भारतीय शेयर बाजार ने आखिरकार छह हफ्तों से जारी गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए शानदार वापसी की है। बेहतर वैश्विक संकेतों, मजबूत होते रुपये, विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और United States–Iran तनाव में नरमी के संकेतों ने बाजार को मजबूती दी।
सप्ताह भर में BSE Sensex 4,230.70 अंक (5.77%) उछलकर 77,550.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 1,337.5 अंक (5.88%) चढ़कर 24,050.60 पर पहुंच गया। यह फरवरी 2021 के बाद बाजार का सबसे शानदार साप्ताहिक प्रदर्शन रहा।
तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही - मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया।
Nifty Midcap 100 Index करीब 8% चढ़ा, जिसमें
जैसे शेयर 15% से 19% तक उछले।
वहीं Nifty Smallcap Index 7.6% बढ़ा, जिसमें
जैसे शेयरों में 15% से 44% तक की तेजी दर्ज हुई।
इस सप्ताह सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।
इस दौरान मार्केट कैप में सबसे ज्यादा बढ़त HDFC Bank में देखने को मिली, इसके बाद
ICICI Bank,
Bajaj Finance और
Larsen & Toubro रहे।
हालांकि दूसरी ओर
Sun Pharmaceutical Industries,
Infosys और
Reliance Industries
के मार्केट कैप में गिरावट देखी गई।
विदेशी निवेशक (FII) लगातार सातवें हफ्ते बिकवाली करते रहे, हालांकि रफ्तार धीमी रही। इस दौरान उन्होंने ₹20,710 करोड़ के शेयर बेचे।
वहीं घरेलू निवेशकों (DII) ने खरीदारी जारी रखी और ₹21,602 करोड़ का निवेश किया, जिससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिला।
भारतीय रुपया लगातार दूसरे हफ्ते मजबूत हुआ और 37 पैसे बढ़कर 92.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह विदेशी निवेशकों के भरोसे और बेहतर वैश्विक संकेतों का असर माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों में अब नरमी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट दर्ज की गई है। शादी-ब्याह के सीजन और निवेश के लिहाज से यह खरीदारों के लिए राहत भरा समय माना जा रहा है। प्रमुख शहरों में सोने के भाव 11 जून 2026 को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,49,010 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,36,600 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,48,860 प्रति 10 ग्राम रही। वहीं चेन्नई में सोना सबसे महंगा रहा, जहां 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,550 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। चांदी की कीमतों में भी नरमी सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में चांदी का भाव ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम रहा। जबकि चेन्नई, भुवनेश्वर, हैदराबाद और केरल में चांदी ₹2.60 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती नजर आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते चांदी में अभी भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कीमतों में बदलाव की क्या है वजह? विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की स्थिति, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मांग का सीधा असर सोना-चांदी की कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बुलियन बाजार को प्रभावित किया है। खरीदारी से पहले रखें ये सावधानियां सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क की जांच जरूर करें और मेकिंग चार्ज की तुलना करें। वहीं चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता और पक्का बिल लेना न भूलें। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा नरमी के बीच समझदारी से खरीदारी करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
नई दिल्ली: 10 जून 2026 को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के दाम में करीब ₹4,500 की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना लगभग ₹2,900 तक सस्ता हो गया। कीमती धातुओं में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। क्यों गिरे सोना और चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है। उच्च ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बनाता है। इसी वजह से निवेशकों की बिकवाली बढ़ी और दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। MCX पर शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट चांदी: करीब ₹4,500 की गिरावट सोना: लगभग ₹2,900 सस्ता हालांकि, दिनभर के कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और अंतिम बंद भाव शुरुआती स्तर से अलग हो सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, और डॉलर की चाल सोना और चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं में फिर से तेजी भी लौट सकती है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत समेत कई एशियाई देशों तक कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि अब यह अधिक गोपनीय तरीके से की जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज मार्ग से टैंकर ट्रैफिक 90 से 95 प्रतिशत तक घट चुका है। इसके चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को ट्रैक करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। क्या है 'डार्क मोड' रणनीति? शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में संचालन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में प्रवेश करते समय अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। पहले इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान से जुड़े जहाज करते थे, लेकिन अब सामान्य वाणिज्यिक जहाज भी सुरक्षा कारणों और परिचालन जोखिमों के चलते ऐसा कर रहे हैं। वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। भारत, चीन और पाकिस्तान तक जारी है सप्लाई मौजूदा संकट के बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को तेल और LNG की आपूर्ति जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर और विशेष मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ने के कारण कई जहाज सुरक्षित मार्गों के जरिए अपनी खेप गंतव्य देशों तक पहुंचा रहे हैं। सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदें कमजोर शुरुआती अनुमान यह था कि युद्ध कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने लगेंगी। लेकिन संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में किसी समझौते के बाद भी इस मार्ग को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकेगा, क्योंकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आ चुका है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बना रहेगा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।