भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया। राजधानी दिल्ली स्थित ‘वीर भूमि’ में आयोजित प्रार्थना सभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने किया नमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।” प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर भूमि पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने साझा किया भावुक संदेश राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजीव गांधी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रहा। 1984 में बने थे प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले कई कदम उठाए गए। 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
रोम, एजेंसियां। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच खास दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। रोम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प पल तब सामने आया, जब पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की। इस खास तोहफे को लेकर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में धन्यवाद कहा और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए “बहुत, बहुत अच्छी टॉफी” लेकर आए। सोशल मीडिया पर मेलोनी का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने इसे भारत-इटली के मजबूत होते रिश्तों और दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री का प्रतीक बताया। डिनर टेबल पर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा रोम में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और इटली के संबंध अब नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। डिनर के बाद दोनों नेताओं ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का भी दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए जा रहे हैं। ‘इंडो-मेडिटेरेनियन’ साझेदारी को नई दिशा भारत और इटली ने अपने रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताते हुए एक साझा विजन भी पेश किया है। “इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन” शीर्षक से जारी संयुक्त लेख में दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है। यह दौरा भारत-इटली संबंधों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
Titan के शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट Titan Company के शेयर सोमवार को शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। कंपनी का शेयर करीब 283 रुपये गिरकर 4,230 रुपये तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर ने 4,220 रुपये का निचला स्तर भी छुआ। बाजार में यह गिरावट उस वक्त देखने को मिली जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से एक साल तक शादी के लिए सोना खरीदने से बचने की अपील की। PM मोदी के बयान से क्यों बढ़ी चिंता? हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का जिक्र करते हुए लोगों से ईंधन की बचत करने और शादी के लिए सोना खरीदने से परहेज करने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है। इन दोनों की खरीद डॉलर में होती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार को आशंका है कि अगर सोने की खरीद में कमी आती है तो ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है, खासकर शादी के सीजन में। Titan के साथ दूसरे ज्वेलरी शेयर भी लुढ़के Kalyan Jewellers और Senco Gold समेत कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। Senco Gold के शेयर करीब 9% टूटे Kalyan Jewellers में लगभग 8% की गिरावट आई Titan के शेयर 6% से ज्यादा फिसले इस बिकवाली ने पूरे ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया। मजबूत नतीजों के बावजूद क्यों टूटा Titan? दिलचस्प बात यह रही कि Titan Company ने हाल ही में मजबूत तिमाही नतीजे जारी किए थे। कंपनी का Q4FY26 कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 35 प्रतिशत बढ़कर 1,179 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 871 करोड़ रुपये था। इसके अलावा कंपनी की कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,300 करोड़ रुपये रही। EBIT में भी 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद निवेशकों ने भविष्य में सोने की मांग घटने की आशंका को ज्यादा गंभीरता से लिया। सोने के आयात और रुपये पर दबाव चिंता की वजह रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात कर रहा था, जिसकी लागत करीब 6 अरब डॉलर प्रति माह रही। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल के बीच बढ़ता गोल्ड इंपोर्ट भारत के ट्रेड बैलेंस और रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसी वजह से बाजार में ज्वेलरी सेक्टर को लेकर फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
