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Citroen e C3: Affordable Urban EV in India

Citroen e C3: बजट EV सेगमेंट में एंट्री, कीमत और परफॉर्मेंस का संतुलित पैकेज

surbhi मई 1, 2026 0
Citroen e C3 electric hatchback parked on city street showcasing compact urban EV design
Citroen e C3 Budget Electric Car India

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Citroen e C3 एक किफायती और एंट्री-लेवल विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। यह कार खासतौर पर शहरी उपयोग को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है, जहां कम दूरी, ट्रैफिक और रोजमर्रा की जरूरतें प्राथमिक होती हैं।

डिजाइन: कॉम्पैक्ट लेकिन SUV जैसा स्टांस
Citroen e C3 हैचबैक प्लेटफॉर्म पर बनी है, लेकिन इसकी ऊंची ग्राउंड क्लियरेंस और बॉक्सी डिजाइन इसे मिनी-SUV जैसा लुक देते हैं। इसका कॉम्पैक्ट आकार शहर के ट्रैफिक और टाइट पार्किंग स्पेस में इसे आसानी से मैनेज करने लायक बनाता है।

बैटरी और परफॉर्मेंस: शहर के लिए पर्याप्त
इसमें 29.2 kWh का बैटरी पैक दिया गया है। कंपनी के अनुसार इसकी रेंज 320 किमी (MIDC) तक है, लेकिन वास्तविक उपयोग में यह लगभग 200–220 किमी तक ही मिलती है।
इलेक्ट्रिक मोटर 57 PS की पावर और 143 Nm का टॉर्क जनरेट करती है। 0 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार यह 6.8 सेकंड में पकड़ लेती है, जो सिटी ड्राइविंग के लिहाज से काफी फुर्तीली मानी जाती है।

चार्जिंग: फास्ट और होम दोनों विकल्प
Citroen e C3 DC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है, जिससे 10% से 80% तक चार्ज होने में करीब 57 मिनट लगते हैं। वहीं, घरेलू चार्जिंग से इसे फुल चार्ज करने में लगभग 10.5 घंटे का समय लगता है–यानी रातभर में आसानी से चार्ज हो सकती है।

फीचर्स: जरूरी टेक्नोलॉजी पर फोकस
कार में 10.24-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और MyCitroën ऐप कनेक्टिविटी मिलती है।
इसके अलावा मैनुअल AC, एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और इलेक्ट्रिक ORVM जैसे बेसिक लेकिन उपयोगी फीचर्स दिए गए हैं।

स्पेस और कम्फर्ट: सिटी यूज के लिए बेहतर
Citroen अपनी सॉफ्ट सस्पेंशन ट्यूनिंग के लिए जानी जाती है, और e C3 में भी यही खासियत देखने को मिलती है। इसमें 315 लीटर का बूट स्पेस और 170 मिमी का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है, जिससे खराब सड़कों पर भी ड्राइविंग अपेक्षाकृत आरामदायक रहती है।

सेफ्टी: यहां थोड़ा समझौता
सुरक्षा के लिहाज से इसमें डुअल एयरबैग्स, ABS with EBD और रियर पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं। हालांकि, Global NCAP क्रैश टेस्ट में इसे 0-स्टार रेटिंग मिली है, जो संभावित खरीदारों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

वेरिएंट और कीमत: पहली EV के तौर पर आकर्षक
Citroen e C3 Live, Feel और Shine वेरिएंट्स में उपलब्ध है। इसकी कीमत इसे बजट EV सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं।

