कोलकाता, एजेंसियां। महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल के करीमपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 से जुड़े मुद्दे पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। यह विवाद उनके एक फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के हालिया दिशा-निर्देशों और पशु व्यापार से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए थे। भाजपा नेताओं ने इसे भड़काऊ और सांप्रदायिक माहौल खराब करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेता ने दर्ज कराई शिकायत स्थानीय भाजपा नेता गोलोक बिस्वास ने करीमपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों की भावनाएं भड़काने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की। महुआ मोइत्रा ने 16 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि गौहत्या से जुड़े नए दिशा-निर्देश एक विशेष वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और गोमांस निर्यात पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा भी उठाया। भाजपा ने आरोपों को बताया भ्रामक करीमपुर से भाजपा विधायक Samarendra Nath Ghosh ने महुआ मोइत्रा के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देशों में कहीं भी पशु बाजार बंद करने की बात नहीं कही गई है। उनके अनुसार यह कदम भारत-बांग्लादेश सीमा पर गायों की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। भाजपा नेताओं ने यह भी मांग की है कि यह जांच होनी चाहिए कि क्या सांसद तस्करी से जुड़े तत्वों को समर्थन दे रही हैं। पहले से जारी है आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक विवाद इससे पहले भी गर्माया हुआ था। भाजपा नेता गोलक बिश्वास ने सोशल मीडिया पर महुआ मोइत्रा के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके बाद सांसद ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से सीमा क्षेत्र करीमपुर का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
Karnataka में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने दोनों नेताओं के साथ अहम बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, खरगे ने सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ Thiruvananthapuram से Bengaluru लौटने के बाद राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर चर्चा की। सत्ता संघर्ष की अटकलें फिर तेज कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक हुई। इस दौरान राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट रुख चाहते हैं। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल मधुगिरी से कांग्रेस विधायक K. N. Rajanna ने भी संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा, “खरगे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार सभी केरल में मौजूद थे, तो फिर वहीं चर्चा क्यों नहीं हुई?” राहुल गांधी ने भी मांगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक Rahul Gandhi ने राज्य की राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों को लेकर वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.जे. जॉर्ज भी शामिल हैं, से फीडबैक मांगा था। कांग्रेस के अंदर अब पार्टी महासचिव K. C. Venugopal के अवकाश से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली में भी अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद हलचल तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनाव परिणामों के बाद अब टीएमसी राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्ष की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। नगर निकायों को लेकर रणनीति बनेगी पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख मुद्दा राज्य के नगर निकायों के कामकाज से जुड़ा होगा। पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में अभी भी टीएमसी का नियंत्रण है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर सहयोग में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीएमसी नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपने नगर निकायों और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत बनाए रखे। अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर KMC का नोटिस यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत जारी इन नोटिसों में संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अधिकारियों ने संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां भी चस्पा की हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दिए थे संकेत पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने पिछले सप्ताह ही इन संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी को “मिस्टर नेफ्यू” कहकर संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनके पास एक कंपनी से जुड़ी 24 संपत्तियों की सूची है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली टीएमसी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। दो नए जांच आयोग बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग बनाने की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज Biswajit Basu को सौंपी जाएगी। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच रिटायर्ड जज Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में गठित आयोग करेगा। सरकार के अनुसार, दोनों आयोग जून महीने से अपना काम शुरू कर देंगे।
तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरलम में आज से सतीशन युग शुरू हो गया है। कांग्रेस के वीडी सतीशन ने सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में उनके साथ 20 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। पूरी कैबिनेट ने एक साथ शपथ ली खास बात यह रही कि करीब 60 साल बाद केरल में पूरी कैबिनेट ने एक साथ शपथ ली है। इससे पहले 1962 में पूर्व मुख्यमंत्री आर शंकर ने ऐसा किया था। 14 विधायक पहली बार मंत्री बने शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री मौजूद रहे। नई कैबिनेट में 14 विधायक पहली बार मंत्री बने हैं, जिससे पार्टी ने युवा और नए चेहरों पर भरोसा जताया है। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर कांग्रेस के कांग्रेस ने विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद भी अपने पास रखे हैं। आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव और राज्य बजट पेश किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नई सरकार केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है और कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में नई मजबूती का संकेत है।
केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना दिए विदेश यात्रा करते हैं, जबकि नियमों के तहत सांसदों को अपनी यात्रा की जानकारी पहले देना अनिवार्य है। ‘तीन हफ्ते पहले सूचना देना जरूरी’ किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी सांसद को विदेश यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को इसकी सूचना देनी होती है। उन्होंने कहा, “यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सूचना देने का नियम है। सांसद विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।” राहुल गांधी की यात्राओं पर उठाए सवाल रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं और अब तक उनकी 54 विदेश यात्राएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि केवल यात्राओं की संख्या ही नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वह विदेश में कितने दिन रहे और उन यात्राओं पर कितना खर्च हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई सांसद विदेश में किसी संस्था या संगठन की ओर से आतिथ्य स्वीकार करता है, तो वह मामला Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA के दायरे में आता है और इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को देना जरूरी होता है। ‘कांग्रेस नियमों का पालन करे’ किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि विदेश यात्रा से पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इतनी विदेश यात्राएं क्यों कीं, किसने उन्हें आमंत्रित किया और विदेश में उनके खर्च का वहन किसने किया।” ‘कानून सबके लिए समान’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यात्रा करना किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन सभी नागरिकों और खासकर सांसदों को देश के कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में जांच या कार्रवाई होती है, तो इसे किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं माना जाना चाहिए। “कानून सबके लिए बराबर है,” रिजिजू ने कहा।
लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।
पटना की विशेष अदालत में पेश हुए राजद नेता Tejashwi Yadav ने गुरुवार को कोरोना काल में दर्ज नियम उल्लंघन मामले में पटना स्थित MP-MLA कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। अदालत में पेश होने के बाद उन्होंने जमानत की अर्जी दाखिल की, जिस पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। यह मामला कोरोना महामारी के दौरान लागू सरकारी दिशा-निर्देशों और प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है। अदालत में सरेंडर के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और फिर राहत देते हुए उन्हें बेल प्रदान कर दी गई। कोरोना काल में दर्ज हुआ था मामला जानकारी के अनुसार, कोरोना संक्रमण के दौरान लागू प्रतिबंधों और प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं करने को लेकर यह केस दर्ज किया गया था। मामले में अदालत की ओर से पूर्व में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी थी। गुरुवार को अदालत में पेश होकर तेजस्वी यादव ने न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उनके वकीलों की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज राजद नेता के अदालत पहुंचने के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अदालत से जमानत मिलने के बाद फिलहाल उन्हें बड़ी राहत मिल गई है।
