Global Security

Fighter jets and military drones amid reports of heavy US losses in alleged Iran conflict
ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान: 42 विमान तबाह होने के दावे से मचा हड़कंप

Iran और United States के बीच कथित युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी संसद से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि ईरान पर 40 दिनों तक चले सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका के 42 विमान या तो नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस दावे के बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य क्षमता, युद्ध रणनीति और अभियान की वास्तविक कीमत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्या कहा गया रिपोर्ट में? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और Israel ने मिलकर ईरान के खिलाफ कथित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” चलाया था। इस अभियान के तहत हवाई, समुद्री और मिसाइल हमले किए गए। बताया गया कि इस संघर्ष में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में जिन सैन्य संसाधनों के नुकसान का दावा किया गया, उनमें शामिल हैं: चार F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, एक F-35A लाइटनिंग द्वितीय लड़ाकू विमान, एक ए-10 थंडरबोल्ट द्वितीय हमला विमान, सात KC-135 स्ट्रैटोटैंकर ईंधन भरने वाले विमान, एक E-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान, दो एमसी-130जे कमांडो द्वितीय विशेष अभियान विमान, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन द्वितीय हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं.  रिपोर्ट में कहा गया कि आंकड़े आगे बदल सकते हैं क्योंकि कई सूचनाएं अब भी गोपनीय हैं। 29 अरब डॉलर तक पहुंची युद्ध लागत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग की सुनवाई में पेंटागन के कार्यवाहक कंट्रोलर Jules W. Hurst III ने कहा कि ईरान में सैन्य अभियान की लागत लगभग 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई। ईरान ने क्या कहा? ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस रिपोर्ट को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने खुद अपने भारी नुकसान को स्वीकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि: “ईरान की सेना दुनिया की पहली सेना बनी जिसने F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया।” अराघची ने दावा किया कि ईरान ने इस युद्ध से कई रणनीतिक सबक सीखे हैं और भविष्य में दुनिया को “और बड़े सरप्राइज” देखने को मिल सकते हैं। F-35 को गिराने का दावा कितना बड़ा? F-35 Lightning II को दुनिया के सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट्स में गिना जाता है। यदि किसी देश द्वारा इसे मार गिराने का दावा सही साबित होता है, तो यह आधुनिक सैन्य इतिहास की बड़ी घटनाओं में शामिल हो सकता है। हालांकि अमेरिका की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी नुकसान की विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं, तो यह मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Iranian Parliament discusses controversial bill linked to Donald Trump and Benjamin Netanyahu amid rising Middle East tensions.
ट्रंप और नेतन्याहू पर इनाम वाला बिल! ईरानी संसद में चर्चा से बढ़ा वैश्विक तनाव

ईरान की संसद में एक ऐसे प्रस्तावित कानून पर चर्चा की खबर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की हत्या करने वाले को 50 मिलियन यूरो यानी करीब 560 करोड़ रुपये तक का इनाम देने का प्रावधान शामिल हो सकता है। क्या है पूरा मामला? ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बिल का नाम “इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” रखा गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान के सांसद Ebrahim Azizi ने कहा कि ईरान अपने शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार मानता है। ट्रंप और नेतन्याहू पर गंभीर आरोप ईरानी नेताओं का आरोप है कि फरवरी में हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के पीछे अमेरिका और इजरायल की भूमिका थी। प्रस्तावित बिल में अमेरिकी सैन्य अधिकारी एडमिरल Brad Cooper का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। संसद में क्या कहा गया? ईरानी सांसद Mahmoud Nabavian ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द ही ऐसे प्रस्ताव पर मतदान कर सकती है, जिसमें “ट्रंप और नेतन्याहू को खत्म करने” वाले को इनाम देने की बात शामिल होगी। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां ईरान में इससे पहले भी अमेरिकी नेताओं के खिलाफ कड़े बयान दिए जाते रहे हैं, खासकर ईरानी जनरल Qasem Soleimani की हत्या के बाद। कई ईरान समर्थक समूह पहले भी ट्रंप के खिलाफ इनाम घोषित करने जैसे अभियान चला चुके हैं। रिपोर्ट्स में “ब्लड कोवेनेंट” नामक अभियान का जिक्र किया गया है, जिसने कथित तौर पर करोड़ों डॉलर जुटाने का दावा किया था। अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया? इससे पहले ट्रंप प्रशासन साफ कह चुका है कि अगर अमेरिकी नेताओं के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की कोशिश हुई तो उसका बेहद कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संघर्ष और पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव को लेकर पहले से ही टकराव बना हुआ है। ऐसे में इस तरह की रिपोर्ट्स ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Australian Federal Police detain women linked to ISIS after arrival at Melbourne International Airport
ISIS से जुड़ी महिलाओं की ऑस्ट्रेलिया वापसी, एयरपोर्ट पर ही तीन गिरफ्तार

