हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 12 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद भारी हंगामा हो गया। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग कार्रवाई की मांग को लेकर जुट गए। ऑक्सीजन नहीं मिलने से दो मरीजों की मौत का आरोप परिजनों का आरोप है कि दो मरीजों की मौत समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण हुई। उन्होंने बताया कि कई बार डॉक्टरों और कर्मचारियों से गुहार लगाने के बावजूद इलाज शुरू नहीं किया गया। मरीजों की हालत बिगड़ती रही, लेकिन आवश्यक सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रसव के दौरान महिला की गई जान कटकमसांडी प्रखंड की रहने वाली शोभा कुमारी की मौत प्रसव के दौरान हो गई। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने खून की कमी बताते हुए रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी। रक्त चढ़ाने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि डॉक्टर और नर्स को सूचना देने के बाद भी कोई देखने नहीं आया, जिससे महिला की मौत हो गई। हालांकि नवजात बच्चा सुरक्षित बताया जा रहा है। अस्पताल पहुंचे विधायक प्रदीप प्रसाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग सदर विधायक Pradeep Prasad अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के नाम पर भारी लापरवाही हो रही है और आए दिन मरीजों की मौत हो रही है। विधायक ने उपायुक्त को पूरे मामले की जानकारी देते हुए चेतावनी दी कि यदि अस्पताल की व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे खुद हस्तक्षेप करेंगे, चाहे इसके लिए उनकी विधायकी ही क्यों न चली जाए। पहले भी उठ चुके हैं सवाल गुरुवार को थैलेसीमिया पीड़ित महिला सरिता देवी और शुक्रवार सुबह पवन कुमार अग्रवाल की मौत को लेकर भी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे थे। दोनों मामलों में समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पूरे जिले में वांछित अपराधियों, वारंटियों और फरार आरोपियों के खिलाफ एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने 39 अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। 30 विशेष टीमों का गठन अभियान को सफल बनाने के लिए जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षक और पुलिस निरीक्षकों की निगरानी में कुल 30 विशेष टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों में थाना प्रभारियों के साथ रिजर्व गार्ड के अनुभवी पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जिलेभर में कार्रवाई की। 104 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी पुलिस टीमों ने रातभर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चिन्हित 104 ठिकानों पर छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया। अभियान के दौरान कई लंबित वारंटों का भी निष्पादन किया गया और फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का सख्त संदेश हजारीबाग पुलिस अधीक्षक ने अभियान को सफल बताते हुए कहा कि जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा और जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। लोगों से सहयोग की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराध की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग से अपराध पर और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है। अपराधियों में बढ़ी बेचैनी लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई से जिले के अपराधियों में डर का माहौल है। पुलिस का मानना है कि ऐसे विशेष अभियानों से अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
हजारीबाग। हजारीबाग में मंगलवार 28 अप्रैल को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक शर्मनाक घटना घटी है। यहां मंत्री इरफान अंसारी के सामने ही उनके समर्थकों ने एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर उसकी पिटाई कर दी। हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई है। आरोप है कि यह हंगामा स्वास्थ्य मंत्री के समर्थकों द्वारा किया गया, जब पत्रकारों ने मंत्री से जनहित से जुड़ा एक सवाल पूछा। यह है पूरा मामला मंगलवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। वे सोमवार को पौता जंगल से बरामद हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शवों के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने आए थे। मंत्री ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन जैसे ही वह अस्पताल से बाहर निकलने लगे, पत्रकारों ने उनसे चतरा विमान हादसे के पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सवाल किया। सवाल पूछना पड़ा भारी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चतरा हादसे पर सवाल सुनते ही मंत्री के समर्थक उग्र हो गए। जवाब देने के बजाय समर्थकों ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। यह पूरी घटना कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें समर्थकों का आक्रामक रवैया साफ नजर आ रहा है। इस मारपीट में न्यूज 18 के पत्रकार आशीष कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनके सिर में चोट लगी है। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। घटना के बाद बड़ी संख्या में हजारीबाग प्रेस क्लब और श्रमजीवी जर्नलिस्ट यूनियन से जुड़े पत्रकार वहां पहुंचे और घटना का विरोध किया। इधर, पत्रकार की बेरहमी से की गई पिटाई की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा और कायराना प्रहार बताया जा रहा है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र गिरी एवं रांची जिला अध्यक्ष जावेद अख्तर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे पूरे पत्रकार समाज में भारी रोष है। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी गुर्गों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर से कठोर सजा दी जाए। साथ ही पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। पत्रकारों की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जोरदार विरोध किया जाएगा।
