rescue operation

Ramgarh Accident
रामगढ़ में हादसा, दामोदर नदी में डूबे 3 लड़के

रामगढ़। रामगढ़ शहर के गढ़बांध में बड़ा हादसा हो गया। यहां दामोदर नदी में नहाने के दौरान तीन किशोर गहरे पानी में डूब गए। जानकारी के मुताबिक, तीनों किशोर 14 से 15 वर्ष की उम्र के थे और घर से फुटबॉल खेलने की बात कहकर निकले थे। खेल के बजाय वे गढ़बांध पहुंच गए और नदी में नहाने उतर गए, जहां अचानक वे गहरे पानी की चपेट में आ गए। नदी में डूबने के दौरान बंगाली टोला निवासी आयुष कुमार तिवारी स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा। गंभीर हालत में उसे रांची रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घर पहुंचकर आयुष ने अपने दोस्तों के डूबने की सूचना परिजनों को दी, जिसके बाद परिवार के लोग और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे। 1 की मौत, दूसरे की तलाश जारी इस दर्दनाक हादसे में नए बस स्टैंड के पास रहने वाले वैभव कुमार की मौत हो गई है। वहीं किसान नगर निवासी प्रिंस सोनकर अब भी लापता बताया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पतरातू से गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और दामोदर नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।  लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़बांध से शहर में जलापूर्ति की जाती है, जिसके कारण यहां बांध का निर्माण किया गया है। बांध बनने के बाद नदी का यह हिस्सा काफी गहरा हो गया है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है। घटनास्थल से किशोरों के कपड़े भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

Anjali Kumari मई 18, 2026 0
Rescue teams inspect damaged buildings after deadly earthquake struck Guangxi region in southern China.
चीन में भूकंप से तबाही: 2 लोगों की मौत, कई घायल, 13 इमारतें क्षतिग्रस्त

China के दक्षिणी क्षेत्र ग्वांग्शी में सोमवार तड़के आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप के कारण कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अब तक 2 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, भूकंप के झटकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हजारों लोग घरों से बाहर निकल आए। 13 इमारतें तबाह, कई लोग घायल चीनी सरकारी मीडिया China Central Television की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से कम से कम 13 इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग घायल हुए हैं, हालांकि अधिकांश घायलों की स्थिति गंभीर नहीं है। घायलों में से चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग अभी भी क्षतिग्रस्त इमारतों के भीतर फंसे हो सकते हैं। 7 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया भूकंप के बाद प्रशासन ने तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 7 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की अपील की है। रेल यातायात प्रभावित भूकंप के बाद इलाके में रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। चीनी रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पटरियों और पुलों की सुरक्षा जांच की जा रही है, जिसके चलते कुछ ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बिजली, पानी, गैस सप्लाई और सड़क यातायात फिलहाल सामान्य रूप से चल रहे हैं। आफ्टरशॉक को लेकर अलर्ट स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और संभावित आफ्टरशॉक को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Rescue teams clearing debris after under-construction bridge collapse in Jammu's Bantalab area
जम्मू में निर्माणाधीन पुल गिरा: मलबे में दबे कई मजदूर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

बंतलाब इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जब एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। इस घटना में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। 6 मजदूर फंसे, 2 को सुरक्षित निकाला गया स्थानीय जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त कुल 6 मजदूर मौके पर काम कर रहे थे। इनमें से 2 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 4 मजदूर अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। बचाव कार्य तेजी से जारी है और समय के साथ रेस्क्यू टीमों की चुनौती बढ़ती जा रही है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। मौके पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी राहत कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुराने पुल की कमजोर नींव बनी वजह? घटनास्थल पर पहुंचे विधायक श्यामलाल शर्मा ने बताया कि यह पुल पहले से ही जर्जर हालत में था और उसकी नींव कमजोर हो चुकी थी। इसी कारण इसका पुनर्निर्माण किया जा रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि खुदाई के दौरान उत्पन्न कंपन या ऊपर से गुजर रहे किसी भारी वाहन के दबाव के कारण पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच के आदेश की संभावना प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण कार्य में किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई। लोगों में दहशत, प्रशासन पर सवाल इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।  

surbhi मई 2, 2026 0
Rescue teams search Bargi Dam after cruise capsized in storm, Madhya Pradesh
मध्यप्रदेश: बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद सख्त कार्रवाई, जांच के आदेश, संचालन पर रोक

बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध में गुरुवार (30 अप्रैल) शाम अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर एक क्रूज पलट गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। सीएम मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच पर्यटन विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमों ने मिलकर अभियान चलाया। क्रूज संचालन पर फिलहाल रोक हादसे के बाद सरकार ने राज्य में सभी क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। सेना के गोताखोर भी अभियान में शामिल घटना के बाद जिला प्रशासन के अनुरोध पर सेना की गोताखोर टीमों को मौके पर बुलाया गया। इन टीमों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई और कई शवों को बरामद किया। बहादुर स्थानीय लोगों को मिलेगा सम्मान सीएम मोहन यादव ने कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Rescue teams recover mother and child after tragic Jabalpur boat accident
जबलपुर नाव हादसा: 4 साल के बेटे को सीने से लगाए मिली मां, मंजर देख रो पड़े लोग

जबलपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। रेस्क्यू टीम को एक मां और उसके 4 साल के बेटे के शव मिले, जो आखिरी पल तक एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। दिल दहला देने वाला दृश्य शुक्रवार (1 मई) को चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मां-बेटे के शव पानी से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोनों के शरीर पर लाइफ जैकेट बंधी हुई थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और माहौल गमगीन हो गया। बरगी डैम में हुआ हादसा यह हादसा बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार (30 अप्रैल) को हुआ। करीब 29 लोगों को लेकर जा रही एक क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान और हवाओं की वजह से पलट गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और रेस्क्यू ऑपरेशन घटना के बाद SDRF, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। मौके पर पहुंचे राज्य के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और जलाशय का पानी उफान पर आ गया। यात्रियों ने खतरा भांपते हुए नाव को किनारे ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। कुछ ही देर में नाव असंतुलित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने बचाई कई जानें हादसे के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाया। रस्सियों की मदद से कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, खासकर वे लोग जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। हालांकि, कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। जांच और सवाल इस हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों और नाव संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन लापरवाहियों की वजह से यह हादसा हुआ।  

surbhi मई 1, 2026 0
Rescue teams at firecracker factory blast site in Virudhunagar with debris and injured workers
तमिलनाडु में भीषण विस्फोट: विरुधुनगर की पटाखा फैक्ट्री में 23 की मौत, रेस्क्यू के दौरान दूसरा धमाका; 13 बचावकर्मी घायल

Tamil Nadu के Virudhunagar जिले में रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हो गया। इस दुर्घटना में 23 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहत और बचाव कार्य के दौरान भी एक और धमाका हुआ, जिसमें 13 पुलिस, फायर और रेस्क्यू टीम के सदस्य घायल हो गए। हादसा कैसे हुआ? प्रारंभिक जांच के अनुसार: फैक्ट्री के उस हिस्से में विस्फोट हुआ जहां मजदूर बारूद और ज्वलनशील सामग्री के साथ काम कर रहे थे धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया आसपास के इलाके में भी इसकी गूंज सुनाई दी घटना के समय फैक्ट्री में करीब 30 मजदूर मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। मौत और घायलों का आंकड़ा इस हादसे में: 23 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है मृतकों में 16 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं 6 घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में भर्ती कराया गया है अधिकारियों का कहना है कि घायलों की हालत को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। रेस्क्यू के दौरान दूसरा विस्फोट हादसे के बाद जब राहत और बचाव कार्य चल रहा था, उसी दौरान: फैक्ट्री परिसर में एक और विस्फोट हो गया इस धमाके में 13 बचावकर्मी घायल हो गए सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया इससे साफ है कि स्थिति कितनी खतरनाक बनी हुई थी और रेस्क्यू टीम को भी जोखिम उठाना पड़ा। प्रशासन की कार्रवाई घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आ गया: पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है पूरे मामले की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को तैनात किया गया है फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की भी जांच की जा रही है पीएम मोदी और सीएम स्टालिन ने जताया शोक प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। वहीं M. K. Stalin ने भी गहरी संवेदना जताई और: मंत्रियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए जिला प्रशासन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा चिंताजनक बात यह है कि: 13 अप्रैल को भी इसी जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था उस हादसे में 2 मजदूरों की मौत हुई थी लगातार हो रही ऐसी घटनाएं सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती हैं। हादसे की संभावित वजह विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हादसों के पीछे आमतौर पर ये कारण होते हैं: ज्वलनशील पदार्थों के साथ लापरवाही सुरक्षा नियमों का पालन न होना भीड़भाड़ और सीमित जगह में काम पर्याप्त प्रशिक्षण और निगरानी की कमी

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Rescue teams pulling injured passengers from bus fallen into deep gorge in Udhampur highway accident
जम्मू-कश्मीर हादसा: उधमपुर हाईवे पर बस खाई में गिरी, 7 की मौत; कई घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Jammu and Kashmir के Udhampur जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामनगर क्षेत्र के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे कम से कम 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब बस दूरदराज के गांवों से यात्रियों को लेकर उधमपुर की ओर जा रही थी। पहाड़ी रास्तों और तेज रफ्तार के कारण यह दुर्घटना और भी घातक साबित हुई। कैसे हुआ दर्दनाक हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार: बस रामनगर के कागोर्ट/कनोते गांव के पास से गुजर रही थी यह इलाका घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़कों के लिए जाना जाता है अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया बस फिसलते हुए सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी स्थानीय लोगों का कहना है कि बस तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक के लिए नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। मौत और घायलों की स्थिति इस दुर्घटना में: 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई कई यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है घायलों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं: पुलिस, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं खाई में गिरी बस से घायलों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने लिया हालात का जायजा केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद Jitendra Singh ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि: जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जा रही है घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। पहाड़ी इलाकों में बढ़ता हादसों का खतरा उधमपुर और रामनगर क्षेत्र की सड़कें लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं। यहां हादसों के पीछे कई कारण होते हैं: संकरी और घुमावदार सड़कें गहरी खाइयां और कमजोर सुरक्षा बैरियर ओवरस्पीडिंग और लापरवाही कई जगहों पर खराब सड़क स्थिति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। क्या कहते हैं स्थानीय लोग? स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार: इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं कई जगह रेलिंग या गार्ड नहीं लगे हैं लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की आगे की कार्रवाई प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। संभावित जांच बिंदु: बस की तकनीकी स्थिति चालक की लापरवाही या थकान सड़क की स्थिति और सुरक्षा इंतजाम जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Malaysia Boat
अंडमान के समुद्र में मलेशिया जा रही नाव डूबी, 250 लोग लापता

श्री विजयपुरम, एजेंसियां। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को ले जा रही एक नाव डूब गई, जिसके बाद लगभग 250 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद से बचाव अभियान जारी है, लेकिन अब तक केवल कुछ लोगों को ही सुरक्षित निकाला जा सका है।   मलेशिया जा रही थी नाव संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के मुताबिक, नाव दक्षिणी बांग्लादेश के टेक्नाफ इलाके से मलेशिया के लिए रवाना हुई थी। 4 अप्रैल को निकली इस नाव में करीब 280 लोग सवार थे। भारी भीड़, तेज हवाओं और खराब समुद्री मौसम के कारण नाव अंडमान सागर में पलट गई।   लापता लोगों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या लापता लोगों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थियों के होने की बात कही जा रही है। इनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये लोग बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित शरणार्थी शिविरों से बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में मलेशिया जा रहे थे।   अब तक नौ लोगों को बचाया गया Bangladesh Coast Guard ने बताया कि एक बांग्लादेशी जहाज ने समुद्र में तैर रहे नौ लोगों को बचाया। इनमें एक महिला भी शामिल है। बाद में इन लोगों को तटरक्षक बल के जहाज को सौंप दिया गया।   बचने वालों ने बताई दर्दनाक कहानी बचाए गए लोगों में शामिल रफीकुल इस्लाम ने बताया कि मानव तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। नाव पलटने के बाद वह करीब 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे, तब जाकर उनकी जान बच सकी।   UNHCR ने जताई चिंता UNHCR ने इस हादसे को रोहिंग्या संकट और लंबे समय से जारी विस्थापन का गंभीर परिणाम बताया है। एजेंसी ने कहा कि जब तक म्यांमार में हालात नहीं सुधरते और रोहिंग्याओं की सुरक्षित वापसी संभव नहीं होती, तब तक ऐसी त्रासदियां होती रहेंगी।

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
information commissioner appointment
सूचना आयुक्त नियुक्ति पर सवाल: FIR वाले नामों पर राज्यपाल सचिवालय सख्त, प्रक्रिया दोबारा शुरू करने को कहा

रांची। झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यपाल सचिवालय ने सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर आपत्ति जताते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजने को कहा है।   प्रस्तावित नामों पर आपत्ति, FIR का मामला सामने आया जांच में सामने आया है कि जिन चार नामों को नियुक्ति के लिए भेजा गया था, उनमें से दो व्यक्तियों के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है। अमूल्य नीरज खलखो पर छह और तनुज खत्री पर एक प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है।   नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा का निर्देश इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए राज्यपाल सचिवालय ने सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और पारदर्शी तरीके से नए नाम भेजने का अनुरोध किया है।   सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला सचिवालय ने फाइल लौटाते समय सुप्रीम कोर्ट के ‘नमित शर्मा बनाम केंद्र सरकार’ मामले का भी उल्लेख किया है। इस फैसले में कहा गया है कि सूचना आयुक्त का कार्य अर्द्ध-न्यायिक प्रकृति का होता है, इसलिए नियुक्ति में योग्य और समझ रखने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।   पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन, पत्रकारिता और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी इस पद के लिए चुना जा सकता है।   कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की भी मांग राज्यपाल सचिवालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15(6) की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और अधिक स्पष्ट बनाया जा सके।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Rescue teams search Yamuna River after Mathura boat accident involving pilgrims from Punjab.
यमुना में मातम का मंजर: “कल तक हंसते-खेलते थे… आज कोई लापता, कोई नहीं रहा”

