पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान जारी है। दक्षिण 24 परगना जिले की 144-फलता सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराई जा रही है। पिछली वोटिंग के दौरान ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने मतदान रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया था। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा ले रहे हैं। वोटों की गिनती 24 मई को होगी। वोटरों ने कहा- इस बार माहौल शांतिपूर्ण मतदाता देबाशीष घोष ने कहा कि इस बार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और लोग बिना किसी डर के वोट डाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पिछली बार लोगों को घर-घर जाकर तय समय पर वोट डालने के लिए कहा जा रहा था और इलाके में डर का माहौल था, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से मतदाता खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी ने जीत का किया दावा भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि इलाके में मतदान शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा माहौल है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करेगी। पांडा ने कहा कि लोग आराम से वोट डाल रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनकी पार्टी डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल करेगी। उन्होंने टीएमसी नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें पहले ही हार का अंदाजा हो गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, इस बार हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के आठ जवान तैनात किए गए हैं। पिछली वोटिंग में प्रत्येक बूथ पर केवल चार जवान मौजूद थे। फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 35 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की गई हैं। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीम भी बनाई गई हैं। टीएमसी उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था। हालांकि पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक वाम दलों का प्रभाव रहा है, इसलिए मुकाबले में वामपंथी दलों की भूमिका को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले मतदान में क्या हुआ था? 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों से ईवीएम पर इत्र और चिपकने वाला टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ईवीएम में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा जवाब दिया है। बीजेपी का पलटवार बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एग्जिट पोल के बाद साफ दिख रहा है कि बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी संभावित हार से घबराकर पहले से ही बहाने बना रही है और ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी नेता राम कृपाल यादव ने भी ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हुए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की तारीफ करते हुए कहा कि उसने पूरी ईमानदारी से चुनाव प्रक्रिया को अंजाम दिया है। ममता बनर्जी ने क्या कहा? इससे पहले ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया था। वह करीब चार घंटे तक वहां रहीं और रात 12 बजे के बाद बाहर निकलीं। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “जनता के वोट पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए,” उन्होंने कहा। पारदर्शिता की मांग ममता बनर्जी ने सुझाव दिया कि मतगणना केंद्रों पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मीडिया के लिए सीसीटीवी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षाबलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, हालांकि बाद में उन्हें प्रवेश की अनुमति दे दी गई। 4 मई से पहले बढ़ा सियासी तनाव 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इन आरोपों को बेबुनियाद बता रही है। अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार सुबह Hooghly River में नाव की सवारी कर चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। हुगली नदी में नौकायन करते हुए पीएम मोदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में प्रधानमंत्री नाव पर बैठे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नदी के मनोरम दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों से बातचीत की और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की। गंगा को बताया बंगाल की आत्मा पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के लिए गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा है, जिसका पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ बहाता है। नाविकों और मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें नाव चलाने वाले मेहनतकश लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। इसके अलावा, हुगली तट पर सुबह टहलने आए लोगों से भी उन्होंने बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि हुगली के तट पर बिताया गया समय मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास और बंगालवासियों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में पीएम मोदी की यह नाव यात्रा राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले भी पीएम मोदी झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचकर स्थानीय स्वाद का आनंद लेते नजर आए थे। अब हुगली में उनकी नाव यात्रा चर्चा का नया केंद्र बन गई है।
