तमिल फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री Trisha Krishnan एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को चेन्नई के रोहिणी सिल्वर स्क्रीन्स में उनकी फिल्म Karuppu की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान ऐसा वाकया हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। शो खत्म होने के बाद जैसे ही Trisha Krishnan बाहर निकलीं, फैंस ने उनकी कार को घेर लिया और तस्वीरें व वीडियो लेने लगे। इस दौरान फैंस लगातार Joseph Vijay के नारे लगाते नजर आए। विजय के नाम पर शरमाईं तृषा वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक फैन ने Trisha Krishnan से कहा— “थलपति को मेरा नमस्ते कहना।” इस पर एक्ट्रेस मुस्कुराईं और जवाब दिया “कंडीपा” (जरूर), जिसके बाद उन्होंने तुरंत नजरें झुका लीं। इसी दौरान उनका शरमाना और मुस्कुराना कैमरों में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस ने कार को घेरकर लगाए नारे स्क्रीनिंग के बाद जैसे ही Trisha Krishnan बाहर निकलीं, फैंस ने उनकी कार को घेर लिया। कई लोग तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे और लगातार Joseph Vijay को लेकर सवाल पूछते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया है। पहले भी साथ नजर आए थे तृषा और विजय Trisha Krishnan पहले भी कई मौकों पर Joseph Vijay के साथ नजर आ चुकी हैं, जिसके चलते दोनों के रिश्ते को लेकर अक्सर अटकलें लगती रही हैं। हाल ही में एक शादी समारोह में दोनों को एक साथ देखा गया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में जोड़ी फैंस के बीच यह वीडियो अब नए सिरे से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे सिर्फ फैन मोमेंट बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे हैं।
चेन्नई, एजेंसियां। तृषा कृष्णन और विजय एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद तृषा कृष्णन ने ऐसा पोस्ट साझा किया, जिसने इंटरनेट पर सनसनी मचा दी। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के बाद तृषा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई तस्वीरें पोस्ट कीं। अभिनेत्री समुद्री हरे रंग की पारंपरिक साड़ी में नजर आईं, जिसमें उनका लुक फैंस को काफी पसंद आया। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा उनके कैप्शन की हुई, जिसमें उन्होंने लिखा, “प्यार हमेशा बुलंद होता है।” सोशल मीडिया पर शुरू हुई अटकलें तृषा के इस पोस्ट को सोशल मीडिया यूजर्स ने विजय के साथ उनके कथित रिश्ते से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। पिछले कुछ महीनों से दोनों की नजदीकियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि दोनों सितारों ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। समारोह के दौरान तृषा अपनी मां Uma Krishnan के साथ पहुंची थीं। विजय के भाषण के दौरान उनकी भावुक प्रतिक्रिया भी कैमरे में कैद हुई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई क्लिप्स में अभिनेत्री मुस्कुराते हुए भावुक नजर आईं। विजय की राजनीतिक पारी पर सबकी नजर इस बीच विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने तमिलनाडु में बहुमत हासिल कर सरकार बनाई है। विजय अब राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके हैं और इसे तमिल राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं, तृषा अपने आगामी फिल्म प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। अभिनेत्री जल्द ही Karuppu में अभिनेता Suriya के साथ नजर आएंगी, जो 14 मई 2026 को रिलीज होने वाली है।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री Trisha Krishnan लंबे समय से तमिल और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए हैं। अपने करियर की निरंतर सफलता और लोकप्रियता के दम पर उन्होंने न सिर्फ फिल्मी दुनिया में ऊंचा मुकाम हासिल किया है, बल्कि करोड़ों की संपत्ति भी अर्जित की है। आज उनका नाम उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल है, जिनकी पहचान क्षेत्रीय सिनेमा से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। कितनी है कुल संपत्ति? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तृषा कृष्णन की कुल संपत्ति करीब 85 करोड़ रुपये आंकी जाती है। उनकी कमाई का प्रमुख स्रोत फिल्में हैं, जहां वह एक फिल्म के लिए करोड़ों रुपये फीस चार्ज करती हैं। इसके अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट, विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन से भी उनकी आय का बड़ा हिस्सा आता है। आलीशान घर और लग्जरी लाइफस्टाइल तृषा अपनी शानदार लाइफस्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं। चेन्नई में उनका एक भव्य घर है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जाती है। इसके अलावा हैदराबाद में भी उन्होंने प्रीमियम प्रॉपर्टी में निवेश किया हुआ है। लग्जरी कारों के प्रति उनका खास शौक है और उनके कलेक्शन में Mercedes-Benz, BMW और Range Rover जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। यही वजह है कि उनकी लाइफस्टाइल अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है। फिल्मों से मिली पहचान तृषा ने अपने करियर की शुरुआत 1999 में की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान Varsham से मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई सफल फिल्मों का हिस्सा बनीं। उनकी चर्चित फिल्मों में Ghilli, Ponniyin Selvan और Leo शामिल हैं। हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है, जिसके चलते उनकी फीस और डिमांड दोनों बढ़ी हैं। Vijay के साथ जोड़ी पर चर्चा तृषा और Vijay की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही है। दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं और उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया जाता है। हालांकि, निजी रिश्तों को लेकर दोनों के बीच अफवाहें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन इस पर कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्टारडम और प्रभाव तृषा कृष्णन का करियर इस बात का उदाहरण है कि लगातार मेहनत, सही फिल्म चयन और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस किसी भी कलाकार को इंडस्ट्री में लंबे समय तक बनाए रख सकता है। वह आज भी नए प्रोजेक्ट्स के साथ अपने करियर को आगे बढ़ा रही हैं और फैंस के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
