Kolkata News

Bharat Taxi launch in Kolkata
कोलकाता में जल्द दौड़ेगी ‘भारत टैक्सी’, सस्ती सवारी के साथ बुकिंग रद्द होने की परेशानी से मिलेगी राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। महंगे किराए और बार-बार कैब बुकिंग रद्द होने की समस्या से जूझ रहे कोलकातावासियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार की सहकारी पहल ‘भारत टैक्सी’ सेवा अब कोलकाता में भी शुरू होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों के भीतर देश के 500 से अधिक शहरों में इस सेवा का विस्तार किया जाएगा, जिसमें कोलकाता, मुंबई, पुणे, लखनऊ, चंडीगढ़ और जयपुर प्रमुख शहर शामिल हैं। माना जा रहा है कि गुजरात के बाद इसी वर्ष कोलकाता में भी इस सेवा की शुरुआत हो सकती है।   भारत टैक्सी का आधिकारिक शुभारंभ कब हुआ? भारत टैक्सी का आधिकारिक शुभारंभ 27 जून को गुजरात के 14 शहरों में किया गया। यह देश की पहली सहकारी समिति आधारित ऐप कैब सेवा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ड्राइवर केवल वाहन चालक नहीं बल्कि सेवा के सह-मालिक भी होंगे। यह मॉडल निजी एग्रीगेटर कंपनियों से अलग है, क्योंकि इसमें ड्राइवरों से किसी प्रकार का कमीशन नहीं लिया जाएगा। यात्रियों से मिलने वाला पूरा किराया सीधे ड्राइवर के पास जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और सेवा की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। भारत टैक्सी क्या है भारत टैक्सी देश की पहली सहकारी समिति द्वारा संचालित एप कैब सेवा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ड्राइवर ही मालिक होते हैं। यह एप कैब केंद्र सरकार और सहकारी समितियों के सहयोग से चलती है। भारत टैक्सी शून्य कमीशन मॉडल पर काम करती है। इसलिए, कार किराए से होने वाली पूरी आय ड्राइवर को ही मिलती है। उसे किसी भी एग्रीगेटर को किराए का कोई हिस्सा नहीं देना पड़ता।    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देशभर में सात लाख से अधिक ड्राइवर 100 रुपये का शेयर खरीदकर भारत टैक्सी के शेयरधारक बन चुके हैं। इससे वे केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि इस सहकारी व्यवस्था के भागीदार भी बन गए हैं। सरकार का मानना है कि भारत टैक्सी सेवा से यात्रियों को किफायती और भरोसेमंद परिवहन मिलेगा, जबकि ड्राइवरों को बेहतर आय और स्वामित्व का लाभ मिलेगा। इससे बार-बार बुकिंग रद्द होने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Railway removes illegal encroachments at Kolkata Park Circus Railway Station during overnight demolition drive
रेलवे की बड़ी कार्रवाई: बंगाल में आधी रात चला बुलडोजर, पार्क सर्कस स्टेशन से हटाया अतिक्रमण

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद रेलवे ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार देर रात कोलकाता के पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन पर व्यापक बुलडोजर कार्रवाई की गई। रेलवे प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्टेशन परिसर में बनी अवैध दुकानों और अतिक्रमणों को हटाया। रातभर चला अतिक्रमण हटाने का अभियान रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभियान शनिवार रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और रविवार सुबह तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान स्टेशन परिसर को पूरी तरह पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने घेर लिया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। चेतावनी के बाद चला बुलडोजर रेलवे प्रशासन ने बताया कि कार्रवाई से पहले माइक के माध्यम से अतिक्रमणकारियों और दुकानदारों को रेलवे भूमि खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई। लेकिन जब किसी ने स्वयं दुकानें नहीं हटाईं, तब बुलडोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। पहले ही जारी किए गए थे नोटिस रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जून की शुरुआत में ही पार्क सर्कस स्टेशन पर अवैध रूप से दुकानें चलाने वाले फेरीवालों और व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पार्क सर्कस स्टेशन पर लंबे समय से था अतिक्रमण पार्क सर्कस स्टेशन को सियालदह मंडल के सबसे अधिक अतिक्रमण वाले स्टेशनों में गिना जाता है। रेलवे का कहना है कि वर्षों से स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में अवैध दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अन्य स्टेशनों पर भी जारी रहेगा अभियान रेलवे प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने का अभियान केवल पार्क सर्कस तक सीमित नहीं रहेगा। हावड़ा, सियालदह, दमदम समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्टेशन परिसरों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Police arrest Kalicharan Banerjee, former OSD to ex-Kolkata Mayor Firhad Hakim, in connection with the Taratala warehouse shed collapse investigation.
तारातला हादसा: पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व OSD कालीचरण बनर्जी गिरफ्तार, पुलिस कर रही पूछताछ

