नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों कीमती धातुओं के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर ₹347 बढ़कर ₹1,52,002 पहुंच गई, जबकि चांदी ₹1,214 महंगी होकर ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस साल रिकॉर्ड तेजी, हजारों रुपये महंगे हुए सोना-चांदी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब ₹19,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी लगभग ₹21,000 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इस दौरान दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। बड़े शहरों में भी ऊंचे दाम, खरीदारी से पहले बरतें सावधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, भोपाल और लखनऊ सहित देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.55 लाख से ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के बढ़ते दामों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें और खरीदारी से पहले विश्वसनीय स्रोतों से ताजा कीमत की पुष्टि अवश्य करें। इससे नकली आभूषण या गलत मूल्य वसूले जाने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नबान्न सभागार से ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’, साइबर क्राइम हेल्प डेस्क और महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि महालया से राज्यभर में डायल-112 आपातकालीन सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस किसी भी थाना क्षेत्र में पांच मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे। क्या है ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’? ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए गठित एक विशेष पुलिस इकाई है। यह टीम सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी तथा महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करेगी। सरकार के अनुसार, इस स्क्वाड का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। एक साल में 5 मिनट रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पुलिस की औसत प्रतिक्रिया समय लगभग तीन घंटे है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पुलिस औसतन छह मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में भी पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर पांच मिनट करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष के बजट में प्रत्येक थाने को डायल-112 सेवा के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इन वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 500 थानों में महिला हेल्प डेस्क सरकार ने राज्य के 500 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और प्रत्येक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क राज्य के सभी थानों में साइबर क्राइम हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों की त्वरित शिकायत दर्ज करना और जांच प्रक्रिया को तेज करना है। पुलिस के आधुनिकीकरण का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक एजेंसियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा और पुलिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और आम नागरिकों को तेज एवं भरोसेमंद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।
अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर जहां विशेष जांच दल (SIT) मामले की गहन पड़ताल में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी गोपाल राव की है और वे राम परंपरा का पालन नहीं करते तथा अनावश्यक विवाद खड़े करते हैं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, सरकार अब आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की जांच शुरू कर दी है, जिन्हें आरोपियों ने मंदिर में नौकरी के दौरान बनवाया और जिनमें निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है। बताया जा रहा है कि लवकुश मिश्रा के शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा के कौशलपुरी स्थित मकान पर कार्रवाई हो सकती है। इन मामलों में नोटिस जारी करने की तैयारी भी चल रही है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का नोटों की गड्डियों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी सत्यता की पुलिस जांच कर रही है। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपियों की नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही। अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की राशि कहां-कहां पहुंची। इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आगामी 6 जुलाई को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मध्य क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। यह आदेश 2 जुलाई से 30 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, धरना-प्रदर्शन, सभा और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस के इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा विरोध किया है और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। विक्टोरिया हाउस के सामने नहीं होगा 21 जुलाई का कार्यक्रम कोलकाता पुलिस ने विक्टोरिया हाउस के सामने 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों की ओर से की गई अनुमति संबंधी अपील भी खारिज कर दी गई। इसके बाद पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू करने का आदेश जारी किया। पुलिस