रांची। रांची में ईद और सरहुल पर्व को लेकर शनिवार को विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है। सुबह 6 बजे से रात 12:30 बजे तक बड़े वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं दोपहर 12 बजे से जुलूस समाप्त होने तक कई प्रमुख मार्गों पर छोटे वाहनों के परचालन पर भी रोक रहेगी।
शोभायात्रा कांके रोड, रातू रोड और बोड़ेया रोड होते हुए रेडियम चौक, शहीद चौक, अलबर्ट एक्का चौक और मेन रोड के रास्ते सुजाता चौक पहुंचेगी। इसके बाद मुंडा चौक होते हुए सिरमटोली स्थित सरना स्थल तक जाएगी।
एसएसपी आवास चौक से कचहरी चौक, जाकिर हुसैन पार्क से कमिश्नर चौक, अपर बाजार से शहीद चौक, चडरी तालाब से अलबर्ट एक्का चौक, पुरुलिया रोड से सुजाता चौक और चर्च रोड से मेन रोड तक आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
हरमू बाइपास रोड, आंबेडकर चौक से राजेंद्र चौक और मेन रोड के कई हिस्सों में ट्रैफिक बंद रहेगा। लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना होगा।
सैनिक मार्केट, काली मंदिर चौक, अलबर्ट एक्का चौक और हरमू बाइपास के पास पार्किंग की सुविधा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड के कॉलेज अब डिजिटल और स्मार्ट होंगे। राज्य में उच्च शिक्षा को डिजिटल बनाने की पहल सरकार ने कर दी है। राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अब पढ़ाई के लिए Physics Wallah, edX, Unacademy जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही पहले चरण में 100 कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को मिलेगी मान्यता उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की योजना के तहत छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल विकल्प भी मिलेंगे। स्वयं पोर्टल की सामग्री के अलावा थर्ड पार्टी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी पढ़ाई की सुविधा दी जाएगी। 100 कॉलेजों में बनेंगे स्मार्ट क्लासरूम पहले चरण में इस वित्तीय वर्ष के भीतर 100 कॉलेजों में डिजिटल क्लासरूम बनाए जाएंगे। राजकीय विश्वविद्यालयों के विभागों और अंगीभूत कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं से लैस कक्षाएं तैयार की जाएंगी, जिससे पढ़ाई को आसान और इंटरैक्टिव बनाया जा सके। हर विश्वविद्यालय में डिजिटल स्टूडियो डिजिटल लर्निंग को मजबूत करने के लिए सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक-एक डिजिटल स्टूडियो स्थापित किया जाएगा। यहां वीडियो लेक्चर तैयार होंगे और ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी मिलेगी। यह व्यवस्था एक तरह से “सिंगल स्टॉप” प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगी। जनजातीय भाषाओं पर भी फोकस राज्य सरकार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री तैयार करने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए संबंधित शिक्षकों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि इन विषयों में भी गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार हो सके। पुस्तकालय बनेगी डिजिटल लाइब्रेरी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पुस्तकालयों को भी डिजिटल रूप में अपग्रेड किया जाएगा। पुरानी किताबों को डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे छात्र ऑनलाइन भी इनका उपयोग कर सकें। ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम होगा अनिवार्य शिक्षकों, कर्मियों और छात्रों की उपस्थिति के लिए डिजिटल बायोमेट्रिक सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। सभी संस्थानों में इसे अनिवार्य किया जाएगा, जिससे उपस्थिति की ऑनलाइन निगरानी और ट्रैकिंग की जा सकेगी।