चुनाव परिणाम के बाद खत्म हुई मुख्यमंत्री पद की चर्चा कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए V. D. Satheesan को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। पार्टी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया गया। 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। कई नेताओं के नाम सामने आ रहे थे, लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व ने अंतिम फैसला लेते हुए वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। कांग्रेस नेतृत्व ने लिया अंतिम निर्णय पार्टी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस आलाकमान और वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा था। राज्य में नई सरकार के गठन और नेतृत्व को लेकर मंथन किया जा रहा था। गुरुवार को हुई प्रेस वार्ता में इस सस्पेंस को खत्म कर दिया गया। वीडी सतीशन को पार्टी के अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। संगठन और विधानसभा में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया है। नई सरकार से बढ़ी राजनीतिक उम्मीदें केरल में नई सरकार के गठन के साथ अब लोगों की नजरें मंत्रिमंडल और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि वीडी सतीशन के नेतृत्व में राज्य में विकास और प्रशासन को नई दिशा मिलेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने युवा और सक्रिय नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश की है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी। सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Akhilesh Yadav के सौतेले भाई Prateek Yadav का बुधवार को निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। परिवार और राजनीतिक गलियारों में उनके निधन की खबर से शोक की लहर फैल गई है। प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी नेता Aparna Yadav के पति थे। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ समय से चल रहे थे बीमार परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ सप्ताह पहले उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान अखिलेश यादव भी उनसे मिलने पहुंचे थे। तबीयत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें घर वापस लाया गया था। अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम निधन के बाद प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George's Medical University भेजा गया। यहां डॉक्टरों के पैनल ने कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग भी वहां मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने याद किया आखिरी मुलाकात अखिलेश यादव पोस्टमार्टम सेंटर पहुंचे और डॉक्टरों से बातचीत की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने प्रतीक यादव को “बहुत अच्छा इंसान” बताया। उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य और कारोबार को लेकर काफी सजग रहते थे। अखिलेश यादव ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने उन्हें कारोबार पर ध्यान देने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार में नुकसान और मानसिक दबाव किसी व्यक्ति को अंदर से प्रभावित कर सकता है। राजनीति से दूर, बिजनेस और फिटनेस में सक्रिय थे प्रतीक हालांकि प्रतीक यादव देश के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने ब्रिटेन की University of Leeds से पढ़ाई की थी और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। लखनऊ में वह ‘The Fitness Planet’ नाम से जिम भी चलाते थे और फिटनेस इंडस्ट्री में काफी सक्रिय थे। इसके अलावा वह ‘Jeev Ashray’ नाम की संस्था से भी जुड़े थे, जो आवारा कुत्तों के इलाज, भोजन और देखभाल का काम करती थी। पत्नी अपर्णा यादव के साथ विवाद भी आया था सामने इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के रिश्तों को लेकर भी चर्चा हुई थी। जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर वैवाहिक विवाद की बात कही थी और तलाक लेने की बात भी लिखी थी। हालांकि बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई थी। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा था कि आपसी बातचीत के बाद विवाद खत्म हो गया है। इसके बाद उन्होंने परिवार के साथ छुट्टियों की तस्वीरें भी साझा की थीं। नेताओं ने जताया शोक प्रतीक यादव के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने भी दुख जताया।
N. Rangaswamy ने बुधवार को पांचवीं बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए गठबंधन की सरकार बनी है। All India N.R. Congress (AINRC) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता एन रंगास्वामी के साथ मल्लाडी कृष्णा राव और भाजपा नेता A. Namassivayam ने भी मंत्री पद की शपथ ली। उपराज्यपाल के कैलाशनाथन ने दिलाई शपथ शपथ ग्रहण समारोह में K. Kailashnathan ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इनमें Nitin Navin और B. L. Santhosh शामिल थे। “पुडुचेरी को सिंगापुर जैसा बनाएंगे” शपथ लेने के बाद एन रंगास्वामी ने कहा कि उनकी सरकार पुडुचेरी को विकास के नए मॉडल के रूप में आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि पुडुचेरी का विकास “सिंगापुर की तरह” किया जाए। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, निवेश और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लगातार मजबूत हो रहा एनडीए National Democratic Alliance (NDA) ने पुडुचेरी में एक बार फिर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एन रंगास्वामी की लोकप्रियता और भाजपा के समर्थन ने गठबंधन को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एन रंगास्वामी को पुडुचेरी की राजनीति में बेहद अनुभवी नेता माना जाता है और यह उनका पांचवां कार्यकाल होगा।
