स्वास्थ्य

Arthritis Drug Study Highlights Bone Density Concerns

Rheumatoid Arthritis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा से हड्डियों पर असर, नई स्टडी में खुलासा

surbhi मई 12, 2026 0
Rheumatoid arthritis patient consulting doctor about steroid treatment and bone density health risks
Rheumatoid Arthritis Drug Bone Density Study

एक नई रिसर्च में सामने आया है कि Rheumatoid Arthritis के इलाज में इस्तेमाल होने वाले लो-डोज ग्लूकोकॉर्टिकोइड ट्रीटमेंट से रीढ़ की हड्डी यानी लम्बर स्पाइन की बोन डेंसिटी पर असर पड़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि इससे फ्रैक्चर का खतरा सामान्य इलाज की तुलना में ज्यादा नहीं पाया गया।

यह निष्कर्ष एक बड़े मेटा-एनालिसिस में सामने आया है, जिसमें कई क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा का विश्लेषण किया गया।

क्या है ग्लूकोकॉर्टिकोइड ट्रीटमेंट?

ग्लूकोकॉर्टिकोइड दवाएं आमतौर पर Rheumatoid Arthritis के मरीजों में सूजन और दर्द को नियंत्रित करने के लिए दी जाती हैं। इन्हें अक्सर Disease-Modifying Antirheumatic Drugs (DMARDs) के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि लंबे समय से यह सवाल बना हुआ था कि इन दवाओं का हड्डियों की सेहत पर कितना असर पड़ता है।

स्टडी में क्या पाया गया?

रिसर्चर्स ने 1,112 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें उन मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें प्रतिदिन 7.5 mg या उससे कम प्रेडनिसोन समकक्ष ग्लूकोकॉर्टिकोइड दिया गया था।

दो साल तक किए गए अध्ययन में पाया गया कि ग्लूकोकॉर्टिकोइड लेने वाले मरीजों में लम्बर स्पाइन की बोन मिनरल डेंसिटी में हल्की कमी देखी गई।

हालांकि फीमर यानी जांघ की हड्डी पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया।

फ्रैक्चर का खतरा नहीं बढ़ा

स्टडी के दौरान कुल 35 मरीजों में क्लिनिकल फ्रैक्चर दर्ज किए गए, लेकिन ग्लूकोकॉर्टिकोइड ट्रीटमेंट लेने वाले और सामान्य इलाज पाने वाले मरीजों के बीच फ्रैक्चर के खतरे में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।

रिसर्चर्स का कहना है कि बोन लॉस की गंभीरता हर मरीज में अलग हो सकती है और यह व्यक्ति की पहले से मौजूद ऑस्टियोपोरोसिस रिस्क पर भी निर्भर करती है।

आगे और रिसर्च की जरूरत

विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में लंबी अवधि के प्रभावों को समझने और हड्डियों को नुकसान से बचाने के उपायों पर और रिसर्च की जरूरत है।

डॉक्टरों का मानना है कि इलाज के फायदे और संभावित जोखिमों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर राहत मिलने के साथ हड्डियों की सेहत भी सुरक्षित रह सके।

मरीजों के लिए क्या है जरूरी?

  • नियमित बोन डेंसिटी जांच
  • कैल्शियम और विटामिन D का संतुलित सेवन
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करना
  • ऑस्टियोपोरोसिस रिस्क का समय-समय पर मूल्यांकन
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

View more
Watermelon eating mistakes
तरबूज खाते समय न करें ये गलतियां, सेहत और पाचन पर पड़ सकता है बुरा असर

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी, विटामिन्स और जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखने और ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि तरबूज खाने का सही तरीका जानना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ चीजों के साथ इसका सेवन पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है।   दूध और तरबूज का कॉम्बिनेशन हो सकता है नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज और दूध का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए। तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, जबकि दूध को भारी माना जाता है। दोनों का एक साथ सेवन गैस, पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है।   दही के साथ भी न करें सेवन कई लोग फलों के साथ दही खाना पसंद करते हैं, लेकिन तरबूज के साथ दही खाना पाचन पर असर डाल सकता है। इससे पेट भारी लगना, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर पाचन वाले लोगों को इस कॉम्बिनेशन से बचने की सलाह दी जाती है।   तली-भुनी चीजों के साथ न खाएं तरबूज समोसा, पकौड़े, पराठे और अन्य डीप फ्राइड फूड्स के साथ तरबूज खाना भी नुकसानदायक माना जाता है। तली-भुनी चीजें पचने में ज्यादा समय लेती हैं, जबकि तरबूज जल्दी पच जाता है। इससे पेट में गैस और गड़बड़ी की समस्या हो सकती है।   कोल्ड ड्रिंक और खट्टे फलों से भी रखें दूरी तरबूज के साथ कोल्ड ड्रिंक या आइस्ड ड्रिंक्स का सेवन शरीर पर ज्यादा ठंडा असर डाल सकता है, जिससे सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी हो सकती है। वहीं संतरा, मौसंबी और अनानास जैसे खट्टे फलों के साथ तरबूज खाने से पेट में जलन, गैस और अपच की शिकायत हो सकती है।

