कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। इन फैसलों में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का गठन प्रमुख हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से महिलाओं, कर्मचारियों और आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। महिलाओं को हर महीने ₹3000 की सहायता राज्य सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹3000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि यह योजना 1 जून 2026 से लागू होगी और राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा सरकार ने महिलाओं के लिए एक और बड़ी घोषणा करते हुए राज्य की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला किया है। यह सुविधा भी 1 जून से शुरू होगी। सरकार का कहना है कि इससे कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को राहत मिलेगी। 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों, संबद्ध वैधानिक निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दी है। इससे राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। धार्मिक आधार पर सरकारी सहायता बंद सरकार ने धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर दिए जाने वाले सरकारी अनुदानों को बंद करने का भी फैसला लिया है। मंत्रियों के अनुसार, अब योजनाओं और सहायता का वितरण नए मानकों के आधार पर किया जाएगा। सरकार का दावा कैबिनेट के इन फैसलों को सरकार ने “जनहित और सामाजिक कल्याण” की दिशा में बड़ा कदम बताया है। माना जा रहा है कि इन घोषणाओं का असर राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
ग्लोबल पॉप आइकन और बिजनेसवुमन Rihanna ने मुंबई में आयोजित Fenty Beauty Ki Haveli इवेंट के दौरान महिलाओं की पहचान, प्रतिनिधित्व और आवाज़ को लेकर एक मजबूत संदेश दिया। उनका साफ कहना था—“महिलाएं सिर्फ देखी जाना चाहती हैं, सुनी जाना चाहती हैं… बात इतनी ही सी है।” यह इवेंट मुंबई के Phoenix Palladium में आयोजित किया गया, जहां Fenty Beauty ने पारंपरिक ब्यूटी काउंटर की जगह एक एक्सपीरिएंस-ड्रिवन स्पेस तैयार किया। अलग-अलग सेक्शन—पाउडर रूम, ड्रॉइंग रूम और ग्लॉस ज़ोन—के जरिए ब्यूटी को एक इंटरैक्टिव अनुभव बनाया गया। इवेंट में Rihanna का खास अंदाज़ जैसे ही Rihanna ने एंट्री की, माहौल बदल गया। उन्होंने मेहमानों से औपचारिक दूरी बनाए रखने के बजाय खुद बातचीत शुरू की, लोगों को गले लगाया और हर इंटरैक्शन को पर्सनल बना दिया। कई कंटेंट क्रिएटर्स के साथ शूट के दौरान उन्होंने सीन को खुद गाइड किया, सुझाव दिए और यहां तक कि भारतीय डांस फॉर्म भरतनाट्यम भी ट्राय किया। यह दिखाता है कि वह सिर्फ एक ब्रांड फेस नहीं, बल्कि एक्टिव क्रिएटर की तरह काम करती हैं। ब्यूटी इंडस्ट्री में इनक्लूसिविटी पर जोर Fenty Beauty की शुरुआत 2017 में एक अहम सवाल के साथ हुई थी—“ब्यूटी इंडस्ट्री ने किन लोगों को नजरअंदाज किया है?” मुंबई इवेंट में यह सोच और स्पष्ट दिखी। जब एक यूजर ने सही फाउंडेशन शेड न मिलने की समस्या बताई, तो Rihanna ने खुद शेड मैच करने में मदद की। उनका कहना था—“मेरे रहते कोई भी स्किन टोन ऐशी या ऑरेंज नहीं दिखेगा।” यह सिर्फ मार्केटिंग लाइन नहीं, बल्कि ब्रांड की फिलॉसफी का हिस्सा है—हर स्किन टोन को सही पहचान देना। “महिलाओं को सिर्फ पहचान चाहिए” बातचीत के दौरान Rihanna ने महिलाओं की स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएं अपनी पहचान और विचारों को गंभीरता से लिए जाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनके मुताबिक, “हम बस चाहते हैं कि हमें देखा जाए, सुना जाए और हमारे आइडियाज मायने रखें।” उन्होंने यह भी कहा कि कई इंडस्ट्रीज महिलाओं के काम और समझ पर टिकी हैं, लेकिन उनके विचारों को तब तक महत्व नहीं मिलता जब तक वे प्रॉफिट में न बदल जाएं। भारत में ब्यूटी की जटिलता को समझना Rihanna ने भारतीय ब्यूटी कल्चर की विविधता को भी स्वीकार किया—जहां स्किन टोन, परंपराएं, जलवायु और व्यक्तिगत पसंद मिलकर एक अलग पहचान बनाते हैं। उनका मानना है कि ब्यूटी सिर्फ मेकअप प्रोडक्ट नहीं, बल्कि यह इस बात से जुड़ा है कि महिलाएं खुद को कैसे देखती हैं और दुनिया के सामने कैसे पेश करना चाहती हैं।
