पश्चिम बंगाल समाचार

AIMIM leader Waris Pathan reacts to Kolkata road namaz controversy during media interaction
कोलकाता नमाज विवाद पर AIMIM के वारिस पठान का बयान, बोले- ‘हिंदू करें तो ठीक, मुसलमान पढ़े तो दिक्कत क्यों?’

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के राजाबाजार इलाके में सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर हुए विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब Waris Pathan ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर कोई मुसलमान कुछ मिनटों के लिए सड़क पर नमाज पढ़ता है, तो इससे लोगों को परेशानी क्यों होती है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि मुसलमान मजबूरी में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करते हैं, शौक से नहीं। ‘5-10 मिनट की नमाज से किसे दिक्कत?’ न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में वारिस पठान ने कहा, “अगर कोई मुसलमान शुक्रवार के दिन 5-10 मिनट के लिए सड़क पर खड़े होकर नमाज पढ़ता है, तो इससे किसके पेट में दर्द होता है? मस्जिदों में जगह नहीं होती, इसलिए लोग बाहर आकर नमाज पढ़ लेते हैं।” उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति धूप, बारिश या सड़क पर खड़े होकर नमाज पढ़ना पसंद नहीं करता, लेकिन कई बार जगह की कमी के कारण ऐसा करना पड़ता है। ‘हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों पर सवाल नहीं उठते’ वारिस पठान ने दावा किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अन्य धर्मों के आयोजन भी होते हैं, लेकिन उन पर वैसी आपत्ति नहीं उठाई जाती। उन्होंने कहा, “हमने कई बार देखा है कि ट्रेनों में पूजा-पाठ होता है, गरबा होता है, एयरपोर्ट पर धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन मुसलमान नमाज पढ़ लें तो FIR दर्ज हो जाती है, लोगों को जेल भेज दिया जाता है। यह संविधान की बराबरी की भावना के खिलाफ है।” क्या है पूरा मामला? दरअसल, शुक्रवार को कोलकाता के राजाबाजार इलाके में कुछ लोगों ने सड़क पर नमाज अदा करने की कोशिश की थी। इसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और यातायात भी प्रभावित हुआ। राज्य में नई सरकार बनने के बाद सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजन और सड़क जाम को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया। राजनीतिक बयानबाजी तेज इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं। AIMIM ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस लगातार तेज हो रही है।  

surbhi मई 16, 2026 0
RG Kar Medical College victim’s family demands action amid growing political controversy in West Bengal
RG Kar मेडिकल कॉलेज केस में नया मोड़, पीड़िता की मां ने ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग की

पश्चिम बंगाल के चर्चित RG Kar मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस में सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के सस्पेंड होने के बाद पीड़िता के परिवार ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की मां ने ममता बनर्जी को “अपराधियों की मुखिया” बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। परिवार का आरोप है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने भी उठाए सवाल भाजपा विधायक Ratna Debnath ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस केस में कई लोग शामिल हैं, लेकिन अब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा, “जिस रात पीड़िता के साथ डिनर करने वाले लोगों की जांच तक नहीं हुई। अब तक सिर्फ कॉलेज के प्रिंसिपल को जेल भेजा गया है, जबकि बाकी लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं।” ‘पूरी घटना के पीछे बड़ी साजिश’ पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि इस पूरी घटना के पीछे एक बड़ी साजिश थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कॉलेज प्रशासन और उस समय के स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी इस मामले के लिए जिम्मेदार हैं। परिवार ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पिता बोले- ‘शुरुआत से केस दबाने की कोशिश हुई’ पीड़िता के पिता शेखररंजन देबनाथ ने दावा किया कि शुरुआत से ही मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने पहले दिन से ही केस को छिपाने की कोशिश की और यह सब कथित तौर पर तत्कालीन सरकार के निर्देश पर हुआ। उनके अनुसार अब धीरे-धीरे मामले की सच्चाई सामने आ रही है। मौजूदा सरकार की कार्रवाई की सराहना हालांकि पीड़ित परिवार ने वर्तमान सरकार की कार्रवाई की सराहना भी की है। परिवार ने कहा कि नई सरकार ने मामले में कदम उठाया है और अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने मांग की कि इस केस में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और परिवार को न्याय मिले। कई पुलिस अधिकारियों पर जांच शुरू पश्चिम Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि मामले में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मामले की जांच और शुरुआती कार्रवाई में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। ‘पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश’ हावड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों पर पीड़ित परिवार को पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश करने के आरोप भी लगे हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। लगातार बढ़ रहा राजनीतिक विवाद RG Kar मेडिकल कॉलेज केस पहले ही राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब पीड़ित परिवार के नए आरोपों के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।विपक्ष लगातार पूर्व सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां मामले से जुड़े हर पहलू की पड़ताल में जुटी हुई हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
West Bengal CM Suvendu Adhikari after resigning from Nandigram assembly seat in Kolkata
बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट, कहा- ‘नंदीग्राम हमेशा मेरे दिल में रहेगा’

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए कहा कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल का हिस्सा है। इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, “नंदीग्राम मेरे दिल में है। यहां की जनता ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जहां भी रहूं, नंदीग्राम के विकास के लिए हमेशा काम करता रहूंगा।” दो सीटों से जीत के बाद लिया फैसला शुभेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। अब इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना है और इसे लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि नंदीग्राम से उपचुनाव में उम्मीदवार कौन होगा। बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा नंदीग्राम नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। उस जीत को बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना गया था। इसके बाद भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की। केंद्र की योजनाओं को लेकर बड़ा बयान इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की हर योजना का लाभ बंगाल के गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। नंदीग्राम के विकास का किया वादा शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नंदीग्राम के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नंदीग्राम को विकास के मॉडल के रूप में तैयार करना चाहती है। विपक्ष ने उठाए सवाल वहीं, विपक्ष इस इस्तीफे को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नंदीग्राम सीट छोड़ने के पीछे भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी हो सकती है। राज्य की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नंदीग्राम उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और क्या यह सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का बड़ा रणक्षेत्र बनेगी।  

surbhi मई 16, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders after Bengal election defeat at her Kalighat residence meeting
बंगाल में हार के बाद पहली बार बोलीं ममता बनर्जी, कहा- ‘जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो स्वतंत्र हैं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’  ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Anjali Kumari मई 9, 2026 0