Indian Politics

Prime Minister Narendra Modi and Congress leaders pay tribute to former PM Rajiv Gandhi at Veer Bhumi in Delhi.
पूर्व पीएम राजीव गांधी को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया। राजधानी दिल्ली स्थित ‘वीर भूमि’ में आयोजित प्रार्थना सभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने किया नमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।” प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर भूमि पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने साझा किया भावुक संदेश राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजीव गांधी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रहा। 1984 में बने थे प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले कई कदम उठाए गए। 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Students in a West Bengal madrasa singing Vande Mataram during morning assembly after new government directive.
बंगाल के मदरसों में अब अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पहले स्कूलों के लिए जारी हुआ था आदेश इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा था कि सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाने से छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे व्यापक रूप से गाने की बात कही गई थी। नए आदेश में राज्य गीत को लेकर स्थिति साफ नहीं बंगाल में पहले से स्कूलों की सुबह की सभा में ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गीत गाना अनिवार्य था। हालांकि नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को अब भी जारी रखा जाएगा या नहीं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है और अब ‘वंदे मातरम्’ जोड़े जाने के बाद अगर राज्य गीत भी जारी रहता है तो प्रार्थना सभा का समय काफी बढ़ जाएगा। स्कूलों ने शुरू किया पालन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल निर्देश केवल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी किया गया है। विभाग ने साफ किया कि स्कूल प्रार्थना में राष्ट्रगीत को शामिल करना जरूरी होगा, जबकि राज्य गीत पर कोई अलग निर्देश नहीं दिया गया है। कई स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
Political leaders in Kerala debate over full rendition of Vande Mataram during oath-taking ceremony
केरल में ‘वंदे मातरम’ विवाद: शपथ ग्रहण समारोह में पूरा गीत गाने पर लेफ्ट और बीजेपी आमने-सामने

Kerala में कांग्रेस नेतृत्व वाली UDF सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर वामपंथी दलों और Bharatiya Janata Party (बीजेपी) के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। वामपंथी दलों ने समारोह में राष्ट्रीय गीत के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताते हुए इसे भारत के बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ बताया है। वहीं बीजेपी ने लेफ्ट पार्टियों पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। CPIM और CPI ने क्यों जताई आपत्ति? Communist Party of India (Marxist) (CPIM) ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। बाद में Communist Party of India (CPI) ने भी इसका समर्थन किया। CPI नेता Binoy Viswam ने कहा कि इतिहास में ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियां इसलिए हटाई गई थीं क्योंकि वे एक विशेष धार्मिक सोच को बढ़ावा देती थीं। उन्होंने कहा कि Jawaharlal Nehru और Mahatma Gandhi के धर्मनिरपेक्ष भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप केवल सीमित हिस्से को ही स्वीकार किया गया था। CPIM राज्य सचिवालय ने भी कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्य समिति ने माना था कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन बहुलवादी समाज के लिए उपयुक्त नहीं है। बाद में संविधान सभा ने 1950 में स्पष्ट किया था कि गीत की केवल पहली आठ पंक्तियों को ही आधिकारिक राष्ट्रीय गीत माना जाएगा। पार्टी का कहना है कि गीत के कुछ हिस्सों में धार्मिक संदर्भ हैं, इसलिए सरकारी कार्यक्रमों में पूरा गीत गाना भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा के खिलाफ माना जा सकता है। केरल सरकार ने क्या कहा? विवाद बढ़ने के बाद केरल सरकार के सूत्रों ने खुद को इससे अलग करते हुए कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी लोक भवन के पास थी और सरकार की इसमें सीधी भूमिका नहीं थी। बीजेपी का पलटवार केरल बीजेपी अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने वामपंथी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि मार्क्सवाद एक आयातित विचारधारा है जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी दल जमात-ए-इस्लामी और SDPI जैसी कट्टरपंथी ताकतों को खुश करने के लिए राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राजनीतिक अस्तित्व के लिए भारत का अपमान करना धर्मनिरपेक्षता नहीं है। यह खतरनाक तुष्टीकरण की राजनीति और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है।” बंगाल का उदाहरण भी दिया CPIM ने यह भी सवाल उठाया कि West Bengal में बीजेपी नेता Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया गया था, तो फिर केरल में ऐसा क्यों किया गया। वाम दलों का कहना है कि सरकारों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो देश की बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को कमजोर कर सकते हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court in lawyer’s robe for post-poll violence case hearing
वकील के कोट में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, चुनाव बाद हिंसा मामले में रखेंगी पक्ष

चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी। सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।  

surbhi मई 14, 2026 0
Congress leaders meet in Delhi as suspense continues over Kerala chief minister candidate
केरल में मुख्यमंत्री चेहरे पर सस्पेंस बरकरार, कांग्रेस ने फिर टाला ऐलान

कांग्रेस अब भी नहीं तय कर पाई मुख्यमंत्री का नाम Kerala में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा एक बार फिर टाल दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। हालांकि बुधवार को संकेत मिले थे कि दिन में ही फैसला सामने आ सकता है, लेकिन देर रात तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। दिल्ली से होगा अंतिम फैसला केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा था कि मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और अंतिम घोषणा दिल्ली से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत बनी देरी की वजह? रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को Sonia Gandhi का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रूटीन हेल्थ चेकअप हुआ था। माना जा रहा है कि इसी कारण निर्णय प्रक्रिया में देरी हुई। बाद में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी कि सोनिया गांधी जांच के बाद घर लौट चुकी हैं। तीन नेताओं के बीच फंसा मामला मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन बड़े नेताओं के बीच मानी जा रही है – KC Venugopal, VD Satheesan और Ramesh Chennithala। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान लगातार इन नेताओं के साथ बैठकें कर रहा है ताकि अंतिम नाम पर सहमति बन सके। राहुल गांधी और खड़गे की अहम बैठक Rahul Gandhi ने मंगलवार को इन तीनों नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की। इस बैठक को मुख्यमंत्री चयन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी भी चर्चा में सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। केरल के कई स्थानीय नेता वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थन में बताए जा रहे हैं, जबकि केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अधिकांश कांग्रेस विधायकों ने वेणुगोपाल के नाम का समर्थन किया है। IUML का झुकाव सतीशन की ओर यूडीएफ की सहयोगी पार्टी Indian Union Muslim League ने कथित तौर पर वीडी सतीशन का समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि सतीशन को जनता के बीच व्यापक समर्थन हासिल है। विधानसभा चुनाव में UDF की बड़ी जीत हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। इसके साथ ही Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार का दशकभर का शासन खत्म हो गया।  

surbhi मई 14, 2026 0
N Rangaswamy taking oath as Puducherry Chief Minister during swearing-in ceremony with NDA leaders
एन रंगास्वामी ने 5वीं बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, बोले- “सिंगापुर जैसा विकास करेंगे”

N. Rangaswamy ने बुधवार को पांचवीं बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए गठबंधन की सरकार बनी है। All India N.R. Congress (AINRC) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता एन रंगास्वामी के साथ मल्लाडी कृष्णा राव और भाजपा नेता A. Namassivayam ने भी मंत्री पद की शपथ ली। उपराज्यपाल के कैलाशनाथन ने दिलाई शपथ शपथ ग्रहण समारोह में K. Kailashnathan ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इनमें Nitin Navin और B. L. Santhosh शामिल थे। “पुडुचेरी को सिंगापुर जैसा बनाएंगे” शपथ लेने के बाद एन रंगास्वामी ने कहा कि उनकी सरकार पुडुचेरी को विकास के नए मॉडल के रूप में आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि पुडुचेरी का विकास “सिंगापुर की तरह” किया जाए। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, निवेश और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लगातार मजबूत हो रहा एनडीए National Democratic Alliance (NDA) ने पुडुचेरी में एक बार फिर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एन रंगास्वामी की लोकप्रियता और भाजपा के समर्थन ने गठबंधन को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एन रंगास्वामी को पुडुचेरी की राजनीति में बेहद अनुभवी नेता माना जाता है और यह उनका पांचवां कार्यकाल होगा।  

surbhi मई 13, 2026 0
Sonia Gandhi arriving at Medanta Hospital in Gurugram for treatment amid health concerns
सोनिया गांधी फिर अस्पताल में भर्ती, गुरुग्राम के मेदांता में चल रहा इलाज

