Iran को लेकर एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। दावा किया गया है कि United States और Israel का सैन्य अभियान केवल ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को निशाना बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे तेहरान में सत्ता परिवर्तन की बड़ी रणनीति भी शामिल थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad को दोबारा सत्ता में लाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि एक हमले और बाद की घटनाओं ने इस पूरी रणनीति को कमजोर कर दिया। क्या था कथित प्लान? The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने कथित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के जरिए ईरान के शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करने की योजना बनाई थी। दावा किया गया कि इस ऑपरेशन के मुख्य उद्देश्य थे: ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को नुकसान पहुंचाना शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना वैकल्पिक सत्ता व्यवस्था तैयार करना रिपोर्ट में कहा गया कि सार्वजनिक तौर पर अमेरिका केवल परमाणु खतरे की बात करता रहा, लेकिन इजरायल इससे कहीं बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी में था। खामेनेई की मौत से बढ़ा संकट रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हमलों में मारे गए। खामेनेई करीब 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे थे। उनकी मौत के बाद देशभर में 40 दिनों का शोक घोषित किया गया और सत्ता को लेकर अस्थिरता बढ़ गई। अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि नेतृत्व हटते ही ईरानी सत्ता ढांचा बिखर जाएगा, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं हुआ। अहमदीनेजाद को “मुक्त” कराने की कोशिश? रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पूर्वी हिस्से में एक गुप्त अभियान चलाया गया, जहां महमूद अहमदीनेजाद कथित तौर पर नजरबंद थे। बताया गया कि हमला सीधे उनके घर पर नहीं, बल्कि उस सुरक्षा चौकी पर किया गया जहां Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के जवान तैनात थे। सैटेलाइट तस्वीरों में सुरक्षा चौकी तबाह दिखाई गई, जबकि अहमदीनेजाद का घर सुरक्षित बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में अहमदीनेजाद घायल हुए लेकिन बच गए। क्यों अहम थे अहमदीनेजाद? महमूद अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। अपने कार्यकाल में वह पश्चिम विरोधी बयानों, परमाणु कार्यक्रम और इजरायल पर तीखे रुख को लेकर चर्चा में रहे। हालांकि बाद के वर्षों में उनका टकराव खामेनेई समर्थक सत्ता प्रतिष्ठान से बढ़ गया था। उन्होंने ईरानी शासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और बाद में उन्हें चुनाव लड़ने से भी रोका गया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि मौजूदा सत्ता से उनकी दूरी उन्हें “संक्रमणकालीन नेतृत्व” के लिए उपयोगी बना सकती है। हमला फेल हुआ तो बिखर गई रणनीति रिपोर्ट में दावा किया गया कि हमले के बाद अहमदीनेजाद सार्वजनिक जीवन से अचानक गायब हो गए। उनके पीछे हटने से सत्ता परिवर्तन की पूरी योजना कमजोर पड़ गई। इसके अलावा: ईरान में बड़े पैमाने पर जनविद्रोह नहीं हुआ राजनीतिक ढांचा पूरी तरह नहीं टूटा कुर्द समूहों ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई वैकल्पिक नेतृत्व उभर नहीं पाया इन वजहों से कथित योजना अधूरी रह गई। ट्रंप और नेतन्याहू के बयान भी चर्चा में रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ईरान में बदलाव “अंदर से” आना चाहिए। हालांकि रिपोर्ट का दावा है कि पर्दे के पीछे कहीं बड़ी रणनीति पर काम हो रहा था। सिर्फ एयरस्ट्राइक नहीं, ‘इन्फ्लुएंस ऑपरेशन’ भी रिपोर्ट के मुताबिक, योजना में केवल हवाई हमले ही नहीं बल्कि: साइकोलॉजिकल ऑपरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना सोशल अस्थिरता बढ़ाना कुर्द लड़ाकों को सक्रिय करना जैसी रणनीतियां भी शामिल थीं, ताकि जनता में यह संदेश जाए कि ईरानी शासन नियंत्रण खो चुका है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की राजनीति और ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
ईरान की संसद में एक ऐसे प्रस्तावित कानून पर चर्चा की खबर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की हत्या करने वाले को 50 मिलियन यूरो यानी करीब 560 करोड़ रुपये तक का इनाम देने का प्रावधान शामिल हो सकता है। क्या है पूरा मामला? ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बिल का नाम “इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” रखा गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान के सांसद Ebrahim Azizi ने कहा कि ईरान अपने शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार मानता है। ट्रंप और नेतन्याहू पर गंभीर आरोप ईरानी नेताओं का आरोप है कि फरवरी में हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के पीछे अमेरिका और इजरायल की भूमिका थी। प्रस्तावित बिल में अमेरिकी सैन्य अधिकारी एडमिरल Brad Cooper का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। संसद में क्या कहा गया? ईरानी सांसद Mahmoud Nabavian ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द ही ऐसे प्रस्ताव पर मतदान कर सकती है, जिसमें “ट्रंप और नेतन्याहू को खत्म करने” वाले को इनाम देने की बात शामिल होगी। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां ईरान में इससे पहले भी अमेरिकी नेताओं के खिलाफ कड़े बयान दिए जाते रहे हैं, खासकर ईरानी जनरल Qasem Soleimani की हत्या के बाद। कई ईरान समर्थक समूह पहले भी ट्रंप के खिलाफ इनाम घोषित करने जैसे अभियान चला चुके हैं। रिपोर्ट्स में “ब्लड कोवेनेंट” नामक अभियान का जिक्र किया गया है, जिसने कथित तौर पर करोड़ों डॉलर जुटाने का दावा किया था। अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया? इससे पहले ट्रंप प्रशासन साफ कह चुका है कि अगर अमेरिकी नेताओं के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की कोशिश हुई तो उसका बेहद कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संघर्ष और पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव को लेकर पहले से ही टकराव बना हुआ है। ऐसे में इस तरह की रिपोर्ट्स ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान पर दोबारा बड़े हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय Pentagon संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। ‘शांति प्रस्ताव पसंद नहीं आया’ रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने खारिज कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैंने उस प्रस्ताव को देखा और उसकी पहली लाइन ही मुझे पसंद नहीं आई, इसलिए मैंने उसे फेंक दिया।” ट्रंप के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले संघर्ष के दौरान रोके गए “Operation Epic Fury” को नए रूप में फिर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर “Operation Epic Fury 2.0” नाम की किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास और सैन्य तैयारियों में लगी हुई हैं। अगले सप्ताह हमले की आशंका? मध्य पूर्व के कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि सैन्य तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर अगले सप्ताह की शुरुआत में कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव पिछले महीने संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए हालात शांत हुए थे, लेकिन अब दोनों पक्षों के बयानों और सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा, जबकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है।
‘रोल प्ले’ के नाम पर रची गई खौफनाक साजिश बेंगलुरु से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय किरण की हत्या उसकी प्रेमिका प्रेमा ने बेहद सुनियोजित तरीके से की। आरोपी ने ‘रोल प्ले’ का बहाना बनाकर किरण को अपने घर बुलाया, जहां पहले उसे रस्सी से बांधा गया और फिर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। रिश्ते में दरार और जलन बनी हत्या की वजह पुलिस के अनुसार, किरण और प्रेमा एक मोबाइल सर्विस स्टोर में साथ काम करते थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। प्रेमा इस रिश्ते को शादी तक ले जाना चाहती थी, लेकिन किरण इससे दूरी बनाने लगा था। मामला तब और बिगड़ गया जब किरण ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड से दोबारा संपर्क किया और उसके साथ जन्मदिन मनाया। यह बात प्रेमा को नागवार गुजरी और इसी से उसके मन में बदले की भावना पैदा हुई। पहले से की थी हत्या की पूरी तैयारी जांच में सामने आया है कि प्रेमा ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बना ली थी। उसने पेट्रोल, केरोसिन और रस्सी का इंतजाम पहले ही कर लिया था। इसके बाद उसने अकेले में मिलने के बहाने किरण को अपने घर बुलाया और वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद मची अफरा-तफरी घटना के बाद आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। किरण के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और पूछताछ में प्रेमा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस जांच जारी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों में बढ़ती असुरक्षा और भावनात्मक असंतुलन किस तरह खतरनाक रूप ले सकता है।
मोसाद चीफ का बड़ा खुलासा इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad ने अपने एक वरिष्ठ जासूस ‘M’ की मौत को लेकर पहली बार बड़ा खुलासा किया है। मोसाद प्रमुख David Barnea ने बताया कि ‘M’ ईरान के खिलाफ चल रहे गुप्त मिशन Operation Roaring Lion का मुख्य रणनीतिकार था। उन्होंने कहा कि इस एजेंट ने अपनी पहचान छिपाकर कई जटिल और हाई-टेक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे इजरायल की सुरक्षा को मजबूती मिली। इटली में हादसे में हुई मौत रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘M’ की पहचान 50 वर्षीय एरेज शिमोनी (छद्म नाम) के रूप में हुई है। उनकी मौत 28 मई 2023 को Lake Maggiore में एक नाव दुर्घटना के दौरान हुई थी। इस हादसे में इटली के दो खुफिया अधिकारी और नाव चालक की पत्नी की भी जान चली गई थी। करीब 30 वर्षों तक मोसाद में सेवा देने वाले इस एजेंट को पूरे सम्मान के साथ सैन्य कब्रिस्तान में दफनाया गया था। ईरान के खिलाफ ‘स्मार्ट ऑपरेशन’ का नेतृत्व मोसाद प्रमुख के अनुसार, ‘M’ बेहद शांत और रणनीतिक सोच रखने वाला अधिकारी था, जो स्थानीय भाषा और परिस्थितियों के अनुसार काम करने में माहिर था। उसके नेतृत्व में कई ऐसे गुप्त ऑपरेशन अंजाम दिए गए, जिनसे ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन मिशनों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या है ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’? इजरायल और United States ने मिलकर 2026 में ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ नाम दिया गया। इस अभियान का मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका इसे अपने स्तर पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से संचालित कर रहा है। यह ऑपरेशन उस समय शुरू हुआ जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर तनाव चरम पर था।