हजारीबाग। हजारीबाग में बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला प्रशासन को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध संपत्ति अर्जन के आरोपों की पुष्टि हुई है। हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर विधि-सम्मत कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जांच में क्या क्या आया सामने? जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा बिहार के गया जिले में संपत्ति खरीदी गई थी। यह संपत्ति रणधीर कुमार सिंह से खरीदी गई, जबकि क्रेता के रूप में ट्रेजरी घोटाले के कथित मास्टरमाइंड शंभू कुमार की पत्नी काजल कुमारी और सोनी देवी के नाम दर्ज हैं। लगभग 7.84 डिसमिल भूमि के लिए लाखों रुपये का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किया गया, जिससे वित्तीय लेनदेन पर संदेह गहरा गया है। इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि शंभू कुमार ने एक इनोवा वाहन 22 अक्टूबर 2022 को रांची स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी से खरीदा था, जिसका भुगतान भारतीय स्टेट बैंक, हजारीबाग शाखा में उनके संचालित खाते से किया गया था। साथ ही खास महाल भूमि से जुड़े एक अन्य मामले में आरोप है कि बिना विधिवत लीज प्रक्रिया पूरी किए 9 डिसमिल क्षेत्र में G+2 भवन का निर्माण किया गया। वित्तीय अभिलेखों के अनुसार वित्तीय अभिलेखों के अनुसार, स्टेट बैंक से ₹8 लाख और ₹7 लाख की राशि लीजधारक के खाते में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद प्रशासन ने अनियमितता को देखते हुए भूमि को पुनः अधिग्रहित (रिज्यूम) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि संबंधित संपत्तियां अवैध स्रोतों या अनियमित वित्तीय लेनदेन से अर्जित की गई हो सकती हैं। मामले में दर्ज प्राथमिकी संख्या-3226 के तहत विस्तृत जांच जारी है और न्यायालय में विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
हजारीबाग। हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुख्य मार्ग के पास टीपी-05 के आसपास छापेमारी की। इस दौरान संदिग्ध स्थिति में मौजूद तीन युवकों को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में जब पुलिस ने सख्ती दिखाई और गिरोह का खुलासा हो गया। हथियार के बल पर लूट की थी योजना जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी राहगीरों को निशाना बनाकर हथियार के दम पर लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने उनके पास से एक देशी पिस्टल, 13 जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और एक अपाची मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। पुरानी ज्वेलरी लूट से जुड़ा कनेक्शन पूछताछ में आरोपियों ने बड़कागांव क्षेत्र में पहले हुई ज्वेलरी दुकान लूट की घटना में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि वारदात से पहले इलाके की अच्छी तरह रेकी की गई थी और पूरी योजना बनाकर लूट को अंजाम दिया गया था। इससे पुलिस को पुराने मामलों की जांच में भी अहम सुराग मिले हैं। गिरोह के सभी सदस्य गिरफ्त में इस मामले में पुलिस ने कुल 7 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता, सहयोगी और वाहन उपलब्ध कराने वाले लोग शामिल हैं। सभी के खिलाफ बड़कागांव थाना कांड संख्या 54/26 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नेटवर्क की जांच जारी फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह के नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि लूटे गए गहनों को दूसरे राज्यों में बेचने का कोई संबंध है या नहीं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा किया जाएगा।
हजारीबाग। हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड में रसोई गैस की भारी किल्लत से आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। एचपी गैस एजेंसी पर मनमानी और लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को पिछले कई दिनों से घरेलू गैस के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था। बताया जा रहा है कि एजेंसी का कार्यालय और गोदाम करीब 10 से 15 दिनों तक बंद रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। लंबी कतारों में खड़े रहे उपभोक्ता गैस नहीं मिलने से परेशान उपभोक्ता लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे थे। एजेंसी के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां महिलाएं और बुजुर्ग तक कड़ी धूप में गैस सिलेंडर लेकर खड़े नजर आए। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें हर दिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा था, लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा था। प्रशासन के दबाव के बाद खुला एजेंसी कार्यालय शिकायत मिलने के बाद चौपारण के अंचल अधिकारी (सीओ) संजय यादव निरीक्षण के लिए गैस एजेंसी पहुंचे। वहां उन्होंने पाया कि एजेंसी का ऑफिस और गोदाम दोनों बंद हैं। एजेंसी संचालक और मैनेजर का मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ मिला। इसके बाद प्रशासन की सख्ती बढ़ी और शुक्रवार को एजेंसी ने अपना कार्यालय खोलकर गैस वितरण शुरू किया। कालाबाजारी और घपले के आरोप ग्राहकों ने एजेंसी पर गैस वितरण में घपले और कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता सुनीता देवी ने बताया कि डीएसी (DAC) नंबर आने के बावजूद भी गैस नहीं दी जा रही थी और 10 दिन बाद आने को कहा जा रहा था। लोगों का आरोप है कि एजेंसी की मनमानी और कथित कालाबाजारी के कारण यह संकट पैदा हुआ। जांच के बाद होगी कार्रवाई एसडीओ जोहान टुडू ने कहा कि एजेंसी बंद रहने की शिकायतों की जांच कराई जा रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग में 12 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी मामले में गैंगस्टर Rahul Singh ने प्रेस रिलीज जारी कर धमकी दी है। दरअसल, झारखंड के हजारीबाग में 12 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर गैंगस्टर Rahul Singh ने प्रेस रिलीज जारी कर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उसने इस घटना को इंसानियत पर कलंक बताते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। Rahul Singh ने अपने बयान में कहा कि विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंभा गांव में जो हुआ, वह बेहद शर्मनाक और दर्दनाक है। उसने कहा कि एक मासूम बच्ची, जिसने अभी दुनिया को समझना शुरू ही किया था, उसके साथ इस तरह की बर्बरता ने समाज को झकझोर कर रख दिया है।
हजारीबाग। विष्णुगढ़ में 12 साल की नाबालिग के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के विरोध में सोमवार 30 मार्च को हजारीबाग बंद है। यह बंद झारखंड प्रदेश भाजपा के आह्वान पर बुलाया गया है। सोमवार को सुबह से ही हजारीबाग की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, दुकानें बंद हैं और बाजार खाली हैं। बंद को सफल बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर जुलूस निकाल रहे हैं। निकाला गया मशाल जुलूस इससे पहले बंद की पूर्व संध्या पर रविवार की शाम मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें लोगों की भीड़ उमड़ी। हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद के नेतृत्व में विष्णुगढ़ की 12 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई जघन्य घटना और निर्मम हत्या पर रविवार को विष्णुगढ़ में निकाला मशाल जुलूस और कैंडल मार्च निकाला गया। मशाल जुलूस निकाल कर लोगों से सोमवार को हजारीबाग बंद का आह्वान किया गया। दोषियों की गिरफ्तारी की मांग भाजपा विधायक ने सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने देने की भी मांग की। इधर झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने भी दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म एवं हत्या की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
हजारीबाग। रामनवमी के पावन अवसर पर हजारीबाग में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक और अद्भुत तस्वीर देखने को मिली। जहां एक ओर शहरभर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल था, वहीं दूसरी ओर बेटियों ने अपने शौर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आर्य समाज द्वारा संचालित आर्ष कन्या गुरुकुल की ओर से निकाली गई शौर्य शोभायात्रा में ब्रह्मचारिणियों ने तलवारबाजी, लाठी-कला और पारंपरिक युद्धकौशल का ऐसा प्रदर्शन किया कि सड़क किनारे खड़े लोग दंग रह गए। तलवार, लाठी और आत्मविश्वास से सजी शोभायात्रा रामनवमी के इस विशेष आयोजन में गुरुकुल की छात्राएं और ब्रह्मचारिणियां पारंपरिक परिधान में हाथों में तलवार, लाठी और अन्य शस्त्र लेकर सड़कों पर उतरीं। उन्होंने न सिर्फ शस्त्रों का संचालन किया, बल्कि साहस, संयम और अनुशासन का भी शानदार परिचय दिया। जुलूस में बालक और बालिकाओं का बैंड दस्ता भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। सड़क पर एक साथ लाठियां भांजती और युद्धक मुद्राओं में प्रदर्शन करती बच्चियों ने यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। समाज को दिया सशक्त संदेश इस शौर्य शोभायात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश देना भी था—“बेटियां भी बेटों से कम नहीं”। जिस तरह रामनवमी पर युवक पारंपरिक शस्त्रों के साथ अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, उसी तरह अब बेटियां भी आगे बढ़कर अपनी क्षमता दिखा रही हैं। गुरुकुल के आचार्य ने कहा कि आज की हर बेटी में रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरता और आत्मबल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियां न केवल संस्कार और शिक्षा में आगे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश और समाज की रक्षा के लिए भी पूरी तरह सक्षम हैं। एक महीने की मेहनत ने बनाया प्रदर्शन खास गुरुकुल में रामनवमी की तैयारी पिछले एक महीने से चल रही थी। छोटी-छोटी बच्चियों को तलवार, लाठी और अन्य पारंपरिक हथियारों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। इस अभ्यास का परिणाम जुलूस के दौरान साफ दिखाई दिया, जब छात्राओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सड़क पर अपना प्रदर्शन किया। हर प्रस्तुति में अनुशासन, समर्पण और साहस साफ झलक रहा था। जनप्रतिनिधियों ने भी सराहा प्रदर्शन इस शोभायात्रा में नगर निगम के मेयर अरविंद कुमार भी शामिल हुए। उन्होंने गुरुकुल की बच्चियों की जमकर सराहना की और कहा कि इन बेटियों ने हजारीबाग का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जब ये बच्चियां हाथों में तलवार और लाठी लेकर प्रदर्शन करती हैं, तो उनमें आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये बच्चियां केवल शस्त्र संचालन ही नहीं, बल्कि वेद और संस्कृत ज्ञान में भी अद्भुत हैं।
