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INS Aridhaman nuclear submarine launch visuals with Rajnath Singh highlighting India’s naval strength
INS Aridhaman की लॉन्चिंग के संकेत: राजनाथ सिंह बोले-‘ये सिर्फ नाम नहीं, भारत की ताकत है’

भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman की संभावित लॉन्चिंग के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है-‘Aridhaman’।” यह पनडुब्बी भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को और मजबूत करेगी, जिससे देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता और अधिक प्रभावी बनेगी। समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा INS Aridhaman, भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी परियोजना का तीसरा अहम हिस्सा है, जो पहले से सेवा में मौजूद INS Arihant और INS Arighaat के बाद शामिल होगी। करीब 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी आधुनिक डिजाइन और बेहतर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा। मिसाइल क्षमता: पहले से दोगुनी ताकत INS Aridhaman की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जो इसे और अधिक घातक बनाते हैं। 8 K-4 मिसाइल (3500 किमी रेंज) या 24 K-15 मिसाइल (750 किमी रेंज) यह क्षमता इसे लंबी दूरी तक सटीक और शक्तिशाली हमला करने में सक्षम बनाती है। भारत की ‘Second Strike’ रणनीति को मजबूती परमाणु पनडुब्बियां (SSBN) किसी भी देश की रक्षा रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। INS Aridhaman के शामिल होने से भारत की “Continuous At-Sea Deterrence” क्षमता मजबूत होगी, यानी हर समय एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा। विशाखापत्तनम में लॉन्चिंग, Taragiri भी शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम दौरे पर हैं, जहां INS Aridhaman की लॉन्चिंग के साथ-साथ अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri को भी नौसेना में शामिल किया जाएगा। Visakhapatnam भारत के परमाणु पनडुब्बी बेड़े का प्रमुख केंद्र है और यहीं इनका निर्माण व तैनाती होती है। भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संकेत INS Aridhaman का शामिल होना न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले समय में चौथी परमाणु पनडुब्बी के जुड़ने के बाद भारत पूरी तरह से मजबूत न्यूक्लियर ट्रायड हासिल कर लेगा।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Indian Air Force Surya Kiran jets performing aerobatics with colorful smoke trails at Sujanpur air show
सुजानपुर एयर शो: आसमान में गरजे 9 जेट, सूर्यकिरण टीम के करतब देख झूमे दर्शक

हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): सुजानपुर में आयोजित एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने 9 जेट विमानों के साथ आसमान में शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैनिक स्कूल सुजानपुर के मैदान में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना रहा। आसमान में दिखे हैरतअंगेज करतब एयरफोर्स स्टेशन चंडीगढ़ और आदमपुर से उड़ान भरकर पहुंचे जेट विमानों ने: एक साथ कई एरोबेटिक फॉर्मेशन बनाए रंग-बिरंगे धुएं से आसमान में खूबसूरत डिजाइन उकेरे दर्शकों ने तालियों और सीटियों से पायलट्स का स्वागत किया पूर्व छात्रों ने भरी उड़ान इस एयर शो की खास बात यह रही कि: सैनिक स्कूल सुजानपुर के दो पूर्व छात्र भी टीम का हिस्सा रहे एयर कमोडोर बृजेश पाल और स्क्वाड्रन लीडर हिमकुश चंदेल ने उड़ान भरी अपने पूर्व छात्रों को उड़ान भरते देख स्कूल परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। NCC कैडेट्स की मौजूदगी हमीरपुर जिले के 44 स्कूलों और 10 कॉलेजों से करीब 500-600 NCC कैडेट्स ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया अधिकारियों ने बताया कि यह शो छात्रों को वायुसेना की कार्यशैली, अनुशासन और कौशल को करीब से समझने का अवसर देता है। दो दिवसीय कार्यक्रम यह आयोजन दो दिनों तक चलेगा। हालांकि: पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दूसरे दिन सांसद अनुराग ठाकुर किसी कारणवश दोनों का दौरा रद्द हो गया। विधायक ने जताया गर्व विधायक रणजीत सिंह राणा ने कहा: ऐसे आयोजन सैनिकों और युवाओं के लिए गर्व का विषय हैं सैनिक स्कूल के छात्र देश के उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं

surbhi मार्च 25, 2026 0
Israel Plans Lebanon Buffer Zone Amid Tensions
लेबनान के 10% हिस्से पर कब्जे की तैयारी? इजरायली रक्षा मंत्री काट्ज का बड़ा बयान, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच इजरायल ने लेबनान को लेकर बड़ा दावा किया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के करीब 10% हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करेगी। लिटानी नदी तक बनेगा ‘बफर ज़ोन’ काट्ज के मुताबिक, इजरायली सेना लिटानी नदी तक इलाके को नियंत्रित करेगी और वहां एक मजबूत रक्षात्मक बफर ज़ोन तैयार किया जाएगा। यह नदी इजरायल की सीमा से लगभग 30 किलोमीटर अंदर है और यह क्षेत्र लेबनान के कुल भूभाग का करीब एक-दसवां हिस्सा माना जाता है। उन्होंने कहा, “सेना लिटानी नदी तक बचे हुए पुलों और सुरक्षा क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेगी।” काट्ज ने यह भी दावा किया कि जिन इलाकों में “आतंकवाद” मौजूद है, वहां नागरिकों को रहने की अनुमति नहीं होगी। ‘सुरक्षा सुनिश्चित होने तक वापसी नहीं’ इजरायल ने साफ किया है कि जब तक उसकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक सेना पीछे नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री के अनुसार, दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग पहले ही उत्तर की ओर पलायन कर चुके हैं और उनकी वापसी सुरक्षा हालात सुधरने पर ही संभव होगी। क्यों लिया गया फैसला? इजरायल का कहना है कि यह कदम हिजबुल्लाह के खतरे को खत्म करने और अपनी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इजरायली सेना पहले ही लिटानी नदी के आसपास कई पुलों को निशाना बना चुकी है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाके और हथियार दक्षिणी इलाकों में न पहुंच सकें। काट्ज ने इसे “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” बताया। हिजबुल्लाह की चेतावनी हिजबुल्लाह ने इजरायल के इस प्लान को लेबनान के लिए “अस्तित्व का खतरा” बताया है और कहा है कि किसी भी कब्जे की कोशिश का जोरदार विरोध किया जाएगा। जंग में नया मोड़ यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिजबुल्लाह लगातार इजरायल के शहरों-हाइफा और नाहारिया-पर रॉकेट हमले कर रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी ड्रोन हमले जारी हैं। इसके अलावा, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं। इजरायल का यह बयान मिडिल ईस्ट संघर्ष को और गंभीर मोड़ दे सकता है। अगर दक्षिणी लेबनान में बफर ज़ोन बनाने की योजना आगे बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र में जंग और लंबी तथा व्यापक हो सकती है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Supreme Court grants permanent commission to women officers, landmark gender equality ruling in armed forces
महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सशस्त्र बलों की ‘लापरवाही’ पर कड़ी फटकार

देश की सशस्त्र सेनाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Supreme Court of India ने महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस दौरान सशस्त्र बलों के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं के साथ लंबे समय से “प्रणालीगत भेदभाव” किया गया है। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि पुरुष अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को विशेषाधिकार बनाए रखना अब स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने इस फैसले में Article 142 of the Constitution of India के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए न्याय सुनिश्चित किया। 250 अधिकारियों की सीमा को बताया मनमाना सुप्रीम कोर्ट ने हर साल अधिकतम 250 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की सीमा को “मनमाना” और असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सीमा महिलाओं के अवसरों को सीमित करती है और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर खामियां कोर्ट ने पाया कि Indian Army और Indian Navy में महिला अधिकारियों के मूल्यांकन में गंभीर खामियां थीं। उनकी Annual Confidential Reports (ACRs) को “लापरवाही” से तैयार किया गया और यह मानकर आकलन किया गया कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन नहीं मिलेगा। इससे उनकी योग्यता का सही आकलन नहीं हो पाया। पेंशन और सेवा लाभ का भी मिलेगा फायदा अदालत ने निर्देश दिया कि जिन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार है, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें पेंशन और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ भी दिए जाएंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को भी मिलेगा, जिन्हें पहले चयन बोर्ड में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। अलग-अलग बलों के लिए अलग निर्देश नौसेना: मेडिकल फिटनेस के आधार पर योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलेगा। वायुसेना: कोर्ट ने माना कि कई अधिकारियों को निष्पक्ष अवसर नहीं मिला, लेकिन ऑपरेशनल कारणों से दोबारा नियुक्ति संभव नहीं है। सेना: मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता की कमी पर भी सवाल कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय और नौसेना द्वारा चयन प्रक्रिया और अंक सार्वजनिक न करने पर भी चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार, इस पारदर्शिता की कमी से न केवल महिला बल्कि पुरुष अधिकारियों को भी नुकसान हुआ। व्यापक सुधार के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सभी सशस्त्र बलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करें, ताकि भविष्य में किसी भी महिला अधिकारी के साथ भेदभाव न हो।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Iranian drones and missiles in action highlighting strategy over fighter jets in Middle East conflict
ईरान ने क्यों नहीं उतारे फाइटर जेट? अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में ‘हवाई सन्नाटा’ की पूरी रणनीति समझिए

