West Bengal में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उत्पाद शुल्क (Excise) विभाग ने 16 जिलों में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत आज रात 9 बजे से न सिर्फ शराब की दुकानें बंद रहेंगी, बल्कि बार और पब को भी संचालन रोकना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पहले ही कह चुके हैं कि स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे।
ऐसे में माना जा रहा है कि शराब बिक्री पर यह रोक चुनाव आयोग की उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि:
अचानक फैसले से दुकानदार हैरान
दिलचस्प बात यह है कि:
इस अचानक फैसले से शराब विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है।
हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन बिना पूर्व सूचना के ऐसा निर्णय उनके व्यापार को प्रभावित करता है।
किन जिलों में लागू है प्रतिबंध?
पहले चरण के मतदान के तहत कुल 16 जिलों में यह प्रतिबंध लागू किया गया है। इनमें शामिल हैं:
इन सभी जिलों में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है।
कितनी सीटों पर होगा मतदान?
पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी।
यह चरण खास तौर पर उत्तर बंगाल और कुछ दक्षिणी जिलों को कवर करता है, जहां सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है।
चुनाव के दौरान ‘ड्राई डे’ का नियम
भारत में चुनाव के दौरान शराब बिक्री पर रोक लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे ‘ड्राई डे’ कहा जाता है।
इसका मकसद होता है:
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक अफवाह ने हजारों प्रवासी मजदूरों में डर पैदा कर दिया है। यह कहा जा रहा है कि अगर वोट नहीं डाला गया तो मतदाता सूची से नाम हटा दिया जाएगा। इस डर के कारण लोग देश के अलग-अलग शहरों से अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में लौटने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ दिल्ली, मुंबई, सूरत और चेन्नई जैसे शहरों के रेलवे स्टेशनों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी है। उधना रेलवे स्टेशन पर हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कई जगहों पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, क्योंकि लोग जल्द से जल्द ट्रेन पकड़कर बंगाल पहुंचना चाहते हैं। परिवारों के फोन से बढ़ा डर मजदूरों का कहना है कि उन्हें उनके रिश्तेदार लगातार फोन कर रहे हैं और वोट डालने के लिए बुला रहे हैं। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और इंटरनेट के जरिए यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि वोट न देने पर नाम काट दिया जाएगा। इसी वजह से लोगों में घबराहट बढ़ गई है। स्पेशल ट्रेनों में भी नहीं मिल रही जगह भीड़ को देखते हुए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन उनमें भी जगह नहीं मिल रही। कई यात्री घंटों पहले लाइन में लग रहे हैं। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर लोग दोपहर से ही रात की ट्रेन के लिए इंतजार करते दिखे। प्रशासन ने दी सफाई रेलवे और प्रशासन ने साफ किया है कि यह केवल अफवाह है और मतदाता सूची से नाम हटाने का ऐसा कोई नियम नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। अधिकारियों के अनुसार चुनाव के समय प्रवासी मजदूरों की वापसी आम बात है, लेकिन इस बार अफवाहों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
हैदराबाद से हुबली जा रही एक यात्री उड़ान में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बीच रास्ते में तकनीकी खराबी आ गई और विमान को घंटों तक हवा में ही चक्कर लगाना पड़ा। हालांकि पायलटों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया और आखिरकार सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। उड़ान के दौरान अचानक आई दिक्कत Fly91 की फ्लाइट IC3401 ने Rajiv Gandhi International Airport से दोपहर करीब 3 बजे उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट को शाम 4:30 बजे Hubli पहुंचना था, लेकिन लैंडिंग से ठीक पहले विमान में तकनीकी खराबी आ गई। पायलटों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत लैंडिंग रोक दी और विमान को सुरक्षित ऊंचाई पर बनाए रखा, ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके। 4 घंटे तक हवा में चक्कर लगाता रहा विमान तकनीकी समस्या के कारण विमान को तुरंत उतारना संभव नहीं था। ऐसे में: विमान करीब चार घंटे तक हवा में ही घूमता रहा Mundgod, Davanagere और Shivamogga के आसमान में चक्कर लगाए गए इस दौरान पायलट सुरक्षित लैंडिंग के लिए तैयारी करते रहे यात्रियों में डर और घबराहट लंबे समय तक हवा में फंसे रहने से विमान के अंदर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया: कई यात्री डर के कारण प्रार्थना करने लगे कुछ लोग रोने लगे और घबराहट साफ दिखाई दी परिवार वालों को भी सही जानकारी न मिलने से चिंता बढ़ गई यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइंस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बेंगलुरु में सुरक्षित लैंडिंग स्थिति को देखते हुए पायलटों ने विमान को डायवर्ट करने का फैसला लिया। आखिरकार फ्लाइट को Kempegowda International Airport, Bengaluru में उतारा गया। शाम करीब 7:30 बजे सुरक्षित लैंडिंग हुई सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया इस सफल लैंडिंग के बाद यात्रियों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। एयरलाइंस पर उठे सवाल इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं: तकनीकी खराबी आखिर किस वजह से आई? यात्रियों को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई? क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह फॉलो किए गए?
Jammu and Kashmir के Udhampur जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामनगर क्षेत्र के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे कम से कम 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब बस दूरदराज के गांवों से यात्रियों को लेकर उधमपुर की ओर जा रही थी। पहाड़ी रास्तों और तेज रफ्तार के कारण यह दुर्घटना और भी घातक साबित हुई। कैसे हुआ दर्दनाक हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार: बस रामनगर के कागोर्ट/कनोते गांव के पास से गुजर रही थी यह इलाका घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़कों के लिए जाना जाता है अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया बस फिसलते हुए सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी स्थानीय लोगों का कहना है कि बस तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक के लिए नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। मौत और घायलों की स्थिति इस दुर्घटना में: 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई कई यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है घायलों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं: पुलिस, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं खाई में गिरी बस से घायलों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने लिया हालात का जायजा केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद Jitendra Singh ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि: जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जा रही है घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। पहाड़ी इलाकों में बढ़ता हादसों का खतरा उधमपुर और रामनगर क्षेत्र की सड़कें लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं। यहां हादसों के पीछे कई कारण होते हैं: संकरी और घुमावदार सड़कें गहरी खाइयां और कमजोर सुरक्षा बैरियर ओवरस्पीडिंग और लापरवाही कई जगहों पर खराब सड़क स्थिति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। क्या कहते हैं स्थानीय लोग? स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार: इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं कई जगह रेलिंग या गार्ड नहीं लगे हैं लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की आगे की कार्रवाई प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। संभावित जांच बिंदु: बस की तकनीकी स्थिति चालक की लापरवाही या थकान सड़क की स्थिति और सुरक्षा इंतजाम जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।