे तेल की नरम कीमतें, और वैश्विक तनाव इस तेजी के मुख्य कारण हैं। बाजार में ‘वैल्यू बाइंग’ यानी गिरावट के बाद सस्ते भाव पर खरीदारी भी तेजी को समर्थन दे रही है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के कारण निवेशक फिर से सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार और आगे की दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी 73.37 डॉलर प्रति औंस और सोना 4,682 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, एफओएमसी मिनट्स, सीपीआई डेटा और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरें बुलियन मार्केट की दिशा तय करेंगी। फिलहाल बाजार में वोलैटिलिटी और तेजी दोनों बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।
Trent Ltd के शेयरों में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद शेयर करीब 7 प्रतिशत तक उछल गया, जिससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेडिंग के दौरान Trent का शेयर 6.8 प्रतिशत बढ़कर इंट्राडे हाई 3,791.90 रुपये तक पहुंच गया। दिन की शुरुआत भी पॉजिटिव रही, जहां स्टॉक 2.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ ओपन हुआ। खास बात यह है कि पिछले तीन ट्रेडिंग सेशंस में यह स्टॉक लगभग 14 प्रतिशत तक चढ़ चुका है। मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ बना तेजी का कारण कंपनी के मार्च तिमाही (Q4FY26) के नतीजों ने बाजार को चौंकाया। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 20% बढ़कर 4,937 करोड़ रुपये पहुंचा पिछले साल इसी अवधि में यह 4,106 करोड़ रुपये था पूरे वित्त वर्ष में कंपनी की आय 18% बढ़ी सिर्फ इतना ही नहीं, मर्चेंडाइज सेल्स (अन्य ऑपरेटिंग इनकम को छोड़कर) भी तिमाही में 21% और पूरे साल में 19% बढ़ी है। टैक्स कट और कंज्यूमर डिमांड का असर सितंबर में हुए टैक्स कट्स का सीधा असर कंज्यूमर स्पेंडिंग पर देखने को मिला है। लोगों के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम होने से रिटेल सेक्टर को फायदा मिला, जिसका असर Trent के प्रदर्शन में साफ दिखा। तेजी से बढ़ रहा स्टोर नेटवर्क Trent लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। मार्च 2026 तक कुल स्टोर: 1,286 एक साल पहले: 1,043 स्टोर कंपनी अब छोटे शहरों और कस्बों में विस्तार पर फोकस कर रही है, जहां तेजी से बढ़ती मांग को कैश करने की योजना है। Zudio और Westside की बढ़ती लोकप्रियता Trent के लोकप्रिय ब्रांड Zudio और Westside खासकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यही वजह है कि कंपनी का फोकस अब मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों पर भी है।
नई दिल्ली: सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) को भले ही ₹242.49 करोड़ का नया ऑर्डर मिला हो, लेकिन शेयर बाजार में इसका असर उल्टा देखने को मिला। सोमवार, 6 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्या है नया ऑर्डर? कंपनी को South Central Railway से Letter of Acceptance (LoA) प्राप्त हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। मौजूदा 1x25 kV सिस्टम को 2x25 kV AT फीडिंग सिस्टम में बदला जाएगा फीडर और अर्थिंग से जुड़े कार्य भी शामिल हैं प्रोजेक्ट ओंगोल से गुडूर सेक्शन (विजयवाड़ा डिवीजन) में किया जाएगा कुल कवरेज: 154 RKM / 462 TKM समयसीमा: 24 महीने पहले भी मिला था बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2026 में भी RVNL को National Mineral Development Corporation (NMDC) से ₹95.27 करोड़ का ऑर्डर मिला था, जिसमें छत्तीसगढ़ स्थित सुविधाओं के रिफर्बिशमेंट और मेंटेनेंस का काम शामिल है। फिर भी शेयर क्यों गिरा? नए ऑर्डर के बावजूद शेयर में गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हो सकते हैं: पिछले तीन महीनों में शेयर करीब 28% गिर चुका है मुनाफावसूली (Profit Booking) का दबाव बाजार की समग्र कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता शेयर का हाल पिछला बंद भाव: ₹262.60 (+5.19%) 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹448 (20 मई 2025) 52-हफ्ते का न्यूनतम स्तर: ₹248.25 (30 मार्च 2026) वर्तमान स्तर: हाई से करीब 41.77% नीचे स्पष्ट है कि कंपनी को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है।