कोलकाता, एजेंसियां। सुवेंदु अधिकारी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद सुवेंदु, पीएम के पास गए और उन्हें झुककर प्रणाम किया। बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने सुवेंदु के अलावा 5 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टूडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल रहे। दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं शपथ समारोह मे शपथ समारोह में PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री और मिथुन चक्रवर्ती मौजूद रहे। कार्यक्रम में सबसे पहले मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी जयंती पर श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान पीएम ने भाजपा के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर आते ही प्रधानमंत्री सीधे सरकार के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और फिर उनके पैर छुए। जानिए शपथ लेने वाले मंत्रियों को 1. दिलीप घोष: खड़गपुर सदर सीट से दूसरी बार विधायक बन हैं। मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। वे BJP के महासचिव और प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। 2. अग्निमित्रा पॉल: अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल की असनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे 2021 में पहली बार इस सीट से विधायक चुनी गई थीं। 2026 में दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने 2022 का आसनसोल लोकसभा उपचुनाव और 2024 का मेदिनीपुर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों चुनाव हार गईं। 3. अशोक कीर्तनिया: 52 साल के अशोक बनगांव उत्तर सीट से विधायक हैं। मतुआ समुदाय से आते हैं। राजनीतिज्ञ और व्यवसायी हैं। 4.खुदीराम टूडू: खुदीराम रानीबांध (ST) विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे पेशे से शिक्षक रहे हैं। 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने TMC उम्मीदवार तनुश्री हांसदा को हराकर जीत दर्ज की। खुदीराम टुडू ग्रेजुएट हैं और लंबे समय से आदिवासी इलाकों में संगठन के साथ सक्रिय रहे हैं। 5. निषिथ प्रमाणिक: निषिथ मथाभांगा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे 2026 में पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले 2019 में कूचबिहार लोकसभा सीट से सांसद रहे। केंद्र में गृह राज्य मंत्री व युवा मामलों और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। उन्हें तुरंत मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान महसूस हुई बेचैनी, फिर हुए बेहोश सूत्रों के अनुसार, अजय राय दिन में कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित शिक्षकों और डॉक्टरों के एक सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अचानक सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत की कुछ देर बाद चक्कर आने लगे कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनकी हालत और बिगड़ी अंततः वे बेहोश हो गए स्थिति गंभीर होती देख उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। डॉक्टरों की टीम कर रही है लगातार निगरानी अस्पताल प्रशासन के अनुसार: उन्हें सीने में दर्द, बेचैनी और बेहोशी की शिकायत के बाद भर्ती किया गया कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है जरूरी मेडिकल जांच (जैसे ECG, ब्लड टेस्ट आदि) किए जा रहे हैं फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में और स्थिर बताई जा रही है डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर उन्हें निगरानी में रखा है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता से तुरंत निपटा जा सके। पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं नरेंद्र मोदी ने अजय राय की तबीयत बिगड़ने पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने लिखा कि अजय राय के अस्वस्थ होने की जानकारी मिली है उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की यह प्रतिक्रिया बताती है कि इस घटना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। स्वास्थ्य बिगड़ने से पहले सरकार पर साधा था निशाना गौर करने वाली बात यह है कि अजय राय ने अस्पताल में भर्ती होने से कुछ समय पहले ही मीडिया से बातचीत की थी। उन्होंने कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ा दी गईं सरकार पर पहले से योजना बनाने का आरोप लगाया उनके इस बयान के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल अजय राय की तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही: कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता बढ़ गई कई नेता और समर्थक अस्पताल पहुंचे सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआएं की जा रही हैं राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। क्या है आगे की स्थिति? फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है और अगले 24 घंटे को अहम माना जा रहा है। अगर उनकी हालत स्थिर बनी रहती है, तो जल्द ही उन्हें सामान्य वार्ड या घर भेजा जा सकता है।
बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध में गुरुवार (30 अप्रैल) शाम अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर एक क्रूज पलट गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। सीएम मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच पर्यटन विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमों ने मिलकर अभियान चलाया। क्रूज संचालन पर फिलहाल रोक हादसे के बाद सरकार ने राज्य में सभी क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। सेना के गोताखोर भी अभियान में शामिल घटना के बाद जिला प्रशासन के अनुरोध पर सेना की गोताखोर टीमों को मौके पर बुलाया गया। इन टीमों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई और कई शवों को बरामद किया। बहादुर स्थानीय लोगों को मिलेगा सम्मान सीएम मोहन यादव ने कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
