भारत में टैटू का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं के बीच। इसी बीच एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-उर्दू शब्दों वाले टैटू। भले ही कई लोगों को उर्दू पढ़ना या लिखना न आता हो, लेकिन इसकी खूबसूरत लिखावट और स्टाइल उन्हें आकर्षित कर रही है।
उर्दू की लिखावट क्यों है खास?
उर्दू भाषा की घुमावदार और फ्लोइंग स्क्रिप्ट इसे बेहद कलात्मक बनाती है।
सिर्फ डिजाइन नहीं, इमोशन भी
टैटू एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग उर्दू टैटू को सिर्फ डिजाइन नहीं बल्कि इमोशनल एक्सप्रेशन के तौर पर चुनते हैं।
प्राइवेसी भी एक कारण
कई युवा अपने पार्टनर का नाम या खास मैसेज उर्दू में इसलिए लिखवाते हैं क्योंकि:
इंटरनेट से बढ़ा ट्रेंड
आजकल लोग टैटू बनवाने से पहले:
हालांकि, कई बार गलत अनुवाद की वजह से गलत शब्द भी टैटू हो जाते हैं।
आलोचना भी झेलनी पड़ती है
कुछ लोगों को उर्दू टैटू बनवाने पर सवालों का सामना करना पड़ता है-
लेकिन ज्यादातर लोग इसे अपनी पर्सनल चॉइस मानते हैं।
रोजमर्रा में बढ़ता उर्दू का इस्तेमाल
आजकल गानों, शायरी और बातचीत में भी उर्दू शब्दों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
भले ही लोग पहचान न पाएं, लेकिन उर्दू की मिठास और खूबसूरती उन्हें आकर्षित करती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। त्वचा पर बार-बार लाल चकत्ते, बैंगनी धब्बे या बिना चोट के नीले निशान दिखाई देना सामान्य एलर्जी या मौसम का असर लग सकता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह Blood Cancer यानी ब्लड कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये निशान लंबे समय तक बने रहें और इलाज के बावजूद ठीक न हों, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। ऐसे मामलों में सीबीसी यानी कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद कर सकता है। कैसे शुरू होता है ब्लड कैंसर? विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड कैंसर की शुरुआत बोन मैरो से होती है, जहां खून की कोशिकाएं बनती हैं। जब इन कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होने लगता है, तब असामान्य व्हाइट ब्लड सेल्स तेजी से बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे ये स्वस्थ कोशिकाओं की जगह लेने लगती हैं, जिससे शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। किन लक्षणों पर रखें नजर डॉक्टरों के मुताबिक, ब्लड कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। त्वचा पर छोटे लाल बिंदु, जिन्हें पेटीकीए कहा जाता है, इस बीमारी के अहम संकेतों में शामिल हैं। इसके अलावा बड़े लाल या बैंगनी पैच, बार-बार बुखार, अत्यधिक थकान, सांस फूलना, रात में ज्यादा पसीना आना, अचानक वजन घटना और शरीर में गांठ महसूस होना भी गंभीर लक्षण हो सकते हैं। क्यों बनते हैं लाल चकत्ते? ब्लड कैंसर में शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है। इससे खून का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और त्वचा पर अचानक लाल या बैंगनी निशान दिखाई देने लगते हैं। खास बात यह है कि इन निशानों पर दबाव डालने के बाद भी इनका रंग फीका नहीं पड़ता। समय पर जांच बेहद जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि हर लाल चकत्ता ब्लड कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर त्वचा पर बार-बार ऐसे निशान दिखें या शरीर में असामान्य बदलाव महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर सीबीसी टेस्ट और सही इलाज से बीमारी का जल्द पता लगाया जा सकता है और उपचार की संभावना बेहतर हो सकती है