  कोलकाता: कोलकाता के चर्चित तारातला गोदाम शेड हादसे में जांच तेज हो गई है। गुरुवार को पुलिस ने पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व ओएसडी (Officer on Special Duty) कालीचरण बनर्जी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। पुलिस फिलहाल कालीचरण बनर्जी से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विवादित भवन योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद हुई कार्रवाई गुरुवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तारातला हादसे का मुद्दा उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यदि कालीचरण बनर्जी से पूछताछ की जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा। इसके कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने कालीचरण बनर्जी को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। निर्माण योजना की मंजूरी पर उठे सवाल जांच का केंद्र उस भवन की स्वीकृति प्रक्रिया है, जिसके ढहने से यह हादसा हुआ। आरोप है कि कालीचरण बनर्जी की मंजूरी के बिना कोलकाता नगर निगम (KMC) में कोई भी निर्माण योजना आगे नहीं बढ़ती थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि संबंधित भवन की योजना किन परिस्थितियों में मंजूर की गई और क्या नियमों की अनदेखी की गई थी। फिरहाद हकीम पर भी लगे आरोप विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी ने कुछ दस्तावेज लहराते हुए दावा किया कि भवन की योजना पर तत्कालीन मेयर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उनका आरोप है कि संरचनात्मक खामियों के बावजूद परियोजना को मंजूरी दी गई। इन आरोपों पर फिरहाद हकीम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तृणमूल ने आरोपों को बताया राजनीतिक तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कालीचरण बनर्जी को लेकर लगाए जा रहे दावे तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए नाम पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी दस्तावेजों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तारातला हादसे को लेकर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल जारी है, जबकि इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी लगातार गरमाती जा रही है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Rescue teams work at the collapsed construction site in Kolkata’s Taratala area after a deadly roof collapse.
तारातला हादसे के बाद सरकार का बड़ा फैसला, SIT गठित; कोलकाता में सभी निर्माण कार्यों पर रोक

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में हुए भीषण हादसे के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन औद्योगिक परिसर की छत गिरने से कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायल मजदूरों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। राहत एवं बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा। डीसी डीडी के नेतृत्व में बनी 5 सदस्यीय SIT सरकार ने हादसे की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (DC-DD) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। टीम में एक सहायक सब-इंस्पेक्टर, तीन इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल किए गए हैं। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैर-इरादतन हत्या, गैर-इरादतन हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं शामिल हैं। 31 जुलाई तक निर्माण कार्यों पर रोक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हादसे के बाद कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत परियोजनाओं सहित सभी निर्माण कार्यों का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। सरकार ने 31 जुलाई तक निर्माण गतिविधियों को स्थगित रखने का निर्देश दिया है। इस दौरान विशेषज्ञों की एक टीम सभी परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट करेगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी ऑडिट कमेटी मुख्यमंत्री ने बताया कि निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसमें कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन विभाग, पुलिस और केएमडीए के अधिकारी शामिल होंगे। जहां आवश्यकता होगी, वहां कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी और मेट्रो रेलवे के विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। अस्पतालों और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को इस रोक से छूट दी जाएगी। प्रारंभिक जांच में सामने आईं योजना संबंधी खामियां मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक मिली शुरुआती रिपोर्टों में निर्माण योजना और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदारी तय होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेना और NDRF भी बचाव कार्य में जुटी तारातला हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पुलिस, दमकल विभाग, नागरिक सुरक्षा बल, सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों तक पानी और ऑक्सीजन पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। विधानसभा में बयान देंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को विधानसभा में तारातला हादसे पर विस्तृत बयान देंगे। सरकार की ओर से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और निर्माण सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
कोलकाता में गोदाम की इमारत ढही, 5 मजदूरों की मौत; राज्यभर में निर्माण परियोजनाओं की जांच के आदेश