सिक्किम की सुबह में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो दिवसीय सिक्किम दौरे पर हैं। मंगलवार सुबह राजधानी गंगटोक में उनका एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। पीएम मोदी ने स्थानीय बच्चों और युवाओं के साथ फुटबॉल खेला। इस दौरान उन्होंने मैदान में जमकर मस्ती की और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने इस खास पल की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं। सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें पीएम मोदी ने तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, "गंगटोक की एक खूबसूरत सुबह, सिक्किम में अपने नन्हे दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने का आनंद ही अलग है।" एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, "इन ऊर्जावान युवाओं के साथ फुटबॉल का शानदार सत्र रहा।" प्रधानमंत्री की इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। सोमवार शाम गंगटोक पहुंचे थे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार शाम गंगटोक पहुंचे थे। हेलीपैड से लोकभवन तक उनका भव्य रोड शो आयोजित किया गया। सड़क के दोनों ओर हजारों लोग पीएम मोदी की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। पूरे शहर में उत्साह और उत्सव का माहौल देखने को मिला। आज इन कार्यक्रमों में होंगे शामिल मंगलवार को प्रधानमंत्री गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा करेंगे। यहां सिक्किम की समृद्ध जैव विविधता और पुष्प विरासत को प्रदर्शित करने के लिए 'स्वर्ण जयंती मैत्री मंजरी पार्क' विकसित किया गया है। इसके बाद पीएम मोदी पालजोर स्टेडियम में सिक्किम के 50वें स्थापना दिवस के समापन समारोह में शामिल होंगे। 4 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन योजनाओं से राज्य के बुनियादी ढांचे, पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है। पिछले वर्ष मौसम बना था बाधा सिक्किम ने पिछले वर्ष अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए थे। उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वह गंगटोक नहीं पहुंच सके थे। उस समय उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित किया था।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र के प्रति अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया जा रहा है। वहीं, तमिलनाडु में भी 85.14 प्रतिशत मतदान के साथ नया रिकॉर्ड बना। बंगाल में इतिहास का सबसे बड़ा मतदान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे अधिक रहा। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान कराया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तमिलनाडु में एक चरण में संपन्न हुआ मतदान तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया गया। राज्य में 85.14 प्रतिशत मतदान ने राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी उत्साहित किया है। महिला, युवा और बुजुर्ग मतदाताओं की बड़ी भागीदारी इस चुनाव की खासियत रही। PM मोदी का TMC पर तीखा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भारी मतदान को "परिवर्तन का जनादेश" करार दिया। उन्होंने कहा कि 4 मई को मतगणना के साथ ही पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने "सिंडिकेट सिस्टम" और "महा जंगलराज" की समाप्ति हो जाएगी। पीएम ने विश्वास जताया कि जनता बदलाव का मन बना चुकी है। दूसरे चरण की तैयारी तेज पश्चिम बंगाल में बाकी 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। वहीं, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखी। दोनों राज्यों के सभी मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी, जिससे निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जा सके। अमित शाह ने संभाला मोर्चा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में मौजूद रहे। उन्होंने साल्ट लेक स्थित बीजेपी के चुनाव नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और पार्टी नेताओं के साथ चुनावी स्थिति की समीक्षा की।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार सुबह Hooghly River में नाव की सवारी कर चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। हुगली नदी में नौकायन करते हुए पीएम मोदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में प्रधानमंत्री नाव पर बैठे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नदी के मनोरम दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों से बातचीत की और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की। गंगा को बताया बंगाल की आत्मा पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के लिए गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा है, जिसका पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ बहाता है। नाविकों और मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें नाव चलाने वाले मेहनतकश लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। इसके अलावा, हुगली तट पर सुबह टहलने आए लोगों से भी उन्होंने बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि हुगली के तट पर बिताया गया समय मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास और बंगालवासियों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में पीएम मोदी की यह नाव यात्रा राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले भी पीएम मोदी झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचकर स्थानीय स्वाद का आनंद लेते नजर आए थे। अब हुगली में उनकी नाव यात्रा चर्चा का नया केंद्र बन गई है।
