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Reliance Enters Satellite Internet Race

रिलायंस का बड़ा दांव: सैटेलाइट कम्युनिकेशन में अरबों डॉलर निवेश की तैयारी, खुद लीड कर रहे Mukesh Ambani

surbhi मई 6, 2026 0
satellite communication concept showing LEO satellites and global internet connectivity network
Reliance Satellite Communication Plan

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है।

लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है।

क्या है रिलायंस का प्लान?

सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है।
यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं:

  • सैटेलाइट डिजाइन
  • लॉन्च सिस्टम
  • पेलोड
  • यूजर टर्मिनल
  • नेटवर्क इंटीग्रेशन

लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस

रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं।
यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं।

सरकार और ग्लोबल रेस

भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके।
इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है।

मुकाबले में कौन-कौन?

इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं:

  • Starlink (एलन मस्क)
  • Amazon Kuiper (अमेजन)
  • Eutelsat OneWeb
  • AST SpaceMobile
  • Sateliot

भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है।

पार्टनरशिप और रणनीति

रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है।
इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके।

भारत के लिए क्या मायने?

अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो:

  • भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है
  • ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी

क्या संकेत देता है यह कदम?

यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है।
रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सोना-चांदी के दाम में जोरदार उछाल: सोना ₹1.51 लाख, चांदी ₹2.46 लाख किलो

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के अनुसार, 6 मई को 24 कैरेट सोना 3,000 रुपये बढ़कर 10 ग्राम के लिए 1.51 लाख रुपये पर पहुंच गया। इससे पहले इसकी कीमत 1.48 लाख रुपये थी। वहीं, चांदी की कीमत में भी बड़ा उछाल देखने को मिला और यह 6,000 रुपये बढ़कर 2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।   इस साल लगातार बढ़ रहे दाम साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब 18,000 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को सोना 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.51 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह चांदी भी इस साल 16,000 रुपये महंगी हो चुकी है और 2.30 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.46 लाख रुपये तक पहुंच गई है।   रिकॉर्ड स्तर से अभी नीचे हालांकि, मौजूदा कीमतें अभी भी अपने ऑलटाइम हाई से नीचे हैं। 29 जनवरी को सोना 1.76 लाख रुपये और चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी।   खरीदारी में बरतें सावधानी विशेषज्ञों के अनुसार, सोना खरीदते समय ग्राहकों को सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा Bureau of Indian Standards (BIS) हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें। साथ ही, खरीदारी से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमत की जांच जरूर करें, क्योंकि कैरेट के अनुसार सोने की कीमत अलग-अलग होती है।

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Stock Market: तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 900 अंक चढ़ा

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Stock Market: चुनावी रुझानों के बीच शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स 900 अंक पार

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Share Market Update: चुनावी नतीजों के बीच बाजार में जबरदस्त तेजी, सेंसेक्स 900 अंक उछला, निफ्टी 24,250 के पार

नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों–पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुड्डुचेरी–में विधानसभा चुनावों की मतगणना के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 900 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि Nifty 50 24,250 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:50 बजे सेंसेक्स 923.85 अंक यानी 1.20% की बढ़त के साथ 77,837.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 272.50 अंक यानी 1.14% चढ़कर 24,270.05 पर पहुंच गया। इस दौरान रुपये में हल्की कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.04% गिरकर 94.95 पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 94.91 पर बंद हुआ था। किन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी? बाजार की इस तेजी में ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने अहम भूमिका निभाई। Maruti Suzuki India और Adani Ports के शेयरों में करीब 4% तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा Hindustan Unilever, Larsen & Toubro, IndiGo, Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra, HDFC Bank, State Bank of India और Tata Steel में भी 1% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। हालांकि, Kotak Mahindra Bank के शेयरों में करीब 4% की गिरावट आई, जबकि ‘इटरनल’ में भी कमजोरी दर्ज की गई। सेक्टरवाइज प्रदर्शन कैसा रहा? निफ्टी के सेक्टरल इंडेक्स की बात करें तो: ऑटो, रियल्टी और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी मीडिया, आईटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में गिरावट ब्रॉडर मार्केट में भी मजबूती दिखी–निफ्टी मिडकैप 0.73% और स्मॉलकैप 0.89% चढ़े। बाजार की तेजी के पीछे क्या वजह? विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनावी नतीजों के बीच स्थिर सरकार की उम्मीद और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने बाजार को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा वैश्विक संकेतों और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी असर देखने को मिला। कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी हलचल रही। Donald Trump द्वारा ‘ऑपरेशन फ्रीडम’ की घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड में 2.45% की गिरावट आई। हालांकि बाद में इसमें रिकवरी देखने को मिली और कीमत 0.46% बढ़कर 108.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह कदम Strait of Hormuz के आसपास फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने से जुड़ा है, जिससे सप्लाई चेन को राहत मिलने की उम्मीद है।  

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टैक्स व्यवस्था को लेकर एक अहम कानूनी स्पष्टता देते हुए Delhi High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी कंपनी की कमाई को उसके शेयरधारकों की व्यक्तिगत आय नहीं माना जा सकता। यह निर्णय कॉर्पोरेट टैक्सेशन के सिद्धांतों को और मजबूत करता है और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। कंपनी और शेयरधारक अलग-अलग इकाइयां Delhi High Court ने अपने फैसले में कहा कि कानून की नजर में कंपनी एक स्वतंत्र कानूनी इकाई होती है, जो अपने शेयरधारकों से अलग होती है। भले ही किसी व्यक्ति के पास कंपनी के 100% शेयर क्यों न हों, वह कंपनी की संपत्तियों का मालिक नहीं माना जाएगा, बल्कि केवल शेयरों का मालिक होगा। कंपनी की आय पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कंपनी कोई मुनाफा कमाती है या अपनी संपत्ति बेचकर आय अर्जित करती है, तो उस पर सीधे तौर पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं वसूला जा सकता। यह आय कंपनी की मानी जाएगी, न कि उसके निवेशकों की। डिविडेंड पर लगेगा टैक्स हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि शेयरधारकों को कंपनी से डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस आय पर लागू कानून के तहत टैक्स लगाया जा सकता है। यानी निवेशकों की टैक्स देनदारी केवल उस लाभ तक सीमित होगी, जो उन्हें कंपनी से प्रत्यक्ष रूप से मिलता है। इनकम टैक्स विभाग की अपील खारिज मामले में Income Tax Department की ओर से शेयरधारकों पर टैक्स लगाने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने ट्रिब्यूनल के पहले के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि टैक्स केवल शेयरों से मिलने वाली आय पर ही लगाया जा सकता है, न कि कंपनी की कुल कमाई पर। यह फैसला कॉर्पोरेट सेक्टर और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे टैक्स से जुड़ी कई जटिलताओं पर स्पष्टता मिलती है और कानूनी विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।  

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