मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 34वां दिन है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि उनकी पत्नी की मौत हो गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी नूरन्यूज के मुताबिक, हमले के बाद खराजी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। कौन हैं कमाल खराजी? कमाल खराजी ईरान के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ रहे हैं: 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अंतरराष्ट्रीय मामलों में ईरान की रणनीति तय करने में अहम भूमिका जंग का 34वां दिन, अमेरिका का सख्त रुख इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “ऑपरेशन फ्यूरी” जारी रहेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया और संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई अभी जारी रहेगी। बढ़ता तनाव और लगातार हमले मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं: कई शहरों में हवाई हमले जारी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आ रही हैं खराजी और उनकी पत्नी पर हुआ हमला इस संघर्ष के और गंभीर होने का संकेत माना जा रहा है। वैश्विक चिंता बढ़ी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमले से हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा।
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 33वां दिन है। क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों पक्षों के दावों-प्रत्यारोपों के बीच कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। लेबनान में ईरानी कमांडर मारा गया: इजरायल का दावा इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने लेबनान में ईरानी कुद्स फोर्स के कमांडर हुसैन महमूद मर्शाद अल-जौहरी को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि अल-जौहरी सीरिया-लेबनान क्षेत्र में इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन संभाल रहे थे। इस कार्रवाई का वीडियो भी इजरायल की ओर से जारी किया गया है। नेतन्याहू का बड़ा आरोप इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दो बार हत्या की कोशिश की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तेहरान में फार्मा प्लांट पर हमले का दावा ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने तेहरान स्थित ‘टोफिघ दारू’ फार्मास्युटिकल प्लांट पर हमला किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से देश की मेडिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईंधन डिपो पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके पीछे ईरान और उसके सहयोगी गुटों का हाथ बताया जा रहा है। हमले में ईंधन टैंकों को भारी नुकसान हुआ और आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। UN शांति सैनिकों की मौत पर IDF का इनकार दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UNIFIL) की मौत के मामले में इजरायली सेना ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। IDF ने कहा कि 31 मार्च की घटना की जांच में उनकी भूमिका नहीं पाई गई है। होर्मुज स्ट्रेट पर UAE का रुख इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी सक्रिय होता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में बढ़ता तनाव लगातार हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और सख्त बयानों के चलते मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। कई ह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और व्यापक होता दिख रहा है। जंग के 26वें दिन मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। कुवैत में हाई अलर्ट, कई ड्रोन मार गिराए गए कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के मुताबिक, अगर लोगों को धमाके सुनाई दे रहे हैं तो वह एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई का नतीजा है। कुवैत नेशनल गार्ड ने भी पुष्टि की है कि उसने अपने क्षेत्र में कम से कम 5 ड्रोन मार गिराए हैं। नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है। इराक में अमेरिका के ठिकानों पर 23 हमलों का दावा वहीं, इराक के उग्रवादी संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जंग का मानवीय असर गहराया ईरान में जारी हमलों का असर बेहद गंभीर होता जा रहा है। अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत और 18,551 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग शामिल करीब 200 महिलाओं की मौत 28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की जान गई 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत लेबनान और इजराइल में भी हमले तेज दक्षिणी लेबनान में इजराइल की एयरस्ट्राइक में 9 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, हिजबुल्लाह ने इजराइल पर करीब 30 रॉकेट दागे, जिससे उत्तरी इलाकों में सायरन बजने लगे। अमेरिका की सैन्य तैयारी तेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 पैराट्रूपर्स भेजने का फैसला किया है। ये सैनिक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं, जो तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। इसे संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। कूटनीतिक हल की कोशिशें भी जारी इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हालात पर चिंता जताई और युद्ध खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा और व्यापार पर।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जंग को “जीत चुका है” और ईरान अब कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। “ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा: अगर हमला नहीं किया जाता, तो ईरान दो हफ्ते में परमाणु हथियार बना लेता ईरान इसका इस्तेमाल इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया में कर सकता था अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया “तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं हमारे विमान” ट्रंप ने यह भी कहा कि जंग में ईरान की नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनके मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और अन्य इलाकों के ऊपर उड़ान भर रहे हैं, जो उनकी सैन्य बढ़त को दिखाता है। “समझौते के लिए तैयार है ईरान” ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है। बातचीत में शामिल प्रमुख नाम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रूबियो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जेरेड कुशनर हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह पहले से सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो चुका है। ईरान में “सत्ता परिवर्तन” का दावा ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उनके मुताबिक: मौजूदा नेतृत्व पहले से अलग है नए लोग सत्ता में आए हैं यह बदलाव “रिजीम चेंज” जैसा है पाकिस्तान की एंट्री: मध्यस्थता की पेशकश इस बीच पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर पहल दिखाई है। ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि: पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है शांति वार्ता के लिए “सार्थक और निर्णायक भूमिका” निभाने को तैयार है
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह युद्ध उम्मीद से कहीं जल्दी समाप्त हो सकता है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। “ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई” नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान के तहत ईरान के उन कारखानों को निशाना बनाया गया है, जहां मिसाइल और परमाणु हथियारों के पुर्जे तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन क्षमता “तेजी से नष्ट” की जा रही है सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है अभियान “तेजी से लक्ष्य हासिल कर रहा है” उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अमेरिका की भूमिका पर क्या कहा? नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में खींचा है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं और अमेरिका-इजरायल के बीच गहरा तालमेल है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। गैस ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका के अनुरोध पर इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पहले किए गए हमले इजरायल ने “स्वतंत्र रूप से” किए थे। युद्ध का विस्तार संभव, जमीनी कार्रवाई के संकेत अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से हवाई हमलों तक सीमित रहा है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि जमीनी कार्रवाई (Ground Operation) भी संभव है। उन्होंने कहा कि इसके कई विकल्प मौजूद हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। ईरान के अंदर अस्थिरता का दावा नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व में अंदरूनी तनाव और अस्थिरता के संकेत भी दिए। उनका कहना है कि वहां सत्ता के भीतर खींचतान बढ़ रही है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति किसी बड़े जनविद्रोह में बदलेगी या नहीं। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा सैन्य बढ़त के चलते यह युद्ध उम्मीद से जल्दी समाप्त हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक दबाव इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष और तीखा हो गया है। जंग के 18वें दिन दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं, जबकि हालात यह संकेत दे रहे हैं कि टकराव जल्द थमता नजर नहीं आ रहा। अमेरिकी दावों के उलट, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है और खाड़ी क्षेत्र में उसकी आक्रामक रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है। ईरान का सख्त संदेश: ‘शुरू आपने किया, खत्म हम करेंगे’ ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फागरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे संदेश देते हुए कहा कि युद्ध का फैसला सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में होगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि: ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रह सकते हैं युद्ध के अंत का फैसला ईरान करेगा, न कि अमेरिका रणनीतिक झटका: AN/FPS-117 रडार सिस्टम तबाह ईरान ने ड्रोन हमले में अमेरिकी एयर डिफेंस नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के अल-क़ैसुमाह एयरपोर्ट पर तैनात लंबी दूरी के 3D रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। AN/FPS-117 रडार: यह रडार 400 किमी तक हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल ट्रैक करने में अहम अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित इस सिस्टम को निष्क्रिय करना अमेरिका की निगरानी क्षमता पर सीधा असर डाल सकता है। MQ-9 Reaper ड्रोन को भारी नुकसान युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन MQ-9 Reaper को भी भारी नुकसान हुआ है। अब तक 10–11 ड्रोन गिराए जाने की खबर ईरान और यमन दोनों मोर्चों पर नुकसान यह ड्रोन निगरानी और सटीक हमले के लिए जाना जाता है 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान और हेलफायर मिसाइल से लैस विशेषज्ञों के अनुसार, यह नुकसान अमेरिकी ड्रोन फ्लीट का लगभग 10% तक हो सकता है, जो रणनीतिक दृष्टि से बड़ा झटका है। जमीनी हकीकत बनाम राजनीतिक दावे जहां डोनाल्ड ट्रंप युद्ध में बढ़त का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी हालात इससे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव चरम पर बातचीत की संभावना फिलहाल कमजोर क्षेत्रीय असर और बढ़ता खतरा इस संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सुरक्षा चिंताएं भी गहरा सकती हैं।