रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को 333 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपा। कक्षा एक से 5 तक के लिए 160 और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 156 सहायक आचार्यों तथा 17 आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं के बीच नियुक्ति पत्र बांटे गए। सीएम ने कहा, जहां देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक जैसी घटनाओं से नियुक्तियां बाधित हो रही हैं, वहीं झारखंड सरकार ने पिछले चार महीनों में शिक्षा विभाग में ही 9000 से अधिक और विगत दो वर्षों में 16 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है। आनेवाले कुछ महीनों में सैकड़ों नियुक्तियां होंगी। दो लाख से अधिक नियुक्तियां की गई सीएम ने कहा कि उनके पूर्व के कार्यकाल में सरकारी, अनुबंध एवं निजी संस्थानों में करीब दो लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। वर्ष 2024 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद से मानव संसाधन को सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों में लगातार नियुक्तियां की गई हैं। यह प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी। शिक्षकों को नसीहत मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कुछ शिक्षक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं। ऐसी सोच के साथ समग्र विकास संभव नहीं है। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहल इसीलिए की गई है, ताकि वर्षों से हमारी शिक्षा व्यवस्था पर लगे कलंक को मिटाया जा सके और बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सके। इस अवसर पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह, निदेशक प्राथमिक शिक्षा मनोज कुमार रंजन आदि मौजूद थे। घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना है: सीएम सीएम ने कहा कि यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि आपके माध्यम से सरकार गांव-गांव, घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहती है। खासकर महिलाओं और बच्चों तक, जिन्हें हमें आने वाले भविष्य के लिए तैयार करना है। यह अवसर न केवल नव नियुक्त अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि राज्य के समग्र और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। नवनियुक्त कर्मी गांव-गांव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करें। राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
रांची। झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए भी चिंता का सबब बनती जा रही है। लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने गठबंधन की सियासत को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल के दिनों में मंत्री राधाकृष्ण किशोर के तेवरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन में फैसलों की शैली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राजनीतिक समन्वय को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का दबाव यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंदरखाने लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन को संभालने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है। झामुमो लगातार रख रहा नजर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मंत्रियों के विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असहमति पैदा हो सकती है। कई नेताओं को यह शिकायत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसी कारण समय-समय पर सार्वजनिक बयानबाजी सामने आ रही है, जिससे गठबंधन की छवि प्रभावित हो रही है। झामुमो भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि कांग्रेस की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और समन्वय पर पड़ सकता है। भाषा विवाद पर भी धर्मसंकट इधर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हाल में भाषा विवाद के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष से जवाब मांगकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वे इस निमित्त गठित मंत्रियों के समूह में शामिल हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष बताने को कहा है। जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस जल्द ही अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित नहीं करती है, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर पड़ सकता है। विपक्ष हमलावर झामुमो की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि विपक्ष लगातार महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक विवादों को जल्द सुलझाए, ताकि सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सके।
रांची। हेमंत सोरेन ने रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए 5 लाख रुपये का चेक, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इशांक को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए उनकी सफलता को पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण बताया। पाल्क स्ट्रेट पार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड रांची के बाल तैराक इशांक सिंह ने 30 अप्रैल 2026 को लगातार 9 घंटे 50 मिनट तक तैरकर भारत और श्रीलंका के बीच स्थित चुनौतीपूर्ण पाल्क स्ट्रेट को पार किया। करीब 29 किलोमीटर लंबी इस समुद्री दूरी को पार कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने की प्रतिभा की सराहना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इतनी कम उम्र में इशांक सिंह ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि इशांक ने देश और दुनिया में झारखंड का नाम रोशन किया है और उनकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इशांक भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। खेल प्रतिभाओं को हर संभव मदद का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। झारखंड की नई खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इशांक जैसे प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहायता करेगी। तैराकी सुविधाओं के विस्तार पर जोर इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में तैराकी प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों से वर्तमान तैराकी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह के माता-पिता और उनके कोच को भी सम्मानित किया। कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद कार्यक्रम में खेल मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, खेल विभाग के सचिव मुकेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रांची। असम विधानसभा चुनाव परिणाम पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है कि बहुत ही सीमित समय और संसाधन में जो कुछ भी किया जा सका, वह आप सभी के सहयोग, विश्वास और सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं था। इस संघर्ष में जिस तरह से आपने हमारा साथ दिया, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि हमारे लिए अत्यंत हौसला बढ़ाने वाला भी है। आपका यह समर्थन हमारे लिए शक्ति, प्रेरणा और नई ऊर्जा का स्रोत है। हालांकि मुख्यमंत्री ने अभी असम और अन्य तीन राज्यों के चुनाव परिणामों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। असम में आदिवासियों की दयनीय स्थिति हेमंत सोरेन ने कहा कि असम में चुनाव लड़ने का फैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के लिए केवल राजनीतिक विस्तार नहीं था, बल्कि यह वहां के आदिवासी-दलित-अल्पसंख्यक समाज के हक, सम्मान और पहचान की लड़ाई को मजबूत आवाज देने का एक ठोस कदम भी था। राज्य में आदिवासियों की दयनीय स्थिति - ST का दर्जा न मिलना, चाय बागान के मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव और जमीन के अधिकार से वंचित रहना - इन गंभीर मुद्दों ने इस संघर्ष की नींव रखी। बिना गठबंधन के चुनाव लड़ा झामुमो सीएम हेमंत ने कहा कि सीमित संसाधनों और बिना किसी बड़े गठबंधन के JMM ने 16 सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। पहली ही कोशिश में 2 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना, 7 सीटों पर 15 हजार से अधिक मत प्राप्त करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी ने जनता के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में संगठन और भी मजबूत होकर उभरेगा। यह परिणाम एवं लोगों का भरोसा इस बात को और स्पष्ट करती है कि आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की आवश्यकता है। यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है और आपके साथ, आपके विश्वास के साथ, यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच इस बार एक नया राजनीतिक प्रयोग चर्चा में है– Jharkhand Mukti Morcha (JMM) की एंट्री। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी ने पहली बार असम में चुनाव लड़कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। ‘एकला चलो’ रणनीति पर JMM कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत असफल रहने के बाद Hemant Soren ने ‘एकला चलो रे’ की रणनीति अपनाई। पार्टी ने शुरुआत में 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई थी, लेकिन नामांकन के दौरान तकनीकी कारणों से 5 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द हो गए। इसके बाद अब 16 सीटों पर JMM के उम्मीदवार मैदान में हैं। चाय जनजाति और ST दर्जा– सबसे बड़ा चुनावी दांव JMM ने असम के करीब 70 लाख चाय बागान श्रमिकों (चाय जनजाति) को अपना मुख्य वोट बैंक बनाने की कोशिश की है। ये समुदाय मूल रूप से झारखंड और छोटानागपुर क्षेत्र से जुड़े हैं। चुनाव प्रचार के दौरान Hemant Soren ने इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। पार्टी को उम्मीद है कि यह भावनात्मक और सामाजिक मुद्दा उसे असम में मजबूत पकड़ बनाने में मदद करेगा। नामांकन में झटका, फिर भी उम्मीद कायम JMM को बोकाजान सीट पर बड़ा झटका लगा, जहां उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया। इसके बावजूद पार्टी ने कई सीटों पर मजबूत चेहरे उतारे हैं, जिनमें: सोनारी: बलदेव तेली चबुआ: भुबेन मुरारी डुमडुमा: रत्नाकर तांती डिगबोई: भरत नायक तिंगखोंग: महाबीर बास्के नहरकटिया: संजय बाघ माकुम: मुना कर्माकर मजबत: प्रीति रेखा बारला इन सीटों पर चाय बागान श्रमिकों और झारखंडी मूल के मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जिससे JMM को उम्मीदें हैं। क्या बनेगा ‘किंगमेकर’? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM भले ही सीधे सत्ता की दौड़ में न हो, लेकिन कुछ सीटें जीतकर ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है। अगर चुनाव परिणाम त्रिशंकु विधानसभा की ओर जाते हैं, तो JMM की भूमिका अहम हो सकती है। राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में बड़ा कदम यह चुनाव JMM के लिए सिर्फ सीटें जीतने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका भी है। अगर पार्टी असम में प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है, तो पूर्वोत्तर भारत में उसके विस्तार का रास्ता खुल सकता है।
रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य की लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है कि योजना की 21वीं किस्त जल्द ही उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने बीते दिनों बैठक में इस योजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि भुगतान में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए और तय समय के भीतर लाभुकों के खातों में राशि पहुंचाई जाए। 2500 रुपये आयेंगे खाते मे मंईयां सम्मान योजना झारखंड सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 2500 रुपये सीधे बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजे जाते हैं। 21वीं किस्त को लेकर क्या है नया अपडेट? सरकार की समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई जगहों पर तकनीकी कारणों या सत्यापन प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों को तुरंत निपटाया जाए और 21वीं किस्त की राशि तय तिथि से लाभुकों के खातों में खटाखट पहुंचनी शुरू हो जाए। सूत्रों के अनुसार, जिन महिलाओं का बैंक खाता आधार से लिंक है और जिनका दस्तावेज सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें सबसे पहले राशि भेजी जाएगी। वहीं जिन लाभुकों का सत्यापन अधूरा है, उनके मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है। मार्च महीने की किस्त कई जिलों में हो चुकी है जारी इस योजना की खास बात यह है कि सरकार हर महीने की एक तय 15 तारीख को राशि ट्रांसफर करती है। इससे महिलाओं को नियमित आर्थिक सहारा मिलता है और वे अपने दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई या स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाती हैं। हाल ही में मार्च महीने की किस्त भी कई जिलों में जारी की गई थी, जिसमें लाखों महिलाओं के खातों में एक साथ पैसे भेजे गए थे।
रांची। झारखंड में हवाई सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को बिरसा मुंडा हवाई अड्डा परिसर में निर्माणाधीन स्टेट हैंगर का निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, तकनीक और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया। सीएम ने दिए सख्त निर्देश निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक आधारभूत संरचनाएं राज्य के विकास और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई तकनीक और निगरानी पर जोर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्माण कार्यों में नवीनतम तकनीक, बेहतर संसाधनों और प्रभावी प्रबंधन के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा इस मौके पर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी। पंचायती राज कार्यक्रम के लिए आमंत्रण इसी दौरान पंचायती राज विभाग की निदेशक बी. राजेश्वरी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें 24 अप्रैल 2026 को रांची में आयोजित होने वाले “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह मुखिया सम्मेलन 2026” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। झारखंड के विकास की दिशा में अहम कदम स्टेट हैंगर परियोजना के पूरा होने से राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा। इसे झारखंड के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी दल Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए 21 और 22 अप्रैल को रांची में अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल होंगे। बैठक में राज्यभर के जिलों से चुने गए पदाधिकारियों को बुलाया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति बनाई जा सके और SIR प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके। बिहार और बंगाल से सीखने की तैयारी झामुमो इस मुद्दे पर बिहार और पश्चिम बंगाल के हालिया अनुभवों से सीख लेने की योजना बना रहा है। पार्टी का कहना है कि इन राज्यों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने की शिकायतें सामने आई थीं, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ा था। गरीब और आदिवासी अधिकारों पर चिंता पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भाजपा पर निशाना, कार्यकर्ताओं को अलर्ट झामुमो ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियां गरीब वर्ग को कमजोर करने वाली हैं। पार्टी ने दावा किया कि कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद्द किए जाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही झामुमो ने अपने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। राज्य की राजनीति में बढ़ी हलचल SIR को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। झामुमो इसे अधिकार और सम्मान की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्षी दल इस पर अलग रणनीति अपना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन सकता है।
रांची। झारखंड में आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी के तहत महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत 63 बाल विकास परियोजना प्रारूप (सीआईपीओ) और 237 महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत 237 महिला एवं बाल विकास संस्थान को पोर्टफोलियो पत्र जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रोजेक्ट भवन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्ताव पत्र प्रस्तुत करेंगे और नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से होगा। जेपीएससी और जेएसएससी के जरिए चयन इन पदों पर नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से की गई है। सीडीपीओ पद के लिए कुल 64 अभ्यर्थियों की अनुशंसा विभाग को मिली थी, जिनमें से 63 को नियुक्ति पत्र दिया जा रहा है। 