Anand Mahindra ने भारत की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की असली औद्योगिक ताकत चमकदार हेडलाइन्स या बड़ी कंपनियों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSMEs से बन रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर शुभम मिश्रा की पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की औद्योगिक क्रांति चुपचाप फैक्ट्री फ्लोर्स, वर्कशॉप्स और सप्लायर नेटवर्क में आगे बढ़ रही है। “MSMEs ही भारत की असली ताकत” Anand Mahindra ने कहा कि भारत का भविष्य केवल बड़े कॉर्पोरेट्स पर निर्भर नहीं होगा। देश की औद्योगिक मजबूती उन हजारों मध्यम स्तर के उद्यमों से बनेगी जो धीरे-धीरे विश्वस्तरीय निर्माता बनते जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मैन्युफैक्चरिंग की असली ताकत कभी ग्लैमरस नहीं होती, बल्कि यह फैक्ट्री शेड्स और छोटे वर्कशॉप्स में लगातार तैयार होती है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान नियमों की मांग महिंद्रा ने MSMEs को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर सड़कें, प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क्स और तेज रेग्युलेटरी अप्रूवल्स की जरूरत बताई। उनके मुताबिक Ease of Doing Business सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल फ्रिक्शन कम करने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और तेज हो सकती है। 12 साल में 10 गुना बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन सोशल मीडिया यूजर शुभम मिश्रा के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014 में लगभग 10 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि भारत की प्रगति को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि असली बदलाव सप्लायर इकोसिस्टम और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हो रहा है। Apple सप्लाई चेन में बढ़ी भारत की भूमिका Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में भी भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। पोस्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में iPhone उत्पादन का हिस्सा बढ़कर करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत धीरे-धीरे असेंबलिंग हब से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की तरफ बढ़ रहा है। चीन से की गई तुलना शुभम मिश्रा ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना China के शुरुआती औद्योगिक दौर से की। उनका कहना है कि चीन ने भी 2003 से 2018 के बीच धीरे-धीरे छोटे सप्लायर्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के दम पर खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग ताकत में बदला था। अब भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां छोटे वेंडर्स और Tier-3 सप्लायर्स औद्योगिक विकास की रीढ़ बन रहे हैं।
देश में हर साल बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच एयर कंडीशनर अब सिर्फ लग्ज़री नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। ऐसे में IIT Delhi और भारतीय स्टार्टअप Optimist ने मिलकर एक ऐसा 1.5 Ton 5 Star Split AC तैयार किया है, जो 50 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी कूलिंग देने का दावा करता है। यह इनोवेशन खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। एक्सट्रीम हीट के लिए बना खास AC भारत के कई हिस्सों में गर्मियों में तापमान 45°C से ऊपर पहुंच जाता है, जहां पारंपरिक AC की क्षमता कम होने लगती है। इस नए AC की खासियतें: 50°C तक भी स्थिर और प्रभावी कूलिंग हाई-एंबिएंट कूलिंग टेक्नोलॉजी लंबे समय तक लगातार चलने की क्षमता गर्म हवा में भी कंप्रेसर की बेहतर परफॉर्मेंस कंपनी का दावा है कि यह AC सिर्फ ठंडी हवा नहीं देता, बल्कि कठिन मौसम में भी लगातार परफॉर्म करता है, जो इसे बाकी मॉडलों से अलग बनाता है। रिसर्च-बेस्ड टेक्नोलॉजी, IIT का साथ इस प्रोजेक्ट को मजबूत बनाने में IIT Delhi की अहम भूमिका रही है। लंबे समय तक रिसर्च और डेवलपमेंट एडवांस लैब टेस्टिंग रियल वर्ल्ड कंडीशन्स में ट्रायल स्टार्टअप Optimist का कहना है कि इस AC को सिर्फ सैद्धांतिक नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। संभावित एडवांस फीचर्स (रिपोर्ट्स के आधार पर) हालांकि कंपनी ने सभी टेक्निकल डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की हैं, लेकिन इसमें कुछ आधुनिक फीचर्स होने की उम्मीद है: इन्वर्टर टेक्नोलॉजी (कम बिजली खपत) बेहतर हीट एक्सचेंज सिस्टम मजबूत कंप्रेसर, जो हाई टेम्परेचर में भी काम करे एनर्जी एफिशिएंसी के लिए 5-स्टार रेटिंग कीमत और वैल्यू फॉर मनी कीमत: लगभग ₹44,490 कैटेगरी: प्रीमियम सेगमेंट इस कीमत में 50°C तक कूलिंग देने का दावा इसे खास बनाता है। आम तौर पर इस रेंज में मिलने वाले AC इतने एक्सट्रीम तापमान के लिए डिजाइन नहीं होते। किन इलाकों के लिए बेस्ट? यह AC खासतौर पर उन जगहों के लिए उपयोगी है जहां गर्मी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचती है: दिल्ली-एनसीआर राजस्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्से औद्योगिक या गर्म वातावरण वाले इलाके इसके अलावा, जिन लोगों को 24x7 कूलिंग चाहिए, उनके लिए भी यह एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है। भारतीय AC मार्केट पर असर अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो इसके कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं: भारतीय कंपनियों की टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी विदेशी ब्रांड्स को कड़ी टक्कर मिलेगी एक्सट्रीम वेदर के लिए नए स्टैंडर्ड सेट होंगे रिसर्च-बेस्ड प्रोडक्ट्स का ट्रेंड बढ़ेगा यह इनोवेशन “मेक इन इंडिया” और “डिजाइन इन इंडिया” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है। ध्यान रखने वाली बातें हालांकि यह AC काफी एडवांस बताया जा रहा है, लेकिन खरीदने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है: आपके कमरे का साइज (1.5 टन उपयुक्त है या नहीं) बिजली की खपत और बिल सर्विस नेटवर्क और वारंटी आपके इलाके का वास्तविक तापमान
Rafale Deal Update: भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील में अब एक अहम शर्त जोड़ने जा रहा है-इन विमानों में स्वदेशी मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का एकीकरण (integration) अनिवार्य होगा। ICD क्या है और क्यों जरूरी? डील में Interface Control Document (ICD) अनिवार्य किया जाएगा यह एक तकनीकी डॉक्यूमेंट है जो तय करता है: कौन-सा सिस्टम किससे कैसे जुड़ेगा मिसाइल, रडार और अन्य सिस्टम कैसे काम करेंगे इससे भारतीय हथियारों को राफेल में जोड़ना आसान होगा मेगा डील की बड़ी बातें कुल लागत: ₹3.25 लाख करोड़ (लगभग) 114 राफेल जेट खरीदे जाएंगे 18 जेट सीधे फ्रांस से तैयार हालत में 96 जेट भारत में ही बनाए जाएंगे 25% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल ‘Buy & Make’ मॉडल यह डील Buy and Make कैटेगरी में होगी मतलब: कुछ जेट बाहर से आएंगे बाकी भारत में बनेंगे (Make in India को बढ़ावा) सोर्स कोड पर क्या विवाद? रिपोर्ट्स: फ्रांस की कंपनी Dassault ने सोर्स कोड देने से मना किया सरकार का जवाब: कोई भी देश अपना मालिकाना सॉफ्टवेयर कोड शेयर नहीं करता यह सामान्य प्रैक्टिस है सोर्स कोड कंट्रोल करता है: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हथियार लॉन्च सिस्टम रडार भारत की रणनीति क्या है? विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर फोकस: तेजस Mk1A AMCA (5th Gen Fighter) लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइलें इसका मतलब आसान भाषा में भारत चाहता है कि राफेल सिर्फ खरीदा न जाए, बल्कि उसमें भारतीय हथियार भी आसानी से लगाए जा सकें ताकि भविष्य में अपग्रेड और ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रहे
भारत सरकार ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए चीनी कंपनियों के इंटरनेट-आधारित CCTV कैमरों की बिक्री पर सख्ती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे ब्रांड्स को भारत में अपने उत्पाद बेचने में बड़ी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। क्या है सरकार का नया नियम? यह फैसला STQC (Standardisation Testing and Quality Certification) के तहत लागू नए नियमों के कारण लिया जा रहा है। अब सभी CCTV और निगरानी उपकरणों के लिए STQC सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा बिना सर्टिफिकेशन के कोई भी डिवाइस भारत में नहीं बेचा जा सकेगा चीनी कंपनियों और उनके चिपसेट वाले उत्पादों को मंजूरी देने में सख्ती बरती जा रही है क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का मुख्य उद्देश्य: राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना इंटरनेट से जुड़े उपकरणों में संभावित साइबर खतरे कम करना डेटा और प्राइवेसी की सुरक्षा सुनिश्चित करना नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने उत्पादों के महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (जैसे SoC) की जानकारी देनी होगी और यह साबित करना होगा कि उनके डिवाइस में कोई सुरक्षा खामी नहीं है। भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा इस फैसले के बाद घरेलू कंपनियों को बड़ा लाभ मिल सकता है। CP Plus Qubo Prama Matrix Sparsh इन कंपनियों ने पहले ही अपने सप्लाई चेन को अपडेट कर लिया है और नॉन-चाइनीज कंपोनेंट्स का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय ब्रांड्स अब CCTV मार्केट का 80% से ज्यादा हिस्सा अपने नाम कर चुके हैं। विदेशी कंपनियों पर असर जहां एक तरफ चीनी कंपनियों के लिए यह बड़ा झटका है, वहीं प्रीमियम सेगमेंट में अभी भी Bosch Honeywell जैसी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। बड़ी तस्वीर यह कदम सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार अब ऐसे सभी इंटरनेट-कनेक्टेड डिवाइसेस पर कड़ी निगरानी रखना चाहती है, जो डेटा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।