होली खत्म होने के बाद भी बिहार के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। घर से वापस काम पर लौटने वालों की भारी संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए 10 होली स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। पूर्व मध्य रेल का बड़ा फैसला पूर्व मध्य रेल (ECR) के तहत चल रही इन स्पेशल ट्रेनों को यात्रियों की सुविधा के लिए जारी रखा गया है। पटना जंक्शन, दानापुर और राजेंद्र नगर टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर अब भी यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे यह निर्णय लिया गया। इन ट्रेनों में आनंद विहार-लीकहा बाजार और सहरसा-आनंद विहार जैसी महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। भीड़ के बावजूद कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई प्रमुख रूटों पर अब भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल बना हुआ है। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट लगातार बढ़ रही है। मैहर धाम जाने वाले श्रद्धालु परेशान चैत्र नवरात्रि के चलते मैहर धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेलवे ने 18 से 30 मार्च के बीच मैहर स्टेशन पर 10 ट्रेनों को 5-5 मिनट के ठहराव की अनुमति दी है, जिसमें पूर्णा जंक्शन-पटना एक्सप्रेस और बांद्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इसके बावजूद IRCTC पर टिकट बुकिंग करते ही लंबी वेटिंग लिस्ट सामने आ रही है। ऐसे में यात्रियों के पास ‘तत्काल’ टिकट का विकल्प ही बचा है। बसों का भी लिया जा रहा सहारा यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे के साथ-साथ बसों का संचालन भी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था 23 मार्च तक जारी रहेगी, जिससे कुछ हद तक यात्रियों को राहत मिल सके। त्योहार और नवरात्रि से बढ़ा दबाव हर साल होली के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों पर लौटते हैं, जिससे ट्रेनों पर दबाव बढ़ता है। इस बार चैत्र नवरात्रि के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ गई है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। यात्रियों को सलाह रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और टिकट की उपलब्धता की जांच कर के ही सफर करें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।
यात्रियों को मिली बड़ी राहत बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। पटना और थावे के बीच नई फास्ट पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस ट्रेन के शुरू होने से अब दोनों शहरों के बीच यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। ट्रेन करीब 6 घंटे 50 मिनट में यह दूरी तय करेगी, जिससे यात्रियों का समय भी बचेगा और सफर अधिक सुविधाजनक होगा। नई ट्रेन के संचालन को लेकर जानकारी देते हुए Ravi Shankar Prasad ने कहा कि Thawe Temple धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। लंबे समय से लोगों की मांग थी कि पटना से थावे के लिए तेज ट्रेन सेवा शुरू की जाए, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। 24 कोच वाली ट्रेन से बढ़ेगी सुविधा Indian Railways के दानापुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार इस फास्ट पैसेंजर ट्रेन में कुल 24 कोच लगाए गए हैं। दानापुर मंडल के सीनियर डीसीएम Abhinav Siddharth ने बताया कि यह ट्रेन पाटलिपुत्र और दीघवारा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से पटना और थावे के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पटना-थावे ट्रेन की टाइमिंग और स्टॉपेज गाड़ी संख्या 55515 पटना-थावे फास्ट पैसेंजर रोजाना Patna Junction से दोपहर 12:10 बजे रवाना होगी। इसके प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं: फुलवारीशरीफ – 12:13 बजे पाटलिपुत्र – 12:40 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 12:52 बजे दीघवारा – 13:50 बजे गोल्डिनगंज – 14:55 बजे इन स्टेशनों पर रुकते हुए यह ट्रेन शाम 7:00 बजे Thawe पहुंचेगी। वहीं 55516 थावे-पटना फास्ट पैसेंजर रोजाना थावे से रात 8:05 बजे रवाना होगी और अगले दिन निम्न स्टेशनों पर रुकते हुए पटना पहुंचेगी: गोल्डिनगंज – 00:40 बजे दीघवारा – 01:00 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 01:55 बजे पाटलिपुत्र – 02:05 बजे फुलवारीशरीफ – 02:25 बजे यह ट्रेन सुबह 03:20 बजे पटना जंक्शन पहुंचेगी। पुरी-पटना ट्रेन को भी मिला नियमित संचालन रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगातार नई ट्रेन सेवाएं शुरू कर रहा है। इससे पहले भी यात्रियों की मांग को देखते हुए Puri–Patna Express के नियमित संचालन को मंजूरी दी गई थी। इस ट्रेन के अनुसार, यह हर शनिवार को दोपहर 2:55 बजे Puri से रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:45 बजे पटना पहुंचती है। वहीं वापसी में हर रविवार को दोपहर 1:30 बजे पटना से प्रस्थान करती है। धार्मिक और स्थानीय यात्रियों को मिलेगा लाभ पटना-थावे फास्ट पैसेंजर ट्रेन शुरू होने से न सिर्फ रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि इस नई ट्रेन सेवा से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
होली पर्व समाप्त होने के बाद बिहार से दूसरे राज्यों में लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिल रही है। ट्रेनों में सीटों की भारी मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए 28 होली स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्टेशनों पर उमड़ी यात्रियों की भीड़ होली के बाद कामकाज के लिए दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और अन्य शहरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। पटना जंक्शन समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। स्लीपर और एसी कोच में भी सीटें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। स्टेशनों पर जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ क्विक रिस्पांस टीम को भी तैनात किया गया है। मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, राजेंद्र नगर-एलटीटी, पटना-हटिया, पटना-धनबाद और दानापुर-सिकंदराबाद जैसी ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। रेलवे अधिकारियों ने दी जानकारी पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए पहले से चल रही कई स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि पटना-नई दिल्ली स्पेशल सहित कुल 28 होली स्पेशल ट्रेनों को 31 मार्च तक चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि यात्रियों को सफर में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इन ट्रेनों की अवधि बढ़ाई गई गाड़ी संख्या 03293 पटना–नई दिल्ली स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03294 नई दिल्ली–पटना स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03257 दानापुर–आनंद विहार स्पेशल – 15 मार्च से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03258 आनंद विहार–दानापुर स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रत्येक सोमवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03697 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होगी। गाड़ी संख्या 03698 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक मंगलवार, बुधवार, शनिवार और रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 02397 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 22 और 29 मार्च को चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 02398 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 23 और 30 मार्च को संचालित होगी। रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई परिचालन अवधि से होली के बाद घर लौट रहे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।