सस्पेंस और इमोशनल ड्रामा से भरपूर फिल्म Vadh 2 अब दर्शकों के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। पहली फिल्म की सफलता के बाद आई यह सीक्वल कहानी को एक नए और ज्यादा गहरे मोड़ पर ले जाती है, जहां अपराध, न्याय और नैतिकता के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आती है।
"Vadh 2" 3 अप्रैल 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। इससे पहले यह फिल्म 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक जेल के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां मंजू मिश्रा, जिस पर डबल मर्डर का आरोप है, अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ रही है।
दूसरी तरफ, शंभुनाथ मिश्रा-एक ईमानदार लेकिन थका हुआ जेल गार्ड-अपनी रिटायरमेंट के करीब है और जेल के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता है। मंजू जेल के कठोर माहौल से निकलने की कोशिश में शंभुनाथ से मदद मांगती है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब जांच अधिकारी अतीत सिंह मामले की गहराई से पड़ताल करता है और कई चौंकाने वाले सवाल उठाता है। फिल्म यह सवाल भी उठाती है-क्या ‘वध’ यानी हत्या ही न्याय का रास्ता बन सकता है?
फिल्म का निर्देशन Jaspal Singh Sandhu ने किया है।
मुख्य भूमिकाओं में Sanjay Mishra (शंभुनाथ मिश्रा) और Neena Gupta (मंजू मिश्रा) नजर आते हैं।
इसके अलावा Kumud Mishra, Yogita Bihani और Akshay Dogra ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
फिल्म को Luv Ranjan और अंकुर गर्ग ने प्रोड्यूस किया है।
पहली फिल्म Vadh को दर्शकों और क्रिटिक्स से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी और IMDb पर 7.6 की मजबूत रेटिंग हासिल की थी। इसी उम्मीद के साथ ‘वध 2’ भी दर्शकों के बीच चर्चा में है और इसकी कहानी को और ज्यादा गहराई और थ्रिल के लिए सराहा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कनाडा में फीफा वर्ल्ड कप 2026 का भव्य आगाज, नोरा फतेही बनीं शो की स्टार FIFA World Cup 2026 की ओपनिंग सेरेमनी इस बार कनाडा में बेहद भव्य अंदाज में आयोजित की गई, जहां बॉलीवुड और इंटरनेशनल स्टार Nora Fatehi ने अपने दमदार परफॉर्मेंस से पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। टोरंटो स्टेडियम में हुए इस इवेंट में नोरा फतेही ने टूर्नामेंट के ऑफिशियल एंथम ‘Siir Siir’ पर परफॉर्म किया और हजारों दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। ‘Siir Siir’ बना वर्ल्ड कप का नया म्यूजिकल हिट यह मल्टी-लैंग्वेज फुटबॉल एंथम नोरा फतेही, फ्रेंच सिंगर Vegedream और म्यूजिक प्रोड्यूसर Sanjoy द्वारा तैयार किया गया है। इस गाने में अरबी, इंग्लिश, फ्रेंच और मोरक्कन डारिजा जैसी कई भाषाओं का मिश्रण है, जिससे इसे एक ग्लोबल फुटबॉल एंथम का रूप मिला है। इसका टाइटल एक लोकप्रिय मोरक्कन फुटबॉल चैंट से लिया गया है, जिसका अर्थ “चलो आगे बढ़ो” माना जाता है। रेड आउटफिट में नोरा ने बिखेरा जलवा सेरेमनी के दौरान नोरा फतेही ने रेड कलर की आकर्षक ड्रेस में स्टेज पर एंट्री ली, जिसने पूरे स्टेडियम का माहौल बदल दिया। उनके एनर्जेटिक डांस मूव्स और ग्रुप परफॉर्मेंस को दर्शकों ने खूब सराहा। सोशल मीडिया पर उनके परफॉर्मेंस के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और फैंस लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं। ग्लोबल स्टार्स की मौजूदगी से सजी ओपनिंग सेरेमनी इस भव्य समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भी हिस्सा लिया। कनाडा की सांस्कृतिक झलक दिखाते हुए शो की शुरुआत वहां के इंडिजिनस समुदाय को समर्पित ट्रिब्यूट से हुई। इसके अलावा अलानिस मोरिसेट, एलेसिया कारा, माइकल बबल जैसे कई बड़े कलाकारों ने भी परफॉर्म किया, जिससे इवेंट और भी खास बन गया। नोरा का भावुक बयान नोरा फतेही ने एबीसी न्यूज लाइव से बातचीत में कहा कि यह उनके लिए एक ‘होमकमिंग’ जैसा पल है। उन्होंने बताया कि टोरंटो छोड़कर भारत में अपने करियर की शुरुआत करने के बाद यह उनके लिए बेहद खास मौका है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सोचा था कि जब वह टोरंटो लौटेंगी तो कुछ बड़ा और यादगार करेंगी, और फीफा वर्ल्ड कप का मंच उनके लिए सबसे बड़ा अवसर साबित हुआ। तीन देशों में हुए अलग-अलग ओपनिंग सेरेमनी इस बार वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी तीन मेजबान देशों—कनाडा, अमेरिका और मैक्सिको—में अलग-अलग आयोजित की गई। कनाडा के साथ-साथ लॉस एंजेलिस और मैक्सिको सिटी में भी भव्य शो हुए, जिनमें शकीरा, कैटी पेरी और कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने परफॉर्म किया। सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप यह संस्करण अब तक का सबसे बड़ा वर्ल्ड कप माना जा रहा है, जिसमें कुल 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। टूर्नामेंट 19 जुलाई 2026 को फाइनल मुकाबले के साथ समाप्त होगा।