रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हार का उतना दुख नहीं है, जितना “अपनों द्वारा भरोसा तोड़े जाने” का दर्द है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा पर धनबल और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में धनबल, छल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की जीत जनभावनाओं की नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और संसाधनों के इस्तेमाल की जीत है। “दिल आहत है, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी” मंत्री ने कहा कि उनका मन आहत जरूर है, लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और यह स्थायी नहीं होती। अंसारी ने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां भले ही आज उनके पक्ष में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव है। “आज उनका दिन है, कल हमारा भी आएगा” अपने संदेश में इरफान अंसारी ने कहा कि राजनीति में किसी की जीत स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भाजपा का समय है, लेकिन आने वाले समय में हालात बदलेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया को महागठबंधन के भीतर बढ़ती असहमति और राजनीतिक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
रांची। झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रहे वोटिंग के बीच बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। महागठबंधन के सभी विधायकों का मतदान संपन्न हो गया है। हालांकि एनडीए का मतदान जारी है। मतदान के बाद सभी विधायक अपने-अपने चेंबर की ओर जा रहे हैं। इसी बीच बड़ी खबर सामने आ रही है कि झामुमो के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। हालांकि फिलहाल यह सूचना अपुष्ट है। इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि अभी तक नहीं की जा सकी है। लेकिन, पूरे विधानसभा परिसर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
रांची। राज्यसभा चुनाव सुबह नौ बजे से जारी है। जहां एनडीए और इंडी गठबंधन ने मतदान पूर्ण कर लिया है। वहीं, परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी विधानसभा पहुंचे। राज्यसभा चुनाव तीन उम्मीदवारों के बीच हो रहा है। जिसमें निर्दलीय भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी, कांग्रेस के पीके झा और झामुमो के बैजनाथ राम शामिल है। मतगणना शाम पांच बजे से होगी।
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। इसी बीच डुमरी विधायक जयराम महतो के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। मतदान के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्यसभा में वही व्यक्ति जाना चाहिए, जो दिल्ली में झारखंड के हितों की प्रभावी ढंग से पैरवी कर सके और राज्य के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा सके। जयराम महतो ने कहा कि राज्यसभा सांसद की जिम्मेदारी केवल सदन में उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के समक्ष राज्य के मुद्दों को मजबूती से उठाना और विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे प्रतिनिधि की अपेक्षा करती है जो केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि परिणाम देने के लिए काम करे। बयान से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी जयराम महतो के इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल और तेज हो गई है। चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है और विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हैं। ऐसे समय में हर विधायक का वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है और नेताओं के बयान भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाले माने जा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर सभी दलों की नजर टिकी हुई है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य की बदलती सियासी दिशा के लिहाज से भी अहम मान रहे हैं।
रांची। रांची में Jharkhand की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के बीच विधानसभा परिसर पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं हर पल बदलते घटनाक्रम पर नेताओं और समर्थकों की नजर टिकी हुई है। इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ विधानसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही महागठबंधन की लॉबी में हलचल तेज हो गई और गठबंधन के सभी विधायक एक जगह एकत्रित होते नजर आए। महागठबंधन के विधायक पहुंचे मतदान के लिए एनडीए विधायकों के मतदान के बाद महागठबंधन के विधायकों ने भी वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना शुरू किया। विधानसभा परिसर से सामने आई तस्वीरों में कांग्रेस और झामुमो समेत गठबंधन के कई विधायक एक साथ मतदान कर बाहर निकलते दिखाई दिए। इस दौरान गठबंधन के नेताओं में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हर गतिविधि पर मुख्यमंत्री की नजर राज्यसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुरुआत से ही सक्रिय दिखे हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति और मतदान के दिन की गतिविधियों तक वे लगातार पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते दिखाई दिए। विधानसभा परिसर में भी वे विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे। एनडीए और महागठबंधन दोनों कर रहे जीत का दावा राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। मतदान के दौरान दोनों खेमों के नेताओं के हावभाव और सक्रियता से साफ है कि मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव से पहले विधायकों की बैठकों, रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों ने भी इस चुनाव को खास बना दिया है। शाम तक साफ हो सकती है तस्वीर विधानसभा में मतदान शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और अगले कुछ घंटों में यह साफ होने की उम्मीद है कि झारखंड की दोनों राज्यसभा सीटों पर किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। फिलहाल पूरे राज्य की नजर विधानसभा में चल रही इस सियासी जंग पर टिकी हुई है।
रांची। राज्यसभा की दो सीटों के लिये झारखंड विधानसभा में मतदान हो रहा है। जहां इंडी गठबंधन दल के विधायक सुबह नौ बजे ही विधानसभा पहुंचे। वहीं, एनडीए विधायक भी एक साथ बस में सवार होकर विधानसभा पहुंचे। एनडीए विधायक निर्दलीय परिमल नाथवानी को समर्थन दे रहे है। परिमल नाथवानी पहले ही विधानसभा पहुंच गये है। बता दें भाजपा के सभी विधायक रेडिसन ब्लू होटल में रूके थे। जहां से सभी बस से एक साथ विधानसभा पहुंचे। जीत का किया दावा इस दौरान मीडिया से बात करते हुए विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि एनडीए परिमल नाथवानी के जीत के लिये आश्वास्त है। पूर्वी जमशेदपुर की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि हमारे आंकड़े सुरक्षित है। वहीं, धनबाद विधायक राज सिन्हा ने कहा कि हमलोग अभी से बधाई दे रहे हैं कि जीत हमारी होगी। जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि मेरा वोट सुरक्षित है और मैंने कहीं पर ध्यान नहीं दिया है। सुबह 9 बजे से मतदान जारी राज्यसभा चुनाव के लिये मतदान सुबह नौ बजे से शुरू हो गया है, जो शाम चार बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना होगी। 3 उम्मीदवार मैदान में राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार है। जिनमें कांग्रेस के पीके झा, झामुमो से वैद्यनाथ राम और निर्दलीय भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी है। चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर है। पोलिंग एजेंट के नाम चुनाव में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट के राजू, झामुमो के विनोद पांडे और सुदिव्य सोनू है। वहीं, भाजपा के पोलिंग एजेंट नवीन जायसवाल और अमर बाउरी है। राजद के भोला यादव है। सभी विधायकों को अपने अपने पोलिंग एजेंट को दिखाकर ही वोट देंगे।
रांची। झारखंड में हो रहे राज्यसभा चुनाव में इंडी गठबंधन गजब का कॉन्फिडेंस दिखा रहा है। पहले 56 विधायकों को एकजुट रखने पर ही सवाल उठाए जा रहे थे, अब तो बात 61 विधायकों तक पहुंच गई है। राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले शह-मात का खेल शुरू हो गया है। एक ओर सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन अपने 56 विधायकों की एकजुटता का प्रदर्शन कर जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर संख्या बल में पीछे होने के बावजूद एनडीए भी जीत का दावा कर रहा है। अपने विधायकों को रांची के एक होटल में शिफ्ट कर एनडीए ने भी मोर्चाबंदी कर रखी है। सीएम हेमंत सोरेन की देखरेख में हुआ मॉक पोल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई। इसमें विधायकों को प्रशिक्षित कर मॉक पोल कराया गया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिले। विधानसभा अध्यक्ष का वोट झामुमो को और माले विधायक अरूप चटर्जी पूर्व सूचना के आधार पर बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका वोट भी कांग्रेस को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मॉक पोल में हमारा एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ। वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि दोनों सीटों पर महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार की जीत तय है। पूरा गठबंधन एकजुट होकर मतदान करेगा। राज्यसभा चुनाव में '56 नहीं 61' का नारा इंडी गठबंधन खेमे में चर्चा तब और तेज हो गई जब झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने सोशल मीडिया पर '56 नहीं 61' का नारा उछाल दिया। सियासी गलियारों में इसे महागठबंधन के दावे से पांच अतिरिक्त वोट मिलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद कांग्रेस नेता भाजपा पर हमलावर दिखे। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भाजपा की कारगुजारी से साबित होता है कि बीजेपी कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जिस पर विधायक-सांसद की खरीद-फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, वही अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर रही है। वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि हम बुधवार को अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में आमतौर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता और ऐसे विवादों का समाधान चुनाव के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाता है। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 329(b) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि हर नामांकन विवाद में तत्काल सुनवाई शुरू कर दी जाए, तो चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी और संविधान की मंशा के विपरीत स्थिति पैदा हो सकती है। कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन क्यों हुआ था रद्द? मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने 9 जून को उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा था पक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला मतदाता करते हैं और यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो वे चुनाव हार जाएंगी। भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए। निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंप दिया है।
रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव के लिए नामाकंन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर फिर से भरोसा जताया है। वहीं, बीजेपी की बात करें तो गौरव वल्लभ ने भले ही नामांकन पर्चा खरीदा है, लेकिन अभी तक बीजेपी ने नाम की घोषणा नहीं की है। उधर परिमल नाथवाणी भी निदर्लीय मैदान में उतरने को तैयार हैं। उन्होंने नामांकन पर्चा दाखिल भी कर दिया है। 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवारों के उतरने से चुनाव का माहौल रोचक हो गया है। हालांकि कांग्रेस ने देर रात जेएमएम प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर काफी हद तक विवाद को सुलझा लिया है। माना जा रहा है कि गठबंधन में शामिल कांग्रेस के उम्मीदवार को जेएमएम का समर्थन मिल सकता है। उधर बीजेपी ने अभी तक पत्ता नहीं खोला है। लेकिन, परिमल नाथवाणी के नामांकन में बीजेपी नेताओं ने प्रस्तावक बन कर इशारा दे दिया है कि बीजेपी उनके साथ है। माना जा रहा है कि एनडीए के विधायक परिमल नाथवाणी को अपना समर्थन देने जा रहे हैं। इसके बावजूद भी उन्हें 4 विधायक जुटाने होंगे, क्योंकि एनडीए के पास 24 विधायक ही ही हैं और जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी। जेकेएलएम विधायक जयराम महतो का समर्थन उन्हें मिल सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें 3 विधायक जुटाने होंगे। इसका मतलब हुआ कि क्रॉस वोटिंग का ही सहारा लेना होगा। अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस के हाथ से सीट छिटक सकती है। यही से एक बार फिर रिसॉर्ट पालिटिक्स देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही अपने सारे विधायकों को रांची बुला लिया है और सभी को एकसाथ-एकजुट रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, बीजेपी जब नाथवाणी को समर्थन दे ही रही है, तो उसके विधायकों के छिटकने का सवाल ही नहीं है। ऐसे भी नाथवाणी ने सोमवार को बीजेपी विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर पहुंच कर उनके साथ आगे की रणनीति तय की। कांग्रेस और राजद के विधायकों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसलिए दोनों ही दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य के मंत्री और राजद नेता संजय प्रसाद यादव ने साफ किया कि वे सभी लालू प्रसाद यादव के शिष्य हैं, इसलिए गद्दारी तो उनके खून में ही नहीं है। यह भी संभव है कि जल्द ही कांग्रेस के विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें भी कहीं एकसाथ ही रखा जाये। क्योंकि, आज 8 जून है और चुनाव 18 जून को होना है। यानी, 10 अभी बाकी हैं और इस दौरान काफी कुछ देखने को मिल सकता है।
रांची। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक के भीतर शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने जहां अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि यह फैसला बिना आपसी सहमति के लिया गया है, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ी है। JMM दोनों राज्यसभा सीटों पर उतार सकती है प्रत्याशी वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास मजबूत बल संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। लेकिन दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और JMM के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बातचीत और समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और टकराव के संकेत बने हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका असर राज्यसभा चुनाव परिणाम और गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। इस विवाद ने झारखंड की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को भी जन्म दे दिया है।