क्या यह आपके लिए सही विकल्प है?
अगर आपकी जरूरत शहर के अंदर रोजाना की ड्राइविंग, कम खर्च और आसान मेंटेनेंस है, तो यह कार एक प्रैक्टिकल ऑप्शन साबित हो सकती है। हालांकि, अगर आपकी प्राथमिकता हाई सेफ्टी रेटिंग और एडवांस फीचर्स हैं, तो निर्णय लेने से पहले अन्य विकल्पों पर भी विचार करना जरूरी होगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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  भारतीय मोटरसाइकिल बाजार में मिड-साइज स्क्रैम्बलर सेगमेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, और इसी कड़ी में Yezdi Motorcycles अपनी चर्चित बाइक Scrambler को नए अवतार में पेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी, जो Classic Legends के अंतर्गत आती है, ने हाल ही में कुछ टीजर जारी किए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि 2026 Yezdi Scrambler में कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर सभी स्पेसिफिकेशन साझा नहीं किए हैं, लेकिन सामने आई जानकारी के अनुसार यह अपडेटेड मॉडल डिजाइन, इंजन और फीचर्स के मामले में पहले से ज्यादा एडवांस और प्रतिस्पर्धी होगा। डिजाइन में बदलाव, कम्फर्ट पर खास फोकस मौजूदा लाइनअप में Scrambler के अलावा Roadster और Adventure मॉडल पहले ही अपडेट हो चुके हैं, लेकिन Scrambler लंबे समय से अपडेट का इंतजार कर रही थी। ऐसे में 2026 मॉडल में विजुअल और एर्गोनॉमिक्स दोनों स्तर पर बदलाव की उम्मीद है। नई बाइक में बेसिक सिल्हूट बरकरार रह सकता है, लेकिन इसमें नए कलर ऑप्शन और आकर्षक ग्राफिक्स दिए जा सकते हैं। साथ ही राइडिंग पोजिशन को बेहतर बनाने के लिए सीट और हैंडलबार सेटअप में बदलाव संभव है, जिससे लंबी दूरी की राइडिंग और भी आरामदायक हो सके। रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि कंपनी बाइक के वजन को कम करने पर काम कर रही है, जिससे इसकी हैंडलिंग और कंट्रोल बेहतर हो सके। इंजन और परफॉर्मेंस में अपग्रेड की संभावना वर्तमान मॉडल में 334cc का सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलता है, जो 29 hp की पावर और 29 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। हालांकि, नए वर्जन में इस इंजन को अपडेट किए जाने की संभावना है। टीजर के आधार पर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी बड़ा या ज्यादा ट्यून किया गया इंजन पेश कर सकती है, जिससे बाइक की परफॉर्मेंस में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा। फीचर्स और कीमत में बढ़ोतरी के संकेत नई Scrambler में फीचर्स को भी अपग्रेड किया जा सकता है, जिसमें बेहतर इंस्ट्रूमेंट कंसोल, कनेक्टिविटी और सेफ्टी फीचर्स शामिल हो सकते हैं। भारतीय बाजार में इसका सीधा मुकाबला Triumph Scrambler 400 X और Royal Enfield Scram 440 जैसी मजबूत बाइक्स से होगा। इन सभी संभावित अपग्रेड्स के चलते कीमत में भी इजाफा हो सकता है। फिलहाल मौजूदा मॉडल की शुरुआती कीमत करीब 1.95 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, लेकिन नए वर्जन के साथ यह बढ़ सकती है।  

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A Steelbird ROX helmet displayed showcasing affordable design and safety features for daily Indian commuters
₹969 वाला हेलमेट बना सुपरहिट, 1 करोड़ यूनिट बिक्री पार: Steelbird ROX ने भारतीय बाजार में रचा नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली: भारत में टू-व्हीलर सेफ्टी को लेकर बढ़ती जागरूकता का सीधा असर अब बाजार के आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। इसी बीच हेलमेट निर्माता Steelbird Hi-Tech India Limited की ROX सीरीज ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 1 करोड़ यूनिट बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। करीब ₹969 की किफायती कीमत वाले इस हेलमेट ने खासकर डेली कम्यूटर राइडर्स के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। ISI सर्टिफिकेशन और मजबूत डिजाइन के चलते यह मॉडल भारत के मास मार्केट में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है। कैसे बना ROX हेलमेट इतना लोकप्रिय? ROX सीरीज को खास तौर पर मिड-सेगमेंट और रोजाना बाइक-स्कूटर चलाने वाले उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इस प्रोडक्ट की सफलता का मुख्य कारण इसकी किफायती कीमत और भरोसेमंद सेफ्टी फीचर्स हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में अब उपभोक्ता केवल कम कीमत नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों के साथ संतुलन वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, और ROX सीरीज इसी जरूरत को पूरा करती है। सेफ्टी और डिजाइन फीचर्स ROX हेलमेट में कई आधुनिक और उपयोगी फीचर्स शामिल किए गए हैं: हाई-इम्पैक्ट ABS शेल, जो मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है मल्टी-डेंसिटी EPS लेयर, जो दुर्घटना के समय झटके को कम करती है बेहतर एयर वेंटिलेशन सिस्टम, जिससे लंबे समय तक पहनने में आराम मिलता है स्क्रैच-रेसिस्टेंट वाइजर और क्विक-रिलीज बकल हल्का वजन, जिससे रोजमर्रा के उपयोग में सुविधा रहती है इसके अलावा, यह हेलमेट ISI सर्टिफिकेशन के साथ आता है, जो इसकी बेसिक सेफ्टी स्टैंडर्ड को प्रमाणित करता है। कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत करीब ₹969 की कीमत ने ROX सीरीज को आम उपभोक्ताओं के लिए बेहद सुलभ बना दिया है। यही वजह है कि यह मॉडल सिर्फ मेट्रो शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कम कीमत में सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की रणनीति ने कंपनी को मास मार्केट में मजबूत स्थिति दिलाई है। रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बेहतर विकल्प ROX हेलमेट को मुख्य रूप से डेली कम्यूटिंग के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी पैडिंग को हटाकर साफ किया जा सकता है, जिससे इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह हेलमेट हाई-स्पीड राइडिंग या प्रोफेशनल मोटरस्पोर्ट उपयोग के लिए नहीं बल्कि सामान्य दैनिक यात्रा के लिए अधिक उपयुक्त है। बाजार में क्या संकेत मिल रहे हैं? इस सफलता से यह स्पष्ट होता है कि भारत में उपभोक्ता अब सुरक्षा मानकों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो चुके हैं। सरकारी नियमों और सड़क सुरक्षा अभियानों ने भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  

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