Political Update

TVK support 13 MLAs
TVK को चाहिए 13 विधायकों का सहारा, फ्लोर टेस्ट पर टिकी निगाहें

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की पार्टी TVK आज विधानसभा में महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट का सामना करेगी। 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार को अपना बहुमत साबित करना है। सरकार बनने के बाद यह विजय सरकार की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है। TVK के पास फिलहाल 107 विधायक हैं। तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से विजय के इस्तीफे के बाद पार्टी की संख्या कम हुई है। ऐसे में सरकार की स्थिरता के लिए कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दलों और IUML के 13 विधायकों का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है।   सहयोगियों को साधने में जुटे मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री विजय ने गठबंधन दलों के साथ संपर्क तेज कर दिया है। उनका तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय सत्यमूर्ति भवन जाने का कार्यक्रम भी तय है, जहां कांग्रेस नेताओं के साथ रणनीतिक बैठक होगी। सूत्रों के मुताबिक, विजय वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताओं से भी अलग बैठक कर सकते हैं। इससे पहले वे DMK प्रमुख M. K. Stalin, एमडीएमके नेता वाइको और पीएमके के अंबुमणि रामदास से भी मुलाकात कर चुके हैं।   AIADMK में अंदरूनी कलह मुख्य विपक्षी दल AIADMK भी इस समय आंतरिक विवादों से जूझ रहा है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों को क्रॉस-वोटिंग के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। पार्टी प्रमुख के. पलानीस्वामी ने फ्लोर टेस्ट में सरकार के खिलाफ मतदान करने का निर्देश दिया है। हालांकि, पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और बगावती सुरों ने AIADMK की स्थिति को कमजोर कर दिया है।   राजनीतिक नजरें फ्लोर टेस्ट पर आज का फ्लोर टेस्ट तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे न केवल विजय सरकार का भविष्य तय होगा, बल्कि राज्य में विपक्ष और गठबंधन राजनीति की नई दिशा भी सामने आ सकती है।

Anjali Kumari मई 13, 2026 0
Tamil Nadu elections 2026
तमिलनाडु में विजय की लहर, TVK बोली- अपने दम पर बनाएंगे सरकार

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने भरोसा जताया है कि TVK बिना किसी बाहरी समर्थन के पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।   रुझानों में TVK बहुमत के करीब 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। शुरुआती रुझानों में TVK 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। जैसे-जैसे आंकड़े सामने आ रहे हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और कई जगह जश्न का माहौल है।   विजय के नेतृत्व पर भरोसा विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने इस प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए कहा कि उनके बेटे ने बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ने का साहस दिखाया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और विजय के नेतृत्व की सराहना की। समर्थकों के बीच विजय को अब “मुथलमैचार” (मुख्यमंत्री) के रूप में देखा जाने लगा है।   जनता ने बदलाव के लिए दिया समर्थन TVK का दावा है कि राज्य की जनता ने पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश होकर बदलाव के लिए वोट दिया है। प्रवक्ता गेराल्ड ने कहा कि लोगों ने TVK को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का चुनाव प्रचार जमीनी स्तर पर आधारित था, न कि संसाधनों के दम पर।   गठबंधन की अटकलें, पर आत्मविश्वास कायम हालांकि कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि TVK बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है तो अन्य दल समर्थन दे सकते हैं, लेकिन पार्टी ने इन अटकलों को खारिज किया है। TVK का कहना है कि वह अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम है।   बदलाव की ओर संकेत अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में तब्दील होते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां एक नई पार्टी सत्ता की कमान संभालती नजर आएगी।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Assam elections 2026
असम में BJP की मजबूत बढ़त, शुरुआती रुझानों में NDA आगे

