निवेश समाचार

Tencent sells ₹694 crore stake in PB Fintech; Goldman Sachs and top investors buy shares
Tencent ने Policybazaar की पैरेंट कंपनी में बेचे 694 करोड़ के शेयर, Goldman Sachs समेत बड़े निवेशकों ने झट से खरीदी हिस्सेदारी

  भारतीय फिनटेक कंपनी PB Fintech, जो Policybazaar और Paisabazaar जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म चलाती है, में हाल ही में बड़ा ब्लॉक डील देखने को मिला। चीन की टेक दिग्गज Tencent Holdings की इकाई Tencent Cloud Europe BV ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया, जिसे कई बड़े घरेलू और विदेशी निवेशकों ने खरीद लिया।   Tencent ने बेची 694 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी 6 मार्च को हुए ब्लॉक डील में Tencent Cloud Europe BV ने PB Fintech के करीब 48.4 लाख शेयर बेचे। यह कंपनी की कुल चुकता पूंजी का लगभग 1.04 प्रतिशत हिस्सा है। यह पूरा सौदा करीब 694.65 करोड़ रुपये का रहा और प्रति शेयर कीमत लगभग 1,435.1 रुपये तय की गई।   Goldman Sachs सबसे बड़ा खरीदार Tencent द्वारा बेचे गए शेयरों को सात बड़े संस्थागत निवेशकों ने खरीदा। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी Goldman Sachs ने ली। Goldman Sachs Bank Europe ने 12.65 लाख शेयर लगभग 181.6 करोड़ रुपये में खरीदे। Mirae Asset Mutual Fund ने करीब 9 लाख शेयर 129.15 करोड़ रुपये में खरीदे। Societe Generale ने 7 लाख शेयर लगभग 100.45 करोड़ रुपये में लिए। इसके अलावा बचे हुए 19.74 लाख शेयर DSP Mutual Fund, Schroders, Tata Mutual Fund और Viridian Asia Opportunities Master Fund ने खरीदे।   शेयर में आई गिरावट बड़े ब्लॉक डील के बाद PB Fintech के शेयर पर दबाव देखने को मिला। सप्ताह के अंत में कंपनी का शेयर करीब 3.01 प्रतिशत गिरकर 1,428.4 रुपये पर बंद हुआ। यह 17 मार्च 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।   Shankara Buildpro में भी बड़ी खरीदारी इस बीच Shankara Buildpro के शेयरों में भी हलचल देखने को मिली। 360 ONE Equity Opportunity Fund ने कंपनी के लगभग 1.62 लाख शेयर खरीदे, जो करीब 0.67 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस सौदे की कीमत लगभग 16.22 करोड़ रुपये रही। इसके बाद कंपनी का शेयर करीब 3.58 प्रतिशत बढ़कर 1,001.8 रुपये पर पहुंच गया।   Ganesha Ecosphere में बिकवाली का दबाव वहीं Ganesha Ecosphere के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का शेयर करीब 8.36 प्रतिशत टूटकर 706.4 रुपये पर आ गया। बताया जा रहा है कि DSP Mutual Fund ने कंपनी में अपनी करीब 1.03 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है। DSP ने 2.76 लाख शेयर करीब 21.2 करोड़ रुपये में 768 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचे। हालांकि, दूसरी ओर India Capital Management ने अपने India Capital Fund के जरिए 2.34 लाख शेयर करीब 17.97 करोड़ रुपये में खरीद लिए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े ब्लॉक डील निवेशकों की बदलती रणनीति और बाजार में बढ़ती संस्थागत दिलचस्पी को दर्शाते हैं।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
limiting funds in financial markets
भारतीय घरों में ‘खजाना’ बंद! 950 लाख करोड़ रुपये सोना-जमीन में अटका, शेयर बाजार तक नहीं पहुंच रही बचत