27 लाख नाम कटे, सिर्फ 139 को राहत पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत हटाए गए 27 लाख से ज्यादा नामों में से अब तक सिर्फ 139 लोगों को ही दोबारा वोट देने का अधिकार मिला है। यह कुल हटाए गए मतदाताओं का बेहद छोटा हिस्सा, करीब 0.005% है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी ट्रिब्यूनल ने लिया फैसला यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित ट्रिब्यूनलों ने सुनाया है। पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले आए इस फैसले ने चुनावी माहौल में नई बहस छेड़ दी है। जानकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.6 करोड़ से घटकर 6.8 करोड़ रह गई है। लाखों अपील, लेकिन निपटारा बेहद कम वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ करीब 34 लाख लोगों ने अपील की थी। हालांकि, अब तक केवल 147 अपीलों पर ही फैसला हो पाया है। इसके अलावा, 510 अपीलों को गलत आवेदन मानते हुए खारिज कर दिया गया है, जबकि कुछ नाम सप्लीमेंट्री लिस्ट से भी हटा दिए गए हैं। नंदलाल बोस के परिवार को भी मिला अधिकार दिलचस्प बात यह है कि जिन 139 लोगों के नाम बहाल किए गए हैं, उनमें प्रसिद्ध कलाकार नंदलाल बोस के नाती 88 वर्षीय सुप्रबुद्ध सेन का नाम भी शामिल है। हालांकि खराब स्वास्थ्य के कारण उनके मतदान करने की संभावना कम बताई जा रही है। उनकी पत्नी और देखभाल करने वाले व्यक्ति भी इस सूची में शामिल हैं और उनके वोट डालने की संभावना जताई जा रही है। ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल इस पूरे मामले को लेकर ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में ट्रिब्यूनलों के कामकाज और उनकी प्रक्रिया (SOP) को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। हालांकि कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी। मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा नाम हटे आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 74,775 नाम हटाए गए थे। वहीं, इस पूरे क्षेत्र में सिर्फ एक व्यक्ति का वोटिंग अधिकार बहाल किया गया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
पहले चरण में मतदान जारी, कई जगह EVM ने रोकी रफ्तार West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में गुरुवार सुबह मतदान शुरू होते ही कई इलाकों से Electronic Voting Machine में खराबी की खबरें सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद, नंदीग्राम, कूचबिहार, मालदा और सिलीगुड़ी समेत कई स्थानों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कत के कारण मतदान प्रभावित हुआ और कुछ बूथों पर देरी भी हुई। पहले चरण में 18.76% वोटिंग, मिदनापुर सबसे आगे Election Commission of India के आंकड़ों के अनुसार सुबह 9 बजे तक पहले चरण में 18.76% मतदान दर्ज किया गया। पश्चिम मिदनापुर में सबसे ज्यादा 20.51% मतदान हुआ, जबकि मालदा में सबसे कम 16.96% वोटिंग दर्ज की गई। मुर्शिदाबाद में बमबाजी, कई घायल मतदान के बीच Murshidabad के नवदा इलाके में अज्ञात लोगों द्वारा देसी बम फेंके जाने की घटना सामने आई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। 152 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। चुनाव आयोग ने करीब 2.5 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की है ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके। कुछ जगहों पर मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें भी देखी गईं, जबकि कई जगह “पिंक बूथ” भी बनाए गए हैं, जिन्हें पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित किया जा रहा है। दिग्गज नेताओं की अपील, सियासी बयानबाजी तेज बीजेपी नेता Suvendu Adhikari और अन्य नेताओं ने शांतिपूर्ण मतदान की अपील की है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। 2 चरणों में हो रहे चुनाव, 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी, जिसके बाद राज्य की नई सरकार का फैसला होगा।