Election Commission of India ने जून और जुलाई 2026 में खाली होने वाली राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु की दो राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव कराने का भी ऐलान किया गया है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 10 राज्यों में राज्यसभा के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। वोटों की गिनती भी उसी दिन होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 1 जून को जारी होगा नोटिफिकेशन चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए 1 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून तय की गई है। इन सीटों पर चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। किन राज्यों में कितनी सीटों पर चुनाव? राज्यसभा की 24 सीटों के लिए जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें कई बड़े राज्य शामिल हैं। सीटों का विवरण इस प्रकार है: Andhra Pradesh – 4 सीट Gujarat – 4 सीट Karnataka – 4 सीट Madhya Pradesh – 3 सीट Rajasthan – 3 सीट Jharkhand – 2 सीट Manipur – 1 सीट Meghalaya – 1 सीट Arunachal Pradesh – 1 सीट Mizoram – 1 सीट इन सभी सीटों के लिए संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करेंगे। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में उपचुनाव चुनाव आयोग ने राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की भी घोषणा की है। ये सीटें सदस्यों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। महाराष्ट्र सीट Sunetra Pawar के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की एक राज्यसभा सीट खाली हुई है। विधायक बनने के बाद उन्होंने 6 मई को राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 4 जुलाई 2028 तक था। तमिलनाडु सीट वहीं, C. V. Shanmugam ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम सीट से विधायक चुने जाने के बाद 7 मई को राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी थी। उनका कार्यकाल 29 जून 2028 तक था। इन दोनों सीटों के लिए भी 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग की तैयारी चुनाव आयोग ने कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जाएंगी। आयोग की ओर से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और पूरी चुनाव प्रक्रिया की करीबी निगरानी की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन राज्यसभा चुनावों का असर संसद के ऊपरी सदन में विभिन्न दलों की ताकत पर पड़ सकता है। खासतौर पर गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण को एक बार फिर निर्विरोध चुना गया है। यह उनका तीसरा कार्यकाल है, जो उच्च सदन में उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है। शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को उन्हें औपचारिक रूप से इस पद के लिए निर्वाचित किया गया। इससे पहले यह पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद उनकी नियुक्ति हुई। पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण की कार्यशैली और अनुभव की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि पूरे सदन को उन पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपने कार्यकाल में हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और करियर पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हरिवंश नारायण का पत्रकारिता में लंबा अनुभव रहा है और उन्होंने उच्च मानकों के साथ काम किया है। उनकी लेखनी तेज लेकिन संतुलित रही है। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। चंद्रशेखर और जेपी से जुड़ा रहा संबंध पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश का पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने उनके जीवन पर पुस्तकें भी लिखी हैं। साथ ही उनका जन्म जेपी (जयप्रकाश नारायण) के गांव में हुआ था, जिससे उनकी सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। काशी से शिक्षा और ग्रामीण पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री ने बताया कि हरिवंश की शिक्षा काशी में हुई है और उनकी जड़ें ग्रामीण समाज से जुड़ी हैं। इसी कारण वे आम लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं और समाज से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी रूप से रखते हैं। शपथ और निर्वाचन की प्रक्रिया हरिवंश नारायण को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा द्वारा उपसभापति पद के लिए प्रस्तावित किया गया, जिसका समर्थन एस. फांग्नोन कोन्यक ने किया। इसके बाद वे निर्विरोध चुने गए और 10 अप्रैल को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली थी। अब उनके नए कार्यकाल से सदन की कार्यवाही और सुचारू संचालन की उम्मीद जताई जा रही है