64 में 35 महिलाए सीडीपीओ पदों में चयनित 64 अभ्यर्थियों में 35 महिलाएं शामिल हैं। परीक्षा में 50 प्रतिशत यानी 32 पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे, लेकिन चयन प्रक्रिया में महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी इससे अधिक रही। अनारक्षित श्रेणी से 34, एससी से 2, एसटी से 21, बीसी-1 से 1 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से 6 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। महिला पर्यवेक्षिकाओं के 237 पदों पर नियुक्ति महिला पर्यवेक्षिका के कुल 444 पदों पर परीक्षा आयोजित हुई थी, जिनमें से 313 अभ्यर्थी ही चयनित हो सके। इनमें से 237 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के बाद नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। चयनित अभ्यर्थियों में अनारक्षित वर्ग से 138, एसटी से 72, एससी से 22, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 34, पिछड़ा वर्ग से 19 और ईडब्ल्यूएस से 28 अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रोजेक्ट भवन में होगा कार्यक्रम नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम प्रोजेक्ट भवन सभागार में होगा, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम सरकार का यह कदम महिला सशक्तिकरण और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विकास योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।
रांची। रांची से बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आज से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों नेता 18 से 20 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। पुरुलिया से होगी प्रचार की शुरुआत 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से हेलीकॉप्टर के जरिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के काशीपुर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यहां वे तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम के बाद उनका शाम तक रांची लौटने का कार्यक्रम है। तीन दिन तक जारी रहेगा प्रचार अभियान पार्टी के केंद्रीय सचिव अभिषेक प्रसाद पिंटू के अनुसार, 19 और 20 अप्रैल को भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस दौरान कई चुनावी रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। झामुमो और टीएमसी के बीच मजबूत रणनीतिक गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहले ही पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी और इस बार कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता सीधे चुनावी मैदान में उतरकर टीएमसी के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हेमंत और कल्पना सोरेन प्रचार करेंगे, वहां झामुमो का भी प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में इसका सीधा लाभ टीएमसी उम्मीदवारों को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों के सहयोग की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में पुरुषों की त्वचा लगातार धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहती है। ऑफिस जाने का रोज़ाना सफर हो, वीकेंड पर बाइक राइड हो या आउटडोर स्पोर्ट्स–इन सबके कारण चेहरे पर जिद्दी टैन, असमान स्किन टोन और डलनेस साफ दिखाई देने लगती है। अच्छी बात यह है कि टैन हटाने के लिए आपको बहुत जटिल या लंबी स्किनकेयर रूटीन की जरूरत नहीं है। सही प्रोडक्ट्स और साइंटिफिक अप्रोच के साथ आप सिर्फ एक हफ्ते में अपनी स्किन को बेहतर बना सकते हैं। आखिर टैन होता क्यों है? जब आपकी त्वचा सूरज की UV किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर खुद को बचाने के लिए मेलानिन नामक पिगमेंट बनाता है। यही मेलानिन त्वचा को डार्क बनाता है। पुरुषों की त्वचा महिलाओं की तुलना में लगभग 20% मोटी होती है और इसमें ऑयल प्रोडक्शन भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि टैन त्वचा पर जमा होकर ज्यादा गहरा और पैची दिखाई देता है। 7 दिनों का असरदार डिटैन रूटीन Step 1: दिन की शुरुआत करें डिटैन फेसवॉश से कई पुरुष आज भी चेहरे पर साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक अच्छा डिटैन फेसवॉश त्वचा की ऊपरी परत से डेड स्किन और गंदगी हटाता है। यह स्किन को साफ करने के साथ-साथ आगे इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। Step 2: हफ्ते में 2 बार डिटैन फेस मास्क लगाएं सिर्फ फेसवॉश से गहरा टैन नहीं हटता। इसके लिए डिटैन फेस मास्क जरूरी है। यह मास्क खास एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और क्ले से बना होता है, जो त्वचा के अंदर जमा मेलानिन को तोड़ने में मदद करता है। हफ्ते में 2 बार 10–15 मिनट लगाने से स्किन धीरे-धीरे साफ और ब्राइट दिखने लगती है। Step 3: मॉइश्चराइजर से स्किन को हाइड्रेट रखें बहुत से लोग मानते हैं कि टैन हटाने के लिए स्किन को ड्राय रखना चाहिए, लेकिन यह गलत है। ड्राय स्किन और भी ज्यादा डल और डार्क दिखती है। इसलिए हर बार फेसवॉश या मास्क के बाद एक हल्का, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। इससे त्वचा सॉफ्ट, हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है। Step 4: सनस्क्रीन है सबसे जरूरी अगर आप सनस्क्रीन नहीं लगाते, तो आपका सारा डिटैन प्रयास बेकार हो सकता है। SPF 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज सुबह लगाना जरूरी है। यह आपकी त्वचा को UV किरणों से बचाता है और नए टैन को बनने से रोकता है। यह रूटीन क्यों सबसे असरदार है? यह डिटैन रूटीन तीन स्तरों पर काम करता है: Removal (हटाना): डेड और डार्क स्किन को साफ करता है Correction (सुधार): गहरे पिगमेंट को कम करता है Prevention (बचाव): नए टैन को बनने से रोकता है
