झारखंड

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर बन रहा आधुनिक स्टेट हैंगर, सीएम ने किया निरीक्षण

Anjali Kumari अप्रैल 24, 2026 0
Birsa Munda Airport
Birsa Munda Airport

रांची। झारखंड में हवाई सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को बिरसा मुंडा हवाई अड्डा परिसर में निर्माणाधीन स्टेट हैंगर का निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, तकनीक और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया।

 

सीएम ने दिए सख्त निर्देश


निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक आधारभूत संरचनाएं राज्य के विकास और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

नई तकनीक और निगरानी पर जोर


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्माण कार्यों में नवीनतम तकनीक, बेहतर संसाधनों और प्रभावी प्रबंधन के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा


इस मौके पर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी।

 

पंचायती राज कार्यक्रम के लिए आमंत्रण


इसी दौरान पंचायती राज विभाग की निदेशक बी. राजेश्वरी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें 24 अप्रैल 2026 को रांची में आयोजित होने वाले “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह मुखिया सम्मेलन 2026” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

 

झारखंड के विकास की दिशा में अहम कदम


स्टेट हैंगर परियोजना के पूरा होने से राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा। इसे झारखंड के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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धनबाद में फिर भू-धंसान, टंडाबाड़ी में कई घायल

धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले के सोनारडीह ओपी क्षेत्र स्थित टंडाबाड़ी बस्ती में एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। गुरुवार को हुई इस घटना में 3 से 4 लोगों के घायल होने की सूचना है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं।   घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना में घायल एक युवक अरमान की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं अन्य घायलों का इलाज तिलाटांड़ अस्पताल में चल रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से घायलों की सटीक संख्या की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।   गुस्साए लोगों ने NH-32 किया जाम भू-धंसान की घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बोकारो-धनबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-32 को जाम कर दिया। लोगों का आरोप है कि बीसीसीएल और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।   प्रशासन और पुलिस मौके पर तैनात घटना की सूचना मिलते ही सीओ गिरिजानंद किस्कू ने बीसीसीएल अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। पुलिस के पहुंचने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया जाएगा।   पहले भी हो चुकी है बड़ी घटना गौरतलब है कि इसी टंडाबाड़ी बस्ती में 31 मार्च 2026 को भी भू-धंसान की बड़ी घटना हुई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा हाल ही में जमीन चार फीट तक धंसने की घटना भी सामने आई थी।   स्थायी समाधान की मांग लगातार हो रही घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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रांची के जगन्नाथपुर मंदिर में गार्ड की बेरहमी से हत्या

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार देर रात सुरक्षा गार्ड की हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई है। करीब 335 साल पुराने इस मंदिर में हुई इस वारदात ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है।   मृतक गार्ड की पहचान, रात में हुई वारदात मृतक की पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है, जो लंबे समय से मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि अज्ञात अपराधियों ने देर रात मंदिर परिसर में ही उनकी हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह जब पुजारी और स्थानीय लोग मंदिर पहुंचे तो गार्ड का शव देखकर पुलिस को सूचना दी गई।   पुलिस और FSL टीम जांच में जुटी घटना की जानकारी मिलते ही धुर्वा, जगन्नाथपुर और विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके अलावा हटिया डीएसपी, एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है।   रंजिश या चोरी की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हत्या के पीछे आपसी रंजिश या चोरी की संभावना जताई है, हालांकि अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।   ऐतिहासिक मंदिर में दहशत का माहौल नीलांचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर वर्ष 1691 में बड़कागढ़ रियासत के राजा एनीनाथ शाहदेव द्वारा पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनवाया गया था। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा होती है और यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। घटना के बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भय और आक्रोश का माहौल है।

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वनभूमि घोटाला केस में IAS विनय चौबे की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, अब फैसला आना बाकी

हजारीबाग। झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग वनभूमि घोटाला मामले से जुड़े आरोपी आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।   एसीबी और बचाव पक्ष ने रखी दलीलें सुनवाई के दौरान ACB ने अदालत में कहा कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो आरोपी की भूमिका को संदिग्ध बनाते हैं। एसीबी ने यह भी तर्क दिया कि मामले की गहराई से जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि विनय चौबे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उनके वकीलों ने कहा कि अब तक कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया है, जो आरोपों को साबित कर सके।   जमानत की मांग और सहयोग का आश्वासन बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपी को हिरासत में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है और उन्हें राहत दी जानी चाहिए।   ACB केस से जुड़ा मामला यह मामला एसीबी हजारीबाग द्वारा दर्ज कांड संख्या 11/2025 से संबंधित है, जिसमें वनभूमि से जुड़े कथित घोटाले और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की जा रही है।   फैसले पर टिकी निगाहें सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट जमानत मंजूर करता है या जांच को प्राथमिकता देते हुए याचिका खारिज करता है।

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