Defence News

Defence Minister Rajnath Singh chairs a Defence Acquisition Council meeting approving major defence procurement proposals to strengthen India's armed forces.
₹52 हजार करोड़ के हथियार खरीद को मंजूरी, सेना को मिलेंगे ड्रोन रोधी सिस्टम, मिसाइलें और कामिकाजे ड्रोन

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Congress MP Shashi Tharoor congratulates Lieutenant General Rajesh Pushkar on his appointment as the new General Officer Commanding-in-Chief of the Indian Army's Southern Command.
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर बने दक्षिणी कमान के नए प्रमुख, शशि थरूर बोले- परिवार और देश के लिए गर्व का क्षण

  नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय सेना की एक अहम नियुक्ति पर खुशी और गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बहनोई लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान (सदर्न कमांड) का नया जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। थरूर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के साथ-साथ पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, शशि थरूर की दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर के भाई हैं। थरूर ने बताया कि उन्होंने फोन पर राजेश पुष्कर से बातचीत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में राजेश पुष्कर के साथ एक पुरानी तस्वीर और एक वीडियो भी साझा किया। 1 जुलाई से संभालेंगे दक्षिणी कमान की कमान शशि थरूर ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर 1 जुलाई से भारतीय सेना की दक्षिणी कमान का नेतृत्व संभालेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की छह ऑपरेशनल कमांड में दक्षिणी कमान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ी है और देश के कई महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। 'उनकी सैन्य क्षमता पर पूरा भरोसा' थरूर ने कहा कि राजेश पुष्कर का सैन्य अनुभव, उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और वर्दी के प्रति समर्पण उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह उपयुक्त बनाता है। उन्होंने लिखा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वह इस पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन सर्वोच्च पेशेवर क्षमता और सम्मान के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि एक सक्षम और समर्पित सैन्य अधिकारी का इतनी महत्वपूर्ण कमान संभालना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश के लिए भरोसे और गर्व की बात है। पिपिंग सेरेमनी की तस्वीर भी की साझा अपने पोस्ट में शशि थरूर ने एक तस्वीर साझा की, जिसे उन्होंने उस समय की बताया जब राजेश पुष्कर को मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस पिपिंग सेरेमनी में थरूर और राजेश पुष्कर की पत्नी अनु भी मौजूद थीं। ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो भी किया साझा थरूर द्वारा साझा किए गए वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में वह अभियान को भारतीय सेना की महत्वपूर्ण सफलता बताते हैं और कहते हैं कि सेना भविष्य में भी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। देशवासियों से मांगा समर्थन पोस्ट के अंत में शशि थरूर ने देशवासियों से अपील की कि वे भी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दें। उन्होंने लिखा कि वह देश की सुरक्षा और सेवा की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। पोस्ट का समापन उन्होंने "जय हिंद!" के साथ किया।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Pakistan Navy's newly inducted PNS Hangor submarine arrives in Karachi amid discussions over Bay of Bengal deployment.
55 साल बाद बंगाल की खाड़ी में दिख सकती है पाकिस्तान की सबमरीन, PNS हैंगोर से बढ़ी भारत की सामरिक चिंता

  पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी (PNS Hangor) एक बार फिर बंगाल की खाड़ी को लेकर चर्चा में है। पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिए हैं कि इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बंगाल की खाड़ी में भी पाकिस्तान अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगा। चीन में निर्मित पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी पिछले सप्ताह कराची पहुंची। इसके बाद पाकिस्तान नौसेना के अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया और कहा कि इस नई क्षमता से पाकिस्तान दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम होगा। श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा? कोलंबो स्थित समाचार पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के अनुसार, पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे पाकिस्तानी कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है। बंगाल की खाड़ी क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं। दूसरी ओर यह क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है। भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और इंडो-पैसिफिक रणनीति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। क्या है PNS हैंगोर का इतिहास? ‘हैंगोर’ नाम भारतीय नौसैनिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस हमले में 176 भारतीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस घटना के बावजूद पाकिस्तान 1971 का युद्ध हार गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। अब पाकिस्तान ने अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना है। क्या है हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की खासियत? हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होने की बात कही जाती है, जिससे ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक के कारण इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। बांग्लादेश से बढ़ती नजदीकियां भी बढ़ा रहीं चिंता 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुई हैं, व्यापार में वृद्धि हुई है और रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है। नवंबर 2025 में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ की चट्टोग्राम यात्रा 1971 के बाद पहली ऐसी घटना थी, जब कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने पर भी चर्चा चल रही है। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बांग्लादेश पाकिस्तान को अपने बंदरगाहों या सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देगा। भारत की चिंता कितनी बढ़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियां तत्काल तौर पर बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन बदलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे भारत के लिए एक अतिरिक्त सामरिक चुनौती जरूर पैदा कर सकती हैं। भारतीय नौसेना पिछले पांच दशकों में काफी मजबूत हुई है। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं। भारत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है। इसके बावजूद पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताएं और बांग्लादेश के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती हैं। इसी वजह से भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी समुद्री और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Russian Tu-22M3 strategic bomber crashes near Irkutsk during training flight as four crew members eject safely.
रूस का Tu-22M3 बॉम्बर विमान क्रैश, चारों पायलट सुरक्षित; इंजन फेल होने की आशंका