Sonia Gandhi की तबीयत एक बार फिर खराब हो गई है। उन्हें गुरुग्राम स्थित Medanta - The Medicity में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी आंख से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल पहुंची हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें कुछ समय बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी अस्पताल पहुंचे अस्पताल में भर्ती सोनिया गांधी के साथ उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi तथा बेटी Priyanka Gandhi Vadra भी मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेता अस्पताल में उनके साथ हैं और डिस्चार्ज के बाद उन्हें घर लेकर जाएंगे। पहले से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। उन्हें पेट, फेफड़ों और सांस से जुड़ी परेशानियां रहती हैं। उनका इलाज समय-समय पर Sir Ganga Ram Hospital, Indira Gandhi Medical College and Hospital और मेदांता अस्पताल में चलता रहा है। कांग्रेस की अहम रणनीतिक नेता हैं सोनिया गांधी सोनिया गांधी लंबे समय तक Indian National Congress की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं। उन्होंने पार्टी संगठन और रणनीति तय करने में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पत्नी हैं और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा की मां हैं। 1997 में राजनीति में की थी एंट्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में पार्टी नेताओं के लगातार आग्रह पर उन्होंने 1997 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। 1998 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला और लगातार 22 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व किया। इसके बाद 2019 में वह दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और तीन साल तक इस पद पर रहीं। केरल में सरकार गठन के बीच बढ़ी चिंता सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने की खबर ऐसे समय आई है जब Kerala में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।
C. Joseph के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार का फ्लोर टेस्ट बुधवार को विधानसभा में शुरू हो गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है। सी जोसेफ ने 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत से दूर रही थी, जिसके बाद कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई गई। अब विधानसभा में उन्हें बहुमत साबित करना है। कांग्रेस और माकपा ने दिया समर्थन फ्लोर टेस्ट के दौरान Indian National Congress ने टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके साथ ही Communist Party of India (Marxist) यानी माकपा ने भी विश्वास मत में सरकार के पक्ष में मतदान करने का ऐलान किया। इसके अलावा Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) ने भी सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे मुख्यमंत्री सी जोसेफ की स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है। पीएमके मतदान से रहेगी दूर वहीं Pattali Makkal Katchi (PMK) की नेता Soumya Anbumani ने कहा कि उनकी पार्टी विश्वास मत के दौरान मतदान से दूरी बनाए रखेगी। पीएमके के इस रुख को तमिलनाडु की राजनीति में संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। AIADMK में अंदरूनी मतभेद बढ़े फ्लोर टेस्ट के बीच All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के एक गुट ने सी जोसेफ सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जबकि विधानसभा में विपक्ष के नेता Edappadi K. Palaniswami ने साफ कहा कि उनकी पार्टी टीवीके सरकार के खिलाफ मतदान करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्लोर टेस्ट का असर सिर्फ सरकार की स्थिरता पर ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है। विधानसभा में जारी है विश्वास मत की प्रक्रिया तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत की प्रक्रिया जारी है और सभी दलों के विधायक सदन में मौजूद हैं। सरकार को सहयोगी दलों का समर्थन मिलने के बाद सी जोसेफ के बहुमत साबित करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है।
रांची। झारखंड की राजनीति से बुधवार को एक दुखद खबर सामने आई। गोमिया के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री Madhav Lal Singh का निधन हो गया। रांची स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही गोमिया समेत पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार, बीते दिनों अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर किया। इसके बाद उन्हें Pulse Hospital में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार सुबह इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। चार बार रहे गोमिया के विधायक माधव लाल सिंह ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया था। वे वर्ष 1985, 1990, 2000 और 2009 में विधायक निर्वाचित हुए थे। बिहार और बाद में झारखंड की राजनीति में उन्होंने एक जनप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। सादगी और जनसेवा के लिए थे लोकप्रिय राजनीतिक जीवन में माधव लाल सिंह अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। आम लोगों के बीच वे “माधव बाबू” के नाम से काफी लोकप्रिय थे। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ थी और वे लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर समाधान करने के लिए पहचाने जाते थे। समर्थकों में शोक, नेताओं ने जताया दुख उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और शुभचिंतकों की भीड़ अस्पताल और उनके आवास पर जुटने लगी। कई लोग इस खबर से भावुक हो उठे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। गोमिया क्षेत्र में फिलहाल शोक और मायूसी का माहौल बना हुआ है।