राज्यसभा की 37 सीटों पर हुए चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। इस जीत के साथ ही उच्च सदन में NDA की कुल ताकत 135 के पार पहुंच गई है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। इससे केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार को आने वाले समय में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में बड़ी राहत मिलेगी। चुनाव परिणाम का पूरा निचोड़ इन 37 सीटों में से 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जिनमें NDA को 13 सीटें मिलीं। वहीं, जिन 11 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से 9 पर NDA ने जीत दर्ज की। कुल मिलाकर NDA ने 37 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं। राज्यों में NDA का दबदबा राज्यों के हिसाब से देखें तो NDA का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा: महाराष्ट्र: 7 में से 6 सीटें बिहार: सभी 5 सीटें असम: सभी 3 सीटें ओडिशा: 4 में से 3 सीटें तमिलनाडु: 5 में से 2 सीटें पश्चिम बंगाल: 5 में से 1 सीट हरियाणा और छत्तीसगढ़: 2 में से 1-1 सीट इसके अलावा, मनोनीत सदस्य के रूप में पूर्व CJI रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी सीट भी NDA के खाते में ही जुड़ने की संभावना है। राज्यसभा में BJP और NDA की स्थिति मजबूत भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही 100 से अधिक सीटों के साथ राज्यसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई थी। ताजा नतीजों के बाद NDA गठबंधन की कुल संख्या 135 से ऊपर पहुंच गई है, जिससे अब सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए विपक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कांग्रेस के लिए राहत की खबर हालांकि विपक्ष को कुल 15 सीटें मिली हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि वह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा बनाए रखने में सफल रही है। महिला आरक्षण बिल पर नजर इस मजबूत स्थिति का सीधा असर आगामी विधायी एजेंडे पर पड़ेगा। सरकार लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने की दिशा में कदम तेज कर सकती है। संभावना है कि आगामी सत्र में इस संबंध में संवैधानिक संशोधन पर चर्चा हो। सरकार का बढ़ा आत्मविश्वास राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार विपक्षी दलों को साथ लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
राज्यसभा चुनाव 2026 में भारतीय राजनीति का समीकरण साफ तौर पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि ओडिशा में भी पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं हरियाणा में वोटों को लेकर विवाद के कारण परिणाम अब तक अधर में लटका हुआ है। बिहार: NDA का दबदबा कायम बिहार की पांचों सीटों पर NDA उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं। इस जीत ने राज्य में NDA की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर दिया है। ओडिशा: BJP आगे, BJD और निर्दलीय को भी सफलता ओडिशा की चार सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सांसद सुजीत कुमार ने 35-35 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने दूसरे वरीयता मतों के जरिए जीत दर्ज की। हरियाणा: मतगणना पर बवाल, नतीजे लंबित हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मतगणना के बीच हंगामे के कारण काउंटिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल यहां के नतीजों का इंतजार जारी है। देशभर का परिदृश्य देश में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 11 सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। अब तक के रुझानों से साफ है कि भाजपा और NDA का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
कोर्ट के फैसले से NDA को मिली बड़ी राहत बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक Anant Singh को पटना की विशेष अदालत ने 16 मार्च को होने वाले मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। दुलारचंद यादव हत्या मामले में फिलहाल जेल में बंद अनंत सिंह पुलिस सुरक्षा में विधानसभा पहुंचकर वोट डाल सकेंगे। पटना की MP-MLA कोर्ट ने आदेश दिया है कि मतदान के बाद उन्हें तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा। अदालत के इस फैसले से National Democratic Alliance (NDA) को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है। बिहार में 16 मार्च को होगा मतदान बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। इन सीटों को लेकर सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी महागठबंधन के बीच कड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल रही है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह Janata Dal (United) से जुड़े हैं और उनका वोट NDA के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पांचवीं सीट के लिए कड़ा गणित बिहार विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ रहा है। NDA के पास