Sonia Gandhi की तबीयत एक बार फिर खराब हो गई है। उन्हें गुरुग्राम स्थित Medanta - The Medicity में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी आंख से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल पहुंची हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें कुछ समय बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी अस्पताल पहुंचे अस्पताल में भर्ती सोनिया गांधी के साथ उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi तथा बेटी Priyanka Gandhi Vadra भी मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेता अस्पताल में उनके साथ हैं और डिस्चार्ज के बाद उन्हें घर लेकर जाएंगे। पहले से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। उन्हें पेट, फेफड़ों और सांस से जुड़ी परेशानियां रहती हैं। उनका इलाज समय-समय पर Sir Ganga Ram Hospital, Indira Gandhi Medical College and Hospital और मेदांता अस्पताल में चलता रहा है। कांग्रेस की अहम रणनीतिक नेता हैं सोनिया गांधी सोनिया गांधी लंबे समय तक Indian National Congress की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं। उन्होंने पार्टी संगठन और रणनीति तय करने में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पत्नी हैं और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा की मां हैं। 1997 में राजनीति में की थी एंट्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में पार्टी नेताओं के लगातार आग्रह पर उन्होंने 1997 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। 1998 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला और लगातार 22 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व किया। इसके बाद 2019 में वह दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और तीन साल तक इस पद पर रहीं। केरल में सरकार गठन के बीच बढ़ी चिंता सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने की खबर ऐसे समय आई है जब Kerala में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Diljit Dosanjh
क्या दिलजीत दोसांझ बनेंगे पंजाब की राजनीति का नया सितारा?

चंडीगढ़, एजेंसियां। दिलजीत दोसांझ को लेकर पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। दक्षिण भारत के सुपरस्टार विजय के तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय होने और मुख्यमंत्री बनने के बाद अब पंजाब में भी ऐसा चेहरा तलाशने की बहस तेज हो गई है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों के समूह Jago Punjab Manch ने दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की भावुक अपील की है।   दिलजीत ने विनम्रता से ठुकराया प्रस्ताव सोशल मीडिया पर जब एक अखबार ने सवाल पूछा कि क्या दिलजीत पंजाब का नया राजनीतिक चेहरा बन सकते हैं, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त लेकिन साफ जवाब दिया। दिलजीत ने लिखा, “कभी नहीं... मेरा काम मनोरंजन करना है... मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” उनके इस जवाब ने साफ कर दिया कि फिलहाल राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है।   क्यों उठी दिलजीत को राजनीति में लाने की मांग? ‘जागो पंजाब मंच’ के प्रमुख और पूर्व आईएएस अधिकारी S. S. Boparai ने कहा कि पंजाब इस समय कर्ज, नशे और राजनीतिक नेतृत्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दिलजीत की बेदाग छवि, युवाओं में लोकप्रियता और देशभक्ति को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। बोपाराई के अनुसार, कनाडा में तिरंगा लहराकर दिलजीत ने अपने साहसी रुख का परिचय दिया।   विवादों और समर्थन के बीच दिलजीत दिलजीत हाल के वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का खुलकर समर्थन किया था। वहीं, उन्हें खालिस्तानी समर्थक संगठनों से धमकियां भी मिलीं। इस बीच भाजपा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें भारत का “सांस्कृतिक राजदूत” बताया। प्रधानमंत्री Narendra Modi से उनकी मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी।   कलाकारों का पंजाब राजनीति में मजबूत रिकॉर्ड पंजाब में कलाकारों का राजनीति में सफल रिकॉर्ड रहा है। Bhagwant Mann, Vinod Khanna, Hans Raj Hans और Sunny Deol जैसे कई नाम राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। हालांकि फिलहाल दिलजीत ने राजनीति से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है। 

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
Dhurandhar Controversy
धुरंधर को प्रोपेगेंडा बताने वाले पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद, बोलीं- पाकिस्तान की नागरिकता ले लो

