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US passport and legal documents symbolizing Trump administration’s crackdown on unpaid child support dues
अमेरिका में ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला, चाइल्ड सपोर्ट नहीं चुकाने वालों के पासपोर्ट होंगे रद्द

अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. अब उन अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट रद्द किए जाएंगे, जिन पर बच्चों की देखभाल के लिए दिए जाने वाले “चाइल्ड सपोर्ट” का भारी बकाया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उन लोगों पर केंद्रित होगी जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं. क्या है नया नियम? अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिन माता-पिता पर 2,500 डॉलर (करीब 2.36 लाख रुपये) से ज्यादा का चाइल्ड सपोर्ट बकाया है, उनका पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है. यह कार्रवाई अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) के साथ मिलकर की जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं. क्या होता है चाइल्ड सपोर्ट? अमेरिका में तलाक या अलग रहने की स्थिति में अदालत यह तय करती है कि बच्चे की पढ़ाई, इलाज, खाना, कपड़े और दूसरी जरूरतों के लिए माता-पिता में से किसे कितनी आर्थिक सहायता देनी होगी. इसी भुगतान को “चाइल्ड सपोर्ट” कहा जाता है. अगर कोई अभिभावक लंबे समय तक यह राशि नहीं देता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी कानून के तहत पासपोर्ट पाने या बनाए रखने के लिए चाइल्ड सपोर्ट से जुड़े दायित्वों का पालन करना जरूरी है. मंत्रालय के मुताबिक: 2,500 डॉलर से ज्यादा बकाया होने पर पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है बकाया चुकाए बिना नया पासपोर्ट जारी नहीं होगा रद्द पासपोर्ट यात्रा के लिए मान्य नहीं रहेगा सरकार का कहना है कि यह कदम माता-पिता को बच्चों के प्रति अपनी “कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी” निभाने के लिए प्रेरित करेगा. विदेश में फंसे लोगों के साथ क्या होगा? अगर किसी व्यक्ति का पासपोर्ट उस समय रद्द किया जाता है जब वह अमेरिका से बाहर हो, तो उसे अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करना होगा. वहां से उसे केवल अमेरिका लौटने के लिए एक इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्युमेंट दिया जाएगा. पहले क्या नियम था? अब तक आमतौर पर यह कार्रवाई केवल तब होती थी जब कोई व्यक्ति अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश करता था. लेकिन नए फैसले के बाद सरकार सीधे सक्रिय होकर ऐसे लोगों के पासपोर्ट रद्द कर सकती है, जिन पर बड़ा बकाया है. लोगों को क्या सलाह दी गई? अमेरिकी अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को सलाह दी है कि वे संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर जल्द भुगतान व्यवस्था तय करें, ताकि पासपोर्ट रद्द होने जैसी कार्रवाई से बचा जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम बच्चों के आर्थिक अधिकारों को मजबूत करने और बकाया भुगतान वसूलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Massive ash cloud rises after Mount Dukono volcanic eruption in Indonesia killing several hikers
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट से बड़ा हादसा, 3 टूरिस्ट की दर्दनाक मौत