रांची। झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटालों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है कि “जहां हाथ डालिए, वहीं नया घोटाला सामने आ जाता है।”मरांडी ने कहा कि खनन क्षेत्र में पत्थर, कोयला, बालू और लौह अयस्क की खुली लूट तो दिख रही है, लेकिन इसके अलावा भी सरकारी धन की बड़े पैमाने पर बंदरबांट हो रही है। उनके अनुसार यह स्थिति राज्य को “अंदर से खोखला” कर रही है और आम जनता इससे परेशान है। रांची में करोड़ों की अवैध निकासी का मामला राजधानी रांची में हाल ही में पशुपालन विभाग के दो कर्मचारियों द्वारा लगभग 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। मरांडी ने दावा किया कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि बोकारो और हजारीबाग जैसे अन्य जिलों में भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घोटाले पिछले कई वर्षों से जारी हैं और अब धीरे-धीरे उजागर हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उच्च अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल मरांडी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ियां बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। उन्होंने इसे “संगठित भ्रष्टाचार” करार देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार से जांच और कार्रवाई की मांग भाजपा नेता ने राज्य सरकार से सभी विभागों का व्यापक ऑडिट कराने, कोषागार से हुई निकासी की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के महान क्रांतिकारी वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने वीर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले इन सपूतों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की मिट्टी वीरों की भूमि रही है और यहां के महापुरुषों का संघर्ष आज भी समाज को नई ऊर्जा प्रदान करता है। आदिवासियों और मूलवासियों के हक की ऐतिहासिक लड़ाई श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के आदिवासी एवं मूलवासी समाज ने अपने अधिकारों और अपनी पहचान के लिए उस दौर में बिगुल फूंका था, जब पूरे देश में आजादी की चेतना भी व्यापक रूप से जागृत नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने जो बलिदान दिए हैं, वे अद्वितीय हैं। उन्होंने बताया कि सिदो-कान्हू जैसे नायकों ने समाज को एकजुट कर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाया, जिसका परिणाम है कि आज झारखंड अपनी विशिष्ट पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से खड़ा है। अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस का प्रतीक मुख्यमंत्री ने सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हुए विद्रोह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन वीर भाइयों ने ब्रिटिश हुकूमत और तत्कालीन दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि शोषण और अत्याचार को जड़ से खत्म करने के लिए था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिदो-कान्हू द्वारा दिखाया गया साहस और स्वाभिमान का मार्ग आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हक के लिए कैसे डटा रहा जाता है। सरकार इन महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय स्तर पर अमिट पहचान और गौरवशाली विरासत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि सिदो-कान्हू की शहादत और उनकी जयंती का दिन भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश में लोग इन महान क्रांतिकारियों की जन्मस्थली, प्रतिमाओं और शहादत स्थलों पर जाकर अपना सम्मान प्रकट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों पर पूरे राष्ट्र को गर्व है जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भावी पीढ़ियों को इन महापुरुषों के पदचिन्हों पर चलकर समाज के कल्याण और विकास में अपना योगदान देना चाहिए। झारखंड के सपूतों के सपनों का राज्य बनाने का संकल्प समापन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों का आह्वान किया कि वे शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के संकल्प को दोहराएं। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसमें आदिवासियों-मूलवासियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। माल्यार्पण कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सिदो-कान्हू जैसे महापुरुषों की विरासत ही झारखंड की असली ताकत है और उनकी शिक्षाएं हमेशा राज्य के विकास की नीति का आधार बनी रहेंगी। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंचे थे, जहां सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई थीं।
रांची। मंईयां सम्मान योजना में बड़ा अपडेट आया है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले में मार्च माह की राशि का भुगतान कर दिया गया है। जिले की 3 लाख 89 हजार 296 महिलाओं के बैंक खातों में 2500 रुपए प्रति लाभुक की दर से आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए कुल 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार रुपए भेजे गए हैं। पारदर्शी तरीके से किया गया भुगतान जिला प्रशासन के अनुसार, यह भुगतान सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में पारदर्शी तरीके से किया गया। कांके में सबसे अधिक 31,548 लाभुकों को राशि मिली, जबकि सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 और मांडर में 23,079 लाभुकों को लाभ मिला। सिल्ली (21,120), बेड़ो (20,571) और चान्हो (19,699) भी प्रमुख लाभुक क्षेत्रों में शामिल हैं। प्रखंडों व शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति अनगड़ा में 16,701 लाभुक, अरगोड़ा शहरी क्षेत्र में 13,360, बड़गाईं शहरी क्षेत्र में 9,683, बेड़ो में 20,571, बुंडू में 8,440, बुंडू नगर पंचायत में 3,502, बुढ़मू में 17,816, चान्हो में 19,699, हेहल शहरी क्षेत्र में 15,245, इटकी में 10,334, कांके में 31,548, कांके शहरी क्षेत्र में 1,313, खलारी में 9,580, लापुंग में 11,342, माण्डर में 23,079, नगड़ी में 17,856, नगड़ी शहरी क्षेत्र में 8,250, नामकुम में 17,847, नामकुम शहर में 9,489, ओरमांझी में 18,147, राहे में 9,522, रातू में 18,545, सिल्ली में 21,120, सोनाहातू में 13,036, तमाड़ में 18,491 तथा सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 लाभुकों को भुगतान हुआ।
