झारखंड

झारखंड का आम्रपाली आम पहुंचा दुबई, लूलू मॉल में बिक रहा महिला किसानों की मेहनत का फल

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Jharkhand Amrapali Mango
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रांची। झारखंड का प्रसिद्ध आम्रपाली आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहा है। ग्रामीण विकास विभाग की पहल पर देवघर और गुमला जिले की महिला किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) द्वारा तैयार दो टन आम्रपाली आम की पहली खेप दुबई भेजी गई है। यह आम दुबई के प्रतिष्ठित लूलू मॉल में बिक्री के लिए उपलब्ध है और अपनी मिठास तथा गुणवत्ता के कारण ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इससे पहले झारखंड के आम्रपाली आम की खेप लंदन और इटली जैसे देशों तक भी पहुंच चुकी है।

 

बिरसा हरित ग्राम योजना का मिला सकारात्मक परिणाम


ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, देवघर की मोहनपुर आजीविका महिला किसान प्रोड्यूसर सोसायटी और गुमला की गुमला रायडीह एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा एमवीएम बघिमा पालकोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित बागानों में इस आम का उत्पादन किया है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के माध्यम से इन आमों का निर्यात किया गया। यह उपलब्धि महिला किसानों और कृषि आधारित आजीविका मॉडल की सफलता का उदाहरण मानी जा रही है।

 

'पलाश' ब्रांड ने दिलाई नई पहचान


जेएसएलपीएस राज्यभर में स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता आधारित प्रसंस्करण और आधुनिक विपणन से जोड़ने का कार्य कर रहा है। 'पलाश' ब्रांड के तहत लगाए गए बिक्री स्टॉलों ने स्थानीय बाजार में आम्रपाली आम को पहचान दिलाई, जिसके बाद अब इसे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में सफलता मिली है। इससे महिला किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ झारखंड के कृषि उत्पादों को भी नई पहचान मिल रही है।

 

सरकार का लक्ष्य वैश्विक बाजार से जोड़ना


ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य की मेहनतकश महिला किसानों को दिया। उन्होंने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आजीविका का मजबूत माध्यम बनी है। सरकार का लक्ष्य झारखंड की महिला किसानों के उत्पादों को दुनिया के अधिक से अधिक देशों तक पहुंचाना और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़कर उनकी आय में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करना है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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हेमंत सोरेन की मौजूदगी में दिल्ली में वैश्विक निवेशकों का मंथन, नई औद्योगिक नीति पर होगी चर्चा

रांची। झारखंड में औद्योगिक विकास और निवेश को नई गति देने के उद्देश्य से 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में दो दिवसीय ग्लोबल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के उद्योगपति, निवेशक, टेक्सटाइल विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। 9 जुलाई को आयोजित विशेष फीडबैक सत्र की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। इस दौरान नई औद्योगिक नीतियों पर सुझाव लेकर उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी।   निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार हो रही नई नीतियां राज्य सरकार ने झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 और झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति-2026 का प्रारूप सार्वजनिक किया है। इन नीतियों का उद्देश्य झारखंड को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाना, औद्योगिक ढांचे को मजबूत करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। दोनों नीतियों के ड्राफ्ट झारखंड सिंगल विंडो पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए हैं, जहां उद्योग जगत, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं।   बड़ी कंपनियों के साथ होगी अहम बैठक कार्यक्रम में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, एलटीआई माइंडट्री, कॉग्निजेंट, एक्सेंचर, आईबीएम इंडिया और कैपजेमिनी इंडिया जैसी आईटी कंपनियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और ग्रासिम इंडस्ट्रीज सहित कई प्रमुख औद्योगिक समूह भी कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।   एमओयू और नई रियायतों पर रहेगा फोकस सरकार को उम्मीद है कि इस परामर्श कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे, जिससे राज्य में निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन, विनिर्माण और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में नई रियायतों और प्रोत्साहनों पर भी विचार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य उद्योग-अनुकूल नीतियों के माध्यम से झारखंड को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल करना और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