दिसपुर, एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने मजबूत बढ़त बना ली है। 126 सीटों पर जारी गिनती में BJP 47 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 13 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके अलावा Bodoland People's Front 7, Asom Gana Parishad 6, Assam Jatiya Parishad 3 और All India United Democratic Front 1 सीट पर आगे है। इन आंकड़ों से NDA गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है।   जोरहाट सीट पर हाई-वोल्टेज मुकाबला राज्य की चर्चित सीट जोरहाट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां BJP उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी शुरुआती राउंड में आगे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस के Gaurav Gogoi पीछे हैं। हालांकि कई राउंड की गिनती अभी बाकी है, जिससे मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है।   दिग्गज नेताओं की साख दांव पर इस चुनाव में कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, जिनमें मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, गौरव गोगोई, Akhil Gogoi और Badruddin Ajmal शामिल हैं। सभी की नजरें अब अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।   उच्च मतदान ने बढ़ाई दिलचस्पी इस बार असम में करीब 85.96% मतदान दर्ज किया गया, जो काफी अधिक माना जा रहा है। खासकर महिला वोटरों की भागीदारी ने चुनाव को और रोचक बना दिया है।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Sarna Code
जातीय जनगणना में सरना कोड की मांग तेज, CM हेमंत पहुंचे दिल्ली