फिलहाल 38 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अनंत सिंह का वोट गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यदि उन्हें मतदान की अनुमति नहीं मिलती, तो NDA को विपक्षी खेमे से ज्यादा क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ती। पुलिस सुरक्षा में विधानसभा लाए जाएंगे अनंत सिंह अदालत के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को Beur Central Jail से पुलिस सुरक्षा में बिहार विधानसभा लाया जाएगा। मतदान पूरा होने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत को देखते हुए इस फैसले को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। RJD ने भी उतारा उम्मीदवार इस चुनाव में विपक्षी खेमे की ओर से Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली Rashtriya Janata Dal ने भी उम्मीदवार उतारा है। इससे पांचवीं सीट की लड़ाई और दिलचस्प हो गई है। दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और समर्थन सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं। पहले भी जेल से विधानसभा पहुंचे थे अनंत सिंह गौरतलब है कि अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्या मामले में जेल में बंद हैं। इससे पहले भी उन्हें बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक पद की शपथ लेने के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई थी। मतदान के बाद साफ होगी तस्वीर 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि NDA बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाता है या फिर महागठबंधन पांचवीं सीट पर कब्जा जमाने में सफल होता है। फिलहाल अनंत सिंह को वोट देने की अनुमति मिलने से सियासी समीकरण जरूर बदल गए हैं।
राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जेडीयू द्वारा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को दोबारा मौका नहीं दिए जाने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उनकी ‘साइलेंट वफादारी’ का इनाम दे सकती है और संभव है कि उन्हें मनोनयन के जरिए फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। नीतीश कुमार के फैसले से बदला सियासी समीकरण जेडीयू ने इस बार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। उनकी जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद उच्च सदन में जाने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार राज्यसभा भेजने का निर्णय लेकर अपनी पुरानी परंपरा भी बदल दी। हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में उनका दोबारा नामांकन न होने से राज्यसभा के उपसभापति पद पर भी चुनाव की संभावना बढ़ गई है। बीजेपी दे सकती है नया अवसर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी हरिवंश नारायण सिंह को उनकी वफादारी का इनाम दे सकती है। यह भी चर्चा है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कार्यकाल के बाद खाली होने वाली मनोनीत सीट पर उन्हें मौका मिल सकता है। मुश्किल दौर में भी मोदी सरकार का दिया साथ हरिवंश नारायण सिंह को बीजेपी के करीब माना जाता है। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर विपक्षी गठबंधन का दामन थाम लिया था, तब भी हरिवंश ने केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन जारी रखा था। यहां तक कि जब 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था और जेडीयू ने भी इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया था, तब भी हरिवंश नारायण सिंह कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने समारोह के दौरान राष्ट्रपति का संदेश भी पढ़कर सुनाया था। जेडीयू के भीतर भी हुआ था विवाद इस घटना को लेकर जेडीयू के कुछ नेताओं ने नाराजगी भी जताई थी। पार्टी सांसद ललन सिंह ने उस समय हरिवंश नारायण सिंह के रुख पर तीखी टिप्पणी की थी। हालांकि हरिवंश ने इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और मामला शांत हो गया। मोदी-नीतीश के बीच ‘सेतु’ माने जाते हैं हरिवंश दिल्ली के राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि हरिवंश नारायण सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। कहा जाता है कि उनकी भूमिका के कारण ही नीतीश कुमार की दोबारा एनडीए में वापसी संभव हो पाई, जिसका फायदा लोकसभा चुनावों में बीजेपी को मिला। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्यसभा चुनाव और उपसभापति पद को लेकर बीजेपी क्या फैसला लेती है और हरिवंश नारायण सिंह के राजनीतिक भविष्य की दिशा क्या होती है।