ऑस्ट्रेलिया में उस समय बड़ा सुरक्षा और कानूनी मामला सामने आया, जब सीरिया में आतंकी संगठन Islamic State से जुड़ी महिलाओं को वापस लाया गया और मेलबर्न एयरपोर्ट पर उतरते ही तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया. इन पर मानवता के खिलाफ अपराध, गुलामी और आतंकी संगठन का समर्थन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तारी ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के मुताबिक, ये महिलाएं गुरुवार शाम Qatar Airways की फ्लाइट से Melbourne International Airport पहुंचीं. जैसे ही वे एयरपोर्ट पर उतरीं, ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार महिलाओं में: 53 वर्षीय एक महिला उसकी 31 वर्षीय बेटी और 32 वर्षीय जनई सफर शामिल हैं. इनके साथ चार अन्य महिलाएं और नौ बच्चे भी ऑस्ट्रेलिया लौटे हैं. “गुलाम” बनाकर रखने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, 53 वर्षीय महिला पर आरोप है कि उसने सीरिया में लगभग 10,000 अमेरिकी डॉलर देकर एक महिला को “गुलाम” के रूप में खरीदा था. वहीं उसकी बेटी पर आरोप है कि उसने जानबूझकर उस महिला को अपने घर में गुलाम बनाकर रखा. ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के काउंटर-टेररिज्म अधिकारियों ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है. ISIS के शासन में गई थीं सीरिया पुलिस के अनुसार, मां और बेटी 2014 में सीरिया गई थीं, जहां उन्होंने ISIS के तथाकथित “खलीफा शासन” का समर्थन किया. तीसरी आरोपी जनई सफर पर आरोप है कि वह 2015 में अपने पति के पास सीरिया गई थी, जो ISIS का लड़ाका था. उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और आतंकी संगठन में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. रोज कैंप में रह रही थीं महिलाएं ये महिलाएं 2019 में ISIS के पतन के बाद कुर्द बलों द्वारा पकड़ी गई थीं. तब से वे सीरिया के कुख्यात Roj Camp में रह रही थीं. रोज कैंप में ISIS से जुड़े परिवारों, महिलाओं और बच्चों को रखा जाता है. लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन कैंपों को लेकर मानवाधिकार और सुरक्षा को लेकर बहस होती रही है. ऑस्ट्रेलिया में छिड़ी नई बहस इन महिलाओं की वापसी के बाद ऑस्ट्रेलिया में “ISIS ब्राइड्स” को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्री Tony Burke ने कहा कि इन महिलाओं ने एक खतरनाक आतंकी संगठन का साथ देने का “भयानक फैसला” किया था. वहीं मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कैंपों में फंसे बच्चों और महिलाओं को मानवीय आधार पर वापस लाना जरूरी है, खासकर उन बच्चों के लिए जो संघर्ष क्षेत्र में पैदा हुए. कानून के तहत होगी सख्त कार्रवाई ऑस्ट्रेलिया में 2010 के दशक के दौरान सीरिया के ISIS-नियंत्रित इलाकों की यात्रा को अपराध घोषित कर दिया गया था. इसी वजह से लौटने वाले लोगों पर आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में मुकदमे चलाए जा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया इससे पहले भी 2019, 2022 और 2025 में सीरिया से कुछ महिलाओं और बच्चों को वापस ला चुका है, लेकिन इस बार लगे आरोप कहीं ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं.  

surbhi मई 8, 2026 0
Chinese naval warships operating near Taiwan amid rising Indo-Pacific military tensions
ताइवान के पास बढ़ी चीनी सैन्य गतिविधि, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव

Indo-Pacific Tension: मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके आसपास चीन के सात नौसैनिक युद्धपोत और एक सरकारी पोत सक्रिय पाए गए हैं. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन-ताइवान संबंधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ताइवान के आसपास दिखे चीनी युद्धपोत ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि ताइवान के आसपास सात PLAN (People’s Liberation Army Navy) जहाज और एक आधिकारिक पोत की गतिविधि दर्ज की गयी है. मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने पूरी स्थिति पर नजर रखी और आवश्यक प्रतिक्रिया दी. हालांकि इस दौरान चीनी वायुसेना की कोई गतिविधि दर्ज नहीं की गयी. लगातार दूसरे दिन बढ़ी सैन्य गतिविधि यह लगातार दूसरा दिन है जब ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधि देखी गयी है. इससे एक दिन पहले भी ताइवान ने एक चीनी सैन्य विमान, छह नौसैनिक जहाज और एक सरकारी पोत की मौजूदगी दर्ज की थी. ताइवान के मुताबिक, उस दौरान एक चीनी सैन्य विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के उत्तरी हिस्से में भी प्रवेश कर गया था. इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला संकेत माना जाता है. चीन की “ग्रे ज़ोन” रणनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब ताइवान पर दबाव बनाने के लिए “ग्रे ज़ोन टैक्टिक्स” का इस्तेमाल कर रहा है. इसका मतलब है कि बिना खुला युद्ध छेड़े लगातार सैन्य मौजूदगी और गतिविधियों के जरिए दबाव बनाना. इस रणनीति के तहत चीन नियमित रूप से अपने नौसैनिक जहाजों और विमानों को ताइवान के आसपास भेजता है, ताकि सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस बार केवल नौसैनिक गतिविधि और वायुसेना की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि चीन फिलहाल सीमित लेकिन लगातार दबाव की नीति अपना रहा है. ताइवान ने कहा- स्थिति पर नजर ताइवान की सेना ने कहा कि उसने पूरी स्थिति पर नजर रखी और जरूरत के मुताबिक जवाबी कदम उठाये. हालांकि सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसकी प्रतिक्रिया क्या रही. लगातार दो दिनों तक चीनी नौसैनिक गतिविधियों के बढ़ने से यह संकेत मिल रहे हैं कि बीजिंग क्षेत्र में अपना दबदबा लगातार दिखाना चाहता है. ताइवान-चीन विवाद क्या है? चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और “वन चाइना पॉलिसी” के तहत उस पर दावा करता है. दूसरी तरफ ताइवान खुद को अलग लोकतांत्रिक शासन वाला क्षेत्र मानता है, जिसकी अपनी सरकार, सेना और आर्थिक व्यवस्था है. इतिहास के अनुसार, 1895 में चीन-जापान युद्ध के बाद ताइवान जापान के नियंत्रण में चला गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह फिर चीन के प्रभाव में आया, लेकिन इसकी राजनीतिक स्थिति को लेकर विवाद आज तक जारी है. इंडो-पैसिफिक में बढ़ी वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट संकट के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिविधियां लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में बड़े सैन्य अभ्यास या और आक्रामक कदम भी देखने को मिल सकते हैं.  

surbhi मई 7, 2026 0
IAS officers posting delay
12 आईएएस समेत 72 अफसरों को पोस्टिंग का इंतजार

रांची। राज्य भर में प्रशासनिक सेवा के 72 अधिकारी बिना पोस्टिंग के बैठे हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। इन 72 अधिकारियों में 12 आईएएस अधिकारी हैं। 17 अप्रैल की रात राज्य सरकार ने 17 जिलों के उपायुक्तों का तबादला किया था। उस तबादला में 11 जिलों के डीसी की कहीं पदस्थापना नहीं हुई थी। उन्हें मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया था। कार्मिक विभाग में योगदान के बाद वे अबतक पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं। उनकी कहीं पोस्टिंग नहीं हुई है। इसके अलावा कृषि विभाग में बदलाव के बाद जीशान कमर भी वेटिंग फॉर पोस्टिंग में बैठे हैं। JAS के 60 अफसर पोस्टिंग के इंतजार मे इसके अलावा झारखंड प्रशासनिक सेवा के 60 अधिकारी भी पोस्टिंग की प्रतीक्षा में हैं। इधर, ट्रेनिंग पूरा होने के ढाई साल बाद भी 39 नवनियुक्त डीएसपी को पोस्टिंग नहीं मिल सकी है। राज्य के कई अनुमंडलों में एसडीएम के पद खाली हैं। कई महत्वपूर्ण पद प्रभार में हैं। सचिवालय सेवा के करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी भी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