ने क्या कहा? कोलकाता पुलिस के अनुसार, विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर आशंका है कि संबंधित क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हो सकते हैं, जिससे शांति और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा है। आदेश के तहत— पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। धरना, प्रदर्शन और जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। लाठी या अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं के साथ समूह में एकत्र होना भी प्रतिबंधित रहेगा। तृणमूल कांग्रेस ने जताया विरोध तृणमूल कांग्रेस ने पुलिस के आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। पार्टी सांसद Kalyan Banerjee ने कहा कि मध्य कोलकाता में इस तरह धारा 163 लागू करना पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोध से डर रही है और इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। महुआ मोइत्रा ने भी उठाए सवाल कृष्णानगर से सांसद Mahua Moitra ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को इस तरह रोका नहीं जा सकता। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इस आदेश का विरोध करेगी। नाम को लेकर स्पष्टता समाचार में यह उल्लेख किया गया है कि "मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी" के फैसले पर विरोध हुआ। वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee हैं, जबकि Suvendu Adhikari राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इसलिए समाचार में नाम संबंधी त्रुटि प्रतीत होती है।
उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों और उत्तराखंड प्रशासन के बीच बना तनाव आखिरकार कई घंटे चली बातचीत के बाद समाप्त हो गया। कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर राज्य में प्रवेश की घोषणा के बाद सीमा पर बड़ी संख्या में निहंग सिख एकत्र हुए थे। प्रशासन के साथ सफल वार्ता के बाद अधिकांश लोग वापस लौट गए, जिससे क्षेत्र में हालात सामान्य होने लगे। कर्णप्रयाग और नगरासू विवाद के बाद बढ़ा था तनाव निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड में प्रवेश करने की घोषणा की थी। इसके बाद देहरादून और सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कुल्हाल चेक पोस्ट पर जुटे सैकड़ों निहंग सिख गुरुवार को सैकड़ों निहंग सिख उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट के पास पहुंच गए। पहला जत्था दिनभर हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब में रुका रहा, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे कई दौर की बातचीत की और उत्तराखंड की ओर प्रस्तावित मार्च को टालने का आग्रह किया। हाई अलर्ट पर रहा प्रशासन, जगह-जगह की गई बैरिकेडिंग शुरुआती दौर में बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर प्रशासन ने सीमा क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखी। वार्ता सफल होने के बाद लौटने लगे निहंग सिख लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद माहौल शांत होने लगा। निहंग सिख छोटे-छोटे समूहों में वहां से लौटने लगे। देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग बंद होने के कारण कई लोग वापस हिमाचल प्रदेश लौट गए। कुछ प्रतिनिधि देहरादून में रुके प्रशासन ने कुछ निहंग सिखों को देहरादून स्थित गुरुद्वारा गोबिंद नगर, रेसकोर्स में ठहराया है। यहां प्रशासन और प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत जारी रहने की संभावना है, ताकि विवाद से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। प्रशासन ने ली राहत की सांस सीमा पर बिना किसी हिंसक घटना के तनाव समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।
चतरा। झारखंड के चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित आम्रपाली परियोजना प्रभावित एक गांव में 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई है। घटना सोमवार शाम की बताई जा रही है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। घर के बाहर से ले गए सुनसान जगह पीड़िता की मां के बयान के अनुसार सोमवार शाम करीब सात बजे युवती घर के बाहर थी। इसी दौरान दो युवक वहां पहुंचे और उसे घर के नजदीक एक सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजनों को जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। FIR दर्ज, दोनों आरोपी गिरफ्तार पीड़िता की मां के बयान के आधार पर टंडवा थाना में कांड संख्या 146/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। टंडवा के इंस्पेक्टर पप्पू शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में केरेडारी थाना क्षेत्र के पचड़ा निवासी अर्जुन साव और बिहार निवासी कन्हैया कुमार शामिल हैं। आरोपियों में से एक पीड़िता के गांव में ही डेरा लेकर रह रहा था, जिससे पहचान में आसानी हुई। मेडिकल जांच जारी, निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए चतरा भेजा है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस संवेदनशील मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चतरा। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित हडगड़ी जंगल में पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपहृत छह ग्रामीणों को सकुशल मुक्त करा लिया, जबकि दो वयस्क आरोपियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तीन अन्य नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ग्रामीणों का अपहरण कर मांगी थी एक लाख की फिरौती जानकारी के अनुसार, 18 जून की रात करीब 10:30 बजे हथियारबंद अपराधियों ने तेलियाडीह और गोवदा गांव में धावा बोलकर छह ग्रामीणों का अपहरण कर लिया था। इसके बाद सभी को जंगल में ले जाया गया। अपराधियों ने परिजनों को फोन कर खुद को एमसीसी (MCC) का सदस्य बताते हुए एक लाख रुपये की फिरौती मांगी और रकम नहीं देने पर बंधकों की हत्या की धमकी दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ सूचना मिलते ही एसपी अनिमेष नैथानी के निर्देश पर सिमरिया एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस ने रात में ही जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही पुलिस टीम अपराधियों के ठिकाने के करीब पहुंची, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद पुलिस की घेराबंदी से घबराकर अपराधियों ने सभी बंधकों को छोड़ दिया और भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर पांच आरोपियों को पकड़ लिया। हथियार और मोबाइल बरामद, फरार आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने जिन छह ग्रामीणों को सुरक्षित मुक्त कराया, उनमें विनोद साव, महेंद्र साव, संतोष साव, प्रदीप साव, बिंदु देवी और सोनी देवी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में रमेश कुमार गंझू और सतीश कुमार गंझू की पहचान हुई है, जबकि तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने देशी हथियार, पिस्टल जैसा दिखने वाला लाइटर, चाकू और लूटे गए मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद किए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार अपराधियों की तलाश में जंगल में लगातार सर्च अभियान चला रही है।
रांची। झारखंड में मुहर्रम पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट है। मुहर्रम पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए दस हजार की संख्या में अतिरिक्त जवानों की तैनाती होगी। मुहर्रम पर्व में आईआरबी, जिलाबलों के अलावा होम गार्ड की भी तैनाती होगी। मुहर्रम पर्व में 5850 होम गार्ड को बुलाया जाएगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया है। मुहर्रम पर्व को लेकर राज्य के अलग अलग जिलों में बड़े पैमाने पर होम गार्ड की तैनाती का फैसला किया है। 4 दिनों के लिए होगी तैनाती राज्य के 24 जिलों में कुल दस हजार से अधिक जवानों का तैनाती होगी। वहीं होमगार्ड जवानों को ड्यूटी पर बुलाने की अनुमति दे दी गई है। इन सभी होम गार्ड की तैनाती चार दिनों के लिए होगी। पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) ने सभी जिलों के एसएसपी व एसपी को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मुहर्रम पर्व के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। रांची और जमशेदपुर में सबसे ज्यादा सुरक्षाबल मुहर्रम पर्व को ध्यान में रखते हुए सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाले जिलों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। राजधानी रांची और जमशेदपुर में सबसे अधिक 500-500 होम गार्ड की तैनाती की गई है। इसके अलावा गिरिडीह में 400, हजारीबाग में 350, जबकि धनबाद, बोकारो, पलामू और चाईबासा में 300-300 जवानों की तैनाती की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) समेत जिला के एसएसपी व एसपी को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश भेज दिए हैं। सुरक्षा को लेकर आईजी अभियान के प्रमुख निर्देश धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: सभी जिलों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और वहां सुरक्षा बलों के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। शांति समिति की बैठकें: सभी थाना क्षेत्रों में समय रहते शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं, यदि कोई पुराना या संभावित विवादित बिंदु हो, तो दोनों पक्षों को बिठाकर उसका समाधान पहले ही निकाल लिया जाए। आकस्मिक स्थिति की तैयारीः किसी भी अप्रिय या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक स्तर पर पुलिस और सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। उपद्रवियों पर कार्रवाई: जो लोग पूर्व में सांप्रदायिक तनाव या दंगों में शामिल रहे हैं और वर्तमान में भी उनसे विवाद पैदा करने की आशंका है, ऐसे असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर कड़ी नजरः मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की विशेष रूप से मॉनिटरिंग की जाएगी। अफवाह फैलाने या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित मार्ग से ही निकलेगा जुलूसः पुलिस पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मुहर्रम का जुलूस केवल प्रशासन द्वारा पहले से तय रूट से ही गुजरे. किसी भी नए मार्ग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरएन रवि ने अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नई सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने, घुसपैठ रोकने, भ्रष्टाचार और वसूली के नेटवर्क को खत्म करने तथा राज्य को औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘धमकाने की संस्कृति और भ्रष्टाचार के गिरोह खत्म होंगे’ राज्यपाल ने कहा कि पिछली सरकार के शासनकाल में पनपे असामाजिक तत्वों, वसूली करने वाले गिरोहों और अवैध खनन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नई सरकार ‘धमकाने की संस्कृति’ और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घुसपैठ और अतिक्रमण पर सख्ती राज्यपाल ने कहा कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों और घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सीमा सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया। बीएसएफ को भूमि उपलब्ध कराने के फैसले की सराहना आरएन रवि ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं राज्यपाल ने कहा कि सरकार महिलाओं तथा कमजोर एवं वंचित वर्गों के खिलाफ अपराधों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस बल में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएंगे। अवैध खनन और वसूली के नेटवर्क पर प्रहार सरकार अवैध बालू और कोयला खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। राज्य में कथित तौर पर सक्रिय वसूली नेटवर्क को खत्म कर कानून का शासन स्थापित किया जाएगा। उद्योग, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर रहेगा फोकस पश्चिम बंगाल को प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में काम। अनुपयोगी सरकारी भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। मेट्रो और रेलवे परियोजनाओं में केंद्र के साथ सहयोग। तटीय नौवहन, जलमार्ग, मत्स्य पालन और ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा। उत्तर बंगाल में IIT और AIIMS स्थापित करने की दिशा में प्रयास। स्टार्टअप केंद्र विकसित कर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण और ‘पीएम श्री’ स्कूल योजना लागू की जाएगी। राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाएगा। अन्नपूर्णा भंडार योजना और महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा राज्यपाल ने कहा कि सरकार ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ शुरू करेगी और महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। गोरखालैंड मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत राज्यपाल ने कहा कि दार्जिलिंग और गोरखालैंड से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। राज्यपाल आरएन रवि के अभिभाषण ने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार के पहले बजट सत्र की दिशा तय कर दी है। यह सत्र ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा ने लगभग 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस शासन का अंत कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पांडू थाना क्षेत्र में 15 दिनों से लापता महिला का कंकाल जंगल से मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान भटवलिया गांव निवासी सुनीता देवी के रूप में हुई है, जो 29 मई को जंगल में लकड़ी चुनने गई थीं और उसके बाद घर वापस नहीं लौटी थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। लकड़ी चुनने गई थी, फिर नहीं लौटी घर जानकारी के अनुसार, सुनीता देवी अक्सर हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के लोहबंधा-माहूर जंगल में लकड़ी चुनने जाती थीं। 29 मई को भी वह रोज की तरह जंगल गई थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मवेशी चराने गए ग्रामीणों को मिली लाश शुक्रवार को पांडू और हुसैनाबाद थाना क्षेत्रों की सीमा से लगे जंगल में कुछ ग्रामीण मवेशी चराने पहुंचे। इस दौरान उन्हें इलाके से तेज दुर्गंध आने का एहसास हुआ। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां एक महिला का कंकाल पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पांडू थाना पुलिस और मृतका के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। कपड़ों के आधार पर हुई पहचान परिजनों ने शव के पास मिले कपड़ों के आधार पर महिला की पहचान सुनीता देवी के रूप में की। बिश्रामपुर के एसडीपीओ चिरंजीवी कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया कपड़ों के आधार पर पहचान की गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस परिजनों के आवेदन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। मेदिनीनगर में ट्रेन की चपेट में आने से महिला की मौत उधर, मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के शांतिपुरी इलाके में एक अन्य हादसे में लक्ष्मी देवी नामक महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह छतरपुर थाना क्षेत्र के खाटीन गांव की रहने वाली थीं और अपनी बेटी से मिलने मेदिनीनगर जा रही थीं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रांची। नगड़ी में बन रहे रिम्स 2 के विरोध में आदिवासी संगठन गुरुवार को सड़क पर उतरे। इस आंदोलन में आदिवासी समाज, किसान और ग्रामीण शामिल हुए। इनका आक्रोश सड़कों पर फूटा। हजारों की संख्या में लोग नगड़ी से मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च के लिए निकले, रास्ते में उन्हें जगह जगह रोका गया, लेकिन ये लोग नदी और खेत से होते हुए मोराबादी पहुंच गए। अब प्रशासन ने उन्हें ऑक्सीजन पार्क के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया है। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और अपने नारेबाजी कर रहे हैं। आजीविका छीनने का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर उनकी खेती-किसानी और आजीविका छीन रही है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर रिम्स-2 बनाने की योजना है, वह इलाके की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि में शामिल है, जहां सैकड़ों परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के भविष्य पर सीधा प्रहार होगा। बंजर या गैरकृषि भूमि पर बने रिम्स-2.. प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए बंजर या गैर-कृषि भूमि का चयन किया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब राज्य में अन्य वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है, तो फिर उपजाऊ खेतों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। खेतो और नदी के रास्ते मोरहाबादी पहुंचे रोक के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई ग्रामीण खेतों और नदी के रास्ते होते हुए ऑक्सीजन पार्क तक पहुंचे। उनका आरोप है कि मार्च को रोकने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग आंदोलन स्थल तक पहुंचने में सफल रहे। कांके ब्लॉक में भी रोका गयाः आदिवासी संगठनों और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कांके के ब्लॉक चौक के पास रोक दिया। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का नहीं बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और भविष्य का सवाल है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन को खत्म करना स्वीकार नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों को प्रशासन ने रोका प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने रैली में भाग लिया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को प्रशासन ने कांके ब्लॉक चौक के समीप बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद रैली को कांके प्रखंड कार्यालय की ओर डायवर्ट करने का प्रयास किया गया।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में संदिग्ध घुसपैठियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दिनहाटा और चांगराबांधा स्थित होल्डिंग सेंटरों में कई लोगों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के संदेह में रखा गया है। इन लोगों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। दो होल्डिंग सेंटरों में रखे गए 14 संदिग्ध जानकारी के मुताबिक, दिनहाटा नगरपालिका के कम्युनिटी हॉल में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में चार लोगों को रखा गया है। वहीं मेखलीगंज क्षेत्र के चांगराबांधा ट्रक टर्मिनस स्थित होल्डिंग सेंटर में रविवार को दस अन्य लोगों को लाया गया। अधिकारियों का मानना है कि ये सभी लोग बांग्लादेश सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हो सकते हैं। हालांकि प्रशासन और पुलिस ने अभी तक हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान, उनके भारत आने की तारीख या सीमा पार करने के स्थानों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। सीमावर्ती जिला होने से बढ़ी चुनौती कूचबिहार की लगभग 500 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। सीमा के कुछ हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभी भी कंटीले तारों की बाड़ नहीं लगाई जा सकी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों का उपयोग अवैध घुसपैठ और तस्करी के लिए किया जाता रहा है। बढ़ाई गई निगरानी और सुरक्षा प्रशासन ने होल्डिंग सेंटरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर जिले में और होल्डिंग सेंटर भी बनाए जा सकते हैं। जांच के बाद होगा अगला फैसला प्रशासन फिलहाल सभी संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों और पहचान की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद उनके संबंध में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास जारी हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना के दानापुर थाना क्षेत्र स्थित ताराचक इलाके में रविवार देर रात आपसी रंजिश को लेकर हुई गोलीबारी ने एक किशोर की जान ले ली, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है। मृतक की पहचान 16 वर्षीय नितिन कुमार के रूप में हुई है, जो बिहटा के मुस्तफापुर का रहने वाला था। वह अपनी मां के साथ दानापुर स्थित ननिहाल में किराये के मकान में रहता था। परिजनों के अनुसार, बदमाशों ने घर से कुछ दूरी पर नितिन को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य लोग भी हुए घायल गोलीबारी में आनंद बाजार निवासी 68 वर्षीय विजय कुमार और सन्नी कुमार भी घायल हो गए। विजय कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया, जबकि सन्नी कुमार का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। दोनों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुबह के विवाद ने शाम को लिया हिंसक रूप पुलिस के अनुसार, दोनों गुटों के बीच सुबह भी मारपीट हुई थी। पुरानी दुश्मनी और तनाव के कारण शाम होते-होते विवाद और बढ़ गया तथा दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें नितिन की जान चली गई। घटनास्थल से मिले कई अहम साक्ष्य पुलिस ने मौके से आठ खोखे, शराब की बोतलें, लाठी और लोहे की रॉड बरामद की हैं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पहले से टकराव की तैयारी में थे। घटना के बाद एफएसएल टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। एसआईटी का गठन, आरोपियों की तलाश जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। सिटी एसपी पश्चिमी ने बताया कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं बेटे की मौत से नितिन की मां सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि एक साल पहले सड़क दुर्घटना में बड़े बेटे की भी मौत हो चुकी थी और अब नितिन के निधन से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली में E85 फ्यूल की बिक्री शुरू हो गई है। इसकी कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जो मौजूदा पेट्रोल की कीमतों से करीब 20 रुपये तक कम है। कम कीमत के कारण यह ईंधन वाहन मालिकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है, लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या आपकी कार इसके लिए उपयुक्त है या नहीं। क्या है E85 फ्यूल? E85 एक हाई-एथेनॉल मिश्रित ईंधन है, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसके मुकाबले भारत में वर्तमान में E20 पेट्रोल का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिसमें केवल 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित होता है। एथेनॉल की मात्रा अधिक होने के कारण E85 का दहन व्यवहार सामान्य पेट्रोल से अलग होता है। यही वजह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजन और फ्यूल सिस्टम की आवश्यकता होती है। क्या आपकी कार E85 पर चल सकती है? यह सबसे अहम सवाल है। भारत में बिकने वाली अधिकांश पेट्रोल कारें E20 फ्यूल के अनुरूप बनाई गई हैं, लेकिन वे E85 के लिए तैयार नहीं हैं। E85 का सुरक्षित उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) तकनीक से लैस वाहनों में ही किया जा सकता है। ऐसे वाहन ईंधन में मौजूद एथेनॉल की मात्रा के अनुसार इंजन और फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम को स्वतः एडजस्ट कर लेते हैं। यदि किसी सामान्य पेट्रोल कार में E85 भरवा दिया जाए, तो इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, माइलेज कम हो सकता है और लंबे समय में इंजन व फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। सस्ता है, लेकिन क्या वाकई खर्च कम होगा? 82.12 रुपये प्रति लीटर की कीमत आकर्षक जरूर लगती है, लेकिन केवल प्रति लीटर कीमत देखकर निर्णय लेना सही नहीं होगा। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसका मतलब है कि E85 पर चलने वाली गाड़ी को समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता पड़ती है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार E85 के उपयोग से माइलेज में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यानी ईंधन सस्ता होने के बावजूद कई मामलों में प्रति किलोमीटर लागत पेट्रोल के बराबर या उससे अधिक भी हो सकती है। सरकार E85 को क्यों बढ़ावा दे रही है? E85 का उद्देश्य केवल वाहन चालकों की जेब पर बोझ कम करना नहीं है। इसके पीछे देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय रणनीति जुड़ी हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। एथेनॉल का उत्पादन देश में कृषि आधारित संसाधनों से किया जा सकता है, जिससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन को कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण कम करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल आम लोगों के लिए कितना उपयोगी? हालांकि E85 फ्यूल बाजार में उपलब्ध हो चुका है, लेकिन भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अभी शुरुआती चरण में हैं। कई वाहन कंपनियों ने ऐसे मॉडल और प्रोटोटाइप पेश किए हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उनकी बिक्री अभी शुरू नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल E85 को भविष्य की ईंधन तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका वास्तविक लाभ तब दिखाई देगा जब फ्लेक्स-फ्यूल वाहन आम होंगे और देशभर में E85 की उपलब्धता बढ़ेगी।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सामने आया है जहां शहर के दो प्रमुख कारोबारियों से पांच-पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है। यहां तक कि रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई है, जिससे कारोबारी समुदाय में भय का माहौल बन गया है। पॉल ज्वेलर्स की संचालिका को धमकी जानकारी के अनुसार, रांची के प्रसिद्ध पॉल ज्वेलर्स की संचालिका सुमन पॉल को चार जून की रात एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को प्रिंस खान बताते हुए कहा कि वह दुबई से बोल रहा है। उसने पांच करोड़ रुपये की मांग की और रकम नहीं देने पर सुमन पॉल तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गयी । बाद में व्हाट्सएप पर भी धमकी भरा मैसेज भेजा गया। मामले को लेकर सुमन पॉल ने लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बिल्डर से भी मांगे गए पांच करोड़ रुपये इसी तरह लालपुर निवासी बिल्डर उदय शंकर को भी एक अज्ञात नंबर से संदेश भेजकर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। पांच जून की रात मिले इस संदेश में खुद को प्रिंस खान बताने वाले व्यक्ति ने रकम नहीं देने पर गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। इसके बाद उदय शंकर ने भी लालपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई। कारोबारियों में बढ़ी चिंता पुलिस की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि विदेश में बैठा गैंगस्टर अपने नेटवर्क के जरिए रांची के कारोबारियों को निशाना बना रहा है। पिछले दो सप्ताह में होटल संचालकों सहित कई व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि अब तक शहर के आठ से अधिक कारोबारियों को धमकी भरे कॉल और संदेश मिल चुके हैं। पुलिस ने बढ़ाई निगरानी दोनों मामलों में पुलिस जांच कर रही है और कॉल व मैसेज के स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार सामने आ रहे रंगदारी के मामलों ने राजधानी में कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं की निगरानी के लिए जिलों और तालुकों का नियमित दौरा करने को कहा है। समीक्षा बैठक में सीएम का सख्त संदेश बेंगलुरु में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तरह के भेदभाव के बिना काम करेगी। उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता की भागीदारी प्राथमिकता होगी। 