कोलकाता/चेन्नई, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। बंगाल में फर्स्ट फेज की 152 सीटों पर और तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में वोटिंग के दौरान कई जगह लंबी लाइन देखने को मिलीं। बंगाल के मालदा, बीरभूम और आसनसोल में सुबह से पोलिंग बूथ पर लंबी कतारें दिख रही हैं। यहां महिलाओं की संख्या ज्यादा है। ऐसा ही हाल तमिलनाडु में देखा जा रहा है। एक्टर विजय और अजीत को देख भीड़ बेकाबू चेन्नई में एक्टर अजित कुमार और TVK चीफ विजय वोट डालने पहुंचे। इस दौरान उनकी एक झलक पाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे बूथ के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बंगाल में वेबकास्टिंग के जरिए मॉनिटरिंग बंगाल में मुख्य मुकाबला TMC और BJP के बीच है। यहां के बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) के जरिए चुनाव आयोग निगरानी कर रहा है। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। नतीजा 4 मई को आएगा। तमिलनाडु में DMK, कांग्रेस और AIADMK, BJP गठबंधन के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है।
चुनाव से पहले सख्ती बढ़ी Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मशीन के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परफ्यूम, इंक और गोंद को माना जाएगा छेड़छाड़ चुनाव आयोग के अनुसार, यदि EVM पर इत्र, स्याही, गोंद या किसी भी प्रकार का केमिकल लगाया जाता है, तो इसे सीधा छेड़छाड़ की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उम्मीदवार बटन साफ और स्पष्ट रखना जरूरी आयोग ने सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि EVM के सभी उम्मीदवार बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दें। किसी भी बटन को टेप, गोंद या अन्य सामग्री से ढकना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा, मतों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए भी मशीन के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ को गंभीर अपराध माना जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर तुरंत सूचना देना अनिवार्य निर्देशों के अनुसार, अगर किसी बूथ पर EVM में कोई भी असामान्यता या छेड़छाड़ नजर आती है, तो पीठासीन अधिकारी तुरंत सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को इसकी जानकारी देंगे। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि EVM के साथ किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप एक चुनावी अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्मतदान (री-पोल) का आदेश भी दिया जा सकता है। 23 अप्रैल को मतदान, पहले ही जारी हुई चेतावनी गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है। मतदान से ठीक पहले आयोग ने यह निर्देश जारी कर सभी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में सभी पोलिंग बूथों के प्रीसाइडिंग अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे EVM पर उम्मीदवारों के बटन पूरी तरह साफ और बिना किसी रुकावट के दिखाई देने की पुष्टि करें।
चुनाव प्रचार थमा, अब मतदान की बारी Election Commission of India के निर्देशानुसार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो चुका है। दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म है और सभी दल अंतिम रणनीति में जुटे हुए हैं। खड़गे के बयान से मचा सियासी तूफान कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने तमिलनाडु की एक रैली में प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “आतंकी” कह दिया। इस बयान के सामने आते ही देशभर में विवाद छिड़ गया और राजनीतिक माहौल और गरमा गया। हालांकि, बाद में खड़गे ने सफाई दी कि उनका आशय शाब्दिक रूप से यह नहीं था, बल्कि उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष और संस्थाओं पर दबाव बनाते हैं। अमित शाह का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने खड़गे के बयान को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा से कांग्रेस ने राजनीतिक मर्यादाओं को पार कर दिया है और यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। शाह ने यह भी कहा कि इस तरह के बयान प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में लगभग 3.60 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनजर 2,450 केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं, जबकि 8,000 से अधिक बूथों को संवेदनशील घोषित किया गया है। ED की छापेमारी से बढ़ा चुनावी तापमान चुनाव से पहले Enforcement Directorate (ED) की पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से अधिक छापेमारी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई चल रही जांच के तहत की गई है, जबकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास बताया है। तमिलनाडु में NDA बनाम DMK गठबंधन की टक्कर तमिलनाडु में मुकाबला काफी दिलचस्प है, जहां National Democratic Alliance (NDA) विपक्षी गढ़ में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं DMK गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों से तय होगा कि किस दल को जनता ने शासन की जिम्मेदारी सौंपी है।