मुंबई, एजेंसियां। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर की तारीफ करते हुए एक पोस्ट की। साथ ही एक यूजर को जवाब देते हुए कहा कि फिल्म में मुसलमानों को नहीं, बल्कि पाकिस्तानियों को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है। दरअसल, शमा ने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि उन्होंने हाल ही में फिल्म धुरंधर देखी और उन्हें इसका डायरेक्शन, स्क्रिप्ट और एक्टिंग काफी पसंद आई। उन्होंने एक्टर रणवीर सिंह की एक्टिंग की तारीफ की और डायरेक्टर आदित्य धर की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म में पुराने हिंदी गानों को सीन्स से जोड़ने का तरीका शानदार था। यूजर ने फिल्म को बताया प्रोपेगेंडा मूवी शमा की पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने कहा, ‘तुम यह कैसे पोस्ट कर सकती हो? इस प्रोपेगेंडा फिल्म में मुसलमानों को गलत तरीके से दिखाया गया है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए।’ इस पर शमा ने जवाब देते हुए कहा, ‘इस फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया गया, बल्कि पाकिस्तानियों को गलत दिखाया गया है। दोनों को एक जैसा बताना गलत है। तुम्हारे जैसे लोग भारत में मुसलमानों की इमेज खराब करते हैं। अगर तुम्हें भारत से इतनी दिक्कत है, तो तुम पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो।’   धुरंधर ने 1,307 करोड़ रुपए कमाए थे धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को ग्लोबली रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन नजर आए थे। फिल्म आदित्य धर ने डायरेक्ट की थी। सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज हुआ था धुरंधर का दूसरा पार्ट ग्लोबली 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुआ था। फिल्म की अब तक की कुल दुनिया भर में कमाई 1,792 करोड़ रुपए हो चुकी है। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 1,141 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 1,365 करोड़ रुपए तक हो गया है। फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अब तक 426 करोड़ रुपए की कमाई की है।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
West Bengal political transition after assembly dissolution and dismissal of Mamata Banerjee government
बंगाल विधानसभा भंग, ममता बनर्जी समेत पूरा मंत्रिमंडल बर्खास्त

West Bengal में सत्ता परिवर्तन के बीच बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया है. राज्यपाल Ravi Narayan ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया. इसके साथ ही निवर्तमान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee समेत पूरी मंत्री परिषद को भी बर्खास्त कर दिया गया है. राजभवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया. मुख्य सचिव दुष्मंत नारियाला ने भी इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया. दो दिन तक राज्यपाल संभालेंगे कार्यभार सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक अगले दो दिनों के लिए राज्य का प्रशासनिक कार्यभार राज्यपाल के अधीन रहेगा. इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है. अब नवनिर्वाचित विधायकों के साथ 18वीं विधानसभा के गठन का रास्ता साफ हो गया है. ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी सरकार भंग होने से पहले ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव “हारी नहीं”, बल्कि “100 सीटें छीनी गई हैं.” राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी नतीजों और सत्ता परिवर्तन पर उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस्तीफे को लेकर भी सहज नहीं थीं और पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही थी. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा शपथ ग्रहण नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को Brigade Parade Ground में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है. शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के शामिल होने की संभावना है. इसके अलावा भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रह सकते हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजाम कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. शपथ ग्रहण समारोह की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी और Kolkata Police के पास होगी, जबकि ब्रिगेड मैदान के बाहर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी नजर नई सरकार के गठन और उसके शुरुआती फैसलों पर टिकी हुई है.  

surbhi मई 9, 2026 0
kishtwar earthquake
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भूकंप के झटके, लोग घरों से बाहर निकले

श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 दर्ज की गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। भूकंप सुबह करीब 9 बजकर 57 मिनट पर आया। जैसे ही धरती हिली, लोग डर के कारण अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में लोग खुले स्थानों पर जमा हो गए। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने और शांति बनाए रखने की अपील की है।   10 किलोमीटर नीचे था भूकंप का केंद्र राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। इसका केंद्र 33.289 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.739 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि किश्तवाड़ और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए यहां लगातार निगरानी जरूरी है।   पहले भी महसूस हो चुके हैं झटके बीते कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में कई बार हल्के भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इससे पहले फरवरी में लेह में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था। वहीं मार्च में पुंछ और अप्रैल में श्रीनगर तथा आसपास के इलाकों में भी धरती हिली थी। भूकंप विज्ञान केंद्र ने कहा है कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में लोगों को आपदा से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। प्रशासन ने फिलहाल स्थिति सामान्य बताई है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रखी जा रही है।

Anjali Kumari मई 8, 2026 0
India-Bangladesh border discussion intensifies amid illegal infiltration crackdown and diplomatic tensions over deportation plans
घुसपैठियों पर भारत का बड़ा प्लान, बांग्लादेश को दिया साफ संदेश