नई दिल्ली, एजेंसियां। झारखंड में एक बार फिर सरना धर्म कोड चर्चा में है। इस बार यह मांग जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल करने को लेकर है। जनगणना 2027 की शुरुआत होते ही सरना कोड को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मांग को लेकर दिल्ली पहुंच गये हैं,  जहां वे केंद्रीय नेताओं से मिलकर अपनी मांग रखेंगे। मुख्यमंत्री ने लिखा पत्र इससे पहले मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तथा राज्यपाल को पत्र लिखकर जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम देने का आग्रह किया है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि आदिवासी समुदाय के धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए इस पर सकारात्मक निर्णय लें। क्योंकि, देश का आदिवासी समुदाय कई सालों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए यह मांग उठा रहा है। पिछली जनगणना में 50 लाख लोगों ने सरना भरा था उन्होंने विश्वास जताया कि पीएम मोदी समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए जिस तरह तत्पर रहते हैं, उसी तरह आदिवासी समुदाय के समेकित विकास के लिए सरना धर्म कोड का प्रावधान करेंगे। साथ ही पीएम को याद दिलाया कि वर्ष 2011 की जनगणना में अलग कोड न होने के बावजूद 21 राज्यों के लगभग 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से ‘सरना’ अंकित कराया। वहीं राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि आदिवासी समाज की भावना और झारखंड की आकांक्षा के मद्देनजर द्वितीय चरण की जनगणना के प्रपत्र में सरना धर्म व अन्य सदृश्य धार्मिक व्यवस्था के लिए अलग कोड रखने का निर्देश दें। उन्होंने लिखा कि जनगणना 2027 में झारखंड सरकार पूरा सहयोग कर रही है। मैं भी स्व-गणना कर इस अभियान में भूमिका निभा रहा हूं। झारखंड ही नहीं, पूरे देश के आदिवासी लंबे समय से सरना धर्म को जनगणना में अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।  दिल्ली गये मुख्यमंत्री इसी बीच हेमंत सोरेन दिल्ली चले गए हैं। वे वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिल सकते हैं।  जानिए...सरना धर्म कोड पर अब तक क्या हुआ हेमंत सोरेन सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष ने भी इस प्रस्ताव का एक सुर में समर्थन किया। विधानसभा से पारित होने के बाद राज्य सरकार ने इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को मंजूरी के लिए भेजा। फिर मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर कई बार केंद्रीय गृह मंत्री व पीएम से मुलाकात की। इस पर जल्द फैसला लेने का आग्रह किया। विधानसभा से पास होने के बाद राज्य के आदिवासी संगठनों में उम्मीद जगी। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। देशभर के आदिवासी समुदायों को एकजुट करना शुरू किया। प्रस्ताव पास हुए पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है। लेकिन यह केंद्र के पास अभी भी लंबित है। अब चूंकि फिर से जनगणना का काम शुरू हुआ है, इसलिए मुख्यमंत्री ने इसे फिर जोर-शोर से उठाया है।   आदिवासी समाज की सामाजिक-धार्मिक पहचान की रक्षा जरूरी   राष्ट्रपति को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि संविधान के तहत आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा करना जरूरी है। वहीं राज्यपाल को लिखा कि झारखंड की पहचान आदिवासी संस्कृति व परंपराओं से जुड़ी है। वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने उठाएं और सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास करें।   इस बार डिजिटल जनगणना, आंकड़ों का संकलन बेहतर हो सकेगा   हेमंत ने लिखा कि राज्य की नीति, योजनाएं और निर्णय यहां के स्थानीय लोगों की भावना पर आधारित है। इसके केंद्र में खासकर आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता है। ऐसे में यह जरूरी लगता है। जब जनगणना के सारे काम डिजिटल हो रहे हैं, तो ऐसे में अलग धर्मकोड के आंकड़ों का संकलन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। इसलिए 2023 के आग्रह, विधानसभा के संकल्प, आदिवासी समाज की भावना और राज्य की आकांक्षा को देखते हुए फैसला लें।   मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को लिखा पत्र...   धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से ‘सरना’ अंकित कराया। वहीं राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि आदिवासी समाज की भावना और झारखंड की आकांक्षा के मद्देनजर द्वितीय चरण की जनगणना के प्रपत्र में सरना धर्म व अन्य सदृश्य धार्मिक व्यवस्था के लिए अलग कोड रखने का निर्देश दें। उन्होंने लिखा कि जनगणना 2027 में झारखंड सरकार पूरा सहयोग कर रही है। मैं भी स्व-गणना कर इस अभियान में भूमिका निभा रहा हूं। झारखंड ही नहीं, पूरे देश के आदिवासी लंबे समय से सरना धर्म को जनगणना में अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच रविवार को हेमंत सोरेन दिल्ली चले गए। वे वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिल सकते हैं।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Mamata Banerjee inspects strong room ahead of West Bengal election countin
“EVM से छेड़छाड़ हुई तो जान की बाजी लगा देंगे” – स्ट्रॉन्गरूम दौरे के बाद ममता बनर्जी की चेतावनी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तनाव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने के बाद EVM में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 3 घंटे तक किया निरीक्षण ममता बनर्जी ने सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया, जो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का वितरण केंद्र है। यहां EVM और मतपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने करीब 3 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। “जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे” स्ट्रॉन्गरूम से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कहा, “अगर कोई EVM मशीन चुराने या मतगणना में छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। मैं पूरी जिंदगी लड़ती रहूंगी।” उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन्हें शक हुआ, जिसके चलते उन्होंने खुद मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। ‘हेरफेर’ के आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षित है, लेकिन कुछ जगहों पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना चुनाव सामग्री को खोला गया, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केंद्रीय बलों पर आरोप ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका। हालांकि, उन्होंने उम्मीदवार के रूप में अपने अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी प्रतिनिधियों के साथ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काउंटिंग से पहले बढ़ा विवाद 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। एक ओर टीएमसी लगातार सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब सबकी नजरें काउंटिंग डे पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि आरोपों और दावों के बीच जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Shravan Kumar
जेडीयू विधायक दल के नेता बने श्रवण कुमार