इंडोनेशिया में एक खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट ने बड़ा हादसा पैदा कर दिया. Mount Dukono ज्वालामुखी में हुए विस्फोट के दौरान कम से कम तीन हाइकर्स की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को बचाकर नीचे लाया गया. हादसे के बाद आसमान में करीब 10 किलोमीटर ऊंचाई तक राख और धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया. चेतावनी के बावजूद पहुंचे थे हाइकर्स स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, ज्वालामुखी के आसपास के इलाके को पहले ही “नो-गो जोन” घोषित किया गया था. वैज्ञानिकों और प्रशासन ने दिसंबर से लगातार चेतावनी जारी कर रखी थी कि लोग क्रेटर के आसपास न जाएं, क्योंकि वहां भूकंपीय गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं. इसके बावजूद करीब 20 हाइकर्स का समूह ज्वालामुखी की ढलानों पर पहुंच गया. इनमें 9 पर्यटक सिंगापुर के बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी इंडोनेशियाई नागरिक थे. अचानक फटा ज्वालामुखी रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को अचानक ज्वालामुखी में तेज विस्फोट हुआ और गर्म राख, धुआं तथा गैस का गुबार तेजी से ऊपर उठा. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख लगभग 10 किलोमीटर तक आसमान में फैल गई. हादसे में: 2 सिंगापुर के पर्यटकों और 1 स्थानीय नागरिक की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि कई लोग किसी तरह नीचे उतरने में सफल रहे, लेकिन मृतकों के शव अभी भी पहाड़ी इलाके में फंसे हुए हैं. 15 लोग सुरक्षित बचाए गए Agence France-Presse की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने बताया कि अब तक 15 हाइकर्स को सुरक्षित नीचे लाया जा चुका है. हालांकि कुछ लोगों के बारे में शुरुआती घंटों में जानकारी स्पष्ट नहीं थी. पुलिस ने गाइड और एक पोर्टर को हिरासत में लिया है. उन पर प्रतिबंधित इलाके में लोगों को ले जाने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. सोशल मीडिया कंटेंट के लिए लिया जोखिम? स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया वीडियो और तस्वीरें बनाने के लिए जोखिम भरे इलाकों में पहुंच जाते हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार: “स्थानीय लोग खतरे को समझते हैं और वहां जाने से बचते हैं, लेकिन कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं.” पहले ही जारी थी चेतावनी Center for Volcanology and Geological Hazard Mitigation ने पहले ही पर्यटकों को मालुपांग वारिरांग क्रेटर से कम से कम 4 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी थी. वैज्ञानिकों ने वहां बढ़ती भूकंपीय गतिविधि और संभावित विस्फोट का खतरा बताया था. “रिंग ऑफ फायर” में स्थित है इंडोनेशिया इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय सक्रिय देशों में शामिल है. यह देश प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. देश में लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं और कई इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाती है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Satellite imagery showing damage at US military bases in the Middle East after reported Iranian strikes
Middle East War: ईरानी हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान! 8 देशों में 16 बेस क्षतिग्रस्त होने का दावा

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों में 8 देशों में फैले अमेरिका के कम से कम 16 सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य रणनीति और सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। CNN रिपोर्ट में बड़ा दावा CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जांच और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने हालिया हमलों में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में खासतौर पर: एडवांस्ड रडार सिस्टम कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर एयरक्राफ्ट और सपोर्ट सिस्टम को टारगेट किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ठिकाने इतने ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए हैं कि वे फिलहाल आंशिक इस्तेमाल के लायक भी नहीं बचे। 8 देशों में फैले ठिकाने बने निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के 8 अलग-अलग देशों में स्थित हैं। हालांकि सभी देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह अमेरिकी क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन ठिकानों का इस्तेमाल आमतौर पर: निगरानी अभियानों एयर ऑपरेशंस लॉजिस्टिक सपोर्ट क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय के लिए किया जाता है। मरम्मत या बंद? अमेरिका के सामने चुनौती रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और खाड़ी देशों के अधिकारियों के बीच इस बात पर मतभेद है कि इन ठिकानों की मरम्मत की जाए या कुछ को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। कुछ अधिकारी मानते हैं कि इन ठिकानों को दोबारा तैयार करना बेहद महंगा और समय लेने वाला होगा। वहीं, रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन बेस को छोड़ना अमेरिका के लिए क्षेत्रीय प्रभाव कम कर सकता है। महंगे सिस्टम को हुआ नुकसान ईरानी हमलों में जिन सिस्टम्स को नुकसान पहुंचा है, उनमें हाई-टेक रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिस्टम सीमित संख्या में उपलब्ध होते हैं और इन्हें बदलना काफी महंगा साबित हो सकता है। यही वजह है कि इन हमलों को सिर्फ सामरिक नहीं, बल्कि आर्थिक झटका भी माना जा रहा है। युद्ध में अमेरिका का भारी खर्च पेंटागन के कंट्रोलर जूल्स जे हर्स्ट III ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान के साथ संघर्ष में अब तक अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। हालांकि कुछ आकलनों के मुताबिक, वास्तविक खर्च 40 से 50 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। अमेरिकी मौजूदगी पर उठे सवाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से उसकी रणनीतिक नीति का हिस्सा रही है। लेकिन लगातार हमलों और बढ़ते खर्च ने इस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। बढ़ता क्षेत्रीय तनाव ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। परमाणु विवाद, समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों में टकराव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आगे क्या? फिलहाल अमेरिका की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन रिपोर्ट्स के बाद यह साफ है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि अब सैन्य ढांचे को भी सीधे प्रभावित कर रहा है।