रांची। झारखंड की ग्रामीण महिलाएं अब आइआइएम कोलकाता के विशेषज्ञों से बिजनेस का गुर सीखेंगी। राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। अब राज्य के सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं केवल छोटे-मोटे काम तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि IIMCIP कोलकाता के विशेषज्ञों से बिजनेस मैनेजमेंट के गुर सीखकर करोड़ों का कारोबार करेंगी। JSLPS ने IIMCIP कोलकाता के साथ MOU.... झारखंड के ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में महिला उद्यमियों को दक्षता प्रदान करने के उद्देश्य से JSLPS ने IIMCIP कोलकाता के साथ MOU किया है। ये एक त्रिवर्षीय योजना के तहत काम करेगा। इस MOU के माध्यम से IIMCIP कोलकाता के द्वारा इनक्यूबेटर की भूमिका निभाते हुए राज्य के सभी 24 जिलों के 264 प्रखंडों में सखी मंडल से जुड़ी उद्यमी महिलाएं प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अपने उद्यम को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने की जानकारी हासिल करेंगी। करोड़पति बनेंगी ग्रामीण महिलाए योजना के पहले चरण में लको विकसित किया जायेगा।
महिला आरक्षण को लेकर जारी सियासी बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए महिला आरक्षण कानून को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 16 अप्रैल 2026 से इसे प्रभावी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। क्या है नया अपडेट? सरकार की अधिसूचना के मुताबिक: Constitution (106th Amendment) Act 2023 के प्रावधान अब 16 अप्रैल 2026 से लागू माने जाएंगे इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी तुरंत लागू नहीं होगा आरक्षण हालांकि कानून लागू हो गया है, लेकिन इसका तुरंत असर चुनावों में नहीं दिखेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार: आरक्षण लागू करने के लिए पहले जनगणना जरूरी है इसके बाद परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया पूरी होगी तभी सीटों का पुनर्विन्यास कर आरक्षण लागू किया जा सकेगा यानी मौजूदा संसद या विधानसभा में यह लागू नहीं होगा। 2029 या उसके बाद लागू होने की संभावना रिपोर्ट्स के मुताबिक: 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन होगा इसके बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा ऐसे में 2029 के आम चुनाव में इसे लागू करने की संभावना जताई जा रही है नोटिफिकेशन पर सवाल क्यों? कानून के नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद कई सवाल उठ रहे हैं: जब लागू करना अभी संभव नहीं, तो अभी अधिसूचना क्यों? सरकार ने “तकनीकी कारणों” का हवाला दिया, लेकिन विस्तार नहीं दिया क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’? सितंबर 2023 में संसद ने इस कानून को पास किया था: महिलाओं को 1/3 (33%) आरक्षण SC/ST आरक्षित सीटों में भी 33% महिलाओं के लिए आरक्षित महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम महिला आरक्षण कानून का लागू होना ऐतिहासिक फैसला जरूर है, लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी जब यह जमीन पर लागू होगा। फिलहाल यह साफ है कि जनगणना और परिसीमन के बिना आरक्षण लागू नहीं हो सकता, इसलिए महिलाओं को इसका सीधा लाभ पाने के लिए अभी कुछ साल इंतजार करना होगा।
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को लेकर राजनीतिक बहस के बीच अब देश की पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर इस विधेयक को “ऐतिहासिक” और “परिवर्तनकारी कदम” बताया है। उनके इस पत्र को राजनीतिक तौर पर सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। “लोकतंत्र को मजबूत करेगा यह कदम” Pratibha Patil ने अपने पत्र में कहा कि यह संवैधानिक संशोधन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी और संतुलित बनाएगा। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विविधता आएगी। महिलाओं की भागीदारी से बदलेगा नीति निर्माण पूर्व राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के अलग-अलग अनुभव और दृष्टिकोण नीति निर्माण को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाएंगे। उनके अनुसार: महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से सामाजिक मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जाएगा नीतियां अधिक संतुलित और समावेशी बनेंगी लोकतंत्र में वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा ग्रामीण और वंचित महिलाओं को मिलेगा लाभ Pratibha Patil ने विश्वास जताया कि यह अधिनियम खासकर ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा और वे समाज में अधिक सक्रिय भागीदारी कर सकेंगी। “लंबे समय का सपना होगा साकार” अपने पत्र के अंत में उन्होंने इस पहल को “लंबे समय से संजोए गए सपने को साकार करने” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने इस विधेयक को ऐतिहासिक असमानताओं को कम करने और एक अधिक समान व समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में निर्णायक बताया। राजनीतिक मायने पूर्व राष्ट्रपति का यह समर्थन ऐसे समय में आया है, जब महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में राजनीतिक मतभेद देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में Pratibha Patil का यह पत्र सरकार के पक्ष में