लखनऊ, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 38 साल थी। सुबह 6 बजे पत्नी अपर्णा यादव के भाई उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिविल अस्पताल के CMS डॉ. डीसी पांडेय के मुताबिक, जब प्रतीक को लाया गया, तब उनकी पल्स पूरी तरह डाउन थी। हार्ट भी रुक चुका था। प्रतीक की पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा फिलहाल असम में हैं। वह लखनऊ के लिए रवाना हो गई हैं। मौत की वजह अभी पता नही फिलहाल मौत की वजह पता नहीं चल सकी है। शव को पोस्टमॉर्टम KGMU में कराया जा रहा है। अपर्णा के भाई अमन सिंह बिष्ट पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक, 30 अप्रैल को प्रतीक को गंभीर हालत में लखनऊ के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 3 दिन बाद उन्हें थोड़ा आराम मिला। इसके बाद अस्पताल से बिना छुट्टी के घर चले गए थे। प्रतीक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। अपर्णा इस वक्त उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। ब्रिटेन से पढ़ाई की, राजनीति से दूर थे प्रतीक ने ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। वे राजनीति से दूर थे। उनका रियल एस्टेट और फिटनेस का बिजनेस था। प्रतीक लखनऊ में 'द फिटनेस प्लानेट' नाम से एक जिम के मालिक थे। प्रतीक 'जीव आश्रय' नाम की संस्था भी चलाते थे। संस्था की तरफ से स्ट्रीट डॉग्स का इलाज, देखभाल, भोजन और रेस्क्यू किया जाता है। 14 साल पहले अपर्णा से की थी लव-मैरिज प्रतीक ने अपर्णा यादव से 14 साल पहले लव-मैरिज की थी। दोनों की लव स्टोरी 2001 में शुरू हुई थी। दोनों की एक बर्थडे पार्टी में मुलाकात हुई, फिर ई-मेल एक्सचेंज के जरिए बातचीत शुरू हुई। 4 दिसंबर, 2011 को दोनों ने सैफई (इटावा) में धूमधाम से शादी की। इस हाई-प्रोफाइल शादी में अमिताभ बच्चन समेत कई बड़े लोग शामिल हुए थे। उनकी दो बेटियां हैं।
धनबाद। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में हुई भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हाई-प्रोफाइल हत्या के तार अब धनबाद से जुड़ रहे हैं। इस मामले की जांच अब झारखंड के धनबाद तक पहुंच गई है। बीते 6 मई की रात अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चंद्रनाथ की जान ले ली थी। इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब मौके से बरामद बाइक का नंबर एक सेलकर्मी के नाम पर दर्ज मिला। पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम तुरंत धनबाद के चासनाला पहुंची और संबंधित व्यक्ति से घंटों पूछताछ की। लेकिन, गहन छानबीन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद ये साफ हो गया कि सेलकर्मी का इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि शूटरों ने फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। फर्जी नंबर प्लेट का खुलासा विभाष भट्टाचार्य ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर पर ही खड़ी है। जब पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की, तो पाया कि अपराधियों की बाइक और विभाष की बाइक के मॉडल और रंग में जमीन-आसमान का अंतर था। विभाष के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज ने यकीन दिलाया कि वारदात के समय वे ड्यूटी पर थे। अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए विभाष की बाइक के नंबर का क्लोन तैयार किया था। चंद्रनाथ रथ की कार को घेरकर बाइक और कार सवार अपराधियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौत हो गई, जबकि उनका चालक गंभीर रूप से घायल हुआ। राज्य सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए सात सदस्यीय SIT का गठन किया है। असली अपराधियों की तलाश जारी विभाष भट्टाचार्य को निर्दोष पाए जाने पर पुलिस ने छोड़ दिया है। अब जांच का पूरा ध्यान उन शूटरों पर है जिन्होंने इतनी चालाकी से फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग किया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधियों को विभाष की बाइक का नंबर कैसे मिला और इस बड़ी साजिश के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड कौन है। दरअसल, धनबाद में SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) का मुख्य कार्यालय चासनाला में स्थित हैं, जो कोलियरीज प्रभाग (Collieries Division) के अंतर्गत आते हैं। इसी ऑफिस में विभाष की पोस्टिंग है। विभाष ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर में ही खड़ी है। जब पुलिस ने विभाष के घर जाकर बाइक की जांच की और उनके कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि विभाष घटना के वक्त अपने कार्यालय में ड्यूटी पर थे। कोलकाता में किसने चलाई गोलियां ? चंद्रनाथ रथ हत्या मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई। 6 मई 2026 की रात लगभग 10:30 बजे मध्यमग्राम के दोहारिया में अपराधियों ने चंद्रनाथ की कार पर अंधाधुंध फायरिंग की। बाइक और कार से हमलावर आए थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। अपराधियों की बाइक (WB 44D 1990) का नंबर झारखंड के धनबाद (चासनाला) में रहने वाले एक सेलकर्मी का निकला।