महंगे सिस्टम के बीच सस्ता और असरदार विकल्प अपनाया United States ने वेस्ट एशिया में बढ़ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अब नया और किफायती तरीका अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने Saudi Arabia के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यूक्रेन की ‘Sky Map’ तकनीक तैनात की है। यह तकनीक पहले Ukraine ने रूस के हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल की थी और अब इसे ईरान समर्थित ड्रोन हमलों के खिलाफ उपयोग किया जा रहा है। क्या है Sky Map और कैसे करता है काम Sky Map एक एडवांस कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म है, जो रडार और सेंसर से मिले डेटा को एक साथ जोड़कर आने वाले ड्रोन और मिसाइल खतरों की पहचान करता है। यह सिस्टम खासतौर पर ड्रोन झुंड (swarm attacks) को ट्रैक करने और उन्हें रोकने में मदद करता है। इसे यूक्रेन में हजारों सेंसर के नेटवर्क के साथ विकसित किया गया था, जिससे यह कम लागत में प्रभावी सुरक्षा देता है। ईरान के ड्रोन हमलों के बाद बढ़ी जरूरत Iran के साथ चल रहे तनाव के बीच सऊदी स्थित अमेरिकी एयरबेस पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी एयरफोर्स के हाई-टेक विमान और रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे मौजूदा रक्षा व्यवस्था की कमजोरियां सामने आई हैं। यूक्रेनी विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग Sky Map के इस्तेमाल के लिए यूक्रेनी सैन्य विशेषज्ञ हाल ही में एयरबेस पहुंचे और अमेरिकी सैनिकों को ट्रेनिंग दी। यह पहली बार है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल की गई तकनीक को सीधे मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र में लागू किया गया है। अन्य तकनीकों पर भी काम जारी अमेरिका सिर्फ Sky Map पर निर्भर नहीं है। वह नए इंटरसेप्टर ड्रोन और सेंसर सिस्टम भी टेस्ट कर रहा है। हालांकि शुरुआती परीक्षणों में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। पेंटागन ने ड्रोन खतरों से निपटने के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है, जिससे सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा सके। रणनीतिक रूप से अहम है प्रिंस सुल्तान एयरबेस Prince Sultan Air Base अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है। यह बेस एडवांस रडार सिस्टम, मिसाइल डिफेंस और हवाई ऑपरेशन के लिए प्रमुख भूमिका निभाता है। हालांकि हालिया हमलों ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन जैसे सस्ते हथियार भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 18 अप्रैल को रात के 8.30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि वे कुछ चौकाने वाली घोषणाएं कर सकते हैं। कुछ लोगों कयास लगा रहे हैं कि पीएम मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर कुछ खासे कहना चाहते हैं।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi मंगलवार को Delhi–Dehradun Expressway का उद्घाटन करेंगे। 213 किलोमीटर लंबा यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर ₹12,000 करोड़ से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह परियोजना Delhi, Uttar Pradesh और Uttarakhand से होकर गुजरती है। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय वर्तमान छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाएगा। परियोजना में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज, चार प्रमुख पुल और 12 वे-साइड सुविधाओं का निर्माण शामिल है। साथ ही उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम होगी। प्रधानमंत्री उद्घाटन से पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में वन्यजीव गलियारे का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे देहरादून के पास स्थित Jai Maa Daat Kali Temple में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर जनसभा को संबोधित करेंगे। परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे वन्यजीव गलियारों में शामिल है। इसके अलावा आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए 200 मीटर लंबे दो अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। सरकार का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। साथ ही दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
PM Modi Siuri Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीरभूम जिले के सिउड़ी के चांदमारी ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने राज्य में सत्ता परिवर्तन की अपील करते हुए कहा कि बंगाल के विकास के लिए भाजपा सरकार जरूरी है। बंगला में संदेश: “भय नाय, भोरसा चाई” प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत बंगला में करते हुए कहा: “भय नाय, भोरसा चाई” (डर नहीं, भरोसा चाहिए) उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल में सुरक्षा, सम्मान और विकास का माहौल लाएगी। “आपने मुझे पीएम बनाया, अब बंगाल में भाजपा का सीएम बनाएं” पीएम मोदी ने जनता से अपील करते हुए कहा: “आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया, अब बंगाल में भाजपा का मुख्यमंत्री बनवाइए।” उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे राज्य में तेजी से विकास होगा। टीएमसी पर तीखा हमला प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए: ‘महा जंगलराज’: बागटुई नरसंहार का जिक्र कर कानून व्यवस्था पर सवाल ‘कट मनी’: योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप मनरेगा फंड घोटाला: केंद्र की राशि जनता तक न पहुंचने का दावा घुसपैठ और जमीन कब्जा: स्थानीय लोगों की नौकरियां छिनने का आरोप ‘बम उद्योग’: कुटीर उद्योग की जगह बम बनाने को बढ़ावा देने का तंज किसानों और महिलाओं के लिए वादे किसानों के लिए FPO (Farmer Producer Organization) बनाने का वादा DBT योजना के जरिए सीधे खातों में पैसा ट्रांसफर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता ‘मां-माटी-मानुष’ पर सवाल मोदी ने कहा कि टीएमसी का “मां-माटी-मानुष” नारा अब सिर्फ खोखला वादा बनकर रह गया है और जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखता। बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा प्रधानमंत्री ने बीरभूम में आदिवासी छात्रा और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना का जिक्र करते हुए कहा: “यह चुनाव हमारी बेटियों की सुरक्षा के लिए है।” ‘मोदी की गारंटी’ का भरोसा रैली के अंत में पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि: भाजपा सरकार बनते ही सभी वादों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाएगा बंगाल में तेज विकास और बेहतर कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक खुला लेख लिखते हुए इसकी अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा हुआ है। साथ ही, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की है। क्यों जरूरी है महिला आरक्षण बिल? प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि: भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है इसके बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम है उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो: शासन की गुणवत्ता बेहतर होती है नई सोच और अनुभव से नीतियां मजबूत बनती हैं सभी दलों से समर्थन की अपील PM मोदी ने कहा: यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, पूरे देश का है महिला सशक्तिकरण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करें। 16 अप्रैल को संसद में चर्चा प्रधानमंत्री ने बताया कि: 16 अप्रैल को संसद सत्र बुलाया जाएगा इस दौरान महिला आरक्षण बिल पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया होगी क्या है इसका महत्व? PM मोदी के अनुसार: यह बिल लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का बड़ा अवसर मिलेगा समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं
भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा और अहम पड़ाव पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात ट्वीट कर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए बताया कि देश तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। यह उपलब्धि तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के “क्रिटिकैलिटी” हासिल करने से जुड़ी मानी जा रही है। क्या हासिल किया भारत ने? भारत ने सफलतापूर्वक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में बड़ी उपलब्धि हासिल की है यह तकनीक खपत से ज्यादा परमाणु ईंधन पैदा कर सकती है इससे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा मजबूत होगी ‘क्रिटिकैलिटी’ का क्या मतलब है? सरल भाषा में- जब परमाणु रिएक्टर स्वयं चलने वाली (self-sustaining) विखंडन प्रक्रिया हासिल कर लेता है यानी अब उसे बाहरी न्यूट्रॉन की जरूरत नहीं रहती इसे ही “क्रिटिकैलिटी” कहा जाता है, जो किसी भी रिएक्टर के सफल संचालन की सबसे अहम तकनीकी उपलब्धि होती है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) क्या होता है? यह एक उन्नत परमाणु रिएक्टर है अपनी खपत से ज्यादा फ्यूल (ईंधन) पैदा करता है प्लूटोनियम और यूरेनियम के मिश्रण का इस्तेमाल करता है खास बात: यह रिएक्टर थोरियम को उपयोगी ईंधन (U-233) में बदलने का रास्ता खोलता है। क्यों खास है भारत के लिए? भारत के पास- दुनिया का सिर्फ 2% यूरेनियम लेकिन करीब 25% थोरियम भंडार इसलिए भारत की रणनीति रही है कि थोरियम का इस्तेमाल कर लंबे समय तक सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा हासिल की जाए। भारत का 3-स्टेज परमाणु कार्यक्रम पहला चरण: प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली उत्पादन दूसरा चरण (अब शुरू): प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम को उपयोगी ईंधन में बदलने की तैयारी तीसरा चरण (भविष्य): पूरी तरह थोरियम आधारित रिएक्टर दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता दुनिया में भारत की स्थिति इस उपलब्धि के बाद भारत- रूस के बाद कमर्शियल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर रखने वाला दूसरा देश बन सकता है स्वदेशी ताकत का उदाहरण यह परियोजना पूरी तरह मेड इन इंडिया है 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों (MSME सहित) का योगदान उन्नत सेफ्टी सिस्टम: आपात स्थिति में खुद बंद होने की क्षमता आगे क्या? यह सफलता भारत को तीसरे चरण यानी थोरियम आधारित ऊर्जा क्रांति की ओर ले जाएगी इससे- ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी स्वच्छ ऊर्जा बढ़ेगी भारत की वैश्विक तकनीकी स्थिति मजबूत होगी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। केरल में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके बयान पर बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे “अपमानजनक” बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। क्या कहा था खड़गे ने? दरअसल, 5 अप्रैल को केरल में एक रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि केरल के लोग “समझदार और शिक्षित” हैं, इसलिए उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “गुजरात या अन्य जगहों के अशिक्षित लोगों को मूर्ख बना सकते हैं”, लेकिन केरल के लोगों को नहीं। उनके इस बयान को बीजेपी ने गुजरात और उत्तर भारत के लोगों का अपमान बताया है। बीजेपी का तीखा पलटवार बीजेपी ने खड़गे के बयान को लेकर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पार्टी के नेताओं ने इसे “फूट डालो और राज करो” की राजनीति का उदाहरण बताया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर जनता का अपमान करने लगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के अन्य नेता भी इस तरह की टिप्पणी से सहमत