West Bengal में राजनीतिक बदलाव के बाद अब अवैध घुसपैठ का मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है. नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही भारत सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज की जाएगी. इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा रही है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद उन्हें वापस भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए Bangladesh का सहयोग जरूरी है. उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश की ओर से 2,860 से अधिक नागरिकता सत्यापन आवेदन अब भी लंबित हैं. इनमें कई मामले पांच साल से ज्यादा समय से अटके हुए हैं. भारत ने उम्मीद जताई है कि ढाका जल्द इन आवेदनों का निपटारा करेगा ताकि निर्वासन प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके. भाजपा के चुनावी वादे के बाद बढ़ी चर्चा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कई रैलियों में कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो “घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर किया जाएगा.” अब भाजपा सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर कार्रवाई की संभावना को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. बांग्लादेश ने जताई चिंता इस बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने आशंका जताई थी कि भारत बड़ी संख्या में लोगों को बांग्लादेश भेज सकता है. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो ढाका भी इस पर सख्त कदम उठाएगा. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे. तीस्ता जल संधि पर भी बढ़ी उम्मीद भाजपा की जीत के बाद एक और बड़ा मुद्दा चर्चा में आ गया है – Teesta Water Treaty. बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी के नेताओं का मानना है कि पहले राज्य सरकार के विरोध के कारण यह समझौता आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब नई राजनीतिक परिस्थितियों में इस पर प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है. बीएनपी के सूचना सचिव Azizul Bari Helal ने कहा कि नई सरकार केंद्र के साथ बेहतर तालमेल में काम कर सकती है, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच लंबित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है. क्या होगा आगे? विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में: अवैध प्रवासियों की पहचान अभियान तेज हो सकता है सीमा प्रबंधन और नागरिकता सत्यापन पर फोकस बढ़ेगा भारत-बांग्लादेश संबंधों में नए कूटनीतिक समीकरण बन सकते हैं तीस्ता जल समझौते जैसे लंबित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है नई सरकार के गठन के साथ अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य मिलकर इस संवेदनशील मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ते हैं.  

surbhi मई 8, 2026 0
Rahul Gandhi addressing media accusing BJP of vote theft and questioning election fairness
राहुल गांधी का दावा- निष्पक्ष चुनाव हों तो BJP 140 सीटों से आगे नहीं बढ़ेगी, ‘वोट चोरी’ का आरोप

नई दिल्ली: राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर अभी निष्पक्ष तरीके से लोकसभा चुनाव कराए जाएं, तो BJP 140 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी। उनके इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता’ राहुल गांधी ने दावा किया कि BJP के मौजूदा 240 सांसदों में से “हर छठा सांसद” कथित रूप से वोट चोरी के जरिए जीतकर आया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि BJP की अपनी भाषा में ऐसे सांसदों को “घुसपैठिया” कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यही तर्क लागू किया जाए, तो हरियाणा की पूरी सरकार को भी “घुसपैठिया” कहा जा सकता है। ‘एक्स’ पर पोस्ट कर साधा निशाना राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में हेरफेर कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थाओं को “जेब में रखने” और चुनावी प्रक्रिया को “तोड़-मरोड़” कर परिणाम प्रभावित किए जा रहे हैं। असम और बंगाल के नतीजों के बाद बयान राहुल गांधी का यह बयान असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में BJP की जीत के बाद आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में भी चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। राजनीतिक माहौल गरम राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। BJP की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं।  

surbhi मई 6, 2026 0
Shashi Tharoor speaking to media after election results, highlighting Congress introspection and strategy concerns
चुनावी नतीजों पर शशि थरूर का बड़ा बयान– कांग्रेस को करना होगा गहरा आत्मचिंतन

