रामगढ़। रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग एनएच-23 पर बारलौंग के पास बुधवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में ऑटो चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहा। जानकारी के अनुसार, यात्रियों से भरा एक ऑटो गोला से रामगढ़ की ओर जा रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बस ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके परखच्चे उड़ गए। हादसे में ऑटो में सवार सभी यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में दो को मृत घोषित किया गया घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तुरंत रामगढ़ सदर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने ऑटो चालक और सुकरीगढ़ा निवासी रिया कुमारी को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि रिया किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रामगढ़ जा रही थीं। वहीं, हादसे में घायल रविरंजन भारती और अमित कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों पतरातू रेलवे में लोको पायलट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वे ड्यूटी समाप्त कर वापस लौट रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया। पुलिस ने शुरू की जांच हादसे की सूचना मिलते ही रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से राहत एवं बचाव कार्य चलाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटनाग्रस्त बस और ऑटो को जब्त कर लिया गया है। सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कमलेश्वर प्रसाद ने बताया कि चार गंभीर घायलों को एक साथ अस्पताल लाया गया था, जिनमें दो की मौत हो चुकी थी। शेष दो घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें रांची रेफर किया गया। पुलिस मामले की जांच कर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
रामगढ़। एक दोस्त का जन्मदिन मनाकर घर लौट रहे दो युवकों की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। यह हृदयविदारक हादसा रामगढ़ जिले के बासल थाना क्षेत्र स्थित सियारी टोला के पास हुआ। दुर्घटना के बाद दोनों युवक पूरी रात घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़े रहे, लेकिन अंधेरा और सुनसान इलाका होने के कारण किसी को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। बुधवार सुबह स्थानीय लोगों की नजर पड़ने पर घटना का खुलासा हुआ। जन्मदिन मनाकर लौट रहे थे दोनों दोस्त जानकारी के अनुसार, सौंदा डी निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ संदीप कुमार का मंगलवार को जन्मदिन था। जन्मदिन के अवसर पर वह अपने मित्र राहुल कुमार के साथ पतरातू डैम के समीप एक होटल में जश्न मनाने गया था। देर रात दोनों बाइक से अपने घर लौट रहे थे। अनियंत्रित बाइक दीवार से टकराई बताया जा रहा है कि सियारी टोला के पास पहुंचते ही उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। तेज रफ्तार के कारण बाइक डिवाइडर पार कर सड़क से काफी दूर जा पहुंची और एक अर्धनिर्मित मकान की दीवार से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। पूरी रात सड़क किनारे पड़े रहे घायल हादसे के बाद दोनों युवक सड़क से लगभग 100 फीट दूर जा गिरे। रात का समय और कम आवाजाही होने के कारण किसी को दुर्घटना की भनक नहीं लगी। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उधर, देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजन उनकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सुबह हुआ हादसे का खुलासा बुधवार सुबह जब ग्रामीण उस रास्ते से गुजरे तो उन्होंने दोनों युवकों को सड़क किनारे पड़ा देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की और परिजनों को सूचना दी। शवों की पहचान होते ही परिवार में कोहराम मच गया। इलाके में शोक की लहर घटना की खबर फैलते ही सौंदा डी और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल बन गया। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल रामगढ़ भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में बाइक के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने की बात सामने आई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राहुल दुबे गैंग से जुड़े छह अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक किशोर को भी निरुद्ध किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद किए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत के निर्देश पर पतरातु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित विशेष छापेमारी दल ने की। पुलिस के अनुसार अपराधी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी पुलिस को 25 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि पतरातु थाना क्षेत्र में कुछ अपराधी संगठित