हजारीबाग। रामनवमी जुलूस के दौरान शुक्रवार देर रात हजारीबाग जिले में दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आईं। एक मामले में एक व्यक्ति की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई, जबकि दूसरी घटना में एक समाजसेवी चाकूबाजी में घायल हो गए। दोनों घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पेलावल ओपी क्षेत्र में मुखिया के भाई की हत्या पहली और सबसे गंभीर घटना पेलावल ओपी थाना क्षेत्र के गदोखर गांव में हुई। यहां रामनवमी जुलूस के दौरान गांव के मुखिया के 40 वर्षीय भाई राम कुमार साव उर्फ रामा साव की भुजाली से हमला कर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस के दौरान दो युवक एक वाहन के बोनट पर चढ़कर नाच रहे थे। रामा साव ने उन्हें नीचे उतरने को कहा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद कुछ ही देर में हिंसक रूप ले बैठा और आरोप है कि दोनों युवकों ने रामा साव पर अचानक भुजाली से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से भी रंजिश थी, जिससे मामला और भड़क गया। कोर्रा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी, समाजसेवी घायल दूसरी घटना कोर्रा थाना क्षेत्र के दीपूगढा गोलंबर के पास हुई। यहां कोऑपरेटिव कॉलोनी निवासी और ब्रह्मर्षि समाज के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह पर चाकू से हमला किया गया। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत आरोग्यम अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। पुलिस ने जांच तेज की दोनों मामलों में पुलिस ने संबंधित थाना क्षेत्रों में जांच तेज कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
हजारीबाग। रामनवमी के मद्देनजर झारखंड प्रशासन ने राज्यभर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम पूरे कर लिए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 10 हजार अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। राज्य के सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस मुख्यालय और स्पेशल ब्रांच की ओर से पहले ही सभी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हजारीबाग और रांची पर विशेष फोकस प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से हजारीबाग को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा रांची सहित कई अन्य जिलों में भी अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। रामनवमी जुलूस और शोभायात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारी खुद मॉनिटरिंग करेंगे। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि पर्व के दौरान शांति और सौहार्द का माहौल बना रहे। सजावट और जुलूस मार्गों पर भी अलर्ट स्पेशल ब्रांच ने सड़क किनारे लगाए जाने वाले झंडे, बैनर, झालर और सजावटी सामग्री को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। आशंका जताई गई है कि कुछ असामाजिक तत्व धार्मिक आयोजनों के दौरान लगे सजावटी सामान से छेड़छाड़ कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इस वजह से जुलूस मार्गों पर सुरक्षा और निगरानी दोनों को मजबूत किया गया है। रांची में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव राजधानी रांची में रामनवमी के अवसर पर ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रशासन ने तय किया है कि कुछ निश्चित समय तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। ऐसे सभी वाहन रिंग रोड के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। इसके अलावा छोटे मालवाहक वाहनों, ऑटो और टोटो के संचालन पर भी समयबद्ध प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि जुलूस मार्गों पर भीड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके। सोशल मीडिया पर सख्त नजर प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी भ्रामक या अपुष्ट सूचना पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के सरकारी स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को जीवन से जुड़े जरूरी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। इस पहल का मकसद बच्चों को शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाना है। जीवन कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष फोकस जिले के स्कूलों में चल रहे इस अभियान के तहत किशोर-किशोरियों को 16 से अधिक महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है। इनमें स्वास्थ्य, पोषण, व्यक्तिगत स्वच्छता, लिंग समानता, नशामुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बाल विवाह, बाल तस्करी, हिंसा से बचाव और भावनात्मक संतुलन जैसे संवेदनशील विषयों पर भी छात्रों को जागरूक किया जा रहा है। 