Assembly Election Results: चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने पार्टी के प्रदर्शन पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा हालात में कांग्रेस को गंभीर और ईमानदार आत्मचिंतन की जरूरत है, ताकि भविष्य की रणनीति को मजबूत बनाया जा सके। “गंभीर आत्ममंथन के बिना आगे बढ़ना मुश्किल” न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में शशि थरूर ने कहा, “मुझे लगता है कि पार्टी को बहुत गंभीर आत्मचिंतन करना होगा, इसमें कोई शक नहीं है। हमने पहले भी यह बात कही है, लेकिन अब इसे और ठोस तरीके से लागू करने की जरूरत है।” उन्होंने इशारों में यह भी माना कि कुछ राज्यों में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक स्तर पर कमियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। केरल मॉडल से सीखने की सलाह थरूर ने खास तौर पर केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पार्टी ने बेहतर रणनीति, मजबूत संगठन और सही गठबंधन के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 102 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति बनाई है। थरूर का कहना है कि अगर केरल में यह मॉडल सफल हो सकता है, तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। अन्य राज्यों में कमजोर प्रदर्शन चिंता का कारण जहां एक ओर केरल में कांग्रेस को सफलता मिली, वहीं अन्य राज्यों में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है। इसके अलावा तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। रणनीति और नेतृत्व पर उठ रहे सवाल इन चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर भी रणनीति, नेतृत्व और जमीनी संगठन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी को न सिर्फ अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करने और मतदाताओं से जुड़ने के नए तरीके अपनाने होंगे। आगे की राह क्या? शशि थरूर के इस बयान को पार्टी के अंदर सुधार की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह किन मुद्दों, नेतृत्व और रणनीतियों के जरिए जनता का विश्वास दोबारा हासिल कर सकती है। कुल मिलाकर, इन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के सामने चुनौती भी रखी है और एक अवसर भी– खुद को नए सिरे से तैयार करने का।  

surbhi मई 5, 2026 0
BJP supporters celebrating Assam election victory as Congress leaders react to major defeats
असम में कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे हारे, भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत

Assam Election Results: असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारा झटका लगा है। इस बार पार्टी के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हार गए, जिससे राज्य में कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। गौरव गोगोई की हार ने चौंकाया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता तरुण गोगोई 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों के अंतर से हराया। देबब्रत सैकिया भी नहीं बचा पाए गढ़ विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया भी अपनी पारंपरिक नाजिरा सीट नहीं बचा सके। उनके पिता हितेश्वर सैकिया दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। देबब्रत सैकिया को भाजपा के मयूर बोरगोहेन ने 46,000 से अधिक वोटों से हराया। दिगंता बर्मन की बड़ी हार एक और पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र दिगंता बर्मन को भी हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता भूमिधर बर्मन कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके थे। बरखेत्री सीट पर भाजपा के नारायण डेका ने उन्हें 84,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया। NDA की प्रचंड जीत, भाजपा का दमदार प्रदर्शन असम में सत्तारूढ़ NDA गठबंधन ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में NDA ने 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 82 सीटें जीतकर पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया। वहीं सहयोगी दलों बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) को 10-10 सीटें मिलीं। कांग्रेस के लिए बड़ा संदेश इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि असम की राजनीति में वंशवाद का असर कम होता जा रहा है और मतदाता प्रदर्शन के आधार पर फैसले ले रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह परिणाम भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है।  

surbhi मई 5, 2026 0
RSS volunteers conducting door-to-door meetings in West Bengal ahead of assembly elections
बंगाल चुनाव: RSS की ‘डोर-टू-डोर’ रणनीति, 1.75 लाख बैठकों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश

पश्चिम बंगाल: West Bengal विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी सरगर्मी चरम पर है। इस बीच Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) भी अपनी खास रणनीति के तहत मैदान में सक्रिय नजर आ रहा है। संघ ने राज्य के 250 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख छोटी-छोटी बैठकें कर मतदाताओं तक पहुंच बनाने का दावा किया है। ‘लोक मत परिष्कार’ के जरिए जनसंपर्क संघ सीधे चुनाव प्रचार नहीं करता, लेकिन ‘लोक मत परिष्कार’ अभियान के तहत उसकी टीमें घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं। चार-पांच स्वयंसेवकों की छोटी टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए लोगों से मिल रही हैं और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। क्या संदेश दे रहे स्वयंसेवक? RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जनसंपर्क के दौरान लोगों से: बिना डर और दबाव के वोट डालने की अपील NOTA पर वोट न देने की सलाह 100% मतदान सुनिश्चित करने का आग्रह साथ ही पर्चों के जरिए राज्य के मुद्दों पर जानकारी दी जा रही है। किन मुद्दों पर फोकस? जनसंपर्क अभियान में कुछ प्रमुख मुद्दों को खास तौर पर उठाया जा रहा है: महिला सुरक्षा भ्रष्टाचार और घोटाले (जैसे शिक्षक भर्ती विवाद) घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन सरकारी नीतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल BJP को अप्रत्यक्ष समर्थन? हालांकि RSS खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है, लेकिन उसकी यह गतिविधि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। राज्य में मुख्य मुकाबला Bharatiya Janata Party (BJP) और All India Trinamool Congress (TMC) के बीच है। प्रचार थमने से पहले आखिरी जोर 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले आज शाम प्रचार थम जाएगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने मतदाताओं तक आखिरी समय में अधिकतम पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Election officials seizing cash and gold in Tamil Nadu amid poll code violation controversy
Tamil Nadu Election: ₹1,200 करोड़ से ज्यादा कैश-गोल्ड जब्त, पीएम मोदी पर MCC उल्लंघन के आरोप; 700 नागरिकों ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में बड़ी चुनावी कार्रवाई सामने आई है। चुनाव आयोग की निगरानी में अब तक ₹1,200 करोड़ से अधिक की नकदी, सोना-चांदी, फ्रीबीज, शराब और ड्रग्स जब्त किए गए हैं। जब्ती का बड़ा आंकड़ा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार: ₹169.85 करोड़ कैश ₹650.87 करोड़ के सोना-चांदी इसके अलावा भारी मात्रा में फ्रीबीज, शराब और नशीले पदार्थ यह कार्रवाई चुनाव में पैसे और प्रलोभनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए की जा रही है। पीएम मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप इसी बीच नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल के संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 700 से अधिक नागरिकों–जिनमें पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, एक्टिविस्ट और पत्रकार शामिल हैं–ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इसे आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताया है। शिकायत में कहा गया है कि यह संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जो चुनाव के दौरान पक्षपातपूर्ण प्रचार जैसा प्रतीत होता है। विपक्ष के हमले तेज ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी चुनाव प्रचार में सरकारी संसाधनों–रेल और विमान–का दुरुपयोग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने तमिलनाडु में कहा कि भाजपा “रिमोट कंट्रोल” वाली सरकार बनाना चाहती है, जैसा उन्होंने बिहार का उदाहरण देकर आरोप लगाया। मद्रास हाई कोर्ट का नोटिस इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने TVK प्रमुख विजय के खिलाफ याचिका पर चुनाव आयोग और आयकर विभाग को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप है कि अलग-अलग हलफनामों में उनकी संपत्ति के आंकड़ों में करीब ₹100 करोड़ का अंतर है। चुनावी माहौल और सख्त तमिलनाडु में चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, चुनाव आयोग की सख्ती और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दोनों तेज होते जा रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Mamata Banerjee reacting to PM Modi’s jhalmuri video, sparking political controversy in West Bengal
‘10 रुपये का नोट जेब में? यह नौटंकी है’– ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर तंज, ‘झालमुरी’ वीडियो पर सियासी घमासान

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सियासत अब ‘झालमुरी’ वीडियो पर गरमा गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोला है और इसे “नौटंकी” करार दिया है। क्या है पूरा मामला? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे झाड़ग्राम की एक साधारण दुकान पर रुककर मशहूर बंगाली स्नैक झालमुरी खरीदते और खाते नजर आए। वीडियो में पीएम दुकानदार को पैसे देने पर जोर देते दिखे, जबकि दुकानदार मना करता रहा। ममता का हमला–‘कैमरे पहले से तैयार थे’ इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि यह “अचानक” कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री बिना कार्यक्रम के अचानक रुके, तो वहां कैमरे पहले से कैसे मौजूद थे? यह सब पहले से प्लान किया गया था।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के पॉकेट में 10 रुपये का नोट! क्या कोई इस पर विश्वास करेगा? यह सिर्फ नौटंकी है।” खान-पान की राजनीति पर भी निशाना ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी पर लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है और किसी पर भी प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक हमले का रूप ले रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Tej Pratap Yadav speaking to media, criticizing Congress leadership and backing Priyanka Gandhi
कांग्रेस नेतृत्व पर सियासी घमासान: तेज प्रताप यादव बोले–‘राहुल गांधी से नहीं चल पाएगी पार्टी, प्रियंका गांधी को मिले कमान’