चेन्नई, एजेंसियां। एक्टर थलापति विजय ने तमिल राजनीति में हीरो की तरह एंट्री की है। उनकी पार्टी TVK ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 110 से ज्यादा सीटें जीत ली हैं। अब उनका सीएम बनना तय है। TVK की जीत में विजय के 'लेडी लक' को अहम माना जा रहा है। आज उसी 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन है, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था, जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, संगीता सोर्नालिंगम ने अपनी तलाक याचिका में पति विजय पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया था। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। विजय और संगीता ने 1999 में शादी की थी। दोनों के 2 बच्चे हैं। विजय ने हाल ही में तलाक अनाउंस करने के बाद तृषा के साथ पब्लिक अपीयरेंस दी। कई लोगों का मानना था कि तलाक के बाद दोनों ने रिश्ता ऑफिशियल कर दिया है। इसी बीच विजय के बॉडीगार्ड ने एक पोस्ट शेयर की जिसमें लिखा था, अब अफवाह क्लियर करने का समय आ चुका है। आज जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आ रहा है, आज ही तृषा अपना जन्मदिन मना रही हैं। तृषा सुबह सबसे पहले तिरुमला मंदिर गईं और दोपहर होते-होते विजय के घर पहुंच गईं। साउथ मीडिया पोर्टल की रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद दोनों शादी की घोषणा कर सकते हैं।
चेन्नई, एजेंसियां। साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने अपने 43वें जन्मदिन की शुरुआत आध्यात्मिक माहौल में की। इस खास मौके पर वह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सुबह-सुबह मंदिर पहुंची तृषा का यह अंदाज फैंस को काफी पसंद आया। सादगी भरे लुक ने जीता दिल मंदिर परिसर से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में तृषा बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आईं। उन्होंने व्हाइट फ्लोरल आउटफिट पहना था और चेहरे पर मुस्कान के साथ फैंस का अभिवादन किया। उनका शांत और सौम्य व्यवहार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस से की मुलाकात, मिली ढेरों शुभकामनाएं दर्शन के दौरान तृषा ने वहां मौजूद फैंस से मुलाकात भी की। उन्होंने लोगों से बातचीत की और जन्मदिन की शुभकामनाएं स्वीकार कीं। उनके इस विनम्र व्यवहार ने लोगों का दिल जीत लिया। पहले ही दे दिया था संकेत मंदिर जाने से पहले तृषा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक छोटा वीडियो शेयर किया था, जिसमें ‘तिरुपति’ का बोर्ड दिखाई दे रहा था। इससे उन्होंने फैंस को पहले ही इशारा दे दिया था कि वह अपने जन्मदिन पर भगवान के दर्शन करने जा रही हैं। सेलिब्रिटीज के लिए खास आस्था का केंद्र तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां कई फिल्मी सितारे समय-समय पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। तृषा से पहले भी कई बड़े सितारे यहां आकर आशीर्वाद ले चुके हैं।
साउथ सुपरस्टार और नेता Vijay इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी Sangeeta Sornalingam से तलाक और अभिनेत्री Trisha Krishnan के साथ रिश्ते की चर्चाएं लगातार हो रही हैं। हालांकि इन अफवाहों के बीच विजय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है और अपने समर्थकों से अपील की है कि वे इन विवादों पर ध्यान न दें। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित एक महिला सम्मेलन में विजय ने कहा कि उनके आसपास चल रही निजी समस्याओं को लेकर लोग चिंता न करें। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे लोगों के समय के लायक नहीं हैं और वह खुद इनका समाधान कर लेंगे। विजय ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब उनके कारण उनके प्रशंसक या समर्थक परेशान होते हैं। विजय ने कहा कि उनका ध्यान निजी विवादों पर नहीं बल्कि जनता के कल्याण और राजनीति में अपने लक्ष्यों पर है। वह अपनी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के जरिए आगामी Tamil Nadu विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं और जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहते हैं। सम्मेलन में विजय ने महिलाओं और परिवारों के लिए कई बड़े वादे भी किए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा युवतियों की शादी पर सोने की अंगूठी और सिल्क साड़ी देने का भी वादा किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी परिवारों को साल में छह एलपीजी सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे, जबकि स्कूलों में ड्रॉपआउट रोकने के लिए हर मां या अभिभावक को सालाना 15,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। विजय ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में जन्म लेने वाले हर नवजात बच्चे को सरकार की ओर से ‘आशीर्वाद’ के रूप में सोने की अंगूठी और बेबी वेलकम किट दी जाएगी। महिला स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक का ऋण देने की योजना भी उन्होंने बताई। साथ ही राशन दुकानों, स्कूलों और कॉलेजों के जरिए महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड देने की बात कही। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विजय ने ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू करने की घोषणा की। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में ‘स्मार्ट पैनिक बटन’ की सुविधा, पुलिस में महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘रानी वेलु नचियार’ नाम से विशेष यूनिट बनाने और राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की व्यवस्था करने का भी वादा किया। गौरतलब है कि विजय की पत्नी संगीता ने दिसंबर 2025 में तलाक के लिए याचिका दायर की थी। दोनों की शादी 1999 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं-एक बेटा और एक बेटी। निजी जीवन को लेकर उठे विवादों के बीच विजय अब अपने राजनीतिक एजेंडे और जनकल्याण योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।