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव सामने आया है। Shravan Kumar को जनता दल (यूनाइटेड) विधायक दल का नया नेता चुना गया है। उनके नाम पर मुहर लगने के बाद विधानसभा ने आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। यह फैसला Nitish Kumar की मंजूरी के बाद लिया गया।   नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली था पद दरअसल, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद विधायक दल के नेता का पद खाली हो गया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री आवास में जेडीयू विधायकों की बैठक हुई, जहां सर्वसम्मति से श्रवण कुमार के नाम पर सहमति बनी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी।   जिम्मेदारी से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा दिलचस्प रूप से, श्रवण कुमार की जिम्मेदारी बढ़ने से पहले ही उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। बिहार सरकार ने उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की, जिससे उनके बढ़ते राजनीतिक कद के संकेत पहले ही मिल गए थे।   निशांत कुमार ने दी बधाई इस मौके पर निशांत कुमार भी जेडीयू कार्यालय पहुंचे और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने श्रवण कुमार को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए इसे पार्टी के लिए सकारात्मक कदम बताया।   2030 तक 200 सीटों का लक्ष्य बैठक में पार्टी ने भविष्य की रणनीति भी तय की। जेडीयू ने 2030 तक 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। नीतीश कुमार ने कहा कि वे पूरे बिहार का दौरा करेंगे और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करेंगे।   तीन अहम प्रस्ताव हुए पारित बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें दो डिप्टी सीएम बनाए जाने का स्वागत, विधायक दल के नेता के चयन के लिए नीतीश कुमार को अधिकृत करना और उनके 20 साल के कार्यकाल की सराहना शामिल है।   बदलते सियासी समीकरण के संकेत श्रवण कुमार की ताजपोशी को जेडीयू में नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर बिहार की राजनीति में साफ दिखाई दे सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 21, 2026 0
Sharad Pawar Health
शरद पवार की सेहत बिगड़ी, बारामती दौरा टला

मुंबई, एजेंसियां। एनसीपी प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। 85 वर्षीय पवार को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।   रूटीन जांच के लिए अस्पताल में भर्ती जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों से तबीयत में हल्की गिरावट महसूस होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यहां उनके रूटीन चेकअप के साथ कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट किए जा रहे हैं। डॉक्टर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और किसी तरह की गंभीर समस्या की पुष्टि नहीं हुई है।   पहले भी हो चुके हैं स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बताया जा रहा है कि इसी साल फरवरी में भी शरद पवार को सीने में संक्रमण और डिहाइड्रेशन की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। हालांकि, स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्होंने सक्रिय राजनीति जारी रखी और हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ भी ली।   बारामती दौरा रद्द, उपचुनाव पर असर पवार की बेटी और सांसद Supriya Sule ने जानकारी दी कि मेडिकल टेस्ट के चलते उनका बारामती दौरा रद्द कर दिया गया है। यह दौरा आगामी उपचुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा था।   समर्थकों से अफवाहों से बचने की अपील पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पवार की स्थिति चिंताजनक नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

Anjali Kumari अप्रैल 21, 2026 0
Raghav Chadha
राघव चड्ढा को मिल सकती है Z सुरक्षा, पंजाब सरकार ने पहले वापस लिया था सुरक्षा कवर

नई दिल्ली, एजेंसियां। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खबर है कि केंद्र सरकार उन्हें जल्द ही Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर सकती है। यह चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब हाल ही में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और पंजाब में उन्हें Z सुरक्षा दी जा सकती है, जबकि अन्य राज्यों में Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलने की संभावना है। Z सुरक्षा देश में उच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है, जिसमें लगभग 20 से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिनमें NSG कमांडो भी शामिल होते हैं, तैनात किए जाते हैं।   पार्टी में मतभेद और पद से हटाया जाना हाल ही में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था और उनकी जगह अशोक मित्तल  को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस फैसले के बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राघव चड्ढा ने भी अपने बयानों में कहा था कि उन्हें “खामोश किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” इससे साफ है कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव आया है।   सुरक्षा वापसी और नई अटकलें पंजाब में Bhagwant Mann की सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था, जिसके बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। अब केंद्र स्तर पर उन्हें उच्च सुरक्षा दिए जाने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
Man applying beard oil to well-groomed beard for smooth and stylish look grooming routine
परफेक्ट स्टाइल के लिए टॉप 5 बियर्ड ऑयल

मैं बियर्ड ऑयल के बारे में खुलकर बात करना चाहता हूँ, क्योंकि दाढ़ी सिर्फ एक लुक नहीं–ये एक लाइफस्टाइल है। जब मैंने बियर्ड ग्रूमिंग की दुनिया में कदम रखा, तो मैंने अपने तीन “पर्सनल ग्रूमिंग एक्सपर्ट्स” की मदद ली–मेरे भाई (बियर्ड गोल्स), मेरे पापा (ओरिजिनल स्मूद ऑपरेटर) और मेरी खुद की दाढ़ी (जिसे मैं रॉयल्टी की तरह ट्रीट करता हूँ)। कई हफ्तों तक सबकी मॉर्निंग रूटीन को ऑब्ज़र्व करने, अलग-अलग ऑयल्स ट्राय करने और भाई-पापा की राय लेने के बाद, मैंने समझा कि असल में क्या काम करता है। ऐसे ऑयल्स जो आपकी दाढ़ी को शानदार खुशबू दें और जिद्दी बालों को आसानी से सेट कर दें–ये वही बेस्ट बियर्ड ऑयल्स हैं जो आपकी स्टाइल को परफेक्शन तक ले जाते हैं। टॉप बियर्ड ऑयल्स जो आपके ग्रूमिंग गेम को बनाएंगे शानदार सच कहें तो बियर्ड केयर, मेंस सेल्फ-केयर का अहम हिस्सा है। ये 5 बियर्ड ऑयल्स आपके लुक में शाइन, सॉफ्टनेस, खुशबू और स्टाइल–सब कुछ जोड़ देते हैं। चाहे आप रफ-टफ लुक चाहते हों या क्लीन और क्लासी स्टाइल–ये ऑयल्स आपको बेसिक से बॉस बना देंगे। 1. Jack Black Beard Oil मेरा भाई ग्रूमिंग को लेकर काफी पिकी है। जब उसने Jack Black Beard Oil इस्तेमाल किया, तो मैं समझ गया कि ये खास है। “भाई, ये तो कमाल है,” उसने शीशे में खुद को देखते हुए कहा।  हल्का लेकिन बेहद नॉरिशिंग दाढ़ी को सॉफ्ट और स्मूद बनाता है सबटल (हल्की) खुशबू, जो लोगों को पसंद आए इसमें Kalahari melon और marula जैसे नैचुरल ऑयल्स होते हैं, जो बिना चिपचिपाहट के हाइड्रेशन देते हैं। 2. Premium Beard Oil ये ऑयल हमारे घर में एक तरह की “विरासत” बन चुका है। पापा ने इसे भाई को गिफ्ट किया था, और अब ये दोनों का फेवरेट है। पापा इसे “मॉर्निंग आर्मर” कहते हैं, जबकि भाई इसे लगभग परफ्यूम की तरह इस्तेमाल करता है।  हल्का लेकिन गहराई से मॉइस्चराइजिंग दाढ़ी को स्मूद और सेट करता है शानदार और क्लासी खुशबू ये वो ऑयल है जो हमेशा बाथरूम शेल्फ से गायब रहता है  3. Arlo’s 99% Natural Beard Oil Pro-Growth मेरे पापा किसी भी प्रोडक्ट को आसानी से पसंद नहीं करते। लेकिन जब उन्होंने इसे “मस्ट-हैव” कहा, तो समझिए ये खास है।  99% नैचुरल फॉर्मूला दाढ़ी को सॉफ्ट और शाइनी बनाता है फ्लाईअवे (उड़े हुए बाल) कंट्रोल करता है सबसे खास बात–ये बियर्ड ग्रोथ में भी मदद करता है। पापा हमेशा कहते हैं: “अगर दाढ़ी बढ़े, तो चमके भी।”  4. Forest Essentials Grooming Beard Oil ये पापा का सबसे भरोसेमंद (ride-or-die) बियर्ड ऑयल है। एक बार उन्होंने गलती से सुगंध वाला ऑयल लगा लिया और पूरा दिन “नाइटक्लब” जैसी खुशबू में बिताया 😄 तब से उन्होंने फ्रेगरेंस-फ्री ऑयल ही चुना–और यही उनका फेवरेट बन गया।  बिना खुशबू (fragrance-free)   हल्का और नॉन-ग्रीसी   स्किन-फ्रेंडली, कोई एलर्जी नहीं ये सादा लेकिन असरदार ऑयल है–एकदम क्लासिक। 5. Maharajah Beard Oil (10ml Travel Size) ये छोटा सा ऑयल मेरे दोस्त की वजह से हमारे घर में आया–और अब सबका फेवरेट बन चुका है।  शानदार और रॉयल खुशबू दाढ़ी को स्मूद और सॉफ्ट बनाता है ट्रैवल-फ्रेंडली और कॉम्पैक्ट अब हाल ये है कि मैं, मेरा भाई और पापा–तीनों इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। लगता है हमारे घर में “Maharajah Beard Oil क्लब” बन चुका है  बियर्ड ऑयल इस्तेमाल करने के टिप्स हल्की गीली दाढ़ी पर लगाएं 2–5 बूंद काफी होती हैं स्किन तक मसाज करें कंघी से अच्छे से फैलाएं

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Uttar Pradesh assembly building with discussion on increasing seats from 403 to 605 amid delimitation talks
UP में बढ़ सकती है विधानसभा सीटें! 403 से बढ़कर 605 होने की चर्चा, जानिए पूरा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा 403 सीटों के मुकाबले भविष्य में यह संख्या बढ़कर 605 तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव में लागू नहीं होगा। क्यों बढ़ सकती हैं सीटें? यह चर्चा संभावित परिसीमन (Delimitation) और नारी वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित बदलावों के कारण शुरू हुई है। सूत्रों के मुताबिक: लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हो सकती है यूपी में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं विधानसभा सीटें 403 से बढ़कर 605 होने का अनुमान 2027 चुनाव पर क्या असर? 2027 के विधानसभा चुनाव पुरानी 403 सीटों पर ही होंगे सीटों में बढ़ोतरी परिसीमन के बाद लागू होगी संभावना है कि 2032 के बाद नए ढांचे पर चुनाव हो आबादी के हिसाब से क्यों जरूरी? यूपी में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण: एक विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी बढ़ गई है आंकड़ों पर नजर: 1952: 347 सीटें, प्रति सीट ~1.82 लाख आबादी 1973: 425 सीटें, प्रति सीट ~2.8 लाख वर्तमान (403 सीट): प्रति सीट ~4.95 लाख आबादी अगर 605 सीटें होती हैं तो: प्रति सीट आबादी घटकर करीब 3.30 लाख रह जाएगी जिलों में क्या होगा बदलाव? अभी 75 जिलों में औसतन 3-5 विधानसभा सीटें हैं बढ़ोतरी के बाद यह संख्या 6-8 सीट प्रति जिला हो सकती है बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़े क्षेत्र: साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर (7-12 लाख मतदाता) छोटे क्षेत्र: महोबा, सीसामऊ

surbhi मार्च 25, 2026 0
WWII bomb found India
सुवर्णरेखा नदी किनारे मिला द्वितीय विश्व युद्ध काल का बम, आज सेना का हाई-रिस्क डिफ्यूज ऑपरेशन

