दुनिया

UAE Cracks Down on Fake & Real Missile Videos

United Arab Emirates में मिसाइल हमलों के वीडियो साझा करने पर सख्ती, कई लोगों पर कार्रवाई

surbhi मार्च 14, 2026 0
People arrested in UAE for sharing missile attack videos on social media.
UAE Cracks Down on Missile Video Sharing

 

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United Arab Emirates (UAE) ने मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी मीडिया के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा हमलों को रोकने के वीडियो क्लिप और कथित फर्जी वीडियो साझा करने के आरोप में 10 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने असली वीडियो के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरें भी विभिन्न वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की थीं। इन सभी मामलों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत भेज दिया गया है।

 

45 लोगों की गिरफ्तारी

Abu Dhabi Police ने बताया कि देश पर हुए हालिया हमलों के दौरान वीडियो बनाने और कथित रूप से “गलत जानकारी फैलाने” के आरोप में अलग-अलग देशों के 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है और अफवाहें फैलाकर लोगों में डर का माहौल बना सकती है।

 

ब्रिटिश नागरिक पर भी केस

पिछले सप्ताह Dubai में साइबर अपराध कानून के तहत एक 60 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक पर भी मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने शहर के ऊपर उड़ती कथित Iran की मिसाइलों का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया।

 

साइबर कानून के तहत कई मामले

मानवाधिकार संगठन Detained in Dubai की सीईओ Radha Stirling के मुताबिक, हाल में हुए मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में UAE के साइबर क्राइम कानून के तहत कम से कम 21 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं।

इस बीच सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिनमें किसी ऊंची रिहायशी इमारत, एक लग्ज़री होटल और Dubai International Airport के पास मलबा गिरने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

UAE अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो या तस्वीर को साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Negombo Jail
श्रीलंका की जेल में हिंसक झड़प, 25 कैदियों और जेलकर्मियों की मौत, 100 से अधिक घायल

कोलंबो, एजेंसियां। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से करीब 35 किलोमीटर दूर नेगोम्बो जेल में दो गुटों के कैदियों के बीच हिंसक झड़प में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए। मृतकों में कैदियों के साथ कई जेल अधिकारी भी शामिल हैं। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस और सेना को तैनात करना पड़ा।   दो दिनों तक जारी रही हिंसा   अधिकारियों के अनुसार, झड़प की शुरुआत रविवार को दो प्रतिद्वंद्वी कैदी गुटों के बीच हुई थी। सोमवार को जेल प्रशासन के हस्तक्षेप के दौरान हिंसा और भड़क गई, जिसके बाद कई कैदियों ने भागने की कोशिश भी की। सुरक्षा बलों ने कार्रवाई कर स्थिति पर नियंत्रण पाया।   ड्रग गैंगों की रंजिश बताई जा रही वजह   श्रीलंका के न्याय मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हिंसा की वजह जेल के भीतर सक्रिय ड्रग तस्करी से जुड़े प्रतिद्वंद्वी गिरोहों की आपसी रंजिश सामने आई है। घटना के बाद हिंसा भड़काने वाले कई कैदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया है।   जेलों में भीड़भाड़ पर फिर उठे सवाल   इस घटना के बाद श्रीलंका की जेल व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की जेलों की क्षमता करीब 10,000 कैदियों की है, जबकि इनमें 39,000 से अधिक कैदी बंद हैं। सरकार ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

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पाकिस्तान के खिलाफ लंदन में एकजुट हुए कश्मीरी, बलोच और पश्तून, PoK में मानवाधिकार उल्लंघन का लगाया आरोप

लंदन: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ-साथ बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की सेना पर आम नागरिकों के अधिकारों के दमन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लगाए। लंदन कश्मीर मिलियन मार्च में उमड़ी भीड़ जानकारी के अनुसार, लंदन में आयोजित "कश्मीर मिलियन मार्च" संसद परिसर (Parliament Square) से शुरू होकर पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला गया। आयोजकों का दावा है कि मार्च में करीब 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई और गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आजादी के समर्थन में नारे लगाए और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया। बलोच और पश्तून समुदाय ने भी जताई एकजुटता इस मार्च में बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना उनके क्षेत्रों में भी नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—तीनों क्षेत्रों में आम लोगों को दमन और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान सेना पर गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने टट्टापानी, सेंहसा और कोटली जैसे इलाकों में आम लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में रहने वाले कश्मीरी अब इन घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए और क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकार देने चाहिए। गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक नेताओं की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि सभी गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हिरासत में लिए गए युवाओं के शव उनके परिजनों को सौंपने और गिरफ्तार नागरिकों की रिहाई की भी मांग की। PoK में जारी है विरोध प्रदर्शन लंदन में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और इसके बाद अनेक राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके विरोध में विदेशों में रहने वाले कश्मीरी, बलोच और पश्तून समुदाय भी अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं.  

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Large crowds gather in Tehran during the second day of funeral ceremonies for former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei.
दुश्मनों से प्रतिशोध और ‘खून का बदला’ के नारों से गूंजा तेहरान, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी लाखों की भीड़

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन राजधानी तेहरान में लाखों लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे समारोह के दौरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखे नारे लगे और शोकसभा प्रतिरोध तथा राष्ट्रीय एकजुटता के प्रदर्शन में बदलती नजर आई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने बताया कि अंतिम नमाज के दौरान मौजूद लोगों ने अमेरिका और इजरायल को खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए "दुश्मनों से प्रतिशोध" और "शहीद नेता के खून का बदला" जैसे नारे लगाए। तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब रविवार को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के लिए सार्वजनिक अंतिम नमाज अदा की गई। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला और उसके आसपास के इलाकों में लाखों लोगों की भीड़ जमा हुई। शनिवार से ही खामेनेई का पार्थिव शरीर आम लोगों के अंतिम दर्शन और आधिकारिक श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। ईरान के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया। हालांकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति बनी थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दिया एकजुटता का संदेश सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अपने संदेश में कहा कि ईरानी जनता अपने दिवंगत नेता को विदाई देते हुए उनके आदर्शों और सिद्धांतों पर आगे बढ़ने का संकल्प ले रही है। संदेश में कहा गया कि, "पिछले कुछ दिनों से ईरान को देखिए, यही वह देश है जिसे कुछ ही दिनों में हराने का दावा किया गया था।" परिषद ने इसे राष्ट्रीय एकता, धैर्य और प्रतिरोध की भावना का प्रतीक बताया। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई समारोह से रहे दूर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और इजरायल से मिली कथित धमकियों के चलते वह तेहरान में चल रहे छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद अध्यक्ष बोले- देश नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि पूरे देश के लोग अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि ईरान की जनता अपने नेतृत्व और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि देशभर में लोगों ने एक स्वर में अपने नेता को श्रद्धांजलि दी और उन्हें शहीद के रूप में याद किया। फिलहाल अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम जारी हैं और 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
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