  मॉस्को: रूस का रणनीतिक बॉम्बर विमान Tu-22M3 सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान अचानक नियंत्रण खोकर जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहे और उनकी जान बच गई। चारों क्रू मेंबर सुरक्षित, अस्पताल में भर्ती रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में मौजूद चारों पायलट पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत नहीं हुआ है। कामेंका गांव के पास हुआ हादसा इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव के मुताबिक, यह हादसा कामेंका गांव के नजदीक हुआ। प्रारंभिक जांच में विमान के इंजन में खराबी को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। क्या है Tu-22M3 बॉम्बर की खासियत? Tu-22M3 रूस के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बॉम्बर विमानों में से एक है। सोवियत काल में विकसित इस विमान को NATO ने 'Backfire' कोडनेम दिया है। यह सुपरसोनिक बॉम्बर लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखता है और रूस ने इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया है। Tu-22M3 आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और यह Kh-22 क्रूज मिसाइलों के अलावा हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल (Kinzhal) मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है। इसकी वजह से इसे रूस की रणनीतिक हवाई शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है। जांच के बाद सामने आएगी दुर्घटना की असली वजह शुरुआती जांच में इंजन फेल होने की आशंका जताई गई है, लेकिन रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
DRDO successfully tests India's indigenous Long Range Land Attack Cruise Missile from Dr APJ Abdul Kalam Island in Odisha.
LRLACM मिसाइल से बढ़ी भारत की लॉन्ग रेंज स्ट्राइक पावर, अब सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मनों पर भी सटीक वार

  नई दिल्ली: भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम है। DRDO के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार और टेलीमेट्री प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई है कि मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। भारत की स्ट्राइक क्षमता को मिलेगी नई धार LRLACM का सफल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों को दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर बिना सीमा पार किए, दूर से ही सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। इस मिसाइल के शामिल होने से भारत की Long Range Precision Strike Capability में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) भी मजबूत होगी। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रक्षा मंत्रालय के अनुसार, LRLACM पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है। इस परियोजना में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश के कई सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को नई मजबूती देने वाली उपलब्धि है। क्या है LRLACM की खासियत? LRLACM को लंबी दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं— लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, जिससे रडार से बचना आसान होता है। दुश्मन के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटर, एयरबेस और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाने में सक्षम। स्वदेशी मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली से लैस। विभिन्न मौसम परिस्थितियों में संचालन की क्षमता। भारतीय उद्योगों की भागीदारी के साथ पूरी तरह स्वदेशी विकास। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिसाइल परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। BMD प्रणाली की सफलता के बाद एक और बड़ी उपलब्धि इससे पहले 10 और 11 जून को भारत ने अपनी बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence (BMD) System प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किए थे। DRDO द्वारा विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है। आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बड़ा कदम रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, LRLACM का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की लॉन्ग रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Indian Air Force aircraft catches fire after landing at Jorhat Air Base in Assam
असम के जोरहाट एयरबेस पर IAF विमान हादसे का शिकार, लैंडिंग के बाद लगी आग

एयरबेस के भीतर हुआ हादसा, जांच शुरू असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के एयरबेस पर शुक्रवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस के भीतर सुरक्षित लैंडिंग के बाद अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद एयरबेस की आपातकालीन और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। पायलट और क्रू की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार फिलहाल भारतीय वायुसेना की ओर से विमान के प्रकार, हादसे के कारण और पायलट या अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरने के बाद किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वायुसेना ने शुरू की जांच हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के ब्लैक बॉक्स और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। जोरहाट एयरबेस भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। अधिकृत जानकारी आने के बाद ही नुकसान और हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Indian Army K-9 Vajra self-propelled howitzer during field deployment and artillery firing exercise.
भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण अभियान, 23,000 करोड़ रुपये में 300 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपें खरीदने की तैयारी

  भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त K-9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि इस परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो यह भारतीय सेना के हालिया वर्षों के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल होगी। नई तोपों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमाओं पर की जाएगी, जिससे दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एलएंडटी को मिल सकता है निर्माण का जिम्मा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसका निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिल सकता है। कंपनी दक्षिण कोरिया की रक्षा निर्माता कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से भारत में K-9 वज्र-टी का निर्माण करती है। नई खरीद के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को मजबूती मिलेगी। बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर सेना का फोकस हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसी रणनीति के तहत सेना ऐसी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है, जो विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें। क्या है K-9 वज्र की खासियत? K-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है। यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी "शूट एंड स्कूट" क्षमता है। यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है। इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से संचालन कर सकती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 2017 में हुआ था पहला सौदा भारत ने K-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा अनुबंध वर्ष 2017 में किया था। उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इनकी आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी। बाद में इन तोपों को मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया, जहां इनके प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर K-9 वज्र की परिचालन सफलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में भारतीय सेना ने 100 अतिरिक्त तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 7,600 करोड़ रुपये थी। इस निर्णय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना भविष्य की युद्ध रणनीति में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका देती है। लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में K-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, बेहद कम तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रणाली का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। परीक्षण के सफल परिणामों के बाद उत्तरी सीमाओं पर अतिरिक्त K-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और बल मिला है। तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सेना समानांतर रूप से एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना भविष्य के किसी भी संघर्ष में तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से अधिक सक्षम होगी।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
MBA graduates exploring government job opportunities in banking, PSUs, civil services, and insurance sectors.
MBA के बाद सरकारी नौकरी में बना सकते हैं शानदार करियर, जानिए 4 बेहतरीन विकल्प और संभावित सैलरी

नई दिल्ली: एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी MBA प्रोफेशनल्स के लिए कई शानदार अवसर मौजूद हैं। बैंकिंग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs), प्रशासनिक सेवाएं और बीमा क्षेत्र ऐसे विकल्प हैं, जहां न सिर्फ आकर्षक वेतन मिलता है बल्कि नौकरी की स्थिरता और कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। आइए जानते हैं MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध चार प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में। 1. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर MBA ग्रेजुएट्स के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है। RBI Grade B Officer रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में ग्रेड बी अधिकारी का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यहां वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं। अनुमानित शुरुआती वेतन (भत्तों सहित): लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह अधिक जानकारी: RBI की आधिकारिक वेबसाइट सरकारी बैंकों में PO और SO पद सरकारी बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर MBA उम्मीदवारों को अवसर मिलते हैं। SEBI और IRDAI जैसे संस्थान वित्तीय रणनीति, निवेश और नियामकीय कार्यों से जुड़े पदों पर भी MBA प्रोफेशनल्स की मांग रहती है। 2. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां MBA उम्मीदवारों की भर्ती करती हैं। प्रमुख कंपनियां: ONGC NTPC BHEL GAIL इन संस्थानों में मैनेजमेंट ट्रेनी, HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं। अनुमानित वार्षिक पैकेज: ₹12 लाख से ₹25 लाख तक 3. UPSC और प्रशासनिक सेवाएं MBA ग्रेजुएट्स संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में भी हिस्सा ले सकते हैं। सिविल सेवा (IAS, IPS, IRS) MBA डिग्री धारक IAS, IPS और IRS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। अनुमानित वेतन (भत्तों सहित): ₹80,000 से ₹1 लाख प्रतिमाह Indian Economic Service (IES) आर्थिक नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए भी MBA उम्मीदवार अवसर प्राप्त कर सकते हैं। 4. बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरियां LIC और अन्य सरकारी बीमा कंपनियों में MBA प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग रहती है। इन संस्थानों में: रिस्क मैनेजमेंट प्रशासन मैनेजमेंट ऑपरेशनल रोल्स जैसे पदों पर भर्ती की जाती है। अनुमानित शुरुआती वेतन: ₹1 लाख से ₹1.25 लाख प्रतिमाह MBA के बाद सरकारी नौकरी क्यों है अच्छा विकल्प? आकर्षक वेतन नौकरी की सुरक्षा पेंशन और अन्य भत्ते करियर में स्थिरता बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। सही तैयारी और उचित परीक्षा चयन के माध्यम से एक सफल और स्थायी करियर बनाया जा सकता है।  

surbhi जून 10, 2026 0
Indian Army captain proposes to his fiancée after pilot training graduation parade in Nashik.
पासिंग आउट परेड के बाद कैप्टन का प्रपोजल बना चर्चा का विषय, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

  नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में पासिंग आउट परेड के बाद एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला। भारतीय सेना के कैप्टन भारत भारद्वाज ने पायलट के रूप में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपनी मंगेतर को सबके सामने शादी के लिए प्रपोज किया। इस खास मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जहां कई लोगों ने इस पल को प्यार और समर्पण की खूबसूरत मिसाल बताया, वहीं कुछ लोगों ने सेना की वर्दी और पासिंग आउट परेड जैसे औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा करने को लेकर अनुशासन संबंधी सवाल भी उठाए। पासिंग आउट परेड के बाद किया प्रपोज समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी वीडियो में कैप्टन भारत भारद्वाज अपनी वर्दी में घुटनों के बल बैठकर अपनी मंगेतर को प्रपोज करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मंगेतर साड़ी में मौजूद थीं और दोनों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी। प्रपोजल स्वीकार किए जाने के बाद साथी अधिकारियों और दोस्तों ने दोनों को बधाई दी। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी यादगार बन गया। "इस दिन को और खास बनाना चाहता था" ANI से बातचीत में कैप्टन भारत भारद्वाज ने बताया कि पायलट और इंस्ट्रक्टर बनने का दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। उन्होंने कहा, "आज हमारी वर्षों की मेहनत सफल हुई है। मेरे परिवार, खासकर मेरी मां और नाना-नानी के लिए भी यह बेहद खास अवसर था। मैं इस दिन को और यादगार बनाना चाहता था।" कैप्टन भारत ने बताया कि वह और उनकी मंगेतर पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके अनुसार, शादी का प्रस्ताव रखने के लिए इससे बेहतर अवसर उन्हें नहीं लगा। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या सैन्य समारोह के तुरंत बाद इस तरह का निजी आयोजन उचित था। वहीं कई लोगों ने इसे एक व्यक्तिगत और भावनात्मक क्षण बताते हुए समर्थन किया। बहस का केंद्र यह रहा कि क्या ऐसे अवसर पर व्यक्तिगत भावनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन सैन्य परंपराओं और अनुशासन के अनुरूप है या नहीं। सेना के पूर्व अधिकारियों ने किया समर्थन कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने कैप्टन भारत का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की पेशेवर क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं है, तो ऐसे मानवीय और सकारात्मक क्षणों को अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पूर्व सेना अधिकारी K. J. S. Dhillon ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि युवाओं के जीवन के ऐसे खूबसूरत पलों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्यार और अपनापन व्यक्त करने के ऐसे अवसरों पर अनावश्यक आलोचना से बचना चाहिए। यादगार पल बना वायरल वीडियो कैप्टन भारत भारद्वाज का यह प्रपोजल वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे देश सेवा और निजी जीवन के बीच संतुलन का खूबसूरत उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य परंपराओं के संदर्भ में देख रहे हैं। फिलहाल यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इंटरनेट पर लाखों बार देखा जा चुका है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Rafale fighter jets flying in formation as India advances major defence procurement plan
3.25 लाख करोड़ की मेगा डील की तैयारी, भारत खरीदेगा 114 नए राफेल लड़ाकू विमान

  भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के अधिग्रहण विंग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अब अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अगले एक साल के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर इन विमानों का उत्पादन करेगी। अगर यह योजना तय रूप में लागू होती है, तो यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है अहम चर्चा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य तक फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान राफेल सौदा दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय रहेगा। भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में उन्नत 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना और नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। प्रस्तावित 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद देश के पास राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों में भी रुचि दिखाई है। यदि यह खरीद भी आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। 2028 से शुरू हो सकती है डिलीवरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद वायु सेना के लिए भी विमानों की आपूर्ति शुरू होगी। अनुमान है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भारतीय वायु सेना को नए राफेल विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। इस बीच, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह फ्रांस के दौरे पर हैं। उनके डसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाइयों का दौरा करने की भी संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाता है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Admiral Krishna Swaminathan assumes charge as Indian Navy Chief and outlines security priorities
पदभार संभालते ही बोले नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि देश की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच नौसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत बनाए रखने और तकनीकी आधुनिकीकरण को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एडमिरल स्वामीनाथन ने 31 मई को सेवानिवृत्त हुए एडमिरल Dinesh Kumar Tripathi का स्थान लिया। इससे पहले वह भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दे रहे थे। चार दशक का समृद्ध नौसैनिक अनुभव 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले एडमिरल स्वामीनाथन कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश, आईएनएस कुलिश और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य समेत कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों की कमान संभाली है। नौसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का नेतृत्व करना उनके लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल, चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित होता जा रहा है, ऐसे में नौसेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। युद्धक क्षमता बनाए रखना प्राथमिक लक्ष्य एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सक्षम रहे। उन्होंने कहा कि नौसेना अपनी परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।  

surbhi जून 1, 2026 0
India successfully tests Vayu Astra-1 suicide drone capable of striking targets 100 km away at high altitude
14 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘वायु अस्त्र-1’ का कमाल, 100 KM दूर लक्ष्य तबाह करने वाला ड्रोन टेस्ट सफल

भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पुणे स्थित रक्षा कंपनी Nibe Limited ने अपने अत्याधुनिक ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण राजस्थान के Pokhran और उत्तराखंड के Joshimath के मलारी क्षेत्र में किया गया। कंपनी के अनुसार, ‘वायु अस्त्र-1’ ने रेगिस्तानी और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। यह ड्रोन 100 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है और रात के अंधेरे में भी लक्ष्य को पहचानकर निशाना साध सकता है। 100 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर सटीक हमला निबे लिमिटेड ने बताया कि ‘वायु अस्त्र-1’ ने अपने परीक्षण के दौरान 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को एक ही प्रयास में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। कंपनी के मुताबिक, इसकी संभावित सीईपी (Circular Error Probable) एक मीटर से भी कम रही, जो इसे बेहद सटीक हथियार बनाती है। ड्रोन में “अटैक एबॉर्ट” और “री-अटैक” जैसी आधुनिक क्षमताएं भी दी गई हैं। यानी मिशन के दौरान लक्ष्य बदलने या दोबारा हमला करने का विकल्प भी मौजूद है। 14 हजार फीट ऊंचाई पर भी शानदार प्रदर्शन उत्तराखंड के मलारी क्षेत्र में हुए परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ को 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ाया गया। कंपनी का दावा है कि ड्रोन ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरते हुए सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम तापमान और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच यह प्रदर्शन भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सटीक हमलों के लिए। रात में भी टैंक को बना सकता है निशाना कंपनी के अनुसार, यह लोइटरिंग म्यूनिशन बख्तरबंद वाहनों और टैंकों पर रात में भी हमला करने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने इन्फ्रारेड (IR) कैमरे की मदद से लक्ष्य को ट्रैक किया और दो मीटर के भीतर सटीक हमला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता आधुनिक युद्ध में भारतीय सेना को बड़ी बढ़त दे सकती है। क्या है ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’? लोइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में “सुसाइड ड्रोन” या “आत्मघाती ड्रोन” कहा जाता है। यह ड्रोन कुछ समय तक हवा में मंडराता रहता है और जैसे ही लक्ष्य मिलता है, सीधे उस पर हमला कर देता है। ‘वायु अस्त्र-1’ इजरायली तकनीक आधारित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम से प्रेरित बताया जा रहा है। इसे दुश्मन के ठिकानों, टैंकों और रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। बिना सरकारी खर्च के हुआ परीक्षण कंपनी ने बताया कि यह परीक्षण “नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट” (NCNC) मॉडल के तहत किया गया। रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया में इस मॉडल का मतलब होता है कि सरकार परीक्षण के लिए कोई भुगतान नहीं करती और उत्पाद खरीदने की बाध्यता भी नहीं होती। अगर परीक्षण सफल साबित होते हैं और सेना संतुष्ट होती है, तभी आगे खरीद प्रक्रिया शुरू की जाती है। कंट्रोल ट्रांसफर तकनीक का भी प्रदर्शन निबे लिमिटेड ने बताया कि परीक्षण के दौरान ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) से 70 किलोमीटर दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को नियंत्रण सौंपने की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक लंबी दूरी के युद्ध अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे ड्रोन को अलग-अलग स्थानों से नियंत्रित किया जा सकता है। रिकवरी क्षमता भी दिखाई कंपनी के अनुसार, मिशन पूरा होने के बाद इस सिस्टम ने रिकवरी क्षमता भी प्रदर्शित की। यानी जरूरत पड़ने पर इसे अगली उड़ानों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का भी सफल परीक्षण इससे पहले 20 मई को निबे लिमिटेड ने अपने ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ के सफल परीक्षण की घोषणा की थी। ओडिशा के Chandipur स्थित अंतरिम परीक्षण रेंज (ITR) में हुए परीक्षणों में सिस्टम ने सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। कंपनी को जनवरी 2026 में भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट विंडो के तहत इस सिस्टम के विकास और आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिला था। इस परियोजना के तहत 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले विशेष रॉकेट भी विकसित किए जा रहे हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Pakistan ISPR chief Ahmed Sharif Chaudhry faces backlash after remarks targeting Indian Army press briefing
भारतीय सेना पर तंज कसना पड़ा भारी, पाकिस्तान में ही घिरे ISPR प्रमुख; लोगों ने कहा- उर्दू सिर्फ जनता को बहकाने के लिए

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Chinese President Xi Jinping during anti-corruption crackdown involving former defense ministers in China
चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा

China में राष्ट्रपति Xi Jinping की सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए देश के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा सुनाई है। चीन की सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री Wei Fenghe और Li Shangfu को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में दोषी करार दिया है। चीनी सरकारी मीडिया Xinhua News Agency के अनुसार दोनों नेताओं को “दो साल की राहत” के साथ मौत की सजा सुनाई गई है। चीन में इसका मतलब यह होता है कि अगर दोषी जेल में अच्छा व्यवहार करता है तो बाद में उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है। अदालत ने क्या कहा? रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि: Wei Fenghe ने रक्षा मंत्री रहते हुए बड़े पैमाने पर रिश्वत ली। Li Shangfu रिश्वत लेने और देने दोनों मामलों में दोषी पाए गए। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने सेना और रक्षा सौदों से जुड़े मामलों में अपने पद का दुरुपयोग किया और निजी फायदे के लिए भ्रष्टाचार किया। 2024 में पार्टी से निकाले गए थे दोनों नेता चीन की सत्तारूढ़ Chinese Communist Party ने वर्ष 2024 में दोनों नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ सैन्य जांच शुरू हुई थी। दोनों नेता राष्ट्रपति Xi Jinping की सरकार में बेहद प्रभावशाली माने जाते थे और केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य भी रह चुके थे। यह आयोग चीन की सेना पर सर्वोच्च नियंत्रण रखता है। कौन हैं वेई फेंगहे और ली शांगफू? वेई फेंगहे Wei Fenghe वर्ष 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे। उन्हें मिसाइल और रॉकेट तकनीक का विशेषज्ञ माना जाता था। उन्होंने चीन की अत्यंत महत्वपूर्ण रॉकेट फोर्स का भी नेतृत्व किया था। ली शांगफू Li Shangfu एक एयरोस्पेस इंजीनियर रहे हैं। उन्होंने वेई फेंगहे के बाद रक्षा मंत्री का पद संभाला था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। ली शांगफू भी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की रॉकेट फोर्स से जुड़े रहे थे, जिसे चीन की सामरिक सैन्य ताकत का अहम हिस्सा माना जाता है। शी जिनपिंग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति राष्ट्रपति Xi Jinping ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत: हजारों सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई हुई कई वरिष्ठ सैन्य जनरलों को हटाया गया दस लाख से ज्यादा अधिकारियों को अलग-अलग मामलों में सजा दी जा चुकी है विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सत्ता पर नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा है। क्यों अहम है यह फैसला? दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा मिलना चीन की राजनीति और सेना में बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यह दिखाता है कि: चीन सेना में भ्रष्टाचार को लेकर सख्ती बढ़ा रहा है शीर्ष नेताओं को भी कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी रक्षा और सैन्य ढांचे में अंदरूनी सफाई अभियान जारी है विशेषज्ञों के अनुसार चीन की रॉकेट फोर्स और रक्षा प्रतिष्ठान में हाल के वर्षों में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बीजिंग अपनी सैन्य व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रित और अनुशासित रखना चाहता है।  

surbhi मई 8, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi praising Indian armed forces during Operation Sindoor anniversary event
ऑपरेशन सिंदूर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त जवाब

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.  

surbhi मई 7, 2026 0
Former Army Chief General Manoj Mukund Naravane stresses keeping armed forces away from politics
सेना को राजनीति से दूर रखना जरूरी: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे

भारतीय सशस्त्र बलों की निष्पक्षता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारतीय सशस्त्र बलों के राजनीतिक रूप से निष्पक्ष बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को राजनीति से जितना दूर रखा जाएगा, देश और लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। "सेना की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता" एक कार्यक्रम के दौरान जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल हमेशा से गैर-राजनीतिक रहे हैं। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और ताकत है। उन्होंने कहा, "सशस्त्र बलों को राजनीति से जितना संभव हो, उतना दूर रखा जाना चाहिए। यही हमारे लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।" लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं सशस्त्र बल पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस की तरह सशस्त्र बल भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उनके अनुसार, सेना की पेशेवर निष्पक्षता ही भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। व्यक्ति और संस्था में अंतर समझना जरूरी जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि संस्थान के रूप में सेना पूरी तरह अपोलिटिकल है। हालांकि, सेना के जवान और अधिकारी व्यक्तिगत रूप से लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर सैनिक को मतदान करने और अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक सोच रखने का पूरा अधिकार है। राहुल गांधी के बयान के बाद चर्चा में आए थे नरवणे गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में जनरल नरवणे अपने अप्रकाशित संस्मरण को लेकर चर्चा में आए थे। लोकसभा में राहुल गांधी ने उनके संस्मरण के कथित अंशों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। इस पर संसद में काफी हंगामा हुआ था। सैन्य संस्थानों की गरिमा बनाए रखना जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल नरवणे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक विमर्श लगातार तीखा हो रहा है। ऐसे में सेना की निष्पक्षता पर उनका जोर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Indian Army tank equipped with TRAWL system clearing mines during military operation
भारत ने 975 करोड़ का रक्षा सौदा किया, सेना की ताकत बढ़ाने के लिए TRAWL सिस्टम खरीदेगा

  सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 975 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए TRAWL सिस्टम खरीदे जाएंगे। यह समझौता 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुआ, जहां रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस डील को अंतिम रूप दिया गया। T-72 और T-90 टैंकों में लगेगा सिस्टम इस सौदे के तहत TRAWL सिस्टम को भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों में लगाया जाएगा। इस उपकरण की आपूर्ति Bharat Earth Movers Limited और Electro Pneumatics and Hydraulics (India) Private Limited द्वारा की जाएगी। माइनफील्ड में सुरक्षित रास्ता बनाएगा TRAWL TRAWL सिस्टम को Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया है। यह तकनीक युद्ध के दौरान माइनफील्ड को पार करने में मदद करती है। इसकी मदद से टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन बारूदी सुरंगों वाले इलाकों में सुरक्षित रास्ता बना सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां एंटी-टैंक माइंस लगी होती हैं, यह सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बढ़ावा यह सौदा “Buy (Indian–Indigenously Designed, Developed and Manufactured)” श्रेणी के तहत किया गया है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे। रोजगार और MSME सेक्टर को फायदा इस परियोजना से न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के MSME सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। TRAWL सिस्टम के निर्माण में कई छोटे और मध्यम उद्योग शामिल होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Lieutenant General Susan Coyle becomes first female Australian Army Chief marking historic 125-year milestone
125 साल में पहली बार महिला बनीं ऑस्ट्रेलिया की आर्मी चीफ, सुसान कोयले को मिली कमान

ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचते हुए पहली बार किसी महिला को सेना की कमान सौंपी गई है। लेफ्टिनेंट जनरल Susan Coyle को देश की नई आर्मी चीफ नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्री Richard Marles ने इस ऐतिहासिक फैसले का ऐलान किया। तीन दशकों का लंबा अनुभव सुसान कोयले का सैन्य करियर करीब 30 वर्षों का रहा है। इस दौरान उन्होंने Solomon Islands, Afghanistan और मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दी हैं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि वे सेना को नई दिशा देंगी। बदलाव के दौर में संभाली जिम्मेदारी सुसान कोयले ऐसे समय में आर्मी चीफ बनी हैं जब ऑस्ट्रेलियाई सेना बड़े बदलावों से गुजर रही है। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सेना को लंबी दूरी की मारक क्षमता, एडवांस ड्रोन और अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जा रहा है। साइबर वॉरफेयर पर खास फोकस नई आर्मी चीफ ने अपने बयान में आधुनिक युद्ध तकनीकों, खासकर साइबर वॉरफेयर पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनका विविध अनुभव इस जिम्मेदारी को निभाने में मददगार साबित होगा। ऐतिहासिक नियुक्ति क्यों अहम? ऑस्ट्रेलिया की सेना के 125 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को यह सर्वोच्च पद मिला है। यह नियुक्ति न केवल लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Indian Air Force Rafale fighter jet showcasing integration of indigenous missiles under Make in India initiative.
114 राफेल डील: स्वदेशी हथियार होंगे अनिवार्य, भारत का बड़ा प्लान

Rafale Deal Update: भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील में अब एक अहम शर्त जोड़ने जा रहा है-इन विमानों में स्वदेशी मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का एकीकरण (integration) अनिवार्य होगा। ICD क्या है और क्यों जरूरी? डील में Interface Control Document (ICD) अनिवार्य किया जाएगा यह एक तकनीकी डॉक्यूमेंट है जो तय करता है: कौन-सा सिस्टम किससे कैसे जुड़ेगा मिसाइल, रडार और अन्य सिस्टम कैसे काम करेंगे इससे भारतीय हथियारों को राफेल में जोड़ना आसान होगा मेगा डील की बड़ी बातें कुल लागत: ₹3.25 लाख करोड़ (लगभग) 114 राफेल जेट खरीदे जाएंगे 18 जेट सीधे फ्रांस से तैयार हालत में 96 जेट भारत में ही बनाए जाएंगे 25% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल ‘Buy & Make’ मॉडल यह डील Buy and Make कैटेगरी में होगी मतलब: कुछ जेट बाहर से आएंगे बाकी भारत में बनेंगे (Make in India को बढ़ावा) सोर्स कोड पर क्या विवाद? रिपोर्ट्स: फ्रांस की कंपनी Dassault ने सोर्स कोड देने से मना किया सरकार का जवाब: कोई भी देश अपना मालिकाना सॉफ्टवेयर कोड शेयर नहीं करता यह सामान्य प्रैक्टिस है सोर्स कोड कंट्रोल करता है: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हथियार लॉन्च सिस्टम रडार भारत की रणनीति क्या है? विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर फोकस: तेजस Mk1A AMCA (5th Gen Fighter) लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइलें इसका मतलब आसान भाषा में भारत चाहता है कि राफेल सिर्फ खरीदा न जाए, बल्कि उसमें भारतीय हथियार भी आसानी से लगाए जा सकें ताकि भविष्य में अपग्रेड और ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रहे

