अमेरिका

FIFA World Cup 2026 Round of 16
फीफा वर्ल्ड कप: बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

सिएटल, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार अंदाज में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस हार के साथ अमेरिका का 2002 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप के अंतिम आठ में पहुंचने का सपना टूट गया। साथ ही कनाडा और मेक्सिको के बाद अमेरिका भी टूर्नामेंट से बाहर होने वाला आखिरी सह-मेजबान देश बन गया।   डी केटेलेरे ने चमकाया बेल्जियम का खेल बेल्जियम की जीत के नायक चार्ल्स डी केटेलेरे रहे, जिन्होंने दो गोल दागे। इसके अलावा हंस वनाकेन और स्थानापन्न खिलाड़ी रोमेलु लुकाकू ने एक-एक गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। बेल्जियम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।   शानदार फॉर्म में बेल्जियम बेल्जियम की टीम 20 मार्च 2025 के बाद से अजेय बनी हुई है। इस दौरान उसने फीफा विश्व कप, विश्व कप क्वालिफायर, यूईएफए नेशंस लीग प्ले-ऑफ और अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैचों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में 12 जीत और छह ड्रॉ दर्ज किए हैं। इस अवधि में टीम का गोल अंतर भी +40 रहा है, जो उसकी बेहतरीन फॉर्म को दर्शाता है।   अब स्पेन से होगी भिड़ंत क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का मुकाबला स्पेन से होगा। स्पेन ने राउंड ऑफ-16 में पुर्तगाल को 1-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 11 जुलाई को लॉस एंजिलिस में खेला जाएगा। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह मैच टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।   अमेरिका का सपना टूटा, रोनाल्डो का भी हुआ विदाई मैच अमेरिका की हार के साथ उसकी क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं। वहीं, स्पेन से हार के बाद पुर्तगाल के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो का भी फीफा विश्व कप सफर समाप्त हो गया। अब सभी की निगाहें बेल्जियम और स्पेन के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Donald Trump Netnyahu
ट्रंप और नेतन्याहू जल्द करेंगे मुलाकात, पश्चिम एशिया में सुरक्षा और ईरान पर होगी अहम चर्चा

वॉशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत के दौरान जल्द अमेरिका में मुलाकात करने पर सहमति जताई है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में ईरान, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय सहयोग प्रमुख मुद्दे रहेंगे।   ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा रहेगा मुख्य एजेंडा   सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देश पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे।   अमेरिका-इजरायल संबंधों को मिलेगी नई दिशा   हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई थीं, लेकिन ताजा बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। माना जा रहा है कि यह बैठक क्षेत्रीय कूटनीति और भविष्य की संयुक्त रणनीति तय करने में अहम साबित हो सकती है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
America Jobs
अमेरिका में सुस्त पड़ा जॉब मार्केट, जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं।   ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है।   श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है।   टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Strait of Hormuz
होर्मुज में नए ड्रोन हमले के बाद वैश्विक तनाव बढ़ा, तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर मंडराया खतरा

दुबई, एजेंसियां। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक व्यापारिक जहाज और तेल टैंकर पर ड्रोन एवं प्रोजेक्टाइल हमलों की घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक फिर गहरा गया है। इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।   व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद बढ़ी सैन्य गतिविधियां   रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जबकि इससे पहले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, वहीं ईरान ने अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।   वैश्विक तेल बाजार पर असर की आशंका   होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर असर पड़ सकता है।   बहरीन और खाड़ी देशों ने बढ़ाई सतर्कता   ड्रोन हमलों के बाद बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बहरीन ने अपने क्षेत्र में ड्रोन हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। वहीं समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।   युद्धविराम पर भी मंडराया संकट   अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम पर भी इस ताजा घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगने की आशंका बढ़ गई है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Donald Trumph Narendra MODI
2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। इस संभावना का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी कर रहा है।   व्यापार समझौते को मिल सकता है अंतिम रूप   मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित भारत यात्रा के दौरान इस पर बड़ा ऐलान हो सकता है।   भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  (AI) और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।   जी-7 बैठक के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता   हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। इसके बाद व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत में भी तेजी आई है।   अभी आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं   हालांकि, व्हाइट हाउस या भारत सरकार की ओर से ट्रंप की यात्रा की अंतिम तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने केवल इतना कहा है कि यात्रा की तैयारी पर काम चल रहा है और समय तय होने पर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Tulsi Gabbard faces scrutiny after report alleges influence of a Hawaii-based spiritual organization on her political career.
तुलसी गबार्ड पर नया विवाद, जांच रिपोर्ट में ‘आध्यात्मिक गुरु’ के प्रभाव का दावा

