झारखंड

रामगढ़ में दर्दनाक सड़क हादसा, बस-ऑटो की टक्कर में दो की मौत

anjali kumari जून 25, 2026 0
Ramgarh Road Accident
Ramgarh Road Accident

रामगढ़। रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग एनएच-23 पर बारलौंग के पास बुधवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में ऑटो चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहा।

 

जानकारी के अनुसार, यात्रियों से भरा एक ऑटो गोला से रामगढ़ की ओर जा रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बस ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके परखच्चे उड़ गए। हादसे में ऑटो में सवार सभी यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

अस्पताल में दो को मृत घोषित किया गया


घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तुरंत रामगढ़ सदर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने ऑटो चालक और सुकरीगढ़ा निवासी रिया कुमारी को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि रिया किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रामगढ़ जा रही थीं।


वहीं, हादसे में घायल रविरंजन भारती और अमित कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों पतरातू रेलवे में लोको पायलट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वे ड्यूटी समाप्त कर वापस लौट रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया।

 

पुलिस ने शुरू की जांच


हादसे की सूचना मिलते ही रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से राहत एवं बचाव कार्य चलाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटनाग्रस्त बस और ऑटो को जब्त कर लिया गया है।


सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कमलेश्वर प्रसाद ने बताया कि चार गंभीर घायलों को एक साथ अस्पताल लाया गया था, जिनमें दो की मौत हो चुकी थी। शेष दो घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें रांची रेफर किया गया। पुलिस मामले की जांच कर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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श्रावणी मेले से पहले देवघर सदर अस्पताल अलर्ट, जांच लैब अब 24 घंटे होगी संचालित

देवघर। आगामी श्रावणी मेले को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सदर अस्पताल स्थित जिला पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री (DPHL) की कार्य अवधि बढ़ाकर अब तीन पालियों यानी 24 घंटे संचालित करने की योजना बनाई गई है। अब तक यह केंद्र केवल एक पाली में चलता था।   पहले एक पाली में चलती थी लैब, मरीज होते थे परेशान सदर अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण अब तक जांच केंद्र एक ही पाली में संचालित होता था। इससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मरीजों की समस्याओं को देखते हुए अतिरिक्त कर्मियों की व्यवस्था की गई और अब जांच केंद्र दो पालियों में कार्य कर रहा है।   मेले के दौरान हजारों मरीज रोज पहुंचते हैं अस्पताल डॉ. सुषमा वर्मा ने बताया कि श्रावणी मेले के दौरान सदर अस्पताल पर मरीजों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। देवघर का सदर अस्पताल न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र की भूमिका निभाता है। मेले के दौरान प्रतिदिन हजारों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं।   24 घंटे लैब चलाने के लिए वरीय अधिकारियों से हो रही चर्चा श्रावणी मेले के समय जांच केंद्र को 24 घंटे संचालित करने के लिए सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से चर्चा की जा रही है। हालांकि देवघर के कई स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

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रांची मुहर्रम को लेकर बदला रहेगा ट्रैफिक व्यवस्था, देखें पूरी सूची

रांची। मुहर्रम पर्व को लेकर राजधानी रांची में 27 जून को ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने ट्रैफिक प्लान जारी करते हुए आम नागरिकों से अपील की है कि यदि जरूरत न हो तो उस दिन वाहन लेकर घर से बाहर न निकलें।   कब से कब तक रहेगा प्रभाव मुहर्रम पर्व 26-27 जून को मनाया जाएगा। 27 जून को रांची के विभिन्न स्थानों से जुलूस निकाले जाएंगे। इस दौरान सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक या जुलूस समाप्ति तक निजी एवं यात्री वाहनों का परिचालन कई मार्गों पर पूरी तरह बंद रहेगा।   इन प्रमुख मार्गों पर रहेगी पाबंदी •    किशोरी यादव चौक से अपर बाजार महावीर मंदिर चौक होकर शहीद चौक के तरफ सामान्य वाहनों का परिचालन बंद रहेगा।  •    शहीद चौक से अपर बाजार महावीर मंदिर चौक की तरफ सामान्य वाहनों का परिचालन बंद रहेगा।  •    सुभाष चौक से अपर बाजार, महावीर मंदिर की तरफ सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    कचहरी चौक से शहीद चौक अल्बर्ट एक्का चौक आने वाले मार्ग में सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    चडरी तलाब से अल्बर्ट एक्का चौक की तरफ आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    प्लाजा चौक से अल्बर्ट एक्का चौक आने वाले मार्ग में सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    पुरुलिया रोड से सर्जना चौक आने वाले मार्ग में सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    एस०एन० गागुंली रोड/विष्णु गली/बुद्यिया गली एवं राधेश्याम गली से मेन रोड आने वाली सामान्य वाहनों का परिचालन बंद रहेगा।  •    सुजाता चौक से मेन रोड की तरफ आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    वूल हाउस के पास से मेन रोड की तरफ आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    कर्बला चौक से रतन पी०पी० चौक आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    कडरू से रेडिसन ब्लू होटल होकर मेन रोड आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    कमांडेंट आवास मोड़ से राजेंद्र चौक आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन बंद रहेगा।  •    मेकॉन चौक से राजेंद्र चौक आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।  •    तुलसी चौक से अंबेडकर चौक आने वाले सामान्य वाहनों का परिचालन वर्जित रहेगा।    आवश्यकतानुसार अन्य मार्गों पर भी ट्रैफिक डाइवर्ट किया जा सकता है।   एंबुलेंस को मिलेगा विशेष रूट ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि जुलूस के दौरान एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष रूट की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नागरिक ट्रैफिक पुलिस से संपर्क कर सहायता ले सकते हैं।

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क्या क्लस्टर सिस्टम खत्म कर देगा झारखंड की जनजातीय भाषाएं?

रांची। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू क्लस्टर सिस्टम से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) विभागों में पढ़ने वाले छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीटों की कटौती, विषयों के पुनर्वितरण और चांसलर पोर्टल के माध्यम से हो रहे सीट आवंटन को लेकर छात्र, शोधार्थी और भाषा प्रेमी गहरी चिंता में हैं।  झारखंड टीआरएल संघ ने भी इस व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को क्लस्टर सिस्टम से बाहर रखने की मांग की है।    क्या है क्लस्टर सिस्टम? दरअसल, क्लस्टर सिस्टम के तहत आसपास के कई कॉलेजों को एक समूह में जोड़ दिया जाता है और विषयों का बंटवारा किया जाता है। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन झारखंड में इसके क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं जैसे संवेदनशील विषयों में स्थानीय जरूरतों और सांस्कृतिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान तलाशना आवश्यक होगा। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत में बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा की संभावना है।    भाषाविद और संघ की मांग कुरमाली भाषा के विद्वान राजाराम महतो का कहना है कि भाषा संरक्षण के लिए छात्रों की सहज पहुंच और पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी है। झारखंड TRL संघ ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जनजातीय भाषाओं को क्लस्टर सिस्टम से बाहर रखने की मांग की है।   विश्वविद्यालय का पक्ष रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि यह व्यवस्था उपलब्ध शिक्षकों और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए लागू की गई है। हालांकि उन्होंने माना कि छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं पर विश्वविद्यालय गंभीरता से विचार कर रहा है। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत में बहस का विषय बना हुआ है।

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