राष्ट्रीय

हरिवंश नारायण बने राज्यसभा के उपसभापति, तीसरी बार निर्विरोध चुने गए; पीएम मोदी ने की सराहना

Anjali Kumari अप्रैल 17, 2026 0
Harivansh Narayan Singh
Harivansh Narayan Singh

नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण को एक बार फिर निर्विरोध चुना गया है। यह उनका तीसरा कार्यकाल है, जो उच्च सदन में उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है। शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को उन्हें औपचारिक रूप से इस पद के लिए निर्वाचित किया गया। इससे पहले यह पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद उनकी नियुक्ति हुई।

 

पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ


इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण की कार्यशैली और अनुभव की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि पूरे सदन को उन पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपने कार्यकाल में हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है।

 

पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर


प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और करियर पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हरिवंश नारायण का पत्रकारिता में लंबा अनुभव रहा है और उन्होंने उच्च मानकों के साथ काम किया है। उनकी लेखनी तेज लेकिन संतुलित रही है। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।

 

चंद्रशेखर और जेपी से जुड़ा रहा संबंध


पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश का पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने उनके जीवन पर पुस्तकें भी लिखी हैं। साथ ही उनका जन्म जेपी (जयप्रकाश नारायण) के गांव में हुआ था, जिससे उनकी सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है।

 

काशी से शिक्षा और ग्रामीण पृष्ठभूमि


प्रधानमंत्री ने बताया कि हरिवंश की शिक्षा काशी में हुई है और उनकी जड़ें ग्रामीण समाज से जुड़ी हैं। इसी कारण वे आम लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं और समाज से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी रूप से रखते हैं।

 

शपथ और निर्वाचन की प्रक्रिया


हरिवंश नारायण को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा द्वारा उपसभापति पद के लिए प्रस्तावित किया गया, जिसका समर्थन एस. फांग्नोन कोन्यक ने किया। इसके बाद वे निर्विरोध चुने गए और 10 अप्रैल को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली थी। अब उनके नए कार्यकाल से सदन की कार्यवाही और सुचारू संचालन की उम्मीद जताई जा रही है

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Priyanka Gandhi in Parliament over Delimitation Bill debate
परिसीमन बिल पर संसद में घमासान, प्रियंका गांधी  ने कहा - ‘चाणक्य भी चौंक जाते’

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने के प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi ने सरकार पर तीखा हमला बोला, वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने साफ कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। प्रियंका गांधी का हमला, ‘चाणक्य भी चौंक जाते’ संसद में बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आज चाणक्य होते तो सरकार की रणनीति देखकर चौंक जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल अगले चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया है और इसका मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। पीएम मोदी का जवाब, ‘नहीं होगा अन्याय’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को उनका हक दिलाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने के लिए इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने के लिए नई जनगणना और परिसीमन जरूरी यही वजह है कि विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण को टाल रही है, जबकि सरकार इसे जरूरी प्रक्रिया बता रही है। दक्षिण भारत में बढ़ा विरोध दक्षिण भारत के कई राज्यों में इस बिल का विरोध तेज हो गया है। M. K. Stalin और उनकी पार्टी DMK ने विरोध प्रदर्शन किया BRS ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया इन राज्यों को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। संसद के अंदर और बाहर सियासी जंग कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने इस बिल की तुलना ‘डिमोनेटाइजेशन’ से कर दी, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सवाल उठाए। वहीं सरकार का कहना है कि यह ऐतिहासिक सुधार है, जो देश की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूत करेगा। आगे क्या? परिसीमन बिल पर संसद में बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों का कैसे जवाब देती है और क्या यह बिल मौजूदा स्वरूप में पास हो पाता है या इसमें बदलाव होते हैं।  

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भीषण गर्मी का प्रकोप: देश में पारा 50°C तक पहुंचने की आशंका

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही तीव्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कई क्षेत्रों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। महाराष्ट्र के कई जिलों में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने लू का अलर्ट जारी किया है। विदर्भ का अकोला लगभग 44 डिग्री तापमान के साथ दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल हो गया है।   नागपुर, अमरावती और वर्धा में भी बढ़ी मुश्किलें महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती और वर्धा जैसे शहरों में भी भीषण गर्मी का असर देखा जा रहा है। ये शहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों की सूची में टॉप 10 में जगह बना चुके हैं। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों को दिनचर्या में बदलाव करना पड़ रहा है।   2026 में सामान्य से अधिक गर्मी की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। मार्च से मई के बीच हीटवेव की तीव्रता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो कुछ इलाकों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।   भारत के 20 शहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शामिल हाल के तापमान आंकड़ों में दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में भारत के लगभग 20 शहर शामिल हैं। चंद्रपुर, रायपुर, भिलाई, वाराणसी और सासाराम जैसे शहरों में भी 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान दर्ज किया गया है। यह स्थिति देश में बढ़ती गर्मी की गंभीरता को दर्शाती है।   हीटवेव को लेकर सतर्क रहने की सलाह मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में हीटवेव के और तेज होने की चेतावनी दी है। उन्होंने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सावधानी नहीं बरती गई तो यह गर्मी का दौर और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।

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परिसीमन पर अमित शाह का भरोसा: दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम नहीं, बल्कि बढ़ेगा, 5 पॉइंट्स में समझाया

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Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 लागू, 33% महिला आरक्षण पर केंद्र का नोटिफिकेशन जारी

महिला आरक्षण को लेकर जारी सियासी बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए महिला आरक्षण कानून को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 16 अप्रैल 2026 से इसे प्रभावी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। क्या है नया अपडेट? सरकार की अधिसूचना के मुताबिक: Constitution (106th Amendment) Act 2023 के प्रावधान अब 16 अप्रैल 2026 से लागू माने जाएंगे इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी तुरंत लागू नहीं होगा आरक्षण हालांकि कानून लागू हो गया है, लेकिन इसका तुरंत असर चुनावों में नहीं दिखेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार: आरक्षण लागू करने के लिए पहले जनगणना जरूरी है इसके बाद परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया पूरी होगी तभी सीटों का पुनर्विन्यास कर आरक्षण लागू किया जा सकेगा यानी मौजूदा संसद या विधानसभा में यह लागू नहीं होगा। 2029 या उसके बाद लागू होने की संभावना रिपोर्ट्स के मुताबिक: 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन होगा इसके बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा ऐसे में 2029 के आम चुनाव में इसे लागू करने की संभावना जताई जा रही है नोटिफिकेशन पर सवाल क्यों? कानून के नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद कई सवाल उठ रहे हैं: जब लागू करना अभी संभव नहीं, तो अभी अधिसूचना क्यों? सरकार ने “तकनीकी कारणों” का हवाला दिया, लेकिन विस्तार नहीं दिया क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’? सितंबर 2023 में संसद ने इस कानून को पास किया था: महिलाओं को 1/3 (33%) आरक्षण SC/ST आरक्षित सीटों में भी 33% महिलाओं के लिए आरक्षित महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम महिला आरक्षण कानून का लागू होना ऐतिहासिक फैसला जरूर है, लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी जब यह जमीन पर लागू होगा। फिलहाल यह साफ है कि जनगणना और परिसीमन के बिना आरक्षण लागू नहीं हो सकता, इसलिए महिलाओं को इसका सीधा लाभ पाने के लिए अभी कुछ साल इंतजार करना होगा।  

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