रांची/गोसाईंगांव,एजेंसियां। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) असम विधानसभा चुनाव 2026 में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता असम के विभिन्न हिस्सों में चुनावी सभाओं में शामिल हो रहे हैं।इसी कड़ी में कल्पना सोरेन ने गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी फेड्रिक्सन हांसदा के समर्थन में जोरदार जनसभा को संबोधित किया। सभा में भारी भीड़ जुटी और लोगों ने उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया। कल्पना सोरेन ने मंच से कहा कल्पना सोरेन ने मंच से कहा कि झामुमो असम के आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चुनाव सामान्य नहीं बल्कि इतिहास रचने वाला है और परिणाम सभी को हैरान कर देगा। उन्होंने चाय बागान मजदूरों के हक-अधिकार और उनकी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान आकर्षित किया। कल्पना का वादा विधायक ने विशेष रूप से टी-ट्राइब (चाय जनजाति) को जनजाति का दर्जा दिलाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं को असम में भी लागू करने की कोशिश की जाएगी।सभा में सिंहभूम लोकसभा सांसद जोबा मांझी और झामुमो विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने भी फेड्रिक्सन हांसदा के लिए अधिक से अधिक वोट देने की अपील की। झामुमो असम में 21 सीटों पर प्रत्याशी उतारा है कल्पना सोरेन ने जनता के बीच सेल्फी ली और बच्चों को गोद में उठाते हुए लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता दिखाई। झामुमो असम में 21 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर आदिवासी और चाय बागान क्षेत्रों में अपना मजबूत आधार बनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि चुनाव असम में रह रहे झारखंड मूल के लोगों के अधिकार सुनिश्चित करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है।
रांची। झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में मंगलवार को भारी गहमागहमी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज आखिरी दिन होने के कारण सभी सरकारी विभागों में बिल क्लियर करने और बजट राशि का उपयोग करने की होड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस वर्ष के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। बजट का 85-90 प्रतिशत खर्च करना बड़ी उपलब्धि आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड जैसे राज्य के लिए बजट का 85-90 प्रतिशत खर्च करना एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे विभागों में कुछ बुनियादी ढांचे के कार्यों में देरी के कारण कुछ राशि वापसी (सरेंडर) हो सकती है। झारखंड सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में ‘समावेशी विकास’ पर जोर दिया है। अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने पहले ही 1.58 लाख करोड़ का बजट घोषित किया है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन 31 मार्च की क्लोजिंग रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। क्यों अहम है 31 मार्च सरकारी नियमों के अनुसार, यदि आवंटित बजट राशि 31 मार्च की रात 12 बजे तक खर्च नहीं होती या संबंधित ट्रेजरी में सरेंडर नहीं होती, तो वह राशि समाप्त हो जाती है। इसी कारण राज्य की सभी ट्रेजरी में ठेकेदारों के भुगतान और विकास कार्यों के बिलों का अंबार लगा हुआ है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार सरकार ने पूंजीगत व्यय में 18 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल करना एक बड़ी चुनौती है। प्रमुख विभागों का प्रदर्शन ग्रामीण विकास: मनरेगा और अन्य ग्रामीण योजनाओं के तहत इस वर्ष 3,190 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल रोजगार सृजन पर खर्च की गई। शिक्षा और स्वास्थ्य: प्रारंभिक और तकनीकी शिक्षा के लिए आवंटित 18,000 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा शिक्षकों के वेतन और स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर खर्च हुआ। मंईया सम्मान योजना: महिला बाल कल्याण विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आवंटित 1,465 करोड़ का लगभग 100 प्रतिशत लाभुकों तक पहुंचाया। अब तक प्रमुख विभागों का खर्च कृषि विभाग: बजट 1,963.44 करोड़ रुपये, खर्च 1,212.10 करोड़ रुपये। पशुपालन विभाग: बजट 580.23 करोड़ रुपये, खर्च 305.80 करोड़ रुपये। भवन विभाग: बजट 676.61 करोड़ रुपये, खर्च 564.85 करोड़ रुपये। ऊर्जा विभाग: बजट 10,480.47 करोड़ रुपये, खर्च 9,199.37 करोड़ रुपये। उत्पाद विभाग: बजट 69.12 करोड़ रुपये, खर्च 46.01 करोड़ रुपये। खाद्य आपूर्ति विभाग: बजट 1,886.14 करोड़ रुपये, खर्च 1,637.48 करोड़ रुपये। वन विभाग: बजट 1,990.42 करोड़ रुपये, खर्च 1,806.67 करोड़ रुपये। स्वास्थ्य विभाग: बजट 5,437.25 करोड़ रुपये, खर्च 4,524.47 करोड़ रुपये। उच्च शिक्षा विभाग: बजट 1,732.27 करोड़ रुपये, खर्च 1,295.76 करोड़ रुपये। गृह विभाग: बजट 8,535.44 करोड़ रुपये, खर्च 7,956.54 करोड़ रुपये। उद्योग विभाग: बजट 463.99 करोड़ रुपये, खर्च 293.83 करोड़ रुपये। श्रम विभाग: बजट 1,993.17 करोड़ रुपये, खर्च 956.97 करोड़ रुपये। खान विभाग: बजट 364.64 करोड़ रुपये, खर्च 118.81 करोड़ रुपये। पेयजल विभाग: बजट 3,841.66 करोड़ रुपये, खर्च 1,667.36 करोड़ रुपये। भूमि राजस्व विभाग: बजट 856.61 करोड़ रुपये, खर्च 678.13 करोड़ रुपये। पथ निर्माण विभाग: बजट 5,221.38 करोड़ रुपये, खर्च 4,487.40 करोड़ रुपये। ग्रामीण विकास विभाग: बजट 6,641.86 करोड़ रुपये, खर्च 3,685.40 करोड़ रुपये। पर्यटन विभाग: बजट 180.39 करोड़ रुपये, खर्च 110.37 करोड़ रुपये। परिवहन विभाग: बजट 162.03 करोड़ रुपये, खर्च 44.60 करोड़ रुपये। जल संसाधन विभाग: बजट 1,937.19 करोड़ रुपये, खर्च 1,892.66 करोड़ रुपये। ग्रामीण कार्य विभाग: बजट 5,772.72 करोड़ रुपये, खर्च 5,265.04 करोड़ रुपये। पंचायती राज विभाग: बजट 1,427.45 करोड़ रुपये, खर्च 547.27 करोड़ रुपये। स्कूली शिक्षा विभाग: बजट 8,641.04 करोड़ रुपये, खर्च 6,262.25 करोड़ रुपये। महिला बाल विकास विभाग: बजट 22,138.90 करोड़ रुपये, खर्च 19,913.77 करोड़ रुपये।