160 शिक्षकों को मिला सम्मान सोमवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 80 स्कूलों के 160 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यह आयोजन शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (C3) के संयुक्त प्रयास से किया गया था। सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके योगदान की सराहना की गई। नगर भवन में हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम यह कार्यक्रम नगर भवन में आयोजित जिला स्तरीय साथिया (पीयर एजुकेटर) सम्मेलन और स्वास्थ्य आरोग्य दूत सम्मान समारोह के तहत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार, राज्य समन्वयक रफत फरजाना और सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार समेत कई अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने किशोर स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी और इस पहल को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। नाटक के जरिए जागरूकता का संदेश कार्यक्रम के दौरान पीयर एजुकेटर छात्रों ने लघु नाटिका प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से महावारी स्वच्छता, नशामुक्ति और बीमारियों से बचाव जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया। जिले में शिक्षा का व्यापक विस्तार हजारीबाग जिले में शिक्षा का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। यहां कक्षा 1 से 12वीं तक करीब 1800 स्कूल संचालित हैं। जिले के 16 प्रखंडों और 1300 से अधिक गांवों में यह पहल बच्चों तक पहुंच रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य का बेहतर समन्वय यह पहल शिक्षा और स्वास्थ्य के समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है। इससे छात्र न सिर्फ पढ़ाई में बेहतर हो रहे हैं, बल्कि जीवन के अहम फैसले लेने में भी सक्षम बन रहे हैं। आगे और मजबूत होगी पहल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के कार्यक्रम लगातार जारी रहे, तो इसका सकारात्मक असर पूरे झारखंड में देखने को मिलेगा। इससे बच्चों में जागरूकता बढ़ेगी और वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सकेंगे।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक स्कूल डेवलपमेंट फंड नहीं मिला है, जिससे नए सत्र से पहले जरूरी तैयारियां प्रभावित हो गई हैं। नामांकन और उपस्थिति पर संकट फंड की कमी के कारण स्कूलों में एडमिशन रजिस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर की खरीदारी नहीं हो सकी है। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले शिक्षकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि बच्चों का नामांकन और उपस्थिति कैसे दर्ज की जाएगी। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस स्थिति का असर जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ सकता है। रजिस्टर के अभाव में न सिर्फ पढ़ाई की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बाधित हो रही है। अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित फंड नहीं मिलने से स्कूलों में स्वच्छता, स्टेशनरी और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इससे स्कूलों के संचालन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। शिक्षकों में बढ़ी चिंता नया सत्र शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं होने से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर जल्द राशि नहीं मिली, तो नए सत्र की शुरुआत में भारी अव्यवस्था देखने को मिल सकती है। फिलहाल, स्कूल प्रबंधन और शिक्षक विभाग से जल्द फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं, ताकि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सकें।
बड़ी वारदात की साजिश नाकाम, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला खतरा हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में होने वाली संभावित बड़ी घटना को समय रहते टाल दिया गया। बड़ी साजिश की थी तैयारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उग्रवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर संदिग्ध इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया। फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान उरीमारी ओपी क्षेत्र के कोलियरी इलाके में एक संदिग्ध बोलेरो वाहन नजर आया। पुलिस को देखते ही चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर आसवा और गुडकुवा गांव के बीच पुल और पेड़ से टकरा गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन में सवार सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी तलाशी के दौरान दो आरोपियों के हाथ में इंसास राइफल मिली, जिससे उनके इरादों की गंभीरता साफ हो गई। पुलिस ने मौके से- 2 इंसास राइफल भारी मात्रा में जिंदा कारतूस 1 देसी पिस्टल 1 बोलेरो वाहन 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लातेहार और रांची के रहने वाले आरोपी गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सुनील मुंडा, विरेंद्र मुंडा, सुरेंद्र मुंडा, लालमोहन मुंडा, अनिल मुंडा, रविंद्र गंझू उर्फ रिंकू, सत्येंद्र गंझू उर्फ संतु और संजय मुंडा के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी लातेहार और रांची जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टीएसपीसी संगठन से जुड़े हैं और इलाके में सक्रिय होकर वसूली और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