हैं। वहीं, बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केरल के लोग सच में शिक्षित और समझदार हैं, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों ने उनके साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में जनता कांग्रेस को करारा जवाब देगी। “विभाजनकारी राजनीति” का आरोप बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस पर क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पार्टी लंबे समय से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन की राजनीति करती रही है। चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में खड़गे के बयान ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। चुनाव से ठीक पहले इस तरह के बयान से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं खड़गे के इस बयान के बाद कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी पहले से ही अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर दिए अपने विवादित बयान को लेकर माफी मांग ली है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि उनके बयान से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे बिना शर्त क्षमा चाहते हैं। दुबे ने लिखा कि “बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा एक बड़े कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे”। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान उनकी निजी राय थी, जिसे गलत तरीके से समझा गया। क्या था विवाद? दरअसल, 27 मार्च को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि: 1962 के चीन युद्ध में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिका और CIA की मदद ली थी और बीजू पटनायक को अमेरिका, CIA और नेहरू के बीच कड़ी बताया था इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। अब क्या कहा दुबे ने? माफी मांगते हुए दुबे ने कहा: उनके बयान को गलत संदर्भ में जोड़ा गया नेहरू पर की गई टिप्पणी को बीजू पटनायक से जोड़ना सही नहीं है विपक्ष का कड़ा विरोध दुबे के बयान पर बीजू जनता दल (BJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी: राज्यसभा में BJD सांसदों ने विरोध करते हुए वॉकआउट किया सांसद सस्मित पात्रा ने इसे “पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत” बताया वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बयान की आलोचना करते हुए इसे आपत्तिजनक बताया। PM मोदी ने की बीजू पटनायक की सराहना विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्कल दिवस के मौके पर बीजू पटनायक को याद करते हुए उन्हें: देश निर्माण के लिए समर्पित नेता और साहस का प्रतीक बताया। कौन थे बीजू पटनायक? ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री (1961-63, 1990-95) स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट 1947 में इंडोनेशिया मिशन के लिए प्रसिद्ध द्वितीय विश्व युद्ध में भी अहम भूमिका
सिडनी सेमिनार में बोले – ‘पीएम मोदी बेहद समर्पित और अलग सोच वाले नेता’ कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की कार्यशैली और समर्पण की खुलकर प्रशंसा की है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित एक सेमिनार के दौरान कार्नी ने कहा कि मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सिडनी में Lowy Institute द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कार्नी ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से हुई अपनी मुलाकात के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मोदी का काम के प्रति समर्पण और ऊर्जा उन्हें दुनिया के अन्य नेताओं से अलग बनाती है। ‘मोदी बेहद मेहनती और लक्ष्य पर केंद्रित नेता’ कार्नी ने कहा कि चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल रहा हो या फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, मोदी लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा, “वह बेहद अलग तरह के नेता हैं। पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सप्ताहांत पर भी वह अक्सर जनसभाओं में शामिल होते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी रैलियों में पहुंचते हैं।” UPI और वित्तीय सुधारों की भी सराहना कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था में हुए बदलावों की भी तारीफ की। उन्होंने विशेष रूप से Unified Payments Interface (UPI) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता पहुंचाने में मदद मिली है। कार्नी के अनुसार, मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की गड़बड़ी या रिसाव न हो। इस दिशा में डिजिटल भुगतान प्रणाली और वित्तीय सुधारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। भारत-कनाडा संबंधों में ‘नई शुरुआत’ कार्नी की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देना था। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आई ठंडक के बाद अब सहयोग के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में तकनीक, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर कार्नी ने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि कनाडा की कंपनी Cameco ने भारत को दीर्घकालिक आधार पर यूरेनियम आपूर्ति करने के लिए समझौता किया है। इसके साथ ही दोनों देश रक्षा सहयोग समझौते को भी फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक संबंध कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्ते हैं। उनके अनुसार, कनाडा में लगभग 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं और हर साल हजारों लोग दोनों देशों के बीच यात्रा करते हैं। इन गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।