Anjali Kumari मई 7, 2026 0
Dolphin with military gear concept image amid claims of Iran using marine animals as weapons
“डॉल्फ़िन से हमला?” ईरान पर उठे अजीब दावों पर ट्रंप के रक्षा मंत्री का जवाब

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक हैरान करने वाला दावा चर्चा में है–क्या ईरान डॉल्फ़िन को विस्फोटक पहनाकर अमेरिकी जहाजों पर हमला करने की योजना बना रहा है? इन अटकलों पर अब पीट हेगसेथ ने प्रतिक्रिया दी है। रक्षा मंत्री का जवाब अमेरिकी रक्षा विभाग की एक ब्रीफिंग में जब पत्रकार ने “आत्मघाती डॉल्फ़िन” से जुड़े दावों पर सवाल किया, तो पीट हेगसेथ ने कहा, “मैं यह पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता कि हमारे पास ऐसी कोई क्षमता है या नहीं, लेकिन मैं यह जरूर कह सकता हूं कि ईरान के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।” उनके इस बयान ने इन दावों को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है। दावों की शुरुआत कैसे हुई? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मीडिया संस्थानों में यह चर्चा शुरू हुई कि ईरान ऐसे “असामान्य हथियारों” पर काम कर सकता है, जिनमें पनडुब्बियों के साथ-साथ विस्फोटक ले जाने वाली डॉल्फ़िनें भी शामिल हैं। इसके बाद CNN और Fox News जैसे प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। ईरान ने उड़ाया मजाक इन दावों पर ईरानी पक्ष की प्रतिक्रिया अलग रही। ईरान के कुछ सरकारी और विदेश कार्यालयों ने इन खबरों का मजाक उड़ाया। हैदराबाद स्थित एक ईरानी दफ्तर ने सोशल मीडिया पर एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की, जिसमें एक डॉल्फ़िन के साथ “विस्फोटक” दिखाया गया था। पोस्ट में तंज करते हुए लिखा गया कि “राज़ सामने आ गया।” सच्चाई क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि ईरान डॉल्फ़िन को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। हालांकि यह सच है कि अमेरिकी नौसेना जैसे कुछ देशों ने समुद्री जानवरों–जैसे डॉल्फ़िन और सी-लायन–को पानी के भीतर माइन खोजने और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने के लिए ट्रेनिंग दी है। अफवाह या रणनीतिक मनोवैज्ञानिक युद्ध? विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की खबरें अक्सर “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” का हिस्सा भी हो सकती हैं, जिनका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना या माहौल बनाना होता है। “डॉल्फ़िन बम” जैसी बातें ज्यादा अटकलें और अफवाह ही नजर आती हैं। न तो ईरान ने इसकी पुष्टि की है और न ही कोई ठोस प्रमाण सामने आया है। हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस तरह के दावे यह जरूर दिखाते हैं कि सूचना युद्ध भी आधुनिक संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुका है।

surbhi मई 6, 2026 0
US KC-135 Stratotanker aircraft disappears over Strait of Hormuz after sending 7700 emergency signal
होर्मुज़ के ऊपर ‘फ्लाइंग गैस स्टेशन’ गायब! US KC-135 ने भेजा 7700 इमरजेंसी सिग्नल, बढ़ी हलचल

मिडिल ईस्ट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद अचानक रडार से गायब हो गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 7700 कोड भेजते ही गायब हुआ विमान फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर विमान ने कतर के पास उड़ान के दौरान “7700” स्क्वॉक कोड ट्रांसमिट किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी सिग्नल होता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब विमान किसी गंभीर संकट का सामना कर रहा हो। इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया। आखिरी लोकेशन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर सिग्नल खो दिया। माना जा रहा है कि यह उस समय एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था और किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था। एक घंटे बाद पूरी तरह बंद हुआ सिग्नल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी कोड भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि केवल सिग्नल खोना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ा रहा है। क्या हो सकती हैं वजहें? विशेषज्ञों के अनुसार 7700 कोड कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे: तकनीकी खराबी इंजन या सिस्टम फेल होना आग लगना मेडिकल इमरजेंसी बाहरी खतरा या हमले की आशंका फिलहाल किसी भी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नहीं मिला कोई मलबा या SOS संकेत अब तक न तो किसी मलबे का पता चला है, न ही कोई डिस्टेस कॉल (SOS) या रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि हुई है। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स की संख्या भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि KC-135 आमतौर पर सीमित क्रू के साथ उड़ान भरता है। क्यों अहम है यह घटना? होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में इस अमेरिकी टैंकर विमान का अचानक गायब होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तनाव के बीच बढ़ी चिंता ईरान-अमेरिका तनाव के बीच इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं–क्या यह तकनीकी खराबी थी या किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत? फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर टिकी हैं।  

surbhi मई 6, 2026 0
Mystery deepens as scientists in the US and China die or disappear under suspicious circumstances
अमेरिका-चीन में सनसनी: 20 वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौत और लापता होने की घटनाएं, खुफिया एजेंसियों में हलचल

हाई-टेक वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों से बढ़ी चिंता दुनिया की दो महाशक्तियों–अमेरिका और चीन–में रक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े शीर्ष वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतों और लापता होने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। ये वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, न्यूक्लियर रिसर्च और स्पेस डिफेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं ने अब राजनीतिक हलकों में भी बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिका में 11 संदिग्ध घटनाओं की जांच वॉशिंगटन में कम से कम 11 मामलों की जांच चल रही है, जिनमें वैज्ञानिक या तो लापता हुए हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए हैं। ये सभी मामले न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और एडवांस्ड हथियारों से जुड़े हैं। अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कुछ नेताओं ने इसे संभावित “विदेशी ऑपरेशन” तक बताया है, हालांकि अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एफबीआई (FBI) ने इन सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है। चीन में भी लगातार हो रही वैज्ञानिकों की मौतें दूसरी ओर, चीन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कम से कम 9 वैज्ञानिकों की मौतें संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं। इनमें से कई मामले सड़क दुर्घटना, अचानक बीमारी या अस्पष्ट कारणों से जुड़े बताए गए हैं। इन वैज्ञानिकों की उम्र 26 से 68 वर्ष के बीच बताई गई है और वे सभी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे। “टॉप साइंटिस्ट गायब हो रहे हैं” – राजनीतिक बयानबाजी तेज अमेरिका में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं। रिपब्लिकन सांसद एरिक बर्लिसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका, चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच यह घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले को “गंभीर” बताया है, हालांकि उन्होंने यह संभावना भी जताई कि यह महज संयोग हो सकता है। चीन के वैज्ञानिक की मौत पर उठे सवाल सबसे चर्चित मामलों में एक नाम फेंग यांगहे का है, जो चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर थे। उनकी मौत 2023 में बीजिंग में एक कार दुर्घटना में हुई बताई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह ताइवान से जुड़े सैन्य परिदृश्यों की AI सिमुलेशन पर काम कर रहे थे और देर रात एक बैठक से लौटते समय उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिक अधिक प्रभावित विशेषज्ञों के अनुसार, जिन वैज्ञानिकों की मौत या लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं, वे मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़े थे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैन्य सिमुलेशन हाइपरसोनिक हथियार तकनीक ड्रोन और स्वॉर्म टेक्नोलॉजी न्यूक्लियर और स्पेस डिफेंस रिसर्च हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कुछ मामले दुर्घटनाओं या प्राकृतिक कारणों से जुड़े हो सकते हैं। क्या यह सिर्फ संयोग या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया और विश्लेषकों के बीच कई तरह की अटकलें चल रही हैं। कुछ लोग इसे महज संयोग बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। फिलहाल किसी भी देश द्वारा किसी संगठित साजिश की पुष्टि नहीं हुई है। रहस्य गहराता जा रहा है, जांच जारी अमेरिका और चीन दोनों ही इस मामले की जांच में जुटे हैं। जैसे-जैसे नई घटनाएं सामने आ रही हैं, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। यह मामला अभी पूरी तरह रहस्य बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Israeli Mossad chief revealing details about undercover agent killed during secret Iran mission in Europe
एक्स गर्लफ्रेंड से बढ़ी नजदीकियां बनीं मौत की वजह: बेंगलुरु में प्रेमिका ने ‘रोल प्ले’ के बहाने बॉयफ्रेंड को जिंदा जलाया

  ‘रोल प्ले’ के नाम पर रची गई खौफनाक साजिश बेंगलुरु से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय किरण की हत्या उसकी प्रेमिका प्रेमा ने बेहद सुनियोजित तरीके से की। आरोपी ने ‘रोल प्ले’ का बहाना बनाकर किरण को अपने घर बुलाया, जहां पहले उसे रस्सी से बांधा गया और फिर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। रिश्ते में दरार और जलन बनी हत्या की वजह पुलिस के अनुसार, किरण और प्रेमा एक मोबाइल सर्विस स्टोर में साथ काम करते थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। प्रेमा इस रिश्ते को शादी तक ले जाना चाहती थी, लेकिन किरण इससे दूरी बनाने लगा था। मामला तब और बिगड़ गया जब किरण ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड से दोबारा संपर्क किया और उसके साथ जन्मदिन मनाया। यह बात प्रेमा को नागवार गुजरी और इसी से उसके मन में बदले की भावना पैदा हुई। पहले से की थी हत्या की पूरी तैयारी जांच में सामने आया है कि प्रेमा ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बना ली थी। उसने पेट्रोल, केरोसिन और रस्सी का इंतजाम पहले ही कर लिया था। इसके बाद उसने अकेले में मिलने के बहाने किरण को अपने घर बुलाया और वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद मची अफरा-तफरी घटना के बाद आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। किरण के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और पूछताछ में प्रेमा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस जांच जारी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों में बढ़ती असुरक्षा और भावनात्मक असंतुलन किस तरह खतरनाक रूप ले सकता है।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Global military leaders meet in London to discuss reopening Strait of Hormuz amid tensions
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की तैयारी तेज, 30 से ज़्यादा देशों की लंदन में बड़ी बैठक

  वैश्विक मिशन के लिए लंदन में जुटेंगे सैन्य रणनीतिकार होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए दुनिया के 30 से अधिक देशों ने संयुक्त प्रयास तेज कर दिए हैं। ब्रिटेन सरकार के अनुसार, 23 अप्रैल से लंदन में दो दिवसीय अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कई देशों के मिलिट्री प्लानर्स हिस्सा लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित तरीके से फिर से चालू करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। पिछले सप्ताह यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के करीब 50 देशों के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी, जिसके बाद इस अंतरराष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर जोर ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में तैयार हो रहे इस प्लान का मुख्य लक्ष्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि इस बैठक में कूटनीतिक सहमति को एक व्यावहारिक सैन्य योजना में बदला जाएगा। इस दौरान सेना की तैनाती, कमांड सिस्टम, संसाधनों का उपयोग और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही, यह प्रयास लंबे समय तक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और युद्धविराम को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम, बातचीत को दिया समय इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील के बाद यह कदम उठाया। ट्रंप का कहना है कि ईरान की सरकार इस समय आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है, इसलिए उसे एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियों और समुद्री घेराबंदी को जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है। ईरान ने बताया ‘रणनीतिक चाल’, बढ़ सकता है तनाव वहीं, ईरान ने अमेरिका के इस कदम को रणनीतिक चाल करार दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि घेराबंदी जारी रखना किसी हमले से कम नहीं है और इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से दिया जा सकता है। इधर, अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की यह वैश्विक पहल आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Mossad chief reveals details of spy ‘M’ linked to covert Iran operation after Italy accident
मोसाद के ‘M’ की मौत का खुलासा: ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ का मास्टरमाइंड