  अमेरिका की पूर्व नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड एक नई विवादित रिपोर्ट के कारण चर्चा में आ गई हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गबार्ड के राजनीतिक करियर, सार्वजनिक बयानों और नीतिगत रुख पर हवाई स्थित एक आध्यात्मिक संगठन से जुड़े लोगों का लंबे समय तक प्रभाव रहा। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब गबार्ड ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है और ट्रंप प्रशासन अमेरिकी खुफिया तंत्र में व्यापक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। 25 हजार दस्तावेजों और ईमेल के आधार पर जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच लगभग 25,000 पन्नों के आंतरिक दस्तावेजों, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड पर आधारित है। इन दस्तावेजों को रेबेका साल्ट्जबर्ग नामक पूर्व राजनीतिक सहयोगी ने उपलब्ध कराया, जो कभी गबार्ड के चुनाव अभियान और साइंस ऑफ आइडेंटिटी फाउंडेशन (SIF) दोनों से जुड़ी रही थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIF संस्थापक क्रिस बटलर के करीबी सहयोगियों ने विभिन्न समय पर गबार्ड के सलाहकारों के साथ मिलकर उनके राजनीतिक संदेश, नीतिगत रुख और रणनीतियों को प्रभावित किया। राजनीतिक बयानों और दस्तावेजों में समानता का दावा जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि SIF से जुड़े कुछ दस्तावेजों में दिए गए सुझाव बाद में गबार्ड के सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक गतिविधियों में दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, एक ईमेल में इस्लामिक स्टेट से जुड़े विदेशी लड़ाकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का सुझाव दिया गया था और कुछ समय बाद गबार्ड ने कांग्रेस में इसी विषय से संबंधित एक विधेयक पेश किया। रिपोर्ट में सीरिया और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर भी इसी तरह की समानताओं का दावा किया गया है। सोशल मीडिया अभियान पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि क्रिस बटलर के समर्थकों से जुड़े कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स गबार्ड की राजनीतिक छवि को मजबूत करने और उनके पक्ष में माहौल बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। जांच में दावा किया गया है कि 2014 से 2016 के बीच कांग्रेस सदस्य के रूप में गबार्ड द्वारा उठाए गए कई मुद्दे और तर्क SIF से जुड़े दस्तावेजों में मौजूद विचारों से मेल खाते थे। कौन हैं क्रिस बटलर? 78 वर्षीय क्रिस बटलर हवाई स्थित साइंस ऑफ आइडेंटिटी फाउंडेशन के संस्थापक हैं। 1970 के दशक में स्थापित यह संगठन योग, आध्यात्मिकता और वैदिक दर्शन से जुड़े विचारों को बढ़ावा देता है। वर्षों से संगठन को लेकर कई विवाद भी सामने आते रहे हैं। कुछ पूर्व सदस्यों ने आरोप लगाया है कि संगठन में सख्त अनुशासन और पदानुक्रम व्यवस्था थी तथा बटलर का अनुयायियों के निजी जीवन और निर्णयों पर गहरा प्रभाव रहता था। गबार्ड के प्रवक्ता ने आरोपों को नकारा रिपोर्ट सामने आने के बाद तुलसी गबार्ड के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। वहीं, क्रिस बटलर के करीबी सहयोगियों ने भी दावा किया कि जिन दस्तावेजों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है, वे सीधे बटलर द्वारा तैयार नहीं किए गए थे। वॉशिंगटन पोस्ट का कहना है कि उसके विश्लेषण में कई ऐसे संकेत मिले हैं जो दस्तावेजों और संबंधित निर्देशों को बटलर के प्रभाव से जोड़ते हैं। कोविड विवाद को लेकर भी चर्चा में रहीं गबार्ड हाल के दिनों में तुलसी गबार्ड कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े अपने बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। पद छोड़ने से पहले उन्होंने कुछ दस्तावेज और जानकारियां सार्वजनिक की थीं, जिनमें उन्होंने महामारी से जुड़े निर्णयों और अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों ने उनके इन दावों पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि उपलब्ध दस्तावेजों से उनके आरोप पूरी तरह साबित नहीं होते। DNI कार्यालय में शुरू हुआ बड़ा पुनर्गठन गबार्ड के इस्तीफे के बाद ट्रंप प्रशासन ने खुफिया विभाग में बड़े स्तर पर बदलाव शुरू कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई राजनीतिक नियुक्त अधिकारियों को हटाने और कार्यालय के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही गबार्ड के कार्यकाल के दौरान कार्यालय में लगाए गए कई चित्र और अन्य प्रतीकात्मक व्यवस्थाएं भी हटाई जा रही हैं। विलियम पुल्टे को मिली अंतरिम जिम्मेदारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गबार्ड के पद छोड़ने के बाद विलियम पुल्टे को कार्यवाहक नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर नियुक्त किया है। बताया जा रहा है कि पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने खुफिया तंत्र के पुनर्गठन और कर्मचारियों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि तुलसी गबार्ड को लेकर सामने आई यह नई रिपोर्ट और खुफिया विभाग में जारी पुनर्गठन आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विमर्श को और तेज कर सकते हैं।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Iran’s Supreme Leader Mojtaba Khamenei reacts after the US-Iran agreement, saying Donald Trump was desperate to finalize the deal.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का दावा- समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप, डील कराने को डाला हर तरह का दबाव

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर “बेहद बेताब” थे और इसे अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने हर संभव दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया। खामेनेई ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में सिद्धांत के तौर पर इस समझौते का विरोध किया था, लेकिन बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा देशहित और क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा का भरोसा दिए जाने के बाद ही इस समझौते को मंजूरी दी। ‘देश के हितों और रेजिस्टेंस फ्रंट की रक्षा का मिला भरोसा’ अपने लिखित बयान में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि समझौते में देश के रणनीतिक हितों, राष्ट्रीय सुरक्षा और तथाकथित ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, “ईरानी अधिकारियों ने नेक इरादे और देश की चिंता को ध्यान में रखते हुए इस समझौते के लिए कड़ी मेहनत की। मुझे भरोसा दिलाया गया कि ईरान के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।” 18 जून को हुआ था समझौते पर हस्ताक्षर 18 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कई महीनों से जारी तनाव को समाप्त करने और बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने वर्चुअल माध्यम से इसे अंतिम मंजूरी प्रदान की। ‘ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा’ खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने उन्हें स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया था कि यदि भविष्य में अमेरिका की ओर से कोई ऐसी मांग रखी जाती है जो ईरान के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध या अत्यधिक हो, तो तेहरान उसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और रणनीतिक प्राथमिकताओं से कोई समझौता नहीं करेगा।” बातचीत का मतलब अमेरिकी नीतियों से सहमति नहीं समझौते का समर्थन करते हुए भी खामेनेई ने स्पष्ट किया कि भविष्य में अमेरिका के साथ होने वाली प्रत्यक्ष बातचीत को अमेरिकी नीतियों या दृष्टिकोण की स्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत का उद्देश्य केवल अपने हितों की रक्षा करना और विवादों का समाधान तलाशना है, न कि किसी दबाव के सामने झुकना। समझौते पर ईरान के भीतर भी हुई व्यापक चर्चा खामेनेई के बयान से यह संकेत मिला है कि अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर व्यापक विचार-विमर्श हुआ था। सर्वोच्च नेता ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्होंने प्रारंभ में इस समझौते का विरोध किया था, लेकिन राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के आश्वासन के बाद ही इसे मंजूरी दी। विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई का बयान एक ओर घरेलू राजनीतिक वर्ग को संदेश देने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी है कि ईरान भविष्य में अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन अपने रणनीतिक हितों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Panic-stricken crowds run through New York's Times Square after gunfire erupted during celebrations following the New York Knicks' NBA championship victory.
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में गोलियों की आवाज से मची अफरा-तफरी, जान बचाने के लिए भागे टूरिस्ट; एक घायल