15 दिन में तैयार होगी विभागीय योजना सीएम ने सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और उसके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया। सचिवों को नियमित रूप से जिलों और तालुकों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति जांचने को कहा गया है। शिकायत निवारण के लिए नया तंत्र बनाने की तैयारी मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जन शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों के समाधान के लिए एक अलग प्रशासनिक तंत्र विकसित किया जाएगा, जो समस्याओं के त्वरित और कानूनी समाधान में मदद करेगा। CSR फंड के बेहतर उपयोग पर जोर सीएम ने करीब 8,000–8,500 करोड़ रुपये के CSR फंड के प्रभावी उपयोग और पारदर्शी लेखा-जोखा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि CSR नीति के नए दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर फोकस मुख्यमंत्री ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और नए स्कूलों के निर्माण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक तालुका में विशेष पुलिस दस्ते तैनात करने का सुझाव दिया। कर्नाटक भवन और दिल्ली दौरे की तैयारी दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने इसकी समीक्षा की बात कही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। गारंटी योजनाओं में बदलाव नहीं सीएम शिवकुमार ने साफ किया कि राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पूर्णिया। पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम पर कथित अतिक्रमणकारियों ने अचानक जानलेवा हमला शुरु कर दिया। बताया जा रहा है कि तीर, भाला, लाठी और ईंट-पत्थर से हमले किए गए। हमले में एक पुलिस जवान के गले में तीर घुस गया, जबकि कई लोग घायल हो गये हैं। करीब आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। घटना जिले के चम्पानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत केनगर अंचल के मौजा प्रसादपुर की है। जानकारी के अनुसार, इस इलाके में लगभग 11.28 एकड़ की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई चल रही थी। इस जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज थी। जमीन विक्रमपट्टीन कवैया निवासी सुधीर ऋषि का है। प्रशासनिक आवेश के बाद प्रतिनियुक्त कार्यपालक दंडाधिकारी अभय राज, अंचलाधिकारी दिवाकर कुमार समेत प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी चंद्रदेव प्रसाद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। जैसे ही टीम ने जमीन खाली कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की, विरोध कर रहे लोगों का गुस्सा भड़क उठा। देखते ही देखते माहौल हिंसा में तब्दील हो गया। इस दौरान भीड़ ने पुलिस बल पर तीर-धनुष, भाला, लाठी और ईंट-पत्थरों से हमला किया। प्रत्यदर्शियों के मुताबिक, हमले में ग्रामीण पुलिस जवान शंकर पासवान के गले में एक तीर जा लगा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ ही लगभग आधा दर्जन पुलिस अधिकारी घायल हो गए। आनन-फानन में घायल जवान को तत्काल श्रीनगर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए सदर अस्पताल पूर्णिया रेफर कर दिया। इस दौरान पुलिस बल ने मोर्चा संभालते हुए उपद्रवियों को खदेड़कर भीड़ को नियंत्रित किया। इसके साथ ही आक्रमणकारियों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत सात को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही हमले में शामिले अन्य लोगों की भी पहचान में जुटी हुई है। उक्त इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
रांची। रांची में सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है। जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त (DC Ranchi) मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर बेवजह अड्डाबाजी, अनावश्यक जमावड़ा और नशापान करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान का नेतृत्व SDO सदर कुमार रजत ने किया। देर रात चली इस कार्रवाई से असामाजिक तत्वों और सड़क किनारे हुड़दंग करने वालों में हड़कंप मच गया। इन प्रमुख इलाकों में चली सघन जांच प्रशासनिक टीम ने शहर के उन संवेदनशील और प्रमुख चौक-चौराहों को टारगेट किया, जहां अक्सर युवाओं के जमावड़े और नशापान की शिकायतें मिलती हैं। अभियान के तहत मुख्य रूप से कचहरी चौक से लेकर बड़ा तालाब क्षेत्र, हरमू चौक, गाड़ीखाना चौक और उसके आसपास के इलाकों में जांच की गई। जांच के दौरान टीम ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक रूप से खड़े लोगों से पूछताछ की और उन्हें वहां से हटाया। SDO कुमार रजत की युवाओं को सख्त चेतावनी निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर युवकों का अनावश्यक जमावड़ा पाया गया। SDO सदर कुमार रजत ने खुद युवाओं को हिदायत दी और भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा: “सार्वजनिक स्थलों पर अनावश्यक भीड़ लगाना, नशापान करना और असामाजिक गतिविधियां न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। अगर