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की इमारत ढहने से कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर घायल हो गए। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। प्रशासन, दमकल विभाग और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।   कई मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया   अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। अब तक करीब 20 लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।   मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश   घटना के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं की सुरक्षा जांच पूरी होने तक कई परियोजनाओं पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई है।   सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल   इस हादसे के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया था या नहीं।   राज्यभर में बढ़ी सतर्कता   घटना के बाद पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Aerial view of airport runway and terminal representing West Bengal government's plan for new airports and expanded regional connectivity.
West Bengal Budget 2026: पश्चिम बंगाल में बनेंगे चार नए एयरपोर्ट, मालदा, पुरुलिया, बलूरघाट और कल्याणी को मिलेगी हवाई कनेक्टिविटी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे और हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बजट भाषण के दौरान राज्य में चार नए एयरपोर्ट विकसित करने और एक मौजूदा एयरपोर्ट के विस्तार की घोषणा की। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना, दूरदराज के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देना और आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करना है। अब तक सिर्फ कोलकाता और बागडोगरा थे प्रमुख एयरपोर्ट वर्तमान में पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से दो प्रमुख हवाई अड्डे हैं- कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बागडोगरा हवाई अड्डा। उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के कई जिलों को अब भी पर्याप्त हवाई संपर्क नहीं मिल पाया है। इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना पेश की है। इन जिलों में बनेंगे नए एयरपोर्ट वित्त मंत्री ने बजट भाषण में घोषणा की कि निम्नलिखित स्थानों पर नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे: Malda Purulia Balurghat इसके अलावा, Cooch Behar के मौजूदा हवाई अड्डे का विस्तार किया जाएगा। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए चालू वित्त वर्ष में 10 करोड़ रुपये के प्रारंभिक आवंटन की घोषणा की है। कल्याणी में बनेगा दूसरा कोलकाता एयरपोर्ट राजधानी क्षेत्र में बढ़ती हवाई यात्री संख्या को देखते हुए सरकार ने Kalyani में दूसरा एयरपोर्ट विकसित करने की भी घोषणा की है। वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार इसके लिए 10,000 से 15,000 एकड़ भूमि चिह्नित करेगी। कल्याणी एयरपोर्ट को भविष्य में कोलकाता क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक और सहायक हवाई केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। उड़ान योजना के तहत विकसित होंगे एयरपोर्ट सरकार ने संकेत दिया है कि इन एयरपोर्ट परियोजनाओं को केंद्र सरकार की UDAN Scheme (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इससे छोटे शहरों और दूरदराज के जिलों को सस्ती हवाई सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी। पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा सरकार का मानना है कि नए एयरपोर्ट बनने से: क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उत्तर और पश्चिम बंगाल के दूरदराज के जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। राज्य सरकार की यह घोषणा पश्चिम बंगाल के हवाई बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य की क्षेत्रीय और आर्थिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिल सकती है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Abhishek Banerjee speaks to media after police search at his Kolkata residence as Mamata Banerjee arrives
अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ममता बनर्जी पहुंचीं; बोले- “क्या मैंने कुछ छिपाया है?”

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी के आवास पर घंटों चली तलाशी पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पुलिस ने कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी तुरंत अपने भतीजे के घर पहुंचीं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक माने जाने वाले सुमित रॉय से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई। सुबह 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, शनिवार तड़के करीब 3 बजे पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाना की टीम कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। पुलिसकर्मियों ने घर के विभिन्न हिस्सों की जांच की और करीब चार घंटे से अधिक समय तक तलाशी अभियान जारी रखा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी और घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तलाशी के बाद अभिषेक बनर्जी का पलटवार तलाशी पूरी होने के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ छिपाया गया होता तो एजेंसियां खुद बता सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने घर का ताला तोड़कर प्रवेश किया और सभी कमरों की जांच की। साथ ही उन्होंने यह भी खारिज कर दिया कि उनके सहयोगी को घर में छिपाकर रखा गया था। ममता बनर्जी की अचानक एंट्री तलाशी अभियान की खबर फैलते ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ समय तक वहां मौजूद रहकर स्थिति की जानकारी ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह त्वरित प्रतिक्रिया इस मामले की संवेदनशीलता और पार्टी के भीतर इसके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी ताकतें जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर टीएमसी नेताओं को निशाना बना रही हैं। सीआईडी जांच और कानूनी दबाव भी जारी यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी हाल ही में विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में सीआईडी के समक्ष कई घंटों तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं। इस मामले में उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली हुई है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। सीआईडी अधिकारियों ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए फिर से बुलाने के संकेत दिए हैं। मदन मित्रा पर भी ईडी की कार्रवाई इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा से जुड़े कई ठिकानों पर भी छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की जा रही है। पार्टी के भीतर भी बढ़ रहा दबाव टीएमसी पहले से ही आंतरिक मतभेदों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी पर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने के बाद संगठन के भीतर असहज स्थिति बनी हुई है। हालांकि बाद में दोनों नेताओं ने विवाद को कम करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। आगे क्या? अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई तलाशी, ईडी की समानांतर कार्रवाई और जारी जांचों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Security personnel conduct verification drive in West Bengal against illegal immigration and fake document networks.
बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ पश्चिम बंगाल में व्यापक अभियान, सीमावर्ती जिलों से कोलकाता तक जांच तेज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। गृह विभाग के निर्देश पर पुलिस, खुफिया एजेंसियां और केंद्रीय सुरक्षा बल संयुक्त रूप से संवेदनशील इलाकों में जांच अभियान चला रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, खुफिया इनपुट के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेजों के जरिए संदिग्ध लोगों के रहने की आशंका है। अभियान केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता समेत प्रमुख शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक साथ चलाया जाएगा। सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस और खुफिया अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा तैयार की है। उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए हैं, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य पुलिस ने संयुक्त गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में ड्रोन, थर्मल इमेजिंग कैमरों और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि अवैध आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। शहरी क्षेत्रों में भी पहचान सत्यापन अभियान कोलकाता, हावड़ा और हुगली के औद्योगिक क्षेत्रों, जूट मिलों और बड़े निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के पहचान पत्रों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति फर्जी पहचान के जरिए इन इलाकों में रह सकते हैं। फर्जी दस्तावेज नेटवर्क पर कार्रवाई पुलिस ने उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों पर अवैध रूप से सीमा पार कराने और फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। उनके कब्जे से कथित तौर पर कई फर्जी मुहरें और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
TMC leader Abhishek Banerjee faces CID notice in alleged forged signature investigation in West Bengal.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन, CID ने कोलकाता आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसी की टीम ने उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, CID एक ऐसे मामले की जांच कर रही है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक दस्तावेज पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज में कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर रही है। क्या है पूरा मामला? विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक दस्तावेज को लेकर सवाल उठे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद मामले की शिकायत जांच एजेंसियों तक पहुंची और CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। CID ने जारी किया तीसरा नोटिस जांच एजेंसी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने के बाद अब उन्हें तीसरा नोटिस जारी किया गया है। CID अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस नए समन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विवाद भी तेज मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। आगे क्या? अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के समक्ष कब पेश होते हैं और CID की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
West Bengal Cabinet approves June 20 as official State Foundation Day during cabinet meeting.
बंगाल दिवस पर नई मुहर, राज्य सरकार ने 20 जून को आधिकारिक तिथि घोषित किया

  पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य स्थापना दिवस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को राज्य सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब हर वर्ष 20 जून को आधिकारिक रूप से ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ मनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य के ऐतिहासिक और राजनीतिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को ध्यान में रखकर लिया गया है। मंत्री ने बताई फैसले की पृष्ठभूमि कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि 20 जून की तारीख बंगाल के इतिहास में विशेष महत्व रखती है। उनके अनुसार, वर्ष 1947 में इसी दिन तत्कालीन संयुक्त बंगाल विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान हुआ था, जिसने बाद में पश्चिम बंगाल के गठन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सरकार इस ऐतिहासिक घटना को औपचारिक मान्यता देना चाहती है। पूर्व व्यवस्था से अलग नया दृष्टिकोण इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने उस परंपरा से अलग रास्ता अपनाया है, जिसमें बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइशाख’ के अवसर पर पश्चिम बंगाल दिवस मनाया जाता था। नई सरकार का मानना है कि राज्य के गठन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को आधार बनाकर स्थापना दिवस मनाना अधिक उपयुक्त होगा। राज्यभर में होंगे विशेष कार्यक्रम सरकार ने 20 जून के आयोजन को व्यापक रूप देने की योजना बनाई है। इसके लिए संस्कृति और गृह विभाग को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सचिवालय से लेकर जिला, ब्लॉक और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सांस्कृतिक आयोजन, व्याख्यान, प्रदर्शनी और इतिहास से जुड़े विशेष कार्यक्रम शामिल होंगे। ऐतिहासिक विरासत को प्रमुखता देने की कोशिश सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को पश्चिम बंगाल के गठन और उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों की जानकारी देना है। इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विकास से संबंधित कार्यक्रम आयोजित कर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। राजनीतिक चर्चा का नया विषय बना फैसला राज्य स्थापना दिवस की नई तिथि तय किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस फैसले को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और राज्य की विरासत को सम्मान देने की भावना से लिया गया है। 20 जून को पहली बार होगा सरकारी स्तर पर आयोजन सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 से 20 जून को पूरे पश्चिम बंगाल में आधिकारिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य स्थापना दिवस मनाया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सभी विभागों को कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
ED officials and security personnel delivering notice to Abhishek Banerjee at his Kolkata residence in teacher recruitment case.
बंगाल में बढ़ी सियासी गर्मी, अभिषेक बनर्जी को ईडी का नया नोटिस