वॉशिंगटन: अमेरिका और Iran के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब अपने अंत के करीब है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता। “परमाणु हथियार होता तो ‘सर’ कहना पड़ता” Donald Trump ने तीखे अंदाज में कहा: “अगर ईरान के पास परमाणु बम होता, तो आज सबको उन्हें ‘सर’ कहना पड़ता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है। “ईरान को उबरने में लगेंगे 20 साल” ट्रंप के मुताबिक: अमेरिका और Israel के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं सीजफायर के बावजूद जारी दबाव दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि: अमेरिका का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा बातचीत के संकेत Donald Trump ने यह भी कहा कि: ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है जल्द ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है सूत्रों के मुताबिक, Islamabad में बैक-चैनल वार्ता जारी है। अमेरिका का फोकस ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक भविष्य में किसी भी परमाणु खतरे को खत्म करना ट्रंप के बयान से संकेत मिलते हैं कि एक ओर अमेरिका युद्ध खत्म होने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर कड़ा दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात पूरी तरह शांत होते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच JD Vance के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार को Islamabad पहुंच गया, जहां United States और Iran के बीच अहम शांति वार्ता होने जा रही है। यह बातचीत छह सप्ताह से जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के तहत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। वार्ता से पहले ही सख्त रुख, ईरान की नई शर्तें औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि बातचीत आसान नहीं होगी। ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब United States लेबनान में स्थिति और ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करने जैसे मुद्दों पर ठोस आश्वासन देगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका “ईमानदार समझौता” पेश करता है, तो ईरान बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप का सख्त संदेश, वेंस का संतुलित बयान वार्ता से पहले Donald Trump ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के पास “कोई पत्ते नहीं हैं” और वह सिर्फ बातचीत के जरिए ही स्थिति संभाल सकता है। दूसरी ओर, जेडी वेंस ने उम्मीद जताई कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जा सकती है, लेकिन चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने चाल चलने की कोशिश की तो अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा। भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल और कड़ी सुरक्षा इस वार्ता की गंभीरता का अंदाजा दोनों पक्षों के बड़े प्रतिनिधिमंडलों से लगाया जा सकता है। ईरान की ओर से करीब 70 सदस्यीय टीम पहुंची है, जबकि अमेरिका की ओर से पहले से ही लगभग 100 अधिकारियों की टीम Islamabad में मौजूद है। पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, जिसमें हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। Strait of Hormuz में अब भी पाबंदियां बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं Lebanon में Hezbollah और Israel के बीच झड़पें जारी हैं, जिससे शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर टिकी नजरें इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर गहरा असर डाला है। ईरान जहां प्रतिबंध हटाने और Strait of Hormuz पर नियंत्रण की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका इस पर सख्त रुख बनाए हुए है। ऐसे में यह वार्ता न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है। अनिश्चित भविष्य, समझौता या टकराव? दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर अब भी गहरी खाई बनी हुई है। पाकिस्तान के सूत्रों के मुताबिक, वार्ताकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं - या तो ठोस समझौता करें या बातचीत छोड़ दें। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह वार्ता शांति की ओर बढ़ेगी या फिर क्षेत्र एक बार फिर संघर्ष की ओर लौटेगा।
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 33वां दिन है। क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों पक्षों के दावों-प्रत्यारोपों के बीच कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। लेबनान में ईरानी कमांडर मारा गया: इजरायल का दावा इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने लेबनान में ईरानी कुद्स फोर्स के कमांडर हुसैन महमूद मर्शाद अल-जौहरी को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि अल-जौहरी सीरिया-लेबनान क्षेत्र में इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन संभाल रहे थे। इस कार्रवाई का वीडियो भी इजरायल की ओर से जारी किया गया है। नेतन्याहू का बड़ा आरोप इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दो बार हत्या की कोशिश की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तेहरान में फार्मा प्लांट पर हमले का दावा ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने तेहरान स्थित ‘टोफिघ दारू’ फार्मास्युटिकल प्लांट पर हमला किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से देश की मेडिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईंधन डिपो पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके पीछे ईरान और उसके सहयोगी गुटों का हाथ बताया जा रहा है। हमले में ईंधन टैंकों को भारी नुकसान हुआ और आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। UN शांति सैनिकों की मौत पर IDF का इनकार दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UNIFIL) की मौत के मामले में इजरायली सेना ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। IDF ने कहा कि 31 मार्च की घटना की जांच में उनकी भूमिका नहीं पाई गई है। होर्मुज स्ट्रेट पर UAE का रुख इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी सक्रिय होता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में बढ़ता तनाव लगातार हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और सख्त बयानों के चलते मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। कई ह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन के भीतर फैसलों को लेकर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नया बयान देकर विवाद को और बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने युद्ध की शुरुआत के लिए अपने रक्षा मंत्री Pete Hegseth