surbhi मई 2, 2026 0
Iranian Revolutionary Guard personnel at a blast site in Zanjan after a deadly explosion during bomb disposal operations
सीजफायर के बाद भी ईरान में बड़ा हादसा: जंजान में भीषण विस्फोट, IRGC के 14 जवानों की मौत

युद्धविराम के बावजूद ईरान में खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। उत्तर-पश्चिमी जंजान में शुक्रवार को हुए एक भीषण विस्फोट ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के अवशेष कितने घातक हो सकते हैं। इस हादसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बम निष्क्रिय करने के दौरान हुआ हादसा ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह विस्फोट उस समय हुआ जब IRGC की एक विशेष बम निरोधक टीम इलाके में सफाई अभियान चला रही थी। यह टीम हालिया हवाई हमलों के बाद बचे हुए गोला-बारूद को खोजकर निष्क्रिय कर रही थी अचानक एक अज्ञात विस्फोटक सक्रिय हो गया धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई जवान मौके पर ही मारे गए मारे गए जवान “अंसार अल-महदी” यूनिट के अनुभवी सदस्य थे, जिन्हें ऐसे जोखिम भरे अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। बिना फटे बम बने सबसे बड़ा खतरा प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि विस्फोट का कारण क्लस्टर बम या बारूदी सुरंग हो सकता है, जो हवाई हमलों के दौरान गिराए गए थे लेकिन फटे नहीं थे। ऐसे बम जमीन में छिपे रहते हैं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं इन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन और खतरनाक होता है जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है युद्ध खत्म होने के बाद भी ये ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) वर्षों तक खतरा बने रहते हैं। सीजफायर के बाद सबसे बड़ी सैन्य क्षति 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह IRGC के लिए अब तक की सबसे बड़ी जनहानि बताई जा रही है। यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि युद्ध के प्रभाव सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसके बाद भी जानलेवा खतरे बने रहते हैं। IRGC के मुताबिक: अब तक 15,000 से ज्यादा बिना फटे गोला-बारूद की पहचान की जा चुकी है इनको निष्क्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है कई इलाके अभी भी ‘हाई रिस्क जोन’ बने हुए हैं आम नागरिक और खेती भी खतरे में अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह खतरा सिर्फ सैन्य बलों तक सीमित नहीं है। कई बम रिहायशी इलाकों और गांवों के पास पड़े हैं कृषि भूमि में भी भारी मात्रा में विस्फोटक मौजूद हैं फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, लगभग 1,200 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र अभी भी जोखिम में है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है और खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। युद्ध की पृष्ठभूमि और बढ़ता वैश्विक तनाव इस हादसे की पृष्ठभूमि हालिया संघर्ष से जुड़ी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए इस संघर्ष में 4000 से अधिक लोगों की जान गई वैश्विक दबाव और बढ़ते नुकसान के बाद 8 अप्रैल को सीजफायर लागू हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला सीजफायर के बाद भी इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। अमेरिका-ईरान वार्ता में जारी गतिरोध इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों में मतभेद बरकरार हैं बातचीत जारी है, लेकिन ठोस समाधान अभी दूर नजर आ रहा है ईरान ने युद्ध समाप्त करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है।  

surbhi मई 2, 2026 0
deadly ISIS attack and abduction incident
नाइजीरिया में ISIS का खूनी हमला, 29 लोगों की मौत; बच्चों के अपहरण से बढ़ी चिंता

Islamic State West Africa Province से जुड़े आतंकियों ने नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक गांव पर हमला कर कम से कम 29 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना ने देश में गहराते सुरक्षा संकट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कहां हुआ हमला? यह हमला Adamawa राज्य के गोम्बी स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्र के गयाकू गांव में रविवार रात हुआ। हमलावरों ने गांव पर धावा बोलकर अंधाधुंध गोलीबारी की। आतंकी संगठन ने बाद में टेलीग्राम पर हमले की जिम्मेदारी ली। राज्यपाल ने जताया दुख Ahmadu Umaru Fintiri ने घटना को "दुखद और अस्वीकार्य" बताया। उन्होंने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। नाइजीरिया में बढ़ता आतंकी खतरा Nigeria पिछले दो दशकों से आतंकवाद, अपहरण और सशस्त्र हमलों से जूझ रहा है। खासकर उत्तरी और पूर्वोत्तर इलाकों में सुरक्षा स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। देश में सक्रिय दो प्रमुख ISIS समर्थित गुट हैं: Islamic State West Africa Province लाकुरावा (Lakurawa) प्रारंभिक संकेत ISWAP की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। उसी दिन बच्चों का अपहरण हमले के कुछ घंटों बाद Kogi राज्य में बंदूकधारियों ने एक अनाथालय-सह-स्कूल पर हमला कर 23 बच्चों का अपहरण कर लिया। हालांकि, सुरक्षा बलों ने 15 बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया है, जबकि 8 की तलाश जारी है। स्कूल बने आसान निशाना नाइजीरिया में स्कूलों और छात्रों का अपहरण एक गंभीर समस्या बन चुका है। अपराधी फिरौती और प्रचार पाने के लिए बच्चों को निशाना बनाते हैं। अमेरिका भी कर रहा मदद फरवरी 2026 में United States ने नाइजीरियाई सेना को सलाह और प्रशिक्षण देने के लिए सैनिक भेजे थे। लगातार हो रहे हमले यह दिखाते हैं कि नाइजीरिया की सुरक्षा चुनौती अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है।      

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
JD Vance Pakistan visit postponed amid US-Iran nuclear deal tensions and stalled talks
ईरान की चुप्पी से अटकी बातचीत, JD Vance की पाकिस्तान यात्रा टली

  ईरान के जवाब का इंतजार, दौरा फिलहाल स्थगित अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है। यह दौरा ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर अहम बातचीत के लिए प्रस्तावित था, लेकिन तेहरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को मंगलवार सुबह इस्लामाबाद के लिए रवाना होना था, जहां बुधवार को वार्ता होनी थी। हालांकि, अब यह यात्रा अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। सीजफायर की समयसीमा के बीच बढ़ा दबाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समाप्त होने के करीब था। इसी बीच Donald Trump ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके। अमेरिका का कहना है कि वह अभी भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी बरकरार है। ईरान ने ठुकराया दबाव, बातचीत पर सवाल ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि “धमकी के साए में बातचीत संभव नहीं है।” ईरानी अधिकारियों ने सीजफायर बढ़ाने के फैसले को एक “रणनीतिक चाल” बताया और इसे समय खरीदने की कोशिश करार दिया। वहीं, सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। आगे क्या? अनिश्चितता के बीच टिकी निगाहें फिलहाल अमेरिका यह संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है कि ईरान के वार्ताकार समझौते के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं या नहीं। अगर स्थिति स्पष्ट होती है, तो JD Vance की पाकिस्तान यात्रा दोबारा तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गतिरोध के चलते क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ सकता है और कूटनीतिक समाधान की राह और कठिन हो सकती है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Donald Trump with Modi
Donald Trump ने फिर की Narendra Modi की तारीफ, बोले- “अच्छा काम कर रहे”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर प्रधानमंत्री Narendra Modi की तारीफ करते हुए उन्हें “अच्छा काम करने वाला नेता” बताया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सीजफायर की कोशिशों के बीच दोनों नेताओं के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसे ट्रंप ने “बहुत सकारात्मक” करार दिया। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पीएम मोदी के साथ बातचीत काफी अच्छी रही। उन्होंने कहा, “वह मेरे अच्छे मित्र हैं और बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” सीजफायर और मिडिल ईस्ट पर चर्चा राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति, खासकर इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है। पाकिस्तान दौरे के दिए संकेत ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान के साथ सीजफायर समझौता होता है, तो वह पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर इस्लामाबाद में डील साइन होती है, तो मैं वहां जा सकता हूं।” उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वह शांति प्रक्रिया में अच्छा काम कर रहा है और अमेरिका के साथ सहयोग कर रहा है। कूटनीतिक कोशिशें तेज यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में कई स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इसमें ईरान के साथ बातचीत, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि हिजबुल्लाह जैसे समूह सीजफायर का पालन करेंगे और क्षेत्र में हिंसा कम होगी।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Indian Embassy advisory urging citizens to leave Iran amid tensions and ceasefire uncertainty in Middle East
ईरान संकट के बीच भारत की सख्त चेतावनी: जल्द से जल्द देश छोड़ें भारतीय नागरिक