उत्तर प्रदेश के Mathura में यमुना नदी में हुए दर्दनाक बोट हादसे ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट के पलटने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। हादसे के बाद दूसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। हादसे से पहले खुशी, फिर अचानक मातम हादसे में शामिल अधिकतर लोग Ludhiana समेत पंजाब के अलग-अलग इलाकों से तीर्थ यात्रा पर आए थे। परिवार वालों के मुताबिक, गुरुवार शाम को सभी खुशी-खुशी Vrindavan के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए अपनों से बात हो रही थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद अचानक एक फोन आया - “बोट पलट गई है… सबके फोन डूब गए…” “कल तक सब ठीक थे…” - परिजनों की आपबीती पीड़ित परिवारों की बातें दिल को झकझोर देने वाली हैं। एक महिला ने बताया, “सुबह 9 बजे बात हुई थी, सब खुश थे, वीडियो भेज रहे थे… आधे घंटे बाद खबर आई कि नाव पलट गई।” वहीं एक अन्य रिश्तेदार ने रोते हुए कहा, “कल तक बच्चे हंसते-खेलते गए थे, अब पता नहीं कौन कहां है… बस लापता होने की खबर आ रही है।” कैसे हुआ हादसा? अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के वक्त नाव में करीब 37 लोग सवार थे। तेज हवाओं के कारण नाव असंतुलित हो गई और गहरे पानी में एक तैरते पोंटून से टकरा गई, जिससे वह पलट गई। बताया जा रहा है कि हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पीपा पुल हटाया गया था, लेकिन उसके कुछ हिस्से पानी में ही रह गए थे जो इस हादसे की बड़ी वजह बने। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद से State Disaster Response Force, फायर ब्रिगेड और सेना की टीमें मौके पर लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। करीब 50 स्थानीय गोताखोर भी सर्च ऑपरेशन में शामिल हैं। अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन लापता लोगों की तलाश जारी है। सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए वीडियो में देखा गया कि नाव में सवार किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। हादसे से ठीक पहले सभी श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ का जाप करते हुए खुश नजर आ रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल में सब कुछ बदल जाएगा। सरकार ने जताया दुख Yogi Adityanath ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है और अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Firefighters battling massive blaze in Delhi Palam area where nine family members died in tragic incident
दिल्ली पालम अग्निकांड: मां को बचाने की कोशिश में बेटी ने दी जान, एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत

राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें मां-बेटी की कहानी सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली है। मां को छोड़कर नहीं भागी बेटी पालम के साधनगर इलाके में लगी इस आग में 70 वर्षीय लाडो कश्यप और उनकी बेटी हिमांशी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जब आग तेजी से फैल रही थी, तब हिमांशी अपनी मां को बचाने के लिए आखिरी समय तक उनके साथ डटी रही। परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, लाडो तेज़ी से भागने में असमर्थ थीं। ऐसे में हिमांशी चाहती तो खुद को बचा सकती थी, लेकिन उसने मां को अकेला छोड़ने से इनकार कर दिया। बाथरूम में छिपकर बचने की कोशिश दोनों मां-बेटी ने आग से बचने के लिए बाथरूम में शरण ली, लेकिन घर में रखे कॉस्मेटिक सामान और प्लास्टिक के कारण आग तेजी से फैल गई। दम घुटने और आग की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में दोनों के शव एक साथ मिले, जिसने इस त्रासदी को और भी मार्मिक बना दिया। 9 लोगों की गई जान इस हादसे में कश्यप परिवार के कुल 9 लोगों की मौत हुई। मृतकों में परिवार के कई सदस्य शामिल हैं, जबकि दो लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे परिवार के उजड़ जाने की कहानी बन गया है। रेस्क्यू में देरी पर उठे सवाल इस घटना के बाद राहत और बचाव कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लैडर समय पर काम नहीं कर पाई, जिससे तीसरी मंजिल पर फंसे लोगों तक मदद पहुंचने में देरी हुई। अब इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सियासी विवाद भी शुरू हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बहस तक की स्थिति बन गई। एक दर्दनाक सीख यह हादसा न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपदा के समय एक परिवार किन हालातों से गुजरता है। मां को बचाने के लिए बेटी का आखिरी सांस तक साथ निभाना, इस घटना को बेहद भावुक और हृदयविदारक बना देता है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0