झारखंड

रांची में अतिक्रमण पर सख्त हुआ नगर निगम, छोटा तालाब और सरकारी जमीनों पर चला निरीक्षण अभियान

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Encroachment Drive Ranchi
Encroachment Drive Ranchi

रांची। रांची नगर निगम ने शहर में अतिक्रमण हटाने और सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने शुक्रवार को भू-संपदा शाखा के अधिकारियों के साथ वार्ड-22 और वार्ड-4 के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क पर किए गए अतिक्रमण को जल्द हटाने और चिरौंदी स्थित सरकारी भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

 

अवैध कब्जे वाली जमीन का होगा इन-सीटू डेवलपमेंट


निरीक्षण की शुरुआत वार्ड-22 स्थित अमन कम्युनिटी हॉल के पास निगम की करीब 34 डिसमिल सरकारी भूमि से हुई। जांच में पाया गया कि इस जमीन पर अवैध रूप से झुग्गी-झोपड़ियां बनाकर कब्जा किया गया है। अपर नगर आयुक्त ने अधिकारियों को इस भूमि के लिए इन-सीटू डेवलपमेंट (स्थल पर पुनर्विकास) का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि जमीन का उपयोग जनहित और शहर के विकास कार्यों के लिए किया जा सके।

 

छोटा तालाब के आसपास चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान


निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क किनारे अतिक्रमण भी पाया गया। इस पर नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम को जल्द विशेष अभियान चलाकर पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी।

 

चिरौंदी में बनेगी जनउपयोगी विकास योजना


निरीक्षण के क्रम में वार्ड-4 के चिरौंदी स्थित ओल्ड एज होम के पास लगभग एक एकड़ जीएम-खास सरकारी भूमि का भी जायजा लिया गया। अपर नगर आयुक्त ने अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार की जाए। इसमें सामुदायिक सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

 

निरीक्षण के दौरान संबंधित वार्ड पार्षद, नगर प्रबंधक, भू-संपदा शाखा तथा अभियंत्रण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। नगर निगम का कहना है कि शहर में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

View more
Sonam Wangchuk Protest
सोनम वांगचुक के समर्थन में आए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी

रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। इससे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता और विधायक जयराम महतो नई दिल्ली जाकर वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। अब इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के अनशन को लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताया है।   अपने फेसबुक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा कि सोनम वांगचुक का अनशन केवल व्यक्तिगत मांगों का आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्र और देश के युवाओं के हितों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह और अनशन का मार्ग अपनाया था तथा वांगचुक उसी गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण कर रहे हैं।   'सरकार का पहला दायित्व संवाद और स्वास्थ्य की रक्षा' डॉ. अंसारी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि उसकी आत्मा होती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर अनशन करता है, तो उसे किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के नजरिए से नहीं, बल्कि एक नागरिक और राष्ट्रभक्त के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी अनशनकारी की बात सुनना, उसके स्वास्थ्य की रक्षा करना और संवाद का रास्ता खोलना है।   स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक ताकत विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सुनने और उसका समाधान खोजने में होती है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, उसकी संवेदनशीलता इस बात से आंकी जाती है कि वह सबसे कमजोर और पीड़ित नागरिक के साथ कैसा व्यवहार करती है।   डॉ. इरफान अंसारी ने कहा  डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन मानवीय मूल्य हमेशा स्थायी रहते हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद, सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की। उनके अनुसार, सरकार को ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिससे न किसी अनशनकारी का जीवन संकट में पड़े और न ही लोकतंत्र की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न लगे।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Hazaribagh Central Jail

हजारीबाग में जल्द शुरू होगा हाई सिक्योरिटी जेल

Ajay Mahto

अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद पत्नी बबीता संथाली ने किया सरेंडर, नक्सल संगठन को दो दिन में दूसरा बड़ा झटका

