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Mamata Banerjee Appears in Court as Lawyer

वकील के कोट में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, चुनाव बाद हिंसा मामले में रखेंगी पक्ष

surbhi मई 14, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court in lawyer’s robe for post-poll violence case hearing
Mamata Banerjee At Calcutta High Court

चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी।

सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील

यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं।

जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी।

बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।

ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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बंगाल में लागू हुई आयुष्मान भारत योजना, लाखों परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद राज्य के लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “डबल इंजन सरकार” का लाभ बताया। माना जा रहा है कि यह योजना बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।   क्या है आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा। गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान मरीजों को अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा।   किन लोगों को मिलेगा फायदा योजना का लाभ सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में शामिल गरीब परिवारों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को मिलेगा। पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।   कैसे बनेगा आयुष्मान कार्ड सरकार ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया को आसान रखने की बात कही है। पात्र सूची में नाम होने पर आधार आधारित सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी सहायता केंद्र या योजना से जुड़े अस्पतालों के माध्यम से आयुष्मान कार्ड जारी किया जाएगा। इसी कार्ड के जरिए मरीज कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकेंगे।   राज्य के बाहर भी मिलेगा इलाज इस योजना के लागू होने के बाद बंगाल के लोग देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। यानी दूसरे राज्यों में भी आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है।

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कांग्रेस ने किया बड़ा एलान, वीडी सतीशन होंगे केरल के नए मुख्यमंत्री

चुनाव परिणाम के बाद खत्म हुई मुख्यमंत्री पद की चर्चा कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए V. D. Satheesan को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। पार्टी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया गया। 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। कई नेताओं के नाम सामने आ रहे थे, लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व ने अंतिम फैसला लेते हुए वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। कांग्रेस नेतृत्व ने लिया अंतिम निर्णय पार्टी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस आलाकमान और वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा था। राज्य में नई सरकार के गठन और नेतृत्व को लेकर मंथन किया जा रहा था। गुरुवार को हुई प्रेस वार्ता में इस सस्पेंस को खत्म कर दिया गया। वीडी सतीशन को पार्टी के अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। संगठन और विधानसभा में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया है। नई सरकार से बढ़ी राजनीतिक उम्मीदें केरल में नई सरकार के गठन के साथ अब लोगों की नजरें मंत्रिमंडल और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि वीडी सतीशन के नेतृत्व में राज्य में विकास और प्रशासन को नई दिशा मिलेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने युवा और सक्रिय नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश की है।  

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CM थलापति विजय ने उठाई NEET खत्म करने की मांग, देशभर में बढ़ा विवाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET UG 2026 पेपर लीक मामले ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। मामले की जांच अब राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत 10 राज्यों तक फैल चुकी है। एक के बाद एक नए खुलासों और आरोपियों के सामने आने से मामला और गंभीर होता जा रहा है। इस बीच करीब 23 लाख छात्र नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं।   7 से 10 दिनों में आ सकता है नया शेड्यूल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी National Testing Agency जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर NEET UG 2026 की नई परीक्षा तारीख जारी कर सकती है। एनटीए के महानिदेशक के अनुसार अगले 7 से 10 दिनों के भीतर नया शेड्यूल घोषित किया जा सकता है। छात्रों को तैयारी जारी रखने और आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।   सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला पेपर लीक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। Federation of All India Medical Association ने एनटीए के खिलाफ याचिका दायर कर परीक्षा को “सिस्टेमैटिक फेलियर” बताया है। याचिका में न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने और एनटीए को हटाने की मांग की गई है।   तमिलनाडु सरकार ने उठाई NEET खत्म करने की मांग तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने केंद्र सरकार से मेडिकल कोर्स में NEET आधारित प्रवेश प्रक्रिया समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्यों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल सीटों पर दाखिले की अनुमति मिलनी चाहिए। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि NEET से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान हो रहा है।   CBI जांच में नए खुलासे सीबीआई जांच में सामने आया है कि राजस्थान में पेपर पहुंचाने के लिए हार्ड कॉपी को स्कैन कर PDF बनाई गई थी। आरोपी यश यादव ने प्रश्नपत्र हाथ से लिखकर स्कैन किया था। जांच एजेंसियां कोचिंग संस्थानों के स्टाफ और संचालकों से भी पूछताछ कर रही हैं। बताया जा रहा है कि कुछ छात्रों से पेपर के बदले 2 से 5 लाख रुपये तक लिए गए थे।

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