होकर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक देशी लोडेड पिस्टल, 34 जिंदा राउंड, दो मैगजीन, तीन मोटरसाइकिल और छह मोबाइल फोन बरामद किए। कई गोलीबारी मामलों में शामिल होने की बात कबूली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अपराधियों ने पूछताछ में रेलवे फ्लाईओवर, ओसम डेयरी प्लांट और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट में हुई गोलीबारी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास साव, विशाल कुमार, बिंदु कुमार रवि, हीरालाल कुमार, दिगंबर प्रजापति उर्फ डेगन और एहतेसाम अंसारी उर्फ दुलर्भ के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि विकास साव और दिगंबर प्रजापति के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाएंगे आरोपी इस मामले में पतरातु थाना कांड संख्या 126/26 के तहत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। कार्रवाई में एसडीपीओ पतरातु राघवेंद्र शर्मा समेत कई थाना प्रभारी और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मी शामिल थे।
रांची। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में रेलवे सिग्नलिंग केबल चोरी मामले का रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने खुलासा कर दिया है। आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से करीब 20 मीटर लंबा 12 कोर रेलवे सिग्नलिंग केबल बरामद किया गया है, जिसकी कीमत लगभग दो हजार रुपये बताई जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में रेलवे संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहन डे (50 वर्ष), राहुल कुमार (18 वर्ष) और गौतम कुमार (20 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी पतरातू के सौंदा बगीचा क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। आरपीएफ ने सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लोकेशन बॉक्स से काटा गया था सिग्नलिंग केबल आरपीएफ पतरातू पोस्ट के अनुसार, 23 मई की रात करीब आठ बजे पतरातू प्वाइंट संख्या-305 के पास स्थित लोकेशन बॉक्स से 2×12 कोर सिग्नलिंग केबल काटकर चोरी कर लिया गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद 24 मई को संयुक्त जांच रिपोर्ट तैयार कर मामले की जांच शुरू की गई। जूट की बोरी में ले जा रहे थे चोरी का सामान शनिवार को जांच के दौरान आरपीएफ टीम पतरातू बस्ती क्षेत्र से लौट रही थी। इसी दौरान ईस्ट केबिन के पास तीन युवक जूट की बोरी में भारी सामान ले जाते दिखाई दिए। संदेह होने पर टीम ने उन्हें रोककर तलाशी ली, जिसमें बोरी से तीन टुकड़ों में करीब 20 मीटर रेलवे सिग्नलिंग केबल बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला जुर्म आरपीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसों के लालच में 23 मई की रात केबल काटकर पास के एक टूटे केबिन में छिपा दिया था। बाद में वे उसे बेचने के लिए ले जा रहे थे। आरोपियों के पास रेलवे संपत्ति ले जाने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। मामले में उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार की शिकायत पर आरपी (यूपी) एक्ट की धारा-3 और रेलवे अधिनियम की धारा-147 के तहत केस दर्ज किया गया है। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि सिग्नलिंग केबल कटने से ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता था और इससे बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बन सकती थी।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुट गई है।पुलिस को 26 अप्रैल की रात करीब 8 बजे गुप्त सूचना मिली थी कि सोलिया गांव का निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम ने तत्परता दिखाते हुए सोलिया गांव में छापा मारकर आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर उसके घर से तुर्की निर्मित जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने खुलासा किया कि यह हथियार उसे एक आपराधिक गिरोह के सदस्य ने फायरिंग की घटना के बाद छिपाकर रखने के लिए दिया था। इस खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। पतरातू थाना में दर्ज़ हुआ केस इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और पहले भी उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।