  मोसाद चीफ का बड़ा खुलासा इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad ने अपने एक वरिष्ठ जासूस ‘M’ की मौत को लेकर पहली बार बड़ा खुलासा किया है। मोसाद प्रमुख David Barnea ने बताया कि ‘M’ ईरान के खिलाफ चल रहे गुप्त मिशन Operation Roaring Lion का मुख्य रणनीतिकार था। उन्होंने कहा कि इस एजेंट ने अपनी पहचान छिपाकर कई जटिल और हाई-टेक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे इजरायल की सुरक्षा को मजबूती मिली। इटली में हादसे में हुई मौत रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘M’ की पहचान 50 वर्षीय एरेज शिमोनी (छद्म नाम) के रूप में हुई है। उनकी मौत 28 मई 2023 को Lake Maggiore में एक नाव दुर्घटना के दौरान हुई थी। इस हादसे में इटली के दो खुफिया अधिकारी और नाव चालक की पत्नी की भी जान चली गई थी। करीब 30 वर्षों तक मोसाद में सेवा देने वाले इस एजेंट को पूरे सम्मान के साथ सैन्य कब्रिस्तान में दफनाया गया था। ईरान के खिलाफ ‘स्मार्ट ऑपरेशन’ का नेतृत्व मोसाद प्रमुख के अनुसार, ‘M’ बेहद शांत और रणनीतिक सोच रखने वाला अधिकारी था, जो स्थानीय भाषा और परिस्थितियों के अनुसार काम करने में माहिर था। उसके नेतृत्व में कई ऐसे गुप्त ऑपरेशन अंजाम दिए गए, जिनसे ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन मिशनों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या है ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’? इजरायल और United States ने मिलकर 2026 में ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ नाम दिया गया। इस अभियान का मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका इसे अपने स्तर पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से संचालित कर रहा है। यह ऑपरेशन उस समय शुरू हुआ जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर तनाव चरम पर था।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
FBI agents detain Iranian woman at airport over alleged global arms trafficking network
ड्रोन, बम और गोला-बारूद की डील… US ने ईरानी महिला को एयरपोर्ट से दबोचा

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और हथियार तस्करी के मोर्चे पर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। United States की एजेंसियों ने 44 वर्षीय ईरानी नागरिक Shamim Mafi को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने Iran और Sudan के बीच बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी और सौदेबाजी में अहम भूमिका निभाई। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में सुरक्षा हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं, और हथियारों के अवैध नेटवर्क को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है। कहां और कैसे हुई गिरफ्तारी? शमीम माफी को Los Angeles International Airport (LAX) पर हिरासत में लिया गया। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के अधिकारियों ने उन्हें एयरपोर्ट पर रोका सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में एक एजेंट को “FBI” जैकेट पहने देखा गया, जो माफी को कार में बैठा रहा है एक अन्य तस्वीर में भारी मात्रा में नकदी दिखाई गई, जिससे इस नेटवर्क के वित्तीय पैमाने का अंदाजा लगाया जा रहा है अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा थी। क्या हैं मुख्य आरोप? अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि माफी: ईरान और सूडान के बीच हथियारों की डील में “मिडिलवुमन” (दलाल) के रूप में काम कर रही थीं उन्होंने अपनी कंपनी के जरिए ड्रोन, बम, बम फ्यूज़ और लाखों राउंड गोला-बारूद की सप्लाई में मदद की वर्ष 2025 में इस नेटवर्क के जरिए 70 लाख डॉलर से अधिक का भुगतान प्राप्त हुआ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नेटवर्क काफी संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था। ओमान से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क जांच में सामने आया है कि: माफी और उनके एक सहयोगी ने ओमान में “Atlas International Business” नाम की कंपनी चलाई इसी कंपनी के जरिए हथियारों के सौदों को अंजाम दिया जाता था कंपनी को विभिन्न डील्स के लिए बड़े पैमाने पर भुगतान मिला यह मॉडल दिखाता है कि कैसे फ्रंट कंपनियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी को छुपाया जाता है। बड़े हथियार सौदों का खुलासा अदालती दस्तावेजों में कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं: सूडान के रक्षा मंत्रालय को 55,000 बम फ्यूज़ बेचने में दलाली 70 मिलियन डॉलर से अधिक के ड्रोन कॉन्ट्रैक्ट खास तौर पर Mohajer-6 ड्रोन की सप्लाई, जो एक सशस्त्र UAV है और युद्ध में इस्तेमाल किया जाता है इन डील्स से यह साफ होता है कि मामला सिर्फ छोटे स्तर की तस्करी का नहीं, बल्कि बड़े सैन्य सौदों का है। खुफिया एजेंसियों से कनेक्शन अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि: माफी 2022 से 2025 के बीच ईरानी खुफिया एजेंसियों के सीधे संपर्क में थीं उन्होंने जानबूझकर ऐसे सौदों को अंजाम दिया, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हैं अगर यह आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला केवल तस्करी नहीं, बल्कि राज्य-समर्थित गतिविधि की श्रेणी में आ सकता है। कानूनी स्थिति और सजा शमीम माफी को Los Angeles की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा। उन पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं दोषी पाए जाने पर उन्हें अधिकतम 20 साल तक की जेल हो सकती है क्यों अहम है यह मामला? यह गिरफ्तारी कई स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है: 1. वैश्विक सुरक्षा: हथियारों की इस तरह की तस्करी संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में हिंसा को और बढ़ा सकती है। 2. अमेरिका-ईरान तनाव: पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच यह मामला दोनों देशों के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है। 3. प्रतिबंधों का उल्लंघन: यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद गुप्त नेटवर्क कैसे सक्रिय रहते हैं। 4. छुपे हुए नेटवर्क का खुलासा: फ्रंट कंपनियों और तीसरे देशों (जैसे ओमान) के जरिए चल रहे नेटवर्क वैश्विक निगरानी के लिए बड़ी चुनौती हैं।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Military buildup near Belarus-Ukraine border with artillery deployment and road construction activity
ज़ेलेंस्की का दावा–रूस बेलारूस को फिर युद्ध में घसीटने की कोशिश में