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे उथल-पुथल भरे दौर के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती मामले में नया नोटिस जारी किया है। बुधवार को ईडी की एक टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई कार्रवाई जांच एजेंसी के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच आवास के आसपास निगरानी रखी गई और स्थिति पर नजर बनाए रखी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी बढ़ गई। भर्ती मामले की जांच में नए पहलुओं की तलाश ईडी लंबे समय से कथित शिक्षक भर्ती अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है ताकि मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके। जांच के दौरान कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कारोबारी संस्थाओं और वित्तीय नेटवर्क पर नजर सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं जिनका नाम जांच के दौरान सामने आया है। उद्देश्य यह समझना है कि कथित तौर पर धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ और उससे जुड़े नेटवर्क कैसे काम कर रहे थे। इसी क्रम में कुछ अतिरिक्त जानकारियां जुटाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजनीतिक संकट के बीच नई चुनौती यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चर्चा और गतिविधियों को बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक महत्व भी रखती है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष इसे जांच प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेता केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई क्या होगी और पूछताछ या जांच के अगले चरण में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं। शिक्षक भर्ती मामला पहले से ही पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है और ताजा घटनाक्रम ने इसे एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
TMC legislators meeting amid internal party crisis and leadership dispute in West Bengal
टीएमसी में बड़ा राजनीतिक संकट, 58 विधायकों ने रीतब्रत बनर्जी को चुना नया नेता

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के 58 विधायकों ने अलग रुख अपनाते हुए रीतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बागी विधायकों ने पेश किया समर्थन का दावा रीतब्रत बनर्जी और उनके समर्थक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपने समर्थन से जुड़े दस्तावेज जमा किए। बागी खेमे का दावा है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और वे विधायक दल के भीतर अपनी वैध स्थिति स्थापित करने में सफल रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकांश विधायक उनके साथ हैं और वे विधानसभा में अपनी अलग पहचान के साथ काम करेंगे। नई नेतृत्व टीम की घोषणा बागी गुट ने केवल नेता का चयन ही नहीं किया, बल्कि विधायक दल के लिए नई जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया। रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की भूमिका दी गई, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को उपनेता और मुख्य सचेतक जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस कदम को संगठन के भीतर समानांतर नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कई वरिष्ठ नेता भी आए साथ इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी के कई अनुभवी और वरिष्ठ विधायकों के नाम भी सामने आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस बगावत को और अधिक गंभीर बना दिया है। यही वजह है कि इसे केवल सामान्य गुटबाजी नहीं बल्कि संगठन के भीतर बड़े राजनीतिक पुनर्संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। ममता के नेतृत्व पर भरोसा, अभिषेक पर सवाल बागी विधायकों ने अपने रुख में स्पष्ट किया है कि वे ममता बनर्जी को पार्टी का सर्वोच्च नेता मानते हैं।  विधायक दल के कामकाज में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर उन्होंने असहमति जताई है। उनका कहना है कि संगठनात्मक फैसलों और विधायक दल की गतिविधियों को लेकर नई व्यवस्था की जरूरत है। पार्टी नेतृत्व ने उठाए कड़े कदम घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व ने पूरे राज्य में संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा शुरू कर दी है। विभिन्न समितियों और इकाइयों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत है। वैधता को लेकर शुरू हुई बहस बागी गुट और आधिकारिक नेतृत्व के बीच सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि विधायक दल से जुड़े फैसले लेने का अधिकार किसके पास है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहरा रहे हैं। इसी वजह से यह मामला केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठनात्मक अधिकार और नेतृत्व की वैधता का सवाल भी बन गया है। पुराने विवादों से जुड़ रहे हैं तार जानकारों का मानना है कि यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ। पिछले कुछ समय से विधायक दल के नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। अब यह असंतोष खुली राजनीतिक चुनौती में बदलता दिखाई दे रहा है, जिससे पार्टी के भविष्य और नेतृत्व संरचना को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संगठनात्मक स्तर पर कौन-सा पक्ष अधिक समर्थन जुटा पाता है और पार्टी के भीतर चल रहा यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Swapan Dasgupta takes oath as cabinet minister in West Bengal BJP government expansion
शुभेंदु कैबिनेट में शामिल हुए स्वपन दासगुप्ता, पत्रकारिता से सत्ता के केंद्र तक का सफर

  पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा। सोमवार को कोलकाता के लोक भवन में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में लंबा अनुभव रखने वाले दासगुप्ता को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। शिक्षा और शोध से शुरू हुआ सफर 3 अक्टूबर 1955 को कोलकाता में जन्मे स्वपन दासगुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की। वह ऑक्सफोर्ड और वॉरविक विश्वविद्यालय में भी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पत्रकारिता की दुनिया में बनाई अलग पहचान स्वपन दासगुप्ता देश के प्रमुख अंग्रेजी पत्रकारों और स्तंभकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने द स्टेट्समैन, द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। राजनीति, समाज और सार्वजनिक नीति पर उनके लेख और विश्लेषण लंबे समय से प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। राजनीति में चुनौतियों के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी स्वपन दासगुप्ता का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2016 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें हुगली जिले की तारकेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बावजूद वह भाजपा के बौद्धिक और रणनीतिक चेहरों में शामिल रहे। पार्टी की नीतियों और बंगाल में संगठन विस्तार की रणनीति में उनकी सक्रिय भूमिका बनी रही। भाजपा के लिए क्यों अहम हैं स्वपन दासगुप्ता? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्वपन दासगुप्ता को कैबिनेट में शामिल करना भाजपा की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है। उनकी पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक विद्वान, लेखक और नीति विशेषज्ञ के रूप में भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनके शामिल होने से भाजपा को बंगाल के शिक्षित और बौद्धिक वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अहम मंत्रालय मिलने की संभावना मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्वपन दासगुप्ता को शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृति या किसी अन्य नीति-निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विभागों के बंटवारे के बाद उनकी भूमिका और अधिक स्पष्ट होगी। स्वपन दासगुप्ता की कैबिनेट में एंट्री को भाजपा सरकार के उस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए प्रशासनिक अनुभव, बौद्धिक नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
West Bengal Chief Minister and newly inducted ministers during cabinet expansion oath ceremony
बंगाल मंत्रिमंडल में कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना का दबदबा, तीन जिलों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

  पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य की राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की तस्वीर साफ हो गई है। सोमवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मंत्रिपरिषद में कुल 41 पद भर चुके हैं, जबकि तीन पद अभी खाली हैं। जिलावार प्रतिनिधित्व के विश्लेषण से पता चलता है कि कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना को मंत्रिमंडल में सबसे अधिक स्थान मिला है। इन तीनों जिलों से चार-चार मंत्री बनाए गए हैं, जिससे सरकार में इन क्षेत्रों की भागीदारी सबसे ज्यादा हो गई है। इन जिलों को मिला सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व कोलकाता से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। राजधानी होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से इस जिले को विशेष महत्व मिला है। पूर्व मेदिनीपुर, जो मुख्यमंत्री का गृह जिला भी है, से चार नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें कैबिनेट और राज्य मंत्री दोनों स्तर के चेहरे शामिल हैं। उत्तर 24 परगना से भी चार नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। यह जिला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से राज्य के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रों में गिना जाता है। कई जिलों को मिला संतुलित प्रतिनिधित्व अलीपुरदुआर को तीन मंत्री पद मिले हैं। वहीं दक्षिण 24 परगना, बांकुड़ा, बीरभूम, कूचबिहार, पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान, हुगली, झारग्राम, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग और मुर्शिदाबाद से दो-दो नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, पुरुलिया और मालदा को एक-एक मंत्री पद मिला है। तीन जिलों को नहीं मिला मंत्रिमंडल में स्थान मंत्रिमंडल विस्तार में नदिया, दक्षिण दिनाजपुर और कलिम्पोंग को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इन जिलों से भाजपा के विधायक होने के बावजूद किसी नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि भविष्य में खाली पड़े पदों या संगठनात्मक जिम्मेदारियों के जरिए इन जिलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा सकती है। अभी तीन पद खाली 294 सदस्यीय विधानसभा में नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में 41 पद भरे गए हैं। मंत्रिपरिषद में 13 कैबिनेट मंत्री, तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। अब सभी की नजर विभागों के बंटवारे पर है। इससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार के भीतर किस क्षेत्र और नेता को कितनी अहम जिम्मेदारी सौंपी जाती है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
FIR filed against Mamata Banerjee over alleged remarks on Sanatan Dharma in West Bengal
सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ FIR, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सनातन धर्म को लेकर कथित विवादित टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर की गई है। पुलिस के अनुसार, सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में ममता बनर्जी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी सिंह के मुताबिक, मामला वर्ष 2025 में कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि उस कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से हिंदू धर्म और सनातन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने भी समय-समय पर हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिए। रिंकी चटर्जी सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन शुरुआत में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर भी लगाए आरोप अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के दौरान उन्हें कथित तौर पर अपमानित किया गया और उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में शिकायत की समीक्षा के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। चुनावी हार के बाद टीएमसी में बढ़ी बेचैनी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई नेता पार्टी से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने भी इस्तीफा दिया है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्ष ने साधा निशाना ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद विपक्षी दलों ने टीएमसी पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते हिंदू भावनाओं का अपमान किया गया। वहीं टीएमसी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक माहौल गरमाया बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। एक तरफ टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने बयानों और विवादों को लेकर कानूनी कार्रवाई भी तेज होती दिखाई दे रही है। सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया और टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।  

surbhi मई 27, 2026 0
US Secretary of State Marco Rubio arriving in Kolkata for India diplomatic visit 2026
दिल्ली-मुंबई छोड़ कोलकाता क्यों पहुंचे मार्को रूबियो? 14 साल बाद ‘सिटी ऑफ जॉय’ में अमेरिकी विदेश मंत्री, 3 फैक्ट और 4 थ्योरीज में समझें

