रांची। रांची के हरिहर सिंह रोड पर स्थित प्रीति ज्वेलर्स में मंगलवार शाम 6:37 बजे 3 बाइक सवार अपराधियों ने सरेआम लूट की वारदात को अंजाम दिया। दुकान संचालक सुबोध कुमार हैं। दुकानदार के अनुसार दो अपराधी दुकान के घुसे, जबकि एक बाहर बाइक पर इंतजार कर रहा था। अंदर घुसे अपराधियों ने हथियार दिखाते हुए उन्हें बैठने की धमकी दी और काउंटर से चांदी के आभूषण व नकदी निकालने लगे।
दुकानदार को थप्पड़ा माराः दुकानदार ने इसका विरोध किया तो अपराधियों ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद करीब 2 लाख रुपए की चांदी और 20 हजार रुपए लूट लिए। फिर दोनों अपराधी पैदल बाहर निकले और कुछ दूरी पर खड़े तीसरे साथी के साथ बाइक पर सवार होकर मोरहाबादी की ओर फरार हो गए।
अपराधी दुकान संचालक का मोबाइल भी लूटकर ले गए। घटना के बाद मौके से गुजर रहे बरियातू थाना प्रभारी की गाड़ी को दुकानदार ने हाथ देकर रुकवाया और जानकारी दी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं, लेकिन अपराधियों ने हेलमेट पहन रखा था, जिससे चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पाकुड़। पाकुड़ जिले में एक दर्दनाक हादसे में युवक ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना नगर थाना क्षेत्र की है, जहां सोना जोड़ी निवासी शाहनवाज अंसारी लापरवाही के कारण हादसे का शिकार हो गया। समय रहते Railway Protection Force (आरपीएफ) की तत्परता से उसकी जान बच सकी। मालगाड़ी पर चढ़ने के दौरान हुआ हादसा मिली जानकारी के अनुसार, युवक प्लेटफॉर्म नंबर दो पर खड़ी ट्रेन पकड़ने के लिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश कर रहा था। वह एक मालगाड़ी पर चढ़कर दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचना चाहता था। इसी दौरान मालगाड़ी अचानक चल पड़ी, जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आरपीएफ ने दिखाई तत्परता घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना समय गंवाए घायल युवक को सोना जोड़ी सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण बेहतर इलाज के लिए उसे पश्चिम बंगाल रेफर कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, समय पर सहायता मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी। सुविधाओं के बावजूद जोखिम रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिससे प्लेटफॉर्म बदलना आसान हो जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग जल्दबाजी और लापरवाही में जोखिम भरे तरीके अपनाते हैं। जागरूकता की जरूरत यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों से सुरक्षित तरीकों का पालन करने की अपील करता है, ताकि इस तरह के हादसों से बचा जा सके।
रांची। रांची के मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत मुंडाधौड़ा गांव में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC ने ली है। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में घटना को अंजाम देने का दावा किया गया है और साथ ही इलाके में सक्रिय ठेकेदारों व ट्रांसपोर्टरों को चेतावनी भी दी गई है। प्रेस विज्ञप्ति में संगठन का दावा जारी बयान में कहा गया है कि सुबह करीब 6 बजे लिपटर और पिपरवार क्षेत्र के कांटा घर के पास फायरिंग की गई, जिसमें वसुदेव गंगू को गोली लगी। संगठन ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में काम करने वाले कुछ ट्रांसपोर्टर, डंप कमेटी और अन्य ठेकेदार उन्हें नजरअंदाज कर रहे थे, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। रंगदारी और धमकी के आरोप भी जुड़े घटना के दौरान अपराधियों ने कथित रूप से धमकी दी कि “पैसा नहीं दोगे तो इसी तरह होता रहेगा”, जिससे मामले को रंगदारी से भी जोड़ा जा रहा है। संगठन ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कोयलांचल क्षेत्र के ट्रक मालिकों, ड्राइवरों, ठेकेदारों और ईंट भट्ठा संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिना संगठन से संपर्क किए कोई काम न करें, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। नसीम खान के घर पर हुई थी फायरिंग स्थानीय ग्रामीण नसीम खान के घर पर गुरुवार सुबह करीब 6:05 बजे दो मोटरसाइकिल सवार अपराधियों ने चार राउंड गोली चलाई थी। नसीम खान पेशे से ड्राइवर हैं और उन्होंने किसी भी पुराने विवाद से इनकार किया है। अचानक हुई इस घटना से गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस जांच और सुरक्षा बढ़ाई गई घटना की जानकारी मिलते ही मैक्लुस्कीगंज पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की है और प्रेस विज्ञप्ति की सत्यता की भी जांच कर रही है। फिलहाल इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संदिग्धों की तलाश जारी है।
झारखंड में बीते कुछ दिनों से जारी बारिश ने जहां लोगों को राहत दी थी, वहीं अब मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अब तेज गर्मी और हीटवेव (लू) की स्थिति बनने जा रही है। 10 अप्रैल से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है और कई इलाकों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। किन जिलों में कैसा रहेगा तापमान? मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तापमान इस प्रकार रहने की संभावना है: संथाल परगना क्षेत्र (देवघर, दुमका, धनबाद, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज): अधिकतम तापमान: 34°C न्यूनतम तापमान: 19°C उत्तर-पश्चिम और मध्य झारखंड (कोडरमा, चतरा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, रांची): अधिकतम तापमान: 34°C न्यूनतम तापमान: 18°C दक्षिणी झारखंड (खूंटी, गुमला, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा): अधिकतम तापमान: 36°C न्यूनतम तापमान: 19°C विशेष रूप से पश्चिम सिंहभूम में तापमान 36°C तक पहुंचने की संभावना है, जहां तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है। क्यों बढ़ रही है गर्मी? मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश का दौर खत्म होते ही आसमान साफ हो गया है, जिससे सूरज की तीव्रता सीधे जमीन पर पड़ रही है। इसके कारण तापमान में अचानक उछाल देखने को मिल रहा है और हीटवेव की स्थिति बन रही है। हीटवेव को लेकर अलर्ट राज्य के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में ‘लू’ चलने की संभावना है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बचाव के लिए क्या करें? घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल जरूर रखें धूप से बचने के लिए छाता या टोपी का इस्तेमाल करें ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें और खुद को हाइड्रेटेड रखें दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें