politics news

CM Himanta Biswa Sarma
CM Himanta Biswa Sarma: लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे  हिमंता बिस्वा सरमा

दिसपुर, एजेंसियां। असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता Himanta Biswa Sarma आज थोड़ी देर बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वह लगातार दूसरी बार राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है।   चार अन्य मंत्री भी लेंगे शपथ शपथ ग्रहण समारोह में हिमंता बिस्वा सरमा के साथ चार अन्य विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। इनमें भाजपा के दो नेता, जबकि सहयोगी दल Asom Gana Parishad (अगप) और Bodoland People's Front (बीपीएफ) के एक-एक विधायक शामिल हैं।   प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे गुवाहाटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  सोमवार रात गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा-राजग सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए लिखा कि उनका यह दौरा असम के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर है।   कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री होंगे शामिल शपथ ग्रहण के लिए पहुंचने वालों में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सर्बानंद सोनोवाल,शिवराज सिंह चौहान, ललन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और चिराग पासवान शामिल हैं. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गोवा के उनके समकक्ष प्रमोद सावंत, राजस्थान के भजन लाल शर्मा, बिहार के सम्राट चौधरी, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, ओडिशा के मोहन चरण माझी और मध्य प्रदेश के मोहन यादव भी शपथ ग्रहण में शामिल होंगे.

Anjali Kumari मई 12, 2026 0
Political debate in India over Nari Shakti Vandan Act with Narendra Modi, Kharge and Kiren Rijiju exchange letters
‘अभी नहीं तो देर हो जाएगी’–नारी शक्ति वंदन कानून पर सियासत तेज

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। Narendra Modi, Mallikarjun Kharge और Kiren Rijiju के बीच चिट्ठियों का दौर इस बहस को और गर्म कर रहा है। आखिर खरगे ने PM मोदी को क्यों लिखा पत्र? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सरकार पर कई आरोप लगाए: सरकार जल्दबाजी में संशोधन लागू करना चाहती है चुनाव से पहले इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया खरगे का कहना है कि इतने अहम कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है, न कि जल्दबाजी में फैसला। रिजिजू का जवाब–“अभी सही समय है” इन आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: 16 मार्च 2026 से ही सभी दलों से बातचीत शुरू हो चुकी थी कई पार्टियों–जैसे Samajwadi Party, DMK, Trinamool Congress–से चर्चा की गई कई दलों ने समर्थन भी जताया रिजिजू ने जोर देकर कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है। संसद सत्र क्यों बुलाया गया? सरकार ने 16–18 अप्रैल 2026 तक संसद सत्र बुलाया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे लागू किया जा सके। सरकार इसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। मुद्दा क्या है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है। अब सरकार चाहती है कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाए, जबकि विपक्ष टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Amaravati city skyline and Andhra Pradesh government buildings after being declared permanent capital.
अमरावती बनी आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी नोटिफिकेशन

आंध्र प्रदेश के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राज्य की अमरावती को अब आधिकारिक रूप से स्थायी राजधानी घोषित कर दिया गया है। इस संबंध में भारत सरकार ने सोमवार को गज़ट नोटिफिकेशन जारी किया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद फैसला यह अहम फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद लिया गया। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत अमरावती को स्थायी राजधानी का दर्जा मिला है। सीएम चंद्रबाबू नायडू ने जताया आभार मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि- यह आंध्र प्रदेश के लोगों के लंबे समय से चले आ रहे सपने के पूरा होने जैसा है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने भी दी जानकारी उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस फैसले की पुष्टि की और इसे राज्य के विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। क्यों अहम है यह फैसला? राज्य को मिला स्थायी प्रशासनिक केंद्र निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी रफ्तार अमरावती को आधुनिक राजधानी के रूप में विकसित करने का रास्ता साफ लंबे समय से चल रहा था विवाद आंध्र प्रदेश के विभाजन (2014) के बाद से राजधानी को लेकर लगातार विवाद और असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब इस फैसले से राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिरता आने की उम्मीद है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing event during Gujarat urban development projects inauguration ceremony
31 मार्च को गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, शहरी विकास परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को गुजरात दौरे पर जाएंगे, जहां वे कई शहरी विकास (Urban Development) परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब गुजरात 2005 से शुरू हुई अपनी शहरी विकास यात्रा के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। 20 साल में बदला गुजरात का शहरी चेहरा राज्य सरकार के मुताबिक, पिछले दो दशकों में गुजरात में शहरीकरण और बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास हुआ है। सड़कों, स्ट्रीट लाइट, पानी की पाइपलाइन और सीवरेज सिस्टम का विस्तार ग्रीन स्पेस और टाउन प्लानिंग योजनाओं का विकास गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग गुजरात में सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क को मजबूत किया गया है: अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में ओवरब्रिज और अंडरब्रिज द्वारका-बेट द्वारका को जोड़ने वाला सुदर्शन सेतु शुरू बड़े प्रोजेक्ट: जामनगर-भटिंडा हाईवे, वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 430 KM नमो शक्ति एक्सप्रेसवे और 680 KM सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेसवे प्रस्तावित मेट्रो, बुलेट ट्रेन और रेलवे का विस्तार अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 पूरा, गांधीनगर से बेहतर कनेक्टिविटी सूरत मेट्रो के लिए 24 ट्रेनसेट तैयार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रगति पर 89 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास, 18 तैयार एयरपोर्ट और उड़ान सेवाओं का विस्तार राजकोट में हिरासर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट तैयार UDAN योजना के तहत कई शहरों में फ्लाइट कनेक्टिविटी बढ़ी AMRUT और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत काम 630 करोड़ से अधिक के जल प्रोजेक्ट, 82 हजार से ज्यादा घरों को फायदा 575 करोड़ की सीवरेज योजनाएं 6 स्मार्ट सिटी में 359 प्रोजेक्ट, ज्यादातर पूरे PM आवास योजना से 9 लाख से ज्यादा घर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 9.19 लाख से अधिक घर राजकोट में Lighthouse प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक तकनीक से निर्माण PMAY 2.0 के तहत 1 लाख से ज्यादा नए घर मंजूर बजट और भविष्य की तैयारी 2026-27 बजट में शहरी विकास के लिए 33,504 करोड़ रुपये ‘स्वर्णिम जयंती शहरी विकास योजना’ के लिए 16,116 करोड़ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए 1,278 करोड़

surbhi मार्च 25, 2026 0
Rahul Gandhi Chaibasa visit
Rahul Gandhi चाईबासा में 22 मार्च को लगायेंगे कांग्रेसियों की क्लास

रांची। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा “संगठन सृजन” अभियान के तहत देशभर में जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों का चयन किया गया है। इसी क्रम में संगठन को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चयनित जिला अध्यक्षों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उक्त क्रम में झारखंड एवं ओडिशा के जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन झारखंड के चाईबासा स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (TRTC) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण शिविर 22 मार्च से 31 मार्च 2026 तक संचालित होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिला स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। शिविर में जनसंपर्क, संगठन विस्तार, राजनीतिक रणनीति एवं जनहित के मुद्दों पर प्रभावी कार्यशैली जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता यह है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शिविर के दौरान एक दिन के लिए उपस्थित होकर जिला अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। उनके आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी संबंधित जिला अध्यक्षों से निर्धारित समय के भीतर प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की गई है। यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने एवं आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Mamata Banerjee Bhawanipur seat
Bengal Elections 2026: Mamata Banerjee की बढ़ेंगी मुश्किलें, Humayun Kabir ने भवानीपुर में उतारा उम्मीदवार

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। ममता बनर्जी के लिए चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के जरिए बड़ा चुनावी दांव चला है।   भवानीपुर सीट पर नया मुकाबला राज्य की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर अब मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। हुमायूं कबीर ने यहां से पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है, जो सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती देंगी। इस कदम को मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।   182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नई पार्टी हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी 294 सदस्यीय विधानसभा में से 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इससे इस बार चुनाव में बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।   AIMIM से गठबंधन के संकेत कबीर ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के साथ तालमेल कर सकती है। इससे कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण और मजबूत हो सकते हैं।   टीएमसी में हलचल कबीर के इस कदम से All India Trinamool Congress (TMC) में भी हलचल मच गई है। खासकर कांदी सीट से फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद यासीन हैदर को टिकट देने को टीएमसी के अंदरूनी समीकरणों पर सीधा असर माना जा रहा है।   खुद दो सीटों से लड़ेंगे कबीर हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर और नोदा सीट से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी जल्द ही अपनी पूरी उम्मीदवार सूची जारी करेगी।   क्या है रणनीति? हुमायूं कबीर का फोकस अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण और नए राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने पर है। उनके इस कदम से बंगाल की राजनीति में मुकाबला और कड़ा होने की संभावना है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0