Innobox

12वीं पास छात्र का AI इनोवेशन बनेगा हाथियों से सुरक्षा की नई ढाल

Rat Menace RIMS
रिम्स में चूहों का आतंक, दवाओं से लेकर टेलीफोन की तार कुतरीं

रांची। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चूहों का बढ़ता आतंक अस्पताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालात ऐसे हैं कि चूहे अस्पताल के कंट्रोल रूम, निदेशक कार्यालय, रेडियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी विभाग, केंद्रीय किचन, स्टोर रूम और बीएसएनएल टेलीफोन नेटवर्क तक में नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई विभागों में टेलीफोन के तार कुतर दिए गए हैं, जबकि मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज, ग्लव्स और अन्य चिकित्सा सामग्री भी क्षतिग्रस्त हो रही है। लगातार बढ़ती समस्या को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने करीब डेढ़ वर्ष बाद फिर से पेस्ट कंट्रोल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।   ऑन्कोलॉजी विभाग में दवाएं और मेडिकल सामग्री हुई खराब हाल ही में ऑन्कोलॉजी विभाग के चौथे तल स्थित स्टोर रूम की जांच के दौरान कई कार्टन चूहों द्वारा कुतरे हुए मिले। इनमें सिरिंज, ग्लव्स और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री शामिल थी। विभाग की सिस्टर इंचार्ज के अनुसार, खराब हो चुकी सामग्री हटाकर दोबारा नई सामग्री मंगानी पड़ी। उन्होंने बताया कि स्टोर रूम में चूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन वैकल्पिक भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से महंगी दवाओं और उपकरणों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति अन्य विभागों के स्टोर रूम में भी देखने को मिल रही है।   संचार व्यवस्था और किचन भी चूहों के निशाने पर चूहों ने अस्पताल की संचार व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। कंट्रोल रूम और बीएसएनएल नेटवर्क बॉक्स में केबल तथा टेलीफोन तार कुतरने से कई फोन लाइनें बंद हो गई हैं। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में परेशानी हो रही है और बार-बार मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। वहीं केंद्रीय किचन में रखे राशन और खाद्य सामग्री को भी चूहे लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निदेशक कार्यालय में भी फाइलों और अन्य सामान को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं।   दो साल से नहीं हुआ नियमित पेस्ट कंट्रोल अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों से नियमित पेस्ट कंट्रोल नहीं होने के कारण चूहों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले भी मरीजों को चूहों द्वारा काटे जाने की घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी थीं। अब रिम्स प्रबंधन ने सबसे अधिक प्रभावित विभागों में प्राथमिकता के आधार पर पेस्ट कंट्रोल कराने और बाद में पूरे अस्पताल परिसर में अभियान चलाने का निर्णय लिया है।   विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेस्ट कंट्रोल पर्याप्त नहीं होगा। वार्डों में भोजन करने पर सख्ती, कचरे का समय पर निस्तारण, स्टोर रूम की नियमित सफाई, खाद्य सामग्री का सुरक्षित भंडारण और पाइपलाइन व केबल डक्ट के छिद्रों को सील करने जैसे उपाय भी जरूरी हैं। इन कदमों से ही अस्पताल में मरीजों, कर्मचारियों और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Morabadi Vending Zone

48 घंटे में दें जवाब, नहीं तो जाएगी दुकान ....... मोरहाबादी वेंडिंग जोन में निगम ने 80 दुकानदारों को दिया नोटिस

Ranchi Gumla Highway Accident

रांची-गुमला हाईवे पर भीषण टक्कर, बोलेरो और ऑटो पलटे, 13 घायल

Bokaro Theft

बोकारो में चोरी का अनोखा तरीका, सेल कर्मी के घर से 3.5 लाख की नकदी और जेवरात उड़ाए

Encroachment Drive Ranchi
रांची में अतिक्रमण पर सख्त हुआ नगर निगम, छोटा तालाब और सरकारी जमीनों पर चला निरीक्षण अभियान

रांची। रांची नगर निगम ने शहर में अतिक्रमण हटाने और सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने शुक्रवार को भू-संपदा शाखा के अधिकारियों के साथ वार्ड-22 और वार्ड-4 के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क पर किए गए अतिक्रमण को जल्द हटाने और चिरौंदी स्थित सरकारी भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।   अवैध कब्जे वाली जमीन का होगा इन-सीटू डेवलपमेंट निरीक्षण की शुरुआत वार्ड-22 स्थित अमन कम्युनिटी हॉल के पास निगम की करीब 34 डिसमिल सरकारी भूमि से हुई। जांच में पाया गया कि इस जमीन पर अवैध रूप से झुग्गी-झोपड़ियां बनाकर कब्जा किया गया है। अपर नगर आयुक्त ने अधिकारियों को इस भूमि के लिए इन-सीटू डेवलपमेंट (स्थल पर पुनर्विकास) का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि जमीन का उपयोग जनहित और शहर के विकास कार्यों के लिए किया जा सके।   छोटा तालाब के आसपास चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क किनारे अतिक्रमण भी पाया गया। इस पर नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम को जल्द विशेष अभियान चलाकर पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी।   चिरौंदी में बनेगी जनउपयोगी विकास योजना निरीक्षण के क्रम में वार्ड-4 के चिरौंदी स्थित ओल्ड एज होम के पास लगभग एक एकड़ जीएम-खास सरकारी भूमि का भी जायजा लिया गया। अपर नगर आयुक्त ने अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार की जाए। इसमें सामुदायिक सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।   निरीक्षण के दौरान संबंधित वार्ड पार्षद, नगर प्रबंधक, भू-संपदा शाखा तथा अभियंत्रण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। नगर निगम का कहना है कि शहर में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
JFWC Exam Special Train

परीक्षार्थियों को राहत! JFWC एग्जाम के लिए रांची रेल मंडल चलाएगा स्पेशल ट्रेनें

Muri & Piska

पिस्का और मुरी स्टेशन का बदला स्वरूप, आधुनिक सुविधाओं से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

Ranchi Flyover

रांची में 3000 करोड़ से बनेंगे 10 नए फ्लाईओवर

0 Comments

Top week

Today Horoscope
राष्ट्रीय

Today Horoscope: आज का राशिफल 13 जुलाई 2026, सोमवार

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?