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio का भारत दौरा इस बार कई मायनों में खास माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत भारत की राजनीतिक राजधानी New Delhi या आर्थिक राजधानी Mumbai से नहीं, बल्कि Kolkata से की। 23 मई 2026 की सुबह रूबियो कोलकाता पहुंचे, जहां भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने उनका स्वागत किया। करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता पहुंचा है। इससे पहले 2012 में Hillary Clinton ने ‘सिटी ऑफ जॉय’ का दौरा किया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कोलकाता को ही पहली मंजिल क्यों चुना गया? इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक कई तरह की चर्चाएं और थ्योरीज सामने आ रही हैं। हालांकि, इसके पीछे कुछ ठोस रणनीतिक और कूटनीतिक वजहें भी मानी जा रही हैं। पहला फैक्ट: पूर्वी भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत भारत-अमेरिका संबंधों में अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सबसे अहम मुद्दों में शामिल है। कोलकाता भौगोलिक रूप से Bay of Bengal और पूर्वी एशियाई समुद्री मार्गों के काफी करीब माना जाता है। इसी वजह से Quadrilateral Security Dialogue यानी QUAD देशों-भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया-के बीच बढ़ते सहयोग में पूर्वी भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है। रूबियो के दौरे में ऊर्जा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोलकाता से यात्रा की शुरुआत इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत एक प्रतीकात्मक संदेश भी हो सकती है। दूसरा फैक्ट: मदर टेरेसा और ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्को रूबियो Missionaries of Charity के मुख्यालय Mother House भी जा सकते हैं। यह संस्था Mother Teresa से जुड़ी हुई है और दुनियाभर में मानवीय सेवा का प्रतीक मानी जाती है। अमेरिका लंबे समय से अपनी विदेश नीति में ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ का इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में रूबियो का कोलकाता दौरा सांस्कृतिक और मानवीय संदेश से भी जोड़ा जा रहा है। तीसरा फैक्ट: कोलकाता का ऐतिहासिक अमेरिका कनेक्शन कोलकाता में अमेरिका का बेहद पुराना राजनयिक इतिहास जुड़ा हुआ है। 19 नवंबर 1792 को George Washington ने Benjamin Joy को कलकत्ता के लिए पहला अमेरिकी वाणिज्य दूत नियुक्त किया था। ब्रिटिश दौर में कोलकाता एशिया में व्यापार और राजनीति का बड़ा केंद्र था। यही वजह है कि अमेरिका के लिए यह शहर सिर्फ सांस्कृतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व भी रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि Donald Trump के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ नैरेटिव के बीच इतिहास से जुड़े प्रतीकों को भी अहमियत दी जा रही है। अब बात उन 4 थ्योरीज की, जिनकी सोशल मीडिया पर चर्चा है थ्योरी 1: क्या बंगाल की राजनीति पर अमेरिका की नजर? सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि अमेरिका पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को करीब से समझना चाहता है। हालांकि, इस तरह के दावों का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े देश के लिए क्षेत्रीय राजनीति को समझना सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। थ्योरी 2: क्या चीन को संदेश देने की कोशिश? कई विश्लेषकों का मानना है कि कोलकाता का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से China को संदेश देने की कोशिश भी हो सकता है। पूर्वी भारत, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रूबियो का पहला पड़ाव इंडो-पैसिफिक रणनीति से जुड़ा प्रतीकात्मक संकेत माना जा रहा है। थ्योरी 3: इतिहास और कूटनीति का मेल कोलकाता में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास दुनिया के सबसे पुराने अमेरिकी मिशनों में गिना जाता है। यही वजह है कि रूबियो की यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों के दो सौ साल पुराने इतिहास से जोड़कर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक जुड़ाव को दोबारा रेखांकित करने की कोशिश भी हो सकता है। थ्योरी 4: ‘सांस्कृतिक भारत’ दिखाने की रणनीति? कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका इस बार दुनिया को सिर्फ सत्ता वाला भारत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक भारत भी दिखाना चाहता है। कोलकाता लंबे समय से साहित्य, कला, थिएटर और राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। ऐसे में रूबियो का यहां से दौरा शुरू करना एक सांस्कृतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा? विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े राजनयिक दौरे में शहरों का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। दिल्ली राजनीतिक शक्ति का केंद्र है, मुंबई आर्थिक ताकत का प्रतीक है, जबकि कोलकाता ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक पहचान रखता है। ऐसे में मार्को रूबियो का यह दौरा सिर्फ एक सामान्य प्रोटोकॉल विजिट नहीं माना जा रहा। इसमें राजनीति, रणनीति, संस्कृति और वैश्विक कूटनीति के कई संकेत छिपे दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही कई कॉन्सिरेसी थ्योरीज के ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि 14 साल बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता पहुंचना अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है।  

surbhi मई 23, 2026 0
US Secretary of State Marco Rubio arrives in Kolkata during his first official India visit
पहले भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, PM मोदी से करेंगे मुलाकात

