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Long-Term Investing Beats Market Timing

Share Market Investment: बाजार को टाइम करने की कोशिश पड़ सकती है महंगी, 21 साल के आंकड़ों ने बताया निवेश का बड़ा मंत्र

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Investment chart showing long-term stock market growth and why staying invested beats trying to time the market.
Long Term Stock Market Investment Tips

Share Market Investment Tips: शेयर बाजार में अक्सर निवेशक यह सोचते हैं कि गिरावट में खरीदें और तेजी आने पर बेच दें। लेकिन क्या वास्तव में मार्केट टाइमिंग से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है? एक नए अध्ययन के मुताबिक इसका जवाब 'नहीं' है। आंकड़े बताते हैं कि बाजार के कुछ बेहतरीन दिनों से चूकना आपके लंबे समय के रिटर्न को काफी कम कर सकता है।

21 साल के अध्ययन में क्या सामने आया?

Abakkus Mutual Fund द्वारा अप्रैल 2005 से मई 2026 तक के 21 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें Nifty 50 TRI, Nifty Midcap 150 TRI और Nifty Smallcap 250 TRI के प्रदर्शन का अध्ययन किया गया।

रिपोर्ट में पाया गया कि जिन निवेशकों ने पूरे समय बाजार में निवेश बनाए रखा, उन्हें सबसे अधिक फायदा मिला।

पूरे समय निवेशित रहने पर औसत रिटर्न

इंडेक्स

औसत रिटर्न

Nifty 50 TRI

13.6%

Nifty Midcap 150 TRI

17.18%

Nifty Smallcap 250 TRI

15.8%

सिर्फ 10 अच्छे दिन मिस किए तो कितना असर?

यदि कोई निवेशक बाजार के केवल 10 सबसे अच्छे कारोबारी दिनों में निवेशित नहीं रहा, तो उसके रिटर्न में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

इंडेक्स

रिटर्न

Nifty 50 TRI

9.67%

Nifty Midcap 150 TRI

13.58%

Nifty Smallcap 250 TRI

12.44%

50 अच्छे दिन छूटे तो रिटर्न लगभग खत्म

यदि निवेशक बाजार के 50 सबसे अच्छे दिन मिस कर देता है, तो रिटर्न और भी तेजी से घट जाता है।

इंडेक्स

रिटर्न

Nifty 50 TRI

0.89%

Nifty Midcap 150 TRI

5.65%

Nifty Smallcap 250 TRI

4.87%

मार्केट टाइमिंग क्यों मुश्किल है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केट टाइमिंग आसान नहीं है, क्योंकि इसमें दो फैसले बिल्कुल सही होने चाहिए—

  • कब बाजार में निवेश करना है।
  • कब निवेश निकालना है।

यदि इनमें से कोई एक फैसला भी गलत हो जाए, तो लंबे समय का रिटर्न काफी प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

Money Honey Financial Services के एमडी और सीईओ अनूप भैया के अनुसार, मार्केट टाइमिंग करने वाले निवेशकों को एंट्री और एग्जिट दोनों सही समय पर करने होते हैं। इनमें से एक भी निर्णय गलत होने पर कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा छूट सकता है।

वहीं SIFT Capital के फाउंडर विनीत नंदा का कहना है कि निवेशक अक्सर यह मान लेते हैं कि वे बाजार की चाल को समझ सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बाजार हमेशा तर्क या अनुमान के मुताबिक नहीं चलता। यही कारण है कि लॉन्ग टर्म निवेश की रणनीति अधिक प्रभावी मानी जाती है।

लॉन्ग टर्म निवेश क्यों बेहतर माना जाता है?

  • कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है।
  • बाजार की अस्थायी गिरावट का असर कम होता है।
  • बार-बार खरीद-बिक्री की जरूरत नहीं पड़ती।
  • भावनात्मक फैसलों से बचाव होता है।
  • लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Oil Price Surge
कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारत के आयात बिल और महंगाई पर बढ़ी चिंता

मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल देखने को मिला।   भारत के आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव   भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे चालू खाते के घाटे (CAD) और सरकारी वित्तीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।   महंगाई और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में यह तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, लॉजिस्टिक्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।   सरकार और बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर   विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल बाजार की नजर मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में और उछाल आ सकता है। वहीं, सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर महंगाई के असर को कम करने के लिए कदम उठा सकती है।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
Pharma Stocks

