West Bengal में सत्ता परिवर्तन के बीच बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया है. राज्यपाल Ravi Narayan ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया. इसके साथ ही निवर्तमान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee समेत पूरी मंत्री परिषद को भी बर्खास्त कर दिया गया है.
राजभवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया. मुख्य सचिव दुष्मंत नारियाला ने भी इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया.
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक अगले दो दिनों के लिए राज्य का प्रशासनिक कार्यभार राज्यपाल के अधीन रहेगा. इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है.
अब नवनिर्वाचित विधायकों के साथ 18वीं विधानसभा के गठन का रास्ता साफ हो गया है.
सरकार भंग होने से पहले ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव “हारी नहीं”, बल्कि “100 सीटें छीनी गई हैं.” राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी नतीजों और सत्ता परिवर्तन पर उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस्तीफे को लेकर भी सहज नहीं थीं और पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही थी.
नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को Brigade Parade Ground में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है.
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के शामिल होने की संभावना है. इसके अलावा भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रह सकते हैं.
कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. शपथ ग्रहण समारोह की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी और Kolkata Police के पास होगी, जबकि ब्रिगेड मैदान के बाहर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे.
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी नजर नई सरकार के गठन और उसके शुरुआती फैसलों पर टिकी हुई है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज का समय डिजिटल ज़माने का है। डिजिटल युग में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। फर्जी कॉल, UPI फ्रॉड, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। ऐसे में यदि आप साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में पैसे वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर करें कॉल अगर आपके बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल गए हैं, तो सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ेगी। तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें फोन करने के साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत करते समय घटना का पूरा विवरण, लेनदेन की जानकारी, स्क्रीनशॉट और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। बैंक को तुरंत सूचित करें यदि आपके खाते से पैसा निकला है, तो अपने बैंक की कस्टमर केयर और नजदीकी शाखा को तुरंत जानकारी दें। कई बैंक समय रहते कार्रवाई कर संदिग्ध ट्रांजैक्शन को रोकने या आगे की प्रक्रिया शुरू करने में मदद करते हैं। सभी सबूत सुरक्षित रखें फर्जी मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी, UPI रेफरेंस नंबर, ईमेल और चैट जैसे सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। जांच एजेंसियों के लिए ये महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। पासवर्ड और UPI PIN तुरंत बदलें यदि आपको लगता है कि आपका अकाउंट या मोबाइल हैक हो गया है, तो तुरंत बैंकिंग ऐप, ईमेल, सोशल मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड बदल दें। साथ ही UPI PIN भी बदलें और जहां संभव हो वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें। पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं गंभीर साइबर अपराध की स्थिति में अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या स्थानीय थाने में भी शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन शिकायत का नंबर और सभी दस्तावेज अपने साथ रखें। भविष्य में ऐसे रहें सुरक्षित किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। OTP, UPI PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। खुद को CBI, पुलिस, RBI या बैंक अधिकारी बताने वाले वीडियो कॉल या फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें। समय पर कार्रवाई है सबसे जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कराता है, तो धोखाधड़ी की राशि को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में देरी न करें और तुरंत संबंधित एजेंसियों से संपर्क करें।
लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में 19 दिन बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए पुलिस ने आठ नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों और गणना प्रक्रिया में शामिल लोगों पर साजिश के तहत चढ़ावा राशि में हेराफेरी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। बाथरूम में छिपाए जाते थे नोट, वर्षों से चल रहा था खेल जांच में सामने आया है कि आरोपी चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी अलग निकालकर नोटों की गड्डियां पहले बाथरूम में छिपाते थे। बाद में मौका मिलने पर रकम को मंदिर परिसर से बाहर ले जाकर एक मकान में आपस में बांट लिया जाता था। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह पूरा खेल पिछले दो से तीन वर्षों से चल रहा था। पुलिस अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद कर चुकी है, जबकि पहले ट्रस्ट की कार्रवाई के दौरान भी बड़ी रकम बरामद हुई थी। टिन्नू और सुभाष की भूमिका सबसे अहम एसआईटी की जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि पूरी साजिश में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। टिन्नू के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी और वह पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता था। वहीं, सुभाष ड्यूटी तय करने और कर्मचारियों की तैनाती का जिम्मेदार था। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच का दायरा बढ़ेगा, गैंगस्टर की भी तैयारी पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान नए साक्ष्य मिलने पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी वरिष्ठ आईपीएस या पीपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की जा सकती है। पुलिस संगठित अपराध के एंगल से भी जांच कर रही है और विवेचना पूरी होने के बाद आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी है। इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर एसआईटी जांच पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे की अफवाहें भी दिनभर चर्चा में रहीं, हालांकि ट्रस्ट ने इन खबरों का खंडन करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। अब सभी की नजर पुलिस विवेचना और एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
1498 – चीन में पहला टूथ ब्रश बनाया गया। 1714 – स्पेन और नीदरलैंड ने व्यापार एवं शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये। 1718 - रूस के त्सारेविच अलेक्सी पेट्रोविच पीटर के महान बेटे को उसके पिता की मृत्यु के लिए सजा सुनाई गई। 1721 - डॉ ज़बडीएल बॉयलस्टोन अमेरिका ने प्रथम चेचक की औषधि को बनाया। 1848 - पेरिस में जून दिवस विद्रोह का अंत किया गया। 1870 - क्रिसमस को संयुक्त राज्य में एक संघीय अवकाश घोषित किया गया। 1879 - जर्मन कंपनी लिंडे कार्ल वॉन लिंडे द्वारा स्थापित की गई। 1906 – पहली ग्रां प्री का आयोजन हुआ था। यह प्रतिस्पर्द्धा 12 घंटे चली थी। 1907 - जॉर्जिया के एक नकद भरे बैंक कोच पर हमला किया, जिसमें चालीस लोग मारे गए। 1919 – अमेरिका में न्यूयॉर्क डेली न्यूज का प्रकाशन शुरू हुआ। 1927 – संवाद सिनेमा ने अपना जीवन आरंभ किया। फ़िल्म निर्माण का काम आरंभ होने से ही निरंतर इस बात का प्रयास किया गया कि ऐसी फ़िल्में बनाई जाएं जिसमें संवाद भी हो। 1945 - सेन फ़्राँसिस्कों में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर। 1945 - संयुक्त राष्ट्र संघ एक घोषणा पत्र पर सदस्य देशों के हस्ताक्षर के बाद संयुक्त राष्ट्र चार्टर (U.N. Charter) के रूप में स्वीकार किया गया। 1949 – बेल्जियम के संसदीय चुनाव में पहली बार महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला। 1960 – फ़्रांस के उपनिवेश मेडागास्कर को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। हर वर्ष आज का दिन इस देश में राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाता है। 1963 – अमेरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी ने पश्चिम जर्मनी के शहर बर्लिन में एक बहुत बड़ी भीड़ को संबोधित किया था। उन्होंने बर्लिन को शीत युद्ध के दौरान विश्व में स्वतंत्रता का प्रतीक बताया था। 1975 - प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। 1982 – एयर इंडिया का पहला बोइंग गौरीशंकर मुंबई में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। 1992 - भारत ने 'तीन बीघा गलियारा' 999 वर्षों के लिए बांग्लादेश को पट्टे पर दिया। 1999 - अमेरिकी ऊर्जा विभाग के हथियार कार्यक्रम के प्रमुख विक्टर रीस का इस्तीफ़ा। 1999 - बुडापेस्ट (हंगरी) में विश्व विज्ञान सम्मेलन की शुरुआत। 1999 - आई.ओ.सी. से अध्यक्ष जे.ए. समारांच को 'बेस्ट स्पोर्ट्स लीडर आफ़ द सेंचुरी अवार्ड' प्रदत्त। 2000 - अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल द्वारा बांग्लादेश को टेस्ट का दर्जा दिया गया। 2004 - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जमाली का इस्तीफ़ा, शुजात हुसैन नये कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। 2008 - बहुर्राष्ट्रीय कम्पनी रियोरिटो ने मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में छतरपुर ज़िले के तहत हीरा खनन के लिए खनिज पट्टा माइनिंग लीज हासिल कर बंदर डायमंड प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की। 2008 - बिजली परियोजनाओं के लिए कास्टिंग फोर्जिंग एवं बेलेंस आफ प्लाट उपकरणों को बनाने के लिए एनटीपीसी व भारत फोर्ज ने बीएफ-एनटीपीसी एनर्जी सिस्टम लिमिटेड नामक संयुक्त उद्यम बनाया। 2011 - 57 वीं LPGA चैम्पियनशिप यानी त्सेंग ने जीता। 2015 - सऊदी अरब आत्मघाती हमलावर द्वारा कुवैत सिटी स्थित सबसे बड़ी शिया मस्जिद में फिदायीन हमला हुआ , जिसमें 27 लोग मारे गए और 270 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। 