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस को बेहतर तरीके से सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। ‘प्रियंका गांधी ही संभाल सकती हैं पार्टी’ तेज प्रताप यादव ने कहा, “कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जैसी हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है।” उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यात्रा करने से या बुलेट पर बैठने से कुछ नहीं होता, असली सवाल यह है कि उनका मकसद क्या है?” राहुल के बयान पर पलटवार तेज प्रताप का यह बयान राहुल गांधी द्वारा नीतीश कुमार को “समझौता किया हुआ नेता” कहे जाने के बाद आया है। बिहार की राजनीति में हालिया बदलाव–जहां नीतीश कुमार के अलग होने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने–को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। पहले भी उठ चुके हैं सवाल राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद ने भी पार्टी के अंदर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में फैसले सीमित दायरे में लिए जाते हैं और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका कम हो गई है। बढ़ती राजनीतिक बहस तेज प्रताप यादव और अन्य नेताओं के बयानों से यह साफ है कि कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बहस अब पार्टी के बाहर भी तेज हो गई है। प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग अब विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से भी उठने लगी है, जिससे कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियां और गहरी होती दिख रही हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Raghav Chadha speaking in Rajya Sabha after removal from deputy leader post
राज्यसभा में राघव चड्ढा का तंज: ‘हटाया गया हूं, फिर भी मौजूद हूं’–AAP नेतृत्व पर उठाए सवाल

  पार्टी से पद से हटाए जाने के बाद संसद में बोले चड्ढा नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपनी ही पार्टी पर तंज कसते हुए राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। हाल ही में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी के नेता और नए डिप्टी लीडर दोनों ही उपस्थित नहीं हैं, जबकि वह खुद “हटाए जाने के बावजूद” सदन में मौजूद हैं। संसद में क्या बोले राघव चड्ढा? राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा: “जिस पार्टी से मैं आता हूं, उसके नेता सदन में मौजूद नहीं हैं। नए डिप्टी लीडर भी मौजूद नहीं हैं। मैं हाल ही में हटाया गया डिप्टी लीडर हूं, लेकिन मैं यहां मौजूद हूं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर AAP नेतृत्व और नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल पर कटाक्ष माना जा रहा है। डिप्टी चेयरमैन को दी बधाई, रिश्ते को बताया ‘खट्टा-मीठा’ चड्ढा ने यह टिप्पणी उस दौरान की जब वे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार चुने जाने पर बधाई दे रहे थे। उन्होंने अपने और हरिवंश सिंह के रिश्ते को “खट्टा-मीठा” बताते हुए कहा कि जब वे विषय से भटकते हैं तो उन्हें डांट पड़ती है, लेकिन सही तरीके से बोलने पर उन्हें सराहना भी मिलती है। AAP में अंदरूनी खींचतान के संकेत हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया था। इस फैसले के पीछे पार्टी के अंदर मतभेदों की चर्चा भी सामने आई थी। पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना कोई गलती है? चड्ढा ने उठाए थे ये सवाल चड्ढा ने कहा था कि उन्होंने संसद में हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया, लेकिन अब उनके बोलने पर रोक लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने पूछा, “क्या जनता की आवाज उठाना अपराध है?” राजनीतिक मायने क्या हैं? राघव चड्ढा का यह बयान AAP के अंदर चल रही संभावित खींचतान को उजागर करता है। संसद में दिया गया उनका तंज आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की राजनीति को और चर्चा में ला सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Parliament protest after Women Reservation Bill fails in Lok Sabha
महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: BJP-NDA का देशव्यापी प्रदर्शन ऐलान, विपक्ष पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप

  लोकसभा में बिल गिरने के बाद भाजपा का पलटवार, कल से देशभर में आंदोलन शुरू महिला आरक्षण बिल संसद में पास न होने के बाद अब देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलते हुए देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया और गिर गया। हर जिले में प्रदर्शन की तैयारी पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP ने अपने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे देश के हर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि विपक्ष ने महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के ऐतिहासिक मौके को रोक दिया। महिला मोर्चा संभालेगा मोर्चा इस आंदोलन में BJP महिला मोर्चा की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। पार्टी की महिला नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाएंगी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, हर माध्यम से इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई गई है। चुनावी राज्यों में बनेगा बड़ा मुद्दा भाजपा इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वोटिंग में क्या हुआ था? लोकसभा में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल पारित नहीं हुआ। सरकार का दावा बनाम विपक्ष का रुख BJP और NDA का कहना है कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। वहीं, विपक्ष इसे विवादित मुद्दों से जोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गरमा सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0