एक मजबूत नैतिक और राजनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बढ़ती बहस के बीच यह समर्थन बताता है कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Narendra Modi ने Vigyan Bhavan में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की नारी शक्ति को समर्पित है और लोकतंत्र को नई मजबूती देगा। संसद रचने जा रही नया इतिहास प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। यह फैसला सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र और सशक्त होगा “समतामूलक भारत” के सपने को आगे बढ़ाएगा विशेष सत्र और बड़ा फैसला सरकार ने Parliament of India का विशेष सत्र 16–18 अप्रैल के बीच बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े अहम कदम उठाए जाएंगे। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को 2023 में सर्वसम्मति से पास किया गया था। “मैं उपदेश देने नहीं, आशीर्वाद लेने आया हूं” अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा: “मैं यहां किसी को उपदेश देने नहीं आया हूं” “मैं देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूं” उन्होंने देशभर से आई महिलाओं का आभार जताया और इसे “नए युग की शुरुआत” बताया। दशकों का इंतजार खत्म होने की बात पीएम मोदी ने कहा कि: महिला आरक्षण पर करीब 4 दशक से चर्चा चल रही थी अब इसे लागू करने का समय आ गया है लक्ष्य है कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाए सहयोग से आगे बढ़ने की अपील प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर: संवाद, सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ें संसद की गरिमा को नई ऊंचाई दें पीएम मोदी के बयान से साफ है कि सरकार महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मील का पत्थर बनाना चाहती है। अब नजर संसद के विशेष सत्र और विपक्ष के रुख पर रहेगी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक खुला लेख लिखते हुए इसकी अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा हुआ है। साथ ही, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की है। क्यों जरूरी है महिला आरक्षण बिल? प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि: भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है इसके बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम है उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो: शासन की गुणवत्ता बेहतर होती है नई सोच और अनुभव से नीतियां मजबूत बनती हैं सभी दलों से समर्थन की अपील PM मोदी ने कहा: यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, पूरे देश का है महिला सशक्तिकरण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करें। 16 अप्रैल को संसद में चर्चा प्रधानमंत्री ने बताया कि: 16 अप्रैल को संसद सत्र बुलाया जाएगा इस दौरान महिला आरक्षण बिल पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया होगी क्या है इसका महत्व? PM मोदी के अनुसार: यह बिल लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का बड़ा अवसर मिलेगा समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं
देश में कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को नई मजबूती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से वंचित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय न केवल दत्तक माताओं के अधिकारों को मान्यता देता है, बल्कि परिवार की बदलती परिभाषा को भी कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला? न्यायमूर्ति जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि मातृत्व अवकाश केवल जैविक माताओं तक सीमित नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि: 3 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने पर भी मातृत्व अवकाश देना अनिवार्य है मातृत्व संरक्षण एक मौलिक मानवाधिकार है गैर-जैविक तरीके से परिवार बनाना भी समान रूप से वैध है कानून की किस धारा को ठहराया असंवैधानिक? अदालत ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार दिया। यह प्रावधान केवल उन दत्तक माताओं को मातृत्व अवकाश देता था, जो 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती थीं। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन बताया। अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां “गोद लिया हुआ बच्चा और जैविक बच्चा अलग नहीं हैं” “प्रजनन संबंधी स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) केवल जैविक प्रक्रिया तक सीमित नहीं” “कानून का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है, न कि भेदभाव करना” कैसे शुरू हुआ यह मामला? यह मामला कर्नाटक की वकील हमसानंदिनी नंदूरी की याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने इस प्रावधान को चुनौती दी थी। उन्होंने 2017 में दो बच्चों को गोद लिया था, लेकिन उम्र सीमा के कारण उन्हें सीमित अवकाश मिला। याचिका में कहा गया कि यह कानून दत्तक माताओं और बच्चों के साथ भेदभाव करता है। पितृत्व अवकाश पर भी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) पर भी नीति बनाने पर विचार करे, ताकि बच्चों की देखभाल में दोनों अभिभावकों की समान भूमिका सुनिश्चित हो सके। देशभर में क्या होगा असर? इस फैसले के बाद: सभी कामकाजी दत्तक माताओं को समान मातृत्व लाभ मिलेगा गोद लेने को लेकर सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ेगी कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा यह फैसला भारतीय समाज में परिवार और मातृत्व की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए एक बड़ी संवैधानिक और सामाजिक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
चतरा: झारखंड के चतरा जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि नहीं मिलने से हजारों महिलाएं परेशान हैं। जनवरी और फरवरी महीने की किस्त अब तक खातों में नहीं पहुंची है, जिससे लाभुक महिलाएं बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। दूसरे जिलों में भुगतान, चतरा में अब भी इंतजार लाभुक महिलाओं का कहना है कि राज्य के कई अन्य जिलों में योजना की राशि जारी कर दी गई है। वहां महिलाओं के खातों में एक साथ दो महीने की करीब 5-5 हजार रुपये की राशि पहुंच चुकी है, लेकिन चतरा जिले में अब तक भुगतान नहीं हुआ है। इससे महिलाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बैंक और कार्यालयों के चक्कर से बढ़ी परेशानी राशि की उम्मीद में महिलाएं रोजाना अपने बैंक पहुंच रही हैं और खाता अपडेट करवा रही हैं। इसके अलावा वे सामाजिक सुरक्षा कार्यालय और प्रखंड कार्यालयों में भी जानकारी लेने जा रही हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें एक ही जवाब मिल रहा है-“अभी भुगतान नहीं आया है”। 1.74 लाख से ज्यादा महिलाएं प्रभावित जानकारी के अनुसार, चतरा जिले में इस योजना के करीब 1 लाख 74 हजार 491 लाभुक हैं। इतनी बड़ी संख्या में भुगतान लंबित होना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। महिलाओं का कहना है कि यह राशि उनके घर के खर्च और जरूरतों के लिए बेहद जरूरी है। तकनीकी समस्या बनी देरी की वजह जिला सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी सुकरमनी लिंडा ने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही समस्या दूर होगी, जनवरी और फरवरी दोनों महीनों की राशि एक साथ लाभुकों के खातों में भेज दी जाएगी। जल्द भुगतान की उठी मांग लाभुक महिलाओं ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यह योजना उनके आर्थिक सशक्तिकरण का अहम हिस्सा है, ऐसे में भुगतान में देरी से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद पर टिकी निगाहें फिलहाल चतरा की महिलाएं इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही उनके खातों में योजना की राशि पहुंच जाएगी। लेकिन जब तक भुगतान नहीं होता, तब तक उनका इंतजार और परेशानी दोनों जारी रहने वाली है।
असम: देश की राजनीति में हाल के वर्षों में महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू की गई कल्याणकारी योजनाएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही हैं। कई राज्यों में ऐसी योजनाओं ने सरकारों की वापसी का रास्ता आसान किया है। इसी पृष्ठभूमि में असम में भी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। असम सरकार ने मंगलवार को अरुणोदय (Arunodoi) योजना के तहत करीब 40 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹9,000 की एकमुश्त सहायता राशि ट्रांसफर की। यह राज्य में अब तक की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पहलों में से एक मानी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत करीब ₹3,600 करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। चुनाव से पहले बड़ा कदम, लेकिन सरकार का दावा-राजनीति से नहीं जुड़ा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार के उस मॉडल से मिलता-जुलता है, जिसमें चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देकर सरकार ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस योजना को चुनाव से जोड़ने से साफ इनकार किया है। गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित ज्योति-बिष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला मंदिर ऑडिटोरियम से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से लाभार्थियों को यह राशि जारी करते हुए सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना कई वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि राज्य सरकार की दीर्घकालिक सामाजिक कल्याण नीति का हिस्सा है। चार महीने की सहायता और बिहू बोनस शामिल सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि में चार महीनों की वित्तीय सहायता के साथ-साथ महिलाओं के लिए दिया जाने वाला विशेष बिहू बोनस भी शामिल है। राज्य सरकार का कहना है कि त्योहारों के समय आर्थिक मदद से गरीब परिवारों को राहत मिलती है और उनकी जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलती है। किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, अरुणोदय योजना खासतौर पर समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं- विधवा महिलाएं तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाएं गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद घर-परिवार सरकार का कहना है कि लाभ केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो निर्धारित मानकों के आधार पर वास्तव में इसके पात्र हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने इस पहल को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को सहायता मिल रही है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। नियोग के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने गरीब परिवारों और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और समाज में उनका सम्मान बढ़ाना है। लाभार्थियों में खुशी योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से लाभार्थियों में उत्साह देखा गया। सोनापुर की शिवानी बोरो डेका ने बताया कि ₹9,000 की सहायता मिलने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि वह इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने में करेंगी। वहीं एक अन्य लाभार्थी राधिका मंडल ने कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके लिए छोटा व्यवसाय शुरू करने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में मददगार साबित हो सकती है। राजनीतिक और सामाजिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली साबित होती हैं। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में असम सरकार की इस पहल पर राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले में अब केले की खेती सिर्फ फल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। केले के तनों से रेशा निकालकर विभिन्न उत्पाद तैयार करने की पहल के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन और नाबार्ड की ओर से ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल के तहत महिलाओं के लिए एक महीने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी नवीन कुमार, डीडीसी श्वेता भारती और नाबार्ड की डीडीएम पूजा भारती ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर केले के तनों से रेशा निकालकर उत्पाद बनाने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। केले के तने से बनेंगे कई उपयोगी उत्पाद खगड़िया में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है। अब आधुनिक तकनीक की मदद से केले के तनों से रेशा निकालकर कई प्रकार के आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को हस्तशिल्प से जुड़े कई उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है। इनमें फैंसी बैग, चटाई, टोकरियां, फाइल कवर, फोल्डर, सजावटी सामान और मजबूत रस्सियां शामिल हैं। महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि खगड़िया में केले की प्रचुरता है और इसके तनों से निकलने वाला रेशा पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर साधन बन सकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन महिलाओं को इस कार्य के लिए आवश्यक मशीनें और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास करेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल डीडीसी श्वेता भारती ने कहा कि महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस तरह के उद्योग से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनके अनुसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है और यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मददगार साबित होगी। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में अहम कदम अब तक किसान केले के तनों को बेकार समझकर खेतों में छोड़ देते थे, लेकिन अब इन्हीं तनों से कीमती रेशा निकालकर उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड की डीडीएम पूजा भारती ने किया, जबकि इसका संयोजन J.J.B.F. संस्था द्वारा किया गया। इस पहल से जिले में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को मजबूती मिलने के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रेलवे की अनोखी पहल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर झारखंड के रांची और धनबाद रेल मंडलों में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक पहल देखने को मिली। रेलवे प्रशासन ने इस अवसर पर ट्रेनों के संचालन से लेकर सुरक्षा और टिकट जांच तक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला कर्मचारियों को सौंपीं। इस पहल के तहत कई ट्रेनों को पूरी तरह महिला क्रू द्वारा संचालित किया गया, जिससे महिलाओं की क्षमता और नेतृत्व कौशल का शानदार उदाहरण सामने आया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी शुभकामनाएं इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संदेश में कहा कि देश की आधी आबादी को इस खास दिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माताएं और बहनें केवल परिवार की ताकत ही नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला भी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प से हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। रांची–इरगांव ट्रेन का संचालन महिलाओं ने किया रांची रेलवे स्टेशन से चलने वाली रांची–इरगांव ट्रेन का संचालन पूरी तरह महिला कर्मचारियों की टीम ने संभाला। इस विशेष पहल के तहत करीब 15 महिला रेलकर्मियों की टीम बनाई गई थी। इस टीम में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, टीटीई और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की महिला जवान शामिल थीं। ट्रेन की रवानगी से लेकर यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्था तक की सभी जिम्मेदारियां महिला टीम ने सफलतापूर्वक निभाईं। यात्रियों ने तालियां बजाकर किया उत्साहवर्धन रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम सूची सिंह ने स्टेशन पर मौजूद महिला रेलकर्मियों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में भी इस पहल को लेकर उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने तालियां बजाकर महिला कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया और उनकी सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि महिला दिवस महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। धनबाद–सिंदरी टाउन ट्रेन भी महिला क्रू ने चलाई धनबाद रेल मंडल में भी महिला दिवस के अवसर पर विशेष पहल की गई। धनबाद से सुबह 11:30 बजे खुलने वाली धनबाद–सिंदरी टाउन पैसेंजर ट्रेन का संचालन पूरी तरह महिला क्रू ने किया। इस ट्रेन में रेल चालक के रूप में जानकी बल्लभ बारी, सहायक रेल चालक के रूप में वंदना कुमारी और ट्रेन मैनेजर के रूप में दीपा कुमारी ने जिम्मेदारी निभाई। वापसी में सिंदरी टाउन से धनबाद आने वाली ट्रेन का संचालन भी महिला कर्मचारियों ने ही किया। स्टेशन की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथ धनबाद स्टेशन पर टिकट काउंटर, टिकट जांच, ट्रेन सिग्नलिंग और सुरक्षा से जुड़ी कई जिम्मेदारियां भी महिला कर्मचारियों को सौंपी गईं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की क्षमता को सामने लाना और समाज में यह संदेश देना है कि महिलाएं हर क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि महिलाओं को समान अवसर देने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए इस तरह की पहल आगे भी जारी रहेगी।
झारखंड में मंईयां सम्मान योजना की दो किश्तों की राशि जारी होने के बाद राज्य के कई जिलों के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सरकार की इस योजना के तहत महिलाओं के खातों में दो महीनों की कुल 5000 रुपये की राशि ट्रांसफर की जा रही है। राजधानी Ranchi सहित कई जिलों में योजना की राशि मिलते ही महिलाओं में उत्साह देखा जा रहा है। खासकर Jamtara के बाजारों में महिलाओं की भीड़ बढ़ने लगी है। बाजारों में बढ़ी खरीदारी राशि मिलने के बाद महिलाएं कपड़े, कॉस्मेटिक, घरेलू सामान, किराना और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी कर रही हैं। बाजारों में ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि मंईयां सम्मान योजना की राशि जारी होने के बाद व्यापार में तेजी आई है। खासकर कपड़े और कॉस्मेटिक की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ ज्यादा देखने को मिल रही है। ईद से पहले बाजारों में हलचल ईद का त्योहार आने में अभी करीब दो हफ्ते का समय बाकी है, लेकिन बाजारों में अभी से त्योहार की हलचल शुरू हो गई है। महिलाएं त्योहार और घर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीदारी कर रही हैं। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजारों में और भी ज्यादा रौनक देखने को मिल सकती है, जिससे स्थानीय व्यापार को भी बड़ा फायदा होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।