अमेरिका के नए फार्मा टैरिफ से दवा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज

Stock Market Crash

Stock Market: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक टूटा; निफ्टी 24,050 के नीचे

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Share Market Investment: बाजार को टाइम करने की कोशिश पड़ सकती है महंगी, 21 साल के आंकड़ों ने बताया निवेश का बड़ा मंत्र

Indian stock market falls sharply as Sensex drops over 600 points after Donald Trump's tariff announcement impacts pharma stocks.
Share Market Crash: ट्रंप के टैरिफ ऐलान से बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 600 अंक टूटा, फार्मा शेयरों में भारी बिकवाली

Share Market Crash Today: घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी दिन भी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,000 अंक के करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल सुबह करीब 9:40 बजे: सेंसेक्स: 76,894.82 अंक (575.29 अंक या 0.74% की गिरावट) निफ्टी 50: 24,028.55 अंक (159.15 अंक या 0.66% की गिरावट) सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? गिरावट वाले प्रमुख शेयर: इंडिगो (InterGlobe Aviation) सन फार्मा एक्सिस बैंक एसबीआई इन्फोसिस टेक महिंद्रा एचडीएफसी बैंक आईसीआईसीआई बैंक टीसीएस बजाज फिनसर्व भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) वहीं कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली: मारुति सुजुकी महिंद्रा एंड महिंद्रा टाइटन हिंदुस्तान यूनिलीवर फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव ट्रंप के टैरिफ प्लान का सबसे ज्यादा असर फार्मा सेक्टर पर पड़ा। प्रमुख गिरावट: सन फार्मा: 2% तक कमजोर सिप्ला: करीब 2.5% की गिरावट ल्यूपिन: लगभग 2.5% टूटा डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज: 1% से अधिक गिरावट जाइडस, एल्केम और टोरेंट फार्मा में भी 2% तक की कमजोरी बाजार क्यों टूटा? अमेरिका ने घोषणा की है कि 2028 से आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाकर 200% तक किया जा सकता है। भारतीय दवा कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। ऐसे में निवेशकों को आशंका है कि इस फैसले से फार्मा कंपनियों की कमाई और निर्यात पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से फार्मा शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। अन्य सेक्टरों पर भी असर फार्मा के अलावा: निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स भी लाल निशान में बैंकिंग और आईटी शेयरों में भी बिकवाली इसके अलावा रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली और डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा हल्की गिरावट के साथ खुली। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका की टैरिफ नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बाजार की नजर रहेगी। यदि टैरिफ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो फार्मा सेक्टर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
NSE launches the Nifty 500 Ahimsa Index to promote ethical investing based on non-violence and responsible business practices.

NSE ने लॉन्च किया Nifty 500 Ahimsa Index, रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग शेयरों की नो एंट्री, जानें क्या है नया इंडेक्स

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सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल

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गिरावट के साथ बंद  हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 238 अंक फिसलकर 77,470 पर बंद, निफ्टी 24,188 पर

Reserve Bank of India
RBI के विशेष फॉरेक्स उपायों से 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह, रुपये को सहारा देने की कोशिश तेज

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए उठाए गए विशेष कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके हालिया फॉरेक्स उपायों के जरिए अब तक 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना है।   विशेष फॉरेक्स योजनाओं से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह   RBI ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय लागू किए थे। इनमें विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं और बैंकों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल रहे, जिनके चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है।   रुपये को मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे रुपये पर दबाव कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है।   वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राहत   विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद RBI के कदमों ने भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा दिया है।   आगे भी स्थिति पर RBI की नजर   RBI ने संकेत दिया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
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जून में भारत के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की वृद्धि 5.3% रही, पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंची रफ्तार

Pankaj Chaudhary Statement

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जून में भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में 26% से अधिक की बढ़ोतरी, सोने के आभूषणों की मांग से मिला बड़ा सहारा

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CBI investigation into the NEET-UG paper leak case involving a doctor from Latur
राष्ट्रीय

NEET-UG पेपर लीक मामला: CBI का बड़ा दावा, लातूर के डॉक्टर ने 5 लाख लेकर परीक्षा से पहले दिखाया केमिस्ट्री का पेपर

kalpana जुलाई 17, 2026 0

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