मेकअप खरीदना अक्सर उत्साह से ज्यादा कन्फ्यूजन से भरा अनुभव बन जाता है, खासकर जब बात फाउंडेशन की हो। स्टोर में जो शेड परफेक्ट लगता है, वही कुछ घंटों बाद ऑरेंज, ग्रे या जरूरत से ज्यादा डार्क नजर आने लगता है। कई बार गलत शेड की बोतलें ड्रेसिंग टेबल के कोने में पड़ी रह जाती हैं और लोग मजबूरी में वही फाउंडेशन इस्तेमाल करते रहते हैं जो उनकी स्किन टोन से मेल ही नहीं खाता। ऐसे में मेकअप एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही फाउंडेशन चुनना मुश्किल जरूर है, लेकिन अगर कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखा जाए तो यह प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। मेकअप आर्टिस्ट Leiya Phinao Ningshen और Rose Siard ने फाउंडेशन चुनने के तीन सबसे जरूरी स्टेप्स बताए हैं—शेड, अंडरटोन और स्किन टाइप। Step 1: सही शेड कैसे चुनें? अधिकतर लोग फाउंडेशन को हाथ के पीछे लगाकर टेस्ट करते हैं, जबकि एक्सपर्ट्स इसे सबसे बड़ी गलती मानते हैं। हाथ का रंग अक्सर चेहरे से अलग होता है क्योंकि वह ज्यादा धूप में रहता है। मेकअप आर्टिस्ट्स के मुताबिक, फाउंडेशन हमेशा जॉलाइन यानी चेहरे और गर्दन के बीच वाले हिस्से पर टेस्ट करना चाहिए। इससे पता चलता है कि शेड चेहरे और गर्दन दोनों में नेचुरली ब्लेंड हो रहा है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि फाउंडेशन को खरीदने से पहले उसे कम से कम 5 से 10 मिनट तक स्किन पर रहने दें। ऐसा इसलिए क्योंकि कई फाउंडेशन स्किन के ऑयल के साथ मिलकर ऑक्सीडाइज हो जाते हैं और कुछ देर बाद डार्क या ऑरेंज दिखने लगते हैं। ऑक्सीडेशन क्या होता है? ऑक्सीडेशन वह प्रक्रिया है जिसमें फाउंडेशन स्किन के नैचुरल ऑयल के संपर्क में आकर अपना रंग बदल देता है। यही वजह है कि शुरुआत में सही दिखने वाला फाउंडेशन बाद में अलग नजर आने लगता है। Step 2: अपना Undertone पहचानें कई बार समस्या शेड की नहीं बल्कि अंडरटोन की होती है। अगर फाउंडेशन चेहरे पर ज्यादा पीला, गुलाबी या ग्रे दिख रहा है, तो संभव है कि उसका अंडरटोन आपकी स्किन से मैच नहीं कर रहा हो। अंडरटोन पहचानने का आसान तरीका: Cool Undertone: नसें नीली या बैंगनी दिखती हैं Warm Undertone: नसें हरी या ऑलिव टोन में नजर आती हैं Neutral Undertone: Warm और Cool का संतुलन Olive Undertone: स्किन में हल्का हरा-ग्रे टोन दिखाई देता है एक्सपर्ट्स का कहना है कि कलर करेक्टर का सही इस्तेमाल भी मेकअप को बेहतर बना सकता है। उदाहरण के लिए: Green corrector रेडनेस कम करता है Peach corrector डार्कनेस छुपाता है Yellow corrector पिंक या ब्लू टोन को बैलेंस करता है Step 3: स्किन टाइप के हिसाब से चुनें Formula सिर्फ सही शेड चुनना काफी नहीं है। अगर फाउंडेशन का फॉर्मूला आपकी स्किन टाइप के मुताबिक नहीं होगा, तो मेकअप खराब दिख सकता है। Oily या Acne-Prone Skin ऑयल-फ्री, मैट और लॉन्ग-वियर फाउंडेशन बेहतर रहते हैं। Dry Skin Hydrating या Serum-infused फाउंडेशन स्किन को फ्लॉलेस लुक देते हैं। Combination Skin Natural या Satin finish फाउंडेशन सबसे अच्छा विकल्प माने जाते हैं। मेकअप एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि फाउंडेशन हमेशा पतली लेयर में लगाएं और उसे स्किन पर प्रेस करें, रगड़ें नहीं। साथ ही जरूरत से ज्यादा पाउडर लगाने से बचें, वरना मेकअप केकी दिख सकता है। गलत फाउंडेशन को कैसे ठीक करें? अगर गलती से गलत शेड खरीद लिया है, तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं। ज्यादा Orange लगे तो Blue corrector मिलाएं ज्यादा Yellow लगे तो Purple tone add करें Grey दिखे तो Bronzer से Warmth दें ज्यादा Dark हो तो White mixer से हल्का करें मेकअप एक्सपर्ट्स का मानना है कि परफेक्ट फाउंडेशन वही होता है जो स्किन में पूरी तरह घुल जाए और अलग से नजर न आए। सही शेड ढूंढने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन बेसिक जानकारी होने पर यह प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली बन सकती है।