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म के पहले ही दिन दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर चर्चा तेज है और कई दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और कंगना रनौत के अभिनय की जमकर तारीफ की है। ‘दिल छू लेने वाली कहानी’ बता रहे दर्शक फिल्म देखने के बाद कई दर्शकों ने इसे एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कहानी बताया है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म आम लोगों के संघर्ष, जिम्मेदारी और साहस को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर पेश करती है। कुछ दर्शकों ने इसे ऐसी कहानी बताया है जो लंबे समय तक दिल और दिमाग में बनी रहती है। कंगना के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल कंगना रनौत के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उन्हें ‘एक्टिंग क्वीन’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और गहराई के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि कंगना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को प्रभावशाली तरीके से निभाने में माहिर हैं। ‘हीरो हमेशा वर्दी में नहीं होते’ फिल्म का निर्देशन और लेखन मनोज तापड़िया ने किया है। फिल्म में कंगना के साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अर्जुन बेर्डे, जाहिद खान और सुहिता थट्टे भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि फिल्म यह संदेश देती है कि असली नायक हमेशा वर्दी में नहीं होते, बल्कि समाज में अपनी जिम्मेदारियां निभाने वाले साधारण लोग भी असाधारण काम कर सकते हैं। क्या यह कंगना की दमदार वापसी है? कंगना की पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ को समीक्षकों की सराहना तो मिली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। ऐसे में ‘भारत भाग्य विधाता’ को मिल रही शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया को कंगना के लिए एक मजबूत वापसी के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर टिकी हैं।
नई दिल्ली: एमटीवी स्प्लिट्सविला 16 के विजेता कुशल तंवर उर्फ गुल्लू और कैरा अनु एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी जीत नहीं बल्कि उनके रिश्ते को लेकर उठ रहे सवाल हैं। शो खत्म होने के कुछ ही हफ्तों बाद दोनों के बीच ब्रेकअप की अफवाहें तेज हो गई हैं। इंस्टाग्राम एक्टिविटी ने बढ़ाया सस्पेंस फैंस ने हाल ही में नोटिस किया कि गुल्लू और कैरा अब इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, दोनों के अकाउंट से उनके कुछ रोमांटिक और फनी कोलैबरेशन वीडियो और रील्स भी गायब दिखाई दे रहे हैं। इस बदलाव ने उनके प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। शो के दौरान और उसके बाद भी दोनों की जोड़ी को काफी पसंद किया गया था। उनके मजेदार वीडियोज और केमिस्ट्री ने उन्हें सोशल मीडिया पर लोकप्रिय बना दिया था। ऐसे में अचानक हुए इस बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फैंस ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रियाएं कई फैंस ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा जाहिर की। कुछ लोगों ने उनकी जोड़ी को पसंद करते हुए रिश्ते में आई इस दूरी पर चिंता जताई, जबकि कुछ यूजर्स का मानना है कि दोनों का रिश्ता सिर्फ शो और सोशल मीडिया की लोकप्रियता तक ही सीमित था। स्प्लिट्सविला 16 के बने थे विजेता पिछले महीने ही गुल्लू और कैरा ने योगेश रावत-रुरु ठाकुर और सोराब बेदी-निहारिका तिवारी जैसी मजबूत जोड़ियों को हराकर स्प्लिट्सविला 16 की ट्रॉफी अपने नाम की थी। जीत के बाद कैरा ने भावुक होते हुए कहा था कि गुल्लू के साथ यह सफर उनके लिए बेहद खास रहा और दोनों ने मिलकर हर चुनौती का सामना किया। अब तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान हालांकि, दोनों के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अभी तक न तो गुल्लू और न ही कैरा ने अपने रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में फिलहाल यह सब सिर्फ अटकलें ही मानी जा रही हैं। अन्य सब-हेडलाइन विकल्प इंस्टाग्राम अनफॉलो के बाद रिश्ते पर उठे सवाल रोमांटिक रील्स गायब होने से बढ़ीं चर्चाएं जीत के कुछ हफ्तों बाद चर्चा में आई विजेता जोड़ी क्या शो खत्म होने के साथ खत्म हुआ रिश्ता?