  भारत में परिवारों की बड़ी पूंजी अभी भी सोना और रियल एस्टेट जैसी पारंपरिक संपत्तियों में फंसी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि देश के वित्तीय बाजारों को वह पूंजी नहीं मिल पा रही है, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिल सकती है।   सोने और रियल एस्टेट में भारी पूंजी क्रिश्नन के अनुसार भारतीय परिवारों के पास अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है। इसकी कुल कीमत करीब 450 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा आवासीय रियल एस्टेट में भी लगभग 500 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति निवेशित है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 950 लाख करोड़ रुपये की पूंजी भौतिक परिसंपत्तियों में बंद है, जो आमतौर पर सीमित वित्तीय रिटर्न देती है।   बचत का छोटा हिस्सा ही पहुंचता है बाजार तक विशेषज्ञों के मुताबिक देश में घरेलू बचत का सिर्फ 5.3 प्रतिशत हिस्सा ही वित्तीय उत्पादों में निवेश किया जाता है। बाकी बचत सोना, जमीन या अन्य गैर-वित्तीय संपत्तियों में रहती है, जिससे वह पूंजी आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाती। भारत की घरेलू बचत दर लगभग 18 प्रतिशत है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर ही बना रहता है।   निवेशकों की संख्या बढ़ी, मगर सक्रियता सीमित हाल के वर्षों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। National Securities Depository Limited और Central Depository Services Limited के आंकड़ों के अनुसार देश में डिमैट खातों की संख्या 21 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि इनमें से केवल करीब 4.5 करोड़ खाते ही सक्रिय रूप से निवेश या ट्रेडिंग कर रहे हैं। इसी तरह म्यूचुअल फंड सेक्टर में भी तेजी देखी गई है। कुल फोलियो की संख्या लगभग 26.6 करोड़ तक पहुंच चुकी है, लेकिन वास्तविक निवेशकों की संख्या करीब 6 करोड़ ही है, जो देश की आबादी का लगभग 4 प्रतिशत है।   पूंजी बाजार के लिए बड़ी संभावना क्रिश्नन का कहना है कि यदि देश की आबादी का सिर्फ 10 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सा भी अपनी बचत को सोना और रियल एस्टेट से निकालकर वित्तीय बाजारों में निवेश करना शुरू कर दे, तो भारतीय पूंजी बाजार के लिए जबरदस्त अवसर पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को वित्तीय साक्षरता और निवेश के बेहतर विकल्पों के बारे में जागरूक करना जरूरी है, ताकि बचत को उत्पादक निवेश में बदला जा सके और इससे लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण को भी बढ़ावा मिल सके।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Indian stock market shows sharp fall; Sensex, Nifty drop, rupee hits record low against dollar
स्टॉक मार्केट में झटका: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, रुपया पहुंचा अब तक के सबसे निचले स्तर पर

  भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ी, जिसका असर बाजार पर साफ दिखाई दिया। इसी दौरान भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही और रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।   सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट सप्ताह के अंत तक BSE Sensex में 2,368.29 अंकों यानी करीब 2.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 78,918.90 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 728.2 अंक यानी लगभग 2.89 प्रतिशत फिसलकर 24,450.45 पर आ गया। यह गिरावट पिछले एक साल से अधिक समय में बाजार की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।   रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया इस सप्ताह Indian Rupee भी दबाव में रहा। रुपया गिरकर 92.30 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।   बाजार पर इन कारणों का पड़ा असर बाजार में कमजोरी की मुख्य वजहों में United States और Iran के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव शामिल है। इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला।   स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी गिरावट इस सप्ताह BSE Smallcap Index करीब 3.3 प्रतिशत गिरा। इस दौरान InfoBeans Technologies, Orchid Pharma, Rajesh Exports और Netweb Technologies India जैसे शेयरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। Jindal Poly Films, Paras Defence and Space Technologies, Sterlite Technologies और Jupiter Wagons जैसे शेयरों में 12 से 25 प्रतिशत तक की बढ़त रही।   सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स इस सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty PSU Bank Index – 6.5% गिरावट Nifty Realty Index – 5% गिरावट Nifty Bank Index – 4.5% गिरावट Nifty Media Index – 4.3% गिरावट Nifty Private Bank Index – 4% गिरावट हालांकि Nifty Defence Index ने इस रुझान के उलट करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।   विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली इस सप्ताह Foreign Institutional Investors (FII) ने लगभग 21,831 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी लगातार तीसरे सप्ताह बिकवाली जारी रही। वहीं Domestic Institutional Investors (DII) ने 32,786 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा दिया।   इन कंपनियों के मार्केट कैप में बड़ा बदलाव सप्ताह के दौरान State Bank of India, ICICI Bank, Larsen & Toubro और HDFC Bank के मार्केट कैपिटलाइजेशन में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। वहीं Bharat Electronics, Reliance Industries और Sun Pharmaceutical Industries के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0