टाटा मोटर्स ने अपनी लोकप्रिय एसयूवी Harrier और Safari के नए Stealth Edition भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिए हैं। दोनों मॉडलों को आकर्षक ऑल-ब्लैक एक्सटीरियर और इंटीरियर थीम के साथ पेश किया गया है, जो इन्हें स्टैंडर्ड वेरिएंट से अलग और अधिक प्रीमियम लुक देता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये लिमिटेड एडिशन नहीं, बल्कि नियमित लाइनअप का हिस्सा हैं, जिससे ग्राहक इन्हें सामान्य तौर पर खरीद सकेंगे।
नई Stealth Edition SUVs की एक्स-शोरूम कीमत इस प्रकार है—
कीमत इंजन और ट्रांसमिशन विकल्प के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
Stealth Edition की सबसे खास पहचान इसका Stealth Black एक्सटीरियर है।
इसके अलावा SUV में कई कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
हालांकि, कंपनी ने एक्सटीरियर डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है।
दोनों SUVs के इंटीरियर को भी पूरी तरह ब्लैक थीम में तैयार किया गया है।
मुख्य केबिन फीचर्स:
Harrier और Safari Stealth Edition में टॉप वेरिएंट वाले लगभग सभी प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं—
Stealth Edition में मैकेनिकल स्तर पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दोनों इंजन विकल्पों के साथ 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स उपलब्ध हैं।
यदि आप Tata Harrier या Safari खरीदने की योजना बना रहे हैं और रेगुलर मॉडल की तुलना में अधिक स्पोर्टी और एक्सक्लूसिव लुक चाहते हैं, तो Stealth Edition बेहतर विकल्प हो सकता है।
हालांकि इसमें इंजन और फीचर्स में कोई अतिरिक्त बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इसका ऑल-ब्लैक डिजाइन, ब्लैक अलॉय व्हील्स, विशेष बैजिंग और प्रीमियम केबिन इसे अलग पहचान देते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: भारतीय युवाओं की कभी सबसे पसंदीदा स्पोर्ट्स बाइक रही Hero Karizma एक बार फिर नए और दमदार अवतार में वापसी करने जा रही है। Hero MotoCorp की आगामी Karizma XMR 250 को हाल ही में भारत में टेस्टिंग के दौरान बिना किसी कैमोफ्लाज के देखा गया है। सामने आई तस्वीरों से साफ संकेत मिलते हैं कि बाइक लगभग प्रोडक्शन-रेडी है और कंपनी इसे जल्द भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है। नई Karizma XMR 250 को आकर्षक स्पोर्टी डिजाइन, 250cc लिक्विड-कूल्ड इंजन और आधुनिक फीचर्स के साथ पेश किए जाने की उम्मीद है। लॉन्च के बाद इसका मुकाबला KTM, Yamaha और Suzuki की लोकप्रिय 250cc स्पोर्ट्स बाइक्स से हो सकता है। प्रोडक्शन-रेडी डिजाइन ने बढ़ाई उत्सुकता टेस्टिंग के दौरान दिखी Hero Karizma XMR 250 ब्लैक कलर और रेड ग्राफिक्स के साथ नजर आई। इसका डिजाइन पहले प्रदर्शित किए गए कॉन्सेप्ट मॉडल से काफी मिलता-जुलता दिखाई देता है। बाइक के फ्रंट में सुपरस्पोर्ट स्टाइलिंग दी गई है, जिसमें बड़ी विंडस्क्रीन, ट्विन LED DRLs और बीच में प्रोजेक्टर LED हेडलाइट इसे प्रीमियम लुक देते हैं। इसके अलावा फेयरिंग पर दिए गए एयरो-स्टाइल विंगलेट्स, पतले LED इंडिकेटर्स और गोल्डन USD (Upside Down) फ्रंट फोर्क्स इसकी स्पोर्टी पहचान को और मजबूत बनाते हैं। मिलेगा दमदार 250cc लिक्विड-कूल्ड इंजन रिपोर्ट्स के अनुसार नई Karizma XMR 250 में वही 250cc, सिंगल-सिलेंडर, DOHC, लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया जा सकता है, जो Hero Xtreme 250R में इस्तेमाल किया गया है। संभावित इंजन स्पेसिफिकेशन: 250cc सिंगल-सिलेंडर इंजन DOHC तकनीक लिक्विड-कूलिंग सिस्टम लगभग 30 HP की पावर करीब 25 Nm का टॉर्क 6-स्पीड गियरबॉक्स यह इंजन शहर की रोजमर्रा की राइडिंग के साथ-साथ हाईवे पर भी बेहतर प्रदर्शन देने के लिए तैयार किया गया है। हार्डवेयर में भी मिलेगा प्रीमियम पैकेज Hero इस बाइक में प्रीमियम सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम देने की तैयारी कर रही है। संभावित हार्डवेयर फीचर्स: गोल्डन USD फ्रंट फोर्क्स प्रीलोड एडजस्टेबल रियर मोनोशॉक फ्रंट और रियर डिस्क ब्रेक डुअल-चैनल ABS स्विचेबल ABS (संभावित) स्विचेबल