  न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित टाइम्स स्क्वायर में शुक्रवार को अचानक गोलियों की आवाज सुनाई देने के बाद अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग की आवाज सुनते ही वहां मौजूद पर्यटक, स्थानीय लोग और जश्न में शामिल हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग भयभीत होकर दौड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ, जिसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, उसकी हालत और चोटों की गंभीरता को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। दोपहर 3:40 बजे हुई घटना अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:40 बजे हुई। उस समय एनबीए चैंपियन न्यूयॉर्क निक्स की ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में निकाली गई विजय परेड समाप्त होने के बाद लोअर मैनहैटन और टाइम्स स्क्वायर क्षेत्र में भारी भीड़ मौजूद थी। न्यूयॉर्क निक्स ने 53 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पहली बार एनबीए चैंपियनशिप जीतने का गौरव हासिल किया है, जिसके जश्न में हजारों प्रशंसक सड़कों पर जुटे हुए थे। पुलिस ने तुरंत की घेराबंदी फायरिंग की सूचना मिलते ही न्यूयॉर्क पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और संदिग्ध की तलाश शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध का तुरंत पीछा किया गया और उसे हिरासत में ले लिया गया है। फायर डिपार्टमेंट ने पुष्टि की है कि एक घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया गया है। घटना के कारणों और फायरिंग के पीछे की मंशा की जांच की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अधिकारियों के अनुसार, न्यूयॉर्क निक्स की विजय परेड के दौरान सुरक्षा के लिए करीब 10,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद भीड़भाड़ वाले इलाके में फायरिंग की घटना ने न्यूयॉर्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और घटना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए प्रशासनिक अपडेट पर भरोसा करें।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
A commercial oil tanker passes through the Strait of Hormuz amid rising tensions between the United States and Iran.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ बड़ी चुनौती, परमाणु हथियार से भी ज्यादा चिंता का विषय

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), में समुद्री यातायात को बाधित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की यह क्षमता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा जोखिम बन सकती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कुछ खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि होर्मुज पर ईरान का प्रभाव अमेरिका के लिए परमाणु हथियारों से भी बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और तेज गति वाली नौकाएं मौजूद हैं, जिनकी मदद से वह इस समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने की क्षमता रखता है। अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी नजरें अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि समझौते के प्रमुख बिंदुओं में ईरान का परमाणु हथियार नहीं रखने का वादा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना शामिल है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में समझौते का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर सकते हैं। अभी तक इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों की चिंता बरकरार भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ रही हो, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीतिक पकड़ भविष्य में भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारण बनी रह सकती है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US-Iran Peace
अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प बोले- डील साइन, ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए

पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर दस्तखत किए। भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5 बजे इसके ऐलान के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया। होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई है। तय कार्यक्रम से पहले ही हुआ समझौता शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में इस पर दस्तखत कर दिए गए।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Oil tankers pass through the Strait of Hormuz as the US considers a naval security plan for commercial shipping.
होर्मुज से गुजरने के लिए 'VIP सुरक्षा पास' की तैयारी! जहाजों को अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा देने पर विचार कर रहा ट्रंप प्रशासन

  ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता के बीच ट्रंप प्रशासन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस एक ऐसी योजना पर चर्चा कर रहा है, जिसके तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ गुजर सकेंगे। अधिकारियों के बीच इस प्रस्ताव को अनौपचारिक रूप से 'VIP पास योजना' कहा जा रहा है। अतिरिक्त शुल्क के बदले अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ Susie Wiles ने अधिकारियों को ऐसे उपाय खोजने का निर्देश दिया है, जिससे जहाज मालिक और बीमा कंपनियां दोबारा होर्मुज मार्ग का उपयोग करने के लिए तैयार हो सकें। एक अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों में होर्मुज से गुजरने वाली कई समुद्री यात्राएं बीमा जोखिम के दायरे में हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहाजों को दोबारा बीमा कवरेज कैसे उपलब्ध कराया जाए। दुनिया के 20% तेल व्यापार की जीवनरेखा है होर्मुज Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता था। ईरान द्वारा अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में जहाजों पर हमले किए जाने के बाद इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। इसका असर वैश्विक तेल बाजार और ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिला। हाल के हफ्तों में शांति वार्ता शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं, लेकिन वे अब भी संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। 'VIP पास' से प्राथमिकता के साथ सुरक्षित आवाजाही सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज से गुजर सकेंगे। एक अधिकारी ने कहा, "यह कुछ वैसा होगा जैसे जहाज के लिए एक 'VIP पास' जारी कर दिया जाए, जिससे उसे सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।" विश्लेषकों का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य यूरोपीय देशों को भी खाड़ी क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा में अधिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि पूरा बोझ केवल अमेरिका पर न रहे। ट्रंप पहले भी टोल वसूली की कर चुके हैं वकालत अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क अमेरिका को लेना चाहिए, ईरान को नहीं। उन्होंने कहा था, "हम विजेता हैं, फिर शुल्क हम क्यों न लें?" रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) के तहत अमेरिकी बीमा कंपनियों को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को बीमा कवरेज देने के लिए बाध्य करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। 20 अरब डॉलर के बीमा सुरक्षा प्रस्ताव में नहीं दिखी रुचि मार्च में ट्रंप प्रशासन ने जहाज मालिकों को करीब 20 अरब डॉलर तक की राजनीतिक जोखिम बीमा सुरक्षा देने की पेशकश की थी। ईरानी मिसाइलों, ड्रोन और तेज गति वाली नौकाओं से हमले की आशंका को देखते हुए अधिकांश शिपिंग कंपनियों ने इस प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शांति वार्ता जारी, लेकिन जहाज मालिकों की चिंता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए वार्ता जारी है, लेकिन शिपिंग कंपनियां और बीमा उद्योग अभी भी सतर्क हैं। उन्हें आशंका है कि यदि शांति समझौता विफल रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा तनाव का केंद्र बन सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित 'VIP सुरक्षा पास' योजना केवल समुद्री सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को स्थिर रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
US military headquarters graphic highlighting the renaming of Indo-Pacific Command back to Pacific Command amid strategic debate.
US Indo-Pacific Command का नाम बदला, 'इंडो' शब्द हटाकर फिर बना Pacific Command; भारत और क्वाड पर क्या पड़ेगा असर?

  अमेरिका ने अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांडों में से एक के नाम में बड़ा बदलाव करते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) को फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) नाम दे दिया है। अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of War) ने कहा कि यह कदम कमांड की ऐतिहासिक विरासत और उसकी मूल पहचान को बहाल करने के लिए उठाया गया है। यह वही नाम है जिसके तहत यह सैन्य कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक कार्य करता रहा था। 2018 में 'इंडो' शब्द जोड़ा गया था साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री Jim Mattis ने अमेरिकी पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय वॉशिंगटन का मानना था कि हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है और इसकी सुरक्षा चुनौतियां प्रशांत क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई हैं। 'इंडो-पैसिफिक' शब्द को भारत और हिंद महासागर की बढ़ती भू-राजनीतिक अहमियत के प्रतीक के रूप में देखा गया था। नाम बदला, लेकिन जिम्मेदारियां नहीं अमेरिकी युद्ध विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम बदला गया है। कमांड की रणनीति, सैन्य मिशन और भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। USPACOM का संचालन क्षेत्र पहले की तरह: अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों तक फैला रहेगा। कमांड आगे भी संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करती रहेगी। क्यों अहम है यह सैन्य कमांड? अमेरिकी पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को Harry S. Truman के कार्यकाल में हुई थी। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संयुक्त लड़ाकू कमांडों में से एक है। इसने: Korean War Vietnam War जैसे बड़े सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। भारत और क्वाड के लिए क्या मायने? अमेरिका ने कहा है कि यह केवल नाम का बदलाव है, लेकिन कई रणनीतिक विशेषज्ञ इसे प्रतीकात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 'इंडो-पैसिफिक' अवधारणा पिछले कुछ वर्षों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने Quadrilateral Security Dialogue (क्वाड) सहयोग की आधारशिला मानी जाती रही है। 'इंडो' शब्द हटने से यह सवाल उठ रहे हैं कि: क्या ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक रणनीति की प्राथमिकताओं में बदलाव चाहता है? क्या भारत की रणनीतिक भूमिका को लेकर अमेरिका का दृष्टिकोण बदल रहा है? क्या यह केवल ऐतिहासिक नाम की वापसी है या इसके पीछे कोई बड़ा भू-राजनीतिक संदेश छिपा है? फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय साझेदारों, भारत सहित सभी सहयोगी देशों के साथ 'स्वतंत्र और खुला क्षेत्र' बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी। हवाई से संचालित होता है विशाल सुरक्षा नेटवर्क हवाई स्थित मुख्यालय से संचालित यह कमांड दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री और सामरिक क्षेत्रों की निगरानी करती है। इसके दायरे में वैश्विक व्यापार मार्ग, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन को भले ही प्रशासनिक कदम बताया जा रहा हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में इसे भारत-अमेरिका संबंधों और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे के संदर्भ में बारीकी से देखा जा रहा है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Indian IT professional files lawsuit in Texas alleging H-1B visa exploitation and extortion by employer in the United States.
H-1B वीजा के नाम पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल से 94 लाख की ठगी! टेक्सास कोर्ट पहुंचा मामला

  अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय आईटी पेशेवर ने अपने भारतीय-अमेरिकी नियोक्ता के खिलाफ टेक्सास की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कर्मचारी का आरोप है कि H-1B वीजा और अमेरिका में नौकरी बनाए रखने के नाम पर उससे करीब एक लाख डॉलर (लगभग 94 लाख रुपये) की जबरन वसूली की गई। शिकायतकर्ता ऋषिकेश राज मीसाला ने कंपनी के मालिक साई जितेंद्र कलागरा पर आर्थिक शोषण, धमकी और इमिग्रेशन स्टेटस का डर दिखाकर पैसे वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है। मास्टर डिग्री के बाद मिली नौकरी, फिर शुरू हुआ कथित शोषण ऋषिकेश राज मीसाला छात्र वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे और वर्ष 2023 में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्हें टेक्सास स्थित साई जितेंद्र कलागरा की कंपनी में नौकरी मिली, जिसने उनका H-1B वीजा स्पॉन्सर किया। यह नौकरी उनके लिए अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी। लेकिन नौकरी शुरू होने के कुछ समय बाद ही परिस्थितियां बदल गईं। 'बेंच' पर रखा, काम नहीं दिया, फिर भी मांगे पैसे शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने उन्हें किसी प्रोजेक्ट पर नियुक्त नहीं किया और 'बेंच' पर रखा। आईटी सेक्टर में इसका मतलब होता है कि कर्मचारी कंपनी में तो रहता है, लेकिन उसे कोई सक्रिय प्रोजेक्ट नहीं दिया जाता। आरोप है कि काम न देने के बावजूद कंपनी ने उनका H-1B स्टेटस बनाए रखने के नाम पर लगातार बड़ी रकम की मांग की। दस्तावेज रोकने और डिपोर्ट कराने की धमकी का आरोप ऋषिकेश ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पैसे देने का विरोध किया तो कंपनी ने वेतन पर्ची (Salary Slip) और अन्य जरूरी दस्तावेज देने से इनकार कर दिया। H-1B वीजाधारकों के लिए ये दस्तावेज नई नौकरी तलाशने, वीजा नवीनीकरण और इमिग्रेशन प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्हें अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) से निर्वासित (Deport) कराने और भारत में रह रहे उनके पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। डर के माहौल में उन्होंने कथित तौर पर करीब 8.31 लाख रुपये नकद भी दिए। लॉ फर्म ने बताया मानव तस्करी और जबरन मजदूरी जैसा मामला ऋषिकेश की ओर से पैरवी कर रही 'बानियास लॉ' फर्म ने इस मामले को मानव तस्करी, जबरन श्रम और दस्तावेजों के जरिए कर्मचारी को बंधक बनाकर रखने जैसा मामला बताया है। वकीलों का दावा है कि कंपनी को रुकी हुई सैलरी और कथित तौर पर जबरन वसूले गए पैसों को मिलाकर कम से कम 93.30 लाख रुपये लौटाने चाहिए। H-1B वीजा को लेकर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में H-1B वीजा प्रणाली को लेकर बहस तेज है। अमेरिकी तकनीकी और इंजीनियरिंग कंपनियां बड़े पैमाने पर इस वीजा का उपयोग करती हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में करीब 71 प्रतिशत भारतीय मूल के लोग हैं। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के कथित शोषण के मामलों ने एक बार फिर इस वीजा प्रणाली की पारदर्शिता और श्रमिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल टेक्सास की अदालत में यह मामला विचाराधीन है और सभी आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Pentagon building under heightened security after air quality alert triggers emergency response measures.
पेंटागन में एयर क्वालिटी अलर्ट से मचा हड़कंप, कई हिस्से अस्थायी रूप से बंद; बाद में निकला फॉल्स अलार्म

  अमेरिका के रक्षा मुख्यालय पेंटागन में गुरुवार को उस समय सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं, जब भवन के भीतर लगे मॉनिटरिंग सिस्टम ने हवा की गुणवत्ता से जुड़ी एक संभावित समस्या का संकेत दिया। एहतियात के तौर पर इमारत के कई हिस्सों में सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए, कुछ क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद किया गया और विशेष प्रतिक्रिया टीमों को तैनात किया गया। बाद में की गई जांच में किसी खतरनाक पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई और पूरा मामला फॉल्स अलार्म साबित हुआ। एयर क्वालिटी अलर्ट के बाद सक्रिय हुई सुरक्षा एजेंसियां अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन के निगरानी सिस्टम ने एयर क्वालिटी से संबंधित असामान्य संकेत दर्ज किए थे। इसके बाद अधिकारियों ने तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए। संभावित रासायनिक या खतरनाक पदार्थ की आशंका को देखते हुए हेजमैट (Hazmat) यानी खतरनाक पदार्थों से निपटने वाली विशेष टीमों को भी तैनात किया गया। कई मंजिलें और कॉरिडोर अस्थायी रूप से बंद रिपोर्टों के मुताबिक, दूसरी से पांचवीं मंजिल तक के कुछ हिस्सों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा। विशेष रूप से कॉरिडोर 4 से 7 के बीच के क्षेत्रों को जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। सुरक्षा कारणों से इन इलाकों में लोगों की आवाजाही रोक दी गई और अतिरिक्त सैंपलिंग तथा तकनीकी जांच शुरू की गई। कर्मचारियों को भेजे गए आधिकारिक संदेश में बताया गया कि स्थिति की समीक्षा की जा रही है और प्रतिक्रिया दल मौके पर मौजूद हैं। सुरक्षात्मक उपकरणों के साथ तैनात रहीं विशेष टीमें जांच के दौरान कई अधिकारियों को गैस मास्क, रासायनिक सुरक्षा सूट और अन्य सुरक्षात्मक उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में काम करते देखा गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई थी। शुरुआती चरण में यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि सेंसर किस कारण सक्रिय हुए और क्या वास्तव में किसी हानिकारक पदार्थ की मौजूदगी थी। पेंटागन ने जारी किया आधिकारिक बयान पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि निगरानी प्रणालियों ने ऐसी स्थिति का संकेत दिया था, जिसमें तत्काल सावधानी बरतना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत प्रभावित क्षेत्रों में "शेल्टर-इन-प्लेस" निर्देश लागू किए गए और प्रतिक्रिया टीमें पूरी तरह तैयार रखी गईं। जांच में नहीं मिला कोई खतरा कुछ घंटों की जांच और सैंपलिंग के बाद अधिकारियों ने पाया कि किसी भी प्रकार का खतरनाक पदार्थ मौजूद नहीं था। इसके बाद सुरक्षा प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए गए और सामान्य गतिविधियां बहाल कर दी गईं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिस संभावित खतरे के कारण पेंटागन में आपात स्थिति घोषित की गई थी, वह अंततः फॉल्स अलार्म निकला। सुरक्षा व्यवस्था की हुई समीक्षा घटना के बाद अधिकारियों ने मॉनिटरिंग सिस्टम द्वारा जारी चेतावनी के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सेंसर किस वजह से सक्रिय हुए और भविष्य में ऐसी झूठी चेतावनियों से कैसे बचा जा सकता है। कोई वास्तविक खतरा नहीं मिला, फिर भी इस घटना ने यह दिखाया कि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय में सुरक्षा अलर्ट मिलने पर आपात प्रतिक्रिया तंत्र कितनी तेजी से सक्रिय हो जाता है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks and possible nuclear deal during a political event.
ट्रंप का बड़ा दावा: ‘दो हफ्तों में ईरान पर पूर्ण विजय’, परमाणु समझौते के भी दिए संकेत

  वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक और रणनीतिक टकराव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अगले दो सप्ताह अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे और इसी अवधि में ईरान के खिलाफ “पूर्ण विजय” हासिल होने की संभावना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच एक नए परमाणु समझौते की राह खुल सकती है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ा सैन्य तनाव फिलहाल कम होता दिखाई दे रहा है और क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। चुनावी कार्यक्रम में किया बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी एक वर्चुअल राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित किया। कार्यक्रम रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के समर्थन में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है और समझौते की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। ट्रंप ने कहा, “हम बातचीत कर रहे हैं और वे एक अच्छा समझौता करना चाहते हैं। वे हमें लगभग हर वह चीज देने को तैयार हैं जिसकी हमें जरूरत है। वे परमाणु हथियार नहीं रखने पर भी तैयार हैं।” ‘दो सप्ताह में दिखेगी असली जीत’ राष्ट्रपति ट्रंप ने अगले पखवाड़े को निर्णायक बताते हुए कहा कि अमेरिका जल्द ही अपनी रणनीतिक सफलता की घोषणा कर सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम यह संघर्ष जीत रहे हैं, लेकिन असली जीत अगले दो सप्ताह में दिखाई देगी। हम पूर्ण विजय की घोषणा करेंगे। यह पूरी जीत होगी और बहुत जल्द होगी।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि समझौता सफल रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ईरान-इजरायल तनाव के बीच आया बयान ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सप्ताहांत में ईरान और इजरायल के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। तनाव बढ़ने के बाद इजरायल ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने भी जवाबी हमले किए। बाद में दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिली। नेतन्याहू ने हमले रोकने की पुष्टि की इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि इजरायली सेना ने फिलहाल ईरानी ठिकानों पर अपने सैन्य अभियान रोक दिए हैं। उन्होंने किसी औपचारिक युद्धविराम की घोषणा नहीं की, लेकिन सैन्य कार्रवाई में आई नरमी को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह फिलहाल अपने सैन्य अभियान को आगे नहीं बढ़ाएगा।  तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई नई कार्रवाई होती है तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं। परमाणु समझौते पर फिर बढ़ीं उम्मीदें ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई दौर की वार्ताएं भी विफल रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष किसी नए समझौते पर सहमत होते हैं तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है। पहले भी दे चुके हैं ऐसी समयसीमा यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी कूटनीतिक सफलता के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की हो। इससे पहले भी उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों और युद्धविराम प्रयासों को लेकर इसी तरह की समय-सीमा का उल्लेख किया था। अब एक बार फिर ट्रंप ने अगले दो सप्ताह को निर्णायक बताते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इन दावों पर अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगी। पश्चिम एशिया पर टिकी दुनिया की नजर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते घटनाक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों और संभावित परमाणु समझौते की दिशा में होने वाली प्रगति आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
White House launches Aliens.gov website showcasing immigration enforcement actions with alien-themed design
'वे हमारे बीच घूम रहे हैं'... अवैध प्रवासियों पर नजर रखने के लिए व्हाइट हाउस ने लॉन्च की एलियन-थीम वेबसाइट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने अभियान को नया रूप देते हुए एक अनोखी वेबसाइट लॉन्च की है। 'Aliens.gov' नाम की इस वेबसाइट को अंतरिक्ष और एलियन थीम पर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे प्रवासियों से जुड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना है। साइंस-फिक्शन जैसी थीम ने खींचा ध्यान गुरुवार को शुरू की गई इस वेबसाइट का डिज़ाइन किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा दिखाई देता है। वेबसाइट पर तारों और आकाशगंगाओं की पृष्ठभूमि के साथ नियॉन-हरे रंग के अक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। साइट खोलते ही एक संदेश दिखाई देता है— "They are among us" (वे हमारे बीच घूम रहे हैं)। यह संदेश उन अवैध प्रवासियों की ओर संकेत करता है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन लंबे समय से कानूनी शब्दावली में "एलियंस" कहकर संबोधित करता रहा है। गिरफ्तारियों को दिखाने के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म 'Aliens.gov' को अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) की कार्रवाई को प्रदर्शित करने के लिए विकसित किया गया है। वेबसाइट पर दावा किया गया है कि वर्षों से ऐसे लोग अमेरिका में रह रहे थे जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी और अब प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। साइट पर एक लाइव काउंटर भी लगाया गया है, जिसमें प्रवासियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई से जुड़े आंकड़े प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इंटरैक्टिव मैप से देखी जा सकती है गिरफ्तारी की जानकारी वेबसाइट की सबसे प्रमुख विशेषताओं में एक इंटरैक्टिव डिजिटल मैप शामिल है। इसके जरिए उपयोगकर्ता अमेरिका के किसी भी राज्य या शहर में हुई आव्रजन कार्रवाई की जानकारी देख सकते हैं। मैप पर उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार व्यक्ति का मूल देश, उस पर लगे आरोप और कथित आपराधिक रिकॉर्ड जैसी जानकारियां भी शामिल की गई हैं। इसके अलावा वेबसाइट पर एक रिपोर्टिंग फॉर्म भी दिया गया है, जहां नागरिक संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जानकारी साझा कर सकते हैं। पहले UFO से जुड़ी अटकलें लगी थीं इस वेबसाइट के लॉन्च से पहले व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टीजर वीडियो साझा किया था। वीडियो में खेतों में बने रहस्यमयी निशानों और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लोगों ने अनुमान लगाया कि सरकार UFO या दूसरे ग्रहों के जीवों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने वाली है। बाद में स्पष्ट हो गया कि यह अभियान अवैध प्रवासियों पर केंद्रित था और वेबसाइट का एलियंस से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। मानवाधिकार संगठनों ने जताई आपत्ति वेबसाइट लॉन्च होने के बाद कई मानवाधिकार और प्रवासी अधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि वेबसाइट पर इस्तेमाल की गई भाषा प्रवासियों को इंसानों की बजाय "एलियन" के रूप में पेश करती है, जिससे समाज में उनके प्रति नकारात्मक धारणा और भेदभाव बढ़ सकता है। आलोचकों का यह भी कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति प्रवासियों को अमानवीय रूप में दिखाती है और सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे सकती है। ट्रंप प्रशासन अपने फैसले पर कायम विवादों के बावजूद ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेबसाइट का उद्देश्य आव्रजन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराना है। प्रशासन का दावा है कि सीमाओं की सुरक्षा और अवैध प्रवास पर नियंत्रण उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इस बीच, अमेरिका के कई शहरों में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और निर्वासन अभियानों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं, लेकिन प्रशासन फिलहाल अपने सख्त आव्रजन रुख पर कायम नजर आ रहा है।  