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को 18 दिन हो चुके हैं, जहां ईरान लगातार इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। लेकिन इस पूरी जंग में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में है- ईरान ने अब तक अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? क्या यह कमजोरी है या सोची-समझी सैन्य रणनीति? ईरान की एयरफोर्स: पुरानी ताकत, सीमित क्षमता ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक एयर फोर्स (IRIAF) के पास कागजों पर 400-600 विमान जरूर हैं, लेकिन इनमें से केवल 200-230 के आसपास ही फाइटर जेट हैं। इनमें से ज्यादातर विमान 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले खरीदे गए थे, जब ईरान के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका से अच्छे संबंध थे। ईरान के प्रमुख लड़ाकू विमान: F-14 Tomcat – दुनिया में अब सिर्फ ईरान के पास सक्रिय F-4 Phantom II और F-5 Tiger II – 1960-70 के दशक के MiG-29 और Su-24 – सीमित संख्या में स्वदेशी जेट: Kowsar और Saeqeh विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्वदेशी जेट भी आधुनिक नहीं बल्कि पुराने अमेरिकी डिजाइनों के अपग्रेडेड संस्करण हैं। क्यों नहीं उतार रहा ईरान अपने फाइटर जेट? 1. तकनीकी रूप से पिछड़े विमान ईरान के अधिकांश जेट पुराने हैं और उनमें आधुनिक रडार, स्टेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कमी है। इसके मुकाबले इजरायल के पास F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ जेट हैं, जो रडार से बच निकलते हैं। 2. एयर डिफेंस का बड़ा खतरा अमेरिका और इजरायल के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम हैं जैसे: Iron Dome Patriot Missile System ऐसे में ईरानी जेट दुश्मन के इलाके में घुसते ही मार गिराए जा सकते हैं। 3. स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस की समस्या अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को पुराने जेट्स के लिए जरूरी पार्ट्स नहीं मिलते। इससे कई विमान सिर्फ सीमित समय तक ही उड़ान भर सकते हैं या पूरी तरह निष्क्रिय हैं। 4. लंबी दूरी और रिफ्यूलिंग की कमी ईरान और इजरायल के बीच सीधी सीमा नहीं है। ऐसे में जेट्स को लंबी दूरी तय करनी होगी, जिसके लिए हवा में ईंधन भरने (air-to-air refueling) की जरूरत होती है- इसमें ईरान कमजोर है। मिसाइल और ड्रोन: ईरान की असली ताकत जहां फाइटर जेट कमजोर हैं, वहीं ईरान ने मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया है। मुख्य हथियार: बैलिस्टिक मिसाइल: Fateh-110, Sejjil क्रूज मिसाइल: Soumar ड्रोन: Shahed-136 इनकी खासियत: लंबी दूरी तक सटीक हमला कम लागत (एक ड्रोन ~20,000 डॉलर) बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल इसके उलट, एक इंटरसेप्टर मिसाइल (जैसे पैट्रियट) की कीमत 30-40 लाख डॉलर तक होती है। यानी ईरान “कम लागत में ज्यादा नुकसान” की रणनीति अपना रहा है। रणनीति या मजबूरी? विशेषज्ञों का मानना है कि: यह पूरी तरह कमजोरी नहीं, बल्कि “असिमेट्रिक वॉरफेयर” (Asymmetric Warfare) की रणनीति है ईरान जानबूझकर अपने जेट्स को बचाकर रख रहा है ड्रोन और मिसाइल से दुश्मन के संसाधनों को थका रहा है ईरान का फाइटर जेट इस्तेमाल न करना उसकी कमजोरी कम, रणनीति ज्यादा दिखता है। वह सीधे हवाई युद्ध में उतरने के बजाय कम लागत वाले और प्रभावी हथियारों- मिसाइल और ड्रोन- के जरिए दबाव बना रहा है।
अमीरात,एजेंसियां। मध्य पूर्व में हो रहे युद्ध का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इसी को देखते हुए Council for the Indian School Certificate Examinations (CISCE) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित होने वाली ICSE और ISC 2026 बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय कक्षा 10 और 12 के छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।बोर्ड के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित करना सुरक्षित नहीं है। इसलिए छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द कर दी गई है। हालांकि छात्रों को राहत देते हुए बोर्ड ने कहा है कि उनके परिणाम घोषित किए जाएंगे और इसके लिए वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जाएगी। वैकल्पिक मूल्यांकन के आधार पर तैयार होंगे परिणाम CISCE के मुख्य कार्यकारी और सचिव Joseph Emmanuel ने बताया कि परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों के परिणाम जारी किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड एक विशेष वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग करेगा।संभावना है कि इस प्रक्रिया में स्कूलों द्वारा आयोजित आंतरिक परीक्षाएं, प्रैक्टिकल टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड को शामिल किया जाएगा। इन सभी पहलुओं के आधार पर छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार किया जाएगा।बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि UAE के छात्रों के परिणाम भारत में पढ़ने वाले छात्रों के साथ ही घोषित किए जाएंगे, ताकि किसी भी छात्र के शैक्षणिक सत्र पर नकारात्मक असर न पड़े। असंतुष्ट छात्रों को मिलेगा सुधार परीक्षा का मौका बोर्ड ने छात्रों को एक और राहत देते हुए कहा है कि यदि कोई छात्र वैकल्पिक मूल्यांकन के आधार पर मिले अंकों से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे सुधार परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।यह परीक्षा तब आयोजित की जाएगी जब क्षेत्र में हालात सामान्य हो जाएंगे और परीक्षा आयोजित करना सुरक्षित माना जाएगा। इससे छात्रों को अपने अंक सुधारने का अवसर मिलेगा। हालात की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला बताया गया है कि यह फैसला क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है। इस प्रक्रिया में दुबई के ज्ञान एवं मानव विकास प्राधिकरण (KHDA) और भारतीय वाणिज्य दूतावास समेत कई संस्थाओं से सलाह ली गई थी।