फैशन और ब्यूटी

Must-Have Vintage Heels for 2026

Chanel से Prada तक: ये विंटेज हील्स 2026 में बनेंगी हर फैशन लवर की पहली पसंद

surbhi जून 20, 2026 0
Collection of iconic vintage designer heels from Chanel, Prada, Gucci and Dior trending in 2026.
Trending Vintage Designer Heels 2026

फैशन की दुनिया में विंटेज शॉपिंग अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक स्मार्ट और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। जहां पहले लोग केवल विंटेज बैग्स और जैकेट्स की तलाश करते थे, वहीं अब विंटेज हील्स भी फैशन प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। खास बात यह है कि इन क्लासिक डिजाइनों में आपको लग्जरी ब्रांड्स के आइकॉनिक पीस कम कीमत में मिल सकते हैं।

फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, 2026 में Chanel, Prada, Gucci, Dior और Manolo Blahnik जैसे ब्रांड्स की पुरानी लेकिन शानदार हील्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है। सुपरमॉडल बेला हदीद से लेकर कई Vogue एडिटर्स तक, सभी विंटेज फुटवियर को अपने स्टाइल का हिस्सा बना रहे हैं।

विंटेज हील्स की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है?

आज के दौर में लोग यूनिक और एक्सक्लूसिव फैशन पीस की तलाश में रहते हैं। विंटेज हील्स न केवल अलग पहचान देती हैं, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प मानी जाती हैं। 2025 में Vestiaire Collective की रिपोर्ट के मुताबिक, विंटेज हील्स की सर्च में साल-दर-साल 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

2026 में किन विंटेज हील्स पर करें निवेश?

1. Chanel Pumps

मैथ्यू ब्लेज़ी के Chanel डेब्यू के बाद ब्रांड की क्लासिक पंप्स फिर चर्चा में हैं। अगर नई कलेक्शन आपके बजट से बाहर है, तो प्री-लव्ड Chanel पंप्स शानदार विकल्प हो सकती हैं।

2. Prada Kitten Heels

बेला हदीद द्वारा पहनी गई शुरुआती 2000 के दशक की Prada किटन हील्स इस समय सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं। सॉफ्ट सुएड और एलिगेंट डिज़ाइन इन्हें टाइमलेस बनाते हैं।

3. Gucci Monogram Slingbacks

Demna के Gucci में आने की चर्चा के बीच Gucci का मोनोग्राम स्टाइल फिर वापसी कर रहा है। ऐसे में पुराने मोनोग्राम स्लिंगबैक हील्स भविष्य के लिए अच्छा फैशन निवेश माने जा रहे हैं।

4. Dior Logo Heels

लोगो फैशन की वापसी के साथ Dior की 2000s की लोगो बकल हील्स भी दोबारा ट्रेंड में आ गई हैं। ये क्लासिक और स्टेटमेंट दोनों का बेहतरीन मिश्रण हैं।

5. Céline Ballerina Heels

Phoebe Philo के दौर की Céline बैलेरीना हील्स आज भी फैशन प्रेमियों की विशलिस्ट में शामिल हैं। 2015 की यह डिज़ाइन आज भी उतनी ही मॉडर्न और स्टाइलिश लगती है।

6. Vivienne Westwood Ghillie Platforms

अगर आप बोल्ड फैशन पसंद करते हैं तो Vivienne Westwood की मशहूर Ghillie Platforms आपके लिए हैं। इन्हें सुपरमॉडल नाओमी कैंपबेल ने 1993 के रनवे शो में पहनकर इतिहास रचा था।

7. Manolo Blahnik Kitten Heels

90 के दशक के मिनिमलिस्ट फैशन की वापसी के साथ Manolo Blahnik की ब्लैक सुएड किटन हील्स फिर ट्रेंड में हैं। इनका क्लासिक लुक कभी आउट ऑफ फैशन नहीं होता।

क्यों खास हैं विंटेज हील्स?

  • यूनिक और रेयर डिज़ाइन
  • लग्जरी ब्रांड्स कम कीमत में
  • सस्टेनेबल फैशन का हिस्सा
  • लंबे समय तक चलने वाली क्वालिटी
  • हर आउटफिट में क्लासिक टच

अगर आप अपने वॉर्डरोब में कुछ ऐसा जोड़ना चाहती हैं जो ट्रेंडी होने के साथ-साथ हमेशा स्टाइलिश रहे, तो विंटेज हील्स एक शानदार निवेश साबित हो सकती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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नीता अंबानी की चिकनकारी साड़ी बनने में लगा एक साल से अधिक समय, लखनऊ की पारंपरिक कला को मिला वैश्विक मंच

मुंबई: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और समाजसेवी नीता अंबानी एक बार फिर भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के कारण चर्चा में हैं। अपने खास और शालीन फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली नीता अंबानी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी साड़ी पहनी, जिसे तैयार करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा। नीता अंबानी ने अपने स्वयं के क्राफ्ट-केंद्रित पहल 'स्वदेश इंडिया' की एक विशेष हस्तनिर्मित चिकनकारी साड़ी को चुना। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्प विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। एक साल की मेहनत से तैयार हुई चिकनकारी की उत्कृष्ट कृति नीता अंबानी की एंटीक मॉव रंग की शिफॉन साड़ी में लखनऊ की सदियों पुरानी चिकनकारी कला की खूबसूरत झलक देखने को मिली। साड़ी के पारदर्शी कपड़े पर बारीक फ्लोरल जाल डिज़ाइन बनाए गए थे, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। इस शानदार साड़ी को लखनऊ के मास्टर कारीगर अंजनी कश्यप ने पारंपरिक 'दो तार चिकनकारी' तकनीक से हाथों से तैयार किया। इसे बनाने में एक साल से अधिक का समय लगा। साड़ी में जाली, मुर्री, घास पत्ती और बलदा वर्क जैसी जटिल कढ़ाई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो लखनऊ की समृद्ध शिल्प परंपरा का प्रतीक हैं। मनीष मल्होत्रा के ब्लाउज ने बढ़ाई खूबसूरती नीता अंबानी ने साड़ी को पारंपरिक निवी स्टाइल में ड्रेप किया और इसके साथ डिजाइनर मनीष मल्होत्रा द्वारा तैयार कस्टम ऑर्गेंजा और लेस ब्लाउज पहना। ब्लाउज की प्लीटेड और रफल डिटेलिंग साड़ी की टेक्सचर और चिकनकारी के साथ बेहद खूबसूरती से मेल खा रही थी। डायमंड ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप में दिखीं एलिगेंट अपने मोनोक्रोमैटिक लुक को पूरा करने के लिए नीता अंबानी ने डायमंड ड्रॉप ईयररिंग्स, डायमंड बैंगल, स्टेटमेंट रिंग और एक क्लासिक घड़ी को चुना। ब्यूटी लुक को उन्होंने बेहद सादगी के साथ रखा। कोहल-रिम्ड आंखें, हल्के गुलाबी होंठ और सेंटर-पार्टेड बन में सजे बैंगनी गुलाब उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना रहे थे। मैचिंग बिंदी ने उनके पारंपरिक अंदाज में चार चांद लगा दिए। नीता अंबानी का यह लुक सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भारतीय कारीगरों की कला, धैर्य और विरासत को सम्मान देने का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है। यह एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय हस्तशिल्प की खूबसूरती और शान वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान रखती है।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में कई लोग इंस्टेंट ग्लो पाने या दाग-धब्बे हटाने के लिए सोशल मीडिया पर बताए गए घरेलू नुस्खों और ब्यूटी टिप्स को अपनाने लगते हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ चीजें गर्मियों में चेहरे पर लगाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सही स्किनकेयर रूटीन अपनाने के साथ-साथ ऐसी चीजों से बचना भी जरूरी है, जो स्किन की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाती हैं।   इन चीजों से रखें दूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में नींबू का रस सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है, जिससे जलन, लालिमा और पिगमेंटेशन की समस्या हो सकती है। इसी तरह टूथपेस्ट को पिंपल्स पर लगाने का घरेलू उपाय भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को ड्राई और इरिटेट कर सकते हैं, जिससे सूजन और जलन बढ़ सकती है।   बेकिंग सोडा का pH स्तर त्वचा के प्राकृतिक pH से अलग होता है। इसे चेहरे पर लगाने से स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है और त्वचा रूखी व संवेदनशील बन सकती है।   स्क्रब और ऑयल-बेस्ड प्रोडक्ट्स का भी रखें ध्यान गर्मी में बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सन डैमेज और रेडनेस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, भारी ऑयल-बेस्ड क्रीम और प्रोडक्ट्स रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे मुंहासे, ब्लैकहेड्स और चिपचिपाहट की समस्या बढ़ सकती है।   विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में हल्के, नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, नियमित सनस्क्रीन, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार रखा जा सकता है।

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वैक्सिंग के बाद क्यों आते हैं दाने? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताईं 5 बड़ी वजहें और बचाव के आसान उपाय

नई दिल्ली, एजेंसियां।  वैक्सिंग के बाद त्वचा पर दाने, खुजली और जलन की समस्या कई लोगों में देखी जाती है। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार यह समस्या केवल स्किन की संवेदनशीलता तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की कुछ गलतियों और देखभाल में कमी के कारण भी बढ़ सकती है। हालांकि सही केयर से इस परेशानी को काफी हद तक रोका जा सकता है।   इन वजहों से आते हैं वैक्सिंग के बाद दाने विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सिंग के बाद दाने आने के कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले, सेंसेटिव स्किन वाले लोगों में स्किन बैरियर कमजोर होने के कारण वैक्सिंग के बाद तुरंत रिएक्शन हो सकता है। दूसरा कारण हेयर फॉलिकल्स में होने वाली चोट है, जिससे त्वचा में सूजन और छोटे-छोटे दाने बन सकते हैं।   इनग्रोन हेयर भी एक बड़ी वजह है, जिसमें बाल त्वचा के अंदर ही उगने लगते हैं और दाने जैसे दिखते हैं। इसके अलावा, अगर वैक्सिंग के दौरान साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाए तो बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोगों में वैक्स या उसके केमिकल्स से एलर्जी भी दानों का कारण बन सकती है।   गलतियां जो बढ़ा सकती हैं समस्या डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि कई बार लोग वैक्सिंग के बाद कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जिससे दाने और बढ़ जाते हैं। इनमें तुरंत कसे हुए कपड़े पहनना, गर्म पानी से नहाना, जिम या एक्सरसाइज करना, स्विमिंग करना और स्किन पर फ्रेगरेंस वाले प्रोडक्ट्स लगाना शामिल है। वैक्सिंग के तुरंत बाद स्क्रबिंग भी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है।   राहत के लिए क्या करें विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सिंग के बाद एलोवेरा जेल का इस्तेमाल त्वचा को शांत करता है और जलन कम करता है। टी ट्री ऑयल को कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर लगाने से एंटी-बैक्टीरियल फायदा मिलता है। बर्फ से सेक करने पर सूजन और लालिमा में राहत मिलती है। नारियल तेल और कैलेमाइन लोशन भी त्वचा को आराम देने में मदद करते हैं।   डर्मेटोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि सही प्री और पोस्ट-वैक्सिंग केयर अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है और त्वचा को स्वस्थ रखा जा सकता है।

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