surbhi मई 30, 2026 0
US trade representative discusses China, Iran and Strait of Hormuz amid rising global tensions.
US का दावा: ‘ईरान को मदद नहीं देगा चीन’, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने किया बड़ा खुलासा

United States के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने दावा किया है कि China ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वह Iran की मदद नहीं करेगा। एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का मुख्य फोकस इस बात पर था कि चीन, ईरान के समर्थन में कोई कदम न उठाए। ग्रीर ने कहा, “हमें चीन की ओर से इसकी प्रतिबद्धता मिली है और उन्होंने इसकी पुष्टि भी की है।” होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए किसी सैन्य हस्तक्षेप की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि चीन खुद भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखना चाहता है, क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ता है। ग्रीर के मुताबिक, “राष्ट्रपति ट्रंप चीन की सैन्य मदद नहीं चाहते। अमेरिका सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चीन, अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों में बाधा न बने।” ट्रंप-शी जिनपिंग बातचीत में टैरिफ मुद्दा नहीं उठा हाल के महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद चर्चा में रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनकी और Xi Jinping के बीच हुई बातचीत में टैरिफ का मुद्दा नहीं उठा। ग्रीर ने इस पर कहा कि व्यापार वार्ता जरूर हुई थी, लेकिन वह शीर्ष नेताओं के स्तर पर नहीं थी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से उन्होंने, वित्त मंत्री Scott Bessent और उनकी टीम ने चीनी अधिकारियों के साथ टैरिफ समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार ग्रीर ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक नियमों और विवादों को व्यवस्थित करने के लिए ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने कई अमेरिकी मीट निर्यात इकाइयों से आयात फिर शुरू करने, कुछ बायोटेक मामलों की समीक्षा करने और 200 Boeing विमानों की खरीद पर सहमति जताई है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इन समझौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई “ठोस कदम” पहले ही शुरू हो चुके हैं और सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-चीन संबंध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump issues strong warning to Iran amid rising Middle East tensions and nuclear dispute.
‘घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी’, ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना   ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Security officers respond after alleged assassination attempt targeting Donald Trump at Washington Hilton
व्हाइट हाउस संवाददाता डिनर में ट्रंप पर हमले की साजिश, आरोपी पर हत्या के प्रयास का आरोप