पूर्वी सिहंभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी किनारे द्वितीय विश्व युद्ध काल का 227 किलोग्राम वजनी बम मिलने से हड़कंप मच गया है। दशकों पुराना यह अनएक्सप्लोडेड ऑर्डिनेंस (UXO) आज भी बेहद खतरनाक बताया जा रहा है।   सेना ने संभाली कमान मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की स्पेशल बम निरोधक टीम मौके पर पहुंच चुकी है। लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को इस बम को निष्क्रिय करने के लिए हाई-रिस्क डिफ्यूज ऑपरेशन चलाया जाएगा।   कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा के मद्देनजर बम स्थल के एक किलोमीटर दायरे को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। इलाके में नो-एंट्री लागू कर दी गई है और बैरिकेडिंग की गई है। साथ ही पश्चिम बंगाल सीमा से सटे गांवों को भी अलर्ट पर रखा गया है। ऑपरेशन के दौरान हवाई गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।   ऐसे किया जा रहा है सुरक्षित बम को निष्क्रिय करने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों का घेरा बनाया गया है और करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में सुरक्षित रखा गया है, ताकि संभावित विस्फोट की ऊर्जा जमीन के भीतर ही सीमित रहे।   रिमोट से होगा ऑपरेशन जानकारी के मुताबिक, यह डिफ्यूज ऑपरेशन करीब एक किलोमीटर दूर से रिमोट सिस्टम के जरिए किया जाएगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में जोखिम कम किया जा सके।   आठ दिन पहले चला था पता करीब आठ दिन पहले स्थानीय लोगों ने इस बम को देखा था, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने तुरंत सेना को सूचना दी। बम पर “AN-M64 500-LB American Made” अंकित है, जिससे इसकी पहचान द्वितीय विश्व युद्ध के बम के रूप में हुई है।

Juli Gupta मार्च 25, 2026 0
West Bengal government enforces new medical rules for ministers requiring CM approval for out-of-state treatment
बंगाल में मंत्रियों पर सख्ती: राज्य के बाहर इलाज के लिए CM की अनुमति अनिवार्य

पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों और उनके परिवार के चिकित्सा खर्च को लेकर सख्त कदम उठाया है। अब राज्य के बाहर किसी भी अस्पताल में इलाज कराने से पहले मुख्यमंत्री से पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। इस संबंध में गृह विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसे कोलकाता गजट में प्रकाशित किया गया है। नए नियम के तहत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री इसके दायरे में आएंगे। साथ ही उनके कुछ परिजनों को भी इस सुविधा में शामिल किया गया है। क्यों लिया गया फैसला? सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य चिकित्सा खर्चों पर नियंत्रण रखना और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में कुछ मामलों में बिना गंभीर बीमारी के भी अन्य राज्यों में इलाज कराकर भारी-भरकम बिल जमा किए गए थे, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पहले क्या थी व्यवस्था? पहले मंत्रियों को राज्य के बाहर इलाज कराने के लिए किसी तरह की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी। इसी कारण कई बार मेडिकल खर्च को लेकर विवाद भी सामने आए थे। किन पर लागू होगा नियम? इस नई व्यवस्था में मंत्रियों के परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल होंगे, जैसे: अविवाहित बेटियां आश्रित माता-पिता 18 वर्ष तक के आश्रित भाई-बहन किन अस्पतालों में मिलेगा लाभ? अब चिकित्सा सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसमें शामिल हैं: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त अस्पताल पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2017 के तहत पंजीकृत निजी अस्पताल और नर्सिंग होम कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी शामिल? नई व्यवस्था के तहत निम्न सेवाएं कवर होंगी: डॉक्टर से परामर्श पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच दवाएं और टीकाकरण सर्जरी और दंत चिकित्सा खर्च कैसे होगा कवर? सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह मुफ्त रहेगा निजी या पंजीकृत अस्पतालों में इलाज पर सरकार खर्च वहन करेगी या प्रतिपूर्ति देगी इसके अलावा डॉक्टर के निजी चैंबर, मंत्री आवास पर इलाज, अस्पताल के उच्च श्रेणी के वार्ड और विशेष नर्सिंग सेवाओं का खर्च भी योजना के तहत कवर किया जाएगा।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Anant Singh supporters celebrating his release outside Beur Jail in Patna
‘छोटे सरकार’ की वापसी: 4 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे अनंत सिंह, पटना से मोकामा तक जश्न की तैयारी

हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद आज रिहाई, समर्थकों में उत्साह; सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह आज करीब चार महीने बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि दोपहर 2 बजे के बाद वे बेऊर जेल से बाहर आ सकते हैं। इसको लेकर पटना से लेकर मोकामा तक समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हाई कोर्ट से मिली जमानत पटना हाई कोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकलपीठ ने अनंत सिंह को शर्तों के साथ जमानत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर वे गवाहों को प्रभावित करने या डराने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद उन्हें राहत मिली। रिपोर्ट में मौत का कारण वाहन से कुचलना बताया गया, जबकि उन पर गोली मारने का आरोप था। साथ ही घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी भी स्पष्ट नहीं हो पाई। रिहाई के बाद दर्शन-पूजन का कार्यक्रम जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह सीधे पटना स्थित अपने ‘मॉल रोड’ आवास जाएंगे। इसके बाद 24 मार्च को बड़हिया के प्रसिद्ध देवी स्थल पर पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उनका काफिला बख्तियारपुर के पुराने मार्ग से होकर गुजरेगा, जहां जगह-जगह स्वागत के लिए तोरण द्वार लगाए गए हैं। पटना से मोकामा तक जश्न का माहौल अनंत सिंह की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। पटना से मोकामा तक मिठाइयों और दावत का इंतजाम किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विधायक बनने के बाद पहली बार वे अपने क्षेत्र पहुंचेंगे, जिससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड यह मामला 1 नवंबर 2025 का है, जब चुनाव प्रचार के दौरान राजद से जुड़े दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Bihar Chief Minister Nitish Kumar waving amid speculation of resignation and possible Rajya Sabha move in Bihar politics
बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर? नीतीश कुमार छोड़ सकते हैं मुख्यमंत्री पद, राज्यसभा जाने की चर्चा तेज

जेडीयू सूत्रों का दावा – आज भरेंगे नामांकन, अमित शाह रहेंगे मौजूद; बीजेपी के हाथ में आ सकती है कमान बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री Nitish Kumar जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में एक युग के अंत जैसा होगा। बताया जा रहा है कि वे आने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर सकते हैं। जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रह सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगले सप्ताह तक नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस पर उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के हाथ में जा सकती है कमान अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, नया मुख्यमंत्री बीजेपी का ही कोई वरिष्ठ नेता होगा। फिलहाल डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। पटना दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नया मुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से हो सकता है, ताकि सामाजिक संतुलन साधा जा सके। बेटे निशांत कुमार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह फैसला होता है तो जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह बड़ा कदम माना जाएगा। 10 बार शपथ, सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड 75 वर्षीय नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। 2015 से वे लगातार सत्ता में हैं, बीच में कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे। चाहे NDA हो या महागठबंधन, नीतीश कुमार हर चुनाव में प्रमुख चेहरा रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में जब राजनीतिक विश्लेषक उन्हें लगभग खारिज कर चुके थे, तब उन्होंने जबरदस्त वापसी की। महिलाओं के लिए साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उन्हें मजबूत समर्थन दिलाया। विपक्ष के हमले और उम्र को लेकर सवाल विपक्षी दल Rashtriya Janata Dal (RJD) ने हाल के दिनों में नीतीश कुमार की उम्र और सक्रियता को लेकर सवाल उठाए थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि बीजेपी लंबे समय से बिहार में खुद नेतृत्व संभालना चाहती थी। अब अगर यह बदलाव होता है तो बिहार की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। क्या खत्म होगा एक दौर? नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कई बार राजनीतिक पाला बदला, लेकिन अपनी पकड़ बनाए रखी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वे वाकई राज्यसभा जाएंगे और बिहार में नया नेतृत्व सामने आएगा या फिर सियासी समीकरण आखिरी समय में बदल जाएंगे।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0