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Mossad Spy Role Revealed

मोसाद के ‘M’ की मौत का खुलासा: ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ का मास्टरमाइंड

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Mossad chief reveals details of spy ‘M’ linked to covert Iran operation after Italy accident
Mossad Spy M Operation Revelation

 

मोसाद चीफ का बड़ा खुलासा

इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad ने अपने एक वरिष्ठ जासूस ‘M’ की मौत को लेकर पहली बार बड़ा खुलासा किया है।

मोसाद प्रमुख David Barnea ने बताया कि ‘M’ ईरान के खिलाफ चल रहे गुप्त मिशन Operation Roaring Lion का मुख्य रणनीतिकार था।

उन्होंने कहा कि इस एजेंट ने अपनी पहचान छिपाकर कई जटिल और हाई-टेक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे इजरायल की सुरक्षा को मजबूती मिली।

इटली में हादसे में हुई मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘M’ की पहचान 50 वर्षीय एरेज शिमोनी (छद्म नाम) के रूप में हुई है।

उनकी मौत 28 मई 2023 को Lake Maggiore में एक नाव दुर्घटना के दौरान हुई थी। इस हादसे में इटली के दो खुफिया अधिकारी और नाव चालक की पत्नी की भी जान चली गई थी।

करीब 30 वर्षों तक मोसाद में सेवा देने वाले इस एजेंट को पूरे सम्मान के साथ सैन्य कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

ईरान के खिलाफ ‘स्मार्ट ऑपरेशन’ का नेतृत्व

मोसाद प्रमुख के अनुसार, ‘M’ बेहद शांत और रणनीतिक सोच रखने वाला अधिकारी था, जो स्थानीय भाषा और परिस्थितियों के अनुसार काम करने में माहिर था।

उसके नेतृत्व में कई ऐसे गुप्त ऑपरेशन अंजाम दिए गए, जिनसे ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन मिशनों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या है ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’?

इजरायल और United States ने मिलकर 2026 में ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ नाम दिया गया।

इस अभियान का मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका इसे अपने स्तर पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से संचालित कर रहा है।

यह ऑपरेशन उस समय शुरू हुआ जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर तनाव चरम पर था।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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25 साल का इंतजार खत्म, कनाडा ने फीफा वर्ल्ड कप में हासिल किया पहला पॉइंट

टोरंटो, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे दिन सह-मेजबान कनाडा ने इतिहास रचते हुए टूर्नामेंट में अपना पहला अंक हासिल किया। टोरंटो में खेले गए ग्रुप मुकाबले में कनाडा और बोस्निया के बीच मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। इससे पहले कनाडा 1986 और 2022 विश्व कप में खेले गए अपने सभी छह मुकाबले हार चुका था। घरेलू दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में यह ड्रॉ कनाडाई फुटबॉल के लिए यादगार उपलब्धि बन गया।   काइल लारिन बने मैच के हीरो पहले हाफ में बोस्निया ने 21वें मिनट में जोवो लुकिच के गोल की बदौलत बढ़त बना ली थी। इसके बाद कनाडा लगातार सातवीं विश्व कप हार की ओर बढ़ता नजर आ रहा था। हालांकि, 76वें मिनट में मैदान पर उतरे सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी काइल लारिन ने महज दो मिनट बाद शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। यह न केवल कनाडा का मैच बचाने वाला गोल था, बल्कि घरेलू सरजमीं पर देश का पहला फीफा विश्व कप गोल भी बन गया। इस गोल के साथ स्टेडियम में मौजूद हजारों समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया।   अमेरिका ने पराग्वे को 4-1 से हराया दूसरे मुकाबले में मेजबान अमेरिका ने पराग्वे को 4-1 से हराकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। अमेरिकी टीम के लिए फोलारिन बालोगुन ने दो गोल दागकर जीत में अहम भूमिका निभाई, जबकि पराग्वे की ओर से मौरिसियो एकमात्र गोल करने में सफल रहे। यह मुकाबला भी खास रहा क्योंकि दोनों टीमें 1930 के पहले फीफा विश्व कप के बाद पहली बार विश्व कप मंच पर आमने-सामने उतरीं। 22 संस्करणों के लंबे अंतराल के बाद हुई इस भिड़ंत में अमेरिका ने अपना दबदबा साबित किया। अब कनाडा का अगला मुकाबला 18 जून को कतर से, जबकि बोस्निया की भिड़ंत स्विट्जरलैंड से होगी।

anjali kumari जून 13, 2026 0
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अमेरिका के भविष्य के 3 सबसे अहम हथियार कौन से? एयर फोर्स जनरल ने गिनाए नाम

  वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना ने अपनी भविष्य की सैन्य रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स (USAF) के जनरल डेल व्हाइट ने तीन प्रमुख रक्षा कार्यक्रमों—बी-21 रेडर स्टेल्थ बॉम्बर, सेंटिनल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और एफ-47 अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान—को अमेरिका की दीर्घकालिक सुरक्षा का आधार बताया है। कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनरल व्हाइट ने कहा कि किसी बड़े राष्ट्रीय संकट या चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अमेरिका इन तीन सैन्य क्षमताओं पर सबसे अधिक भरोसा करेगा। उनके अनुसार ये कार्यक्रम केवल नए हथियार नहीं, बल्कि भविष्य की अमेरिकी रक्षा रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं। बी-21 रेडर कार्यक्रम ने हासिल किया अहम पड़ाव जनरल व्हाइट की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी वायुसेना ने बी-21 रेडर कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होने की जानकारी दी है। वायुसेना के अनुसार हाल ही में एक ऑपरेशनल टेस्ट पायलट ने एक डेवलपमेंटल टेस्ट पायलट के साथ बी-21 रेडर की संयुक्त उड़ान भरी, जिसे कार्यक्रम के विकास में एक अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विकासात्मक और परिचालन परीक्षणों को शुरुआती चरण में ही एकीकृत करने से विमान को सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया तेज होगी। यह पारंपरिक परीक्षण मॉडल से अलग रणनीति है, जिसका उद्देश्य समय बचाना और क्षमता विकास को गति देना है। जनरल व्हाइट ने कहा कि बी-21 कार्यक्रम आधुनिक परीक्षण और उत्पादन प्रणाली का उदाहरण है, जो अमेरिकी वायुसेना को अधिक तेज और प्रभावी तरीके से नई क्षमताएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा। क्या है बी-21 रेडर? अमेरिकी रक्षा कंपनी Northrop Grumman द्वारा विकसित बी-21 रेडर अमेरिका की अगली पीढ़ी का स्टेल्थ बॉम्बर है। इसे लंबी दूरी तक पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के मिशन संचालित करने के लिए तैयार किया गया है। भविष्य में यह विमान पुराने बी-1 लांसर और बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स की जगह लेगा। साथ ही यह अमेरिका की परमाणु त्रिस्तरीय रणनीति (Nuclear Triad) के हवाई हिस्से की मुख्य ताकत बनेगा। इसमें अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, ओपन-सिस्टम आर्किटेक्चर और विभिन्न प्रकार के हथियारों को ले जाने की क्षमता शामिल है। अमेरिकी वायुसेना कम से कम 100 बी-21 रेडर विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। दूसरे विमान के जुड़ने से बढ़ी परीक्षण की गति वायुसेना के अनुसार, एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर दूसरे बी-21 विमान के पहुंचने के बाद परीक्षण कार्यक्रम में तेजी आई है। अब केवल उड़ान प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि मिशन सिस्टम, सेंसर और हथियार एकीकरण से जुड़े परीक्षण भी किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चरण विमान को पूर्ण परिचालन क्षमता तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सेंटिनल: नई पीढ़ी की परमाणु मिसाइल प्रणाली जनरल व्हाइट ने सेंटिनल आईसीबीएम कार्यक्रम को भी अमेरिकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह प्रणाली पिछले 50 वर्षों से सेवा में मौजूद मिनुटमैन-III मिसाइलों का स्थान लेगी। सेंटिनल कार्यक्रम के तहत नई मिसाइलों के साथ-साथ कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन नेटवर्क का भी व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा अमेरिका के कई राज्यों में स्थित रणनीतिक सैन्य ढांचे को भी अपग्रेड किया जा रहा है। अमेरिकी वायुसेना का लक्ष्य है कि सेंटिनल प्रणाली 2075 तक प्रभावी रूप से सेवा देती रहे और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखे। एफ-47: भविष्य का हवाई प्रभुत्व स्थापित करने वाला लड़ाकू विमान जनरल व्हाइट ने एफ-47 लड़ाकू विमान को भी अमेरिका की भविष्य की युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। यह विमान नेक्स्ट जनरेशन एयर डॉमिनेंस (NGAD) कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे अमेरिकी कंपनी Boeing तैयार कर रही है। एफ-47 का उद्देश्य मौजूदा एफ-22 रैप्टर की जगह लेना है। यह विमान भविष्य में सहयोगी कॉम्बैट ड्रोन (Collaborative Combat Aircraft) के साथ मिलकर काम करेगा और अत्यधिक चुनौतीपूर्ण युद्धक्षेत्रों में हवाई श्रेष्ठता बनाए रखने में सक्षम होगा। वायुसेना के अनुसार इसकी लड़ाकू पहुंच 1,000 नॉटिकल मील से अधिक होगी, यह मैक-2 से ज्यादा गति प्राप्त कर सकेगा और उन्नत स्टेल्थ तकनीक से लैस होगा। अमेरिका भविष्य में 185 से अधिक एफ-47 विमानों की खरीद की योजना बना रहा है। भविष्य की अमेरिकी सैन्य रणनीति का आधार विशेषज्ञों के अनुसार बी-21 रेडर, सेंटिनल आईसीबीएम और एफ-47 कार्यक्रम अमेरिका की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता, लंबी दूरी की मारक शक्ति और हवाई श्रेष्ठता को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। जनरल डेल व्हाइट की टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दशकों में अमेरिकी रक्षा नीति का फोकस इन अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों पर रहने वाला है।  

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Commercial vessel near Oman coast after attack that killed three Indian crew members.
भारतीय नाविकों की मौत पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया, अमेरिका की कार्रवाई पर उठाए सवाल; भारत ने जताई चिंता

  ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। वहीं भारत ने भी घटना की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बगाई ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। भारतीय नागरिकों के प्रति जताई संवेदना ईरानी प्रवक्ता ने मृत भारतीय नाविकों के परिवारों, मित्रों, भारतीय जनता और भारत सरकार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत किसी भी परिस्थिति में दुखद है और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भारत ने भी की हमले की निंदा भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज ‘सेटेबेलो’ पर हुए हमले की निंदा की। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन भारतीयों के लापता होने की सूचना मिली थी। बाद में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान तीनों नाविकों के शव बरामद किए गए। मृत भारतीय नाविकों की पहचान केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मृतकों की पहचान की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया। मृत नाविकों में: हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा उत्तर प्रदेश के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे। ये सभी पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो के चालक दल का हिस्सा थे। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक समाधान पर जोर भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। बयान में कहा गया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।  

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