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
INS Aridhaman nuclear submarine launch visuals with Rajnath Singh highlighting India’s naval strength
INS Aridhaman की लॉन्चिंग के संकेत: राजनाथ सिंह बोले-‘ये सिर्फ नाम नहीं, भारत की ताकत है’

भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman की संभावित लॉन्चिंग के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है-‘Aridhaman’।” यह पनडुब्बी भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को और मजबूत करेगी, जिससे देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता और अधिक प्रभावी बनेगी। समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा INS Aridhaman, भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी परियोजना का तीसरा अहम हिस्सा है, जो पहले से सेवा में मौजूद INS Arihant और INS Arighaat के बाद शामिल होगी। करीब 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी आधुनिक डिजाइन और बेहतर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा। मिसाइल क्षमता: पहले से दोगुनी ताकत INS Aridhaman की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जो इसे और अधिक घातक बनाते हैं। 8 K-4 मिसाइल (3500 किमी रेंज) या 24 K-15 मिसाइल (750 किमी रेंज) यह क्षमता इसे लंबी दूरी तक सटीक और शक्तिशाली हमला करने में सक्षम बनाती है। भारत की ‘Second Strike’ रणनीति को मजबूती परमाणु पनडुब्बियां (SSBN) किसी भी देश की रक्षा रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। INS Aridhaman के शामिल होने से भारत की “Continuous At-Sea Deterrence” क्षमता मजबूत होगी, यानी हर समय एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा। विशाखापत्तनम में लॉन्चिंग, Taragiri भी शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम दौरे पर हैं, जहां INS Aridhaman की लॉन्चिंग के साथ-साथ अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri को भी नौसेना में शामिल किया जाएगा। Visakhapatnam भारत के परमाणु पनडुब्बी बेड़े का प्रमुख केंद्र है और यहीं इनका निर्माण व तैनाती होती है। भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संकेत INS Aridhaman का शामिल होना न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले समय में चौथी परमाणु पनडुब्बी के जुड़ने के बाद भारत पूरी तरह से मजबूत न्यूक्लियर ट्रायड हासिल कर लेगा।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Indian Air Force Surya Kiran jets performing aerobatics with colorful smoke trails at Sujanpur air show
सुजानपुर एयर शो: आसमान में गरजे 9 जेट, सूर्यकिरण टीम के करतब देख झूमे दर्शक

हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): सुजानपुर में आयोजित एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने 9 जेट विमानों के साथ आसमान में शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैनिक स्कूल सुजानपुर के मैदान में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना रहा। आसमान में दिखे हैरतअंगेज करतब एयरफोर्स स्टेशन चंडीगढ़ और आदमपुर से उड़ान भरकर पहुंचे जेट विमानों ने: एक साथ कई एरोबेटिक फॉर्मेशन बनाए रंग-बिरंगे धुएं से आसमान में खूबसूरत डिजाइन उकेरे दर्शकों ने तालियों और सीटियों से पायलट्स का स्वागत किया पूर्व छात्रों ने भरी उड़ान इस एयर शो की खास बात यह रही कि: सैनिक स्कूल सुजानपुर के दो पूर्व छात्र भी टीम का हिस्सा रहे एयर कमोडोर बृजेश पाल और स्क्वाड्रन लीडर हिमकुश चंदेल ने उड़ान भरी अपने पूर्व छात्रों को उड़ान भरते देख स्कूल परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। NCC कैडेट्स की मौजूदगी हमीरपुर जिले के 44 स्कूलों और 10 कॉलेजों से करीब 500-600 NCC कैडेट्स ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया अधिकारियों ने बताया कि यह शो छात्रों को वायुसेना की कार्यशैली, अनुशासन और कौशल को करीब से समझने का अवसर देता है। दो दिवसीय कार्यक्रम यह आयोजन दो दिनों तक चलेगा। हालांकि: पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दूसरे दिन सांसद अनुराग ठाकुर किसी कारणवश दोनों का दौरा रद्द हो गया। विधायक ने जताया गर्व विधायक रणजीत सिंह राणा ने कहा: ऐसे आयोजन सैनिकों और युवाओं के लिए गर्व का विषय हैं सैनिक स्कूल के छात्र देश के उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0