  बेलारूस सीमा पर सैन्य गतिविधियों से बढ़ा तनाव, नए हमले की आशंका यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस एक बार फिर अपने सहयोगी देश बेलारूस को युद्ध में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार बेलारूस की सीमा के पास सड़क निर्माण और तोपखाने की तैनाती जैसी सैन्य तैयारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जो संभावित नए सैन्य अभियान का संकेत देती हैं। ज़ेलेंस्की ने यह बयान टेलीग्राम पर जारी किया, जिसमें उन्होंने यूक्रेन की शीर्ष सैन्य कमान से मिली जानकारी का हवाला दिया। उत्तर दिशा से नए हमले की आशंका यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, रूस अपनी सेना का पुनर्गठन कर रहा है ताकि सैनिकों की कमी को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि: बेलारूस सीमा के पास नई सैन्य संरचनाएं बनाई जा रही हैं तोपखाने की स्थिति मजबूत की जा रही है और रणनीतिक सड़कों का निर्माण किया जा रहा है इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि रूस उत्तर दिशा से एक नया मोर्चा खोल सकता है। बेलारूस का फिर से इस्तेमाल का आरोप ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी कि रूस पहले भी 2022 में बेलारूस की जमीन का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमला करने के लिए कर चुका है। उन्होंने बेलारूसी नेतृत्व को भी संदेश देते हुए कहा कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त सार्वजनिक सबूत नहीं दिए गए हैं। यूक्रेन ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर भी दिया सुझाव एक अंतरराष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के पास समुद्री सुरक्षा का अनुभव है, जिसे अन्य क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर। उन्होंने कहा कि रूस ने काला सागर में भी नाकाबंदी की कोशिश की थी, जिसे यूक्रेन ने सैन्य और तकनीकी रणनीति से चुनौती दी। रूस के भीतर भी आग और हमलों की घटनाएं रूस के दक्षिणी हिस्से क्रास्नोडार क्षेत्र में एक तेल टर्मिनल में भीषण आग लगने की खबर सामने आई है। इस आग पर काबू पाने के लिए बड़ी संख्या में दमकलकर्मी और वाहन तैनात किए गए हैं। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। रूसी अधिकारियों ने आग लगने के कारणों पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ऊर्जा और प्रतिबंधों का असर भी जारी युद्ध के बीच ऊर्जा क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है। सर्बिया की रूसी स्वामित्व वाली तेल कंपनी NIS को अमेरिका से 60 दिनों की अस्थायी छूट मिली है, जिससे वह फिलहाल तेल आयात जारी रख सकेगी। यह छूट कंपनी के स्वामित्व बदलाव की प्रक्रिया के बीच दी गई है, जो रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों का हिस्सा है। युद्ध के 1514वें दिन भी तनाव बरकरार यूक्रेन-रूस युद्ध अपने 1514वें दिन में भी बेहद तनावपूर्ण स्थिति में है। दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां, ड्रोन हमले और रणनीतिक बयानों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ रहा है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Donald Trump criticizing NATO during a public speech after Strait of Hormuz crisis
ट्रंप का NATO पर बड़ा हमला: ‘जब जरूरत थी तब गायब थे, अब मदद नहीं चाहिए’

  हॉर्मुज संकट के बाद ट्रंप का तीखा बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर था, तब NATO ने कोई प्रभावी मदद नहीं की, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद सहायता की पेशकश की गई। “अब आपकी मदद की जरूरत नहीं” – ट्रंप एरिजोना में आयोजित Turning Point USA कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि NATO ने अमेरिका से तब संपर्क किया जब हालात लगभग स्थिर हो चुके थे। उन्होंने कहा कि अगर मदद चाहिए थी, तो “दो महीने पहले चाहिए थी, अब नहीं।” ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “वे उस समय पूरी तरह बेकार साबित हुए जब हमें उनकी जरूरत थी। लेकिन सच यह है कि हमें उनकी जरूरत कभी नहीं थी, उन्हें हमारी जरूरत थी।” हॉर्मुज संकट और वैश्विक तनाव यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक सुर्खियों में रहा। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। हालांकि अब स्थिति कुछ हद तक स्थिर बताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नाटो को बताया ‘पेपर टाइगर’ ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में NATO को “पेपर टाइगर” तक कह दिया। उन्होंने लिखा कि संकट के दौरान संगठन कमजोर और निष्क्रिय रहा, लेकिन अब जब स्थिति सुधर रही है, तो मदद की बात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर NATO को सहयोग करना ही है, तो वे “तेल ले जाने के लिए जहाज भर सकते हैं।” क्षेत्रीय देशों की तारीफ अपने बयान में ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों की तारीफ भी की। उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों ने संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। ईरान और हॉर्मुज को लेकर स्थिति ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि युद्धविराम अवधि में सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा। हालांकि अमेरिका ने इस क्षेत्र में कड़ा रुख बनाए रखा है और नौसैनिक दबाव जारी है। ट्रंप का यह बयान एक बार फिर अमेरिका और NATO के बीच मतभेद को उजागर करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि हॉर्मुज संकट ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर गहरा असर डाला है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
USS George H. W. Bush aircraft carrier sailing at sea rerouting via Cape of Good Hope amid Red Sea tensions
हूती अटैक से डर गई ट्रंप की सेना? 60 हजार करोड़ का युद्धपोत लंबा रास्ता लेकर मिडिल ईस्ट रवाना

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और लाल सागर में हमलों के बीच अमेरिका ने अपनी नौसैनिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। दुनिया के सबसे ताकतवर युद्धपोतों में शामिल USS George H. W. Bush (CVN-77) अब सीधा रास्ता छोड़कर अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। क्यों बदला गया रास्ता? माना जा रहा है कि यह फैसला लाल सागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है। Houthi movement द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील हो गया है। 2024–25 में कई जहाजों पर हमले बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा अमेरिकी और व्यापारिक जहाज निशाने पर इसी वजह से अमेरिकी नौसेना ने जोखिम भरे रेड सी रूट से बचने का विकल्प चुना। कौन सा रास्ता अपना रहा है युद्धपोत? यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर: अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर Cape of Good Hope के रास्ते अटलांटिक से हिंद महासागर में प्रवेश करेगा हाल ही में इसे Namibia के तट के पास देखा गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ेगी अमेरिकी ताकत माना जा रहा है कि यह जहाज मिडिल ईस्ट में पहले से तैनात USS Abraham Lincoln (CVN-72) के साथ मिलकर ऑपरेशन को और मजबूत करेगा। यह तैनाती ऐसे समय हो रही है जब Iran के साथ तनाव चरम पर है Strait of Hormuz के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं कितना लंबा हो गया सफर? सामान्य रूट (रेड सी): ~8,000–9,000 नॉटिकल माइल नया रूट (अफ्रीका के जरिए): ~13,000–15,000 नॉटिकल माइल यानी करीब डेढ़ गुना लंबा सफर, जो खतरे की गंभीरता को दिखाता है। क्या यह ‘डर’ है या रणनीति? पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे “रणनीतिक एहतियात” मानते हैं, न कि सीधे तौर पर डर। लाल सागर अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुका है अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। सुपरपावर भी अब जोखिम से बचने के लिए अपने रास्ते बदलने को मजबूर है–जो मिडिल ईस्ट संकट की गंभीरता को दर्शाता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
USS Abraham Lincoln aircraft carrier deployed in Arabian Sea during US naval operation near Iran coastline
ईरान की समुद्री नाकाबंदी: अरब सागर में USS Abraham Lincoln तैनात, ट्रंप बोले- ‘रूटीन ऑपरेशन’

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा समुद्री सैन्य कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, अरब सागर में ईरान के तटों और बंदरगाहों की घेराबंदी की गई है, जिसकी कमान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) संभाल रहा है। 100 से ज्यादा विमान और 10 हजार सैनिक तैनात CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत झोंकी है। 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 12 से ज्यादा जंगी जहाज 100+ लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और सर्विलांस सिस्टम तैनात हैं, जिनमें F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और E-2D कमांड कंट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) को भी संदिग्ध जहाजों पर नजर रखने और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। क्या है अमेरिका की रणनीति? CENTCOM के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जहाज ईरानी सीमा में प्रवेश न करे और न ही वहां से बाहर निकले। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर उठाया गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि यह नाकाबंदी केवल ईरान के तटों और बंदरगाहों तक सीमित है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है रोक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को ब्लॉक नहीं किया गया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग है, इसलिए इसे खुला रखा गया है। ट्रंप का बयान: ‘यह रूटीन ऑपरेशन’ Donald Trump ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘रूटीन ऑपरेशन’ बताया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना पूरी तरह नियंत्रण में है और कोई भी जहाज इस क्षेत्र में बिना अनुमति के आवाजाही नहीं कर पा रहा है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे अरब सागर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी बल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे हालात और संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे ‘रूटीन’ बता रहा है, लेकिन इतने बड़े सैन्य जमावड़े ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
US-Israel Strikes Fail to Stop Iran Nuclear Program
US-इजरायल हमलों के बावजूद सुरक्षित ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम लगभग सुरक्षित बना हुआ है। हमलों का सीमित असर The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, हफ्तों तक चले हवाई हमलों और मिसाइल स्ट्राइक के बाद भी ईरान के परमाणु ढांचे को पूरी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जा सका। कुछ लैब्स और ‘येलोकेक’ साइट्स जरूर प्रभावित हुई हैं, लेकिन मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी सक्रिय है। गुप्त सुरंगों में छिपा यूरेनियम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अपने वेपन्स-ग्रेड यूरेनियम का बड़ा हिस्सा गहरी भूमिगत सुरंगों में सुरक्षित रखा हुआ है। International Atomic Energy Agency के अनुसार, ईरान के पास करीब 450 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जो परमाणु हथियार बनाने के लिए अहम माना जाता है। सेंट्रीफ्यूज और टेक्नोलॉजी बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अब भी उन्नत सेंट्रीफ्यूज और ऐसे गुप्त ठिकाने हैं, जहां यूरेनियम को हथियार-स्तर तक संवर्धित किया जा सकता है। इससे साफ है कि ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इस्फहान साइट बनी अहम केंद्र रिपोर्ट के मुताबिक, यूरेनियम का एक बड़ा हिस्सा Isfahan स्थित परमाणु साइट के नीचे गहरी सुरंगों में सुरक्षित रखा गया है। यह जगह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। वैश्विक चिंता बढ़ी इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे, लेकिन ईरान इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
US Navy ships positioned in Strait of Hormuz amid escalating tensions between America and Iran over maritime blockade strategy
होर्मुज़ में नाकेबंदी का दांव: क्या ट्रंप अपने ही सैनिकों को खतरे में डाल रहे हैं?

ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत नाकाम रहने के बाद अमेरिका ने अब सैन्य दबाव बढ़ाने का रास्ता अपना लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Strait of Hormuz में ‘नेवी ब्लॉकेड’ लागू करने का ऐलान किया है। इस फैसले ने न सिर्फ मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि यह भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह कदम अमेरिकी सैनिकों के लिए नया खतरा पैदा कर सकता है। शनिवार को JD Vance की अगुवाई में एक अमेरिकी कूटनीतिक टीम ने ईरान के साथ तनाव कम करने और संभावित समझौते की दिशा में बातचीत की थी। इस्लामाबाद में करीब 20 घंटे तक चली इस वार्ता से उम्मीदें तो जगी थीं, लेकिन अंततः कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इसके बाद ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट करते हुए अपनी रणनीति सार्वजनिक की। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी जहाज होर्मुज़ स्ट्रेट में “गैरकानूनी टोल” देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित मार्ग नहीं मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना सहयोगी देशों के जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में सक्रिय रहेगी और बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान जारी रखेगी। ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। हालांकि, इस सख्त रुख के पीछे की कूटनीतिक विफलता भी कम अहम नहीं है। वार्ता से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, बातचीत सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं थी। कई अन्य मुद्दों पर भी गहरे मतभेद थे, जिनमें होर्मुज़ क्षेत्र पर ईरान का प्रभाव और क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों को उसका समर्थन शामिल है। यमन में हूती विद्रोही और लेबनान में हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों को लेकर अमेरिका की चिंताएं लंबे समय से बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भी तरह की नाकेबंदी या सैन्य गतिविधि बेहद संवेदनशील मामला है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का टकराव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रणनीति अमेरिकी सैनिकों को सीधे खतरे में डाल सकती है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस कदम को उकसावे के रूप में देखता है, तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी नौसेना और वहां तैनात सैनिक सीधे निशाने पर आ सकते हैं। छोटे स्तर की झड़प भी बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकती है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा, इस फैसले का आर्थिक असर भी कम नहीं होगा। होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ट्रंप का यह कदम एक हाई-रिस्क रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे ईरान पर दबाव तो जरूर बढ़ेगा, लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों और पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरे मंडरा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह टकराव कूटनीति की ओर लौटता है या किसी बड़े सैन्य संघर्ष में बदल जाता है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Israeli airstrikes over Beirut causing massive destruction and casualties during the deadliest Lebanon attack in decades.
लेबनान में 30 साल का सबसे भीषण हमला: इजरायल की रातभर बमबारी, 250 से ज्यादा मौतें