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है। यह सलाह ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है, जिससे हालात में अस्थायी राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन भारत ने जोखिम को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया है। Embassy of India in Tehran ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक संदेश में भारतीय नागरिकों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे “जितना जल्दी हो सके, ईरान छोड़ दें।” दूतावास ने यह भी निर्देश दिया है कि नागरिक केवल उन्हीं सुरक्षित और सुझाए गए मार्गों का उपयोग करें और बिना पूर्व अनुमति किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास जाने की कोशिश न करें। यह एडवाइजरी ऐसे समय पर आई है जब युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 14 दिन का यह सीजफायर केवल अस्थायी राहत हो सकता है और हालात फिर से बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी दूतावास ने भारतीयों को 48 घंटे तक घरों में रहने, सैन्य ठिकानों, बिजली संयंत्रों और ऊंची इमारतों से दूर रहने की सलाह दी थी। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Donald Trump ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति नहीं सुधरी, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं। भारतीय दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल भी जारी किए हैं, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में नागरिक तुरंत संपर्क कर सकें। स्पष्ट है कि भले ही युद्धविराम की घोषणा से उम्मीद जगी हो, लेकिन जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Bushehr nuclear power plant in Iran with risk of radiation leak and Gulf region impact.
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर खतरा: हमले से खाड़ी क्षेत्र में रेडिएशन तबाही का डर

ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर बढ़ते खतरे ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रूस और ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस परमाणु संयंत्र पर हमला हुआ, तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में विनाशकारी हो सकता है। प्लांट के पास गिरा रॉकेट, बढ़ी चिंता इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के मुताबिक, हाल ही में बुशहर प्लांट के पास एक रॉकेट गिरा है। पिछले कुछ हफ्तों में यह चौथी ऐसी घटना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रिएक्टर पर सीधा हमला हुआ, तो रेडिएशन सैकड़ों किलोमीटर तक फैल सकता है। पूरे क्षेत्र में फैल सकती है ‘परमाणु आपदा’ IAEA ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में- कई शहरों को खाली कराना पड़ सकता है बड़े पैमाने पर जनहानि हो सकती है हवा और पानी दोनों जहरीले हो सकते हैं इसे विशेषज्ञों ने “रीजनल कैटास्ट्रोफी” यानी क्षेत्रीय आपदा बताया है। पीने के पानी का बड़ा संकट खाड़ी देशों में पीने का पानी बड़े पैमाने पर समुद्र के पानी को साफ कर तैयार किया जाता है। लेकिन अगर समुद्र का पानी रेडियोधर्मी तत्वों से दूषित हो गया, तो- कतर के पास सिर्फ 3 दिन का पानी बचेगा कुवैत और बहरीन अपनी 90% ज़रूरतों के लिए इसी पर आश्रित सऊदी अरब लगभग 70% पानी समुद्र से लेता है ऐसे में पूरे क्षेत्र में भीषण जल संकट पैदा हो सकता है। हवा और समुद्र से फैलेगा जहर रिपोर्ट्स के अनुसार, बुशहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि- जहरीली हवाएं UAE, कतर और सऊदी अरब तक पहुंच सकती हैं समुद्री लहरें 10–15 दिनों में कुवैत और बहरीन के तटों तक रेडिएशन फैला सकती हैं सेहत पर गंभीर असर IAEA और WHO के अनुसार- लोगों को स्किन बर्न और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं कैंसर का खतरा कई पीढ़ियों तक बना रहेगा सीजियम-137 जैसे रेडियोधर्मी तत्व दशकों तक मिट्टी और भोजन में बने रह सकते हैं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर अगर ऐसी आपदा हुई, तो- मछली उद्योग खत्म हो सकता है तेल सप्लाई प्रभावित होगी वैश्विक बाजार में भारी आर्थिक संकट आ सकता है फिलहाल स्थिति सामान्य, लेकिन खतरा बरकरार राहत की बात यह है कि अभी रेडिएशन स्तर सामान्य बताया गया है। लेकिन लगातार बढ़ते हमलों के बीच यह खतरा टला नहीं है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
कतर का बड़ा फैसला: पाकिस्तानियों के लिए ‘वीजा ऑन अराइवल’ बंद, भारतीयों को राहत जारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल (VoA) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले से कतर जाने वाले पाकिस्तानियों को अब पहले से वीजा लेना अनिवार्य हो गया है। पाकिस्तान को क्यों लगा झटका? कतर में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अपने नागरिकों को जारी एडवाइजरी में कहा है कि: बिना पूर्व वीजा के कतर पहुंचने पर एंट्री रोकी जा सकती है एयरपोर्ट पर यात्रियों को वापस भेजा भी जा सकता है मौजूदा हालात को देखते हुए यह सुविधा फिलहाल निलंबित है विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक संतुलन की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है। भारत को मिल रही राहत जहां पाकिस्तान के लिए नियम सख्त हुए हैं, वहीं भारत के साथ कतर के मजबूत संबंधों का असर साफ दिख रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए: वीजा ऑन अराइवल सुविधा जारी 30 दिन का फ्री वीजा मिल रहा है जरूरत पड़ने पर वीजा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है यह फैसला ऐसे समय में भी बरकरार है जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। भारतीय यात्रियों के लिए जरूरी शर्तें कतर जाने वाले भारतीयों को कुछ नियमों का पालन करना होगा: पासपोर्ट कम से कम 6 महीने वैध हो रिटर्न या आगे की यात्रा का टिकट होना जरूरी होटल बुकिंग या रहने की व्यवस्था का प्रमाण हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य क्षेत्रीय तनाव का असर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों की नीतियों पर भी दिखने लगा है। कतर का यह फैसला सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों से जुड़ा माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Russian An-26 military transport aircraft crash
क्रीमिया में रूस का सैन्य विमान An-26 क्रैश, 29 लोगों की मौत

रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान An-26 मंगलवार को क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 23 यात्री और 6 क्रू मेंबर शामिल थे। दुर्घटना के बाद किसी के भी जीवित बचने की खबर नहीं है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, विमान से पहले संपर्क टूट गया था। इसके कुछ समय बाद पता चला कि विमान चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे के कारणों की जांच जारी है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। जांच जारी, तकनीकी खराबी की आशंका रूसी अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के पीछे असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल तकनीकी खामी को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। An-26 विमान की खासियत An-26 सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे एंटोनोव कंपनी ने विकसित किया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान के परिवहन के लिए किया जाता है। यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसमें छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि इसका उपयोग दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। इसके पीछे मौजूद बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पुराना डिजाइन, उठते रहे हैं सवाल करीब 50 साल पुराने डिजाइन वाले इस विमान की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी इस तरह के विमानों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। हालांकि, आज भी कई देशों की वायुसेनाएं इसका उपयोग कर रही हैं, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Damaged aircraft at Mashhad Airport after alleged US strike amid Iran conflict, raising aviation safety concerns
मशहद एयरपोर्ट पर बड़ा हमला: भारत आने वाले विमान पर अमेरिकी स्ट्राइक का दावा, ईरान ने बताया ‘वॉर क्राइम’