Anjali Kumari मई 12, 2026 0
Coconut water benefits

खाली पेट नारियल पानी पीना कितना फायदेमंद? जानिए इसके हेल्थ बेनिफिट्स और जरूरी सावधानियां

Rheumatoid arthritis patient consulting doctor about steroid treatment and bone density health risks

Rheumatoid Arthritis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा से हड्डियों पर असर, नई स्टडी में खुलासा

AI-powered medical analysis system assisting doctors in detecting ovarian cancer and women’s reproductive health conditions

AI से ओवरी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद, रिसर्च में सामने आए बड़े नतीजे

Tanning removal
गर्मियों में हाथ-पैरों की टैनिंग से पाएं छुटकारा, घर के आसान उपाय लौटाएंगे निखार

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप और गर्म हवाएं सिर्फ चेहरे ही नहीं, बल्कि हाथों और पैरों की खूबसूरती भी प्रभावित करती हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से स्किन टैन हो जाती है, जिससे त्वचा बेजान, रूखी और काली दिखने लगती है। अक्सर लोग चेहरे की देखभाल तो करते हैं, लेकिन हाथ-पैरों की अनदेखी कर देते हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी त्वचा की खोई चमक वापस ला सकते हैं। खास बात यह है कि इन उपायों के लिए आपको महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।   नींबू और शहद से दूर होगी टैनिंग हाथ और पैरों की टैनिंग हटाने के लिए नींबू और शहद का मिश्रण बेहद असरदार माना जाता है। नींबू में मौजूद नेचुरल ब्लीचिंग गुण त्वचा का कालापन कम करने में मदद करते हैं, जबकि शहद स्किन को मुलायम और मॉइस्चराइज्ड बनाए रखता है। इसके लिए एक चम्मच नींबू के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। करीब 15 से 20 मिनट बाद साफ पानी से धो लें। नियमित इस्तेमाल से त्वचा साफ और चमकदार नजर आने लगती है।   दही-बेसन का पैक देगा नैचुरल ग्लो दही और बेसन का फेस पैक स्किन रिपेयर करने में काफी मददगार माना जाता है। दही त्वचा को ठंडक देता है, जबकि बेसन डेड स्किन हटाने में मदद करता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन, एक चम्मच दही और थोड़ी हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे टैनिंग वाली जगह पर लगाकर सूखने दें। बाद में हल्के हाथों से रगड़ते हुए धो लें। इससे त्वचा की गंदगी साफ होती है और धीरे-धीरे टैनिंग कम होने लगती है।   आलू और खीरे से मिलेगी ठंडक और चमक आलू का रस भी टैनिंग कम करने में फायदेमंद माना जाता है। आलू में मौजूद एंजाइम त्वचा का रंग हल्का करने में मदद करते हैं। वहीं खीरे का रस और गुलाबजल स्किन को ठंडक देकर जलन और ड्राइनेस कम करते हैं। इन घरेलू उपायों को नियमित अपनाने से हाथ-पैर फिर से मुलायम, साफ और चमकदार नजर आने लगते हैं।

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
Summer fruits like mangoes, watermelon and litchis displayed with healthy eating concept

आम, तरबूज और लीची खाने वालों के लिए जरूरी खबर! डॉक्टर ने बताया कितना फल खाना हो सकता है नुकसानदायक

Medical officials monitoring hantavirus outbreak after Indian crew members quarantined in Netherlands

हंटावायरस को लेकर बढ़ी चिंता: नीदरलैंड में क्वारंटीन किए गए 2 भारतीय, जानें क्यों खतरनाक मानी जा रही लंबी incubation period

Healthy anti-inflammatory summer drinks with turmeric, ginger, green tea and chia seeds

