भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (11 मार्च) को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 1,000 अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा।
करीब 11:38 बजे Sensex 878.12 अंक यानी 1.12% गिरकर 77,327.86 पर था, जबकि Nifty 242.40 अंक यानी लगभग 1% गिरकर 24,019.20 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान 2,149 शेयरों में तेजी, 1,469 में गिरावट और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
10 मार्च को FIIs ने करीब ₹4,673 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹6,333 करोड़ की खरीदारी की।
VK Vijayakumar के अनुसार, पिछले एक साल का पैटर्न फिर दिखाई दे रहा है-FIIs की बिक्री को DIIs की खरीद संतुलित कर रही है।
पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में अच्छी तेजी आई थी।
इस तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार दबाव में आ गया।
मध्य-पूर्व में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
खबरों के मुताबिक United States और Israel ने Iran पर बड़े हमले किए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है।
साथ ही Donald Trump ने कहा कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
बाजार की गिरावट में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का बड़ा योगदान रहा।
सबसे ज्यादा दबाव इन शेयरों पर रहा:
इसके अलावा HDFC Bank और ICICI Bank भी करीब 1.4% तक गिर गए।
ऑटो, आईटी, एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में 0.6% से 1.3% तक गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि:
Aakash Shah के अनुसार:
अगर निफ्टी 24,500 के ऊपर निकलता है तो 24,600–24,700 तक तेजी आ सकती है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेतों और आईटी व एफएमसीजी सेक्टर में बिकवाली के दबाव ने बाजार की तेजी को सीमित रखा। हालांकि, रियल्टी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया। सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 135.03 अंक टूटकर 75,183.36 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 4.30 अंक फिसलकर 23,654.70 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे दिन बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा। आईटी और FMCG सेक्टर पर दबाव गुरुवार के सत्र में आईटी और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों ने इन सेक्टरों में मुनाफावसूली की, जिससे टेक और उपभोक्ता कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयर टॉप लूजर्स में शामिल रहे। रियल्टी और स्मॉलकैप शेयरों में चमक बाजार की कमजोरी के बीच रियल्टी सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया। रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा, छोटे शेयरों में भी मजबूती रही और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 0.63 फीसदी चढ़कर बंद हुआ। निवेशकों की घबराहट घटी इंडिया विक्स, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है, 3.36 फीसदी गिरकर 17.82 पर आ गया। यह संकेत देता है कि निवेशकों में घबराहट कम हुई है और बाजार फिलहाल स्थिरता बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, ग्रासिम, इंडिगो, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज ऑटो और ट्रेंट के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार बुधवार को भारी बिकवाली के दबाव में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक तक कमजोर हो गया, जबकि निफ्टी 23,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:27 बजे सेंसेक्स 492.81 अंक यानी 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,708.04 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 158.91 अंक टूटकर 23,459.10 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.88 पर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी है। ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे महंगाई और चालू खाता घाटे की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि ऊंची तेल कीमतें, कमजोर रुपया और बढ़ती बॉन्ड यील्ड भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक संकेत हैं। उन्होंने मानसून के कमजोर पूर्वानुमान को भी चिंता का विषय बताया, जिससे ग्रामीण मांग और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे। निफ्टी ऑटो 1.30 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.96 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.78 प्रतिशत तक गिर गए। पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। आज कई बड़ी कंपनियां चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिनमें Grasim Industries, Apollo Hospitals Enterprise, Bosch और Ola Electric Mobility शामिल हैं। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान शानदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने और समझौते की उम्मीद जताने के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। आईटी और अदाणी समूह के शेयरों में उछाल बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 367 अंक चढ़कर 75,706 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 23,760 के पार कारोबार करता दिखा। बाजार की तेजी में आईटी कंपनियों और अदाणी समूह के शेयरों की बड़ी भूमिका रही। Infosys, HCLTech, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। वहीं, अदाणी समूह की कंपनियों में तेजी अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा Gautam Adani और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने की खबर के बाद आई। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा और समूह के शेयर मजबूत हुए। कच्चे तेल में गिरावट से मिला समर्थन वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब दो फीसदी गिरकर 109.9 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भी सोमवार को 2,813 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे बाजार की धारणा मजबूत बनी रही। निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजार भी मिश्रित संकेतों के साथ बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार में फिलहाल सकारात्मक माहौल बना हुआ है।