पश्चिम बंगाल: West Bengal विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी सरगर्मी चरम पर है। इस बीच Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) भी अपनी खास रणनीति के तहत मैदान में सक्रिय नजर आ रहा है। संघ ने राज्य के 250 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख छोटी-छोटी बैठकें कर मतदाताओं तक पहुंच बनाने का दावा किया है। ‘लोक मत परिष्कार’ के जरिए जनसंपर्क संघ सीधे चुनाव प्रचार नहीं करता, लेकिन ‘लोक मत परिष्कार’ अभियान के तहत उसकी टीमें घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं। चार-पांच स्वयंसेवकों की छोटी टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए लोगों से मिल रही हैं और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। क्या संदेश दे रहे स्वयंसेवक? RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जनसंपर्क के दौरान लोगों से: बिना डर और दबाव के वोट डालने की अपील NOTA पर वोट न देने की सलाह 100% मतदान सुनिश्चित करने का आग्रह साथ ही पर्चों के जरिए राज्य के मुद्दों पर जानकारी दी जा रही है। किन मुद्दों पर फोकस? जनसंपर्क अभियान में कुछ प्रमुख मुद्दों को खास तौर पर उठाया जा रहा है: महिला सुरक्षा भ्रष्टाचार और घोटाले (जैसे शिक्षक भर्ती विवाद) घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन सरकारी नीतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल BJP को अप्रत्यक्ष समर्थन? हालांकि RSS खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है, लेकिन उसकी यह गतिविधि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। राज्य में मुख्य मुकाबला Bharatiya Janata Party (BJP) और All India Trinamool Congress (TMC) के बीच है। प्रचार थमने से पहले आखिरी जोर 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले आज शाम प्रचार थम जाएगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने मतदाताओं तक आखिरी समय में अधिकतम पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
West Bengal में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उत्पाद शुल्क (Excise) विभाग ने 16 जिलों में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत आज रात 9 बजे से न सिर्फ शराब की दुकानें बंद रहेंगी, बल्कि बार और पब को भी संचालन रोकना होगा। क्यों लिया गया यह फैसला? चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पहले ही कह चुके हैं कि स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि शराब बिक्री पर यह रोक चुनाव आयोग की उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि: मतदान के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो शराब के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश रोकी जा सके हिंसा या अव्यवस्था की आशंका कम हो अचानक फैसले से दुकानदार हैरान दिलचस्प बात यह है कि: पहले जानकारी थी कि 21 अप्रैल से शराब की दुकानें बंद होंगी लेकिन उत्पाद शुल्क विभाग ने अचानक तीन दिन पहले ही आदेश जारी कर दिया इस अचानक फैसले से शराब विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन बिना पूर्व सूचना के ऐसा निर्णय उनके व्यापार को प्रभावित करता है। किन जिलों में लागू है प्रतिबंध? पहले चरण के मतदान के तहत कुल 16 जिलों में यह प्रतिबंध लागू किया गया है। इनमें शामिल हैं: Cooch Behar Alipurduar Jalpaiguri Kalimpong Darjeeling Uttar Dinajpur Dakshin Dinajpur Malda Murshidabad Birbhum Paschim Bardhaman Bankura Purulia Paschim Medinipur Purba Medinipur Jhargram इन सभी जिलों में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। कितनी सीटों पर होगा मतदान? पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। यह चरण खास तौर पर उत्तर बंगाल और कुछ दक्षिणी जिलों को कवर करता है, जहां सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है। चुनाव के दौरान ‘ड्राई डे’ का नियम भारत में चुनाव के दौरान शराब बिक्री पर रोक लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे ‘ड्राई डे’ कहा जाता है। इसका मकसद होता है: मतदाताओं को किसी भी तरह के लालच या दबाव से बचाना चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना कानून-व्यवस्था बनाए रखना
West Bengal में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर Election Commission of India (ECI) ने पहचान सत्यापन के नियमों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदान के दौरान किसी भी मतदाता को पहचान छिपाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर किसी की पहचान पर जरा सा भी संदेह होता है, तो उसे अपना चेहरा दिखाना अनिवार्य होगा–चाहे वह घूंघट में हो या बुर्का में। यह फैसला चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, क्योंकि पिछले चुनावों में फर्जी मतदान को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। क्या हैं नए नियम? चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार: मतदान केंद्र पर आने वाले हर मतदाता की पहचान की पुष्टि की जाएगी अगर कोई मतदाता चेहरा ढककर आता है और पहचान को लेकर संदेह होता है, तो उसे चेहरा दिखाना होगा महिला मतदाताओं की पहचान केवल महिला अधिकारी द्वारा ही जांची जाएगी किसी भी परिस्थिति में पहचान सत्यापन से छूट नहीं दी जाएगी आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू होगा और इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना है। महिला कर्मियों की अहम भूमिका इस प्रक्रिया को संवेदनशील तरीके से लागू करने के लिए आयोग ने खास इंतजाम किए हैं: हर मतदान केंद्र पर कम से कम एक महिला कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य की गई है जहां जरूरत होगी, महिला अधिकारी अलग से जाकर पहचान सत्यापन करेंगी इससे महिला मतदाताओं की गरिमा और निजता (privacy) बनी रहेगी क्यों जरूरी हुआ यह कदम? चुनाव आयोग के मुताबिक, कई बार देखा गया है कि: कुछ लोग नकली पहचान के साथ वोट डालने की कोशिश करते हैं घूंघट या बुर्का का इस्तेमाल पहचान छिपाने के लिए किया जाता है इससे फर्जी मतदान (Bogus Voting) की संभावना बढ़ जाती है इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस बार सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि हर वोट असली मतदाता द्वारा ही डाला जाए। पहले भी हो चुका है विवाद यह मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले Bihar के चुनावों में भी घूंघट और बुर्का में पहचान सत्यापन को लेकर विवाद हुआ था। कुछ राजनीतिक दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी वहीं चुनाव आयोग ने इसे चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी बताया था इस बार बंगाल में पहले से ही स्पष्ट नियम जारी कर दिए गए हैं, ताकि मतदान के दिन किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने। संवेदनशील माने जा रहे हैं ज्यादातर बूथ चुनाव आयोग के अनुसार: राज्य के अधिकांश मतदान केंद्र संवेदनशील श्रेणी में आते हैं करीब 8,500 बूथों को अत्यंत संवेदनशील घोषित किया गया है पहले चरण में होने वाले मतदान के लिए 1,500 बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा दी जा रही है यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार चुनाव को लेकर प्रशासन काफी सतर्क है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं: सभी प्रमुख मतदान केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर कड़ी निगरानी रखी जाएगी भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के कई असर हो सकते हैं: फर्जी मतदान पर रोक लगेगी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी मतदाताओं का भरोसा मजबूत होगा
कोलकाता/नई दिल्ली: Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद मतदाता इस बार भी वोट डाल सकेंगे, भले ही फैसला मतदान से ठीक पहले क्यों न आया हो।क्या है पूरा मामला? West Bengal में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान: करीब 90 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए लंबित सूची में 50 लाख नाम शामिल इनमें से 27 लाख नाम हटाए जा चुके हैं बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है पहले नियम यह था कि अगर किसी का नाम बाद में सूची में जुड़ भी जाए, तो वह फ्रीज हो चुकी वोटर लिस्ट के कारण वोट नहीं डाल सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? Supreme Court of India ने स्पष्ट किया: अगर ट्रिब्यूनल चुनाव से 2 दिन पहले भी फैसला देता है, तो भी वोट देने का अधिकार मिलेगा जरूरत पड़ने पर पूरक (Supplementary) वोटर लिस्ट जारी की जाएगी चुनाव आयोग को इस फैसले को लागू करना होगा यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया, जो कोर्ट को “पूर्ण न्याय” के लिए विशेष अधिकार देता है।चुनाव पर क्या होगा असर? पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल यानी 21 और 27 अप्रैल तक जिन मामलों का निपटारा होगा, उन मतदाताओं को वोट देने का मौका मिलेगा। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं Mamata Banerjee सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया TMC सांसद काकली घोष दस्तीदार ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया CPM नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि यह आम लोगों की कानूनी लड़ाई की जीत है क्यों है यह फैसला अहम? यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि: इससे लाखों लोगों का मताधिकार सुरक्षित हुआ चुनाव प्रक्रिया में न्याय और समानता सुनिश्चित करने की कोशिश हुई कोर्ट ने दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह कानूनी तकनीकी अड़चनों को दरकिनार कर सकता है सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे उन लोगों को भी वोट देने का मौका मिलेगा, जो अब तक सिस्टम की वजह से बाहर हो रहे थे। इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जलपाईगुड़ी: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उत्तर बंगाल में बड़ा झटका लगा है। हल्दिबारी नगरपालिका की पार्षद पूर्वी रॉय प्रधान ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चुनाव से एक सप्ताह पहले हुए इस घटनाक्रम को भाजपा के लिए क्षेत्र में मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। टिकट से नाराज़गी बनी वजह मेखलीगंज विधानसभा सीट से परेश चंद्र अधिकारी को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने पर पूर्वी रॉय नाराज़ थीं। शिक्षक भर्ती घोटाले में उनका नाम सामने आने के बाद भी टिकट दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए और पार्टी छोड़ने का फैसला किया। पति पहले ही BJP में शामिल पूर्वी रॉय के पति अर्घ्य रॉय प्रधान, जो मेखलीगंज से पूर्व विधायक रह चुके हैं, हाल ही में भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में भाजपा का झंडा थामा था। अब पूर्वी रॉय ने भी उसी राह पर चलते हुए पार्टी बदल ली। TMC ने बताया ‘स्वार्थी’ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता अमिताभ बिश्वास ने इस घटनाक्रम को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया। उनका कहना है कि इससे पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा और चुनावी नतीजों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने पति-पत्नी को “स्वार्थी” बताते हुए आरोप लगाया कि वे भविष्य में महिला आरक्षण लागू होने के बाद चुनावी फायदा उठाना चाहते हैं। पूर्वी रॉय ने लगाए गंभीर आरोप वहीं, पूर्वी रॉय ने पार्टी छोड़ने के पीछे अपनी अलग दलील दी है। उनका कहना है कि वह ऐसे उम्मीदवार के लिए प्रचार नहीं कर सकतीं, जिन पर शैक्षणिक भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों। उन्होंने कहा कि “राज्य में हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, इसलिए मैं इस फैसले के खिलाफ हूं।” राजनीतिक असर पर नजर हल्दिबारी नगरपालिका की सभी 11 सीटों पर अब तक TMC का कब्जा रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले इस तरह का दलबदल स्थानीय राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर सकता है। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम का उत्तर बंगाल, खासकर कूचबिहार और मेखलीगंज क्षेत्र के चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर से बुलेटप्रूफ गाड़ियां मंगवाई गई हैं, जिन्हें दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर समेत आसपास के इलाकों में रूट मार्च करते देखा गया। रूट मार्च से बढ़ा भरोसा बुधवार को केंद्रीय बलों ने इन बुलेटप्रूफ वाहनों के साथ भवानीपुर, पद्दोपुकुर, चक्रबेरिया, शरत बोस रोड और हाजरा इलाके में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान माइक के जरिए लोगों से अपील की गई कि 23 और 29 अप्रैल को बिना किसी डर के मतदान करें और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करें। हिंसा की स्थिति से निपटने की तैयारी चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन बुलेटप्रूफ गाड़ियों का इस्तेमाल मतदान के दौरान किसी भी संभावित हिंसक स्थिति—जैसे गोलीबारी, बमबाजी या पथराव—से निपटने के लिए किया जाएगा। गाड़ियों में एक साथ 8 कमांडो सवार हो सकते हैं जरूरत पड़ने पर धुआं छोड़कर भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा वीआईपी या आम लोगों को आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा लोगों में उत्सुकता भवानीपुर में इन खास गाड़ियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए। कई लोगों ने इनकी तस्वीरें भी लीं। खाकी रंग की ये गाड़ियां पूरी तरह बुलेटप्रूफ हैं और आमतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं। आयोग का संदेश चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस और केंद्रीय बल तुरंत कार्रवाई करेंगे, ताकि मतदाता निर्भीक होकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव Abhishek Banerjee ने वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में वही लोग वोट देंगे जो पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में दिल्ली या Bihar में वोट डाल चुका है और फिर बंगाल में वोट देने आता है, तो TMC कार्यकर्ता उसे ऐसा करने से रोकेंगे। “बाहरी वोटरों से जीतना चाहती है भाजपा” Abhishek Banerjee ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party (भाजपा) बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में रहने वाले गैर-बंगाली लोगों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहर से आकर वोट डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वोटर लिस्ट पर विवाद गहराया राज्य में नई वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। करीब 1 करोड़ पुराने नाम हटाए जाने का दावा 27 लाख लोग SIR ट्रिब्यूनल में विचाराधीन, जिन्हें इस बार वोट का अधिकार नहीं मिलेगा Abhishek Banerjee ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि: सभी मतभेद भुलाकर चुनाव पर ध्यान दें गुटबाजी से दूर रहें पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ें उन्होंने इसे Mamata Banerjee के नेतृत्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि पार्टी को जीत दिलाए। “आत्मसंतुष्टि से बचें” Abhishek Banerjee ने कहा कि भले ही सर्वे में पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही हो, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाकर काम करने पर भी जोर दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद को दिशा दे सकता है।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
Subhas Chandra Bose के पोते Chandra Kumar Bose ने Trinamool Congress (TMC) का दामन थाम लिया है। यह कदम West Bengal में आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। TMC में शामिल होने पर क्या बोले? TMC जॉइन करने के बाद चंद्र कुमार बोस ने Bharatiya Janata Party (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी “बांटने वाली राजनीति” करती है और समाज में सांप्रदायिक नफरत फैलाती है। उन्होंने कहा कि देश को बचाने के लिए ऐसी राजनीति का विरोध जरूरी है। किन नेताओं की मौजूदगी में जॉइन की पार्टी? उन्होंने राज्य मंत्री Bratya Basu और TMC सांसद Kirti Azad की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। BJP से TMC तक का सफर 2016 में BJP में शामिल हुए Bhabanipur से Mamata Banerjee के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए 2019 में Kolkata South से लोकसभा चुनाव लड़ा, फिर हार का सामना 2023 में BJP से इस्तीफा दे दिया चंद्र कुमार बोस का TMC में शामिल होना बंगाल की राजनीति में नया मोड़ माना जा रहा है, खासकर तब जब चुनावी माहौल तेजी से गरम हो रहा है।
चेन्नई, एजेंसियां। Dacoit Ek Prem Katha एक एक्शन-रोमांटिक फिल्म के तौर पर बड़े दावों के साथ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। निर्देशक Shenil Dev की यह फिल्म एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है। कहानी: प्यार, बदले और रहस्यों का मिश्रण फिल्म की कहानी हरि (Adivi Sesh) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हत्या और रेप के आरोप में 10 साल से जेल में है। वह अपनी प्रेमिका जूलिएट (Mrunal Thakur) की गवाही के कारण सजा काट रहा है। जेल से भागने के बाद उसका मकसद जूलिएट से बदला लेना होता है, लेकिन मुलाकात के बाद उसकी नफरत फिर से प्यार में बदलने लगती है। कहानी में कुछ ट्विस्ट आते हैं, जो इसे एक इमोशनल मोड़ देने की कोशिश करते हैं। स्क्रीनप्ले और लॉजिक की बड़ी कमी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका स्क्रीनप्ले है। कोविड काल की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी अस्पतालों में भ्रष्टाचार दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ नहीं पाती। लव स्टोरी में भी गहराई की कमी है और मुख्य किरदारों के बीच मजबूत बॉन्डिंग नहीं बन पाती। डकैती के सीन अवास्तविक लगते हैं, जहां बिना ठोस योजना के किरदार आसानी से सुरक्षा और पुलिस को चकमा देते दिखते हैं। अभिनय और तकनीकी पक्ष अदिवि शेष ने प्रयास तो अच्छा किया है, लेकिन कई जगह उनका अभिनय ओवर लगता है। मृणाल ठाकुर खासकर सेकेंड हाफ में प्रभाव छोड़ती हैं। Anurag Kashyap और Prakash Raj जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन के कारण सीमित रह जाते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और तकनीकी पहलू ठीक-ठाक हैं, जबकि अंतिम 20 मिनट थोड़े दिलचस्प बन पड़ते हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच अलीपुर से एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। देर रात हुए इस घटनाक्रम में भाजपा नेता और भवानीपुर सीट से उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए, जिससे इलाके में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी शिविर लगाने के लिए बांस से लदा एक ट्रक ले जाया जा रहा था। यह ट्रक अलीपुर थाना क्षेत्र के अनाथालय रोड के पास पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे रोक लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना स्पष्ट कारण के ट्रक को रोका, जिसके बाद मौके पर मौजूद समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। आधी रात पहुंचे शुभेंदु अधिकारी घटना की जानकारी मिलते ही प्रचार से लौट रहे शुभेंदु अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके से ही कोलकाता पुलिस आयुक्त को फोन कर हस्तक्षेप की मांग की और इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इस दौरान पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। घंटों चला तनाव, भारी पुलिस बल तैनात घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। अलीपुर के ओरफनगंज रोड से सटे क्षेत्र में देर रात तक माहौल गरम रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे स्थिति नियंत्रण में लाने में समय लगा। अधिकारियों के दखल के बाद सुलझा मामला आखिरकार, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और पुलिस ने बांस से लदे ट्रक को जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी भी घटनास्थल से रवाना हो गए। चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है। विपक्षी दल जहां इसे प्रशासनिक दखल बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से इस पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह से बदल दी है। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी अब “अपनों” पर भरोसा जताने की नीति पर आगे बढ़ रही है। ‘बाहरी चेहरों’ से दूरी, पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता पिछले चुनाव में पार्टी ने बड़ी संख्या में अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट दिया था, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हुआ था। इस बार भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह “किराए के नेताओं” पर निर्भर नहीं रहेगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के अनुसार, पार्टी इस बार केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ा रही है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। गुटबाजी खत्म कर एकजुटता पर जोर भाजपा नेतृत्व ने इस बार आंतरिक गुटबाजी को खत्म करने पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछली बार अलग-अलग नेताओं के अलग सुर पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुए थे। अब पार्टी का दावा है कि सभी गुट एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें अमित शाह और राज्य के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं, संगठन को एक दिशा में ले जाने पर फोकस कर रहे हैं। एंटी-इनकंबेंसी पर भाजपा का दांव भाजपा इस बार तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी स्थानीय स्तर पर मुद्दों को उठाने और हर विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी नेताओं के खिलाफ “चार्जशीट” पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि जनता के बीच स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सकता है। ‘लोकल मुद्दे, लोकल चेहरे’ पर फोकस भाजपा इस बार “लोकल मुद्दे और लोकल चेहरे” की रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। संगठन का मानना है कि इससे जमीनी कनेक्ट मजबूत होगा और पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ेगी।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम, केरल और पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत शीर्ष नेतृत्व ने इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया। असम: गठबंधन के साथ चुनावी मैदान Assam में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। Asom Gana Parishad Bodoland People's Front इन दलों के साथ सीट शेयरिंग के जरिए चुनावी मजबूती बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि 89 सीटों पर गहन चर्चा हुई है और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अहम भूमिका रही है। केरल: 100 सीटों पर बड़ा दांव Kerala में पार्टी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। 140 सदस्यीय विधानसभा में से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा गया है। पहली सूची में ही कई बड़े नामों को टिकट दिया गया है: Rajeev Chandrasekhar – नेमोम सीट George Kurian – कांजिराप्पिली सीट गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में पार्टी को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में यह रणनीति राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश मानी जा रही है। बंगाल: पहली बार सत्ता में आने का लक्ष्य West Bengal में पार्टी ने इस बार ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य रखा है। बीजेपी 150 से अधिक सीटों पर मजबूत लड़ाई की तैयारी में है। पहले ही 144 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रमुख चेहरे शामिल हैं: Suvendu Adhikari Dilip Ghosh राज्य की कुल 294 सीटों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress भी 291 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है। चुनावी टाइमलाइन और सियासी समीकरण Kerala में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी का यह पूरा प्लान दर्शाता है कि पार्टी उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां अब तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।