एडमिशन-रजिस्टर से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित, करीब एक लाख बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की हालत नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही चिंताजनक हो गई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक विद्यालय विकास कोष की राशि नहीं मिल पाई है, जिससे स्कूलों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। नए सत्र से पहले बढ़ी परेशानी राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में 1 अप्रैल 2026 से नया सत्र शुरू होना है, लेकिन मार्च खत्म होने को है और अब तक फंड जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर हर साल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा मार्च की शुरुआत में ही यह राशि उपलब्ध करा दी जाती है, ताकि स्कूल समय रहते तैयारी पूरी कर सकें। इस बार देरी से स्कूल प्रबंधन और शिक्षक दोनों चिंतित हैं। एडमिशन और अटेंडेंस रजिस्टर की कमी फंड नहीं मिलने का सबसे बड़ा असर एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। स्कूलों में नामांकन और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए जरूरी रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा चॉक, डस्टर जैसी सामान्य शैक्षणिक सामग्री भी स्कूलों में नहीं पहुंच पाई है। कई शिक्षक अपने स्तर पर व्यवस्था कर किसी तरह पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस वित्तीय संकट का सीधा प्रभाव जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ रहा है। बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द फंड नहीं मिला तो सत्र की शुरुआत अव्यवस्थित तरीके से होगी। स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित विद्यालय विकास कोष का एक हिस्सा साफ-सफाई और स्वच्छता पर खर्च किया जाता है, लेकिन फंड के अभाव में स्कूलों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है और पेयजल की देखरेख भी प्रभावित हो रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। छात्रों की संख्या के आधार पर मिलती है राशि सरकारी प्रावधान के अनुसार, स्कूलों को छात्रों की संख्या के आधार पर फंड दिया जाता है- 100 तक छात्र: 25 हजार रुपये 101 से 200 छात्र: 50 हजार रुपये 201 से 300 छात्र: 75 हजार रुपये यह राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के खाते में भेजी जाती है, जहां से स्कूल के विकास कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल फंड जारी करने में हो रही देरी को लेकर शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जमीनी स्तर पर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। क्या बोले अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि माध्यमिक स्कूलों को फंड मिल चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रारंभिक विद्यालयों के लिए भी जल्द ही राशि जारी कर दी जाएगी, जिससे स्कूलों में जरूरी व्यवस्थाएं बहाल हो सकें।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में इस बार रामनवमी का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक बनता दिख रहा है। शहर के हर कोने में भक्ति का माहौल है, लेकिन इसी बीच तरंग ग्रुप की एक पहल ने इस उत्सव को नई दिशा दे दी है। युवाओं द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान लोगों को नशामुक्त और मर्यादित तरीके से रामनवमी मनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। नुक्कड़ नाटक से लोगों तक पहुंचा संदेश तरंग ग्रुप ने 19 मार्च से शहर के विभिन्न इलाकों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान शुरू किया है। कलाकारों की टोली मोहल्लों में जाकर लोगों के बीच प्रस्तुति दे रही है और उन्हें त्योहार की गरिमा बनाए रखने की सीख दे रही है। नाटकों में प्रभावशाली संवाद और गीतों का इस्तेमाल कर लोगों को नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है। “राम का नाम बदनाम न करो” जैसे संदेश दर्शकों के बीच खासा प्रभाव छोड़ रहे हैं। परंपरा और अनुशासन पर दिया जोर तरंग ग्रुप के निर्देशक अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि इस अभियान का मकसद लोगों को यह समझाना है कि रामनवमी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि अनुशासन, मर्यादा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब जुलूस शांति और सौहार्द के साथ निकाले जाते हैं, तभी इस पर्व की असली पहचान सामने आती है। नशा और अशोभनीय व्यवहार इस परंपरा को नुकसान पहुंचाते हैं। नाटक में दिखी सामाजिक सच्चाई नुक्कड़ नाटक के जरिए कलाकारों ने यह दिखाया कि नशा और फूहड़ता किस तरह त्योहारों की पवित्रता को प्रभावित करते हैं। साथ ही उन्होंने भाईचारे और अनुशासन के महत्व को भी रेखांकित किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया और समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत को उजागर किया। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया। कलाकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी त्योहार की सफलता तभी है, जब महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। समाज के हर वर्ग से इस दिशा में जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई। लोगों ने की पहल की सराहना स्थानीय लोगों ने तरंग ग्रुप की इस पहल की खुलकर तारीफ की है। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बेहद जरूरी हैं। खासकर युवाओं के बीच इस अभियान का प्रभाव साफ देखा जा रहा है, जो इसे और सफल बना रहा है। कलाकारों की मेहनत बनी अभियान की ताकत इस जागरूकता अभियान में कई कलाकार सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिन्होंने अपने अभिनय के जरिए लोगों तक मजबूत संदेश पहुंचाने का काम किया। उनकी भावना और समर्पण ने इस पहल को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं के लिए बना प्रेरणा स्रोत तरंग ग्रुप का यह अभियान केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने की कोशिश है। यह खासतौर पर युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी का एहसास करा रहा है कि त्योहारों को सही तरीके से मनाना भी एक सामाजिक कर्तव्य है। अगर ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या है पूरा मामला? 18 मार्च को जल संसाधन विभाग और भवन प्रमंडल कार्यालय में टेंडर प्रक्रिया के दौरान दर्जनों ठेकेदार पहुंच गए। आरोप है कि निविदा (टेंडर) प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। ठेकेदारों ने दिनभर विरोध प्रदर्शन और हल्ला किया। अधिकारियों की अनुपस्थिति ने बढ़ाया विवाद जलपथ प्रमंडल संख्या-2 के कार्यपालक अभियंता और भवन प्रमंडल के प्रभारी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे। इससे गुस्साए ठेकेदारों ने कार्यालय कर्मचारियों पर दबाव बनाया। कई टेंडर प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। किन योजनाओं पर असर? 1. जलपथ प्रमंडल (करीब 55 लाख रुपये के काम): बरकट्ठा, चलकुसा और कटकमसांडी प्रखंडों में विकास कार्य प्रस्तावित सड़क, गार्डवाल, स्कूल में शौचालय, साइकिल स्टैंड, बोरिंग और आंगनबाड़ी मरम्मत जैसे काम तय समय: टेंडर के बाद 90 दिनों में पूरा करने की योजना 2. भवन प्रमंडल (5 करोड़+ के प्रोजेक्ट): जिले में अलग-अलग निर्माण और विकास कार्य लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में कर्मचारियों को देर शाम तक भी सफलता नहीं मिली विभाग का पक्ष भवन प्रमंडल के प्रभारी कार्यपालक अभियंता अतुल कुमार सिंघल का कहना है कि: टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है इसे पूरा कराने के लिए अधिकारियों की टीम लगी हुई है कुल मिलाकर स्थिति यह मामला सरकारी टेंडर सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही पर फिर सवाल खड़ा करता है। ठेकेदारों का अविश्वास अधिकारियों की अनुपस्थिति और रुकी हुई प्रक्रियाएं इन सबने मिलकर हजारीबाग में विकास कार्यों को प्रभावित कर दिया है।
झारखंड के हजारीबाग जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री पर कोयला खनन परियोजना में काम कर रहे मजदूरों पर तीर-धनुष से हमला करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कोयला परियोजना में अचानक हमला, मजदूरों में अफरा-तफरी यह पूरा मामला हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र स्थित चट्टी बरियातू कोल परियोजना का बताया जा रहा है। यहां काम कर रहे मजदूरों पर अचानक हमला कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री पर लगे गंभीर आरोप इस हमले का आरोप झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर हाथ में तीर-धनुष लिए कंपनी के वर्करों और वाहनों की ओर निशाना साधते नजर आए। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोयला खनन के विरोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद इलाके में चल रहे कोयला खनन कार्य को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा था और उसी क्रम में यह घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परियोजना एनटीपीसी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां खनन कार्य जारी है। तीर चलाने से मची दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व मंत्री पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और वहां से नीचे काम कर रहे मजदूरों की ओर तीर चलाया। इस दौरान मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी उन्हें काम बंद करने के लिए धमकाया गया था। आरोप है कि यह घटना उसी विवाद का हिस्सा हो सकती है। जांच के बाद होगी कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति में भी गरमाया मुद्दा यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। विवादों से रहा है पुराना नाता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार तीर-धनुष से हमले के आरोप ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
गिरिडीह और हजारीबाग में होनी थी सप्लाई, बोकारो में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण का भी खुलासा धनबाद: झारखंड के धनबाद में अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासन ने बड़ा प्रहार किया है। उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए करीब 24 हजार लीटर कच्चा स्पिरिट से भरे एक टैंकर को जब्त किया है। यह स्पिरिट को नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। नेशनल हाईवे पर पकड़ा गया संदिग्ध टैंकर यह कार्रवाई तोपचांची थाना क्षेत्र के कोटाल अड्डा स्थित नेशनल हाईवे के पास की गई। टीम ने जीओ पेट्रोल पंप के समीप नागालैंड नंबर (NL-01-L-1775) वाले टैंकर को रोककर जांच की, जिसमें भारी मात्रा में कच्चा स्पिरिट बरामद हुआ। गिरिडीह और हजारीबाग में होनी थी सप्लाई पूछताछ के दौरान टैंकर चालक ने खुलासा किया कि यह स्पिरिट गिरिडीह और हजारीबाग में सक्रिय अवैध शराब निर्माताओं को पहुंचाई जानी थी। इस जानकारी के बाद विभाग ने तुरंत टैंकर को जब्त कर लिया और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी। चालक गिरफ्तार, भेजा गया जेल उत्पाद विभाग ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध धंधे से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। बोकारो में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण का भंडाफोड़ इधर