ABS फीचर अलग-अलग सड़क और राइडिंग परिस्थितियों में बेहतर कंट्रोल देने में मदद कर सकता है। फीचर्स के मामले में भी होगी पूरी तरह आधुनिक Hero Karizma XMR 250 में कई एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स मिलने की उम्मीद है। संभावित फीचर्स: फुल LED लाइटिंग डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर Bluetooth कनेक्टिविटी Turn-by-Turn Navigation USB चार्जिंग पोर्ट Lap Timer Drag Timer एडजस्टेबल क्लिप-ऑन हैंडलबार स्प्लिट सीट मस्कुलर फ्यूल टैंक स्पोर्टी राइडिंग पोजिशन ये सभी फीचर्स इसे युवा राइडर्स और परफॉर्मेंस पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प बना सकते हैं। किन बाइक्स से होगा मुकाबला? लॉन्च के बाद Hero Karizma XMR 250 का मुकाबला भारतीय 250cc स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट की कई लोकप्रिय मोटरसाइकिलों से होने की संभावना है, जिनमें प्रमुख रूप से: KTM 250 Duke Suzuki Gixxer 250 Yamaha R15 (प्रीमियम स्पोर्ट्स सेगमेंट) Hero Xtreme 250R लॉन्च को लेकर क्या है अपडेट? फिलहाल Hero MotoCorp ने Karizma XMR 250 की लॉन्च डेट और कीमत का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि, बिना कैमोफ्लाज के टेस्टिंग के दौरान दिखाई देने से माना जा रहा है कि कंपनी आने वाले महीनों में इसे भारतीय बाजार में पेश कर सकती है। अगर Hero इस बाइक को प्रतिस्पर्धी कीमत पर लॉन्च करती है, तो यह 250cc स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट में ग्राहकों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है।
नई बाइक खरीदते समय अक्सर एक ही मॉडल के दो वेरिएंट देखने को मिलते हैं। एक में Single-Channel ABS और दूसरे में Dual-Channel ABS दिया जाता है। दोनों के बीच कीमत का भी अंतर होता है। ऐसे में कई खरीदारों के मन में सवाल होता है कि दोनों में क्या फर्क है और किसे चुनना बेहतर रहेगा। ABS क्या होता है? ABS (Anti-lock Braking System) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर है, जो इमरजेंसी ब्रेकिंग के दौरान बाइक के पहियों को पूरी तरह लॉक होने से बचाता है। अगर अचानक तेज ब्रेक लगाने की स्थिति बन जाए, तो बिना ABS वाली बाइक के पहिए लॉक हो सकते हैं, जिससे बाइक फिसलने (स्किड) लगती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ABS इस जोखिम को कम करते हुए बाइक पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखने में मदद करता है। क्या होता है Single-Channel ABS? Single-Channel ABS केवल फ्रंट (आगे) व्हील पर काम करता है। जब तेज ब्रेक लगाने पर आगे का पहिया लॉक होने लगता है, तो ABS ब्रेकिंग प्रेशर को नियंत्रित करता है, जिससे फ्रंट व्हील घूमता रहता है और राइडर बाइक पर नियंत्रण बनाए रख सकता है। फायदे फ्रंट व्हील लॉक होने का खतरा कम होता है। इमरजेंसी ब्रेकिंग में बेहतर कंट्रोल मिलता है। कीमत अपेक्षाकृत कम होती है। सीमाएं रियर (पीछे) व्हील पर ABS नहीं होता। पीछे का ब्रेक ज्यादा दबाने पर रियर व्हील स्किड कर सकता है। क्या होता है Dual-Channel ABS? Dual-Channel ABS आगे और पीछे दोनों पहियों पर काम करता है। यदि सिस्टम को लगता है कि किसी भी पहिए के लॉक होने की संभावना है, तो वह दोनों पहियों पर अलग-अलग ब्रेकिंग प्रेशर को नियंत्रित करता है। इससे बाइक का संतुलन बेहतर बना रहता है। फायदे दोनों पहियों पर सुरक्षा मिलती है। स्किड होने का खतरा काफी कम हो जाता है। बारिश या फिसलन वाली सड़क पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। इमरजेंसी ब्रेकिंग में अधिक स्थिरता मिलती है। दोनों में क्या है मुख्य अंतर? फीचर Single-Channel ABS Dual-Channel ABS ABS का कार्य केवल फ्रंट व्हील फ्रंट और रियर दोनों व्हील सुरक्षा अच्छी अधिक बेहतर स्किड से बचाव केवल आगे का पहिया दोनों पहियों का संरक्षण कीमत कम अपेक्षाकृत अधिक कौन-सा विकल्प चुनना चाहिए? यदि आप मुख्य रूप से शहर में सामान्य राइडिंग करते हैं और आपका बजट सीमित है, तो Single-Channel ABS एक अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं यदि आप हाईवे पर ज्यादा सफर करते हैं, लंबी दूरी तय करते हैं या अधिकतम सुरक्षा चाहते हैं, तो Dual-Channel ABS बेहतर विकल्प माना जाता है। दोनों पहियों पर ABS होने से अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में बाइक पर नियंत्रण बनाए रखना आसान हो जाता है।
देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर माइलेज घटने, इंजन खराब होने और पुराने वाहनों पर असर पड़ने जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे आम लोगों पर किया जा रहा "प्रयोग" भी बताया। अब इन सभी सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। E20 पर अचानक विवाद क्यों शुरू हुआ? हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, E20 कोई नया ईंधन नहीं है। यह करीब दो वर्षों से देश में उपलब्ध है, जबकि इससे पहले E15 पेट्रोल का भी लंबे समय तक उपयोग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि E20 से इतनी बड़ी समस्या होती, तो यह विवाद पहले ही सामने आ जाता। मंत्री का मानना है कि E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लॉन्चिंग के बाद ही E20 को लेकर भ्रम फैलना शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने क्या कहा? हाल ही में यह दावा किया गया था कि E20 के जरिए करोड़ों भारतीयों पर प्रयोग किया जा रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत में मामला भारत पेट्रोलियम (BPCL) और एक एथेनॉल आवंटन से जुड़े विवाद का था, न कि E20 कार्यक्रम की वैधता का। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। बाद में अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि अदालत में E20 कार्यक्रम को किसी प्रकार का "प्रयोग" नहीं बताया गया था। क्या E20 से माइलेज कम हो जाता है? मंत्री ने माना कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। ऐसे में कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि माइलेज कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है, जैसे— वाहन का मॉडल ड्राइविंग का तरीका सड़क और ट्रैफिक की स्थिति वाहन की गति इसलिए हर वाहन में माइलेज पर एक जैसा असर नहीं पड़ता। क्या पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ता है असर? पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मंत्री ने जवाब दिया। उनके अनुसार कुछ मामलों में रबर गैस्केट जैसे कुछ पुर्जों को तय समय से पहले बदलना पड़ सकता है, लेकिन इसे इंजन की गंभीर तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 की वजह से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की कोई पुष्टि नहीं की है। साथ ही, Hero MotoCorp द्वारा E20 इस्तेमाल करने वाले बड़ी संख्या में वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। क्या पेट्रोल पंपों पर E15 और E20 दोनों मिलेंगे? कई वाहन मालिक चाहते हैं कि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिले। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल E15 और E20 दोनों को एक साथ उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है। मंत्री के अनुसार इसके लिए अलग-अलग स्टोरेज, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जिससे संचालन जटिल हो जाएगा। सरकार E20 को क्यों दे रही है बढ़ावा? सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन परिवर्तन की योजना नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। सरकार के मुताबिक इस कार्यक्रम से अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित ईंधन पर जोर देने से आयात पर निर्भरता कम होगी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित किया जा सकेगा। क्या कहते हैं मौजूदा हालात? सरकार का कहना है कि E20 को लेकर फैली कई आशंकाओं का अब तक कोई ठोस तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, माइलेज और कुछ पुराने वाहनों के रखरखाव को लेकर मामूली बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार के साथ यह स्पष्ट होगा कि देश की नई ईंधन नीति आम उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल उद्योग पर कितना प्रभाव डालती है।