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रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले की 3 लाख 66 हजार 664 महिला लाभुकों के बैंक खातों में अप्रैल से जून 2026 तक की तीन माह की सम्मान राशि एकमुश्त हस्तांतरित कर दी गई है। आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए प्रत्येक महिला के खाते में 7,500 रुपये भेजे गए हैं। इस मद में जिला प्रशासन ने कुल 274 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान किया है।   महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी पहल रांची जिला प्रशासन के अनुसार, योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देना है। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता बनी है और लाभुकों को समय पर योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार का मानना है कि इस योजना से महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।   कांके में सबसे ज्यादा लाभुक, कुछ क्षेत्रों में भुगतान जारी जिले के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है। सबसे अधिक 31,094 लाभुक कांके प्रखंड में हैं। इसके अलावा टाउन अर्बन क्षेत्र में 25,006, मांडर में 22,885, सिल्ली में 21,031, बेड़ो में 20,519, चान्हो में 19,299, रातू में 18,500, तमाड़ में 18,411, बुढ़मू में 17,688, नगड़ी में 17,755, ओरमांझी में 17,824 और नामकुम में 17,566 महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई है। वहीं बड़गाईं अंचल और ईटकी प्रखंड के लाभुकों का भुगतान अभी प्रक्रियाधीन है।   बैंक खाते और आधार अपडेट रखने की अपील रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि यह योजना महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शेष पात्र महिलाओं के खातों में भी जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिला प्रशासन ने लाभुकों से बैंक खाते की जानकारी और आधार लिंकिंग अद्यतन रखने की अपील की है, ताकि भविष्य की किस्तें बिना किसी बाधा के सीधे उनके खातों में पहुंच सकें। शिकायत या जानकारी के लिए लाभुक "अबुआ साथी" व्हाट्सएप नंबर 9430328080 पर संपर्क कर सकते हैं।

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पश्चिमी सिंहभूम में जंगली मशरूम खाने से छह लोग बीमार, सभी की हालत स्थिर

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली मशरूम का सेवन करने से छह लोगों की तबीयत बिगड़ गई। सभी मरीजों को तुरंत चाईबासा सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब तीन घंटे तक लगातार इलाज किया। समय पर उपचार मिलने के कारण सभी मरीजों की हालत अब स्थिर है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंजनबेड़ा गांव निवासी चंद्र मोहन लोहार और उनकी पुत्री शांति लोहार ने बाजार से मशरूम खरीदकर घर में सब्जी बनाई थी। भोजन करने के करीब आधे घंटे बाद दोनों को उल्टी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगी। परिजनों ने बिना देर किए दोनों को चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।   इसी तरह राजनगर थाना क्षेत्र के मिंडकी गांव स्थित भगवती स्टोन क्रशर में कार्यरत चार कर्मचारी—नरेश महतो, दीपक कुमार, बुल्लू कुमार और शत्रुघ्न कुमार ने खेत से तोड़े गए मशरूम की सब्जी खाई थी। कुछ ही देर बाद चारों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें भी तत्काल सदर अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार है।    डॉ. ए.जी. प्रसाद ने बताया मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. ए.जी. प्रसाद ने बताया कि सभी मरीज समय पर अस्पताल पहुंच गए, जिससे उनकी स्थिति गंभीर होने से बच गई। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में जंगलों और खेतों में उगने वाले कई मशरूम देखने में सामान्य लगते हैं, लेकिन उनमें से कई प्रजातियां अत्यंत विषैली होती हैं। इनके सेवन से उल्टी, दस्त, चक्कर, बेहोशी के साथ लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर जान का भी खतरा रहता है।   डॉक्टरों ने लोगों से क्या अपील की डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि बरसात के दौरान जंगल या खेतों से मिले अज्ञात मशरूम का सेवन बिल्कुल न करें। यदि मशरूम खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता लें। विशेषज्ञों ने केवल प्रमाणित और सुरक्षित स्रोत से खरीदे गए मशरूम का ही सेवन करने की सलाह दी है, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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