छापेमारी दल में पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता सहित कई पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रामगढ़। रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित झारखंड इस्पात प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। श्रम मंत्री संजय यादव ने प्लांट प्रबंधन पर मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही और शोषण का आरोप लगाते हुए कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की गहन जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। फर्नेस ब्लास्ट को बताया गंभीर हादसा मंत्री मंगलवार को हेसला बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने मृत मजदूरों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि फर्नेस फटने की घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कमेटी गठित की है। श्रम विभाग समेत अन्य एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं। घायल मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप रांची के देव कमल अस्पताल में भर्ती घायल मजदूरों से मुलाकात के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन के दबाव में भट्टी को जरूरत से अधिक गर्म किया गया, जिससे विस्फोट जैसी स्थिति बनी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भट्टी के पास बनी सीढ़ियां इतनी संकरी थीं कि आपात स्थिति में वहां से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। मृतकों के परिजनों को मुआवजा घटना के बाद प्लांट प्रबंधन, जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुए समझौते के तहत तीन मृत मजदूरों के परिजनों को 21-21 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। मंत्री ने स्वयं परिजनों को चेक सौंपे और बच्चों की पढ़ाई व परिवार के भरण-पोषण में हर संभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज का आश्वासन भी दिया गया।
रामगढ़। रामगढ़ के इस्पात फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में मृत दो मजदूरों के परिजनों को 21-21 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान किया जायेगा। बता दें कि सोमवार को हुए इस ब्लास्ट में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 7 घायल हो गये थे। घायलों में दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। रामगढ़ के रांची रोड स्थित होप अस्पताल और रांची के देवकमल अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है। ग्रामीण कर रहे विरोध-प्रदर्शन घटना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार सुबह करीब छह बजे से फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों ने मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। देर रात हुआ समझौता करीब 16 घंटे तक चले इस आंदोलन का अंत रात लगभग 10 बजे त्रिपक्षीय वार्ता के बाद हुआ। वार्ता में प्रशासन, फैक्ट्री प्रबंधन और ग्रामीणों के प्रतिनिधियों के बीच कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी। समझौते के तहत मृतक मजदूरों के आश्रितों को 21-21 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया गया। साथ ही घायलों के समुचित और बेहतर इलाज की पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन ने अपने ऊपर ली है। इसके अलावा यह भी तय हुआ कि इस हादसे में यदि कोई मजदूर स्थायी रूप से दिव्यांग होता है तो उसके एक आश्रित को फैक्ट्री में नौकरी दी जाएगी। प्रबंधन ने दिया लिखित आश्वासन इस संबंध में प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन भी दिया गया है। समझौते के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और फैक्ट्री गेट से हट गए, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
रामगढ़। रामगढ़ थाना क्षेत्र के अरगड्डा मोड़ के समीप हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्लांट प्राइवेट लिमिटेड में सोमवार तड़के 4 बजे भीषण ब्लास्ट हुआ। फर्नेस में हुए ब्लास्ट से हड़कंप मच गया। हादसे में 9 मजदूर बुरी तरह झुलसकर घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गयाl जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। यहां प्राथमिक उपचार कर सभी गंभीर रूप से घायल लोगों को रांची के देवकमल अस्पताल रेफर कर दिया गया है l अचानक हुआ तेज धमाका जानकारी के अनुसार प्लांट के फर्नेस में काम के दौरान अचानक तेज धमाका हुआl इसकी चपेट में आकर मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों की पहचान अखिला राय, बृजलाल बेदिया, राजबालन यादव, महेश महतो,अशोक बेदिया, पंडित जी (राजू झा), छोटू साव, सुरेश बेदिया और इशया के रूप में हुई है। 7 मजदूर गंभीर घटना के बाद सभी घायलों को रांची रोड स्थित द हॉप हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों ने बताया कि इनमें से 7 मजदूरों की हालत अत्यंत गंभीर है और वे 80-90 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी सात घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित देवकमल अस्पताल रेफर कर दिया गया है। इलाके में फैली दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना के बाद प्लांट में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कामकाज कुछ देर के लिए ठप हो गया।