इसी बीच UAE में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए वसंत अवकाश भी पहले ही शुरू कर दिया गया है। यह अवकाश 9 मार्च से 22 मार्च तक रहेगा। स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों और अभिभावकों को परीक्षा रद्द होने और आगे की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दें।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव-जहां Iran, Israel और United States आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं-ने दुनिया भर में एक अहम बहस को जन्म दे दिया है। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों और नागरिकों की मौतों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या युद्ध में भी कुछ नियम होते हैं और अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून कैसे देखता है। इसी संदर्भ में ‘वॉर क्राइम’ यानी युद्ध अपराध की चर्चा तेज हो गई है। क्या होता है वॉर क्राइम? सरल शब्दों में समझें तो युद्ध के दौरान किए गए ऐसे गंभीर अपराध, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें वॉर क्राइम कहा जाता है। युद्ध में सैनिक एक-दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन जानबूझकर आम नागरिकों, अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों या राहत शिविरों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध माना जाता है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध की स्थिति में भी मानवता और बुनियादी अधिकारों की रक्षा की जाए। युद्ध के नियम कहां से आए दुनिया ने दो विनाशकारी विश्व युद्धों के बाद यह महसूस किया कि युद्ध के दौरान भी कुछ मानवीय सीमाएं तय होना जरूरी हैं। इसी सोच के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Geneva Conventions बनाए गए। इन समझौतों में स्पष्ट रूप से तय किया गया कि: नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। अस्पतालों और राहत केंद्रों पर हमला प्रतिबंधित होगा। युद्धबंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा। अगर कोई देश या उसकी सेना इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे वॉर क्राइम की श्रेणी में रखा जा सकता है। मिडिल ईस्ट के संघर्ष में क्यों उठ रहा यह सवाल मौजूदा समय में Iran और Israel के बीच लगातार सैन्य हमले हो रहे हैं, जबकि United States भी इस टकराव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कई सैन्य ठिकानों के साथ-साथ शहरों के आसपास भी हमले हुए हैं, जिनका असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या इन हमलों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। वॉर क्राइम की जांच और सजा कौन देता है ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष अदालतें बनाई गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है International Criminal Court (ICC)। यह अदालत उन मामलों की जांच कर सकती है जिनमें नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और वॉर क्राइम जैसे गंभीर आरोप शामिल हों। हालांकि व्यवहार में यह प्रक्रिया अक्सर जटिल होती है, क्योंकि कई बार बड़े देशों की राजनीतिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। क्या किसी राष्ट्राध्यक्ष को कभी सजा मिली है इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब राष्ट्राध्यक्षों या शीर्ष नेताओं को युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति Charles Taylor को सिएरा लियोन के गृहयुद्ध में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए 50 साल की सजा सुनाई गई। इराक के पूर्व राष्ट्रपति Saddam Hussein को मानवाधिकार उल्लंघनों और युद्ध अपराधों के आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद फांसी दी गई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुए Nuremberg Trials में नाजी शासन के कई शीर्ष नेताओं को युद्ध अपराधों के लिए सजा दी गई, जिनमें कई को मृत्युदंड भी मिला। कुछ मामलों में नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए, लेकिन उन्हें सजा नहीं मिल सकी। उदाहरण के तौर पर सूडान के पूर्व राष्ट्रपति Omar al-Bashir के खिलाफ ICC ने वारंट जारी किया था, लेकिन अब तक मुकदमा पूरा नहीं हो सका। क्या मौजूदा युद्ध में किसी नेता को सजा मिल सकती है सैद्धांतिक रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश के नेता पर वॉर क्राइम का मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन व्यवहारिक रूप से यह बेहद कठिन होता है। कारण यह है कि कई शक्तिशाली देश ICC के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करते या अंतरराष्ट्रीय जांच में सीमित सहयोग देते हैं। इसके अलावा किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई तभी संभव होती है, जब वह सत्ता से बाहर हो या उसके खिलाफ वैश्विक राजनीतिक सहमति बन जाए। वास्तविकता क्या कहती है विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े और शक्तिशाली देशों के नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाना बहुत मुश्किल होता है। अक्सर ऐसे मामलों में कार्रवाई कमजोर या पराजित पक्ष के नेताओं पर ही होती है। यही वजह है कि मौजूदा मिडिल ईस्ट संघर्ष में भले ही युद्ध अपराधों को लेकर गंभीर आरोप और बहस हो रही हो, लेकिन निकट भविष्य में किसी बड़े नेता को अंतरराष्ट्रीय अदालत से सजा मिलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। सरल शब्दों में कहा जाए तो युद्ध में भी नियम मौजूद हैं, लेकिन वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन के कारण इन नियमों को लागू करना हमेशा आसान नहीं होता।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज