उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पिछले 9 वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में 17 हजार से अधिक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने कुल 17,043 एनकाउंटर किए। इन कार्रवाइयों में 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 11,834 अपराधी घायल हुए। यानी प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 5 पुलिस मुठभेड़ हुईं। पुलिसकर्मियों ने भी दी कुर्बानी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार का दावा है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अपराधियों के मन में भय और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। मेरठ जोन एनकाउंटर में सबसे आगे प्रदेश में सबसे अधिक एनकाउंटर Meerut जोन में दर्ज किए गए। यहां पुलिस ने 4,813 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं। इन कार्रवाइयों में: 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 3,513 अपराधी घायल हुए 97 कुख्यात अपराधी मारे गए मुठभेड़ों के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वाराणसी और आगरा जोन भी शीर्ष पर Varanasi जोन में 1,292 एनकाउंटर हुए, जिनमें: 2,426 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई 29 अपराधी मारे गए 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए वहीं Agra जोन एनकाउंटर के मामले में तीसरे स्थान पर रहा। यहां: 2,494 मुठभेड़ हुईं 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 24 अपराधी मारे गए 968 अपराधी और 62 पुलिसकर्मी घायल हुए कमिश्नरेट में गाजियाबाद सबसे आगे कमिश्नरेट स्तर पर Ghaziabad सबसे आगे रहा, जहां 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधियों को मार गिराया गया। इसके अलावा: कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 अपराधी ढेर हुए लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधी मारे गए प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधी मारे गए सरकार का दावा: अपराधियों में बढ़ा भय योगी सरकार का कहना है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और अवैध वसूली के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार ने एनकाउंटर के साथ-साथ: गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई संपत्ति कुर्की NSA जैसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल भी प्रभावी ढंग से लागू किया है। सरकारी दावे के अनुसार, पुलिस की तेज और कठोर कार्रवाई के कारण कई अपराधियों ने प्रदेश छोड़ दिया या अपराध से दूरी बना ली।
पाकुड़। पाकुड़ जिले के महेशपुर में पुलिस ने एक गैंगरेप मामले का खुलासा किया है। इस मामले में दो नाबालिगों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एसपी अनुदीप सिंह ने दी। एसपी ने बताया कि महेशपुर थाना क्षेत्र में 16 मई की रात एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। अनुसंधान के बाद गिरफ्तारी महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने वैज्ञानिक, मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया। छापेमारी के दौरान अविनाश सोरेन, बबूटा सोरेन, अंसार टुडू, बबनु हेंब्रम और कार्तिक मुर्मू को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित नाबालिग से आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला था और टीम को इसके त्वरित उद्भेदन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। फिलहाल, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
रांची। राजधानी रांची में कानून-व्यवस्था का हाल जानने बीती देर रात एसएसपी राकेश रंजन खुद सड़कों पर निकले। उन्होंने शहर के कई प्रमुख थानों का औचक निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों और जवानों की मुस्तैदी का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ सिटी एसपी पारस राणा भी मौजूद रहे। पुलिस महकमे में हलचल आधी रात हुए इस निरीक्षण से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसएसपी ने विभिन्न थानों में पहुंचकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की उपस्थिति, रिकॉर्ड संधारण और रात्रि गश्ती व्यवस्था की जांच की। उन्होंने थानेदारों और पुलिस पदाधिकारियों से क्षेत्र में अपराध नियंत्रण को लेकर जानकारी भी ली। लंबित मामलों की जानकारी ली इस दौरान एसएसपी ने थानों में लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया। साथ ही रात में गश्ती दल को और सक्रिय रहने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने को कहा। आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता एसएसपी ने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि अपराध नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रात्रि गश्ती में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वाहनों की जांच भी की निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर वाहनों की जांच और देर रात घूम रहे संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की गई। पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
एक रात में दो अपराध, देश को झकझोर देने वाली घटना दिल्ली और राजस्थान से सामने आई इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। 23 वर्षीय आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर 12 घंटे के भीतर दो जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। पहले उसने Alwar में अपनी पड़ोसी महिला के साथ दुष्कर्म किया, और इसके कुछ घंटों बाद Delhi पहुंचकर अपने पूर्व नियोक्ता के घर में उनकी 22 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। अलवर में पहली वारदात, धमकी देकर फरार पुलिस के अनुसार, आरोपी ने रात करीब 10:30 बजे पड़ोसी के घर में घुसकर महिला के साथ मारपीट की और फिर दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। इस मामले में अलवर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली में दूसरी वारदात, घर में घुसकर हत्या अगली सुबह आरोपी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में स्थित अपने पूर्व नियोक्ता के घर पहुंचा। उस समय घर में युवती अकेली थी। करीब एक घंटे के भीतर उसने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया। जब युवती के माता-पिता घर लौटे, तो उन्होंने अपनी बेटी को खून से लथपथ हालत में पाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवती के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या की गई। CCTV से खुला राज, 15 टीमों ने किया गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए 15 टीमें बनाई थीं। CCTV फुटेज के जरिए आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। फुटेज में आरोपी को घर में प्रवेश और बाहर निकलते हुए अलग-अलग कपड़ों में देखा गया। ऑटो चालक की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पहले नौकरी से निकाला गया था आरोपी आरोपी पहले पीड़िता के घर में काम करता था, लेकिन उसे कथित वित्तीय गड़बड़ी और सट्टेबाजी की आदत के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। जांच में सामने आया है कि वह पैसे के लिए धोखाधड़ी करता था और कर्ज में डूबा हुआ था। कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू कर्मचारियों के वेरिफिकेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत है।
जर्मनी के Duisburg शहर में स्थित Gurdwara Singh Sabha में रविवार को हुई हिंसक झड़प ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया। इस घटना में दो गुटों के बीच हुए टकराव में कम से कम 11 लोग घायल हो गए, जबकि हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बड़े स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ी। गुरुद्वारे के भीतर हिंसा, अफरा-तफरी का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुद्वारे के अंदर 40 से अधिक लोग मौजूद थे, जब अचानक दो गुटों के बीच विवाद हिंसक रूप ले बैठा। देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि चाकू, कृपाण और पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया गया। कुछ चश्मदीदों ने गोली चलने का दावा भी किया, हालांकि अब तक किसी के गोली लगने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना के दौरान गुरुद्वारे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग जान बचाकर बाहर भागते नजर आए। पुलिस का बड़ा ऑपरेशन, स्पेशल फोर्स तैनात हिंसा की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने तुरंत इलाके को घेर लिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए डसेलडोर्फ की स्पेशल टास्क फोर्स (SEK) को भी तैनात किया गया। हथियारों से लैस जवानों ने गुरुद्वारे की इमारत को अपने नियंत्रण में लेकर स्थिति को काबू किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित पहलुओं को खंगाला जा रहा है। विवाद की जड़: प्रबंधन और वित्तीय मतभेद स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस झड़प के पीछे गुरुद्वारे के प्रबंधन और वित्तीय मामलों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। बताया जा रहा है कि कमेटी के पुराने और मौजूदा सदस्यों के बीच नियंत्रण और प्रभाव को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा था। समुदाय के भीतर चल रहे इसी आंतरिक संघर्ष ने रविवार को हिंसक रूप ले लिया। समुदाय में चिंता, जांच जारी इस घटना के बाद स्थानीय सिख समुदाय में चिंता और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। धार्मिक स्थल के भीतर इस तरह की हिंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घटना के पीछे के कारणों की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
West Bengal में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उत्पाद शुल्क (Excise) विभाग ने 16 जिलों में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत आज रात 9 बजे से न सिर्फ शराब की दुकानें बंद रहेंगी, बल्कि बार और पब को भी संचालन रोकना होगा। क्यों लिया गया यह फैसला? चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पहले ही कह चुके हैं कि स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि शराब बिक्री पर यह रोक चुनाव आयोग की उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि: मतदान के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो शराब के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश रोकी जा सके हिंसा या अव्यवस्था की आशंका कम हो अचानक फैसले से दुकानदार हैरान दिलचस्प बात यह है कि: पहले जानकारी थी कि 21 अप्रैल से शराब की दुकानें बंद होंगी लेकिन उत्पाद शुल्क विभाग ने अचानक तीन दिन पहले ही आदेश जारी कर दिया इस अचानक फैसले से शराब विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन बिना पूर्व सूचना के ऐसा निर्णय उनके व्यापार को प्रभावित करता है। किन जिलों में लागू है प्रतिबंध? पहले चरण के मतदान के तहत कुल 16 जिलों में यह प्रतिबंध लागू किया गया है। इनमें शामिल हैं: Cooch Behar Alipurduar Jalpaiguri Kalimpong Darjeeling Uttar Dinajpur Dakshin Dinajpur Malda Murshidabad Birbhum Paschim Bardhaman Bankura Purulia Paschim Medinipur Purba Medinipur Jhargram इन सभी जिलों में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। कितनी सीटों पर होगा मतदान? पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। यह चरण खास तौर पर उत्तर बंगाल और कुछ दक्षिणी जिलों को कवर करता है, जहां सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है। चुनाव के दौरान ‘ड्राई डे’ का नियम भारत में चुनाव के दौरान शराब बिक्री पर रोक लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे ‘ड्राई डे’ कहा जाता है। इसका मकसद होता है: मतदाताओं को किसी भी तरह के लालच या दबाव से बचाना चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना कानून-व्यवस्था बनाए रखना
धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।
ओडिशा के रायगढ़ा जिला में जमीन अधिग्रहण और सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर हिंसा में बदल गया है। काशीपुर ब्लॉक के सुंगेर पंचायत स्थित शगाबाड़ी गांव में आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल, यह विवाद उस सड़क परियोजना को लेकर है, जिसे Vedanta Aluminium से जुड़े माइनिंग क्षेत्र सिजीमाली से गांव को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस परियोजना को सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन स्थानीय आदिवासी समुदाय इसका लगातार विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि इस परियोजना से उन्हें अपनी जमीन से बेदखल होना पड़ेगा, साथ ही पर्यावरण और उनकी आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा। विवाद उस समय और भड़क गया जब जिला कलेक्टर कुलकर्णी आशुतोष सी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे ग्रामीणों को जमीन खाली करने और दस्तावेज दिखाने के लिए कहते नजर आए। इस दौरान उनके कथित सख्त लहजे ने ग्रामीणों के बीच असंतोष और भय को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। हालात उस समय बेकाबू हो गए जब विरोध प्रदर्शन तेज होने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पहले से तनावपूर्ण माहौल में बातचीत की कोशिश नाकाम रही और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया। ग्रामीणों की ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसके जवाब में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ गया। इस हिंसा में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। घायलों में एसडीपीओ गिरिधर साहू और थाना प्रभारी देब मलिक जैसे अधिकारी भी शामिल हैं। करीब सात पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यह घटना एक बार फिर देश के आदिवासी इलाकों में विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदाय अपनी जमीन, पहचान और आजीविका को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले में SIR (Special Intensive Revision) के लिए गए अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई और फिलहाल राज्य की प्रशासनिक मशीनरी उनके नियंत्रण में नहीं है। चुनावी रैली में ममता बनर्जी ने क्या कहा ? मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके कारण राज्य में कानून-व्यवस्था पर उनका नियंत्रण नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि “मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं” और वर्तमान स्थिति “सुपर राष्ट्रपति शासन” जैसी लग रही है। ममता ने यह भी दावा किया कि उन्हें मालदा की घटना के बारे में आधी रात को एक पत्रकार से पता चला। मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया को लेकर क्या कहा ? मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि वह समझ सकती हैं कि लोग क्यों गुस्से में हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं के अधिकारों को चुनौती देने जैसा है। मुख्य न्यायाधीश ने इसे “सोची-समझी और उकसावे वाली कार्रवाई” बताया और कहा कि इसकी जांच CBI या NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
मुठभेड़ के बाद पुलिस का एक्शन, आरोपियों को रांची लाया गया धनबाद: झारखंड में अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गुर्गों को धनबाद से रांची शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी आरोपी रांची एयरपोर्ट स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में शामिल बताए जा रहे हैं। रांची एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम रविवार को धनबाद पहुंची और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दो आरोपियों को अपने साथ रांची ले गई। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भागाबांध में हुई थी पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ जानकारी के मुताबिक, 16 मार्च को धनबाद के भागाबांध इलाके में पुलिस और प्रिंस खान गिरोह के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में तीन अपराधी घायल हो गए थे। घायलों में पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर और वासेपुर के लाला टोला निवासी अफजल अमन उर्फ बाबर उर्फ राजा खान शामिल हैं। इनके अलावा विक्की डोम भी इस मुठभेड़ में घायल हुआ था। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही रांची भेजे गए आरोपी मुठभेड़ के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद के SNMMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पूरा होने के बाद जैसे ही उन्हें छुट्टी मिली, रांची पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और रांची शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से रांची में पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले के कई अहम खुलासे हो सकते हैं। एक आरोपी पहले ही भेजा जा चुका है जेल इस केस में घायल तीसरे आरोपी विक्की डोम को धनबाद पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है। वहीं बाकी आरोपियों को अब रांची लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। रेस्टोरेंट में फायरिंग और हत्या का गंभीर आरोप पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों पर रांची एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में फायरिंग करने और एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुठभेड़ के जरिए इन्हें पकड़ लिया था। अब इस पूरे मामले में पुलिस अन्य फरार अपराधियों की भी तलाश कर रही है। अपराधियों पर सख्ती जारी, पुलिस का अभियान तेज झारखंड पुलिस लगातार संगठित अपराध के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इस कार्रवाई को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
स्टेशन पर मचा हड़कंप कटिहार जंक्शन पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो सरकारी विभागों के जवान आपस में ही भिड़ गए। जीआरपी और मद्य निषेध विभाग के बीच हुई इस झड़प में एक सिपाही घायल हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल के रास्ते आने वाली ट्रेन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम कटिहार स्टेशन पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी जीआरपी के जवान वहां पहुंच गए। बहस से शुरू हुई मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि जीआरपी के जवानों ने मद्य निषेध टीम के काम में हस्तक्षेप किया और फिर मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। वीडियो वायरल, जांच के आदेश घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी झड़प का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट तलब की गई है। सिपाही देव शंकर कुमार घायल इस झगड़े में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर मद्य निषेध विभाग का आरोप है कि जीआरपी जानबूझकर उनकी कार्रवाई में बाधा डालती है और इसी कारण यह विवाद हुआ। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वे तस्करों को पकड़ने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने ही वर्दीधारी साथियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस महकमे पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘खाकी’ का इस तरह आपस में भिड़ना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है।
राजगंज थाने से सामने आया हैरान करने वाला मामला धनबाद जिले के राजगंज थाना से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सड़क हादसे के बाद जब्त की गई एक बाइक रहस्यमय तरीके से थाना परिसर से गायब हो गई। जब मालिक आठ महीने बाद अपनी बाइक लेने पहुंचे, तो उन्हें यह जानकारी मिली, जिससे वे हैरान रह गए। पीड़ित ने लगाए गंभीर आरोप पीड़ित बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के विराजपुर मंझीलाडीह निवासी मटन प्रसाद महतो हैं, जो डीजीएमएस में निजी सहायक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने के कर्मियों ने न सिर्फ बाइक गायब होने पर स्पष्ट जवाब देने से बचने की कोशिश की, बल्कि उन्हें दूसरी बाइक लेने का दबाव भी बनाया गया। ग्रामीण एसपी से की शिकायत इस मामले को लेकर मटन प्रसाद महतो ने ग्रामीण एसपी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाइक पुलिस की निगरानी में थी, ऐसे में उसके गायब होने की जिम्मेदारी भी पुलिस की ही बनती है। कैसे हुआ पूरा मामला? पीड़ित के अनुसार, 21 जुलाई 2025 को वह ड्यूटी से लौटते समय एक सड़क हादसे का शिकार हो गए। खरनी गोड़ के पास एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी बाइक के साथ ट्रैक्टर को भी जब्त कर थाने ले आई। इस संबंध में राजगंज थाना में केस दर्ज किया गया था, जो उनके भतीजे मिथुन कुमार साव के बयान पर आधारित था। इलाज के बाद खुला मामला घटना के बाद मटन प्रसाद महतो का इलाज धनबाद से लेकर कोलकाता तक चला। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने अपने भतीजे को थाने भेजकर बाइक लाने को कहा। पहले तो पुलिस ने बाइक होने से ही इनकार कर दिया। बाद में जब परिवार ने दबाव बनाया, तो कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने दूसरी बाइक लेने का सुझाव दिया, जिसे पीड़ित ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाने में जब्त वाहन का गायब होना और फिर उसकी भरपाई के लिए दूसरी बाइक लेने का कथित दबाव बनाना, व्यवस्था में बड़ी लापरवाही या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
झारखंड में आगामी ईद, सरहुल और रामनवमी को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और कई अहम निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि त्योहारों के नाम पर किसी भी तरह की अशांति, हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 24 घंटे अलर्ट पर रहेंगे प्रशासन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को 24 घंटे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। संवेदनशील इलाकों में कड़ी सुरक्षा सीएम ने खास तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर किसी भी तरह की गतिविधि से शांति भंग नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी समुदायों के लोगों से सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया। जुलूस मार्ग और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर नजर त्योहारों के दौरान निकलने वाली शोभायात्राओं को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा। जुलूस के रूट का पहले से भौतिक सत्यापन करने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने और हर गतिविधि की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगाह किया कि त्योहारों के दौरान अफवाह फैलाने वाले सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान सीएम ने कहा कि शोभायात्राओं में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधा का विशेष ख्याल रखा जाए। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी के लिए पहले से तैयारी रखने और जुलूस मार्ग में ‘सेफ जोन’ बनाने के निर्देश भी दिए गए। सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का उपयोग बैठक में यह भी तय किया गया कि जुलूस मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और ड्रोन के जरिए निगरानी की जाए। इसके अलावा फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, दंगा नियंत्रण वाहन और वॉटर कैनन जैसे संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखने का निर्देश दिया गया। भड़काऊ गानों और गतिविधियों पर रोक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शोभायात्रा के दौरान किसी भी तरह के भड़काऊ या उत्तेजक गाने नहीं बजने चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन को पूजा समितियों और अखाड़ों के साथ समन्वय बनाकर प्री-रिकॉर्डेड गानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। त्योहारों में शांति बनाए रखने की अपील मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और समय रहते समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने दोहराया कि त्योहार खुशी और भाईचारे का प्रतीक हैं, इसलिए किसी को भी इसे बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
झारखंड के हजारीबाग जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री पर कोयला खनन परियोजना में काम कर रहे मजदूरों पर तीर-धनुष से हमला करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कोयला परियोजना में अचानक हमला, मजदूरों में अफरा-तफरी यह पूरा मामला हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र स्थित चट्टी बरियातू कोल परियोजना का बताया जा रहा है। यहां काम कर रहे मजदूरों पर अचानक हमला कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री पर लगे गंभीर आरोप इस हमले का आरोप झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर हाथ में तीर-धनुष लिए कंपनी के वर्करों और वाहनों की ओर निशाना साधते नजर आए। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोयला खनन के विरोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद इलाके में चल रहे कोयला खनन कार्य को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा था और उसी क्रम में यह घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परियोजना एनटीपीसी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां खनन कार्य जारी है। तीर चलाने से मची दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व मंत्री पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और वहां से नीचे काम कर रहे मजदूरों की ओर तीर चलाया। इस दौरान मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी उन्हें काम बंद करने के लिए धमकाया गया था। आरोप है कि यह घटना उसी विवाद का हिस्सा हो सकती है। जांच के बाद होगी कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति में भी गरमाया मुद्दा यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। विवादों से रहा है पुराना नाता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार तीर-धनुष से हमले के आरोप ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
झारखंड के पलामू जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) किशोर कौशल और पलामू की पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीष्मा रमेशन ने सिविल कोर्ट परिसर तथा समाहरणालय स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस समन्वय की विस्तृत समीक्षा की। कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा निरीक्षण के दौरान डीआईजी किशोर कौशल ने सिविल कोर्ट परिसर में तैनात सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से आकलन किया। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस को हमेशा सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति या सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रवेश द्वार पर जांच व्यवस्था का किया निरीक्षण डीआईजी ने कोर्ट परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की कार्यप्रणाली का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि आने-जाने वाले लोगों की जांच किस प्रकार की जा रही है। उन्होंने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पूरी सतर्कता के साथ जांच की जाए और संदिग्ध व्यक्तियों व गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए। सेंट्रल कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा सिविल कोर्ट परिसर के निरीक्षण के बाद डीआईजी और एसपी ने समाहरणालय स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम (सीसीआर) का भी दौरा किया। यहां उन्होंने अपराध निगरानी, सूचना प्रबंधन और संचार प्रणाली की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने विभिन्न थानों से आने वाली सूचनाओं के संकलन और उन पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया की भी जानकारी ली। सीसीटीवी निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पर जोर निरीक्षण के दौरान शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त लाइव फुटेज की गुणवत्ता और उसकी मॉनिटरिंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। डीआईजी ने निर्देश दिया कि कंट्रोल रूम में आने वाली लाइव फुटेज पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित थाना को दी जाए। इसके साथ ही रिकॉर्ड और फाइलों के व्यवस्थित रखरखाव तथा मामलों के शीघ्र निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिस समन्वय और जनसहयोग पर दिया बल डीआईजी किशोर कौशल ने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी थानों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। निरीक्षण के दौरान कई पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।