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक गंभीर घटना सामने आई है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, United States की ओर से किए गए हवाई हमले में Iran के Mashhad International Airport पर खड़ा एक नागरिक विमान क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह विमान Mahan Air का था, जो भारत के New Delhi के लिए एक मानवीय मिशन के तहत रवाना होने वाला था। मानवीय मिशन पर था विमान रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान दवाइयों और मेडिकल उपकरणों को लाने-ले जाने के मिशन का हिस्सा था। भारत और ईरान के बीच चल रहे मानवीय सहयोग के तहत इसे दिल्ली आना था। हालांकि, हमले के बाद यह मिशन बाधित हो गया है। इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ईरान का कड़ा रुख: ‘यह युद्ध अपराध’ ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए “वॉर क्राइम” करार दिया है। ईरान ने Chicago Convention और Montreal Convention का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी नागरिक विमान को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, Geneva Conventions के तहत भी मानवीय मिशन से जुड़े नागरिक संसाधनों पर हमला करना युद्ध अपराध माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस घटना की तत्काल जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन और मानवीय कानूनों के लिए एक बड़ा झटका होगा। बढ़ता खतरा: नागरिक उड्डयन पर असर यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष तेज हो रहा है। इससे नागरिक विमानों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं, खासकर उन इलाकों में जहां युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Wreckage of Colombian Air Force C-130 Hercules aircraft after crash with rescue teams and smoke at accident site
कोलंबिया में एयरफोर्स विमान क्रैश: 66 की मौत, 50+ घायल; टेकऑफ के तुरंत बाद हादसा

कोलंबिया में सोमवार को एक बड़ा सैन्य विमान हादसा हो गया। एयरफोर्स का हरक्यूलिस C-130 विमान टेकऑफ के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें अब तक 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे में 4 सैनिक अभी भी लापता हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में 114 सैनिक और 11 क्रू मेंबर सवार थे। एक सैन्य सूत्र के अनुसार मृतकों में 58 सैनिक, 6 वायुसेना कर्मी और 2 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। टेकऑफ के 1.5 किमी बाद हुआ हादसा यह दुर्घटना पेरू सीमा के पास दक्षिणी अमेजन क्षेत्र के प्यूर्टो लेगुइजामो में हुई। रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज के अनुसार, विमान रनवे से करीब 1.5 किलोमीटर दूर जाकर गिरा। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिससे उसमें मौजूद गोला-बारूद फटने लगा और स्थिति और भी भयावह हो गई। राष्ट्रपति ने जताया दुख, दिए सुधार के संकेत कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर त्रासदी है और जवानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पेट्रो ने संकेत दिए कि सेना के आधुनिकीकरण में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर अधिकारी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। सरकार ने नए हेलिकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट विमान और एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। स्थानीय लोगों ने बचाई जानें हादसे के तुरंत बाद आसपास के गांवों के लोग राहत कार्य में जुट गए। कई घायलों को मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाया गया। पहले उन्हें स्थानीय क्लीनिक में भर्ती किया गया, फिर गंभीर घायलों को बोगोटा जैसे बड़े शहरों में एयरलिफ्ट किया गया। आतंकी एंगल से इनकार, जांच जारी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी आतंकी हमले या साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। फिलहाल इसे एक दुर्घटना माना जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, टेकऑफ के तुरंत बाद इंजन फेल होने की आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है। क्या है C-130 हरक्यूलिस विमान? C-130 हरक्यूलिस दुनिया के सबसे भरोसेमंद सैन्य परिवहन विमानों में से एक माना जाता है। सैनिकों, हथियारों और राहत सामग्री की ढुलाई में इस्तेमाल कच्चे और छोटे रनवे पर भी उतरने में सक्षम भारी उपकरण और वाहनों को ले जाने की क्षमता मेडिकल इमरजेंसी और आपदा राहत में उपयोग यह विमान एक बार में करीब 19,000 किलोग्राम तक वजन एयरड्रॉप कर सकता है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Smoke rising near US Embassy in Baghdad after suspected missile or drone attack.
बगदाद में United States दूतावास पर मिसाइल/ड्रोन हमला, इलाके में मचा हड़कंप

  Iraq की राजधानी Baghdad में स्थित United States के दूतावास पर हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दूतावास परिसर को निशाना बनाकर मिसाइल या ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद इलाके में धुआं उठता देखा गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास की इमारत से टकराई, जिसके बाद परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। हालांकि इस हमले में हुए नुकसान या हताहतों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार मिसाइल दूतावास परिसर के भीतर बने हेलिपैड पर गिरी। दूसरी ओर Agence France-Presse (AFP) ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दूतावास पर एक ड्रोन के जरिए हमला किया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में बगदाद में हुए एक अन्य हमले में Iran समर्थित दो लड़ाकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह घटना हालात को और ज्यादा गंभीर बना सकती है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं और दूतावास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0