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को 18 दिन हो चुके हैं, जहां ईरान लगातार इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। लेकिन इस पूरी जंग में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में है- ईरान ने अब तक अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? क्या यह कमजोरी है या सोची-समझी सैन्य रणनीति?   ईरान की एयरफोर्स: पुरानी ताकत, सीमित क्षमता ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक एयर फोर्स (IRIAF) के पास कागजों पर 400-600 विमान जरूर हैं, लेकिन इनमें से केवल 200-230 के आसपास ही फाइटर जेट हैं। इनमें से ज्यादातर विमान 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले खरीदे गए थे, जब ईरान के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका से अच्छे संबंध थे। ईरान के प्रमुख लड़ाकू विमान: F-14 Tomcat – दुनिया में अब सिर्फ ईरान के पास सक्रिय   F-4 Phantom II और F-5 Tiger II – 1960-70 के दशक के   MiG-29 और Su-24 – सीमित संख्या में   स्वदेशी जेट: Kowsar और Saeqeh   विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्वदेशी जेट भी आधुनिक नहीं बल्कि पुराने अमेरिकी डिजाइनों के अपग्रेडेड संस्करण हैं।   क्यों नहीं उतार रहा ईरान अपने फाइटर जेट? 1. तकनीकी रूप से पिछड़े विमान ईरान के अधिकांश जेट पुराने हैं और उनमें आधुनिक रडार, स्टेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कमी है। इसके मुकाबले इजरायल के पास F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ जेट हैं, जो रडार से बच निकलते हैं। 2. एयर डिफेंस का बड़ा खतरा अमेरिका और इजरायल के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम हैं जैसे: Iron Dome Patriot Missile System ऐसे में ईरानी जेट दुश्मन के इलाके में घुसते ही मार गिराए जा सकते हैं। 3. स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस की समस्या अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को पुराने जेट्स के लिए जरूरी पार्ट्स नहीं मिलते। इससे कई विमान सिर्फ सीमित समय तक ही उड़ान भर सकते हैं या पूरी तरह निष्क्रिय हैं। 4. लंबी दूरी और रिफ्यूलिंग की कमी ईरान और इजरायल के बीच सीधी सीमा नहीं है। ऐसे में जेट्स को लंबी दूरी तय करनी होगी, जिसके लिए हवा में ईंधन भरने (air-to-air refueling) की जरूरत होती है- इसमें ईरान कमजोर है।   मिसाइल और ड्रोन: ईरान की असली ताकत जहां फाइटर जेट कमजोर हैं, वहीं ईरान ने मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया है। मुख्य हथियार: बैलिस्टिक मिसाइल: Fateh-110, Sejjil   क्रूज मिसाइल: Soumar   ड्रोन: Shahed-136   इनकी खासियत: लंबी दूरी तक सटीक हमला   कम लागत (एक ड्रोन ~20,000 डॉलर)   बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल   इसके उलट, एक इंटरसेप्टर मिसाइल (जैसे पैट्रियट) की कीमत 30-40 लाख डॉलर तक होती है। यानी ईरान “कम लागत में ज्यादा नुकसान” की रणनीति अपना रहा है।   रणनीति या मजबूरी? विशेषज्ञों का मानना है कि: यह पूरी तरह कमजोरी नहीं, बल्कि “असिमेट्रिक वॉरफेयर” (Asymmetric Warfare) की रणनीति है   ईरान जानबूझकर अपने जेट्स को बचाकर रख रहा है   ड्रोन और मिसाइल से दुश्मन के संसाधनों को थका रहा है   ईरान का फाइटर जेट इस्तेमाल न करना उसकी कमजोरी कम, रणनीति ज्यादा दिखता है। वह सीधे हवाई युद्ध में उतरने के बजाय कम लागत वाले और प्रभावी हथियारों- मिसाइल और ड्रोन- के जरिए दबाव बना रहा है।    

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0