बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध में गुरुवार (30 अप्रैल) शाम अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर एक क्रूज पलट गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच पर्यटन विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
सीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमों ने मिलकर अभियान चलाया।
हादसे के बाद सरकार ने राज्य में सभी क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।
घटना के बाद जिला प्रशासन के अनुरोध पर सेना की गोताखोर टीमों को मौके पर बुलाया गया। इन टीमों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई और कई शवों को बरामद किया।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। उन्हें तुरंत मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान महसूस हुई बेचैनी, फिर हुए बेहोश सूत्रों के अनुसार, अजय राय दिन में कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित शिक्षकों और डॉक्टरों के एक सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अचानक सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत की कुछ देर बाद चक्कर आने लगे कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनकी हालत और बिगड़ी अंततः वे बेहोश हो गए स्थिति गंभीर होती देख उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। डॉक्टरों की टीम कर रही है लगातार निगरानी अस्पताल प्रशासन के अनुसार: उन्हें सीने में दर्द, बेचैनी और बेहोशी की शिकायत के बाद भर्ती किया गया कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है जरूरी मेडिकल जांच (जैसे ECG, ब्लड टेस्ट आदि) किए जा रहे हैं फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में और स्थिर बताई जा रही है डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर उन्हें निगरानी में रखा है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता से तुरंत निपटा जा सके। पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं नरेंद्र मोदी ने अजय राय की तबीयत बिगड़ने पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने लिखा कि अजय राय के अस्वस्थ होने की जानकारी मिली है उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की यह प्रतिक्रिया बताती है कि इस घटना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। स्वास्थ्य बिगड़ने से पहले सरकार पर साधा था निशाना गौर करने वाली बात यह है कि अजय राय ने अस्पताल में भर्ती होने से कुछ समय पहले ही मीडिया से बातचीत की थी। उन्होंने कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ा दी गईं सरकार पर पहले से योजना बनाने का आरोप लगाया उनके इस बयान के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल अजय राय की तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही: कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता बढ़ गई कई नेता और समर्थक अस्पताल पहुंचे सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआएं की जा रही हैं राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। क्या है आगे की स्थिति? फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है और अगले 24 घंटे को अहम माना जा रहा है। अगर उनकी हालत स्थिर बनी रहती है, तो जल्द ही उन्हें सामान्य वार्ड या घर भेजा जा सकता है।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे जिले में शुक्रवार को 65 साल के एक व्यक्ति ने 4 साल की बच्ची से रेप के बाद पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग के लिए लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों ने थाने का घेराव कर दिया है और हंगामा कर रहे हैं। नानी के यहां आई थी बच्ची बच्ची पुणे के भोर तहसील के नसरापुर गांव में रहने वाली अपनी नानी के यहां गर्मी की छुट्टियां बिताने आई थी। शुक्रवार को वह घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान दोपहर करीब दो बजे 65 साल का भीमराव कांबले उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के पास बने पशुओं के तबेले में ले गया। इसी तबेले में उसने बच्ची के साथ हैवानियत की। इसके बाद उसने शव को तबेले में पड़े गाय के गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया, ताकि किसी को शक न हो। तबेले से मिला बच्ची का शव काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गांवभर में खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला। इसी बीच कुछ लोगों ने तबेले में भी बच्ची को तलाशा, तो उसका शव बरामद हुआ। बच्ची की हालत देखकर हर कोई सन्न रह गया। सीसीटीवी फुटेज से पकड़ाया आरोपी घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की तलाश की तो एक फुटेज में आरोपी बच्ची को तबेले की ओर ले जाता हुआ दिखा। पुलिस ने तुरंत भीमराव कांबले को हिरासत में ले लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। तबेले के सामने जमा हैं गांववाले वारदात के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और आरोपी को उन्हें सौंप देने की मांग करने लगे। गांव वाले का कहना है कि जब तक आरोपी उनके हवाले नहीं कर दिया जाता, तब तक पुलिस को बच्ची का शव नहीं देंगे। पुलिस समझाने में विफल गांव वालों ने तबेले के सामने कैंप लगा लिया है। पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे गए हैं और लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालात के मद्देनजर पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर चक्काजाम घटना के बाद गांव के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे भारी ट्रैफिक जाम लग गया। पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि इस मामले में 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना (4 मई) को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। राज्य में अक्सर चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए इस बार भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। “राज्य के हर कोने में कानून का राज रहेगा” चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उपद्रव या अवैध गतिविधि को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि मतगणना के दौरान और उसके बाद भी पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। 700 CAPF कंपनियों की तैनाती, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 700 कंपनियों को राज्यभर में तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती सिर्फ काउंटिंग डे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नतीजों के बाद भी संवेदनशील इलाकों में बलों की मौजूदगी बनी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में बांटा गया है: पहला घेरा: काउंटिंग सेंटर के बाहरी इलाके में, जहां भारी संख्या में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। दूसरा घेरा: सेंटर के प्रवेश द्वार पर, जहां पहचान और जांच की कड़ी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तीसरा घेरा: काउंटिंग हॉल के अंदर, जहां केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, ‘वल्नरेबल’ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या हिंसक गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। QR कोड आधारित डिजिटल एंट्री सिस्टम इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाते हुए काउंटिंग सेंटर्स में प्रवेश के लिए QR-Coded Photo ID अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस डिजिटल पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम फर्जी पहचान या अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 24/7 कमांड हब और हाई-टेक निगरानी चुनाव आयोग ने राज्यभर में अत्याधुनिक कमांड हब स्थापित किए हैं, जहां से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। सभी मतगणना केंद्रों को CCTV कैमरों से जोड़ा गया है और उनकी लाइव फीड सीधे आयोग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या सामने आने पर तुरंत एक्शन लेने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी तैनात की गई है। आम जनता के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था आयोग ने नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 345 0008 और ईमेल wbfreeandfairpolls@gmail.com जारी किया है। कोई भी व्यक्ति हिंसा या गड़बड़ी की सूचना दे सकता है शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है हाईकोर्ट की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरा नागरिक और पुलिस प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेगा। कोर्ट ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। पोस्ट-पोल हिंसा रोकने पर विशेष फोकस पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील जिलों में फ्लैग मार्च लगातार ड्रोन और CCTV निगरानी स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम चुनाव आयोग की यह व्यापक और सख्त तैयारी इस बात का संकेत है कि इस बार किसी भी कीमत पर शांति भंग नहीं होने दी जाएगी। आयोग का उद्देश्य सिर्फ मतगणना कराना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जहां हर नागरिक बिना डर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।