रांची। राजधानी रांची में अब गैस की होम डिलीवरी सुचारू ढंग से होगी। इसे लेकर 8 एजेंसियों के लिए रूट चार्ट जारी किया गया है। रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत और होम डिलीवरी की परेशानी को लेकर डीसी और गैस कंपनियों के बीच हुई अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बैठक में साफ निर्देश दिया कि हर हाल में उपभोक्ताओं तक होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए, वरना संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस निर्देश का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। कई गैस एजेंसियों ने होम डिलीवरी व्यवस्था को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए वितरण क्षेत्र के रूट भी जारी किए गए हैं। 8 एजेंसियों ने 43 रूट जारी किए रांची की 8 गैस एजेंसियों ने सिलेंडर वितरण के लिए 43 रूट घोषित किए हैं। इन रूटों पर मंगलवार को गैस सिलेंडर का वितरण किया जा रहा है। इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के प्रतिनिधि रवि भट्ट ने बताया कि मंगलवार को अमरावती कॉलोनी, कृष्णापुरी, द्वारकापुरी और चुटिया क्षेत्र में सिलेंडर बांटे जाएंगे। इन इलाकों में होगी होम डिलीवरी शांतनु गैस एजेंसीः कांटाटोली पीस रोड खटंगा क्षेत्र डुमरदगा बूटी बस्ती बीआईटी विकास प्रताप गैस एजेंसीः इटकी रोड अरगोड़ा क्षेत्र कटहल मोड़ दलादली ललगुटुवा जयंत गैस एजेंसीः लालपुर लोहरा कोचा पथलकुदुवा पीस रोड कुम्हार टोली इस्लाम नगर माधुरी गैस एजेंसीः रातू कमड़े फ्रेंड कॉलोनी रवि स्टील रातू चट्टी सिमलिया अदिति गैस एजेंसीः कोकर चूना भट्ठा बैंक कॉलोनी दीपाटोली शिवशक्ति नगर तिरिल खोरहाटोली एसके गैस एजेंसीः बरियातू रोड के विभिन्न इलाके मोरहाबादी हरिहर सिंह रोड चिरौंदी इंडेन गैस एजेंसी करमटोली लोअर वर्दवान कंपाउंड एदलहातू मोरहाबादी रेडियम रोड डिप्टी पाड़ा डंगरा टोली किशोरगंज हरमू रोड बैकलॉग खत्म करना अब भी बड़ी चुनौती हालांकि व्यवस्था में सुधार की शुरुआत हुई है, लेकिन कंपनियों के सामने अभी भी लंबित बुकिंग (बैकलॉग) खत्म करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कंपनी सूत्रों के अनुसार रांची में अभी भी इंडेन गैस का करीब 65 हजार बैकलॉग बना हुआ है। गैस कंपनियां पहले से बुकिंग कर चुके उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। इस कारण नई बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। एजेंसियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बैकलॉग अधिक है, वहां डीएसी नंबर मिलने में एक-दो दिन की देरी हो रही है। हालांकि उपभोक्ताओं को वास्तविक समय की जानकारी देकर व्यवस्था को संतुलित करने की कोशिश की जा रही है। कुछ एजेंसियों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नही गैस वितरण की व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। कई एजेंसियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके वितरण स्थल और रूट को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इन एजेंसियों में प्रमुख नाम हैं: देवी गैस उरांव गैस आनंद गैस वैष्णवी गैस एजेंसी इसके अलावा इंडेन से जुड़ी 4 से 5 एजेंसियां अब भी नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रांची। मंईयां सम्मान योजना में बड़ा अपडेट आया है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले में मार्च माह की राशि का भुगतान कर दिया गया है। जिले की 3 लाख 89 हजार 296 महिलाओं के बैंक खातों में 2500 रुपए प्रति लाभुक की दर से आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए कुल 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार रुपए भेजे गए हैं। पारदर्शी तरीके से किया गया भुगतान जिला प्रशासन के अनुसार, यह भुगतान सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में पारदर्शी तरीके से किया गया। कांके में सबसे अधिक 31,548 लाभुकों को राशि मिली, जबकि सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 और मांडर में 23,079 लाभुकों को लाभ मिला। सिल्ली (21,120), बेड़ो (20,571) और चान्हो (19,699) भी प्रमुख लाभुक क्षेत्रों में शामिल हैं। प्रखंडों व शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति अनगड़ा में 16,701 लाभुक, अरगोड़ा शहरी क्षेत्र में 13,360, बड़गाईं शहरी क्षेत्र में 9,683, बेड़ो में 20,571, बुंडू में 8,440, बुंडू नगर पंचायत में 3,502, बुढ़मू में 17,816, चान्हो में 19,699, हेहल शहरी क्षेत्र में 15,245, इटकी में 10,334, कांके में 31,548, कांके शहरी क्षेत्र में 1,313, खलारी में 9,580, लापुंग में 11,342, माण्डर में 23,079, नगड़ी में 17,856, नगड़ी शहरी क्षेत्र में 8,250, नामकुम में 17,847, नामकुम शहर में 9,489, ओरमांझी में 18,147, राहे में 9,522, रातू में 18,545, सिल्ली में 21,120, सोनाहातू में 13,036, तमाड़ में 18,491 तथा सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 लाभुकों को भुगतान हुआ।