2019 - विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में ट्रस्टों को इकाई स्थापित करने की अनुमति देने संबंधी एसईजेड कानून में संशोधन के विधेयक को लोकसभा ने पारित किया। 2019 - अमेरिकी विदेश मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मामलों के राजदूत सैम ब्राउनबैक को महात्मा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2020 - भारतीय नौसेना के बेडे़ में स्वदेश निर्मित उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम मारीच को शामिल किया गया। 2021 - ड्रग्स के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर श्री थावरचंद गहलोत ने नशा मुक्त भारत अभियान पर वेबसाइट का शुभारंभ किया व केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मेगा क्विंटल क्षमता वाले बीज प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन किया। 2022 - बेलगावी (कर्नाटक) में एक मालवाहक वाहन के नाले में गिरने से 9 मजदूरों की मौत हुई व 8 अन्य घायल हुए। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान म्यूनिख में अर्जेंटीना के राष्ट्रपति महामहिम श्री अलबर्टो फर्नांडीज से भेंट की। 2022 - प्रधानमंत्री ने जर्मनी के म्यूनिख में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया। 2023 - इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक ( 26 से 28 जून ) ऋषिकेश में प्रारम्भ हुई। 2023 - ओडिशा के गंजम में भीषण बस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत व सात घायल हुए। 2023 - उरुग्वे के राष्ट्रपति लुइस लैकेले पोउ ने मोंटेवीडियो के लिए जल आपातकाल की घोषणा की। 2024 - ओम बिरला को फिर लोकसभा स्पीकर चुना गया , 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में स्पीकर का चयन किया गया। 2024 - राहुल गांधी लोकसभा में नेता विपक्ष बने , इस पोजिशन पर रहने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य। 2024 - NATO ने डच प्रधानमंत्री मार्क रूटे को नया प्रमुख नियुक्त किया। 26 जून को जन्मे व्यक्ति 1838 - बंकिमचंद्र चटर्जी - बंगाली उपन्यासकार (27 जून का भी वर्णन मिलता है )। 1873 - गौहर जान - भारतीय गायिका और नर्तकी थीं। 1874 - छत्रपति शाहू महाराज का जन्म हुआ। 1888 - बाल गन्धर्व - मराठी रंगमंच के महान् नायक और प्रसिद्ध गायक। 1918 - सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे - परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक। 1931 - एस. मल्लिकार्जुनैय्या - भाजपा नेता व चौदहवीं लोकसभा के सदस्य। 1942 - योगेन्द्र नारायण - केंद्र सरकार में रक्षा सचिव और राज्य सभा में महासचिव पद पर रहे । 1943 - गोवर्धन मेहता - भारतीय शोधकर्ता और रासायनिक वैज्ञानिक। 1967 - तरुण सागर - जैन धर्म के भारतीय दिगम्बर पंथ के प्रसिद्ध मुनि थे। 1968 - गुडनी जोहान्सन -एक इतिहासकार । 1969 - धर्मेन्द्र प्रधान - भाजपा के राजनीतिज्ञ । 1985 - अर्जुन कपूर हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। 1992 - मनप्रीत सिंह - भारतीय फील्ड हॉकी खिलाड़ी। 26 जून को हुए निधन 1947 - कनाडा की ग्यारहवें प्रधानमंत्री रिचर्ड बेनेट का निधन हुआ। 1961 - गोविंद शास्त्री दुगवेकर - प्रसिद्ध साहित्यकार। 2001 - गोपाल रामानुजम - ओडिशा के पूर्व राज्यपाल। 2004 - यश जौहर - भारतीय फ़िल्म निर्माता। 2022 - गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री श्री भागूभाई पटेल का निधन हुआ। 2022 - प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और पत्रकार, चौवलूर कृष्णनकुट्टी (86) का निधन हुआ। 2022 - सार्वजनिक क्षेत्र की कई इकाइयों का कायाकल्प करने वाले वेंकटरमण कृष्णमूर्ति (97) का निधन हुआ। 2023 - भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हरद्वार दुबे (74) का निधन हुआ। 2023 - कॉमेडियन देवराज पटेल (21) की सड़क हादसे में मौत हुई। 2023 - डेविड ओगिल्वी, 13वें अर्ल ऑफ एयरली (97) का निधन हुआ। 2023 - स्कॉटिश पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी और मैनेजर जेम्स क्रेग ब्राउन (82) का निधन हुआ। 2024 - स्कॉटिश अभिनेत्री पैट हेवुड (92) का निधन हुआ। 26 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव वार्षिक मेला बाबा चमलियाल तीर्थस्थल (जम्मू संभाग के जिला सांबा के रामगढ़ में)। प. श्रीमत् वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे) स्वामी महाराज पुण्यतिथि (आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा)। महाकवि कालिदास दिवस (पंचांगभेद / मतभेद , कन्फर्म नहीं)। राजर्षि छत्रपति श्री शाहू महाराज जयंती। सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे जयन्ती (परमवीर चक्र सम्मानित)। श्री बंकिमचंद्र चटर्जी जयन्ती (कन्फर्म नहीं , कुछ जगह 27 जून का भी वर्णन है)। अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध (नशा मुक्ति/निवारण / अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक) दिवस। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस अथवा विश्व ड्रग दिवस। अंतरराष्ट्रीय देह व्यापार विरोधी दिवस। मेडागास्कर राष्ट्रीय / स्वतंत्रता दिवस। अत्याचारों / यातनाओं के पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day in Support of Victims of Torture)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।