गर्मियों के मौसम में हैवी क्रीम और ऑयली मॉइश्चराइज़र अक्सर स्किन को चिपचिपा और अनकम्फर्टेबल बना देते हैं। ऐसे में लोग ऐसे प्रोडक्ट्स की तलाश करते हैं जो स्किन को हाइड्रेट तो रखें लेकिन भारी महसूस न हों। आजकल मार्केट में कई ऐसे lightweight moisturisers मौजूद हैं, जिनकी जेल, वॉटर-बेस्ड और माइक्रोइमल्शन टेक्सचर स्किन में जल्दी एब्जॉर्ब हो जाती है और लंबे समय तक फ्रेशनेस बनाए रखती है। इन मॉइश्चराइजर्स में Hyaluronic Acid, Ceramides, Aloe Vera और Ectoin जैसे इंग्रेडिएंट्स स्किन बैरियर को मजबूत करने, रेडनेस कम करने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करते हैं। यहां जानिए ऐसे 7 lightweight moisturisers के बारे में जो गर्मियों में स्किन के लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. The Ordinary Rice Lipids + Ectoin Microemulsion यह अल्ट्रा-लाइट माइक्रोइमल्शन स्किन को बिना ऑयली बनाए डीप हाइड्रेशन देता है। खास खूबियां: Rice Lipids और Jojoba Oil से स्किन बैरियर मजबूत Ectoin से रेडनेस और इरिटेशन कम Humid मौसम में भी नॉन-ग्रीसी फिनिश यह खासतौर पर sensitive और acne-prone स्किन के लिए अच्छा माना जाता है। 2. d'you Inbalance Soothing Milky Tonic यह प्रोडक्ट टोनर और lightweight moisturiser का कॉम्बिनेशन है। क्यों है खास? ओवरहीटेड और irritated skin को soothe करता है Sunscreen और makeup के नीचे आसानी से लेयर हो जाता है Fluid texture स्किन पर बेहद हल्का महसूस होता है 3. Clinique Moisture Surge 100H Auto-Replenishing Hydrator गर्मियों के लिए सबसे लोकप्रिय oil-free gel creams में से एक। मुख्य फायदे: Aloe Bio-Ferment और Hyaluronic Acid से लंबे समय तक hydration Cooling effect देता है Sticky weather में भी हल्का महसूस होता है 4. Neutrogena Hydro Boost Water Gel यह water-gel moisturiser oily और combination skin वालों के बीच काफी पसंद किया जाता है। इसकी खूबियां: त्वचा में तेजी से absorb होता है Shine या residue नहीं छोड़ता गर्मियों में instant freshness देता है 5. Forest Essentials Light Hydrating Facial Gel अगर आप cooling और minimalist skincare पसंद करते हैं, तो यह अच्छा विकल्प हो सकता है। क्या है खास? Aloe Vera बेस्ड फॉर्मूला Non-sticky और fast-absorbing texture Acne-prone skin के लिए उपयुक्त 6. Innisfree Green Tea Ceramide Cream यह moisturiser hydration और barrier repair का अच्छा बैलेंस देता है। मुख्य फायदे: Green Tea Ceramides से स्किन मजबूत Environmental stress से सुरक्षा Nourishing होने के बावजूद breathable feel 7. belif The True Cream Aqua Bomb यह जेल मॉइश्चराइज़र गर्मियों में instant cooling effect देने के लिए जाना जाता है। क्यों पसंद किया जाता है? Niacinamide और Hyaluronic Acid से hydration Skin को fresh और dewy लुक देता है Heatwave और humid मौसम के लिए अच्छा विकल्प गर्मियों में मॉइश्चराइज़र चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? Gel या water-based formulas चुनें Non-comedogenic products लें Hyaluronic Acid और Ceramides वाले options बेहतर रहते हैं Heavy oils और thick creams से बचें