आदिवासी मुद्दों पर स्थानीय नेतृत्व को बताया अहम, कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन पर भी कसा तंज असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है। जदयू नेता और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई अहम टिप्पणियां की हैं। वे आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में विश्व जल दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बयान दिया। “स्थानीय मुद्दे ही तय करते हैं चुनाव” सरयू राय ने कहा कि असम के आदिवासी भले ही झारखंड या ओडिशा से गए हों, लेकिन अब वे पूरी तरह स्थानीय समाज में घुल-मिल चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां के मतदाता बाहरी हस्तक्षेप के बजाय स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में बाहरी राजनीतिक दलों की भूमिका सीमित रह सकती है। हेमंत सोरेन के दौरे पर उठाए सवाल राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम दौरे को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह कदम “बदले की राजनीति” का हिस्सा हो सकता है। उनके मुताबिक, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले झारखंड आ चुके हैं, ऐसे में यह राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा सकता है। कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन पर तंज असम चुनाव में संभावित कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन को लेकर भी सरयू राय ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतनी “दिमागी दिवालिया” नहीं है कि बिना सोचे-समझे हवा का रुख देखकर गठबंधन कर ले। हेमंत सोरेन पर नरम रुख भी हालांकि, सरयू राय ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूरी तरह आलोचना करना सही नहीं होगा। उन्होंने माना कि सोरेन संभवतः असम में रह रहे आदिवासी समुदाय के मुद्दों को उठाकर राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहते हैं और अन्य राज्यों में जीत हासिल कर अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
रांची। झारखंड की सियासत में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर ध्वस्तीकरण मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ‘सीएम को खुश करने के लिए कार्यकर्ताओं की अनदेखी’ बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता में बने रहने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुश करने के लिए अपने ही समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि योगेंद्र साव लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया। घर तोड़े जाने पर उठाए सवाल प्रतुल शाहदेव ने कहा कि योगेंद्र साव का घर ऐसे समय में तोड़ा गया जब मामला कोर्ट में लंबित था। उन्होंने इसे न केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय बताया, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस के अंदर असंतोष का दावा बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर भी असंतोष उभर रहा है। उन्होंने पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अब पार्टी के अंदर से ही विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। ‘बिना नोटिस निष्कासन’ पर सवाल शाहदेव ने आरोप लगाया कि योगेंद्र साव को बिना नोटिस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जबकि अन्य नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इरफान अंसारी और केएन त्रिपाठी जैसे नेताओं के विवादित बयानों के बावजूद कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए। ओबीसी मुद्दे को भी उठाया बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया ओबीसी विरोधी रहा है। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पार्टी के चरित्र को दर्शाता है।
पिता योगेंद्र साव के निष्कासन से भड़कीं अंबा, बोलीं– एकतरफा कार्रवाई, न्याय के लिए जाएंगी केंद्रीय नेतृत्व के पास झारखंड की राजनीति में इन दिनों घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने पार्टी के खिलाफ खुलकर बगावती रुख अपना लिया है। उन्होंने न केवल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व बल्कि राज्य की गठबंधन सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब उनके पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। “कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा” अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनके पिता के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा और दबाव में ली गई है। उनका आरोप है कि न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का मौका मिला। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें चेतावनी दिए जाने की बात कही गई थी। 