Google ने पेश किए Android के नए AI और स्मार्ट फीचर्स
Google ने “The Android Show: I/O Edition” इवेंट में Android यूजर्स के लिए कई बड़े फीचर्स का ऐलान किया है। कंपनी ने Quick Share, AI फीचर्स, Android Auto और नए इमोजी समेत कई अपडेट्स पेश किए, जो इस साल अलग-अलग डिवाइसेज में रोलआउट किए जाएंगे।
सबसे ज्यादा चर्चा Quick Share और Apple AirDrop के बीच आने वाली नई compatibility को लेकर हो रही है।
Google ने घोषणा की है कि अब Android का Quick Share फीचर Apple के AirDrop के साथ काम करेगा।
इसका मतलब है कि Android यूजर्स आसानी से iPhone में फाइल शेयर कर सकेंगे। शुरुआत Google Pixel 10 से होगी, जिसके बाद यह फीचर Samsung, Oppo, OnePlus, Vivo, Xiaomi और Honor के चुनिंदा डिवाइसेज में भी आएगा।
इसके अलावा यूजर्स QR Code बनाकर किसी भी iPhone में क्लाउड के जरिए फाइल भेज सकेंगे।
Google ने बताया कि अगले महीने से Android के Google Chrome में Gemini AI फीचर्स शामिल किए जाएंगे।
Gemini की मदद से यूजर्स:
Google ने “Auto Browse” नाम का AI एजेंट भी पेश किया है। यह फीचर यूजर्स की तरफ से वेबसाइट्स पर जाकर मल्टी-स्टेप काम पूरा कर सकेगा।
उदाहरण के तौर पर:
हालांकि शुरुआती चरण में यह फीचर भारत में उपलब्ध नहीं होगा।
Android Auto को भी बड़ा अपडेट मिलने जा रहा है।
अब Google Maps में Immersive Navigation फीचर मिलेगा, जिसमें:
जैसी चीजें ज्यादा स्पष्ट दिखाई देंगी।
इसके अलावा Android Auto में पहली बार YouTube वीडियो सपोर्ट भी जोड़ा जा रहा है। यूजर्स गाड़ी पार्क होने पर Full HD वीडियो देख सकेंगे।
नई सुविधाएं कई ऑटोमोबाइल ब्रांड्स की गाड़ियों में आएंगी, जिनमें शामिल हैं:
Google Android में कई नए इमोजी भी जोड़ रहा है और पुराने इमोजी का डिजाइन बदल रहा है।
साथ ही “Screen Reactions” फीचर भी लाया जा रहा है, जिससे यूजर्स स्क्रीन रिकॉर्डिंग के साथ अपना वीडियो रिएक्शन भी जोड़ सकेंगे। यह फीचर खासतौर पर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
Meta के साथ साझेदारी के तहत Android फोन्स में Instagram अपलोड के दौरान बेहतर कैमरा क्वालिटी मिलेगी।
इसमें शामिल होंगे:
जिससे सोशल मीडिया कंटेंट की क्वालिटी और बेहतर होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा। पश्चिम एशिया संकट के बाद बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दिनभर के कारोबार के बाद हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे। हालांकि, इस दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 49.74 (0.06%) अंकों की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 46.46 (0.20%) अंक मजबूत होकर 23,426.00 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 95.80 पर पहुंच गया।
भारत में सोना खरीदना अब आम लोगों के लिए और महंगा हो सकता है। केंद्र सरकार ने 13 मई को बड़ा फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया है। सरकार के इस फैसले का असर आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और ज्वेलरी इंडस्ट्री पर साफ दिखाई देने की संभावना है। नई दरों के तहत अब आयातित सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया जाएगा। इससे विदेशों से आने वाला सोना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ेगा। सरकार ने क्यों बढ़ाया टैक्स? भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में शामिल है और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। भारी मात्रा में सोने का आयात होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और चालू खाता घाटा (CAD) भी प्रभावित होता है। सरकार का मानना है कि अगर सोने की खरीद कम होगी तो विदेशों में जाने वाला पैसा बचेगा और रुपये को मजबूती मिल सकती है। हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी सरकार के लिए चिंता का विषय रही है। ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार गोल्ड इंपोर्ट को नियंत्रित करना चाहती है। ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा असर टैक्स बढ़ने का सबसे बड़ा असर ज्वेलरी की कीमतों पर पड़ेगा। पहले से रिकॉर्ड स्तर पर चल रहे सोने और चांदी के दाम अब और ऊपर जा सकते हैं। शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में खरीदारी करने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कीमतों के कारण बाजार में मांग कमजोर पड़ सकती है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार और छोटे खरीदार सोने की खरीद को टाल सकते हैं। क्या फिर बढ़ेगी गोल्ड स्मगलिंग? इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों ने सरकार के इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी से अवैध तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। साल 2024 में जब सरकार ने ड्यूटी घटाई थी, तब गोल्ड स्मगलिंग के मामलों में कमी देखने को मिली थी। लेकिन अब टैक्स बढ़ने से वैध आयात महंगा हो जाएगा, जिससे तस्करों को ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इससे ग्रे मार्केट फिर से सक्रिय होने का खतरा जताया जा रहा है। पीएम मोदी ने भी की थी अपील हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सोने के आयात में देश का बड़ा पैसा विदेश चला जाता है। प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” पर जोर देते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने की बात कही थी, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिल सके। अब आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें ऊंची रहीं, तो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना और कठिन हो सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। खासतौर पर चांदी के दाम में जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जबकि सोना भी मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों की नजर आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और सर्राफा बाजार के भाव पर बनी रही। MCX पर सोने-चांदी के ताजा भाव MCX पर सुबह करीब 9:58 बजे 5 जून डिलीवरी वाला सोना 407 रुपये की बढ़त के साथ 1,54,070 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इसमें 0.26 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 1,54,243 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 1,53,851 रुपये रहा। वहीं, 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में जबरदस्त तेजी देखी गई। चांदी का भाव 3,713 रुपये बढ़कर 2,82,024 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,82,755 रुपये प्रति किलोग्राम का इंट्राडे हाई भी छुआ। सोमवार के मुकाबले मजबूत शुरुआत सोमवार को सोना 1,53,663 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को इसकी शुरुआत 1,53,999 रुपये पर हुई। दूसरी ओर, चांदी सोमवार को 2,78,311 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी और मंगलवार को करीब 2,000 रुपये की तेजी के साथ 2,80,229 रुपये पर खुली। सर्राफा बाजार में भी चांदी चमकी अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोमवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी 3,700 रुपये महंगी होकर 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। हालांकि, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में 600 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया था।