बोकारो जिले में भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। माराफारी थाना क्षेत्र के बांसगोड़ा इलाके में एक दुकान पर छापेमारी कर अवैध रूप से रखे गए गैस सिलेंडरों को जब्त किया गया। यह कार्रवाई जिला आपूर्ति पदाधिकारी शालिनी खलखो के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने की। जांच के दौरान दुकान के अंदर छुपाकर रखे गए 8 भरे हुए एचपी गैस सिलेंडर और 19 खाली इंडेन सिलेंडर बरामद किए गए। अभियान तेज, अवैध कारोबारियों में हड़कंप प्रशासन की इन लगातार कार्रवाइयों से अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि नकली शराब और अवैध गैस भंडारण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस कार्रवाई को झारखंड में अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस और उत्पाद विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में जुटे हैं।
ब्रेक फेल होने से हुआ भीषण हादसा झारखंड के Hazaribagh जिले में शनिवार सुबह एक भीषण सड़क दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए। यह हादसा Charhi Ghato Chowk पर हुआ, जहां एक अनियंत्रित ट्रेलर ने बस और टेंपो को पीछे से टक्कर मार दी। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। ट्रेलर का ब्रेक फेल, चालक खो बैठा नियंत्रण जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 9:15 बजे एक ट्रेलर (RJ52GA2501) का ब्रेक अचानक फेल हो गया। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और ट्रेलर ने आगे चल रही टेंपो तथा सागर बस (JH02BT5683) को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सड़क किनारे फल बेच रहे Uday Singh (45 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई, जबकि करीब 10 से 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल भेजा गया हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत कार्य शुरू किया। सभी घायलों को इलाज के लिए Hazaribagh के अस्पतालों में भेजा गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। नेशनल हाईवे पर लगा लंबा जाम दुर्घटना के बाद National Highway near Charhi पर लगभग दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने और यातायात सामान्य करने की कार्रवाई शुरू की। जांच में जुटी पुलिस पुलिस का कहना है कि हादसे की मुख्य वजह ट्रेलर का ब्रेक फेल होना बताया जा रहा है। मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की नियमित जांच की मांग भी उठाई है।
हजारीबाग: झारखंड के Hazaribagh जिले में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 मार्च को नव साक्षरों की पहली आकलन परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में जिले के करीब 26 हजार नव साक्षर महिला और पुरुष भाग लेंगे। परीक्षा के सफल संचालन को लेकर जिला शिक्षा विभाग ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। 26 हजार नव साक्षर देंगे परीक्षा जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) सह साक्षरता कार्यक्रम के सचिव Akash Kumar ने बताया कि यह आकलन परीक्षा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य नव साक्षरों के ज्ञान और सीखने की प्रगति का मूल्यांकन करना है। उन्होंने बताया कि परीक्षा में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को बाद में प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें आगे की शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों में लाभ मिल सकेगा। 4143 स्कूल बनाए गए परीक्षा केंद्र परीक्षा के आयोजन के लिए जिले भर में 4143 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों के एक-एक कक्षा कक्ष को जन चेतना केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। 15 मार्च को नव साक्षर इन केंद्रों पर पहुंचकर आकलन परीक्षा देंगे। व्यवस्था इस तरह की गई है कि प्रतिभागियों को अपने नजदीकी केंद्र पर ही परीक्षा देने की सुविधा मिल सके। 16 प्रखंडों में एक साथ होगी परीक्षा जिले के सभी 16 प्रखंडों में एक ही दिन यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। इनमें सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, चौपारण, चलकुसा, बरकट्ठा, डाडी और चुरचू प्रखंड शामिल हैं। इन सभी प्रखंडों में बनाए गए जन चेतना केंद्रों पर नव साक्षर निर्धारित समय पर परीक्षा में शामिल होंगे। तैयारी को लेकर हुई समीक्षा बैठक परीक्षा की तैयारियों को लेकर गुरुवार को राज्य स्तर पर ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्तरीय कार्यक्रम पदाधिकारी Manoj Kumar ने जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। यह बैठक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित की गई, जिसमें परीक्षा की व्यवस्था और जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में शामिल हुए कई अधिकारी समीक्षा बैठक में साक्षरता कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी नागेश्वर सिंह, बीईईओ बिजय राम, राकेश कुमार, बीपीओ रश्मि सिंह और जिला समन्वयक निसार खान वारसी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा जिले के सभी 16 प्रखंडों के बीपीओ, डीआरजी, एसआरजी, बीआरपी, सीआरपी और अन्य शिक्षाकर्मी भी शामिल हुए। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस परीक्षा के माध्यम से नव साक्षरों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन किया जाएगा और भविष्य में साक्षरता कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।