शरीर की सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, गर्मियों में रोज पीना हो सकता है फायदेमंद

Refreshing anti-inflammatory drinks including turmeric tea, green tea and chia cucumber detox water on table
Anti-Inflammatory Drinks: दिनभर शरीर को हाइड्रेट और हेल्दी रखने के लिए ये 5 ड्रिंक्स हो सकते हैं फायदेमंद

आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में थकान, ब्लोटिंग, लो एनर्जी और स्किन ब्रेकआउट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। कई बार ये शरीर में बढ़ती सूजन यानी inflammation के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें, जैसे पर्याप्त पानी पीना और सही ड्रिंक्स का चुनाव करना, शरीर को अंदर से सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर ऐसे पेय जिनमें अदरक, हल्दी, ग्रीन टी या चिया सीड्स जैसे तत्व हों, शरीर की प्राकृतिक anti-inflammatory प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इन ड्रिंक्स को बनाने के लिए महंगे इंग्रीडिएंट्स या जटिल रेसिपी की जरूरत नहीं होती। किचन में मौजूद साधारण चीजों से इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin को प्राकृतिक anti-inflammatory तत्व माना जाता है। वहीं काली मिर्च इसके अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है। सामग्री 1 कप पानी आधा चम्मच हल्दी पाउडर या ताजी हल्दी आधा चम्मच कद्दूकस किया अदरक एक चुटकी काली मिर्च 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) थोड़ा दूध (वैकल्पिक) बनाने का तरीका पानी उबालकर उसमें हल्दी, अदरक और काली मिर्च डालें। 5 से 7 मिनट तक पकने दें। छानकर कप में निकालें और चाहें तो शहद या दूध मिलाएं। इसे गर्मागर्म पिएं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को पाचन और सूजन कम करने में मददगार माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को तरोताजा महसूस कराता है। सामग्री डेढ़ कप पानी 1 इंच अदरक के टुकड़े आधे नींबू का रस 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) बनाने का तरीका अदरक को पानी में 5-10 मिनट तक उबालें। फिर गैस बंद करके उसमें नींबू रस और शहद मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. पुदीना वाली ग्रीन टी ग्रीन टी में antioxidants पाए जाते हैं, जबकि पुदीना इसे और ज्यादा refreshing बना देता है। सामग्री 1 ग्रीन टी बैग या 1 चम्मच ग्रीन टी 1 कप गर्म पानी 4-5 पुदीना पत्तियां 1 नींबू स्लाइस (वैकल्पिक) बनाने का तरीका ग्रीन टी और पुदीना को 2-3 मिनट तक गर्म पानी में डालकर रखें। फिर छान लें। चाहें तो नींबू मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 4. टार्ट चेरी स्प्रिट्जर टार्ट चेरी जूस को रिकवरी और शरीर की सूजन कम करने से जोड़कर देखा जाता है। सामग्री आधा कप बिना शक्कर वाला टार्ट चेरी जूस आधा कप स्पार्कलिंग वॉटर बर्फ थोड़ा नींबू रस बनाने का तरीका गिलास में बर्फ डालें, फिर चेरी जूस और स्पार्कलिंग वॉटर मिलाएं। ऊपर से नींबू रस डालकर हल्के से मिक्स करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया वॉटर यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकती है। सामग्री 2 कप पानी 5-6 खीरे के स्लाइस 5 पुदीना पत्तियां 1 चम्मच चिया सीड्स चौथाई नींबू का रस बनाने का तरीका पानी में खीरा, पुदीना और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट तक छोड़ दें ताकि चिया फूल जाए। फिर नींबू रस मिलाकर पिएं। क्यों जरूरी है consistency? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोई भी ड्रिंक जादुई इलाज नहीं होती। लेकिन रोजाना sugary drinks की जगह ज्यादा पौष्टिक और hydrating विकल्प चुनना लंबे समय में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। छोटे लेकिन लगातार किए गए बदलाव अक्सर बड़े wellness trends से ज्यादा असरदार साबित होते हैं।  

surbhi मई 9, 2026 0
Doctor checking blood pressure of heart patient during cardiovascular health assessment in hospital

हाई Pulse Pressure बन सकता है दिल की बीमारी का बड़ा संकेत, नई स्टडी में सामने आया गंभीर खतरा

Papaya Benefits

सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत और खूबसूरती का भी खजाना है पपीता

Sugary Drinks Risk

मीठी ड्रिंक्स से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताए बचाव के उपाय

0 Comments