भविष्य में कोई भी कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जारी रहेगा जिला प्रशासन का अभियान रांची जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है। शहर में अनुशासन और सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए अड्डाबाजी और अवांछित गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। प्रमुख हॉटस्पॉट्स पर पुलिस और प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। युवाओं से रचनात्मक कार्यों में जुड़ने की अपील प्रशासन ने न केवल कार्रवाई की, बल्कि युवाओं को सही राह दिखाने की कोशिश भी की है। जिला प्रशासन ने रांची के युवाओं से अपील की है कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएं और रांची को एक स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें।
रांची। राजधानी रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित पुरानी रांची में सोमवार तड़के अचानक आग लगने से तीन वाहन जलकर पूरी तरह खाक हो गए। घटना घुमकड़िया भवन के पास की बताई जा रही है, जहां सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों में अचानक आग भड़क उठी। आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि देखते ही देखते तीनों वाहन इसकी चपेट में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है। एक वाहन से शुरू हुई आग, तीन गाड़ियां चपेट में आईं स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह के समय एक वाहन से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। कुछ ही मिनटों में आग ने पास में खड़ी दो अन्य गाड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस और दमकल टीम घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल दमकल विभाग को अलर्ट किया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक तीनों वाहन पूरी तरह जल चुके थे। समय रहते आग पर नियंत्रण पा लेने से आसपास के घरों और अन्य संपत्तियों को नुकसान होने से बचा लिया गया। शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच जारी कोतवाली थाना प्रभारी सुजीत चौधरी ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। वाहन मालिकों ने अब तक नहीं दी शिकायत पुलिस के अनुसार जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह घनी आबादी वाला इलाका है और जगह की कमी के कारण लोग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी करते हैं। फिलहाल किसी भी वाहन मालिक की ओर से थाने में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।
पलामू। जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव में पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश शनिवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों ग्रामीणों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने छतरपुर थाना पहुंचकर घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने भारत माता चौक को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग प्रदर्शनकारियों ने हत्या में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिकारियों ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी गणेश महतो, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार साहू और पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि काफी देर तक लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। एक आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका मृतक के बेटे बिपिन सिंह ने आरोप लगाया कि हत्या में कई लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल एक गिरफ्तारी हुई है। वहीं, पत्नी तेतरी देवी ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए सभी दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की। इलाके में तनाव बरकरार घटना के बाद चिल्हो खुर्द और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गुमला। गुमला जिले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव आखिरकार मुख्यधारा में लौट आया है। हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी जैसे गंभीर मामलों में वांछित रामदेव उरांव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। दो दर्जन से अधिक मामलों में था आरोपी जानकारी के अनुसार, रामदेव उरांव के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या, रंगदारी वसूलने, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। वर्ष 2002 के आसपास से वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और गुमला सहित आसपास के कई क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था। उसके नाम से लोगों में भय का माहौल बना रहता था। पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने सरेंडर करने का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर नजर रखने में जुटी हुई थी। इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रामदेव उरांव से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल करने की तैयारी में हैं। लोगों ने ली राहत की सांस रामदेव उरांव के सरेंडर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का खौफ बना हुआ था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उसके आत्मसमर्पण के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था और मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल बेहतर बनेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।