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। Israel ने Lebanon पर ऐसा भीषण हमला किया है, जिसे पिछले 30 वर्षों का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया जा रहा है। सीजफायर के बीच हमला, हालात बेकाबू Iran और अमेरिका के बीच हुए संघर्षविराम के महज 24 घंटे के भीतर यह हमला हुआ। इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता और उसका निशाना ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के ठिकाने हैं। 10 मिनट में 100 से ज्यादा हमले रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन में करीब 50 फाइटर जेट शामिल थे। राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई शहरों में भारी तबाही देखी गई। 250 से ज्यादा मौतें, 1100 घायल हमलों में अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग घायल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों में अफरातफरी का माहौल है और कई लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। रिहायशी इलाकों पर भारी तबाही सबसे ज्यादा नुकसान घनी आबादी वाले इलाकों में हुआ है। कई ऊंची इमारतें ध्वस्त हो गईं, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। साइदा और बालबेक जैसे शहरों में जनाजों और रिहायशी क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रक्तदान की अपील, राहत कार्य जारी घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लेबनान रेडक्रॉस ने लोगों से रक्तदान की अपील की है। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की चेतावनी, बढ़ सकता है संकट हमलों के बाद Iran ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने हमले नहीं रोके, तो वह संघर्षविराम से पीछे हट सकता है। इसके साथ ही Strait of Hormuz को फिर से बंद करने की धमकी भी दी गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। नेतन्याहू का बयान इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है और इसमें लेबनान को शामिल नहीं किया गया था। वैश्विक चिंता बढ़ी इस हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट को फिर अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ईरान-अमेरिका सीजफायर के बावजूद लेबनान में जारी यह हिंसा दिखाती है कि क्षेत्र में शांति अभी दूर है। लगातार बढ़ती हिंसा और बड़े पैमाने पर जनहानि वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
US President Donald Trump proposes $1.5 trillion defense budget with focus on Golden Dome missile system and new battleships
ट्रंप का बड़ा दांव: 1.5 ट्रिलियन डॉलर रक्षा बजट की मांग, क्या है प्लान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2027 वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 139 लाख करोड़ रुपये) के विशाल रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है। अगर इसे कांग्रेस मंजूरी देती है, तो यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा। 42% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी यह बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 42% ज्यादा है रक्षा खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी गई ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम पर फोकस इस बजट में ट्रंप के प्रस्तावित ‘Golden Dome’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए फंड शामिल है इसका उद्देश्य अमेरिका को आधुनिक और अगली पीढ़ी के हवाई खतरों से बचाना है नए ‘Trump-Class’ बैटलशिप बजट में दर्जनों सैन्य जहाजों के निर्माण का प्रावधान अमेरिकी नौसेना के लिए नई ‘Trump-Class’ बैटलशिप सीरीज भी शामिल घरेलू उत्पादन पर जोर यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के घरेलू रक्षा उत्पादन और बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस को दर्शाता है इसका मकसद अमेरिका की मिलिट्री ताकत को और मजबूत करना है ईरान युद्ध से अलग बजट यह रक्षा बजट प्रस्ताव ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अलग है पेंटागन ने ‘Operation Epic Fury’ के लिए अलग से 200 अरब डॉलर (करीब 18.5 लाख करोड़ रुपये) की मांग की है क्या है इसका मतलब? अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने की तैयारी में है बढ़ते वैश्विक तनाव और तकनीकी युद्ध को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
C-130 Hercules aircraft flying low over Iran during US pilot rescue mission amid rising tensions
ईरान में अमेरिकी पायलट की तलाश, हरक्यूलिस विमान से चला रेस्क्यू मिशन

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। खबर है कि अमेरिका अपने गिराए गए फाइटर जेट के पायलटों की तलाश के लिए C-130 हरक्यूलिस विमान का इस्तेमाल कर रहा है। लो-फ्लाइट में दिखा हरक्यूलिस विमान सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में: C-130 हरक्यूलिस विमान ईरान के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ता नजर आ रहा है विमान फ्लेयर छोड़ते हुए दिखाई दे रहा है फ्लेयर का इस्तेमाल आमतौर पर मिसाइल से बचाव के लिए किया जाता है। ये गर्म चिंगारियां मिसाइल को भ्रमित कर देती हैं, जिससे वह असली विमान के बजाय फ्लेयर की ओर मुड़ जाती है। एक पायलट को बचाने का दावा इजराइल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है वहीं, दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है किस जेट को मार गिराने का दावा? ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को गिराया है कुछ रिपोर्ट्स में इसे F-15E भी बताया जा रहा है इस पर भी अभी तक स्पष्टता नहीं है पायलट को पकड़ने पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर 10 बिलियन ईरानी तोमान (करीब 55 लाख रुपये) का इनाम घोषित किया है सरकारी मीडिया के जरिए नागरिकों से पायलट को पकड़कर अधिकारियों को सौंपने की अपील की गई है बढ़ता तनाव यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव को और गंभीर बना सकता है। रेस्क्यू ऑपरेशन पायलट की तलाश इनाम की घोषणा इन सबने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0