रामगढ़। रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों ने कहर बरपाया है। यहां बंदा और मुरपा गांव में हाथियों ने हमला कर तीन लोगों को मार डाला। इससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश है। मुरपा में वृद्ध को कुचला जानकारी के अनुसार, सबसे पहले मुरपा गांव में महुआ चुनने जा रहे वृद्ध श्याम देव साव पर हाथियों ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हाथियों का झुंड बंदा गांव के बांग्ला भट्ठा क्षेत्र में पहुंचा, जहां शौच के लिए जा रहे दो मजदूरों युगल भुईया और धीरज भुईया पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दोनों की घटनास्थल पर ही जान चली गई। वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची मौके पर घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मृतकों की पहचान कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में हाथियों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन वन विभाग समय रहते कोई चेतावनी जारी नहीं करता। साथ ही, हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने में भी विभाग विफल साबित हो रहा है। मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा इस संबंध में गोला वन क्षेत्र पदाधिकारी नीलेश पोद्दार ने बताया कि विभाग को पहले हाथियों के दूसरे जिले में होने की जानकारी थी, लेकिन अचानक उनका रुख इस इलाके की ओर हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा। गांव में दहशत फिलहाल गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को जल्द से जल्द सुरक्षित क्षेत्र में खदेड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहकर स्थिति को संभालने और लोगों को शांत कराने का प्रयास कर रही है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातु प्रखंड में पानी की गंभीर किल्लत ने स्थानीय लोगों का सब्र काट दिया। कोतो पंचायत और न्यू मार्केट के सैकड़ों ग्रामीण बाल्टी, डेगची और अन्य बर्तन लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि इलाके में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। ग्रामीण अपने बर्तन लेकर पहुंचे प्रदर्शन में ग्रामीण अपने हाथों में खाली बाल्टी और बर्तन लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि जब घरों में पानी नहीं है, तो ये बर्तन उनकी परेशानी का प्रतीक बन गए हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी और समाजसेवी जयप्रकाश सिंह, ननकी सिंह और मुखिया निधि सिंह ने टोकीसुद जलमीनार के संवेदक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और उनकी ब्लैकलिस्टिंग की मांग की। समाजसेवी राहुल कुमार ने कहा समाजसेवी राहुल कुमार ने कहा, “पानी कोई खैरात नहीं है, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।” उन्होंने प्रशासन पर जल संकट को गंभीरता से लेने और तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। ग्रामीणों ने प्रखंड विकास अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता को रामगढ़ उपायुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्थायी समाधान की मांग की गई है ताकि इलाके में पानी की समस्या का अंत हो सके। आंदोलन में सैकड़ों लोग शामिल हुए इस आंदोलन में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों की अच्छी संख्या थी। स्थानीय वार्ड सदस्य और प्रतिनिधियों के साथ आम लोग भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि पानी की कमी पूरे इलाके में गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई करेगा और जल संकट से राहत दिलाएगा। वहीं, अगर समाधान समय पर नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन के लिए चेतावनी भी प्रस्तुत कर दी है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रामगढ़। रामगढ में 3 अप्रैल की सुबह जंगली हाथियों के हमले से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। बंदा, मुरपा और धोरधोरिया में हुई अलग-अलग घटनाओं के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मृतक के परिजन को वन विभाग के द्वारा अलग-अलग 25000-25000 रुपये मुआवजा दिया गया उसके बाद ही शव को उठाया। कैसे हुआ हमला? जानकारी के अनुसार, बंदा क्षेत्र में ईंट भट्ठा पर काम कर रहे तालाटांड पतरातू निवासी 25 वर्षीय धीरज भुइयां और कुजू निवासी 25 वर्षीय युगल भुइयां पर अचानक हाथियों के झुंड ने हमला कर दिया. दोनों को कुचलकर मौके पर ही मार डाला गया. वहीं, महुआ चुन रहे 70 वर्षीय श्याम देव साहू को भी अपनी चपेट में लेकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसा, धीरज भुइयां अपने पीछे पत्नी सहित दो पुत्र एवं एक पुत्री को छोड़ गये. घायल की अस्पताल में इलाज जारी इसके साथ ही धोरधोरिया सुतरी गांव में महुआ चुन रही एक महिला अदरी देवी 74 वर्ष, पति स्व पहलू बेदिया को भी हाथी ने पटक कर घायल कर दिया. घायल महिला का प्राथमिक इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला में चल रहा है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।