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर Kolkata पहुंचे। यह उनका पहला भारत दौरा है और करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता आया है। इससे पहले साल 2012 में Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मार्को रूबियो की यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि रूबियो जल्द ही Narendra Modi से मुलाकात करेंगे। व्यापार, रक्षा और QUAD पर होगी चर्चा सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरे के दौरान व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और Quadrilateral Security Dialogue जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मार्को रूबियो का भारत दौरा 23 मई से 26 मई तक चलेगा। इस दौरान वह कोलकाता के अलावा Agra, Jaipur और New Delhi भी जाएंगे। 26 मई को QUAD देशों की अहम बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में अमेरिका के अलावा Penny Wong और Motegi Toshimitsu भी हिस्सा लेंगे। मदर  टेरेसा हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल जा सकते हैं रूबियो हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक कोलकाता दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रूबियो Mother House जा सकते हैं। यह Missionaries of Charity का मुख्यालय है, जिसकी स्थापना Mother Teresa ने की थी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह Victoria Memorial का भी दौरा कर सकते हैं। इसे देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर अमेरिका का जोर भारत पहुंचने से पहले मार्को रूबियो Sweden गए थे। वहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा निर्यात करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस समय अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े सवाल पर रूबियो ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझेदार” बताया। रूबियो ने यह भी कहा कि वह QUAD देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक को लेकर उत्साहित हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।  

surbhi मई 23, 2026 0
ED officials conduct raids in Kolkata and Murshidabad over alleged extortion racket linked to ex-IPS officer
बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, पूर्व IPS अफसर से जुड़े कथित उगाही रैकेट की जांच तेज

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया। ईडी ने कथित उगाही रैकेट से जुड़े मामले में कोलकाता और मुर्शिदाबाद समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक कारोबारी के घर, एक होटल और कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा जांच एजेंसी की एक टीम मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास के घर भी पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी देखी गई, ताकि तलाशी अभियान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईडी ने इस मामले में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। जांच के दायरे में एमडी अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और मुर्शिदाबाद स्थित अन्य संदिग्ध ठिकाने भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित उगाही नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संपर्कों से भी जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद कार्रवाई ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर शुक्रवार को यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और उगाही से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि यह मामला कथित उगाही और अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसमें अपराधियों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है, उनकी तरफ से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? ईडी की टीमें फिलहाल सभी स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
CBI officials investigating alleged Army tender corruption case linked to Colonel Himanshu Bali in Kolkata
सेना के टेंडर घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, कोलकाता में तैनात कर्नल हिमांशु बाली गिरफ्तार

Central Bureau of Investigation (CBI) ने सेना के टेंडरों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए Colonel Himanshu Bali को गिरफ्तार किया है। कर्नल हिमांशु बाली Fort William स्थित पूर्वी कमान में सेना आयुध कोर में तैनात थे। सूत्रों के मुताबिक, कर्नल बाली पर करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई की एफआईआर में दावा किया गया है कि उन्होंने कानपुर की एक निजी कंपनी को सेना के टेंडर दिलाने में अनुचित लाभ पहुंचाया और इसके बदले रिश्वत स्वीकार की। क्या है पूरा मामला? सीबीआई के अनुसार यह मामला भारतीय सेना की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कर्नल हिमांशु बाली ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया। जांच एजेंसी ने मामले में छापेमारी और शुरुआती जांच के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल सीबीआई यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में अन्य अधिकारी या निजी कंपनियां भी शामिल थीं या नहीं। सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक सेना जैसे संवेदनशील संस्थान में किसी वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी बेहद गंभीर मामला माना जाता है। यह कार्रवाई रक्षा संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है। पूछताछ जारी सीबीआई ने कर्नल हिमांशु बाली से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में टेंडर घोटाले से जुड़े और अहम खुलासे हो सकते हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders after Bengal election defeat at her Kalighat residence meeting
बंगाल में हार के बाद पहली बार बोलीं ममता बनर्जी, कहा- ‘जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो स्वतंत्र हैं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’  ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court in lawyer’s robe for post-poll violence case hearing
वकील के कोट में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, चुनाव बाद हिंसा मामले में रखेंगी पक्ष

चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी। सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।  

surbhi मई 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0