3 साल के लिए पार्टी से बाहर योगेंद्र साव झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 मार्च को योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। पार्टी के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ बयानबाजी की, जो संगठनात्मक नियमों के खिलाफ है। घर तोड़े जाने से बढ़ा विवाद अंबा प्रसाद ने बड़कागांव स्थित चट्टी बरियातू कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में उनके आवास को बुलडोजर से गिराए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि बिना उचित मुआवजा और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए उनके घर को ध्वस्त किया गया, जिससे परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। अंबा प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व, गठबंधन सरकार, पुलिस-प्रशासन और NTPC Limited पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से टारगेट किया जा रहा है। “धमकियां मिलीं, करियर खत्म करने की कोशिश” अंबा प्रसाद ने दावा किया कि उनके पिता को लगातार धमकियां दी गईं और उनका राजनीतिक करियर खत्म करने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि निष्कासन का फैसला दबाव में लिया गया है। केंद्रीय नेतृत्व से करेंगी न्याय की मांग उन्होंने साफ किया कि इस पूरे मामले को लेकर वे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के पास जाएंगी और न्याय की मांग करेंगी।
असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तस्वीर अब साफ होती नजर आ रही है। झारखंड में साथ मिलकर सरकार चला रहे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब असम में आमने-सामने होंगे। लंबे समय से जारी सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने के बाद झामुमो ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता नहीं हो सका, इसलिए अब झामुमो 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा, जबकि एक सीट वाम दलों के लिए छोड़ी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई। दिल्ली से रांची तक चली बातचीत, लेकिन नहीं बनी बात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद दिल्ली जाकर कांग्रेस नेतृत्व से मिले थे। वहीं असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई रांची पहुंचकर वार्ता कर चुके थे। इसके बावजूद सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस झामुमो को पांच से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं थी, जबकि झामुमो ज्यादा हिस्सेदारी चाहता था। आदिवासी और टी-ट्राइब वोट पर झामुमो की नजर असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। झामुमो अपनी रणनीति इन्हीं सीटों पर केंद्रित कर रहा है। पार्टी का मानना है कि झारखंड में आदिवासी राजनीति का अनुभव असम में भी असर दिखा सकता है। साथ ही, चाय बागान (टी-ट्राइब) समुदाय को साधने की भी कोशिश की जा रही है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ‘तीर-कमान’ के साथ चुनावी मैदान में निर्वाचन आयोग से झामुमो को असम में भी उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ मिल चुका है। फिलहाल राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। झामुमो नेताओं का दावा है कि वे इस चुनाव में मजबूती से उतरेंगे और असम की राजनीति में अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
झारखंड में आगामी ईद, सरहुल और रामनवमी को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और कई अहम निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि त्योहारों के नाम पर किसी भी तरह की अशांति, हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 24 घंटे अलर्ट पर रहेंगे प्रशासन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को 24 घंटे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। संवेदनशील इलाकों में कड़ी सुरक्षा सीएम ने खास तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर किसी भी तरह की गतिविधि से शांति भंग नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी समुदायों के लोगों से सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया। जुलूस मार्ग और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर नजर त्योहारों के दौरान निकलने वाली शोभायात्राओं को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा। जुलूस के रूट का पहले से भौतिक सत्यापन करने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने और हर गतिविधि की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगाह किया कि त्योहारों के दौरान अफवाह फैलाने वाले सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान सीएम ने कहा कि शोभायात्राओं में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधा का विशेष ख्याल रखा जाए। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी के लिए पहले से तैयारी रखने और जुलूस मार्ग में ‘सेफ जोन’ बनाने के निर्देश भी दिए गए। सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का उपयोग बैठक में यह भी तय किया गया कि जुलूस मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और ड्रोन के जरिए निगरानी की जाए। इसके अलावा फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, दंगा नियंत्रण वाहन और वॉटर कैनन जैसे संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखने का निर्देश दिया गया। भड़काऊ गानों और गतिविधियों पर रोक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शोभायात्रा के दौरान किसी भी तरह के भड़काऊ या उत्तेजक गाने नहीं बजने चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन को पूजा समितियों और अखाड़ों के साथ समन्वय बनाकर प्री-रिकॉर्डेड गानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। त्योहारों में शांति बनाए रखने की अपील मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और समय रहते समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने दोहराया कि त्योहार खुशी और भाईचारे का प्रतीक हैं, इसलिए किसी को भी इसे बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।