रांची। झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए भी चिंता का सबब बनती जा रही है। लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने गठबंधन की सियासत को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल के दिनों में मंत्री राधाकृष्ण किशोर के तेवरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन में फैसलों की शैली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राजनीतिक समन्वय को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का दबाव यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंदरखाने लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन को संभालने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है। झामुमो लगातार रख रहा नजर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मंत्रियों के विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असहमति पैदा हो सकती है। कई नेताओं को यह शिकायत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसी कारण समय-समय पर सार्वजनिक बयानबाजी सामने आ रही है, जिससे गठबंधन की छवि प्रभावित हो रही है। झामुमो भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि कांग्रेस की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और समन्वय पर पड़ सकता है। भाषा विवाद पर भी धर्मसंकट इधर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हाल में भाषा विवाद के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष से जवाब मांगकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वे इस निमित्त गठित मंत्रियों के समूह में शामिल हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष बताने को कहा है। जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस जल्द ही अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित नहीं करती है, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर पड़ सकता है। विपक्ष हमलावर झामुमो की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि विपक्ष लगातार महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक विवादों को जल्द सुलझाए, ताकि सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सके।
रांची। टेंडर घोटाला के जरिए करोड़ों रुपए की मनी लाउंड्रिंग करने के आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की जमानत याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने आलमगीर आलम को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर लीय़ जामनत याचिका स्वीकार होने के बाद अब आलमगीर आलम करीब दो वर्ष के बाद जेल की सलाखों से बाहर आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम एम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच में आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई हुई। 11 जुलाई 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बेल के लिए गुहार लगाई। आलमगीर आलम की जमानत याचिका झारखण्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने खारिज की थी। पिछली सरकार में मंत्री रहे आलमगीर आलम को ईडी ने 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में हैं। आरोपों के मुताबिक उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल एवं उनके नौकर जहांगीर आलम के यहां से मिले 32.30 करोड़ रुपये नकद की बरामदी हुई थी। पैसे बरामद होने के बाद आलमगीर आलम से पूछताछ हुई थी फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi का एक खास वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पीएम मोदी जनता की ओर दंडवत प्रणाम करते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान देखने को मिला।प्रधानमंत्री ने इस खास अंदाज में बंगाल की जनता के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी का यह कदम उनकी “प्रधान सेवक” वाली छवि को मजबूत करता है। उन्होंने संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और सत्ता में रहने वालों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए। पीएम मोदी के इस भावुक और अनोखे अंदाज की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला, जब शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस चुनाव में 80 सीटों तक सिमट गई। प्रधानमंत्री मोदी समेत कई बड़े नेता रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूरे समारोह के दौरान ब्रिगेड ग्राउंड भाजपा समर्थकों के नारों और उत्साह से गूंजता रहा। सुरक्षा के लिहाज से कोलकाता में व्यापक इंतजाम किए गए थे और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। भाजपा ने बताया नए राजनीतिक दौर की शुरुआत भाजपा नेताओं ने इस जीत को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में नए राजनीतिक युग की शुरुआत बताया। पार्टी का कहना है कि यह जनादेश राज्य में बदलाव और विकास की राजनीति के समर्थन का प्रतीक है। भाजपा अब बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। कांग्रेस से भाजपा तक का सफर शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में की थी, लेकिन बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर राज्य के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। वर्ष 2020 में ममता बनर्जी से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर वह राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बने थे। ग्रामीण पृष्ठभूमि से उभरे नए मुख्यमंत्री पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं, जो कोलकाता से बाहर किसी जिले की ग्रामीण पृष्ठभूमि से उभरकर सत्ता तक पहुंचे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।