की भूमिका की ओर इशारा किया है। “लेट्स डू इट” से शुरू हुआ विवाद टेनेसी में आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई का सुझाव सबसे पहले हेगसेथ ने दिया था। ट्रंप के अनुसार, हेगसेथ ने कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कार्रवाई जरूरी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध की शुरुआत को लेकर प्रशासन के भीतर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। किसी के अनुसार, इजरायल पहले ही हमले की तैयारी में था, जिससे अमेरिका की भागीदारी अनिवार्य हो गई, जबकि अन्य का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार के करीब था। विरोधाभासी दावे और बढ़ती उलझन ट्रंप के बयान में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ ही घंटे पहले उन्होंने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्रवाई अप्रत्याशित थी, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संभावित हमलों को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी। इन विरोधाभासों ने प्रशासन की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्ध का चेहरा बने हेगसेथ इस पूरे घटनाक्रम में Pete Hegseth लगातार अग्रिम पंक्ति में नजर आ रहे हैं। पेंटागन में उन्होंने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन उत्पादन और नौसैनिक शक्ति को कमजोर करने के लक्ष्य को दोहराया है। हालांकि, युद्ध की समयसीमा को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। प्रशासन के भीतर मतभेद रिपोर्ट्स के अनुसार, उपराष्ट्रपति JD Vance इस सैन्य कार्रवाई को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं थे, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई विरोध नहीं जताया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और मीडिया उद्योगपति Rupert Murdoch जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों के समर्थन की भी चर्चा है। इस बीच, राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के पूर्व प्रमुख जो केंट का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि प्रशासन के भीतर मतभेद गहरे हैं। बातचीत पर भी असमंजस ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है और मध्यस्थता के लिए Jared Kushner तथा दूत स्टीव विटकॉफ सक्रिय हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अनिश्चितता बरकरार ट्रंप द्वारा तय की गई समयसीमा को भी आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि युद्ध की दिशा और परिणाम दोनों ही अभी अनिश्चित हैं। लगातार बदलते बयान, विरोधाभासी दावे और कूटनीतिक अस्पष्टता इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Israel, Iran तथा United States के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोमवार को Rajya Sabha में बयान देते हुए कहा कि भारत इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करता है। जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि Narendra Modi स्वयं स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सरकार की विभिन्न एजेंसियां हालात पर निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण आम जनजीवन और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी चिंताएं बढ़ी हैं। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान में फंसे भारतीयों की मदद के लिए Embassy of India, Tehran लगातार काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और इस विषय पर सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र के देश भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन मौजूदा संघर्ष की वजह से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील कर रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति हमेशा स्पष्ट रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि संवाद, संयम और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत का मानना है कि तनाव कम करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सबसे जरूरी है।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान की नई रणनीति मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव का संकेत दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने घोषणा की है कि अब ईरान किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी देश की जमीन से ईरान पर हमला किया गया, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। “ईरान किसी के सामने सरेंडर नहीं करेगा” अपने संबोधन में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश न तो Israel और न ही United States के सामने आत्मसमर्पण करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी जनता और सरकार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। पड़ोसी देशों से जताया खेद राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को लेकर नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान जिन पड़ोसी देशों को हमलों का सामना करना पड़ा, उसके लिए उन्हें खेद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान की तरफ से अब ऐसे हमले नहीं किए जाएंगे और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। माफी के साथ रखी अहम शर्त हालांकि इस माफी के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ईरान की नई सुरक्षा नीति का संकेत हो सकता है, जिसमें वह सीधे टकराव से बचते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। खामेनेई की मौत से बढ़ा तनाव हाल के सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और आगे की रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता इस संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव और बढ़ता है या मार्ग बंद होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। क्षेत्रीय शांति की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह बयान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।