राजनीतिक चर्चाओं के बीच NDA नेताओं का स्पष्ट संदेश बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित राज्यसभा जाने की खबरों से सियासी हलचल तेज हो गई थी। लेकिन अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख Chirag Paswan ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा, “मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं है। नीतीश कुमार ही बिहार का नेतृत्व करते रहेंगे। हमारी डबल इंजन सरकार मजबूती से काम कर रही है।” राज्यसभा उम्मीदवार पर चर्चा जारी, पांचवां नाम तय नहीं चिराग पासवान ने बताया कि NDA गठबंधन की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए पांचवें उम्मीदवार का नाम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर नामों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है और अब चुनाव नजदीक आने के साथ प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा की सूची जारी हो चुकी है और Nitin Nabin को बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। हालांकि NDA की ओर से पांचवां नाम अभी तय नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर क्या कहा? मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की अटकलों पर भी चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से निशांत कुमार, उनके परिवार और उनकी पार्टी का व्यक्तिगत निर्णय है। “जब तक वह सार्वजनिक जीवन में नहीं आते, तब तक इस पर बयान देना ठीक नहीं है। जब यह फैसला गठबंधन के स्तर पर आएगा, तब हम अपनी बात रखेंगे। मैं युवाओं का राजनीति में स्वागत करता हूं, हमारे प्रधानमंत्री भी युवाओं को आगे बढ़ने का मौका देते हैं,” पासवान ने कहा। जेडीयू सूत्रों से उठी थीं चर्चाएं इससे पहले Janata Dal (United) के कुछ सूत्रों के हवाले से खबरें आई थीं कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। यह चर्चा तब तेज हुई जब Election Commission of India ने राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया की घोषणा की। हालांकि केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh ने भी इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा, “होली के समय ऐसी मजाकिया बातें चलती रहती हैं। नीतीश कुमार हमारे मुख्यमंत्री हैं।” 16 मार्च को मतदान, 37 सीटों पर होगा चुनाव चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होगा। इन राज्यों से चुने गए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल स्थिर है बिहार की राजनीति NDA नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की कोई योजना नहीं है। राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह का आधिकारिक बदलाव सामने नहीं आया है।
जेडीयू सूत्रों का दावा – आज भरेंगे नामांकन, अमित शाह रहेंगे मौजूद; बीजेपी के हाथ में आ सकती है कमान बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री Nitish Kumar जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में एक युग के अंत जैसा होगा। बताया जा रहा है कि वे आने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर सकते हैं। जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रह सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगले सप्ताह तक नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस पर उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के हाथ में जा सकती है कमान अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, नया मुख्यमंत्री बीजेपी का ही कोई वरिष्ठ नेता होगा। फिलहाल डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। पटना दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नया मुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से हो सकता है, ताकि सामाजिक संतुलन साधा जा सके। बेटे निशांत कुमार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह फैसला होता है तो जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह बड़ा कदम माना जाएगा। 10 बार शपथ, सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड 75 वर्षीय नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। 2015 से वे लगातार सत्ता में हैं, बीच में कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे। चाहे NDA हो या महागठबंधन, नीतीश कुमार हर चुनाव में प्रमुख चेहरा रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में जब राजनीतिक विश्लेषक उन्हें लगभग खारिज कर चुके थे, तब उन्होंने जबरदस्त वापसी की। महिलाओं के लिए साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उन्हें मजबूत समर्थन दिलाया। विपक्ष के हमले और उम्र को लेकर सवाल विपक्षी दल Rashtriya Janata Dal (RJD) ने हाल के दिनों में नीतीश कुमार की उम्र और सक्रियता को लेकर सवाल उठाए थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि बीजेपी लंबे समय से बिहार में खुद नेतृत्व संभालना चाहती थी। अब अगर यह बदलाव होता है तो बिहार की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। क्या खत्म होगा एक दौर? नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कई बार राजनीतिक पाला बदला, लेकिन अपनी पकड़ बनाए रखी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वे वाकई राज्यसभा जाएंगे और बिहार में नया नेतृत्व सामने आएगा या फिर सियासी समीकरण आखिरी समय में बदल जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।