अमेरिका में राष्ट्रपति Donald Trump की हत्या की कोशिश के आरोप में एक व्यक्ति पर गंभीर संघीय आरोप लगाए गए हैं। यह घटना White House Correspondents' Association Dinner के दौरान हुई, जब भारी सुरक्षा के बीच अफरा-तफरी मच गई। कौन है आरोपी? आरोपी की पहचान 31 वर्षीय Cole Tomas Allen के रूप में हुई है, जो कैलिफोर्निया के टॉरेंस का निवासी है। अदालत ने उसे फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। क्या हुआ था? शनिवार रात वॉशिंगटन के Washington Hilton में आयोजित डिनर के दौरान आरोपी कथित तौर पर सुरक्षा घेरा तोड़कर बॉलरूम की ओर बढ़ा। उसके पास एक शॉटगन, पिस्तौल और कई चाकू थे। इस दौरान United States Secret Service के एजेंटों के साथ गोलीबारी हुई। ट्रंप को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। सुरक्षा अधिकारी घायल गोलीबारी में एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी घायल हुआ, हालांकि उसने बुलेट-रेसिस्टेंट जैकेट पहन रखी थी, जिससे उसकी जान बच गई। पहले से रची गई थी साजिश एफबीआई के अनुसार, आरोपी ने 6 अप्रैल को ही होटल में कमरा बुक कर लिया था। वह कैलिफोर्निया से ट्रेन द्वारा वॉशिंगटन पहुंचा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि हमले की योजना कई सप्ताह पहले बनाई गई थी। ईमेल से मिला सुराग गिरफ्तारी से ठीक पहले आरोपी ने अपने परिवार और पूर्व नियोक्ता को एक ईमेल भेजा था, जिसमें उसने खुद को "Friendly Federal Assassin" बताया। ईमेल में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर नाराजगी झलक रही थी। क्या-क्या आरोप लगे? राष्ट्रपति की हत्या के प्रयास का आरोप हिंसक अपराध के दौरान हथियार चलाने का आरोप अवैध हथियार रखने और इस्तेमाल करने के आरोप दोष सिद्ध होने पर आरोपी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। जांच जारी Federal Bureau of Investigation और न्याय विभाग मामले की गहन जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थानों पर हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
US and Iran delegates clash at UN Nuclear Non-Proliferation Treaty review conference in New York
UN परमाणु संधि सम्मेलन में अमेरिका-ईरान आमने-सामने, उपाध्यक्ष पद को लेकर तीखी बहस

United Nations में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विवाद ईरान को सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर हुआ। क्या है पूरा मामला? न्यूयॉर्क में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन में ईरान को 34 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया। यह नियुक्ति गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की ओर से की गई थी। अमेरिका ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अमेरिका ने क्यों जताया विरोध? अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर यीव ने कहा कि ईरान का इस पद पर होना NPT की भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और International Atomic Energy Agency के साथ भी पूरा सहयोग नहीं कर रहा। उन्होंने इसे सम्मेलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया। ईरान का पलटवार ईरान के प्रतिनिधि रज़ा नजाफी ने अमेरिकी आरोपों को "बेबुनियाद और राजनीतिक" करार दिया। उन्होंने अमेरिका पर ही परमाणु हथियारों के विस्तार और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। ईरान का रुख ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। हालांकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। फिलहाल, यह टकराव वैश्विक परमाणु सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
US Special Forces soldier accused of using classified Maduro mission intel for Polymarket profits
मादुरो की खुफिया जानकारी बेचकर कमाए $4 लाख! अमेरिकी सैनिक पर गंभीर आरोप

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ने वाले मिशन से जुड़ा मामला अमेरिका के एक स्पेशल फोर्सेज सैनिक पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सैनिक ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के गुप्त सैन्य अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल कर ऑनलाइन सट्टेबाजी में 4 लाख डॉलर से अधिक की कमाई की। आरोपी की पहचान 38 वर्षीय गैनन केन वैन डाइक के रूप में हुई है। Polymarket पर लगाए सटीक दांव अधिकारियों के मुताबिक, वैन डाइक ने दिसंबर 2025 के अंत में prediction market प्लेटफॉर्म Polymarket पर अकाउंट बनाया। उन्होंने ऐसे सवालों पर करीब 13 दांव लगाए, जिनमें शामिल थे: क्या अमेरिकी सेना वेनेजुएला में मौजूद होगी? क्या 31 जनवरी 2026 तक मादुरो सत्ता से बाहर होंगे? गोपनीय जानकारी की बदौलत उनके सभी दांव बेहद सटीक साबित हुए। 4 लाख डॉलर से ज्यादा की कमाई अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि इन दांवों से वैन डाइक ने 400,000 डॉलर से अधिक का मुनाफा कमाया। ऑपरेशन के बाद उन्होंने कथित तौर पर: रकम का बड़ा हिस्सा विदेशी क्रिप्टो वॉल्ट में ट्रांसफर किया नया ब्रोकरेज अकाउंट खोला Polymarket से अपना अकाउंट डिलीट करने का अनुरोध भी किया यह कदम जांच एजेंसियों के शक को और मजबूत करता है। कौन-कौन से आरोप लगे? वैन डाइक पर कई गंभीर संघीय आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं: गोपनीय सरकारी जानकारी का निजी लाभ के लिए उपयोग गैर-सार्वजनिक सरकारी सूचना की चोरी कमोडिटीज फ्रॉड वायर फ्रॉड अवैध वित्तीय लेनदेन दोष सिद्ध होने पर उन्हें कई वर्षों की जेल हो सकती है। FBI ने क्या कहा? FBI निदेशक ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि एक सैनिक ने अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी से निजी लाभ कमाने की कोशिश की। Polymarket ने खुद दी सूचना Polymarket ने बयान जारी कर कहा कि प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधि पकड़ी गई थी। कंपनी ने तुरंत अमेरिकी न्याय विभाग को इसकी सूचना दी और जांच में पूरा सहयोग किया। "इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए Polymarket में कोई जगह नहीं है।" सेना में ऊंचा पद संभाल रहे थे आरोपी वैन डाइक 2008 में अमेरिकी सेना में शामिल हुए थे और 2023 में मास्टर सार्जेंट बने थे। वे नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में तैनात स्पेशल फोर्सेज समुदाय का हिस्सा थे। Prediction Markets पर बढ़ रही निगरानी हाल के महीनों में prediction markets को लेकर अमेरिकी नियामकों और कांग्रेस की चिंता बढ़ी है। यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण बन सकता है कि संवेदनशील सरकारी जानकारी का गलत इस्तेमाल किस तरह वित्तीय अपराध में बदल सकता है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0